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                <title>होली 2026 - दैनिक जागरण</title>
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                <title>100 साल से इस गांव में तिथि नहीं, दिन देखकर खेली जाती है होली: जानें मंगलवार-शनिवार का रहस्य</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के साल्हेओना गांव की 100 साल पुरानी अनोखी परंपरा के बारे में जानें, जहां आग लगने के डर से केवल मंगलवार या शनिवार को ही होली खेली जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/for-100-years-holi-is-played-in-this-village-by/article-47544"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/why-this-indian-village-only-plays-holi-on-tuesdays-or-saturdays-a-100-year-old-mystery-(1).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">भारत के कोने-कोने में होली का त्योहार हिंदू पंचांग की तिथियों के अनुसार मनाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के एक गांव में कहानी बिल्कुल अलग है। रायगढ़ से करीब 45 किलोमीटर दूर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक में स्थित साल्हेओना गांव की होली पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है। यहां के 2500 निवासी होली तभी मनाते हैं, जब वह मंगलवार या शनिवार को पड़े।</p>
<p dir="ltr">अगर देश भर में होली किसी और दिन हो, तो इस गांव में सन्नाटा पसरा रहता है। यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि पिछले 100 सालों से अटूट रूप से चली आ रही है।</p>
<h2 dir="ltr">अग्निकांड का खौफ: क्यों बदली गई होली की तारीख?</h2>
<p dir="ltr">साल्हेओना गांव में होली मनाने का यह अनोखा तरीका किसी शौक के कारण नहीं, बल्कि एक पुराने खौफ और श्रद्धा की वजह से शुरू हुआ था। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, करीब एक सदी पहले जब भी गांव में सामान्य तिथि पर होली मनाई जाती थी, तो गांव में अचानक आग लग जाती थी।</p>
<p dir="ltr">"पुराने समय में होली के दिन घरों में रहस्यमयी तरीके से आग लग जाती थी। यह आग इतनी भीषण होती थी कि एक घर से दूसरे घर तक फैल जाती थी, जिससे भारी नुकसान होता था। जब यह घटना लगातार तीन-चार साल तक हुई, तो ग्रामीण डर गए," गांव के बुजुर्ग भागड़ा सिदार बताते हैं।</p>
<p dir="ltr">इस समस्या से निजात पाने के लिए पूर्वजों ने 'ब्रह्म अवधूत बाबाओं' की शरण ली। बाबाओं ने सलाह दी कि गांव की सुरक्षा के लिए केवल मंगलवार या शनिवार को ही विशेष 'शांति यज्ञ' किया जाए और उसी दिन ग्राम देवी-देवताओं की पूजा कर होली मनाई जाए। तब से यह छत्तीसगढ़ की अनोखी परंपरा बन गई।</p>
<h2 dir="ltr">पूजा के बिना नहीं उड़ता गुलाल: अनुष्ठान की प्रक्रिया</h2>
<p dir="ltr">साल्हेओना गांव में रंग खेलने से पहले कड़े नियमों का पालन किया जाता है। यहाँ उत्सव की शुरुआत गुलाल से नहीं, बल्कि हवन-कुंड की अग्नि से होती है।</p>
<ul>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">होलिका दहन: मंगलवार या शनिवार पड़ने वाले दिन से एक रात पहले विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">हवन और पूर्णाहुति: त्योहार वाले दिन सुबह 10 बजे से पूरा गांव पूजा में जुट जाता है। लगभग दो घंटे तक विशेष पूजा और हवन चलता है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">रंगों की शुरुआत: दोपहर 12 बजे के बाद, जब पूजा संपन्न हो जाती है, तभी ग्रामीण एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाना शुरू करते हैं।</p>
</li>
</ul>
<h2 dir="ltr">युवा पीढ़ी भी निभा रही है विरासत</h2>
<p dir="ltr">आज के आधुनिक दौर में भी साल्हेओना के युवाओं का अपनी संस्कृति के प्रति लगाव कम नहीं हुआ है। गांव के पंच नंदकुमार सारथी बताते हैं कि नई पीढ़ी भी इस परंपरा को पूरी शिद्दत से मानती है। ग्रामीणों का अटूट विश्वास है कि अगर परंपरा तोड़ी गई, तो कोई अनहोनी (अशुभ घटना) हो सकती है। यही कारण है कि यह सारंगढ़-बिलाईगढ़ की खबर आज भी चर्चा का विषय बनी रहती है।</p>
<h2 dir="ltr">निष्कर्ष: आस्था और सुरक्षा का संगम</h2>
<p dir="ltr">साल्हेओना गांव की यह कहानी हमें बताती है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता कितनी गहरी है। जहां पूरी दुनिया कैलेंडर के हिसाब से चलती है, वहां यह गांव अपनी सुरक्षा और शांति के लिए अपने पूर्वजों के बताए रास्ते पर अडिग है। यह परंपरा न केवल ग्रामीणों को एकजुट रखती है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से भी जोड़े रखती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 14:57:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुत्र-हंता होलिका: इंदौर में आज जलेगी सूचना सेठ और 10 आरोपी माताओं के चेहरों वाली होली, बढ़ा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर की संस्था पौरुष आज शाम 4 बजे 'पुत्र-हंता होलिका' का दहन करेगी, जिसमें सूचना सेठ समेत 11 महिलाओं के चेहरे होंगे। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा है विरोध।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/son-hunter-holika-will-be-burnt-in-indore-today-holi-with/article-47431"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/indore-&#039;putra-hanta&#039;-holika-sparks-debate-effigy-of-suchana-seth,-10-other-accused-mothers-to-be-burned-on-march-2-(1).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">इंदौर में 'पुत्र-हंता होलिका' आज: सूचना सेठ समेत 11 आरोपी माताओं के चेहरे वाले पुतले का दहन, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आयोजन जारी</p>
<p dir="ltr">मध्य प्रदेश के इंदौर में आज यानी 2 मार्च को होलिका दहन के मौके पर एक विवादित आयोजन होने जा रहा है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। यहां पुरुष अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'पौरुष' द्वारा 'पुत्र-हंता होलिका' का दहन किया जाएगा, जिसमें बेंगलुरु की AI सीईओ सूचना सेठ समेत देश भर की 11 उन महिलाओं के चेहरे लगे हैं, जिन पर अपने ही मासूम बच्चों की हत्या के जघन्य आरोप हैं ।</p>
<p dir="ltr">यह आयोजन महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड के सामने शाम 4 बजे किया जाएगा। संस्था का दावा है कि यह 'मॉडर्न हत्यारी होलिका दहन' समाज को एक कड़ा संदेश देने और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए किया जा रहा है । हालांकि, यह घटना अपनी संवेदनशील थीम और कानूनी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के चलते चर्चा में है।</p>
<p dir="ltr">क्या है 'पुत्र-हंता होलिका' का कॉन्सेप्ट?</p>
<p dir="ltr">संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक दशोरा ने बताया कि यह थीम पौराणिक कथा पर आधारित है, लेकिन इसमें बदलाव किया गया है। पौराणिक कथा में राक्षस राजा हिरण्यकश्यप ने अपने भक्त पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को आग में बैठाया था, जो जलकर खाक हो गई। इस परंपरागत प्रतीक को आधुनिक संदर्भ देते हुए, 'पुत्र-हंता होलिका' में होलिका के चेहरे की जगह उन महिला आरोपियों के चेहरे होंगे जिन पर अपने बच्चों की हत्या का आरोप है ।</p>
<p dir="ltr">किन महिलाओं के चेहरे होंगे शामिल?</p>
<p dir="ltr">संस्था के अनुसार, इस होलिका में देश भर से चुनी गईं 11 महिला आरोपियों के चेहरे होंगे। इसमें सबसे केंद्र में बेंगलुरु की सूचना सेठ का चेहरा होगा, जिसके आसपास अन्य दस महिलाओं के चेहरे होंगे ।</p>
<p dir="ltr">- सूचना सेठ (बेंगलुरु/गोवा): बेंगलुरु की AI स्टार्टअप सीईओ सूचना सेठ पर अपने 4 वर्षीय बेटे की हत्या का आरोप है। आरोप है कि उसने जनवरी 2024 में गोवा का एक होटल में अपने बेटे की हत्या कर दी और शव के टुकड़े कर एक सूटकेस में भर दिए थे ।</p>
<p dir="ltr">- अन्य आरोपी महिलाएं: इनके अलावा उत्तर प्रदेश की सीमा, मुस्कान, प्रियंका और दुर्गावती, तमिलनाडु की भारती व शरण्य, राजस्थान की संजू, ग्वालियर की ज्योति राठौर, हरियाणा की पूनम और गुजरात की सुनीता शर्मा के नाम शामिल हैं ।</p>
<p dir="ltr">संस्था 'पौरुष' का तर्क: सामाजिक जागृति या सनसनीखेज?</p>
<p dir="ltr">15 वर्षों से इंदौर में सक्रिय संस्था पौरुष का दावा है कि वह झूठे दहेज केस, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण और बाल हिरासत जैसे मामलों में फंसे परिवारों की मदद करती है । संस्था के सदस्य मिलिंद अग्रवाल के अनुसार, "समाज में फैली गंदी सोच को उजागर करने और परिवारों को तबाही से बचाने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कानून में बच्चों को पिता से मिलने के लिए महीने में सिर्फ तीन घंटे की सुविधा देना अन्याय है ।"</p>
<p dir="ltr">कानूनी बहस और हाईकोर्ट का पूर्व आदेश</p>
<p dir="ltr">यह पहली बार नहीं है जब संस्था इस तरह का विवादित आयोजन कर रही है। इससे पहले दशहरा पर संस्था ने सोनम रघुवंशी नाम की एक महिला का पुतला दहन करने की योजना बनाई थी, जिस पर उसकी मां संगीता रघुवंशी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रोक लगाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने उस आयोजन पर रोक लगाते हुए कहा था कि "ऐसा कृत्य लोकतांत्रिक रूप से पूरी तरह से अस्वीकार्य है" और जब तक अदालत में किसी का दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती ।</p>
<p dir="ltr">इस बार के आयोजन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि 'पुत्र-हंता होलिका' में शामिल अधिकांश महिलाओं पर मुकदमे अभी लंबित हैं और अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है। हालांकि, संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि दो महिलाओं को निचली अदालत से फांसी की सजा हो चुकी है ।</p>
<p dir="ltr">जहां एक ओर इंदौर में होलिका दहन की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं 'पुत्र-हंता होलिका' का यह आयोजन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीकात्मक पर्व को एक नया और विवादित मोड़ दे रहा है। संस्था का कहना है कि यह आयोजन बच्चों के खिलाफ अपराध और महिला कानूनों के दुरुपयोग पर बहस छेड़ने के लिए है, लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह कदम न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए सामाजिक संदेश देने में सफल होता है या फिर यह एक नई कानूनी उलझन को जन्म देता है। फिलहाल, 2 मार्च की शाम इंदौर के महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड पर सबकी निगाहें टिकी होंगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 15:51:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>PM मोदी मन की बात: 131वें एपिसोड में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट की सराहना, कहा– ‘एक नेक पहल बदल सकती है लाखों जिंदगियां’</title>
                                    <description><![CDATA[PM मोदी मन की बात के 131वें एपिसोड में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट, अंगदान, डिजिटल फ्रॉड और त्योहारों पर बड़ा संदेश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-praised-global-ai-impact-summit-in-mann-ki/article-46940"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/pm-narendra-modi-highlights-global-ai-impact-summit-in-131st-mann-ki-baat,-calls-ai-a-game-changer-for-india’s-future-(1).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">PM मोदी मन की बात: AI समिट, अंगदान और साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर</p>
<p dir="ltr">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘PM मोदी मन की बात’ के 131वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए तकनीक, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक एकता पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारत तेजी से डिजिटल और तकनीकी शक्ति के रूप में उभर रहा है।</p>
<p dir="ltr"> ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट से दुनिया में दिखी भारत की ताकत</p>
<p dir="ltr">प्रधानमंत्री ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित Global AI Impact Summit का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस समिट में कई देशों के नेता, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, इनोवेटर्स और बड़ी टेक कंपनियों ने भाग लिया।</p>
<p dir="ltr">उन्होंने कहा कि भारत ने इस मंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा। खासतौर पर प्राचीन भारतीय ग्रंथों को संरक्षित करने में AI के उपयोग को सराहा गया। आयुर्वेद का प्रसिद्ध ग्रंथ सुश्रुत संहिता को AI तकनीक के माध्यम से पढ़ने योग्य डिजिटल रूप में परिवर्तित किया गया है, जिसे विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवादित भी किया जा सकता है।</p>
<p dir="ltr">प्रधानमंत्री ने इसे भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण बताते हुए कहा कि युवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंडिया को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p dir="ltr"> क्यों है यह खबर महत्वपूर्ण?</p>
<p dir="ltr">विशेषज्ञों के अनुसार AI समिट जैसे आयोजन:</p>
<p dir="ltr"> स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देते हैं</p>
<p dir="ltr"> विदेशी निवेश आकर्षित करते हैं</p>
<p dir="ltr"> रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं</p>
<p dir="ltr"> सांस्कृतिक धरोहर को डिजिटल रूप से सुरक्षित करते हैं</p>
<p dir="ltr"> अंगदान: एक नेक पहल जो बदल सकती है जीवन</p>
<p dir="ltr">PM मोदी मन की बात में प्रधानमंत्री ने अंगदान जागरूकता पर भी जोर दिया। उन्होंने केरल की एक 10 महीने की बच्ची के माता-पिता का उदाहरण दिया, जिन्होंने बेटी के निधन के बाद उसके अंग दान करने का साहसिक निर्णय लिया।</p>
<p dir="ltr">उन्होंने कहा कि अंगदान न केवल किसी का जीवन बचाता है, बल्कि समाज में मानवता का संदेश भी देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अंगदान की दर बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि हजारों मरीजों को नई जिंदगी मिल सके।</p>
<p dir="ltr"> क्या करें आप?</p>
<p dir="ltr"> अधिकृत पोर्टल पर अंगदान के लिए पंजीकरण करें</p>
<p dir="ltr"> परिवार के साथ इस विषय पर खुलकर चर्चा करें</p>
<p dir="ltr"> समाज में जागरूकता फैलाएं</p>
<p dir="ltr"> डिजिटल फ्रॉड और ‘डिजिटल अरेस्ट’ से सतर्क रहने की अपील</p>
<p dir="ltr">प्रधानमंत्री ने बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और साइबर अपराधों पर भी चिंता जताई। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि KYC केवल अधिकृत बैंकिंग चैनल के माध्यम से ही करें और किसी अंजान कॉलर को निजी जानकारी साझा न करें।</p>
<p dir="ltr">साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ ही धोखाधड़ी के मामले भी बढ़े हैं, इसलिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है।</p>
<p dir="ltr"> T20 वर्ल्ड कप में भारतीय मूल के खिलाड़ियों का प्रदर्शन</p>
<p dir="ltr">प्रधानमंत्री ने ICC Men's T20 World Cup में विभिन्न देशों की ओर से खेल रहे भारतीय मूल के खिलाड़ियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ये खिलाड़ी भारत और दुनिया के बीच मजबूत सांस्कृतिक सेतु का काम कर रहे हैं।</p>
<p dir="ltr"> त्योहारों की शुभकामनाएं और राजाजी उत्सव</p>
<p dir="ltr">प्रधानमंत्री ने रमजान और होली की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से सौहार्द और खुशी के साथ त्योहार मनाने की अपील की। उन्होंने 23 फरवरी को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले राजाजी उत्सव की भी जानकारी दी, जहां सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।</p>
<p dir="ltr">131वें एपिसोड में PM मोदी मन की बात ने स्पष्ट किया कि भारत तकनीकी प्रगति, सामाजिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक गौरव के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। AI समिट से लेकर अंगदान और डिजिटल सुरक्षा तक, प्रधानमंत्री का संदेश साफ है—एक छोटी सी सकारात्मक पहल लाखों जिंदगियां बदल सकती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Feb 2026 18:32:01 +0530</pubDate>
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