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                            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में कारोबार को नई उड़ान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रिपरिषद ने विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा विधेयक के प्रारूप को दी स्वीकृति, निवेशकों को मिलेगी आसान प्रक्रिया, उद्योगों और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/new-udaan-for-business-in-chhattisgarh-ease-of-doing-business/article-58383"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-ease-of-doing-business-bill-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में निवेश, उद्योग और कारोबार को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां कारोबार को आसान बनाने के लिए इस तरह का व्यापक और आधुनिक विधेयक लागू होगा। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाना है, जिससे निवेशकों को बेहतर कारोबारी माहौल मिल सके। सरकार का मानना है कि किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में उद्योग और निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया आसान होगी, तो घरेलू और बाहरी निवेशक राज्य में निवेश करने के लिए अधिक उत्साहित होंगे। इसी सोच के साथ तैयार किए गए इस विधेयक में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे उद्योग लगाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होगी और सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय भी कम होगा। विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य अनावश्यक नियमों और जटिल प्रक्रियाओं को कम करना है। कई बार उद्योग स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेने में लंबा समय लग जाता है। इससे निवेशक परेशान होते हैं और कई परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं। नए कानून के लागू होने के बाद ऐसी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा ताकि कारोबार शुरू करने में अनावश्यक बाधाएं न आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस विधेयक में डीम्ड परमिशन की व्यवस्था भी शामिल की है। इसका अर्थ यह है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो कुछ मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने की समस्या कम होगी और उद्योगों को समय पर मंजूरी मिलने का रास्ता आसान होगा। विधेयक में स्व-प्रमाणीकरण (Self Certification) और तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third Party Verification) जैसे आधुनिक प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य उद्योगों पर अनावश्यक निरीक्षण और कागजी औपचारिकताओं का बोझ कम करना है। इससे उद्योगों को नियमों का पालन करते हुए भी अधिक सुविधा मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।इसके अलावा, जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली (Risk-Based Inspection) को भी लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत हर उद्योग का बार-बार निरीक्षण करने के बजाय केवल जोखिम के आधार पर जांच की जाएगी। इससे ईमानदारी से काम करने वाले उद्योगों को अनावश्यक निरीक्षण से राहत मिलेगी, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर प्रभावी निगरानी बनी रहेगी। सरकार ने विधेयक में दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने का भी प्रावधान किया है। कई मामलों में एक ही कार्य के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी जटिलताओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>LNG सप्लाई फिर हुई सामान्य, सरकार ने हटाए सभी आपातकालीन प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट बहाल होने के बाद केंद्र का बड़ा फैसला, उद्योगों को मिलेगी राहत और गैस आपूर्ति होगी सुचारु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lng-supply-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि एलएनजी का सबसे अधिक उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस एवं तेल के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति स्थिर है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से भारत के लिए एलएनजी कार्गो फिर से नियमित रूप से पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के चलते फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने वाले एलएनजी कार्गो को रोक दिया था या उन्हें अन्य देशों की ओर मोड़ दिया था। इस संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ लागू किया था। इसका उद्देश्य सीमित उपलब्ध गैस का प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखना था।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी सप्लाई से जुड़े प्रतिबंध हटाना सरकार का तीसरा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद दो अन्य आपातकालीन फैसले भी वापस ले चुकी है। पहले फैसले के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया था कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन अधिक करें ताकि घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें। अब इस निर्देश को समाप्त कर दिया गया है। दूसरे फैसले में बल्क उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अब ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और किसी प्रकार की अतिरिक्त पाबंदी की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। देश में कई उद्योग प्राकृतिक गैस पर आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग करते हैं। गैस की कमी के दौरान कई कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और उत्पादन घटाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब नियमित आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और कई उद्योगों का संचालन पहले की तरह सुचारु रूप से हो सकेगा। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, स्टील, सिरेमिक, कांच, टेक्सटाइल और अन्य गैस आधारित उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। इनमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया के देशों से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। विशेष रूप से कतर से आने वाली एलएनजी का अधिकांश परिवहन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक कदम उठाए थे। विभिन्न देशों से ईंधन आयात के विकल्प तलाशे गए, घरेलू भंडार का उपयोग किया गया और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया गया। एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है। उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में ₹2,246 करोड़ के निवेश को मंजूरी, 20 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[फार्मा कंपनियों के बड़े निवेश से औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी नई रफ्तार, करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/approval-of-investment-of-%E2%82%B9-2246-crore-in-pithampur-sez/article-57716"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pithampur-sez.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर को एक बार फिर बड़ी निवेश सौगात मिली है। पीथमपुर विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के दूसरे चरण में कुल 2,246 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इन निवेशों के जरिए प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPIDC) के अनुसार इन परियोजनाओं के शुरू होने से करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। निवेश प्रस्तावों को डेवलपमेंट कमिश्नर, एसईजेड की अध्यक्षता में आयोजित स्वीकृति समिति की वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली बैठक में मंजूरी दी गई। सभी नई परियोजनाएं पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में स्थापित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता और निर्यात गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति ने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं का सबसे बड़ा हिस्सा फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़ा है। कई प्रमुख दवा कंपनियां अपने उत्पादन का विस्तार करने के साथ नई इकाइयों की स्थापना भी करेंगी। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक विनिर्माण और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि फार्मा उद्योग में बढ़ता निवेश प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वीकृत प्रस्तावों में प्रमुख दवा कंपनी अजंता फार्मा का विस्तार शामिल है। कंपनी अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नई सुविधाओं का विकास करेगी। इसके अलावा फेलिक्स जेनेरिक्स और शंकर न्यूट्रिकॉन जैसी कंपनियां भी पीथमपुर एसईजेड में नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करेंगी। इन परियोजनाओं के शुरू होने से दवा निर्माण, पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण और सप्लाई चेन से जुड़े कई नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उद्योग विभाग का मानना है कि इन कंपनियों के आने से छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र माना जाता है। यहां पहले से ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा, केमिकल और विनिर्माण क्षेत्र की अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां संचालित हैं। बेहतर सड़क संपर्क, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और निर्यात के लिए उपलब्ध सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। विशेष आर्थिक क्षेत्र होने के कारण यहां उद्योगों को कई प्रशासनिक और व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं, जिससे निवेश आकर्षित करने में मदद मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एमपीआईडीसी का कहना है कि इन नई परियोजनाओं के शुरू होने के बाद पीथमपुर एसईजेड का निर्यात प्रदर्शन भी मजबूत होगा। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इन इकाइयों से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया जाएगा। इससे न केवल प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। निर्यात बढ़ने से प्रदेश की औद्योगिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यदि मध्य प्रदेश में आधुनिक दवा निर्माण इकाइयों का विस्तार होता है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा। नई इकाइयों के शुरू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इसके साथ ही परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रयास कर रही है। निवेशकों को सरल प्रक्रियाएं, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार नई परियोजनाएं स्वीकृत हो रही हैं। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश आने से प्रदेश में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों को भी नई संभावनाएं मिलेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:21 +0530</pubDate>
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