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                <title>Cyber Crime - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Cyber Crime RSS Feed</description>
                
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                <title>'फिल्म रिलीज नहीं रोकी तो जान से मार देंगे': 'काला हिरण' के प्रोड्यूसर अमित जानी को पाकिस्तान नंबर से धमकी, पुलिस और एजेंसियां अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[दतिया में दर्शन के दौरान फिल्म निर्माता अमित जानी को व्हाट्सएप पर ऑडियो, वीडियो और कॉल के जरिए जान से मारने की धमकी मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/if-the-release-of-the-film-is-not-stopped-we/article-58102"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/amit-jani.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया में फिल्म<strong> </strong>'काला हिरण' के निर्माता अमित जानी को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। आरोप है कि पाकिस्तान के मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल, ऑडियो और वीडियो भेजकर फिल्म की रिलीज रोकने की चेतावनी दी गई। शिकायत मिलने के बाद दतिया कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती स्तर पर साइबर विशेषज्ञों की मदद से कॉल और मैसेज की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि धमकी देने वाले की वास्तविक पहचान और उसके नेटवर्क तक पहुंचा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">नोएडा निवासी फिल्म निर्माता अमित जानी धार्मिक यात्रा के सिलसिले में दतिया पहुंचे थे। वे यहां स्थित प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ मंदिर में दर्शन करने आए थे और एक निजी होटल में ठहरे हुए थे। इसी दौरान उनके मोबाइल फोन पर विदेशी नंबरों से लगातार व्हाट्सएप संदेश और कॉल आने लगे। शुरुआत में उन्हें ऑडियो और वीडियो क्लिप भेजी गईं, जिसके बाद सीधे कॉल कर फिल्म रिलीज नहीं करने की चेतावनी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अमित जानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 6 जुलाई की देर रात करीब एक बजे पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) वाले नंबर से एक ऑडियो और वीडियो क्लिप प्राप्त हुई। इसके बाद अगले दिन सुबह फिर दूसरे पाकिस्तानी नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। शिकायत के मुताबिक, कॉल करने वाले ने खुद को पाकिस्तान से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए फिल्म की रिलीज रोकने की धमकी दी। उसने कहा कि यदि फिल्म निर्धारित समय पर रिलीज हुई तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और जान से मार दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि धमकी देने वाले ने वीडियो में आधुनिक हथियार दिखाने का दावा किया। वीडियो में कथित रूप से ग्रेनेड, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) और अन्य हथियार दिखाई देने की बात कही गई है। हालांकि पुलिस फिलहाल वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो वास्तविक है या किसी अन्य स्रोत से तैयार कर भेजा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">धमकी मिलने के बाद अमित जानी सीधे दतिया कोतवाली पहुंचे और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नंबरों की तकनीकी जानकारी जुटाई जा रही है और साइबर सेल के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि कॉल वास्तव में विदेश से की गई थी या इंटरनेट आधारित किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आजकल इंटरनेट कॉलिंग और वर्चुअल नंबरों का उपयोग कर कई बार विदेशी नंबरों का इस्तेमाल दिखाया जाता है। इसलिए केवल नंबर देखकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में विदेश में था या किसी अन्य स्थान से इंटरनेट आधारित तकनीक का उपयोग कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को भी जानकारी भेज दी है। सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर सभी डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच टीम व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, वीडियो फाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डाटा की भी जांच करेगी ताकि धमकी देने वाले तक पहुंचा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि यदि जांच में विदेशी कनेक्शन सामने आता है तो संबंधित केंद्रीय एजेंसियों से भी आवश्यक सहयोग लिया जाएगा। फिलहाल जांच के सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष और तकनीकी आधार पर जांच होगी। घटना के बाद दतिया में सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। धार्मिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म निर्माता अमित जानी ने पुलिस से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि उन्हें मिली धमकी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने जांच एजेंसियों को अपने मोबाइल में मौजूद सभी ऑडियो, वीडियो और कॉल संबंधी जानकारी उपलब्ध करा दी है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल फोरेंसिक जांच के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञ यह भी जांच करेंगे कि भेजे गए वीडियो और ऑडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग या मॉर्फिंग तो नहीं की गई। इसके अलावा कॉल की लोकेशन, इंटरनेट सर्वर और उपयोग किए गए प्लेटफॉर्म की जानकारी भी जुटाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:44:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बाल यौन शोषण कंटेंट पर सरकार सख्त, इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को भेजा नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[7 दिन में मांगा जवाब, विवादित विज्ञापन तुरंत हटाने और ऐसे कंटेंट की पहुंच रोकने के निर्देश; सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बढ़ी सख्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-child-sexual-abuse-content-sent-notice-to/article-57915"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/instagram-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े विज्ञापनों के प्रसार को गंभीरता से लेते हुए उसकी पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है और निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित कंटेंट को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक और हटाया जाए। यह कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने 4 जुलाई को जारी नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी प्रकार का ऐसा कंटेंट या विज्ञापन बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देता है या उपयोगकर्ताओं को ऐसे अवैध कंटेंट तक पहुंचने में मदद करता है, तो उसे तत्काल हटाया जाना चाहिए। सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दिए और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>BBC की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन चल रहे थे जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया गया। रिपोर्ट के अनुसार इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ताओं को दूसरे प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से टेलीग्राम चैनलों की ओर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर अवैध सामग्री बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही थी। ऐसे विज्ञापन Meta के मॉडरेशन सिस्टम से स्वीकृति मिलने के बाद ही प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहे थे। जब इस संबंध में शिकायत की गई तो शुरुआती स्तर पर संबंधित विज्ञापन को कंपनी की कम्युनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं माना गया। बाद में मामला सार्वजनिक होने के बाद Meta ने कई विज्ञापन हटाने, संबंधित अकाउंट निलंबित करने और संदिग्ध लिंक हटाने की बात स्वीकार की।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने मांगा विस्तृत स्पष्टीकरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने Meta से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में ऐसी चूक कैसे हुई। साथ ही यह भी पूछा गया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे। सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी किया हो। इससे पहले 1 जुलाई को सरकार ने WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भी कंपनी से जवाब मांगा था। लगातार दूसरी बार नोटिस जारी होने से स्पष्ट है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर अधिक सतर्क और सख्त रुख अपना रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में क्या कहता है कानून</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कानून के अनुसार बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी प्रकार की सामग्री का निर्माण, संग्रह, डाउनलोड, खरीद, बिक्री, प्रसारण या साझा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67B के तहत ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। पहली बार दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की कैद और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। दोबारा अपराध करने पर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अन्य संबंधित कानूनों के तहत भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों पर यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे अवैध और आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर त्वरित कार्रवाई करें। इन नियमों के अनुसार कंपनियों को जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना और शिकायत मिलने पर समयबद्ध तरीके से सामग्री हटाना अनिवार्य है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>यदि ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की सलाह है कि यदि किसी उपयोगकर्ता को इस प्रकार का कोई भी संदिग्ध या अवैध कंटेंट दिखाई देता है तो उसे किसी भी स्थिति में डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इंटरनेट और सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि इन प्लेटफॉर्म पर मौजूद अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए।  केवल सरकार या सोशल मीडिया कंपनियां ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ेगी निगरानी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार की इस कार्रवाई को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन स्वीकृति प्रक्रिया और सुरक्षा तंत्र की अधिक सख्ती से निगरानी की जाएगी। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ आईटी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाना और बच्चों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 13:31:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीमा रिफंड के नाम पर 1.60 करोड़ की साइबर ठगी, दिल्ली से तीन आरोपी गिरफ्तार; नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़े तार</title>
                                    <description><![CDATA[खुद को बीमा लोकपाल अधिकारी बताकर पीड़ित से कई किश्तों में रकम वसूली, बैंक खातों के जरिए संचालित हो रहा था अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क; दुर्ग पुलिस ने मोबाइल, पासबुक और चेकबुक समेत अहम साक्ष्य किए जब्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cyber-fraud-of-rs-160-crore-in-the-name-of/article-57787"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल एक नाइजीरियन साइबर नेटवर्क कर रहा था, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन किए गए।</p>
<p>दुर्ग रेंज साइबर थाना में दर्ज इस मामले की जांच कई दिनों से चल रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने खुद को बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि उसकी पुरानी बीमा पॉलिसी का रिफंड मंजूर हो गया है और राशि प्राप्त करने के लिए कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसी बहाने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम जमा कराई गई।</p>
<p>पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दी जाएगी और बीमा क्लेम भी जारी हो जाएगा। लेकिन हर बार नई वजह बताकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती रही। इस तरह आरोपी लगातार पीड़ित को झांसे में रखते हुए उससे कुल करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी करने में सफल रहे।</p>
<p>जब लंबे समय तक न तो रिफंड मिला और न ही कोई भुगतान हुआ, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने दुर्ग रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण किया।</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले एक बैंक खाताधारक की पहचान की, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। उससे पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर पुलिस की विशेष टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां से मनमीत सिंह, ईशांत माहे उर्फ ईशु और अमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने नाम से बैंक खाते खुलवाए थे और पैसों के लालच में इन्हें साइबर ठगों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर की जाती थी, ताकि वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।</p>
<p>जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन एक नाइजीरियन साइबर गिरोह द्वारा किया जा रहा था। यही गिरोह बैंक खातों का उपयोग कर देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में कई साइबर अपराधों में शामिल हो सकता है।</p>
<p>दिल्ली से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 1 जुलाई को हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें तीस हजारी कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दुर्ग लाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा ठगी की रकम आखिर किन-किन खातों तक पहुंची।</p>
<p>तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, छह बैंक पासबुक, चार चेकबुक और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि अलग-अलग राज्यों में इन आरोपियों के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं।</p>
<p>एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर ने बताया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाते थे। पहले वे बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का भरोसा दिलाते, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, दस्तावेज सत्यापन, बीमा क्लियरेंस और अन्य शुल्क के नाम पर किस्तों में रकम जमा कराते थे। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास होता, तब तक रकम कई बैंक खातों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं। बीमा रिफंड, केवाईसी अपडेट, निवेश योजना, लॉटरी, इनाम और सरकारी योजना के नाम पर आने वाले कॉल, मैसेज या ईमेल पर बिना पुष्टि किए भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।</p>
<p>दुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे जमा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दे। समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी की गई रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोशल मीडिया दोस्ती से फंसी युवती, पांच साल का शोषण मामला</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के जामिया नगर में दर्ज FIR में युवती ने यौन शोषण, धमकी और जबरन निकाह के गंभीर आरोप लगाए, पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/five-years-old-exploitation-case-of-girl-trapped-due-to/article-57569"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/meerut-faheem-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">राजधानी दिल्ली के जामिया नगर थाना क्षेत्र में एक युवती द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। 23 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती धीरे-धीरे एक लंबे शोषण, धमकी और बंधक जैसी स्थिति में बदल गई। पीड़िता का कहना है कि उसे प्रेम के जाल में फंसाकर कई वर्षों तक मानसिक और शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पीड़िता की पहचान बदलकर सामने आई शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2021 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक युवक से उसकी बातचीत शुरू हुई थी।<img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/delhi-news.jpg" alt="Delhi News" width="1366" height="1037"></img></p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><br />शुरुआत में यह बातचीत सामान्य दोस्ती तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे यह रिश्ता गहराता गया। पीड़िता का आरोप है कि युवक ने पहले खुद को अलग पहचान के साथ पेश किया और बाद में उस पर मिलने और रिश्ते में बने रहने का दबाव बनाया। शिकायत के अनुसार मुलाकातों के दौरान कथित तौर पर उसे नशीला पदार्थ दिए जाने और उसके साथ शोषण की घटनाओं का दावा किया गया है। इसके बाद आरोपी द्वारा वीडियो बनाकर धमकाने और ब्लैकमेल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि धमकी और डर के कारण वह लंबे समय तक चुप रही और आरोपी के संपर्क में बनी रही। आरोप है कि इस दौरान उसे बार-बार अलग-अलग स्थानों पर बुलाया जाता था और विरोध करने पर वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में उसे एक अन्य स्थान पर ले जाकर जबरन रोके रखा गया और वहां उसकी पहचान और निजी स्वतंत्रता को सीमित कर दिया गया। इस पूरे मामले में पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके परिवार को गुमराह करने के लिए गलत जानकारी दी गई, जिससे वह लंबे समय तक लापता स्थिति में रही।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/meerut-faheem-(1).jpg" alt="MEERUT FAHEEM (1)" width="731" height="800"></img></p>
<p>मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि पीड़िता को कई बार अलग-अलग लोगों के संपर्क में लाया गया, जिससे उसका मानसिक और शारीरिक शोषण हुआ। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि बयान, डिजिटल साक्ष्य और मोबाइल डेटा के आधार पर पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/jamia-nagar-case.jpg" alt="Jamia Nagar Case" width="1366" height="1037"></img></p>
<p>जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पीड़िता की शिकायत में गंभीर आरोप हैं, जिनमें यौन शोषण, धमकी, जबरन रोककर रखना और पहचान बदलने जैसे पहलू शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलते ही संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया और कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसमें कोई संगठित तरीके से की गई आपराधिक गतिविधि शामिल थी या नहीं। पीड़िता के अनुसार यह पूरा मामला धीरे-धीरे एक जाल में बदल गया, जिसमें वह खुद को फंसा हुआ महसूस करने लगी थी। उसका दावा है कि मानसिक दबाव और धमकियों के कारण उसने कई वर्षों तक किसी से खुलकर बात नहीं की। बाद में हालात बिगड़ने पर उसने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उसे सुरक्षा और काउंसलिंग सहायता भी उपलब्ध कराई है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/exploitation-case.jpg" alt="Exploitation Case" width="1366" height="978"></img></p>
<p>अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ी जा रही है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसमें किसी तरह का आर्थिक या संगठित नेटवर्क भी शामिल था।इस मामले के सामने आने के बाद इलाके में भी चर्चा का माहौल है। स्थानीय स्तर पर लोग इस घटना को सोशल मीडिया के दुरुपयोग और ऑनलाइन रिश्तों में सावधानी बरतने की जरूरत से जोड़कर देख रहे हैं। पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन बातचीत में सतर्कता बरती जाए और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत शिकायत की जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:37:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वॉट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार की नजर, साइबर फ्रॉड की आशंका के बीच होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल नंबर छिपाकर चैट की सुविधा पर केंद्र सतर्क, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/government-eyes-investigation-on-whatsapp-username-feature-amid-fear-of/article-57554"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-khanna-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में करोड़ों लोग रोजमर्रा की बातचीत के लिए वॉट्सएप का इस्तेमाल करते हैं और अब इस लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का नया यूजरनेम फीचर लॉन्च होने से पहले ही चर्चा में आ गया है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस नए फीचर की विस्तार से जांच की जाएगी। सरकार की चिंता यह है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत कर सकेंगे, तो इसका गलत इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। विशेष रूप से साइबर अपराध, फर्जी पहचान बनाकर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। वॉट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा ने हाल ही में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसके जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से बातचीत कर सकेंगे। इस सुविधा में हर यूजर अपना एक अलग और यूनिक यूजरनेम बना सकेगा। भविष्य में कोई नया व्यक्ति मोबाइल नंबर की बजाय इसी यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेगा। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स की निजता को पहले से अधिक मजबूत बनाना है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर सतर्क हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इतने बड़े डिजिटल नेटवर्क में यदि फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इसी कारण सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों, पहचान सत्यापन प्रक्रिया और फर्जी खातों को रोकने की व्यवस्था की समीक्षा करेगी। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई डिजिटल सुविधा को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका उपयोग सुरक्षित तरीके से हो और आम नागरिक किसी तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार न बनें। मेटा ने 29 जून से दुनिया के अलग-अलग देशों में यूजरनेम बुकिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। आने वाले महीनों में इसे चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जाएगा। जैसे ही किसी क्षेत्र में यह सुविधा शुरू होगी, संबंधित यूजर्स को वॉट्सएप के भीतर नोटिफिकेशन मिलेगा और वे अपनी पसंद का यूजरनेम सुरक्षित कर सकेंगे। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय और छोटे यूजरनेम पहले बुक होने की संभावना ज्यादा रहती है, इसलिए कई लोग इस फीचर का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वॉट्सएप का कहना है कि यह फीचर खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए उपयोगी होगा, जहां लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं लेकिन अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते। उदाहरण के तौर पर किसी बिजनेस नेटवर्किंग कार्यक्रम, स्कूल के पैरेंट्स ग्रुप, नए सहकर्मी या किसी सामुदायिक कार्यक्रम में मिले व्यक्ति से संपर्क करते समय यूजर सिर्फ अपना यूजरनेम साझा कर सकेगा। इससे मोबाइल नंबर निजी रहेगा और यूजर की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित बनी रहेगी। कंपनी ने यूजरनेम बनाने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। यूजरनेम की लंबाई तीन से 35 कैरेक्टर के बीच होगी। इसमें केवल छोटे अंग्रेजी अक्षर, अंक, डॉट और अंडरस्कोर का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और जरूरत पड़ने पर उसे बदला या हटाया भी जा सकेगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से किसी यूजर का मोबाइल नंबर सेव है या जिनसे पहले बातचीत हो चुकी है, उनके लिए चैटिंग का तरीका नहीं बदलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कंपनी यूजरनेम की नाम का एक वैकल्पिक सुरक्षा फीचर भी ला रही है। यह एक अतिरिक्त सुरक्षा कोड की तरह काम करेगा। यदि कोई यूजर इस सुविधा को सक्रिय करता है, तो सिर्फ यूजरनेम जान लेने से कोई भी व्यक्ति उसे मैसेज नहीं भेज पाएगा। पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को पहले यह सुरक्षा की दर्ज करनी होगी, तभी बातचीत शुरू हो सकेगी। कंपनी का दावा है कि इससे स्पैम मैसेज और अनचाहे संपर्कों को काफी हद तक रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। जहां एक ओर यूजरनेम फीचर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर इसकी आड़ में फर्जी पहचान बनाकर अपराध करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार इस फीचर के तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:45:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ZIP फाइल खोलते ही फोन हो सकता है हैक, 'बॉस फ्रॉड' से बढ़ा साइबर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सीईओ या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज और ZIP फाइलों के जरिए साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। गृह मंत्रालय और साइबर विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/phone-can-be-hacked-as-soon-as-zip-file-is/article-57430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/boss-zip-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है, जिसे ‘बॉस ZIP फ्रॉड’ या ‘CEO इम्पर्सनेशन स्कैम’ कहा जा रहा है। इस साइबर ठगी में अपराधी किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं और कर्मचारियों को व्हाट्सएप, ई-मेल या दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संदेश भेजते हैं। इन संदेशों के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे जरूरी दस्तावेज, सिक्योरिटी अपडेट या तत्काल कार्रवाई से जुड़ी फाइल बताकर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही कर्मचारी इस फाइल को डाउनलोड या खोलता है, उसका मोबाइल या सिस्टम मैलवेयर की चपेट में आ सकता है। इसके बाद साइबर ठग डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। गृह मंत्रालय ने भी लोगों को इस तरह के साइबर हमलों से सतर्क रहने की सलाह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले 30 महीनों के दौरान केवल छत्तीसगढ़ में ही साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है। पहले जहां फर्जी कॉल और ओटीपी फ्रॉड अधिक देखने को मिलते थे, वहीं अब सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक दबाव में लाकर उनसे गलत कदम उठवाए जा रहे हैं। अपराधी अक्सर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला बिना सोचे-समझे ZIP फाइल डाउनलोड कर ले। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन ZIP फाइलों के अंदर कई बार EXE, DLL या अन्य हानिकारक फाइलें छिपी होती हैं। जैसे ही ऐसी फाइल सक्रिय होती है, डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद अपराधी मोबाइल या कंप्यूटर की कई जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में बैंकिंग ऐप, सेव किए गए पासवर्ड, मैसेज, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है। कुछ मामलों में अपराधी डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं और उपयोगकर्ता को इसकी भनक तक नहीं लगती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस तरह की ठगी का एक और खतरनाक पहलू यह है कि साइबर अपराधी मोबाइल में सेव संपर्कों के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में असली अधिकारी या बॉस का नंबर हटाकर ठग अपना नंबर सेव कर देते हैं। इसके बाद कर्मचारी को लगता है कि वह अपने वरिष्ठ अधिकारी से ही बात कर रहा है। फिर तत्काल भुगतान, गोपनीय दस्तावेज भेजने या किसी खाते में रकम ट्रांसफर करने जैसे निर्देश दिए जाते हैं। जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर अपराधी बड़ी रकम की ठगी कर लेते हैं।  किसी भी अनजान ZIP फाइल, EXE फाइल या DLL फाइल को बिना जांचे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक कोई संदिग्ध संदेश आए और उसमें तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाए तो पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। फोन कॉल, वीडियो कॉल या सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि की जा सकती है। केवल व्हाट्सएप मैसेज या ई-मेल के आधार पर कोई आर्थिक लेनदेन करना या फाइल डाउनलोड करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अपडेटेड सुरक्षा प्रणाली का उपयोग किया जाए। व्हाट्सएप सहित अन्य जरूरी ऐप्स में टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखना चाहिए। मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर उन्हें बदलते रहें। किसी भी अज्ञात लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत की जांच जरूर करें। यदि कंपनी में काम करते हैं तो साइबर सुरक्षा से जुड़े आंतरिक दिशा-निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट होल्डर्स को गिरफ्तार किया था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने ऐसे गिरोह का भी खुलासा किया, जो अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस लगातार संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने और समय रहते पीड़ितों की रकम रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन बढ़ते मामलों के कारण चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। अगर कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय गंवाए बिना अपने बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए ताकि लेनदेन रोका जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार साबित होता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भूपेश चैट विवाद में जेल बंद दो यूट्यूबर्स पर दूसरी FIR दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[महिला ने लगाया ब्लैकमेलिंग और उगाही का आरोप, वीडियो हटाने के बदले पहले 50 हजार और फिर 2 लाख रुपए मांगने की शिकायत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3f8b5a2fbd1/article-57133"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhupesh-baghel-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">दुर्ग जिले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट विवाद में गिरफ्तार दो यूट्यूबर्स सागर साहू और पुष्पराज सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इस बार दोनों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और उगाही के आरोप में दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत एक महिला ने की है, जिसने आरोप लगाया है कि वीडियो हटाने के बदले उससे पहले 50 हजार रुपए मांगे गए और बाद में 2 लाख रुपए की मांग करते हुए बदनाम करने की धमकी दी गई। फिलहाल दोनों आरोपी पहले से ही कथित इंस्टाग्राम चैट मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। मामला दुर्ग जिले के पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता नेहा मिश्रा ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से अपने गांव उमदा में ग्राहक सेवा केंद्र संचालित कर रही हैं। उनके अनुसार कुछ समय पहले सागर साहू और पुष्पराज सिंह आधार कार्ड की फोटोकॉपी कराने के बहाने उनके केंद्र पहुंचे थे। महिला का आरोप है कि बातचीत के दौरान रिकॉर्ड की गई बातों को तोड़-मरोड़कर एक वीडियो तैयार किया गया और बाद में उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खबर के रूप में प्रसारित कर दिया गया। महिला का कहना है कि वीडियो वायरल होने के बाद उनकी छवि प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों के बीच गलत संदेश गया और उनके ग्राहक सेवा केंद्र की साख पर भी असर पड़ा। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 3 जून को वीडियो हटाने के एवज में आरोपियों ने 50 हजार रुपए की मांग की। बदनामी के डर और सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी से 35 हजार रुपए आरोपियों को दिए। महिला का दावा है कि पैसे मिलने के बाद संबंधित वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि शिकायत के मुताबिक मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। महिला ने आरोप लगाया कि कुछ समय बाद दोनों यूट्यूबर्स ने दोबारा संपर्क किया और इस बार 2 लाख रुपए की मांग की। शिकायत में कहा गया है कि रकम नहीं देने पर नए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने और लगातार बदनाम करने की धमकी दी गई। महिला का आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने के बाद आरोपियों ने तीन से अधिक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिए, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यावसायिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा। महिला ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि वायरल वीडियो के बाद उन्हें अपने ग्राहक सेवा केंद्र जाने में भी असहजता महसूस होने लगी। कई लोगों ने उनसे सवाल पूछे, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ा। उन्होंने पुलिस से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति के साथ इस तरह की घटना न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच की। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर सागर साहू और पुष्पराज सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(2) सहित अन्य लागू प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य धाराओं की आवश्यकता होगी तो उन्हें भी जोड़ा जा सकता है। यह पहला मामला नहीं है जब दोनों यूट्यूबर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई हो। करीब नौ दिन पहले भी दोनों पर एक अन्य मामला दर्ज किया गया था। वह मामला महादेव सट्टा ऐप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर के नाम से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट के वायरल स्क्रीनशॉट से संबंधित था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित स्क्रीनशॉट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम से एक संदेश दिखाई दिया था, जिसमें लिखा गया था कि "नंबर भेजो अपना, बात करना चाहते हैं।" इसी कथित चैट के आधार पर दोनों यूट्यूबर्स ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो और खबरें प्रसारित की थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">वायरल कंटेंट सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई थी। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भिलाई-3 थाने पहुंचे थे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सार्वजनिक रूप से इस कथित चैट और उससे जुड़े कंटेंट को पूरी तरह फर्जी बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी लीगल टीम इस तरह की झूठी और भ्रामक सामग्री तैयार करने तथा प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। अब महिला की शिकायत पर दर्ज हुई दूसरी एफआईआर ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच अलग-अलग तथ्यों के आधार पर की जा रही है। यदि जांच में ब्लैकमेलिंग, उगाही या सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने के आरोप साबित होते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:36:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लॉ स्टूडेंट ने NEET पेपर बेचने का झांसा देकर छात्रों से ठगी, इंस्टाग्राम के जरिए वसूले पैसे</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर क्राइम ब्रांच ने फर्स्ट ईयर लॉ छात्र को किया गिरफ्तार, 30 से 35 छात्रों से ऑनलाइन भुगतान लेने का आरोप; फर्जी लिंक और एडिटेड सामग्री के जरिए चला रहा था खेल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38dc8ab116e/article-56636"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-paper-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर में NEET परीक्षा को लेकर छात्रों को गुमराह कर ऑनलाइन ठगी करने का एक मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने एक ऐसे लॉ स्टूडेंट को गिरफ्तार किया है जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का दावा कर छात्रों से पैसे वसूल रहा था। आरोपी छात्रों को यह विश्वास दिलाता था कि उसके पास परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री और प्रश्नपत्र मौजूद हैं। जांच में सामने आया है कि उसने फर्जी लिंक और भ्रामक पोस्ट के जरिए कई छात्रों को अपने जाल में फंसाया और उनसे ऑनलाइन भुगतान प्राप्त किया। क्राइम ब्रांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान अक्षय मालवीय के रूप में हुई है, जो लसूड़िया क्षेत्र के आंगन शक्करखेड़ी का निवासी है। वह इंदौर के एक लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र बताया जा रहा है। आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।  मामले की शुरुआत तब हुई जब राजस्थान के कोटा से पुलिस ने इंदौर पुलिस को एक ई-मेल भेजकर आरोपी की गतिविधियों की जानकारी साझा की। बताया जा रहा है कि आरोपी की ऑनलाइन गतिविधियां कई दिनों से संदिग्ध थीं और उसकी प्रोफाइल पर लगातार ऐसे पोस्ट डाले जा रहे थे जिनमें NEET परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था। सूचना मिलने के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच की एसआईटी सक्रिय हुई और शनिवार देर रात आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर आकर्षक पोस्ट और संदेश वायरल करता था। इन पोस्ट में दावा किया जाता था कि छात्रों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या विशेष अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। कई छात्र परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद में इन दावों पर विश्वास कर लेते थे। पोस्ट के साथ एक लिंक भी साझा किया जाता था, जिस पर क्लिक करने के बाद छात्रों को भुगतान करने के लिए कहा जाता था। बताया जा रहा है कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों को ऐसी सामग्री भेजी जाती थी जिसे परीक्षा का असली पेपर बताया जाता था। हालांकि जांच में सामने आया है कि यह सामग्री वास्तविक प्रश्नपत्र नहीं थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पुराने प्रश्नपत्रों और पहले से उपलब्ध अध्ययन सामग्री को एडिट कर नए पेपर के रूप में प्रस्तुत करता था। छात्र यह समझते थे कि उन्हें परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल रही है, जबकि वास्तव में उन्हें गुमराह किया जा रहा था। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए करीब 30 से 35 लोगों से रकम प्राप्त की है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कुल कितनी राशि एकत्र की गई और किन-किन राज्यों के छात्र इस ठगी का शिकार बने। जांच एजेंसियां आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की भी जांच कर रही हैं ताकि लेन-देन का पूरा विवरण सामने आ सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी पहले भी साइबर पुलिस की निगरानी में रहा है। NEET परीक्षा को लेकर पिछले वर्ष हुए विवाद और परीक्षा रद्द होने की चर्चाओं के दौरान भी उसने इसी तरह की भ्रामक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की थीं। उस समय भी उसकी गतिविधियों को लेकर शिकायतें मिली थीं, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इस बार डिजिटल सबूत मिलने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की ऑनलाइन ठगी केवल आर्थिक अपराध नहीं है बल्कि छात्रों के भविष्य और मानसिक स्थिति से भी जुड़ा मुद्दा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई छात्र तनाव और दबाव में रहते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति परीक्षा का पेपर या विशेष सामग्री उपलब्ध कराने का दावा करता है तो कुछ छात्र उसके झांसे में आ जाते हैं। इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर आरोपी कथित तौर पर पैसे वसूल रहा था। क्राइम ब्रांच अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई और व्यक्ति या समूह भी जुड़ा हुआ था। पुलिस को संदेह है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट को व्यापक स्तर पर फैलाने और भुगतान की प्रक्रिया संभालने में अन्य लोगों की भी भूमिका हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि नेटवर्क में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी परीक्षा से जुड़ी ऐसी भ्रामक पोस्ट, लिंक या संदेश पर भरोसा न करें। परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का दावा करने वाले अधिकांश संदेश फर्जी होते हैं और उनका उद्देश्य लोगों से पैसे ठगना होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:08:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में RTO ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी, कर्मचारी से ₹2.63 लाख उड़ाए</title>
                                    <description><![CDATA[एपीके फाइल डाउनलोड करते ही बैंक खाते से साफ हुई रकम, पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/cyber-fraud-in-the-name-of-rto-e-challan-in-raipur/article-56475"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायपुर में साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आरटीओ ई-चालान के नाम पर एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाकर 2.63 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। घटना आजाद चौक थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां साइबर अपराधियों ने एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में घुसपैठ कर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। पीड़ित की पहचान प्रेम नगर, मोवा निवासी 35 वर्षीय आशीष वर्मा के रूप में हुई है, जो हिंदूजा फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं और उनका कार्यालय आजाद चौक क्षेत्र में स्थित है। जानकारी के मुताबिक 6 जून की दोपहर करीब 12:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया, जिसमें आरटीओ ई-चालान का हवाला दिया गया था। संदेश के साथ एक एपीके फाइल भी भेजी गई थी, जिसे देखकर पीड़ित ने इसे आधिकारिक नोटिस समझ लिया। बिना किसी शक के उन्होंने उस फाइल को डाउनलोड कर ओपन कर लिया, और यहीं से साइबर ठगों ने अपने जाल को सक्रिय कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">फाइल खुलते ही मोबाइल में एक मालवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस तक पहुंच मिल गई। कुछ ही समय में पीड़ित के एक्सिस बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 2 लाख 63 हजार 673 रुपये निकाल लिए गए। शुरुआत में आशीष वर्मा को किसी तरह की जानकारी नहीं हुई, लेकिन जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो बड़ी रकम गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल आजाद चौक थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड हो सकता है, जिसमें फर्जी लिंक और एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल को टारगेट किया जाता है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है, जिससे रकम ट्रांसफर की गई थी। साथ ही साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में ठग आमतौर पर सरकारी विभागों जैसे आरटीओ, बैंक या ट्रैफिक चालान का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति बिना जांच के लिंक या फाइल ओपन करता है, उसका फोन रिमोट एक्सेस में चला जाता है और बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान संदेश, लिंक या एपीके फाइल को बिना सत्यापन के डाउनलोड न करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कई बार लोग जल्दबाजी में आधिकारिक दिखने वाले संदेशों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में सुरक्षा जितनी आसान लगती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ में एल्युमिनियम व्यापारी से 50 हजार की ठगी, सस्ता माल देने का झांसा देकर आरोपी फरार</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर की फर्जी फर्म बताकर लिया ऑर्डर, एडवांस राशि लेने के बाद न माल पहुंचाया और न लौटाए पैसे, लैलूंगा थाने में मामला दर्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-the-accused-cheated-an-aluminum-trader-of-rs/article-56396"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एल्युमिनियम कारोबारी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यापारी से आरोपी ने खुद को रायपुर का एल्युमिनियम सप्लायर बताकर 50 हजार रुपए की ठगी कर ली। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बाजार से कम कीमत पर एल्युमिनियम सेक्शन उपलब्ध कराने का दावा किया था। सस्ते दाम और जल्दी डिलीवरी का भरोसा देकर उसने व्यापारी से ऑर्डर लिया और एडवांस भुगतान हासिल कर लिया। रकम मिलने के बाद आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांधी नगर वार्ड क्रमांक 7 निवासी विजय राणा एल्युमिनियम सेक्शन और ग्लास का कारोबार करते हैं। उनकी दुकान विजय एल्युमिनियम एंड ग्लास शॉप के नाम से संचालित होती है। 29 मई को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एल्युमिनियम सेक्शन का व्यापारी बताते हुए अपना नाम मुकेश शर्मा बताया। उसने दावा किया कि उसकी फर्म रायपुर के भनपुरी स्थित बंजारी माता मंदिर के पास संचालित होती है और वह लंबे समय से एल्युमिनियम व्यापार से जुड़ा हुआ है। बातचीत के दौरान आरोपी ने बाजार की तुलना में कम कीमत पर माल उपलब्ध कराने की बात कही। व्यापारी को सौदा लाभदायक लगा और दोनों के बीच माल सप्लाई को लेकर चर्चा आगे बढ़ी। बताया गया कि आरोपी ने पांच बंडल एल्युमिनियम सेक्शन का ऑर्डर बुक किया, जिसकी कुल कीमत 1 लाख 23 हजार 843 रुपए तय हुई। सौदा तय होने के बाद आरोपी ने भुगतान के लिए एक क्यूआर कोड और मोबाइल नंबर भेजा। यह क्यूआर कोड शिवम कुमार नाम के व्यक्ति के नाम पर बताया गया। आरोपी ने माल भेजने से पहले 50 हजार रुपए एडवांस जमा करने की मांग की। कारोबारी ने भरोसा करते हुए उसी दिन बताए गए खाते में ऑनलाइन माध्यम से 50 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। आरोपी ने कहा कि दो दिनों के भीतर पूरा माल निर्धारित पते पर पहुंच जाएगा और बाकी भुगतान डिलीवरी के समय लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि तय समय गुजरने के बाद भी सामान नहीं पहुंचा। शुरुआत में व्यापारी ने सोचा कि परिवहन में देरी हो सकती है, लेकिन जब लगातार दो दिन और बीत गए तो उन्हें शक होने लगा। उन्होंने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल नंबर पर बात नहीं हो सकी। कई बार कॉल करने और संदेश भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच व्यापारी ने अपने स्तर पर आरोपी और उसकी बताई गई फर्म के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि जिस नाम और पते का उपयोग कर सौदा किया गया था, वह संदिग्ध है। कथित फर्म का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला और व्यापारी को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद विजय राणा ने पूरे मामले की शिकायत लैलूंगा थाना पहुंचकर दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने भुगतान की रसीद, मोबाइल नंबर और अन्य उपलब्ध जानकारी पुलिस को सौंपी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन लेनदेन और मोबाइल नंबर से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की जानकारी भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।पुलिस का कहना है कि वर्तमान समय में व्यापारियों को इस तरह के फर्जी सौदों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। कई मामलों में आरोपी खुद को बड़े सप्लायर या प्रतिष्ठित कारोबारी बताकर कम कीमत का लालच देते हैं और एडवांस राशि लेकर गायब हो जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी नए सप्लायर की पहचान, फर्म का पंजीकरण और व्यवसायिक रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है। केवल मोबाइल पर हुई बातचीत या सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर आर्थिक लेनदेन करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:12:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दुर्ग में साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन, 6 आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन, 30 संदिग्ध खाताधारकों की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-action-on-cyber-fraud-network-in-durg-6-accused/article-56298"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उतई पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने ऐसे छह लोगों को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली। इसके बाद जांच शुरू की गई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान उतई क्षेत्र में संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ खातों को चिन्हित किया गया। इन खातों के लेन-देन की पड़ताल करने पर कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि खातों में बड़ी मात्रा में ऐसी रकम जमा की गई थी, जिसका संबंध साइबर ठगी के मामलों से था। खाते में पैसा आने के बाद उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या फिर नकद निकाल लिया जाता था। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है। पुलिस ने जांच के आधार पर इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में चिह्नित किया और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक इन खातों में लगातार संदिग्ध ट्रांजेक्शन होती रही। बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों के विश्लेषण के बाद पुलिस को यह आशंका हुई कि यह कोई सामान्य बैंकिंग गतिविधि नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क है। अधिकारियों ने बैंकिंग दस्तावेज, खातों की केवाईसी जानकारी और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच की। इसके आधार पर छह खाताधारकों की पहचान की गई, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम कार्ड अन्य लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी इसके बदले आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे। उन्हें खाते उपलब्ध कराने के एवज में कुछ राशि दी जाती थी। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों या शहरों में की गई ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधियों के लिए ऐसे खाते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके जरिए ठगी के पैसों का स्रोत और अंतिम गंतव्य छिपाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई को साइबर अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चंद्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) शामिल हैं। सभी आरोपी भिलाई के सेक्टर-7 क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खातों से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त सामग्री की फोरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है और मामले की जांच अभी जारी है। अब तक कुल 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल करने वाले मुख्य साइबर अपराधी कौन हैं और उनका नेटवर्क किन राज्यों तक फैला हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। साइबर अपराध लगातार बदलते स्वरूप में सामने आ रहे हैं और अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या सिम कार्ड किसी अन्य के उपयोग के लिए नहीं देना चाहिए। ऐसा करना न केवल वित्तीय जोखिम पैदा करता है बल्कि व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:06:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>डेटा सुरक्षा भी सीमा सुरक्षा जितनी जरूरी, साइबर रिसर्च सेंटर बनेगा: मुख्यमंत्री मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में साइबर सुरक्षा कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- डेटा आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति, प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2fecf36a849/article-56019"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cyber-security-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डिजिटल युग में तेजी से बढ़ती तकनीक और साइबर खतरों के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” विषयक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज के दौर में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है और इसकी सुरक्षा देश की सीमाओं की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा करते हुए साइबर अपराधों से निपटने के लिए मजबूत और आधुनिक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदला है। हर दिन नए प्रकार के साइबर हमले और डिजिटल अपराध सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के दौरान आधुनिक तकनीकों और ड्रोन आधारित गतिविधियों ने सुरक्षा के नए आयाम सामने रखे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य की चुनौतियां पहले से कहीं अधिक जटिल होंगी। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समय रहते साइबर अपराध, डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को गंभीरता से लिया और देशभर में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई पहल शुरू कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों का भरोसा बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा अनिवार्य है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना की घोषणा की। यह केंद्र महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह साइबर हमलों की पूर्व पहचान और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा, जिससे संभावित खतरों को समय रहते रोका जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार डिजिटल प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभिन्न योजनाओं और सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाया जा रहा है। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने पारदर्शिता बढ़ाई है और लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाना संभव बनाया है। दुनिया आज भारत की यूपीआई भुगतान प्रणाली की सराहना कर रही है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामले कई बार ऐसे होते हैं जिनमें लोगों की वर्षों की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में ठगी का शिकार हो जाती है। ऐसे अपराध दिखाई नहीं देते, लेकिन उनका प्रभाव बेहद गंभीर होता है। इसलिए साइबर अपराधों की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई और जनजागरूकता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डेटा ब्रीच जैसी घटनाओं में सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय होती है, इसलिए डेटा सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में नागरिकों को बड़ी संख्या में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इन्हें सुरक्षित बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि और वित्तीय जानकारी जैसे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत नीतिगत और तकनीकी ढांचे की आवश्यकता है। एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इन प्रणालियों को और उन्नत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में एडीजी ए. साई मनोहर ने बताया कि प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए लगातार क्षमता बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में साइबर कमांडो की विशेष टीम कार्यरत है और आने वाले समय में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि सिंहस्थ-2028 से पहले 44 साइबर कमांडो तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों और युवा स्वयंसेवकों को साइबर वॉरियर के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है। कार्यशाला के दौरान डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, साइबर अपराध नियंत्रण, डिजिटल अवसंरचना सुरक्षा, सुरक्षित एआई तकनीक और डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुति दी। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने समूह चर्चाओं में भाग लेकर साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर सुझाव भी साझा किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:09:32 +0530</pubDate>
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