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                <title>Singhastha 2028 - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मालवा को विकास की नई रफ्तार, 5,017 करोड़ की उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना का होगा भूमि पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे 98.73 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन का शुभारंभ, 35 लाख लोगों और 62 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी मिलेगी मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-pace-of-development-for-malwa-bhoomi-pujan-of-5017/article-58373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-jaora-greenfield-fourlane.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास को नई गति देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को 5,017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क परियोजना का भूमि पूजन करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद मालवा क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। साथ ही व्यापार, उद्योग, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को भी इसका व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। करीब 98.73 किलोमीटर लंबी यह आधुनिक फोरलेन सड़क उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगी। इससे प्रदेश के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मालवा क्षेत्र के आर्थिक विकास और निवेश को नई दिशा देने वाली आधारभूत परियोजना साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सड़क का निर्माण मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा किया जाएगा। परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए दो वर्ष का लक्ष्य तय किया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। सड़क के दोनों ओर आधुनिक यातायात सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे भविष्य की बढ़ती ट्रैफिक जरूरतों को भी आसानी से पूरा किया जा सके। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना उज्जैन दक्षिण, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट और जावरा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसके दायरे में आने वाले लगभग 62 गांवों के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध होगी। अनुमान है कि करीब 35 लाख नागरिक इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना को प्रदेश के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सड़क सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और तेज यातायात सुविधा उपलब्ध होगी। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी और उज्जैन की पहुंच पहले से अधिक आसान हो जाएगी। परियोजना के अंतर्गत केवल फोरलेन सड़क का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग सुविधाओं का भी समावेश होगा। इसमें तीन रेल ओवरब्रिज, नौ बड़े पुल, 26 मध्यम पुल तथा 417 पुलियों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा जावरा बायपास पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे इंटरचेंज से महू-नीमच फोरलेन तक दोनों ओर सर्विस रोड विकसित की जाएगी। इससे स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही अलग-अलग सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नई सड़क बनने से किसानों को सबसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने में समय कम लगेगा और परिवहन लागत में भी कमी आएगी। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही डेयरी, बागवानी और कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और नए उद्योगों के लिए निवेश का वातावरण मजबूत होगा। मालवा क्षेत्र पहले से ही कृषि, उद्योग और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। आधुनिक परिवहन सुविधाओं के जुड़ने से यहां औद्योगिक गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बाजार तक आसान पहुंच मिलने से प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।पर्यटन क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। उज्जैन विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने से महाकाल लोक, श्री महाकालेश्वर मंदिर और आसपास के अन्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा। इससे होटल, परिवहन, पर्यटन सेवाओं और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:29:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अमरकंटक, धार और सांची के विकास की नई योजना, आज सीएम करेंगे समीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[संस्कृति विभाग आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने तीन बड़े सांस्कृतिक प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रूपरेखा रखेगा, सिंहस्थ 2028 से पहले धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर रहेगा फोकस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%95--%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE--%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE/article-57616"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नए स्वरूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को संस्कृति विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने तीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रूपरेखा पेश करेगा। इनमें अमरकंटक में नर्मदा लोक, धार में सरस्वती लोक और सांची में बिखरे पड़े पुरातात्विक अवशेषों को एक ही परिसर में संग्रहित कर एक विशाल म्यूजियम विकसित करने की योजना शामिल है। अधिकारियों के अनुसार बैठक में इन परियोजनाओं की अवधारणा, संभावित स्वरूप और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही संस्कृति विभाग के विभिन्न कार्यों और चल रही परियोजनाओं की समीक्षा भी की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार इन योजनाओं को प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन और धार्मिक विरासत से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है। बैठक का सबसे बड़ा फोकस उन परियोजनाओं पर रहेगा जिन्हें सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन प्रोजेक्ट के पूरे होने से न केवल धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी बल्कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। अमरकंटक, जहां से पवित्र नर्मदा नदी का उद्गम होता है, वहां नर्मदा लोक विकसित करने की योजना लंबे समय से चर्चा में रही है। गंगा के बाद नर्मदा को देश की सबसे अधिक आस्था वाली नदियों में माना जाता है। ऐसे में सरकार यहां ऐसा सांस्कृतिक परिसर विकसित करना चाहती है, जहां नर्मदा से जुड़ी धार्मिक परंपराएं, इतिहास, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जा सके। </p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह धार में प्रस्तावित सरस्वती लोक भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। हाल के समय में भोजशाला को लेकर हुई गतिविधियों के बाद धार एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री पहले ही सरस्वती लोक के निर्माण की घोषणा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को व्यवस्थित तरीके से विकसित करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को यहां बेहतर सुविधाएं और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। अधिकारियों के अनुसार बैठक में सरस्वती लोक की अवधारणा और इसके संभावित स्वरूप पर भी विस्तार से प्रस्तुति दी जाएगी। सांची के लिए भी सरकार बड़ी योजना तैयार कर रही है। विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धरोहर के रूप में पहचान रखने वाले सांची में विभिन्न स्थानों पर बिखरे पुरातात्विक अवशेषों को एक स्थान पर संग्रहित कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पर्यटकों को प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही पुरातात्विक महत्व की कई दुर्लभ वस्तुओं का वैज्ञानिक संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।  बैठक में केवल इन तीन परियोजनाओं पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि प्रदेश के दो बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट राम वन पथ गमन और श्रीकृष्ण पाथेय का कॉन्सेप्ट प्रेजेंटेशन भी मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। सरकार की योजना भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मध्य प्रदेश के प्रमुख स्थलों को धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित करने की है। इसके जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों परियोजनाओं का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, ताकि सिंहस्थ 2028 से पहले इन पर तेजी से काम शुरू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">चित्रकूट में प्रस्तावित परिक्रमा पथ और भारत घाट के विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश की कई ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा भी मुख्यमंत्री करेंगे। भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय में लाइट एंड साउंड शो शुरू करने की योजना पर चर्चा होने की संभावना है। ग्वालियर किले में चल रहे संरक्षण कार्यों, आगा खान ट्रस्ट के सहयोग से हो रहे विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल है। इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा और लाल बाग पैलेस के भविष्य के संचालन, संरक्षण और 'अडॉप्टिव रियूज' की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। वहीं उज्जैन स्थित वीर दुर्गादास छतरी पर आने वाले पर्यटकों के लिए आधुनिक तकनीक आधारित 'इमर्सिव एक्सपीरियंस' विकसित करने के प्रस्ताव पर भी मंथन होगा। संस्कृति विभाग की यह समीक्षा बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश को सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, धार्मिक स्थलों का आधुनिक विकास और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। यदि इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जाता है तो मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन राज्यों में नई पहचान मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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