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                <title>Football Controversy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Football Controversy RSS Feed</description>
                
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                <title>फीफा वर्ल्ड कप के बाद बढ़ा विवाद, गौहर खान ने लियोनेल मेसी पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[अर्जेंटीना की मिस्र पर जीत के बाद एक्ट्रेस गौहर खान ने सोशल मीडिया पर मेसी को बताया ‘लूजर’ और ‘सबसे घटिया लेवल का एक्टर’, VAR फैसलों को लेकर भी छिड़ी बहस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/controversy-increased-after-fifa-world-cup-gauhar-khan-targeted-lionel/article-58301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lionel-messi-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 मुकाबले के बाद अर्जेंटीना की जीत जितनी चर्चा में रही, उससे कहीं ज्यादा सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विवाद सुर्खियों में आ गया। बॉलीवुड अभिनेत्री गौहर खान ने अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें "लूजर" और "सबसे घटिया लेवल का एक्टर" तक कह दिया। गौहर का यह बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और फुटबॉल प्रशंसकों के बीच बहस छिड़ गई। एक ओर जहां कुछ लोगों ने उनकी राय का समर्थन किया, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स ने उनके बयान की आलोचना भी की। अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेले गए मुकाबले में मिस्र ने शानदार शुरुआत करते हुए 2-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि टूर्नामेंट की मजबूत दावेदार अर्जेंटीना को बड़ा झटका लग सकता है, लेकिन दूसरे हाफ के अंतिम चरण में टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार तीन गोल दाग दिए और मुकाबला 3-2 से अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ अर्जेंटीना ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली।</p>
<p>मैच खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा VAR यानी वीडियो असिस्टेंट रेफरी के फैसलों को लेकर हुई। मिस्र की टीम और उसके समर्थकों का आरोप है कि मैच के दौरान कुछ अहम फैसले उनके खिलाफ गए। सबसे बड़ा विवाद उस समय हुआ जब मिस्र के खिलाड़ी मोस्तफा जीको का गोल VAR समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया। इसके अलावा हम्दी फाथी पर हुए कथित फाउल के बावजूद पेनल्टी नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठे। इन्हीं विवादों के बीच गौहर खान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो रीपोस्ट किया, जिसमें मैच के दौरान लियोनेल मेसी चेहरे पर गेंद लगने के बाद अपना चेहरा ढंकते हुए दिखाई दे रहे थे। इस वीडियो के साथ गौहर ने लिखा कि मेसी नहीं बल्कि "मेस्सी" यानी पूरी तरह बिखरे हुए खिलाड़ी हैं और उन्हें "सबसे घटिया लेवल का एक्टर" बताया। उन्होंने अपने पोस्ट में मेसी को "लूजर" भी कहा।</p>
<p>गौहर खान की यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई फुटबॉल प्रशंसकों ने उनके बयान को अनुचित बताया और कहा कि किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन या मैदान पर हुई घटना के आधार पर इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी करना सही नहीं है। वहीं कुछ यूजर्स ने VAR विवाद और मिस्र के साथ हुए कथित अन्याय का हवाला देते हुए गौहर के गुस्से को जायज ठहराने की कोशिश की। मैच के बाद मिस्र के खिलाड़ी मुस्तफा जीको ने भी रेफरी के फैसलों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मैच में कई ऐसे निर्णय लिए गए जिनसे उनकी टीम को नुकसान हुआ। उनके मुताबिक, रेफरी के फैसलों ने पूरी टीम की मेहनत पर पानी फेर दिया। उन्होंने दावा किया कि निष्पक्ष निर्णय होते तो मुकाबले का नतीजा अलग भी हो सकता था।</p>
<p>VAR तकनीक का उद्देश्य रेफरी की मदद करना और सही फैसला सुनिश्चित करना है, लेकिन कई बार इसकी व्याख्या को लेकर विवाद खड़े हो जाते हैं। यही वजह है कि इस मुकाबले के बाद भी वीडियो समीक्षा के बावजूद फैसलों पर बहस लगातार जारी है। अर्जेंटीना की टीम ने हालांकि इन विवादों से दूरी बनाए रखी है। टीम के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। टीम का पूरा फोकस अब क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर है, जहां उसे एक और मजबूत प्रतिद्वंद्वी का सामना करना होगा।</p>
<p>दूसरी ओर, लियोनेल मेसी की ओर से भी गौहर खान की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मेसी आमतौर पर मैदान से जुड़े विवादों या सोशल मीडिया टिप्पणियों पर सार्वजनिक बयान देने से बचते रहे हैं। यही वजह है कि उनके प्रशंसक भी इस मामले में किसी जवाब का इंतजार कर रहे हैं। गौहर खान पहले भी कई सामाजिक और खेल से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रिय मौजूदगी के कारण उनके बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं। हालांकि इस बार फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में से एक पर की गई उनकी टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:39:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ट्रम्प के फोन के बाद फीफा ने रद्द किया रेड कार्ड, फैसले पर उठा बड़ा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को एक मैच के प्रतिबंध से राहत मिली, लेकिन बेल्जियम से हारकर अमेरिका विश्व कप से बाहर हो गया। फीफा के फैसले ने खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर नई बहस छेड़ दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/after-trumps-call-fifa-canceled-the-red-card-decision-big/article-58048"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/_folarin-balogun.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">फीफा फुटबॉल विश्व कप के दौरान अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द किए जाने का मामला दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बातचीत कर इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की थी। इसके बाद फीफा की अनुशासन समिति ने बालोगुन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध हटा दिया और उन्हें बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेलने की अनुमति मिल गई। हालांकि मैदान पर वापसी के बावजूद अमेरिकी टीम कोई बड़ा उलटफेर नहीं कर सकी और बेल्जियम ने 4-1 से जीत दर्ज करते हुए अमेरिका का टूर्नामेंट खत्म कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने फीफा के निर्णयों की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 25 वर्षीय फोलारिन बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ खेलते समय रेड कार्ड दिखाया गया था। रेफरी ने डिफेंडर तारिक मुहारेमोविक पर किए गए फाउल को गंभीर मानते हुए उन्हें सीधे मैदान से बाहर भेज दिया था। सामान्य नियमों के अनुसार रेड कार्ड मिलने वाले खिलाड़ी को अगला मुकाबला नहीं खेलने दिया जाता है, लेकिन इस बार मामला अलग दिशा में चला गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात कर बालोगुन के मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। ट्रम्प का कहना था कि उन्हें यह फाउल इतना गंभीर नहीं लगा और खिलाड़ी पर लगाया गया प्रतिबंध उचित नहीं था। इसी के बाद फीफा ने अनुशासन समिति के स्तर पर मामले की समीक्षा की और प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बालोगुन के खेलने की अनुमति मिलने के बाद बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। यूरोपीय फुटबॉल से जुड़े कई अधिकारियों ने भी सवाल उठाए कि यदि मैदान पर रेफरी का फैसला अंतिम माना जाता है तो फिर इस तरह के मामलों में बाहरी दबाव या राजनीतिक बयानबाजी के बाद निर्णय क्यों बदला गया। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने फीफा के सामने औपचारिक अपील भी दायर की, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। इसी वजह से यह मामला खेल जगत में और ज्यादा चर्चा का विषय बन गया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे फैसले दूसरे देशों और टीमों के लिए भी विवाद की वजह बन सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मैदान पर लौटे बालोगुन से अमेरिकी टीम को काफी उम्मीदें थीं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तीन गोल किए थे और टीम के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे। लेकिन बेल्जियम के खिलाफ खेले गए मुकाबले में अमेरिकी टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। बेल्जियम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अमेरिका की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाए रखा। आखिरकार मुकाबला 4-1 के अंतर से बेल्जियम के पक्ष में समाप्त हुआ और अमेरिका का विश्व कप अभियान यहीं खत्म हो गया। हार के बाद भी चर्चा मैच से ज्यादा रेड कार्ड विवाद को लेकर होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने सिर्फ यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि खिलाड़ी के साथ न्याय हो। उनके मुताबिक यदि प्रतिबंध बरकरार रहता तो यह टूर्नामेंट के लिए गलत संदेश होता। दूसरी ओर फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ उपलब्ध तथ्यों और नियमों का मूल्यांकन किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि फीफा के फैसले किसी राजनीतिक दबाव के आधार पर नहीं लिए जाते। हालांकि आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प की सार्वजनिक टिप्पणी और उसके तुरंत बाद आए फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">फुटबॉल इतिहास पर नजर डालें तो इस तरह का मामला बेहद दुर्लभ माना जाता है। वर्ष 2018 विश्व कप के दौरान भी कुछ देशों के नेताओं ने रेफरी के फैसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी की थी, लेकिन तब फीफा ने किसी सजा या फैसले में बदलाव नहीं किया था। 2002 विश्व कप में दक्षिण कोरिया से जुड़े कुछ विवादित निर्णयों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं, लेकिन किसी खिलाड़ी की सजा वापस नहीं ली गई थी। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को विश्व कप इतिहास का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष की पैरवी के बाद रेड कार्ड से जुड़े प्रतिबंध में बदलाव किया गया। हालांकि विश्व कप इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने की एक पुरानी मिसाल भी मिलती है। वर्ष 1962 में ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ी गरिंचा को सेमीफाइनल में रेड कार्ड दिखाया गया था, लेकिन बाद में वह फाइनल मुकाबला खेलने उतरे थे। उस समय नियम अलग थे और रेड कार्ड के बाद स्वतः प्रतिबंध लागू नहीं होता था। अनुशासन समिति उपलब्ध सबूतों के आधार पर अलग से फैसला सुनाती थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:37 +0530</pubDate>
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