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                <title>Communication - दैनिक जागरण</title>
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                <title>BSNL ने लॉन्च किया सैटेलाइट फोन, बिना मोबाइल नेटवर्क भी होगी बातचीत; खरीदने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[₹1.34 लाख कीमत वाले सैटेलाइट फोन में SOS इमरजेंसी सपोर्ट, दूरदराज और नेटवर्क विहीन इलाकों में भी मिलेगा भरोसेमंद संचार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/bsnl-launches-satellite-phone-conversation-will-be-possible-even-without/article-58365"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bsnl-satellite-phone.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने देश में एक नई संचार तकनीक की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। यह फोन उन परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करते। इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक मोबाइल टावरों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि सीधे सैटेलाइट नेटवर्क के माध्यम से कॉलिंग और संचार की सुविधा उपलब्ध कराता है। कंपनी ने इसकी कीमत टैक्स सहित 1,34,166 रुपये निर्धारित की है। हालांकि, इसे खरीदना और इस्तेमाल करना आम स्मार्टफोन की तरह आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। भारत में अब तक मोबाइल संचार मुख्य रूप से सेलुलर नेटवर्क पर आधारित रहा है। किसी भी सामान्य स्मार्टफोन को काम करने के लिए मोबाइल टावर और सिम कार्ड की जरूरत होती है। लेकिन सैटेलाइट फोन की तकनीक पूरी तरह अलग है। यह सीधे पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे संचार उपग्रहों से जुड़ता है, जिससे ऐसे स्थानों पर भी संपर्क संभव हो जाता है जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह अनुपलब्ध रहता है। BSNL के इस नए सैटेलाइट फोन को खास तौर पर उन लोगों और संस्थाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिन्हें दूरदराज, पहाड़ी, जंगल, समुद्री क्षेत्र या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी भरोसेमंद संचार व्यवस्था की आवश्यकता होती है। ऐसे क्षेत्रों में अक्सर मोबाइल टावर नहीं होते या किसी आपदा के दौरान नेटवर्क पूरी तरह ठप हो जाता है। ऐसे समय में सैटेलाइट फोन जीवनरक्षक उपकरण साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार, इस फोन में इमरजेंसी परिस्थितियों के लिए SOS सपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यदि कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या अन्य संकट में फंस जाता है, तो वह इस सुविधा के माध्यम से तुरंत सहायता के लिए संपर्क कर सकता है। यही वजह है कि इस प्रकार के फोन का उपयोग सेना, सुरक्षा एजेंसियां, आपदा प्रबंधन विभाग, समुद्री परिवहन, पर्वतारोहण दल और राहत कार्यों में लगे संगठनों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। BSNL ने इस डिवाइस को वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क सेवा प्रदाता 'इनमारसैट' के सहयोग से विकसित किया है। इनमारसैट दुनिया के कई देशों में सैटेलाइट आधारित संचार सेवाएं उपलब्ध कराता है और उसकी तकनीक समुद्री, विमानन और आपातकालीन संचार क्षेत्रों में लंबे समय से इस्तेमाल की जा रही है। इसी वैश्विक नेटवर्क की मदद से यह फोन भारत के दुर्गम इलाकों में भी संचार सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इस फोन को आम उपभोक्ताओं के लिए लॉन्च नहीं किया गया है। भारत में सैटेलाइट फोन के उपयोग को लेकर कड़े कानूनी नियम लागू हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और संचार व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए किसी भी व्यक्ति या संस्था को इस फोन की खरीद से पहले दूरसंचार विभाग (DoT) से अधिकृत अनुमति प्राप्त करनी होगी। बिना सरकारी स्वीकृति के सैटेलाइट फोन खरीदना, रखना या उसका उपयोग करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा और इसके लिए कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। सैटेलाइट फोन की आवश्यकता विशेष परिस्थितियों में सबसे अधिक महसूस होती है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, चक्रवात या भूस्खलन के दौरान अक्सर मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह बंद हो जाते हैं। ऐसे समय में राहत और बचाव कार्यों के लिए लगातार संपर्क बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। सैटेलाइट फोन इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रदान करता है क्योंकि यह मोबाइल टावरों पर निर्भर नहीं रहता।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविध देश में ऐसे कई इलाके हैं जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क सीमित है। हिमालयी क्षेत्र, घने जंगल, समुद्री सीमाएं और कई दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र संचार सुविधाओं के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, इंजीनियर, सुरक्षा बल और शोधकर्ता इस तकनीक का लाभ उठा सकते हैं। हाल के वर्षों में दुनिया भर में सैटेलाइट आधारित संचार तकनीक तेजी से विकसित हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी सैटेलाइट कनेक्टिविटी को मोबाइल सेवाओं से जोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं। भारत में BSNL का यह कदम भविष्य की संचार व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में सैटेलाइट कम्युनिकेशन तकनीक का दायरा और बढ़ सकता है तथा इसका उपयोग केवल विशेष संस्थानों तक सीमित न रहकर आम सेवाओं में भी दिखाई दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वर्तमान समय में इसकी कीमत और कानूनी प्रक्रिया इसे सीमित उपयोग वाला उपकरण बनाती है। लगभग 1.34 लाख रुपये की कीमत होने के कारण यह सामान्य उपभोक्ताओं के लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं माना जा रहा है। इसके अलावा सरकार से अनुमति लेने की अनिवार्यता भी स्पष्ट करती है कि यह फोन विशेष जरूरतों वाले उपयोगकर्ताओं के लिए ही तैयार किया गया है। BSNL का मानना है कि इस तकनीक के जरिए देश के उन हिस्सों तक भी भरोसेमंद संचार सुविधा पहुंचाई जा सकेगी, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क स्थापित करना कठिन है। यह कदम न केवल आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में डिजिटल कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला भी साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:57:03 +0530</pubDate>
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                <title>क्या मोबाइल फोन कपल्स के बीच सबसे बड़ा तीसरा व्यक्ति बन गया है? रिश्तों में बढ़ती दूरी पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[एक ही कमरे में साथ रहने के बावजूद स्क्रीन में खोए रहते हैं लोग, क्या स्मार्टफोन रिश्तों की गर्माहट कम कर रहा है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/has-mobile-phone-become-the-biggest-third-person-among-couples/article-58117"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/relationship-advice.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">आज के दौर में मोबाइल फोन जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक ज्यादातर लोगों का समय किसी न किसी स्क्रीन के साथ गुजरता है। फोन ने जहां लोगों के काम आसान किए हैं, वहीं रिश्तों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है। खासकर कपल्स के बीच अब एक नई तरह की समस्या सामने आ रही है, जहां एक ही घर में रहने वाले लोग भी एक-दूसरे से ज्यादा समय मोबाइल स्क्रीन के साथ बिताने लगे हैं। कई रिश्तों में अब शिकायत यह नहीं होती कि पार्टनर समय नहीं देता, बल्कि यह होती है कि पार्टनर साथ होकर भी मौजूद नहीं रहता। बातचीत के बीच बार-बार फोन देखना, खाने की टेबल पर मोबाइल चलाना या सोने से पहले घंटों सोशल मीडिया पर लगे रहना धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी पैदा कर सकता है।  किसी भी रिश्ते की मजबूती बातचीत, ध्यान और भावनात्मक जुड़ाव पर निर्भर करती है। जब मोबाइल लगातार ध्यान खींचता रहता है तो पार्टनर के साथ बिताया जाने वाला समय कम होने लगता है। यह छोटी-छोटी आदतें आगे चलकर बड़े मतभेद का कारण बन सकती हैं। पहले कपल्स अपने खाली समय में एक-दूसरे से बातें करते थे, दिनभर की बातें साझा करते थे और साथ में समय बिताते थे। लेकिन अब कई बार दोनों लोग एक ही जगह बैठे होते हैं और अपनी-अपनी स्क्रीन में व्यस्त रहते हैं। बाहर से देखने पर सब सामान्य लगता है, लेकिन अंदर ही अंदर रिश्ते में भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोबाइल फोन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह धीरे-धीरे आदत में बदल जाता है। शुरुआत में कुछ मिनट के लिए फोन देखना सामान्य लगता है, लेकिन कब यह घंटों में बदल जाता है, इसका पता नहीं चलता। सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन इंसान का ध्यान बार-बार अपनी ओर खींचते हैं। कई कपल्स में यह भी देखा गया है कि फोन को लेकर शक और असुरक्षा की भावना बढ़ने लगी है। पार्टनर ज्यादा समय मोबाइल पर बिताता है तो दूसरा व्यक्ति खुद को नजरअंदाज महसूस कर सकता है। कभी-कभी फोन की प्राइवेसी को लेकर भी रिश्तों में तनाव पैदा हो जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मोबाइल फोन रिश्तों का दुश्मन है। सही इस्तेमाल किया जाए तो यही तकनीक रिश्तों को मजबूत भी कर सकती है। दूर रहने वाले कपल्स वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए जुड़े रह सकते हैं। समस्या मोबाइल नहीं, बल्कि उसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल है। रिश्तों में संतुलन बनाए रखने के लिए कई विशेषज्ञ "नो फोन टाइम" की सलाह देते हैं। जैसे खाना खाते समय फोन दूर रखना, सोने से पहले कुछ समय सिर्फ बातचीत के लिए निकालना और हफ्ते में एक दिन बिना ज्यादा स्क्रीन टाइम के साथ बिताना रिश्ते को बेहतर बना सकता है। कपल्स के लिए जरूरी है कि वे एक-दूसरे की मौजूदगी को महत्व दें। कई बार पार्टनर को महंगे गिफ्ट या बड़े सरप्राइज से ज्यादा जरूरत होती है कि सामने वाला उसकी बात ध्यान से सुने। रिश्ते छोटे-छोटे पलों से मजबूत होते हैं और इन पलों की जगह अगर हमेशा मोबाइल ले ले तो दूरी बढ़ना स्वाभाविक है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज मोबाइल हमारी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन रिश्तों में उसकी जगह तय करना जरूरी है। तकनीक का इस्तेमाल सुविधा के लिए होना चाहिए, रिश्तों के बीच दीवार बनाने के लिए नहीं। एक-दूसरे के साथ बिताया गया समय ही किसी भी रिश्ते की असली ताकत होता है। बदलते समय में सवाल यह नहीं है कि मोबाइल रखना चाहिए या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या हम मोबाइल को इतना समय दे रहे हैं कि अपने करीबी रिश्तों के लिए समय कम पड़ जाए। अगर जवाब हां है, तो शायद रिश्तों को बचाने के लिए स्क्रीन से थोड़ा दूरी बनाना जरूरी हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:39:01 +0530</pubDate>
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