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                <title>Norway - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ब्राजील को हराकर इतिहास रचने वाले कोच स्टॉल सोलबाकेन की प्रेरणादायक वापसी की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[25 साल पहले सात मिनट तक थम गई थी दिल की धड़कन, 26 घंटे कोमा में रहने के बाद मैदान से दूर हुए; अब कोच के रूप में नॉर्वे को पहली बार फुटबॉल विश्व कप क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/the-inspirational-comeback-story-of-coach-stoll-solbakken-who-created/article-58101"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/stale-solbakken.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फुटबॉल विश्व कप में नॉर्वे की ब्राजील पर जीत को इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील को हराकर नॉर्वे ने पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई और इस ऐतिहासिक जीत के बाद सबसे ज्यादा चर्चा टीम के मुख्य कोच स्टॉल सोलबाकेन की हो रही है। मैच खत्म होने के बाद जब सोलबाकेन अपने परिवार से गले मिले तो वह सिर्फ जीत का जश्न नहीं था, बल्कि जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई जीतने वाले इंसान की भावुक वापसी भी थी। करीब 25 साल पहले उनका दिल सात मिनट तक धड़कना बंद हो गया था। डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी और उनका फुटबॉल करियर लगभग खत्म मान लिया गया था। आज वही शख्स दुनिया की सबसे बड़ी फुटबॉल प्रतियोगिता में अपनी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाकर इतिहास रच चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्टॉल सोलबाकेन की कहानी केवल फुटबॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य और दोबारा खड़े होने की मिसाल भी मानी जा रही है। वर्ष 2001 में खिलाड़ी रहते हुए अभ्यास सत्र के दौरान उन्हें गंभीर हृदयाघात हुआ। उस दौरान उनकी धड़कन करीब सात मिनट तक बंद रही और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की लगातार कोशिशों के बाद उनकी जान बच सकी, लेकिन वे लगभग 26 घंटे तक कोमा में रहे। बाद में सोलबाकेन ने कई इंटरव्यू में बताया था कि उस समय उनकी मां तक ने यह मान लिया था कि शायद अब वह वापस नहीं लौट पाएंगे। उन्होंने एक बार कहा था कि परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी तक करने लगा था। हालांकि किस्मत ने उन्हें दूसरा मौका दिया और वहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। स्वास्थ्य कारणों से उनका पेशेवर फुटबॉल करियर समय से पहले समाप्त हो गया, लेकिन उन्होंने खेल से दूरी नहीं बनाई। मैदान पर खिलाड़ी के रूप में लौटना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने कोचिंग को अपना नया रास्ता बनाया। धीरे-धीरे उन्होंने क्लब फुटबॉल में अपनी पहचान बनाई और डेनमार्क, इंग्लैंड तथा जर्मनी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। सबसे अधिक सफलता उन्हें एफसी कोपेनहेगन के साथ मिली, जहां उन्होंने कई घरेलू खिताब जीतकर खुद को सफल कोच के रूप में स्थापित किया। उनकी रणनीति, अनुशासन और युवा खिलाड़ियों को निखारने की क्षमता की काफी सराहना हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोलबाकेन का ब्राजील से जुड़ा रिश्ता भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1998 के फुटबॉल विश्व कप में वह नॉर्वे की टीम के अहम मिडफील्डर थे। उसी टूर्नामेंट के ग्रुप चरण में नॉर्वे ने तत्कालीन विश्व चैंपियन ब्राजील को 2-1 से हराकर इतिहास रचा था। उस जीत की बदौलत नॉर्वे पहली बार नॉकआउट दौर में पहुंचा था। लगभग तीन दशक बाद इतिहास ने फिर खुद को दोहराया, लेकिन इस बार सोलबाकेन मैदान पर खिलाड़ी नहीं बल्कि टीम के मुख्य कोच थे। उनकी रणनीति के दम पर नॉर्वे ने एक बार फिर ब्राजील को हराया और पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। इस उपलब्धि ने उन्हें नॉर्वे फुटबॉल के सबसे सफल कोचों की सूची में ला खड़ा किया है। दिसंबर 2020 में जब उन्हें नॉर्वे की राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब हालात आसान नहीं थे। टीम लगातार बड़े टूर्नामेंटों के लिए क्वालिफाई करने में नाकाम रही थी। नॉर्वे 2022 विश्व कप और 2024 यूरोपीय चैम्पियनशिप में जगह नहीं बना सका। उस दौरान सोलबाकेन की रणनीति पर सवाल भी उठे, लेकिन फुटबॉल संघ ने उन पर भरोसा बनाए रखा। इसी भरोसे का नतीजा रहा कि टीम ने 2026 विश्व कप क्वालिफायर में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी आठ मुकाबले जीते और सीधे मुख्य टूर्नामेंट में जगह बनाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व कप में भी नॉर्वे ने लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया। ग्रुप चरण पार करने के बाद टीम ने पहले आइवरी कोस्ट को हराया और फिर प्री-क्वार्टर फाइनल में ब्राजील जैसी मजबूत टीम को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस जीत में स्टार स्ट्राइकर इर्लिंग हालैंड ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ब्राजील के खिलाफ दो गोल दागे और पूरे टूर्नामेंट में अपने गोलों की संख्या सात तक पहुंचा दी। कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड और अलेक्जेंडर सोरलोथ जैसे खिलाड़ियों ने भी टीम के प्रदर्शन को नई ऊंचाई दी।  ब्राजील पर ऐतिहासिक जीत के बाद सोलबाकेन ने कहा कि यह सिर्फ उनकी टीम की जीत नहीं बल्कि पूरे नॉर्वे के फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा दिन है। उन्होंने खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि इस पीढ़ी ने देश की फुटबॉल पहचान बदल दी है। दूसरी ओर नॉर्वे के प्रशंसकों के लिए यह पल लंबे इंतजार के बाद मिली सबसे बड़ी खुशी बन गया। अब टीम की नजर क्वार्टर फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास को और आगे बढ़ाने पर है। स्टॉल सोलबाकेन की कहानी यह बताती है कि कठिन परिस्थितियां किसी इंसान की मंजिल तय नहीं करतीं। सात मिनट तक धड़कन रुकने और करियर खत्म होने जैसी स्थिति से निकलकर विश्व कप में इतिहास रचने तक का उनका सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। आज उनकी पहचान सिर्फ एक सफल कोच के रूप में नहीं, बल्कि उस इंसान के रूप में भी की जा रही है जिसने जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई जीतकर असंभव को संभव कर दिखाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:45:59 +0530</pubDate>
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                <title>फ्रांस और मैक्सिको ने राउंड ऑफ-16 में मारी बाजी, एमबाप्पे का डबल गोल चमका</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से हराया, मैक्सिको ने 40 साल बाद नॉकआउट मुकाबला जीता, जीत के जश्न में दो प्रशंसकों की मौत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/6a44f365dc9be/article-57543"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/fifa-world-cup-(3).jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">फुटबॉल विश्व कप में बुधवार का दिन रोमांच, रिकॉर्ड और भावनात्मक पलों से भरपूर रहा। पिछले संस्करण की उपविजेता फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वीडन को 3-0 से हराकर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली। इस जीत के सबसे बड़े नायक स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे रहे, जिन्होंने दो शानदार गोल दागकर टीम को आसान जीत दिलाई। वहीं टूर्नामेंट के दूसरे बड़े मुकाबले में सह-मेजबान मैक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर 40 साल बाद विश्व कप के नॉकआउट चरण में जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल बन गया, लेकिन खुशी का यह पल दो फुटबॉल प्रशंसकों की मौत की दुखद खबर से भी जुड़ गया। न्यू जर्सी में खेले गए मुकाबले में फ्रांस ने शुरुआत से ही स्वीडन पर दबाव बनाए रखा। फ्रांसीसी टीम ने पूरे मैच के दौरान आक्रामक खेल दिखाया और लगातार स्वीडिश डिफेंस पर हमले किए। पहले हाफ के आखिर में किलियन एमबाप्पे ने गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद दूसरे हाफ में ब्रैडली बारकोला ने शानदार गोल करते हुए बढ़त को दोगुना कर दिया। मैच के अंतिम चरण में एमबाप्पे ने अपना दूसरा गोल दागकर फ्रांस की 3-0 की जीत सुनिश्चित कर दी। इस जीत के साथ फ्रांस ने यह भी साबित कर दिया कि वह एक बार फिर खिताब की मजबूत दावेदार टीमों में शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमबाप्पे का यह प्रदर्शन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। उन्होंने इस विश्व कप में तीसरी बार एक ही मैच में दो गोल करने का कारनामा किया और टूर्नामेंट में अपने कुल गोलों की संख्या छह तक पहुंचा दी। इसके साथ ही उन्होंने इस संस्करण में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली। इतना ही नहीं, विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में एमबाप्पे के कुल गोलों की संख्या अब 10 हो गई है, जिससे उन्होंने ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ियों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। विश्व कप इतिहास में उनके कुल 18 गोल हो चुके हैं और अब वह मेसी के रिकॉर्ड से सिर्फ एक गोल पीछे हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा फॉर्म को देखते हुए वह इस टूर्नामेंट में कई नए रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।फ्रांस की जीत में मिडफील्ड और अटैक के बीच शानदार तालमेल भी देखने को मिला। माइकल ओलिसे ने दो गोल में अहम असिस्ट दिए और पूरे मैच में कई बेहतरीन मौके बनाए। फ्रांस ने कुल 25 शॉट लगाए, जबकि स्वीडन केवल सात प्रयास ही कर सका। गेंद पर नियंत्रण और आक्रामक रणनीति के दम पर फ्रांसीसी टीम ने मैच पर पूरी तरह कब्जा बनाए रखा। अब टीम का अगला मुकाबला 5 जुलाई को पैराग्वे से होगा, जहां उसकी नजर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने पर रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, मैक्सिको ने भी इतिहास रचते हुए इक्वाडोर को 2-0 से हराकर 40 साल बाद विश्व कप के नॉकआउट चरण में जीत हासिल की। मैच की शुरुआत से ही मैक्सिको ने आक्रामक खेल दिखाया। जूलियन क्विन्योनेस ने 22वें मिनट में पहला गोल कर टीम को बढ़त दिलाई, जबकि राउल जिमेनेज ने 31वें मिनट में दूसरा गोल दागकर जीत लगभग तय कर दी। इंजरी टाइम में इक्वाडोर के खिलाड़ी पिएरो हिंकापिए को रेड कार्ड भी दिखाया गया, जिससे उनकी वापसी की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मैक्सिको की इस ऐतिहासिक जीत के बाद देशभर में लाखों फुटबॉल प्रशंसक सड़कों पर उतर आए। राजधानी सहित कई शहरों में लोगों ने झंडे लहराए, आतिशबाजी की और पूरी रात जश्न मनाया। हालांकि इस खुशी के बीच दुखद खबर भी सामने आई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारी भीड़ और अफरातफरी के दौरान दम घुटने से दो प्रशंसकों की मौत हो गई। इस घटना ने जीत के उत्साह को गहरे दुख में बदल दिया। प्रशासन ने लोगों से संयम बरतने और सुरक्षित तरीके से जश्न मनाने की अपील की है। मैक्सिको की यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि टीम ने 1986 के बाद पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में कोई मुकाबला जीता है। इसके बाद 1994, 1998, 2002, 2006, 2010, 2014 और 2018 विश्व कप में उसे लगातार नॉकआउट चरण में हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 2022 विश्व कप में टीम ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई थी। अब उसका अगला मुकाबला इंग्लैंड और कांगो डीआर के बीच होने वाले मैच की विजेता टीम से होगा। इसी बीच नॉर्वे ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए आइवरी कोस्ट को 2-1 से हराकर पहली बार विश्व कप के नॉकआउट दौर में जीत दर्ज की। टीम के लिए एरलिंग हालैंड ने 86वें मिनट में निर्णायक गोल किया। इससे पहले एंटोनियो नुसा ने पहला गोल किया था, जबकि आइवरी कोस्ट की ओर से अमाद डियालो ने बराबरी का गोल दागा। अब नॉर्वे का सामना पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील से होगा, जिसे टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।</p>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:45:29 +0530</pubDate>
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