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                <title>OnlineFraud - दैनिक जागरण</title>
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                <description>OnlineFraud RSS Feed</description>
                
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                <title>डेटा एंट्री जॉब के नाम पर छात्र से 44 हजार की ठगी, 8 बार कराए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[युवती ने फोन कर चयन होने का दावा किया, इंटरव्यू, सर्विस चार्ज और जीएसटी के नाम पर ऑनलाइन पैसे जमा कराए; पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/in-the-name-of-data-entry-job-a-student-was/article-57865"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/indore-job-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर में ऑनलाइन जॉब फ्रॉड का एक और मामला सामने आया है, जहां नौकरी की तलाश कर रहे एक छात्र को डेटा एंट्री जॉब दिलाने का झांसा देकर करीब 44 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। आरोपियों ने खुद को एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा बताते हुए पहले फोन पर संपर्क किया और फिर अलग-अलग चरणों में चयन प्रक्रिया, इंटरव्यू, सर्विस चार्ज और जीएसटी के नाम पर पैसे जमा करवाते रहे। जब काफी रकम जमा कराने के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही जमा की गई राशि वापस हुई, तब छात्र को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एमआईजी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल करने वाले लोग किस नेटवर्क से जुड़े थे और जिन बैंक खातों में पैसे जमा कराए गए, उनका इस्तेमाल किन लोगों ने किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी राजेश पाटीदार ने शिकायत में बताया कि 17 जून को उसके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाली युवती ने अपना नाम अनुष्का बताया और कहा कि उसने जिस नौकरी के लिए आवेदन किया था, उसमें उसका चयन हो गया है। बातचीत के दौरान युवती ने राजेश से कुछ व्यक्तिगत जानकारी और शैक्षणिक विवरण मांगा। इसके बाद उसने कहा कि डेटा एंट्री की नौकरी के लिए उसे शॉर्टलिस्ट किया गया है और जल्द ही टेलीफोनिक इंटरव्यू लिया जाएगा। युवती ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक रेफरेंस आईडी भी मांगी और पूरी प्रक्रिया को सामान्य भर्ती प्रक्रिया की तरह पेश किया, जिससे छात्र को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार बातचीत का तरीका इतना भरोसेमंद था कि उसे लगा कि वास्तव में किसी कंपनी से संपर्क किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुछ समय बाद युवती ने राजेश से कहा कि चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए 1,800 रुपये एक बैंक खाते में जमा करने होंगे। उसने यह भरोसा भी दिया कि इस राशि में से केवल 50 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में काटे जाएंगे और बाकी पैसे चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दिए जाएंगे। शिकायतकर्ता ने बताए गए खाते में राशि ट्रांसफर कर दी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को इंटरव्यू टीम का सदस्य बताया। उसने कहा कि इंटरव्यू मोबाइल पर ही लिया जाएगा और उसके लिए तैयार रहना होगा। इंटरव्यू जैसी बातचीत के बाद उस व्यक्ति ने दावा किया कि राजेश का चयन हो गया है, लेकिन आगे की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए फिर से 1,800 रुपये जमा करने होंगे। छात्र ने यह रकम भी जमा कर दी। इसके कुछ समय बाद आरोपियों ने फिर संपर्क किया और इस बार 8,500 रुपये जमा कराने को कहा। हर बार यही कहा गया कि यह राशि बाद में पूरी तरह वापस कर दी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार इसके बाद भी पैसों की मांग बंद नहीं हुई। कभी सर्विस चार्ज तो कभी जीएसटी और अन्य प्रक्रिया शुल्क के नाम पर अलग-अलग रकम जमा कराई गई। आरोपियों ने कुल आठ अलग-अलग ट्रांजेक्शन करवाए और इस तरह करीब 44 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। जब लगातार पैसे जमा कराने के बावजूद नियुक्ति पत्र नहीं मिला और न ही कोई आधिकारिक दस्तावेज भेजा गया, तब राजेश को शक हुआ। उसने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने जवाब देना बंद कर दिया। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गया है। उसने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और बाद में पूरे मामले की लिखित शिकायत एमआईजी थाना पुलिस को दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाते हैं। वे आकर्षक वेतन, जल्दी जॉइनिंग और आसान चयन प्रक्रिया का लालच देकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, ट्रेनिंग चार्ज, जीएसटी या अन्य शुल्क के नाम पर पैसे मांगते हैं। कई बार फर्जी इंटरव्यू भी कराए जाते हैं ताकि पीड़ित को किसी तरह का संदेह न हो। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि किसी भी कंपनी में नौकरी के नाम पर पहले पैसे जमा करने की मांग होने पर पूरी तरह सतर्क रहें। किसी भी भर्ती प्रक्रिया की जानकारी संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से जरूर सत्यापित करें। यदि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा बैंक खाते या यूपीआई के माध्यम से पैसे जमा कराने का दबाव बनाया जाए तो तुरंत सावधानी बरतें और किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले जांच करें।</p>
<p style="text-align:justify;">एमआईजी पुलिस ने बताया कि मामले में विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जिन बैंक खातों में पैसे भेजे गए हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है और कॉल करने वाले मोबाइल नंबरों की भी तकनीकी जांच की जा रही है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से डिजिटल ट्रेल खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके। पुलिस का कहना है कि यदि समय रहते शिकायत दर्ज कराई जाती है तो कई मामलों में राशि को फ्रीज कराने की संभावना भी रहती है। इसलिए किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:51 +0530</pubDate>
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                <title>WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार की सख्ती, मेटा को नोटिस जारी कर तीन दिन में मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने मेटा से तीन दिन में जवाब मांगा, ऑनलाइन ठगी और फर्जी पहचान के खतरे के चलते फीचर पर रोक।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/governments-strictness-on-username-feature-of-whatsapp-issued-notice-to/article-57609"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/whatsapp-username-feature.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में डिजिटल सुरक्षा को लेकर सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के प्रस्तावित ‘यूजरनेम’ फीचर पर केंद्र सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है और इसकी मूल कंपनी मेटा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सरकार का कहना है कि यदि यह फीचर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लॉन्च किया गया तो देश में ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान से जुड़े साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से मेटा से तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा गया है। जब तक सरकार उसके जवाब से संतुष्ट नहीं होती, तब तक इस फीचर को भारत में शुरू करने की अनुमति नहीं मिलेगी। सरकार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग सुविधा साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। अभी तक WhatsApp पर किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका मोबाइल नंबर जरूरी होता है, जिससे पहचान का एक आधार मौजूद रहता है। लेकिन यदि केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क करने की सुविधा मिलती है तो अपराधियों के लिए अपनी असली पहचान छिपाना आसान हो जाएगा। इससे लोगों को फर्जी पहचान के जरिए निशाना बनाने का खतरा काफी बढ़ सकता है। नोटिस में सरकार ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि जब कंपनी को पहले से इस बात की जानकारी है कि इस फीचर का दुरुपयोग ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों में किया जा सकता है, तब भी इसे लॉन्च करने की तैयारी क्यों की जा रही है। सरकार ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि इस फीचर से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन होता है तो मेटा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। कंपनी को इन सभी बिंदुओं पर लिखित और विस्तृत जवाब देना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की सबसे बड़ी चिंता डिजिटल अरेस्ट जैसे तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अपराधियों ने खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या बैंक अधिकारी बताकर लोगों को फोन या वीडियो कॉल के जरिए डराया और लाखों रुपये की ठगी की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूजरनेम के जरिए आसानी से लोगों तक पहुंच बनाई जा सकेगी तो इस तरह के अपराधों को अंजाम देना और आसान हो सकता है। फर्जी पहचान भी सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण है। यूजरनेम फीचर आने के बाद कोई भी व्यक्ति किसी प्रसिद्ध कंपनी, सरकारी संस्था या लोकप्रिय व्यक्ति के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकता है। आम उपयोगकर्ता के लिए असली और नकली अकाउंट की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मजबूत सत्यापन प्रणाली नहीं बनाई गई तो इसका दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो सकता है।हाल के वर्षों में भारत में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फिशिंग लिंक, नकली निवेश योजनाएं, बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी ठगी और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराध पहले से ही बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में सरकार किसी भी ऐसे फीचर को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतना चाहती है, जिससे अपराधियों को नया माध्यम मिल सके। यही वजह है कि यूजरनेम फीचर को लेकर पहले सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने का फैसला लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूजरनेम फीचर कई मामलों में उपयोगी साबित हो सकता है। इससे उपयोगकर्ताओं को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना दूसरे लोगों से संपर्क करने की सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रह सकती है। कई अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पहले से ही यूजरनेम आधारित प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फीचर को लागू करने से पहले मजबूत पहचान सत्यापन, रिपोर्टिंग सिस्टम और सुरक्षा नियंत्रण बेहद जरूरी हैं। WhatsApp की ओर से फिलहाल इस नोटिस पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि कंपनी सरकार के सवालों का जवाब तैयार कर रही है और सुरक्षा उपायों से जुड़े अपने प्रस्ताव भी पेश कर सकती है। यदि कंपनी सरकार को संतुष्ट करने में सफल रहती है तो भविष्य में कुछ अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधानों के साथ इस फीचर को मंजूरी मिल सकती है। फिलहाल इसकी लॉन्चिंग पर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार लगातार सख्त रुख अपनाती रही है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कई नए दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और साइबर अपराधों पर नियंत्रण रखना है। सरकार का मानना है कि नई तकनीकों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यदि उनसे आम लोगों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका हो तो पहले आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करना जरूरी है। आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सरकार के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। एक ओर नई तकनीक उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधाएं देती है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधी भी नई तकनीकों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी भी नए फीचर को लागू करने से पहले सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक माना जा रहा है। अब सभी की नजर मेटा के जवाब और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है, जिससे तय होगा कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर भारत में कब और किन शर्तों के साथ उपलब्ध हो सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 11:26:56 +0530</pubDate>
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