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                <title>Child Protection - दैनिक जागरण</title>
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                <title>12 साल की बच्ची से दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट सख्त, काउंसिलिंग रिपोर्ट तलब; आरोपी जीजा गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[बैकुंठपुर की घटना में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को बताया सर्वोपरि, अगली सुनवाई 2 जुलाई को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-calls-for-strict-counseling-report-in-case-of/article-57527"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर से सामने आए 12 वर्षीय बच्ची से कथित दुष्कर्म और बाल संरक्षण से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कानूनी प्रक्रिया से पहले बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्थिति और भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों बच्चों को फिलहाल चाइल्ड वेलफेयर की निगरानी में रखने के निर्देश दिए हैं और काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की गई है। यह मामला दो अनाथ भाई-बहन से जुड़ा है। 12 वर्षीय बच्ची और उसका 9 वर्षीय भाई बैकुंठपुर में अपनी मुंहबोली बहन के घर रह रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक दोनों बच्चों को वहीं आश्रय दिया गया था, लेकिन बाद में उनके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप सामने आए। बताया गया कि लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर दोनों बच्चे वहां से निकलकर अपने एक परिचित के पास पहुंच गए। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को संरक्षण में लेने के बाद उनकी काउंसिलिंग कराई गई। इसी दौरान बच्ची ने कथित रूप से बताया कि उसकी मुंहबोली बहन के पति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत और काउंसिलिंग के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया जब बच्चों की मुंहबोली बहन ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया कि दोनों बच्चों को अवैध रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन में रखा गया है। हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि रिकॉर्ड के अनुसार बच्ची को अंबिकापुर स्थित बालिका गृह तथा उसके भाई को बैकुंठपुर चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में सुरक्षा के मद्देनजर रखा गया है। दोनों बच्चों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत संरक्षण दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था कि दोनों बच्चों को अदालत में प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद संबंधित जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी बच्चों को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे और अदालत के समक्ष पूरी स्थिति रखी गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिका में कुछ तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बच्चों का हित और उनका मानसिक स्वास्थ्य है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले उनकी स्वतंत्र काउंसिलिंग आवश्यक है, ताकि वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के निर्देश पर बच्चों की काउंसिलिंग न्यायालय कक्ष के बजाय राज्य न्यायिक अकादमी में कराई गई। यह प्रक्रिया वरिष्ठ अधिवक्ता और संबंधित अधिकारियों की देखरेख में पूरी हुई। अदालत ने निर्देश दिया है कि काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाए, ताकि बच्चों की निजता और पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई में आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।  ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों की पहचान और गोपनीयता की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक होता है। इसके साथ ही मनोवैज्ञानिक सहायता, सुरक्षित वातावरण और कानूनी संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कानून के अनुसार नाबालिग पीड़ितों से जुड़े मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया संवेदनशील तरीके से पूरी की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट, बच्चों के बयान, काउंसिलिंग रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि दोनों बच्चों को फिलहाल सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया है और उनकी नियमित काउंसिलिंग जारी रहेगी। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उद्देश्य किसी व्यक्ति की अवैध हिरासत की जांच करना होता है। लेकिन यदि किसी नाबालिग को कानून के अनुसार सुरक्षा और संरक्षण के लिए अधिकृत संस्था में रखा गया हो, तो अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेती है। यही कारण है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने बच्चों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विस्तृत रिपोर्ट और काउंसिलिंग को प्राथमिकता दी है। दोनों बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर संस्थाओं की निगरानी में रखा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जाए। वहीं आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच भी जारी रहेगी। </p>
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</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में 11 वर्षीय बच्ची की हत्या मामले में जांच तेज, आरोपी से पूछताछ जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, घटनाक्रम और सबूतों के आधार पर मामले की कई पहलुओं से जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/investigation-intensified-in-the-murder-case-of-11-year-old/article-56863"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/delhi-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में 11 वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। घटना सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश है और लोग दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बच्ची अपने परिवार के साथ सड़क किनारे सो रही थी। परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला बताया जा रहा है और आर्थिक तंगी के कारण फुटपाथ पर रहने को मजबूर था। पुलिस के अनुसार घटना देर रात की है। बच्ची अपने माता-पिता और अन्य परिजनों के साथ सो रही थी, तभी वह अचानक लापता हो गई। परिजनों ने जब बच्ची को आसपास नहीं पाया तो उसकी तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें सक्रिय हो गईं। शुरुआती जांच में आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ फुटेज में एक संदिग्ध वाहन दिखाई दिया, जिसके बाद जांच उसी दिशा में आगे बढ़ाई गई। वाहन की पहचान होने के बाद पुलिस ने उसके रूट और मूवमेंट की जानकारी जुटाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिले। तकनीकी निगरानी और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के आधार पर संदिग्ध चालक की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों को वैज्ञानिक तरीके से परखा जा रहा है ताकि अदालत में मजबूत केस पेश किया जा सके। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि पीड़ित परिवार बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति में जीवन बिता रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार परिवार पहले किराए के मकान में रहता था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसे वह मकान छोड़ना पड़ा। इसके बाद परिवार फुटपाथ पर रहने लगा। घटना के बाद आसपास के लोगों ने भी गहरा दुख जताया है। कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे परिवारों के लिए सुरक्षित आश्रय और बेहतर सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर इस तरह के जोखिम कम किए जा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में फोरेंसिक जांच को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों और अन्य साक्ष्यों को विशेषज्ञों के पास भेजा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पुलिस आरोपी की गतिविधियों, उसके संपर्कों और उसके पिछले रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी पहले भी विभिन्न मामलों में कानून के दायरे में आ चुका है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पुराने मामलों से जुड़ी सभी जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी पेशे से कैब चालक था। इसी कारण पुलिस उन कंपनियों से भी जानकारी जुटा रही है जिनसे वह जुड़ा हुआ था। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि भर्ती और सत्यापन की प्रक्रिया में किन मानकों का पालन किया गया था। इस पहलू की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सार्वजनिक परिवहन और कैब सेवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं। सुरक्षा से जुड़ी किसी भी कमी की पहचान भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे हालात बनने से पहले रोकथाम के उपाय भी उतने ही जरूरी हैं। विशेष रूप से उन बच्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और जिनकी सुरक्षा के संसाधन सीमित होते हैं। पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपुष्ट खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने की अपील की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस केवल पुष्टि किए गए तथ्यों को ही सार्वजनिक कर रही है। राजधानी में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, सामाजिक असमानता और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:19:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सक्ती में 4 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म की कोशिश, नाबालिग आरोपी पकड़ा गया</title>
                                    <description><![CDATA[परिजनों की शिकायत पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 14 वर्षीय आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/minor-accused-caught-trying-to-rape-4-year-old-girl/article-56213"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sakti-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में एक चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आने के बाद इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल है। घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए एक 14 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया। बाद में उसे किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे कोरबा स्थित बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। पीड़ित बच्ची और आरोपी नाबालिग के परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे। दोनों परिवारों के बीच सामाजिक परिचय होने के कारण आरोपी का पीड़ित परिवार के घर आना-जाना था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इसी परिचय का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर वारदात को अंजाम देने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की। चूंकि आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम है, इसलिए उसके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवारों को पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताई है और बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार, समाज और संस्थानों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां बच्चे सुरक्षित महसूस कर सकें और किसी भी तरह की असहज स्थिति की जानकारी बिना डर के अपने अभिभावकों को दे सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों से जुड़े अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान और निजी जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करती हैं कि बच्चा और उसका परिवार किसी अतिरिक्त मानसिक दबाव का सामना न करे। इसी कारण मामले से जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जातीं। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है। अभिभावकों को भी बच्चों के व्यवहार, दिनचर्या और उनके संपर्क में आने वाले लोगों पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षा संबंधी जानकारी देना और उन्हें ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में समझाना भी जरूरी माना जाता है। कई बार बच्चे डर या झिझक के कारण अपने साथ हुई असहज घटनाओं के बारे में तुरंत नहीं बता पाते, इसलिए परिवार का सहयोगात्मक रवैया बेहद महत्वपूर्ण होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटना के बाद सक्ती जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन को मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए, ताकि बच्चों और अभिभावकों दोनों को सुरक्षा संबंधी जानकारी मिल सके। कई लोगों ने यह भी कहा कि समाज में ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और पीड़ित परिवारों का समर्थन करने की जरूरत है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी तरह की अफवाह न फैलाएं और पीड़ित परिवार की निजता का सम्मान करें। बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर कानून में कड़े प्रावधान हैं और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल आरोपी नाबालिग को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है और मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:56:11 +0530</pubDate>
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                <title>रेवाड़ी में पिता पर 10 वर्षीय बेटी से छेड़छाड़ का आरोप, जांच जारी</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/investigation-continues-on-father-accused-of-molesting-10-year-old/article-56152"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewari-news.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p style="text-align:justify;">रेवाड़ी जिले के खोल थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक प्रवासी परिवार के भीतर ही 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ का आरोप उसके ही पिता पर लगा है। मध्यप्रदेश से काम की तलाश में आए इस परिवार में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश जारी है। फिलहाल बच्ची को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। यह परिवार करीब एक हफ्ते पहले मध्यप्रदेश से हरियाणा के रेवाड़ी जिले में आया था। रोजगार की तलाश में आए इस परिवार ने खोल थाना क्षेत्र के एक गांव में अस्थायी रूप से डेरा डाला हुआ था। रोजमर्रा की तरह मंगलवार का दिन भी सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन इसी दिन घर के भीतर ही यह दर्दनाक घटना होने का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि उस दिन बच्ची की मां काम के लिए बाहर गई हुई थी और घर पर बच्ची अकेली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान बच्ची के पिता घर पहुंचे और उन्होंने कथित तौर पर अपनी ही बेटी के साथ गलत हरकत करने की कोशिश की। बच्ची ने जब इसका विरोध किया तो उसे धमकाने की भी बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बच्ची को डराने के लिए जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद वह और ज्यादा सहम गई और किसी को तुरंत कुछ नहीं बता पाई। हालांकि, इस पूरे मामले की पुष्टि पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी। शाम के समय जब बच्ची की मां काम से घर लौटी तो उसने देखा कि उसकी बेटी काफी डरी-सहमी और गुमसुम हालत में बैठी हुई थी। पहले तो बच्ची ने कुछ भी बताने से इनकार किया, लेकिन मां के लगातार पूछने पर वह टूट गई और रोते हुए पूरी घटना का खुलासा किया। बच्ची की बात सुनकर मां पूरी तरह से स्तब्ध रह गई और तुरंत उसे लेकर पुलिस के पास पहुंची। कुंड पुलिस चौकी में पहुंचकर महिला ने पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामला POCSO एक्ट के तहत दर्ज किया गया है, जो नाबालिगों से जुड़े अपराधों के लिए बेहद सख्त कानून है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शुरुआती जांच शुरू की और बच्ची को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची के साथ किस तरह की घटना हुई है। इधर, आरोपी पिता घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया है और आसपास के इलाकों में भी छानबीन की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं इस घटना के बाद गांव में भी दहशत और नाराजगी का माहौल है। स्थानीय लोग इस तरह की घटना को बेहद शर्मनाक बता रहे हैं और आरोपी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा है कि बच्ची की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उसे फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और काउंसलिंग भी कराई जा रही है ताकि वह मानसिक रूप से संभल सके। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी सबूतों और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।</p>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:23:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दुर्ग में बाल संरक्षण पर रेंज स्तरीय पहल, पुलिस अधिकारियों को मिला विशेष प्रशिक्षण</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/range-level-initiative-on-child-protection-in-durg-police-officers/article-46826"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/cg-(6)3.jpg" alt=""></a><br /><p>दुर्ग–भिलाई क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाने की दिशा में पुलिस प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। 19 फरवरी को भिलाई के सिविक सेंटर स्थित सीए बिल्डिंग में रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।</p>
<p>कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों से जुड़े अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को कानूनसम्मत, संवेदनशील और व्यावहारिक बनाना रहा। इसमें किशोर न्याय अधिनियम 2015 और बाल लैंगिक अपराधों से संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि पीड़ित बच्चों के साथ पुलिस का व्यवहार पूरी तरह मानवीय और भरोसेमंद होना चाहिए।</p>
<h5><strong>व्यवहारिक प्रशिक्षण और केस स्टडी पर जोर</strong></h5>
<p>कार्यक्रम में अधिकारियों को बताया गया कि बाल पीड़ितों के बयान दर्ज करते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखा जाए। एफआईआर पंजीयन, मेडिकल जांच, काउंसलिंग, पुनर्वास और कानूनी सहायता की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया गया। वास्तविक मामलों पर आधारित केस स्टडी के जरिए यह भी बताया गया कि जमीनी स्तर पर किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और उनका समाधान कैसे किया जा सकता है।</p>
<p>इसके साथ ही किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति के समक्ष मामलों की प्रस्तुति, दस्तावेजी प्रक्रिया और समयसीमा से जुड़े बिंदुओं पर भी चर्चा की गई, ताकि जांच में किसी तरह की तकनीकी कमी न रह जाए।</p>
<h5><strong>प्रशासन और पुलिस ने दिया समन्वय का संदेश</strong></h5>
<p>कार्यशाला में जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया। जिला कलेक्टर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस और समाज की साझा जवाबदेही है। उन्होंने कहा कि ऐसे संयुक्त प्रशिक्षण से विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा और बाल न्याय से जुड़े मामलों में तेजी आएगी।</p>
<p>वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि बाल संरक्षण के मामलों में गोपनीयता, संवेदनशीलता और कानून का सख्ती से पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना और समयबद्ध कार्रवाई से ही पीड़ित बच्चों को सही मायनों में न्याय मिल सकता है।</p>
<h5><strong>कई विभागों की सक्रिय भागीदारी</strong></h5>
<p>इस रेंज स्तरीय कार्यशाला में किशोर न्याय बोर्ड, आरपीएफ, जीआरपी, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल संप्रेक्षण गृह, परिवीक्षा अधिकारी, चाइल्ड हेल्पलाइन, केस वर्कर और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी ने आपसी समन्वय को मजबूत करने पर सहमति जताई।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:24:35 +0530</pubDate>
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