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                <title>Anti Corruption - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Anti Corruption RSS Feed</description>
                
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                <title>सीधी में लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: नामांतरण के बदले 3 हजार की रिश्वत लेते तहसील का माल जमादार रंगे हाथ गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई, कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर पकड़ा गया आरोपी; शिकायत के सत्यापन के बाद हुई कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/big-action-of-lokayukta-in-sidhi-tehsil-employee-arrested-red/article-58203"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lokayukta-rewa-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सीधी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त रीवा की टीम ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। गोपद बनास तहसील कार्यालय की नजारत एवं नकल शाखा में पदस्थ भृत्य (माल जमादार) दामोदर प्रसाद साकेत को पैतृक भूमि के नामांतरण के एवज में 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप किया। यह कार्रवाई बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित तहसील कार्यालय भवन के सामने की गई। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lokayukta-rewa-(1).mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">लोकायुक्त रीवा की इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय सहित पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया। जैसे ही कर्मचारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने की खबर फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी को मौके पर ही हिरासत में लेकर आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। शिकायतकर्ता नागेंद्र प्रसाद तिवारी, उम्र 66 वर्ष, ग्राम गाड़ा लोलर सिंह, तहसील गोपद बनास, जिला सीधी के निवासी हैं। उन्होंने अपनी पैतृक भूमि का वारिसान एवं वसीयत के आधार पर नामांतरण कराने के लिए मध्यप्रदेश ऑनलाइन लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन किया था। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे आवश्यक कार्रवाई के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bribery-case.mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता का आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ माल जमादार दामोदर प्रसाद साकेत ने नामांतरण आदेश तहसीलदार से करवाने के बदले 3 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। आरोपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना पैसे दिए नामांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस से करने का फैसला किया। नागेंद्र प्रसाद तिवारी ने 1 जुलाई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा पहुंचकर पुलिस अधीक्षक के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई और रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देशों के तहत उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। निरीक्षक नरेश बेहरा और निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया के नेतृत्व में टीम ने पूरी रणनीति तैयार की।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lokayukta-rewa.mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">बुधवार 8 जुलाई को शिकायतकर्ता तय योजना के अनुसार आरोपी से मिलने पहुंचे। जैसे ही आरोपी दामोदर प्रसाद साकेत ने शिकायतकर्ता से 3 हजार रुपए की रिश्वत ली, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद की गई। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पहले उसका तकनीकी और गोपनीय सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर ही ट्रैप की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई, जिसके बाद आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lokayukta-rewa-(2).mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लोकायुक्त संगठन समय-समय पर आम नागरिकों से भी अपील करता रहा है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी सरकारी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तत्काल लोकायुक्त को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। गौरतलब है कि नामांतरण, सीमांकन, नक्शा, प्रतिलिपि और राजस्व से जुड़े अन्य मामलों में रिश्वत की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में लोकायुक्त द्वारा लगातार ट्रैप कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। सीधी में हुई इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में भी हलचल देखी गई। लोकायुक्त टीम ने स्पष्ट किया है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 17:36:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भोपाल में नापतौल विभाग में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते रिटायर्ड इंस्पेक्टर गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर के इशारे पर पेट्रोल पंप संचालक से रिश्वत लेने पहुंचे रिटायर्ड निरीक्षक को लोकायुक्त पुलिस ने रंगेहाथ पकड़ा। मामले में डिप्टी कंट्रोलर को भी मुख्य आरोपी बनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-action-by-lokayukta-in-weights-and-measures-department-in/article-57755"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-lokayukta.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए नापतौल विभाग से जुड़े एक रिश्वतखोरी मामले का खुलासा किया। लोकायुक्त की टीम ने विभाग के रिटायर्ड निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि यह रकम विभाग के प्रभारी उप नियंत्रक (डिप्टी कंट्रोलर) नसीमुद्दीन के कथित निर्देश पर ली जा रही थी। कार्रवाई के बाद लोकायुक्त पुलिस ने नसीमुद्दीन को भी मामले का मुख्य आरोपी बनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार शिकायत भोपाल के एमपी नगर जोन-2 स्थित प्रगति पेट्रोल पंप के संचालक अमित सिंह बघेल ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नापतौल विभाग की ओर से उनके पेट्रोल पंप के खिलाफ दर्ज प्रकरण समाप्त करने और सील किए गए तीन नोजल दोबारा चालू कराने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पूरे मामले की निगरानी शुरू की और ट्रैप की योजना बनाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार शुरुआत में चार लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में बातचीत के दौरान सौदा साढ़े तीन लाख रुपये में तय हुआ। तय राशि की पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये देने का समय और स्थान निश्चित किया गया। लोकायुक्त की टीम पहले से ही पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थी। गुरुवार को फरियादी को पहले मनोहर डेयरी बुलाया गया। कुछ देर बाद रिटायर्ड निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल ने फोन कर उन्हें बोर्ड ऑफिस क्षेत्र के पास आने के लिए कहा। वहां से दोनों इंडियन कॉफी हाउस पहुंचे, जहां रिश्वत की पहली किस्त दी जानी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त पुलिस के अनुसार जैसे ही फरियादी ने एक लाख रुपये हरिप्रसाद पटेल को दिए और उन्होंने रकम अपनी कार में रखी, पहले से तैनात टीम ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी अजय मिश्रा और उनकी टीम ने किया।ट्रैप की कार्रवाई पूरी होने के बाद लोकायुक्त की दूसरी टीम जेके रोड स्थित नापतौल विभाग के कार्यालय पहुंची। यहां प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अधिकारियों ने कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त के अनुसार शिकायत की पृष्ठभूमि जून महीने में हुई विभागीय कार्रवाई से जुड़ी है। निरीक्षण के दौरान नापतौल विभाग ने प्रगति पेट्रोल पंप के तीन नोजल सील कर दिए थे। विभाग का दावा था कि इन नोजलों से निर्धारित मात्रा से एक से पांच मिलीलीटर तक कम पेट्रोल निकल रहा था। हालांकि बाद में संबंधित कंपनी के अधिकृत जांच अधिकारी ने दोबारा परीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में नोजल निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके बावजूद पेट्रोल पंप संचालक का आरोप था कि केस समाप्त करने और नोजलों की दोबारा स्टैंपिंग कराने के लिए रिश्वत की मांग लगातार की जा रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हरिप्रसाद पटेल वर्ष 2023 में निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बावजूद वे विभागीय मामलों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेने तथा संदेश पहुंचाने का काम कर रहे थे। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि रिटायरमेंट के बाद भी वे विभाग के कुछ मामलों में अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप कर रहे थे। अब जांच इस दिशा में भी की जाएगी कि वे किन परिस्थितियों में विभागीय गतिविधियों से जुड़े रहे और किन-किन मामलों में उनकी भूमिका रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन सीधे तौर पर रिश्वत की बातचीत से बचते थे। शिकायत के अनुसार वे अलग-अलग स्थानों पर बुलाकर बातचीत करते थे, लेकिन रकम का जिक्र मौखिक रूप से करने के बजाय कागज पर लिखते और तुरंत उसे फाड़ या काट देते थे, ताकि भविष्य में कोई प्रत्यक्ष या ऑडियो साक्ष्य उपलब्ध न हो सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिश्वत मांगने का यह तरीका सबूत मिटाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप कार्रवाई के बाद संबंधित दस्तावेज, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वत मांगने की पूरी प्रक्रिया, बातचीत और विभागीय फाइलों की भी पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:41:19 +0530</pubDate>
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