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                <title>Constable - दैनिक जागरण</title>
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                <title>शादी का झांसा देकर तीन साल तक दुष्कर्म का आरोप, बिलासपुर में आरक्षक गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पर हुई थी पहचान, युवती का आरोप- शादी का भरोसा देकर बनाए संबंध, बाद में खुद को शादीशुदा और दो बच्चों का पिता बताया; पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को भेजा जेल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/constable-arrested-in-bilaspur-accused-of-raping-for-three-years/article-57894"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/korba-murder-case-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक आरक्षक पर शादी का झांसा देकर युवती के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद आरोपी आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। युवती का आरोप है कि आरोपी ने पहले सोशल मीडिया के माध्यम से उससे दोस्ती की, फिर शादी का वादा कर करीब तीन वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए। जब उसने विवाह की बात को लेकर दबाव बनाया तो आरोपी ने खुद को पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का पिता बताते हुए शादी से इनकार कर दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इसके बाद आरोपी ने युवती को धमकाना शुरू कर दिया। मामला तखतपुर थाना क्षेत्र का है और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में 22 वर्षीय युवती की पहचान सोशल मीडिया के जरिए तखतपुर में पदस्थ आरक्षक सुमंत मिरी से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। युवती का आरोप है कि इसी दौरान आरक्षक ने उससे शादी करने का वादा किया और भरोसा दिलाया कि वह भविष्य में उससे विवाह करेगा। युवती का कहना है कि इसी भरोसे के आधार पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। शिकायत के मुताबिक आरोपी लगातार शादी का आश्वासन देता रहा, जिससे उसे विश्वास था कि दोनों का रिश्ता जल्द ही विवाह में बदल जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती का आरोप है कि यह सिलसिला करीब तीन साल तक चलता रहा। इस दौरान आरोपी आरक्षक अलग-अलग मौकों पर उससे मिलता रहा और हर बार शादी की बात दोहराता रहा। पुलिस के अनुसार, शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में आरक्षक का तबादला बिलासपुर पुलिस लाइन हो गया, लेकिन इसके बावजूद उसने युवती से संपर्क नहीं तोड़ा। वह उससे मिलता रहा और शादी का भरोसा देता रहा। युवती का कहना है कि उसे लंबे समय तक इस बात का पता नहीं था कि आरोपी पहले से विवाहित है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में नया मोड़ तब आया जब युवती ने शादी को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा। शिकायत के अनुसार, इस दौरान आरोपी ने बताया कि वह पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। युवती का आरोप है कि आरोपी ने यह तथ्य शुरुआत से उससे छिपाकर रखा था। जब उसे सच्चाई का पता चला तो उसने इसका विरोध किया और शादी के वादे की याद दिलाई। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया और उससे दूरी बनाने लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत में यह भी कहा गया है कि सच्चाई सामने आने के बाद आरोपी ने युवती को धमकाना शुरू कर दिया। लगातार मानसिक दबाव और कथित धमकियों से परेशान होकर युवती ने अंततः तखतपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी आरक्षक सुमंत मिरी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, बयान और अन्य कानूनी पहलुओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही उसके निलंबन की कार्रवाई भी नियमों के अनुसार की जा रही है। विभाग का कहना है कि यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आते हैं तो विभागीय नियमों के तहत स्वतंत्र जांच भी कराई जाती है। शादी का झांसा देकर बनाए गए संबंधों से जुड़े मामलों में जांच के दौरान परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों का विस्तार से परीक्षण किया जाता है। ऐसे मामलों में न्यायालय और जांच एजेंसियां प्रत्येक तथ्य का कानूनी आधार पर मूल्यांकन करती हैं। इसलिए मामले की अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 18:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायपुर में डायल-112 आरक्षक सस्पेंड, एक्सीडेंट कॉल पर देरी से पहुंचने पर कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[सिटी सेंटर मॉल के पास सड़क हादसे की सूचना पर समय पर नहीं पहुंचने और कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में आरक्षक निलंबित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/dial-112-constable-suspended-in-raipur-action-taken-on-late-arrival/article-57671"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/dial-112.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर में आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही का एक मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। डायल-112 सेवा में तैनात एक आरक्षक को सड़क दुर्घटना की सूचना मिलने के बावजूद समय पर मौके पर नहीं पहुंचने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। मध्य क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) उमेश प्रसाद गुप्ता ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए आरक्षक संदीप शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र (लाइन) रायपुर से संबद्ध कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आपातकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और भविष्य में भी इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला 30 जून 2026 की रात करीब 11 बजे का है। देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिटी सेंटर मॉल के सामने सर्विस रोड पर एक कार और बाइक के बीच भीषण सड़क हादसे की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली थी। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल डायल-112 की टीम को मौके पर भेजने के निर्देश दिए गए थे। इस आपातकालीन कॉल पर ड्यूटी में तैनात आरक्षक संदीप शर्मा को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया, लेकिन आरोप है कि वह निर्धारित समय पर वहां नहीं पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सड़क हादसे जैसी गंभीर घटना के बावजूद मौके पर पहुंचने में अनावश्यक देरी हुई। इस दौरान घायल लोगों को तत्काल सहायता मिलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर जांच कराई। जांच रिपोर्ट में आरक्षक की ओर से ड्यूटी के दौरान लापरवाही और अनुशासनहीनता के संकेत मिलने पर निलंबन की कार्रवाई की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि डायल-112 जैसी आपातकालीन सेवा का मुख्य उद्देश्य संकट की स्थिति में लोगों तक सबसे पहले सहायता पहुंचाना है। सड़क दुर्घटना, अपराध, आगजनी या अन्य आपातकालीन घटनाओं में हर मिनट की अहमियत होती है। ऐसे में यदि संबंधित कर्मचारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचता है तो इससे पीड़ितों की जान को भी खतरा हो सकता है। इसी कारण इस मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक आरक्षक संदीप शर्मा पर केवल देरी से पहुंचने का ही नहीं, बल्कि कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अमर्यादित आचरण का भी आरोप लगाया गया है। विभागीय नियमों के अनुसार सरकारी कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह ड्यूटी के दौरान पूरी जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करे। यदि कोई कर्मचारी इन मानकों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने डायल-112 सेवा की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की है। अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी आपातकालीन कॉल पर तत्काल रिस्पॉन्स सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कंट्रोल रूम और फील्ड स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है ताकि किसी भी घटना में राहत और बचाव कार्य में देरी न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">डायल-112 सेवा प्रदेश में पुलिस, फायर और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं तक लोगों की त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक इस सेवा के माध्यम से तुरंत मदद मांग सकते हैं। ऐसे में इस सेवा से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी काफी अधिक मानी जाती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए डायल-112 की कार्यक्षमता और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में डायल-112 के संचालन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। प्रत्येक इमरजेंसी कॉल के रिस्पॉन्स टाइम का रिकॉर्ड जांचा जाएगा और यदि कहीं भी लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि अनुशासन और समयबद्ध कार्रवाई ही पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी पहचान है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि ड्यूटी में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की है कि वे जनता की सुरक्षा और सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। विशेष रूप से सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आपातकालीन घटनाओं में त्वरित कार्रवाई कर लोगों की जान बचाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:37 +0530</pubDate>
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