<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/jewelers/tag-21842" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Jewellers - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/21842/rss</link>
                <description>Jewellers RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की तैयारी, अब ज्वेलर्स के पास भी जमा कर सकेंगे सोना</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार जल्द ला सकती है अपडेटेड योजना, ज्वेलर्स को बनाया जा सकता है कलेक्शन पार्टनर; घरों में रखा निष्क्रिय सोना अर्थव्यवस्था में लाने की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-new-gold-monetization-scheme-now-you-will-be/article-57820"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-monetization-scheme.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार देश में निष्क्रिय पड़े सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (जीएमएस) में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले दो सप्ताह के भीतर सरकार इस योजना का नया और संशोधित स्वरूप पेश कर सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पहली बार देशभर के ज्वेलर्स और सर्राफा कारोबारियों को 'कलेक्शन पार्टनर' के रूप में शामिल किया जा सकता है। अभी तक आम लोग केवल अधिकृत बैंकों के माध्यम से ही इस योजना में अपना सोना जमा कर सकते थे। नए प्रस्ताव का उद्देश्य इस प्रक्रिया को आसान बनाना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें भाग ले सकें। माना जा रहा है कि यदि यह योजना लागू होती है तो लोगों को अपने आसपास के भरोसेमंद ज्वेलर्स के पास ही सोना जमा करने की सुविधा मिल जाएगी। इससे बैंक तक जाने की जरूरत कम होगी और योजना की पहुंच भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ सकती है। सरकार का मानना है कि देश के घरों में बड़ी मात्रा में ऐसा सोना रखा है जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। यदि उसका एक हिस्सा भी औपचारिक व्यवस्था में आ जाता है तो इससे आयात पर निर्भरता घटाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सराफा कारोबार से जुड़े संगठनों ने लंबे समय से सरकार से इस योजना के नियमों में बदलाव की मांग की थी। उनका तर्क था कि ज्वेलर्स को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए क्योंकि आम लोगों का उनसे सीधा संपर्क होता है और विश्वास भी अधिक होता है। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) का कहना है कि यदि ज्वेलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाया जाता है तो देशभर से बड़ी मात्रा में सोना जुटाना आसान हो जाएगा। संगठन का अनुमान है कि इस व्यवस्था के जरिए 1000 टन से अधिक सोना बाजार में लाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने का केवल पांच प्रतिशत हिस्सा भी इस योजना में जमा हो जाता है तो अर्थव्यवस्था में लगभग 90 अरब डॉलर, यानी करीब 8.57 लाख करोड़ रुपये के बराबर मूल्य का सोना औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में शामिल हो सकता है। इससे सोने के आयात की जरूरत कम होगी और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव भी घट सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का बेहतर उपयोग देश की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में आम लोगों के लिए कई सुविधाएं देने की भी तैयारी है। जानकारी के अनुसार, योजना में जमा किए गए सोने पर सालाना लगभग 2.25 से 2.5 प्रतिशत तक ब्याज मिलने की व्यवस्था बरकरार रह सकती है। इससे घरों में वर्षों से बिना उपयोग के रखे सोने से आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। साथ ही बैंक लॉकर का वार्षिक खर्च और घर में सोना रखने से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी कम हो सकती हैं। योजना की अवधि पूरी होने पर निवेशकों के पास यह विकल्प रहेगा कि वे अपनी राशि नकद के रूप में लें या फिर उतनी कीमत का फिजिकल गोल्ड वापस प्राप्त करें। सरकार ऐसी व्यवस्था पर भी काम कर रही है जिससे पुराने सोने को जमा करने वाले लोगों को दस्तावेजों और कर संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। हालांकि अंतिम नियमों और पात्रता की जानकारी योजना की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि योजना का ढांचा सरल और पारदर्शी रखा जाता है तो यह आम परिवारों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है। इसके साथ ही ज्वेलर्स को शामिल करने से योजना का नेटवर्क तेजी से बढ़ेगा और छोटे शहरों तथा कस्बों तक इसकी पहुंच आसान होगी। सरकार का उद्देश्य केवल लोगों को निवेश का नया विकल्प देना नहीं, बल्कि देश में निष्क्रिय पड़े सोने को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना भी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-new-gold-monetization-scheme-now-you-will-be/article-57820</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-new-gold-monetization-scheme-now-you-will-be/article-57820</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/gold-monetization-scheme.jpg"                         length="235443"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        