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                <title>Indonesia - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मोदी बोले- भारत और इंडोनेशिया साथ आएं तो ‘कुछ-कुछ’ नहीं, ‘बहुत कुछ’ होता है, जकार्ता में रिश्तों को मिली नई मजबूती</title>
                                    <description><![CDATA[20 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर, ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा भारत; राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा- मैं मोदी के नेतृत्व और योजनाओं से सीख लेता हूं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/modi-said-if-india-and-indonesia-come-together-not/article-58129"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई दिशा देने वाले दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बात कही। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्म के गीत का जिक्र करते हुए कहा कि इंडोनेशिया में भारत का गाना ‘कुछ-कुछ होता है’ काफी पसंद किया जाता है, लेकिन जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर आगे बढ़ते हैं तो सिर्फ ‘कुछ-कुछ’ नहीं बल्कि ‘बहुत कुछ’ होता है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुराना सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव भी है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके भीतर भारत का डीएनए है। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति की यह बात भारत के लोगों के दिलों को छू गई। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों का असली डीएनए आपसी विश्वास, साझेदारी और पारस्परिक सम्मान से बना है। यही भरोसा दोनों देशों को भविष्य में और मजबूत सहयोग की ओर लेकर जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी की खुले मंच से जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और कार्यशैली से काफी प्रभावित हैं। प्रबोवो ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक करियर और उनकी कई योजनाओं को कॉपी करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार की अनेक योजनाएं बेहद सफल रही हैं और वे चाहते हैं कि इंडोनेशिया भी उनसे सीख लेकर अपने यहां लागू करे। राष्ट्रपति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अच्छी बात यह है कि इन योजनाओं पर कोई कॉपीराइट नहीं है, इसलिए उन्हें अपनाने में कोई परेशानी नहीं होगी। उनके इस बयान पर समारोह में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 20 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और तकनीकी साझेदारी जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी सहमति जताई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में रक्षा सहयोग को लेकर हुआ समझौता माना जा रहा है। भारत ने इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने कार्यक्रम के तहत वह इंडोनेशिया के सबसे बड़े और विश्व प्रसिद्ध हिंदू मंदिर प्रम्बानन भी जाएंगे। एक हजार वर्ष से अधिक पुराने इस मंदिर को दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत पहचान माना जाता है। प्रधानमंत्री का यह दौरा दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने का संदेश भी देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंडोनेशिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने विशेष समारोह में यह सम्मान प्रदान किया। इसे भारत और इंडोनेशिया के मजबूत होते संबंधों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है। जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो ने स्वयं उन्हें गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद भारतीय मूल के बच्चों और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भी की। भारतीय समुदाय ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री का स्वागत किया और दोनों देशों की मित्रता का संदेश दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे। उनके विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने विशेष एस्कॉर्ट प्रदान किया। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सम्मान का प्रतीक माना गया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। चीन पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण चीन सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके अलग-अलग हिस्सों पर अपना अधिकार जताते हैं। चीन ने कई कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां सैन्य ढांचा तैयार किया है, जिससे क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं। समुद्री व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारतवंशी कारोबारी पर इंडोनेशिया में 425 करोड़ की कथित रक्षा धोखाधड़ी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में दावा- खुद को CIA एजेंट बताकर राष्ट्रपति प्रबोवो का भरोसा जीता, रक्षा सौदों के नाम पर फर्जी कर्ज मंजूर कराने का आरोप।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-origin-businessman-accused-of-alleged-defense-fraud-of-rs-425/article-58053"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-srivastava.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका में पहले से धोखाधड़ी के मामलों का सामना कर रहे भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्टों के अनुसार गौरव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और उनके करीबी अधिकारियों का विश्वास हासिल किया। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने रक्षा सौदों के नाम पर लगभग 425 करोड़ रुपये के फर्जी कर्ज को मंजूरी दिलवाई। यह मामला सामने आने के बाद इंडोनेशिया में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जिन रक्षा सौदों पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम समझौते तक नहीं पहुंचे और इसलिए सरकार को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान नहीं हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक यह कथित घटनाक्रम वर्ष 2020 से 2022 के बीच का है। दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशियाई सेना को आधुनिक सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। इसमें 36 एफ-15 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक सैन्य कमांड सिस्टम उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। केवल लड़ाकू विमानों की संभावित डील का मूल्य लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये बताया गया। शुरुआती स्तर पर इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय व्यवस्थाओं और कर्ज से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए, लेकिन बाद में जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं की जानकारी सामने आई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर रक्षा क्षेत्र से जुड़े सौदों को आगे बढ़ाने की कोशिश की। जांच में जिन चार कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उनके माध्यम से पांच अलग-अलग रक्षा समझौतों की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बाद में इन कंपनियों के खिलाफ टैक्स संबंधी अनियमितताओं के मामले सामने आए और उन्हें बंद कर दिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां बेहद सीमित थीं, जबकि इनके जरिए बड़े वित्तीय लेन-देन किए जा रहे थे। यही वजह है कि इन सौदों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्टों के अनुसार गौरव श्रीवास्तव ने केवल व्यावसायिक संपर्कों के आधार पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास कायम करके भी प्रभाव बनाया। दावा किया गया है कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो उन्हें ‘मिस्टर जी’ कहकर संबोधित करते थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गौरव को राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां भी थीं, जो सामान्य तौर पर केवल उनके करीबी लोगों को ही मालूम थीं। इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर उसने अपने प्रभाव को और मजबूत बनाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि गौरव ने अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कई बड़े दावे किए थे। उसने कथित तौर पर कहा कि वर्ष 2002 के बाली बम धमाकों के आरोपियों को पकड़वाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसके अलावा उसने यह भी दावा किया कि उसने राष्ट्रपति प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में मदद की थी। इन दावों के जरिए उसने खुद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया नेटवर्क से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति साबित करने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इन्हें भी मामले का हिस्सा मानकर जांच कर रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कथित फर्जीवाड़े से जुड़े पैसों का इस्तेमाल अमेरिका के लॉस एंजिलिस में एक महंगा आलीशान बंगला खरीदने में भी किया गया। इस संपत्ति की कीमत लगभग 208 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि धन का स्रोत क्या था और क्या इस खरीद में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी रकम का इस्तेमाल हुआ। वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जिन रक्षा परियोजनाओं पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम अनुबंध तक नहीं पहुंचीं। मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत के अनुसार किसी भी प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली थी, इसलिए सरकार को प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। फिर भी पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए संबंधित तथ्यों की जांच जारी है। दूसरी ओर अमेरिका में भी गौरव श्रीवास्तव के खिलाफ वर्ष 2024 से धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय मामलों में कानूनी कार्रवाई चल रही है</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग मजबूत, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीद पर सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की बैठक में रक्षा, चुनावी तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर बनी सहमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/defense-cooperation-between-india-and-indonesia-strengthened-agreement-on-purchase/article-58049"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-indonesia-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। सबसे बड़ा फैसला ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खरीद को लेकर रहा। फिलीपींस और वियतनाम के बाद अब इंडोनेशिया भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। अधिकारियों के अनुसार इस समझौते के तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और भारत की रक्षा तकनीक पर बढ़ते वैश्विक भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान इंडोनेशिया ने भारत में विकसित 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया। यह वही मिसाइल है, जिसका उपयोग हाल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस फैसले से भारतीय रक्षा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी सफलता मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की लगातार बढ़ती मांग भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक देशों की सूची में और मजबूत स्थिति दिला सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है और अब उसके उत्पाद कई देशों का भरोसा जीत रहे हैं। रक्षा सहयोग के अलावा दोनों देशों के बीच चुनावी तकनीक के क्षेत्र में भी अहम सहमति बनी है। भारत इंडोनेशिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम विकसित करने में तकनीकी सहायता देगा। इसे भारत की चुनाव प्रणाली और तकनीकी क्षमता पर इंडोनेशिया के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस सहयोग का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है। भारत पहले भी कई देशों के साथ डिजिटल प्रशासन और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाता रहा है और अब इसमें चुनावी प्रबंधन भी शामिल हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। सुबह जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं उनका स्वागत किया और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। समारोह के दौरान वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों और बच्चों ने भी उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति भवन में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग सहित कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से दुनिया का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी रक्षा प्रणालियों के निर्यात से भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी, वहीं इंडोनेशिया की रक्षा क्षमताओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जावा द्वीप पर स्थित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर भी जाने वाले हैं। नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है तथा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिलेगी। सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी के विमान को इंडोनेशियाई वायुसेना ने अपने एयरस्पेस में प्रवेश करते ही एस्कॉर्ट किया था। इसे दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता और सम्मान का प्रतीक माना गया। दो दिवसीय यात्रा के दौरान हुए समझौते यह संकेत देते हैं कि भारत और इंडोनेशिया अब केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रक्षा, तकनीक, लोकतांत्रिक संस्थाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:49 +0530</pubDate>
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