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                <title>Social Issues - दैनिक जागरण</title>
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                <title>दुर्ग के गांवों में जल संकट गहराया, अवैध शराब पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्ग जल संकट के बीच ग्रामीणों का आरोप—पानी की कमी, अवैध शराब से बिगड़ रहा माहौल गांवों में पानी की किल्लत ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/water-crisis-deepens-in-durg-villages-questions-raised-on-illegal/article-51934"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(33).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कई गांव इन दिनों गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं, जहां लोगों को पीने के पानी के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर अंजोरा (ढाबा) गांव में हालात सबसे अधिक खराब बताए जा रहे हैं। यहां लगभग 3000 की आबादी के लिए सिर्फ एक बोरवेल ही पानी का सहारा है, जिससे बेहद कम क्षमता में पानी निकलता है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए कतार लग जाती है, जो देर रात तक जारी रहती है। इसी बीच गांव में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है।</p>
<p>ग्रामीणों के मुताबिक, पानी की कमी के कारण उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं तक पानी के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। रोजगार और बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि दिन का बड़ा हिस्सा पानी जुटाने में ही निकल जाता है।</p>
<h5><strong>पानी के लिए जंग</strong></h5>
<p>गांव में जल संकट इतना गंभीर है कि एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल 31 लाख रुपए की लागत से शिवनाथ नदी से पानी लाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं हुआ।</p>
<p>ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का लाभ उन्हें नहीं मिला और पैसा बेकार चला गया। कुछ लोगों का कहना है कि नदी का पानी केवल डेम में जमा किया जा रहा है, जो पीने योग्य नहीं है।</p>
<h5><strong>अवैध शराब पर नाराजगी</strong></h5>
<p>जल संकट के साथ-साथ गांव में अवैध शराब की बिक्री भी बड़ा मुद्दा बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, वहीं शराब आसानी से उपलब्ध है।</p>
<p>पूर्व सरपंच और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में 8–10 लोग अवैध शराब के कारोबार से जुड़े हैं और इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही। उनका कहना है कि इससे गांव का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और युवा पीढ़ी पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।</p>
<p>पुलिस और प्रशासन ने हालांकि इन आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों के अनुसार, अवैध शराब के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जा रही है और गश्त बढ़ाई गई है।</p>
<p>दुर्ग जिले के अन्य गांवों—जैसे पाटन क्षेत्र के औरी, उतई के मुड़पार, मर्रा, चुनकट्टा और आसपास के इलाकों में भी पानी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। गर्मी बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों ने जल संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर योजनाओं में तेजी लाने की बात कही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:53:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>लैंगिक समानता की बदलती तस्वीर: उपलब्धियां, चुनौतियां और आगे का रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सोच में बदलाव के बावजूद असमानता के नए रूप उभर रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/changing-picture-of-gender-equality-achievements-challenges-and-the-way/article-46884"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh-(24).jpg" alt=""></a><br /><div class="flex flex-col text-sm pb-25">

<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:--spacing(4)] @w-sm/main:[--thread-content-margin:--spacing(6)] @w-lg/main:[--thread-content-margin:--spacing(16)] px-(--thread-content-margin)">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert w-full wrap-break-word light markdown-new-styling">समाज में लैंगिक समानता यानी महिलाओं और पुरुषों को बराबर अवसर देने की सोच पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। पढ़ाई, नौकरी और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ी है। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सोच में धीरे-धीरे हुए परिवर्तन का नतीजा है। फिर भी पूरी बराबरी का लक्ष्य अभी दूर है।</div>
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<p>सबसे बड़ा बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में दिखता है। स्कूल और कॉलेजों में लड़कियों की संख्या बढ़ी है और वे कई परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। पहले जिन पेशों को केवल पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, अब वहां भी महिलाएं आगे आ रही हैं। इंजीनियरिंग, प्रशासन, खेल और व्यापार जैसे क्षेत्रों में उनकी भागीदारी समाज की बदलती सोच को दिखाती है।</p>
<p>रोजगार के क्षेत्र में स्थिति थोड़ी जटिल है। शहरों में महिलाओं को नौकरी और व्यवसाय के ज्यादा अवसर मिल रहे हैं, लेकिन कार्यस्थल पर वेतन में अंतर और पदोन्नति की सीमित संभावनाएं अब भी समस्या हैं। घर और काम की दोहरी जिम्मेदारी भी महिलाओं पर अधिक रहती है। लचीले काम के विकल्प बढ़े हैं, लेकिन इससे घरेलू जिम्मेदारियां कम नहीं हुईं।</p>
<p>सामाजिक सोच में बदलाव हो रहा है, लेकिन गति धीमी है। कुछ परिवारों में पुरुष घरेलू कामों में भागीदारी कर रहे हैं और बच्चों की देखभाल साझा जिम्मेदारी बन रही है। इसके बावजूद कई जगह पारंपरिक धारणाएं अभी भी मजबूत हैं। डिजिटल दुनिया में महिलाओं को ट्रोलिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। यह दिखाता है कि समानता केवल कानून से नहीं, बल्कि व्यवहार से भी तय होती है।</p>
<p>सरकारी योजनाओं और सामाजिक पहलों ने महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसर देने की दिशा में मदद की है। बैंक खाते, कौशल प्रशिक्षण और सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों ने कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों और वंचित वर्गों तक इन योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।</p>
<p>आगे बढ़ने के लिए समाज को मिलकर काम करना होगा। परिवार, स्कूल और कार्यस्थल—तीनों स्तरों पर बराबरी की सोच को व्यवहार में लाना जरूरी है। लड़कों और पुरुषों की भागीदारी के बिना यह बदलाव अधूरा रहेगा। सुरक्षित माहौल, समान वेतन और शिक्षा तक समान पहुंच जैसे कदम लैंगिक समानता को मजबूत करेंगे।</p>
<p>लैंगिक समानता की तस्वीर आज पहले से बेहतर जरूर है, लेकिन इसे स्थायी और व्यापक बनाने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं। बराबरी केवल अधिकार का मुद्दा नहीं, बल्कि एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज की पहचान है।</p>
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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 14:49:01 +0530</pubDate>
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