<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/crime-news/tag-2253" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Crime News - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/2253/rss</link>
                <description>Crime News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सरगुजा में दो भीषण सड़क हादसे, चार लोगों की मौत; मैनपाट में तीन युवकों ने गंवाई जान</title>
                                    <description><![CDATA[तेज रफ्तार दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन युवकों की मौत, नेशनल हाईवे-43 पर ट्रक की चपेट में आने से महिला की जान गई; पुलिस जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/four-people-died-in-two-horrific-road-accidents-in-surguja/article-58490"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surguja-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में शुक्रवार रात दो अलग-अलग सड़क हादसों ने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। जिले के मैनपाट क्षेत्र में तेज रफ्तार दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि कुछ ही घंटों बाद नेशनल हाईवे-43 पर एक अज्ञात ट्रक की टक्कर से बाइक सवार महिला की जान चली गई। दोनों हादसों के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने दोनों मामलों में जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा रहा है। शुरुआती जांच में मैनपाट हादसे में तेज रफ्तार को प्रमुख वजह माना जा रहा है, जबकि हाईवे हादसे में ट्रक चालक की लापरवाही की आशंका जताई गई है। मृतकों की पहचान अर्जुन लोहार (23), विफल कुमार माझी (21), गुड्डू राम (22) और रीता एक्का (48) के रूप में हुई है। पुलिस ने शवों का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। इन घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>पहला हादसा कमलेश्वरपुर थाना क्षेत्र के नर्मदापुर-बिजलहवा मुख्य मार्ग पर शुक्रवार रात करीब आठ बजे हुआ। पुलिस के अनुसार दो तेज रफ्तार बाइक आमने-सामने टकरा गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और सवार कई फीट दूर सड़क पर जा गिरे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन लुंड्रा निवासी अर्जुन लोहार और सीतापुर के कोट गांव निवासी गुड्डू राम की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। तीसरे युवक विफल कुमार माझी को गंभीर हालत में पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। परिजनों ने बताया कि विफल कुमार अपने दोस्त गुड्डू राम के साथ मैनपाट घूमने गया था और लौटते समय यह दर्दनाक हादसा हो गया। वहीं अर्जुन लोहार अपनी ससुराल नर्मदापुर जा रहा था। उसकी शादी करीब एक वर्ष पहले हुई थी और परिवार में उसकी अचानक मौत से मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दोनों क्षतिग्रस्त बाइकों को जब्त कर लिया है। प्रारंभिक जांच में मौसम सामान्य होने की बात सामने आई है, इसलिए दुर्घटना की प्रमुख वजह तेज रफ्तार और नियंत्रण खोना माना जा रहा है। हालांकि पुलिस तकनीकी जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरी घटना की पड़ताल कर रही है।</p>
<p>दूसरा हादसा नेशनल हाईवे-43 पर सेदम बाजार के पास हुआ, जहां बाइक से घर लौट रहे दंपती को पीछे से आ रहे एक अज्ञात ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में देवरी निवासी 48 वर्षीय रीता एक्का की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति सुखन एक्का गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार दोनों सीतापुर से अपने घर लौट रहे थे, तभी तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ट्रक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखते हुए पुलिस ने वाहन चालकों से सावधानी बरतने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।  सरगुजा जिले में एक ही रात चार लोगों की मौत ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/four-people-died-in-two-horrific-road-accidents-in-surguja/article-58490</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/four-people-died-in-two-horrific-road-accidents-in-surguja/article-58490</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/surguja-news.jpg"                         length="144845"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिलाई में नर्सिंग छात्रा की निर्मम हत्या, एकतरफा प्यार में युवक ने PG में घुसकर उतारा मौत के घाट</title>
                                    <description><![CDATA[नंबर ब्लॉक करने से नाराज आरोपी ने ऑनलाइन चाकू मंगवाया, पहले गला दबाया फिर किए कई वार; रायपुर से गिरफ्तार, पुलिस कर रही जांच।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/brutal-murder-of-a-nursing-student-in-bhilai-a-young/article-58489"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhilai-new.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भिलाई में एकतरफा प्यार की सनक ने एक 19 वर्षीय नर्सिंग छात्रा की जान ले ली। दुर्ग जिले के वैशाली नगर थाना क्षेत्र के रामनगर स्थित एक पीजी में रहने वाली खुशी साहू की शुक्रवार को बेरहमी से हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पिंटू साहू लंबे समय से छात्रा को परेशान कर रहा था। युवती द्वारा उसका नंबर ब्लॉक किए जाने के बाद उसने हत्या की साजिश रची और रायपुर से भिलाई पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले छात्रा का गला दबाया और जब वह बेहोश हो गई तो चाकू से उस पर कई वार किए। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने आरोपी को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है और घटनास्थल पर ले जाकर सीन रिक्रिएट भी कराया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और हत्या की पूरी साजिश का खुलासा पूछताछ के बाद किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू पहले से ऑनलाइन मंगवाया था, जिससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार बेमेतरा निवासी खुशी साहू भिलाई में किराये के पीजी में रहकर निजी कॉलेज से फार्मेसी की पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के साथ वह एक कैफे में पार्ट टाइम काम भी करती थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि बलौदाबाजार निवासी 24 वर्षीय पिंटू साहू काफी समय से खुशी के संपर्क में आने की कोशिश कर रहा था और उससे शादी करना चाहता था। युवती ने उसकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया और परेशान किए जाने से तंग आकर उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार कॉल करता रहा। घटना वाले दिन भी उसने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने खुशी की सहेली को फोन किया और उसके बारे में जानकारी ली। सहेली ने बताया कि खुशी कमरे में है और उसके पास मोबाइल नहीं है। इसी जानकारी के बाद आरोपी सीधे पीजी पहुंच गया। उस समय खुशी की रूममेट बाथरूम में थी और खुशी कमरे में अकेली मौजूद थी। पुलिस के अनुसार कमरे में दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान आरोपी ने पहले खुशी का गला दबा दिया। जब वह विरोध नहीं कर सकी तो उसने अपने साथ लाए चाकू से पीठ, पेट और हाथ सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों पर करीब दस बार वार किए। हमले के दौरान आरोपी के हाथ में भी चोट आई। वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार हो गया और रायपुर की ओर निकल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर बाद जब खुशी की सहेली बाथरूम से बाहर आई तो उसने कमरे का भयावह दृश्य देखा। खुशी खून से लथपथ फर्श पर पड़ी थी। उसने तुरंत मकान मालिक और आसपास मौजूद लोगों को सूचना दी। इसके बाद डायल-112 और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। छात्रा को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खुशी ने कुछ दिन पहले अपने भाई को बताया था कि एक युवक लगातार अलग-अलग नंबरों से फोन कर परेशान कर रहा है। परिवार के अनुसार आरोपी ने छात्रा के भाई को भी धमकी दी थी। इतना ही नहीं, जिस कैफे में खुशी काम करती थी वहां के संचालक को भी उसने धमकाया था और खुशी को नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बना रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी का व्यवहार लगातार आक्रामक होता जा रहा था और वह युवती पर शादी के लिए दबाव बना रहा था। जांच में यह भी पता चला कि वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू आरोपी ने ऑनलाइन खरीदा था। इससे पुलिस हत्या की पूर्व नियोजित साजिश के पहलू की भी जांच कर रही है। आरोपी को रायपुर से गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे घटनास्थल पर ले जाकर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और जल्द ही पूरे मामले का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ हत्या सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और उसे न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर एकतरफा प्रेम, पीछा करने और महिलाओं को लगातार परेशान किए जाने जैसे मामलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/brutal-murder-of-a-nursing-student-in-bhilai-a-young/article-58489</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/brutal-murder-of-a-nursing-student-in-bhilai-a-young/article-58489</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bhilai-new.jpg"                         length="104672"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन कथित घोटालों के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल ने किया सरेंडर, EOW की पूछताछ शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष पर शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच; जब्त डायरी में कथित वित्तीय लेन-देन की एंट्री मिलने के बाद कार्रवाई तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ramgopal-aggarwal-accused-of-three-alleged-scams-surrenders-eow-inquiry/article-58276"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ramgopal-agrawal.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने करीब तीन साल बाद रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के कार्यालय पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इसके बाद EOW ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का कहना है कि उनसे कथित वित्तीय लेन-देन, जब्त दस्तावेजों और विभिन्न मामलों में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है। यह मामला उन तीन प्रमुख आर्थिक मामलों से जुड़ा है, जिनकी जांच पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां कर रही हैं। EOW के अनुसार, कोल लेवी मामले की जांच के दौरान कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से जब्त की गई एक डायरी में कथित तौर पर कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की एंट्रियां मिली थीं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन एंट्रियों के आधार पर यह संदेह पैदा हुआ कि कथित रकम रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से कांग्रेस भवन तक पहुंची। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धन का स्रोत क्या था, राशि किसने उपलब्ध कराई, किसने उसे प्राप्त किया और उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया। इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि कथित शराब घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर और उससे जुड़े लोगों ने करोड़ों रुपये रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए थे। वहीं, कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले में भी कारोबारी रोशन चंद्राकर के माध्यम से बड़ी रकम कांग्रेस भवन तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है। रामगोपाल अग्रवाल या कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है। EOW ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से भी लगातार दो दिनों तक पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे पिछले तीन वर्षों के दौरान रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों, उनके संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों और कथित नेटवर्क से जुड़े कई सवाल किए। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान प्राप्त जानकारियों का अन्य दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा का कहना है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका, उनसे जुड़े लोगों के संपर्क, बैंकिंग लेन-देन, धन के स्रोत, उसकी प्राप्ति और उपयोग सहित कई पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी ने बताया कि पूछताछ के दौरान जब्त डायरी, दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और विवेचना में जुटाए गए अन्य साक्ष्यों का उपयोग किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। रामगोपाल अग्रवाल का नाम जिन मामलों में सामने आया है, उनमें कथित 3,000 करोड़ रुपये का शराब घोटाला, लगभग 450 करोड़ रुपये का कोल लेवी मामला और करीब 127 करोड़ रुपये का कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला शामिल है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और कमीशन के नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि इन मामलों में सभी आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। जांच एजेंसियां उनकी गतिविधियों और लोकेशन से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही थीं। अब उनके सरेंडर के बाद जांच को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW के अनुसार वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी शेष है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन कारोबार से जुड़ा मामला है। जांच एजेंसियों के अनुसार कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की कथित अवैध वसूली की गई। एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत में विचाराधीन है।कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। EOW के अनुसार वर्ष 2015 से 2023 के बीच नियमों का उल्लंघन कर कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ramgopal-aggarwal-accused-of-three-alleged-scams-surrenders-eow-inquiry/article-58276</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ramgopal-aggarwal-accused-of-three-alleged-scams-surrenders-eow-inquiry/article-58276</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:15:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/ramgopal-agrawal.jpg"                         length="106896"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में सोनम का जवाबी हलफनामा, खुद को बताया बेगुनाह</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले सोनम रघुवंशी ने कहा- झूठे आरोपों में फंसाया गया, जांच और ट्रायल में लगातार कर रही हूं सहयोग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/raja-raghuvanshi-murder-case-sonams-counter-affidavit-in-supreme-court/article-58261"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raja-raghuvanshi-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर में चर्चा का विषय बने राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है। उसने अदालत से कहा है कि उसे इस मामले में झूठे आरोपों के आधार पर फंसाया गया है और वह शुरुआत से ही जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करती रही है। सोनम ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि वह ट्रायल की प्रक्रिया में भी पूरी तरह शामिल है और अदालत की हर शर्त का पालन कर रही है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस फैसले का असर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में 9 जुलाई को इस मामले की अहम सुनवाई प्रस्तावित है। सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से दायर उस याचिका पर विचार किया जाएगा, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। अदालत के सामने यह सवाल भी रहेगा कि मौजूदा परिस्थितियों में सोनम की जमानत बरकरार रहेगी या नहीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस सुनवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से यह केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और हर सुनवाई के साथ इसमें नए कानूनी पहलू सामने आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनम रघुवंशी ने अपने जवाबी हलफनामे में दावा किया है कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उसने कहा कि जांच एजेंसियों ने उसे गलत तरीके से इस मामले में आरोपी बनाया है। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि वह जांच अधिकारियों के बुलाने पर हर बार उपस्थित हुई है और अदालत की ओर से तय की गई सभी शर्तों का पालन कर रही है। उसके अनुसार वह किसी भी स्तर पर जांच में बाधा नहीं डाल रही और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए पूरा सहयोग कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस मामले में अभी 94 गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। उन्होंने अदालत को जानकारी दी थी कि मुकदमा फिलहाल ट्रायल के महत्वपूर्ण चरण में है और बड़ी संख्या में गवाहों की गवाही शेष है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी जांच की प्रगति और ट्रायल की गति को लेकर कई सवाल पूछे थे। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तारीख तय की थी। माना जा रहा है कि इस बार अदालत मामले की प्रगति और जमानत से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से विचार कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले के अन्य आरोपियों की बात करें तो राज कुशवाह और उसके तीन साथी फिलहाल शिलांग जेल में बंद हैं। वहीं सोनम रघुवंशी को पहले ही सशर्त जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा इस मामले में तीन अन्य आरोपियों और एक मकान मालिक को भी अदालत से जमानत मिली हुई है। हालांकि मुख्य साजिश और हत्या से जुड़े आरोपों की जांच और ट्रायल अभी जारी है। यही वजह है कि इस मामले में हर नई कानूनी कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला पिछले वर्ष उस समय चर्चा में आया था जब इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए। 23 मई को दोनों के अचानक लापता होने की खबर सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर तलाश अभियान शुरू किया। कई दिनों तक खोजबीन के बाद 3 जून 2025 को मेघालय की एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद किया गया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">शव मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने घटनास्थल, मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे यह मामला सामान्य गुमशुदगी नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या का प्रतीत हुआ। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सोनम रघुवंशी को भी मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में अदालत से उसे सशर्त जमानत मिल गई थी, जबकि अन्य आरोपी अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले जून महीने में सोनम रघुवंशी ने मीडिया से बातचीत में उन आरोपों का भी खंडन किया था, जिनमें कहा गया था कि वह जमानत मिलने के बाद नेपाल भाग गई है। उसने स्पष्ट कहा था कि वह कहीं नहीं गई और शिलांग में ही मौजूद है। सोनम ने कहा था कि उसके बारे में झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं और लोगों को ऐसी बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उसने यह भी दोहराया था कि वह जांच एजेंसियों और अदालत की कार्यवाही में लगातार सहयोग करती रही है और आगे भी करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/raja-raghuvanshi-murder-case-sonams-counter-affidavit-in-supreme-court/article-58261</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/raja-raghuvanshi-murder-case-sonams-counter-affidavit-in-supreme-court/article-58261</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:07:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/raja-raghuvanshi-case.jpg"                         length="141371"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच तेज, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के बेटे से EOW की लंबी पूछताछ</title>
                                    <description><![CDATA[शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच का दायरा बढ़ा, वैभव अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ; एजेंसी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/investigation-into-chhattisgarh-liquor-scam-intensifies-eows-long-interrogation-of/article-58201"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-liquor-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने उनसे रामगोपाल अग्रवाल के पिछले कुछ वर्षों के ठिकानों, आर्थिक गतिविधियों और संपर्कों को लेकर कई सवाल किए। हालांकि पूछताछ के बाद न तो किसी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है और न ही एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि यह मामला पहले से ही कई बड़े नामों और आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि वैभव अग्रवाल से सुबह शुरू हुई पूछताछ देर शाम तक चली। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने केवल पारिवारिक जानकारी ही नहीं बल्कि कथित आर्थिक नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और उन लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाने की कोशिश की, जो पिछले कुछ वर्षों में रामगोपाल अग्रवाल के संपर्क में रहे। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अवैध धन का प्रवाह किन-किन माध्यमों से हुआ। फिलहाल एजेंसी ने पूछताछ के विषय और उसमें सामने आई जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियां उनकी वास्तविक लोकेशन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। EOW के सूत्रों के अनुसार हाल ही में उन्हें प्रदेश में होने की सूचना मिली थी। इसी इनपुट के बाद जांच में तेजी लाई गई और उनके बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। एजेंसी की ओर से अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के तीन बड़े कथित आर्थिक मामलों में सामने आया है। इनमें करीब 3,200 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले, कोल लेवी वसूली और कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि इन सभी मामलों में आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के साथ-साथ अदालती प्रक्रिया भी जारी है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कथित शराब घोटाले की बात करें तो जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में एक संगठित नेटवर्क के जरिए अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क से हजारों करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन की आशंका है। इस मामले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। हालांकि संबंधित पक्षों ने समय-समय पर आरोपों से इनकार किया है और कई मामलों में कानूनी लड़ाई जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कोल लेवी मामले में भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW का आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़ा मामला भी जांच एजेंसियों के लिए अहम बना हुआ है। EOW का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में नियमों का उल्लंघन किया गया और कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/investigation-into-chhattisgarh-liquor-scam-intensifies-eows-long-interrogation-of/article-58201</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/investigation-into-chhattisgarh-liquor-scam-intensifies-eows-long-interrogation-of/article-58201</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/chhattisgarh-liquor-scam.jpg"                         length="172507"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'वर्दी पुलिस की, लेकिन दिल अपराधियों के साथ', DGP को एक महीने में सर्कुलर जारी करने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[गिरफ्तारी के लिखित कारण नहीं बताने पर जताई कड़ी नाराजगी, कहा- ऐसी लापरवाही से अपराधियों को मिलता है कानूनी फायदा; सभी थाना प्रभारियों और जांच अधिकारियों को चेतावनी जारी करने के निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-courts-strict-comment-on-uniformed-police-but-with-criminals/article-58175"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-high-court-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य के पुलिस विभाग को बड़ा संदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ पुलिस अधिकारी कानून की रक्षा के लिए वर्दी पहनते जरूर हैं, लेकिन उनके कामकाज से ऐसा लगता है कि उनका झुकाव अपराधियों को बचाने की ओर है। कोर्ट ने इस तरह की लापरवाही को न्याय व्यवस्था और समाज दोनों के लिए गंभीर खतरा बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि एक महीने के भीतर सभी थाना प्रभारियों और विवेचना अधिकारियों के लिए सख्त सर्कुलर जारी किया जाए। इस सर्कुलर में स्पष्ट रूप से बताया जाए कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में देना अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी ऐसा नहीं करता है तो इसे केवल प्रक्रियागत चूक नहीं, बल्कि आरोपी को कानूनी लाभ पहुंचाने की मंशा के रूप में देखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर ही पूरी की जानी चाहिए। यदि पुलिस अधिकारी निर्धारित नियमों का पालन नहीं करते हैं तो इसका सीधा लाभ अपराधियों को अदालत से राहत मिलने के रूप में मिलता है। ऐसी स्थिति में न केवल जांच प्रभावित होती है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह टिप्पणी जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए की। यह याचिका धर्मेंद्र लोधी ने अपने भाई की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दायर की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पुलिस ने उसके भाई को गिरफ्तार करते समय गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए, इसलिए गिरफ्तारी को अवैध माना जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे मामले के रिकॉर्ड का विस्तार से परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि संबंधित आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज था और पुलिस ने उसे धारा 50 के तहत आवश्यक लिखित नोटिस दिया था। आरोपी के कब्जे से करीब 86.850 किलोग्राम गांजा भी बरामद किया गया था। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने गिरफ्तारी को वैध माना और याचिका खारिज कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अदालत ने यह भी माना कि कई मामलों में पुलिस अधिकारी गिरफ्तारी की अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं करते। यही वजह है कि कई गंभीर मामलों में आरोपी तकनीकी आधार पर अदालत से राहत हासिल कर लेते हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस की ओर से गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं दिए जाते तो यह केवल साधारण लापरवाही नहीं मानी जाएगी, बल्कि यह माना जाएगा कि संबंधित अधिकारी ने जानबूझकर ऐसी चूक की ताकि आरोपी को कानूनी फायदा मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस मुख्यालय भोपाल की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में पुलिस मुख्यालय ने इसी वर्ष 13 फरवरी 2026 को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया से जुड़े स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कई थाना प्रभारी और विवेचना अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। अदालत ने इसे गंभीर प्रशासनिक विफलता माना।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपराध दर्ज करना नहीं है, बल्कि कानून के अनुरूप जांच करना और दोषियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार करना भी है। यदि जांच अधिकारी ही नियमों की अनदेखी करेंगे तो अपराधियों को सजा दिलाना मुश्किल हो जाएगा और जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि पुलिस विभाग को ऐसे अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए, जो लापरवाही या जानबूझकर की गई चूक के कारण अपराधियों को राहत दिलाने का रास्ता तैयार करते हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई भी जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी कानून की अनदेखी करने का साहस न कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों, थाना प्रभारियों और जांच अधिकारियों तक यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुंचाया जाए कि गिरफ्तारी के समय कानूनी प्रक्रिया का पालन हर हाल में किया जाना चाहिए। यदि किसी अधिकारी की ओर से दोबारा ऐसी लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फैसले को पुलिस व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी भविष्य में पुलिस जांच की गुणवत्ता सुधारने और गिरफ्तारी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। साथ ही इससे उन मामलों में भी कमी आएगी, जहां तकनीकी खामियों के कारण आरोपी अदालत से राहत पाने में सफल हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब पुलिस मुख्यालय पर जिम्मेदारी होगी कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर नया सर्कुलर जारी कर सभी अधिकारियों को कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत के निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव दिखाई देता है और पुलिस व्यवस्था में किस तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-courts-strict-comment-on-uniformed-police-but-with-criminals/article-58175</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-courts-strict-comment-on-uniformed-police-but-with-criminals/article-58175</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:19:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/madhya-pradesh-high-court-%282%29.jpg"                         length="123999"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'फिल्म रिलीज नहीं रोकी तो जान से मार देंगे': 'काला हिरण' के प्रोड्यूसर अमित जानी को पाकिस्तान नंबर से धमकी, पुलिस और एजेंसियां अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[दतिया में दर्शन के दौरान फिल्म निर्माता अमित जानी को व्हाट्सएप पर ऑडियो, वीडियो और कॉल के जरिए जान से मारने की धमकी मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/if-the-release-of-the-film-is-not-stopped-we/article-58102"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/amit-jani.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया में फिल्म<strong> </strong>'काला हिरण' के निर्माता अमित जानी को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। आरोप है कि पाकिस्तान के मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल, ऑडियो और वीडियो भेजकर फिल्म की रिलीज रोकने की चेतावनी दी गई। शिकायत मिलने के बाद दतिया कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती स्तर पर साइबर विशेषज्ञों की मदद से कॉल और मैसेज की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि धमकी देने वाले की वास्तविक पहचान और उसके नेटवर्क तक पहुंचा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">नोएडा निवासी फिल्म निर्माता अमित जानी धार्मिक यात्रा के सिलसिले में दतिया पहुंचे थे। वे यहां स्थित प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ मंदिर में दर्शन करने आए थे और एक निजी होटल में ठहरे हुए थे। इसी दौरान उनके मोबाइल फोन पर विदेशी नंबरों से लगातार व्हाट्सएप संदेश और कॉल आने लगे। शुरुआत में उन्हें ऑडियो और वीडियो क्लिप भेजी गईं, जिसके बाद सीधे कॉल कर फिल्म रिलीज नहीं करने की चेतावनी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अमित जानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 6 जुलाई की देर रात करीब एक बजे पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) वाले नंबर से एक ऑडियो और वीडियो क्लिप प्राप्त हुई। इसके बाद अगले दिन सुबह फिर दूसरे पाकिस्तानी नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। शिकायत के मुताबिक, कॉल करने वाले ने खुद को पाकिस्तान से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए फिल्म की रिलीज रोकने की धमकी दी। उसने कहा कि यदि फिल्म निर्धारित समय पर रिलीज हुई तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और जान से मार दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि धमकी देने वाले ने वीडियो में आधुनिक हथियार दिखाने का दावा किया। वीडियो में कथित रूप से ग्रेनेड, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) और अन्य हथियार दिखाई देने की बात कही गई है। हालांकि पुलिस फिलहाल वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो वास्तविक है या किसी अन्य स्रोत से तैयार कर भेजा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">धमकी मिलने के बाद अमित जानी सीधे दतिया कोतवाली पहुंचे और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नंबरों की तकनीकी जानकारी जुटाई जा रही है और साइबर सेल के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि कॉल वास्तव में विदेश से की गई थी या इंटरनेट आधारित किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आजकल इंटरनेट कॉलिंग और वर्चुअल नंबरों का उपयोग कर कई बार विदेशी नंबरों का इस्तेमाल दिखाया जाता है। इसलिए केवल नंबर देखकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में विदेश में था या किसी अन्य स्थान से इंटरनेट आधारित तकनीक का उपयोग कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को भी जानकारी भेज दी है। सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर सभी डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच टीम व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, वीडियो फाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डाटा की भी जांच करेगी ताकि धमकी देने वाले तक पहुंचा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि यदि जांच में विदेशी कनेक्शन सामने आता है तो संबंधित केंद्रीय एजेंसियों से भी आवश्यक सहयोग लिया जाएगा। फिलहाल जांच के सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष और तकनीकी आधार पर जांच होगी। घटना के बाद दतिया में सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। धार्मिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म निर्माता अमित जानी ने पुलिस से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि उन्हें मिली धमकी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने जांच एजेंसियों को अपने मोबाइल में मौजूद सभी ऑडियो, वीडियो और कॉल संबंधी जानकारी उपलब्ध करा दी है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल फोरेंसिक जांच के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञ यह भी जांच करेंगे कि भेजे गए वीडियो और ऑडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग या मॉर्फिंग तो नहीं की गई। इसके अलावा कॉल की लोकेशन, इंटरनेट सर्वर और उपयोग किए गए प्लेटफॉर्म की जानकारी भी जुटाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/if-the-release-of-the-film-is-not-stopped-we/article-58102</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/if-the-release-of-the-film-is-not-stopped-we/article-58102</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:44:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/amit-jani.jpg"                         length="114504"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारुईपुर रेप-मर्डर केस में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, SIT जांच में कई अहम खुलासे</title>
                                    <description><![CDATA[पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दावा- दुष्कर्म के बाद नाबालिग को जिंदा तालाब में फेंका गया; मामले में तीन गिरफ्तार, जांच तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/main-accused-arrested-in-baruipur-rape-murder-case-many-important-revelations/article-58050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/baruipur-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी आनंद सरदार को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार देर शाम चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान उसे शहर के बाजार इलाके से पकड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह मामला सामने आने के बाद इलाके में लगातार तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बच्ची 4 जुलाई को घर से अपनी सहेली के लिए उपहार खरीदने निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसकी तलाश की और कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। अगले दिन सूर्यपुर हाट इलाके के एक तालाब से उसका शव बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आए शुरुआती निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार बच्ची के फेफड़ों और पेट में पानी मिला है, जिससे आशंका जताई गई कि दुष्कर्म के बाद उसे जीवित अवस्था में तालाब में फेंका गया था। चिकित्सकीय जांच में यह भी सामने आया कि सिर पर गंभीर चोट लगी थी और शरीर के कई हिस्सों पर खरोंच तथा काटने के निशान मिले हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक सिर पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया था या उसे किसी कठोर सतह पर जोर से पटका गया। अधिक खून बहने और डूबने की वजह से उसकी मौत होने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस जांच में घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांचकर्ताओं को कुछ फुटेज में बच्ची चार लोगों के साथ जाती हुई दिखाई दी है। पुलिस इन लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की पुष्टि करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और फोरेंसिक जांच के आधार पर मामले की हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है। इसी बीच मुख्य आरोपी आनंद सरदार की गिरफ्तारी को जांच में अहम सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि उससे पूछताछ के आधार पर आगे और महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भी सामने आया। बच्ची का शव मिलने के कुछ ही देर बाद भीड़ ने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ लिया, जिस पर इस वारदात में शामिल होने का संदेह था। उसकी पहचान इंद्रजीत तांती के रूप में हुई। भीड़ ने उसकी कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस दौरान इलाके में तनाव बढ़ गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने भीड़ की हिंसा से जुड़े मामलों की भी अलग से जांच शुरू की है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को पीड़ित परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे सामान्य सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया। घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विभिन्न दल सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि राज्य पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तेजी से आगे बढ़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट में न केवल इस जघन्य अपराध की जांच की प्रगति शामिल होनी चाहिए, बल्कि इसके बाद हुई भीड़ की हिंसा, पुलिस पर हुए हमलों और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं का भी पूरा विवरण होना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम समय पर उठाए जाने चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार देश में हर वर्ष बच्चों के संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत हजारों मामले दर्ज होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई घटनाएं सामाजिक डर, बदनामी या अन्य कारणों से दर्ज ही नहीं हो पातीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/main-accused-arrested-in-baruipur-rape-murder-case-many-important-revelations/article-58050</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/main-accused-arrested-in-baruipur-rape-murder-case-many-important-revelations/article-58050</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/baruipur-case.jpg"                         length="160174"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट, CCTV में 70 संदिग्ध घटनाएं कैद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया में गंभीर खामियां; कई कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sit-report-in-ram-temple-offering-theft-case-70-suspicious/article-58042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-donation-theft-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 अप्रैल से 5 जून के बीच चढ़ावे की गिनती वाले कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। जांच में सामने आया कि गिनती का काम कर रहे कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कई की गतिविधियां फुटेज में साफ नजर आई हैं। इसी बीच राममंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे भी स्वीकार किए गए, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की नकदी गिनती और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच टीम का कहना है कि चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर लगातार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी से जुड़े डॉ. अनिल मिश्रा को पहले से सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी, जिससे नकदी बाहर ले जाना आसान हो गया। अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति, तय यूनिफॉर्म, निजी सामान पर नियंत्रण, नकदी का रिकॉर्ड और दैनिक निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं थीं। ऐसे हालात में सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ती गई और चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के मंदिर की हुंडियों और गिनती कक्ष से जुड़ी चाबियों का नियंत्रण था। इतना ही नहीं, उसकी सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया गया, जो बाद में आरोपियों में शामिल पाया गया। एसआईटी ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना है। रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में कई बार कर्मचारी एक-दूसरे को इशारों से सतर्क करते भी दिखाई दिए, जिससे जांच टीम को यह गतिविधि संगठित तरीके से होने का संदेह हुआ। जांच अधिकारियों ने इन घटनाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि लगातार दोहराए गए पैटर्न के रूप में दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच के आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। एसआईटी का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच में इनके खिलाफ पर्याप्त शुरुआती साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट में इनके खिलाफ चोरी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक दुर्विनियोग, षड्यंत्र और चोरी की संपत्ति रखने जैसी धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की ओर से मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के लेन-देन दर्ज मिले हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने परिवार और दोस्तों पर बड़ी रकम खर्च करने की बात भी स्वीकार की है। एक भाई की शादी पर लाखों रुपये खर्च करने, दूसरे भाई को नकद राशि देने, कार खरीदने और दोस्तों को पैसे ट्रांसफर करने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि चोरी की रकम को बैंक खातों और संपत्तियों के जरिए खपाने की कोशिश की गई हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती जांच है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल अभी बाकी है। निगरानी व्यवस्था में लापरवाही, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और अन्य संभावित लोगों की संलिप्तता को लेकर विस्तृत जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत निष्कर्ष और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sit-report-in-ram-temple-offering-theft-case-70-suspicious/article-58042</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sit-report-in-ram-temple-offering-theft-case-70-suspicious/article-58042</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/ram-mandir-donation-theft-%281%29.jpg"                         length="199594"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरबा में बर्थडे पार्टी बनी मातम, ट्रांसपोर्टर की कैंपर से कुचलकर हत्या; आरोपी फरार</title>
                                    <description><![CDATA[मीरा रिसोर्ट में जन्मदिन समारोह के दौरान नशे में हुआ विवाद खूनी झड़प में बदला, ट्रांसपोर्ट कारोबारी की मौके पर मौत; पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज की।छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जन्मदिन की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब एक बर्थडे पार्टी के दौरान हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। उरगा थाना क्षेत्र स्थित मीरा रिसोर्ट में आयोजित एक निजी समारोह में कथित रूप से नशे की हालत में हुए झगड़े के बाद एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी की कैंपर वाहन से कुचलकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद आरोपी वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

मृतक की पहचान दीपका के गरुणनगर निवासी उज्जवल सिंह (35) के रूप में हुई है। वह ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े थे और विवाहित थे। उनके परिवार में पत्नी और बच्चे हैं। वहीं, इस मामले में आरोपी के रूप में तुषार ढांढा (24) का नाम सामने आया है, जो घटना के बाद से फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।

जन्मदिन समारोह में जुटे थे 20 से 25 लोग

पुलिस के अनुसार, शुक्रवार देर रात दीपका क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट कारोबारी विकास कुमार हुडा का जन्मदिन मनाने के लिए मीरा रिसोर्ट में पार्टी आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में करीब 20 से 25 लोग शामिल हुए थे। इनमें अधिकांश लोग ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े बताए जा रहे हैं और क्षेत्र में कोयला परिवहन का कार्य करते हैं।

रात के समय भोजन, संगीत और जश्न का माहौल था। पार्टी देर रात तक चलती रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोग शराब के नशे में थे। इसी दौरान किसी मामूली बात को लेकर कुछ लोगों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया।

विवाद के बाद बढ़ा तनाव

बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान आरोपी तुषार ढांढा का व्यवहार आक्रामक हो गया। आरोप है कि उसने रिसोर्ट परिसर में सामान तोड़फोड़ की और मौजूद लोगों से भी बहस तथा धक्का-मुक्की की। स्थिति को शांत कराने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन तनाव लगातार बढ़ता गया।

कुछ ही देर में विवाद मारपीट में बदल गया। पार्टी में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी दौरान घटनास्थल पर मौजूद कैंपर वाहन का इस्तेमाल किया गया और कथित तौर पर तुषार ढांढा ने वाहन उज्जवल सिंह की ओर बढ़ा दिया।

कैंपर वाहन की चपेट में आने से मौत

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कैंपर वाहन की टक्कर से उज्जवल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के तुरंत बाद आरोपी वाहन लेकर वहां से फरार हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही उरगा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इसके साथ ही रिसोर्ट में मौजूद लोगों से प्रारंभिक पूछताछ शुरू की गई।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

पुलिस ने आरोपी तुषार ढांढा के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। पुलिस विभिन्न संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के बाद आरोपी किस दिशा में गया और उसने किससे संपर्क किया।

सीसीटीवी फुटेज और बयान होंगे अहम

जांच एजेंसियां अब मीरा रिसोर्ट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं। माना जा रहा है कि फुटेज से विवाद की शुरुआत, मारपीट और घटना के पूरे क्रम की पुष्टि करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा पार्टी में मौजूद सभी लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और क्या घटना पूरी तरह आवेश में हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उसी के अनुरूप धाराओं में संशोधन भी किया जा सकता है।

परिवार में पसरा मातम

उज्जवल सिंह की अचानक हुई मौत से उनके परिवार और परिचितों में गहरा शोक है। घटना की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल और बाद में पोस्टमॉर्टम केंद्र पहुंचे। परिवार ने दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक मामूली विवाद का इस तरह हिंसक घटना में बदल जाना बेहद दुखद है। उन्होंने भी पुलिस से आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/birthday-party-turns-into-mourning-in-korba-accused-of-killing/article-57893"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/korba-murder-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जन्मदिन की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब एक बर्थडे पार्टी के दौरान हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। उरगा थाना क्षेत्र स्थित मीरा रिसोर्ट में आयोजित एक निजी समारोह में कथित रूप से नशे की हालत में हुए झगड़े के बाद एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी की कैंपर वाहन से कुचलकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद आरोपी वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मृतक की पहचान दीपका के गरुणनगर निवासी <strong>उज्जवल सिंह (35)</strong> के रूप में हुई है। वह ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े थे और विवाहित थे। उनके परिवार में पत्नी और बच्चे हैं। वहीं, इस मामले में आरोपी के रूप में <strong>तुषार ढांढा (24)</strong> का नाम सामने आया है, जो घटना के बाद से फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार देर रात दीपका क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट कारोबारी विकास कुमार हुडा का जन्मदिन मनाने के लिए मीरा रिसोर्ट में पार्टी आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में करीब 20 से 25 लोग शामिल हुए थे। इनमें अधिकांश लोग ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े बताए जा रहे हैं और क्षेत्र में कोयला परिवहन का कार्य करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रात के समय भोजन, संगीत और जश्न का माहौल था। पार्टी देर रात तक चलती रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोग शराब के नशे में थे। इसी दौरान किसी मामूली बात को लेकर कुछ लोगों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान आरोपी तुषार ढांढा का व्यवहार आक्रामक हो गया। आरोप है कि उसने रिसोर्ट परिसर में सामान तोड़फोड़ की और मौजूद लोगों से भी बहस तथा धक्का-मुक्की की। स्थिति को शांत कराने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन तनाव लगातार बढ़ता गया। कुछ ही देर में विवाद मारपीट में बदल गया। पार्टी में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी दौरान घटनास्थल पर मौजूद कैंपर वाहन का इस्तेमाल किया गया और कथित तौर पर तुषार ढांढा ने वाहन उज्जवल सिंह की ओर बढ़ा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कैंपर वाहन की टक्कर से उज्जवल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के तुरंत बाद आरोपी वाहन लेकर वहां से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही उरगा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इसके साथ ही रिसोर्ट में मौजूद लोगों से प्रारंभिक पूछताछ शुरू की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने आरोपी तुषार ढांढा के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। पुलिस विभिन्न संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के बाद आरोपी किस दिशा में गया और उसने किससे संपर्क किया।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसियां अब मीरा रिसोर्ट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं। माना जा रहा है कि फुटेज से विवाद की शुरुआत, मारपीट और घटना के पूरे क्रम की पुष्टि करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा पार्टी में मौजूद सभी लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और क्या घटना पूरी तरह आवेश में हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उसी के अनुरूप धाराओं में संशोधन भी किया जा सकता है</p>
<p style="text-align:justify;">उज्जवल सिंह की अचानक हुई मौत से उनके परिवार और परिचितों में गहरा शोक है। घटना की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल और बाद में पोस्टमॉर्टम केंद्र पहुंचे। परिवार ने दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक मामूली विवाद का इस तरह हिंसक घटना में बदल जाना बेहद दुखद है। उन्होंने भी पुलिस से आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/birthday-party-turns-into-mourning-in-korba-accused-of-killing/article-57893</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/birthday-party-turns-into-mourning-in-korba-accused-of-killing/article-57893</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 18:45:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/korba-murder-case-%281%29.jpg"                         length="191511"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीमा रिफंड के नाम पर 1.60 करोड़ की साइबर ठगी, दिल्ली से तीन आरोपी गिरफ्तार; नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़े तार</title>
                                    <description><![CDATA[खुद को बीमा लोकपाल अधिकारी बताकर पीड़ित से कई किश्तों में रकम वसूली, बैंक खातों के जरिए संचालित हो रहा था अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क; दुर्ग पुलिस ने मोबाइल, पासबुक और चेकबुक समेत अहम साक्ष्य किए जब्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cyber-fraud-of-rs-160-crore-in-the-name-of/article-57787"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल एक नाइजीरियन साइबर नेटवर्क कर रहा था, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन किए गए।</p>
<p>दुर्ग रेंज साइबर थाना में दर्ज इस मामले की जांच कई दिनों से चल रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने खुद को बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि उसकी पुरानी बीमा पॉलिसी का रिफंड मंजूर हो गया है और राशि प्राप्त करने के लिए कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसी बहाने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम जमा कराई गई।</p>
<p>पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दी जाएगी और बीमा क्लेम भी जारी हो जाएगा। लेकिन हर बार नई वजह बताकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती रही। इस तरह आरोपी लगातार पीड़ित को झांसे में रखते हुए उससे कुल करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी करने में सफल रहे।</p>
<p>जब लंबे समय तक न तो रिफंड मिला और न ही कोई भुगतान हुआ, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने दुर्ग रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण किया।</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले एक बैंक खाताधारक की पहचान की, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। उससे पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर पुलिस की विशेष टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां से मनमीत सिंह, ईशांत माहे उर्फ ईशु और अमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने नाम से बैंक खाते खुलवाए थे और पैसों के लालच में इन्हें साइबर ठगों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर की जाती थी, ताकि वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।</p>
<p>जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन एक नाइजीरियन साइबर गिरोह द्वारा किया जा रहा था। यही गिरोह बैंक खातों का उपयोग कर देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में कई साइबर अपराधों में शामिल हो सकता है।</p>
<p>दिल्ली से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 1 जुलाई को हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें तीस हजारी कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दुर्ग लाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा ठगी की रकम आखिर किन-किन खातों तक पहुंची।</p>
<p>तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, छह बैंक पासबुक, चार चेकबुक और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि अलग-अलग राज्यों में इन आरोपियों के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं।</p>
<p>एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर ने बताया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाते थे। पहले वे बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का भरोसा दिलाते, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, दस्तावेज सत्यापन, बीमा क्लियरेंस और अन्य शुल्क के नाम पर किस्तों में रकम जमा कराते थे। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास होता, तब तक रकम कई बैंक खातों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं। बीमा रिफंड, केवाईसी अपडेट, निवेश योजना, लॉटरी, इनाम और सरकारी योजना के नाम पर आने वाले कॉल, मैसेज या ईमेल पर बिना पुष्टि किए भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।</p>
<p>दुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे जमा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दे। समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी की गई रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cyber-fraud-of-rs-160-crore-in-the-name-of/article-57787</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cyber-fraud-of-rs-160-crore-in-the-name-of/article-57787</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/maharashtra-government-%281%29.jpg"                         length="146405"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सलमान खान फायरिंग केस में अनमोल बिश्नोई ने किया सरेंडर का आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[तिहाड़ जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के भाई ने मुंबई की विशेष अदालत से प्रोडक्शन वारंट जारी करने की मांग की, कहा- निष्पक्ष ट्रायल में शामिल होना चाहता हूं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/anmol-bishnoi-applied-for-surrender-in-salman-khan-firing-case/article-57775"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/salman-khan-firing-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर वर्ष 2024 में हुई फायरिंग के मामले में नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई ने मुंबई की विशेष एमसीओसीए (MCOCA) अदालत में सरेंडर के लिए आवेदन दाखिल किया है। फिलहाल वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के एक अलग मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। अदालत में दायर याचिका में उसने कहा है कि वह इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई का हिस्सा बनना चाहता है, लेकिन कानूनी हिरासत में होने के कारण अदालत के आदेश के बिना व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हो सकता। अनमोल बिश्नोई की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया है कि तिहाड़ जेल प्रशासन के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाए, ताकि उसे मुंबई की अदालत में पेश किया जा सके। उसके वकील का कहना है कि इस प्रक्रिया से मामले की सुनवाई में तेजी आएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई पूरी की जा सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिका में अनमोल बिश्नोई ने स्पष्ट किया है कि वह पहले से ही एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में वह स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हो सकता। उसने अदालत से कहा है कि यदि प्रोडक्शन वारंट जारी किया जाता है तो वह संबंधित मामले में औपचारिक रूप से पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगा। याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालत में उसकी मौजूदगी से अभियोजन पक्ष को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। इसके विपरीत, इससे मुकदमे की सुनवाई अधिक व्यवस्थित और तेज हो सकेगी। उसने यह भी तर्क दिया कि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने के लिए उसका अदालत में उपस्थित होना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान अब तक तीन गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अनमोल बिश्नोई की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि उसकी अनुपस्थिति में ट्रायल आगे बढ़ रहा है। इसलिए उसे भी अदालत में अपना पक्ष रखने और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर मिलना चाहिए। किसी भी आरोपी की अदालत में औपचारिक पेशी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसी कारण अनमोल ने अदालत से आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रोडक्शन वारंट एक न्यायिक आदेश होता है, जिसके माध्यम से किसी जेल में बंद आरोपी को दूसरी अदालत या किसी अन्य मामले की सुनवाई के लिए पेश किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी अन्य मामले में हिरासत में है तो संबंधित अदालत उसके लिए प्रोडक्शन वारंट जारी करती है। अनमोल बिश्नोई वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। ऐसे में वह सीधे मुंबई नहीं आ सकता। अदालत यदि प्रोडक्शन वारंट जारी करती है तो जेल प्रशासन उसे निर्धारित तारीख पर मुंबई की अदालत में पेश करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अनमोल बिश्नोई को पिछले वर्ष अमेरिका से भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उसे आतंकवादी-गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। एनआईए की जांच में उसका नाम संगठित अपराध और आपराधिक साजिश से जुड़े मामलों में सामने आया था। वर्तमान में वह उसी मामले में न्यायिक हिरासत में है और तिहाड़ जेल में बंद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">14 अप्रैल 2024 की सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर दो बाइक सवार हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की थी। उस समय अभिनेता सलमान खान अपने घर में मौजूद थे। घटना के बाद मुंबई पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की थी।जांच के दौरान पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें विक्की गुप्ता, सागर पाल, सोनू कुमार बिश्नोई, मोहम्मद रफीक चौधरी और हरपाल सिंह शामिल हैं। एक अन्य आरोपी अनुज कुमार थापन की पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरी साजिश के तार लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हुए हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर अनमोल बिश्नोई के नाम से एक पोस्ट भी सामने आई थी, जिसमें फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। हालांकि जांच एजेंसियां उस पोस्ट की भी अलग से जांच कर चुकी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फायरिंग की घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सलमान खान की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी थी। अभिनेता को पहले से ही वाई प्लस (Y+) श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। उनके साथ हर समय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रहती है। इसके अलावा गैलेक्सी अपार्टमेंट की सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह बदली गई। इमारत के बाहर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, प्रवेश व्यवस्था को और सख्त किया गया तथा सलमान खान की बालकनी को बुलेटप्रूफ कराया गया। उनकी निजी गाड़ी भी पहले से बुलेटप्रूफ सुरक्षा से लैस है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/anmol-bishnoi-applied-for-surrender-in-salman-khan-firing-case/article-57775</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/anmol-bishnoi-applied-for-surrender-in-salman-khan-firing-case/article-57775</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 16:58:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/salman-khan-firing-case.jpg"                         length="165140"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        