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                <title>HoneymoonMurderCase - दैनिक जागरण</title>
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                <title>हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन पहले से रिहा हो चुकी सोनम की जमानत तत्काल रद्द करने से इनकार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/honeymoon-murder-case-supreme-court-refuses-to-stay-bail-of/article-57833"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sonam-raghuvanshi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मेघालय सरकार ने इस मामले में मेघालय हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत सोनम को जमानत दी गई थी। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले के कुछ पहलुओं पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन यह भी माना कि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं और ट्रायल कोर्ट की ओर से तय की गई शर्तों का पालन करते हुए फिलहाल शिलांग में रह रही हैं। अदालत ने फिलहाल उनकी जमानत रद्द करने या उस पर रोक लगाने का कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। यह मामला वर्ष 2025 में सामने आए चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ा है। आरोप है कि मेघालय में हनीमून के दौरान राजा रघुवंशी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी, उनके कथित प्रेमी और अन्य आरोपियों को जांच के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस केस ने देशभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं और जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार चर्चा में रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट और निचली अदालतों ने पहले ही सोनम के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पाए थे। उन्होंने अदालत को बताया कि सोनम की जमानत याचिका पहले तीन बार खारिज हो चुकी थी। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि जांच के दौरान इस बात की आशंका जताई गई थी कि यदि उन्हें राहत दी जाती है तो वह फरार हो सकती हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को लेकर कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। जस्टिस एमएम सुंदरेश ने सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि पहले तथ्यों के आधार पर जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं, तो बाद में केवल तकनीकी आधार पर राहत देना किस हद तक उचित माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली नजर में हाई कोर्ट के आदेश के कुछ पहलुओं पर अदालत की आपत्तियां हैं। हालांकि पीठ ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि सोनम पहले ही रिहा हो चुकी हैं और फिलहाल अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन कर रही हैं। ऐसे में तत्काल उनकी जमानत पर रोक लगाने की जरूरत नहीं समझी गई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है और आगे विस्तृत सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा।</p>
<p>इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू गिरफ्तारी के दौरान दर्ज की गई कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा रहा। रिकॉर्ड के अनुसार सोनम रघुवंशी को 27 अप्रैल को जमानत मिली थी और इस फैसले में गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में हुई एक गंभीर त्रुटि अहम कारण बनी। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत दर्ज किया गया था, जो हत्या के अपराध से संबंधित है। लेकिन जब सोनम को गिरफ्तारी के आधार बताए गए तो दस्तावेजों में बीएनएस की धारा 403(1) का उल्लेख किया गया। अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि बीएनएस में धारा 403(1) का कोई अस्तित्व ही नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि यही त्रुटि केवल एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी, बल्कि गिरफ्तारी मेमो, गिरफ्तारी चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो, अधिकारों की जानकारी से जुड़े रिकॉर्ड और केस डायरी सहित कई दस्तावेजों में दोहराई गई थी। हाई कोर्ट ने माना था कि किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के वास्तविक आधार की स्पष्ट जानकारी देना उसका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि यह केवल क्लर्क की साधारण गलती थी। हाई कोर्ट का मानना था कि कई दस्तावेजों में एक जैसी त्रुटि होना गंभीर प्रक्रिया संबंधी कमी को दर्शाता है। इसी आधार पर सोनम को जमानत दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट इस आदेश की वैधता और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:56 +0530</pubDate>
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