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                <title>Mashhad - दैनिक जागरण</title>
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                <title>अली खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू, 14 महीने की पोती का छोटा ताबूत भी साथ रखा गया</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में लाखों लोगों ने दी श्रद्धांजलि, छह दिन तक चलेंगे अंतिम संस्कार कार्यक्रम; ईरान और इराक के कई शहरों से होकर गुजरेगी अंतिम यात्रा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ali-khameneis-funeral-procession-begins-small-coffin-of-14-month-old-granddaughter/article-57834"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला शनिवार से तेहरान में आधिकारिक रूप से शुरू हो गया। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में सुबह से ही हजारों लोग पहुंचने लगे। पूरे परिसर में शोक का माहौल दिखाई दिया और बड़ी संख्या में लोग अपने हाथों में ईरानी झंडे, धार्मिक प्रतीक और खामेनेई की तस्वीरें लेकर मौजूद रहे। समारोह के दौरान खामेनेई का ताबूत ईरान के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ मुख्य हॉल में लाया गया, जिसके ऊपर उनकी पहचान मानी जाने वाली काली पगड़ी भी रखी गई थी। इसी दौरान एक भावुक दृश्य तब सामने आया जब उनके परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों के ताबूत भी साथ रखे गए। इनमें 14 महीने की उनकी पोती जाहरा मोहम्मदी गोलपायेगानी का छोटा ताबूत भी शामिल था। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और कई लोग रोते हुए नजर आए। बताया जा रहा है कि फरवरी के अंत में हुए हमलों में खामेनेई के साथ परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी मारे गए थे। अंतिम संस्कार के पहले दिन श्रद्धांजलि देने वालों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरानी प्रशासन के अनुसार खामेनेई के पार्थिव शरीर को शुक्रवार को तेहरान लाया गया था। इसके बाद छह दिनों तक सार्वजनिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है ताकि देशभर से लोग अंतिम दर्शन कर सकें। राजधानी में तीन दिनों तक पार्थिव शरीर आम लोगों के लिए रखा जाएगा। प्रशासन का अनुमान है कि केवल तेहरान में ही अगले तीन दिनों के दौरान डेढ़ से दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि सेना और सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार निगरानी कर रही हैं। समारोह स्थल तक पहुंचने वाले सभी रास्तों पर कई स्तर की सुरक्षा जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी अस्थायी बदलाव किए गए हैं। लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं चलाई गई हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि समारोह में देश के कई वरिष्ठ राजनीतिक और धार्मिक नेता भी मौजूद रहे। सरकारी अधिकारियों के अलावा न्यायपालिका, संसद और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान कई धार्मिक अनुष्ठान किए गए और विशेष प्रार्थनाएं भी आयोजित हुईं। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग अपने परिवार के साथ अंतिम दर्शन के लिए घंटों तक कतार में खड़े रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवक भी लगातार लोगों की मदद करते दिखाई दिए। चिकित्सा सहायता केंद्र, पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी प्रशासन की ओर से की गई। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक अंतिम यात्रा केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को राजधानी की सड़कों पर विशाल अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद मंगलवार को पार्थिव शरीर को ईरान के धार्मिक महत्व वाले शहर क़ोम ले जाया जाएगा, जहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अगले दिन अंतिम यात्रा पड़ोसी देश इराक के कुछ पवित्र शहरों तक पहुंचेगी। वहां भी श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी और स्थानीय धार्मिक नेताओं की मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में गुरुवार को खामेनेई के पैतृक शहर मशहद में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इस पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था लगातार कड़ी रहेगी और हर चरण की निगरानी की जाएगी। लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए यात्रा मार्ग पर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मध्य पूर्व के मौजूदा हालात और हाल के घटनाक्रम के बीच इस अंतिम संस्कार पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंच चुके हैं और विभिन्न स्तरों पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और ड्रोन के जरिए भी निगरानी की जा रही है। अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:52:58 +0530</pubDate>
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                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मुजतबा, सुरक्षा एजेंसियों ने जताया इजराइली हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से बेटे मुजतबा खामेनेई को अंतिम संस्कार से दूर रहने की सलाह दी गई है, जबकि कई देशों के प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-mujtaba-will-not-attend-khameneis-funeral-security-agencies-expressed/article-57704"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि इजराइल की ओर से संभावित हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम लीडर के एक प्रतिनिधि के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के दौरान किसी भी तरह का हमला या सुरक्षा उल्लंघन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को फिलहाल सीमित रखने की सलाह दी गई है। पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि मुजतबा खामेनेई हमलों में घायल हो गए थे। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी और उसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर भी नजर नहीं आए। अब अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। ईरानी प्रशासन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी रणनीति पर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। बताया जा रहा है कि मशहद में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है और समारोह स्थल के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की ओर से भी अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी कर सकता है, हालांकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में लगातार तनाव भी बना रहा। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। धार्मिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा जोखिम पहले से अधिक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान का नया नेतृत्व इस संवेदनशील दौर में किस तरह आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय हालात पर इसका क्या असर पड़ता है। दूसरी ओर, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा को ही इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:03:25 +0530</pubDate>
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