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                <title>CG News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>CG News RSS Feed</description>
                
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                <title>छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा फेरबदल, डीएसपी समेत 15 अधिकारियों की नई तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[गृह विभाग ने जारी किए तबादला और पदस्थापना आदेश, पदोन्नति के बाद अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-reshuffle-in-chhattisgarh-police-new-posting-of-15-officers/article-58408"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-police.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य पुलिस प्रशासन में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दो उप पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) और 13 सहायक सेनानियों (असिस्टेंट कमांडेंट) की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभागीय पदोन्नति एवं छानबीन समिति की अनुशंसा के आधार पर अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और सभी पदस्थापनाएं अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, संतुलित तथा सुचारू बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। समय-समय पर पुलिस विभाग में अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना की प्रक्रिया प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार की जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ विभिन्न इकाइयों में अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में राज्य पुलिस सेवा के पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें विशेष शाखा से जुड़े अधिकारियों के साथ सहायक सेनानी पद पर पदोन्नत अधिकारियों की पदस्थापना भी शामिल है। सरकार का मानना है कि नई नियुक्तियों से विभिन्न इकाइयों में कार्यों के बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश के अनुसार उप पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा) सविता सिंह परिहार को पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर से स्थानांतरित कर विशेष शाखा भिलाई में पदस्थ किया गया है। वहीं अर्नोल्ड संतरी बड़ा, जो वर्तमान में जशपुर से संबद्ध रहते हुए पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में कार्यरत थे, उन्हें विशेष शाखा बिलासपुर में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा विभाग ने 13 सहायक सेनानियों की भी नई पदस्थापना की है। इन अधिकारियों को राज्य के विभिन्न जिलों और बटालियनों में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किया गया है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को अपने नए पदस्थापन स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आती है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष शाखा पुलिस विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जो सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के संकलन, विश्लेषण और संवेदनशील मामलों की निगरानी का कार्य करती है। ऐसे में इस शाखा में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई पदस्थापनाओं से विशेष शाखा की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस विभाग में समय-समय पर किए जाने वाले स्थानांतरण और पदस्थापन न केवल प्रशासनिक संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि अधिकारियों को नई परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इससे विभाग में जवाबदेही बढ़ती है और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य संस्कृति विकसित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत पुलिस बल के प्रशिक्षण, संसाधनों के आधुनिकीकरण, तकनीकी सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की नई पदस्थापना को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारी अपने अनुभव का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, खुफिया तंत्र को मजबूत करने तथा जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में इन नियुक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। गृह विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी पदस्थापनाएं प्रशासनिक आधार पर की गई हैं और आवश्यकता के अनुसार भविष्य में इनमें बदलाव भी किया जा सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्र ही अपने नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दुर्ग पुलिस में बड़ा फेरबदल, 7 इंस्पेक्टरों का तबादला; कई थानों की बदलेगी कमान</title>
                                    <description><![CDATA[सुपेला, जामुल, उतई और खुर्सीपार समेत कई थानों में बदलाव तय, तीन नए निरीक्षक दुर्ग जिले में संभालेंगे जिम्मेदारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-reshuffle-in-durg-police-transfer-of-7-inspectors-command/article-58287"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/durg-police-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस मुख्यालय रायपुर ने बुधवार देर रात राज्यभर के 64 पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टरों) की तबादला सूची जारी की, जिसमें दुर्ग जिले के सात निरीक्षकों का अन्य जिलों में स्थानांतरण किया गया है। वहीं तीन नए निरीक्षकों की दुर्ग जिले में पदस्थापना की गई है। इस तबादले के बाद जिले के कई प्रमुख थानों की कमान बदलना लगभग तय माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर नई पदस्थापनाओं का आदेश जारी होने के बाद थाना प्रभारियों की नई जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। फिलहाल पुलिस महकमे में इस प्रशासनिक बदलाव को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार सुपेला थाना प्रभारी निरीक्षक अंबर सिंह भारद्वाज का तबादला कांकेर जिले में किया गया है। वहीं जामुल थाना प्रभारी रामेंद्र कुमार सिंह को कोंडागांव भेजा गया है। उतई थाना प्रभारी राजेश कुमार साहू को सुकमा जिले में नई जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा खुर्सीपार थाना में पदस्थ निरीक्षक आनंद शुक्ला का तबादला बीजापुर कर दिया गया है। ट्रैफिक शाखा में कार्यरत निरीक्षक मनीष शर्मा को दंतेवाड़ा भेजा गया है। निरीक्षक श्रद्धा पाठक (मिश्रा) और निरीक्षक वंदिता पानिकर का भी तबादला कोंडागांव जिले में किया गया है। इन सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर दुर्ग जिले को भी तीन नए निरीक्षक मिले हैं। आदेश के अनुसार नारायणपुर से निरीक्षक राकेश कुमार खुटेश्वर, कोंडागांव से निरीक्षक राजकुमारी पांडेय और बस्तर से निरीक्षक मोहम्मद तारीक हारिश का तबादला दुर्ग जिले में किया गया है। ये तीनों अधिकारी जल्द ही जिले में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि उन्हें किस थाना, शाखा या इकाई की कमान सौंपी जाएगी। इसके लिए जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से अलग से स्थानीय पदस्थापना आदेश जारी किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में सुपेला, उतई और कुछ अन्य थानों में थाना प्रभारियों की नई नियुक्तियां की गई थीं। ऐसे में ताजा तबादलों के बाद एक बार फिर थाना स्तर पर व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जिले के कई थानों में नए प्रभारी तैनात होंगे, जिससे पुलिस व्यवस्था में नई जिम्मेदारियों का बंटवारा किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव प्रशासनिक आवश्यकता और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं। दुर्ग जिला प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों में शामिल है, जहां औद्योगिक क्षेत्र, शहरी आबादी और लगातार बढ़ती गतिविधियों के कारण पुलिस व्यवस्था की भूमिका काफी अहम रहती है। सुपेला, जामुल, खुर्सीपार और उतई जैसे थाना क्षेत्र संवेदनशील और व्यस्त इलाकों में गिने जाते हैं। ऐसे में इन थानों के प्रभारियों में बदलाव का असर स्थानीय पुलिस व्यवस्था पर भी दिखाई देगा। नए अधिकारी अपनी कार्यशैली के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण की दिशा में काम करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी तबादला सूची केवल दुर्ग जिले तक सीमित नहीं है। राज्यभर के विभिन्न जिलों में कुल 64 निरीक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। इसे पुलिस विभाग का नियमित प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। समय-समय पर अधिकारियों के स्थानांतरण के जरिए विभाग कार्यप्रणाली में संतुलन बनाए रखने और अनुभव का बेहतर उपयोग करने की कोशिश करता है। इसके साथ ही विभिन्न जिलों में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी जाती हैं। तबादला आदेश पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम के हस्ताक्षर हैं। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्थानांतरित अधिकारी तत्काल प्रभाव से अपनी नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। इसके साथ ही संबंधित इकाइयों को भी आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नई नियुक्तियों में किसी प्रकार की देरी न हो। थाना स्तर पर नेतृत्व बदलने से कई बार कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। नए अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, सामुदायिक पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई रणनीति अपनाते हैं। वहीं पुराने अधिकारियों के अनुभव का लाभ दूसरे जिलों को मिलता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल किए जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिजली कटौती पर हाईकोर्ट की सख्ती, कहा- सिर्फ योजना नहीं, जनता को जमीन पर राहत दिखनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[बार-बार बिजली गुल होने पर शासन ने पेश किया एक्शन प्लान, हाईकोर्ट ने प्रगति रिपोर्ट मांगी; अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-strictness-on-power-cuts-said-not-just/article-58286"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-power-cut.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारिश और आंधी-तूफान के दौरान बिलासपुर में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और बिजली विभाग के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया गया है और कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट होने के बजाय स्पष्ट कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। जब तक उनका असर जमीन पर दिखाई नहीं देगा और आम लोगों को वास्तविक राहत नहीं मिलेगी, तब तक ऐसे दावों का कोई खास महत्व नहीं रहेगा। कोर्ट ने प्रशासन को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने और प्रगति रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से ऊर्जा सचिव और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक ने अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिलासपुर शहर की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तर पर बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नौ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों के तहत बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की योजना तैयार की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल यह पूरा मामला बिलासपुर में कुछ दिनों पहले हुई भारी बारिश और तेज आंधी के बाद सामने आया था। शहर के कई हिस्सों में पूरी रात बिजली आपूर्ति बाधित रही। हालात ऐसे थे कि वीवीआईपी क्षेत्र माने जाने वाले कलेक्ट्रेट और सिविल लाइन जैसे इलाकों में भी लंबे समय तक बिजली नहीं रही। इससे आम लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों ने लगातार बिजली गुल रहने, बार-बार फॉल्ट आने और विभाग की धीमी कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई थी। इस घटना के बाद मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में मामले की सुनवाई शुरू की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े सुधार प्रस्तावित हैं। शहर में अब पुराने और क्षतिग्रस्त सीमेंट के बिजली खंभों की जगह लोहे के पोल लगाए जाएंगे, ताकि तेज हवा या अन्य कारणों से बार-बार खंभे गिरने की समस्या कम हो सके। इसके अलावा जहां नए बिजली पोल लगाए जाएंगे, वहां भी स्टील के खंभों का ही उपयोग किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थायी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का तेजी से समाधान करने और बढ़ते लोड को नियंत्रित करने के लिए शहर में दो नए सप्लाई जोन बनाने की योजना भी तैयार की गई है। मंगला और कोनी क्षेत्रों को नए सप्लाई जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण एवं सामान्य विकास योजना के तहत करीब 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से ऐसे क्षेत्रों में खुले बिजली तार हटाकर कवर्ड केबल बिछाई जाएगी, जहां बार-बार फॉल्ट की समस्या सामने आती रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि शहर में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए नए सब-स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक मुख्य सब-स्टेशन और दो 33/11 केवी क्षमता वाले नए सब-स्टेशन बनाने के लिए जिला प्रशासन से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। वहीं पेड़ों की शाखाओं से बिजली लाइनों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए अतिरिक्त स्काईलिफ्ट वाहन तैनात किए जाएंगे। विभाग में तकनीकी कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्तियों की प्रक्रिया भी शुरू करने की जानकारी अदालत को दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से भी शपथ पत्र पेश किया गया। निगम आयुक्त ने बताया कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए विकास भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। यहां अधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। निगम ने यह भी बताया कि अप्रैल 2026 से ही शहर के सभी आठ जोनों में नालियों की सफाई और गाद निकालने का अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्य की जियो-टैग्ड तस्वीरें भी अदालत में प्रस्तुत की गई हैं। जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए 14 विशेष वाहनों का बेड़ा भी चौबीसों घंटे तैयार रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इन सभी दावों के बावजूद हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर बनाई गई योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। यदि बारिश के दौरान फिर बिजली गुल होती है या सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनती है, तो इसका अर्थ होगा कि योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हुआ। अदालत ने निर्देश दिया कि मानसून के पूरे दौर में बिजली आपूर्ति यथासंभव निर्बाध रखी जाए और किसी भी शिकायत का तत्काल समाधान किया जाए। डिवीजन बेंच ने नगर निगम आयुक्त और ऊर्जा सचिव को निर्देश दिया है कि वे शपथ पत्र के साथ विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक घोषित योजनाओं पर कितना काम हुआ है और जनता को उसका क्या लाभ मिला है। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाकर फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका असर शहर की व्यवस्था में साफ दिखाई देना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायपुर ने रचा नया रिकॉर्ड, 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को मिला NQAS प्रमाणन</title>
                                    <description><![CDATA[इलाज, जांच, स्वच्छता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों पर खरे उतरे अस्पताल; छत्तीसगढ़ का पहला जिला बना रायपुर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a4f3c907401d/article-58260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-health.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले की 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) यानी नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां सबसे अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को यह राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि लगातार मॉनिटरिंग, बेहतर प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों की टीमवर्क का परिणाम है। अभी जिले की दो स्वास्थ्य संस्थाओं के मूल्यांकन का परिणाम भारत सरकार से आना बाकी है, जबकि तीन अन्य संस्थानों का राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन होना शेष है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण गुणवत्ता मूल्यांकन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और मानक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं का कई स्तरों पर विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, इलाज और जांच की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता, अस्पताल की स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, मरीजों की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे अनेक मानकों को परखा जाता है। निर्धारित मानकों पर सफल होने के बाद ही किसी स्वास्थ्य संस्था को NQAS प्रमाणपत्र दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रायपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे थे। अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, चिकित्सकीय सेवाओं में सुधार, नियमित निरीक्षण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरी उतर सकीं। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रमाणन केवल एक उपलब्धि नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार की जिम्मेदारी भी है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार स्वास्थ्य संस्थाओं में नियमित मॉनिटरिंग, समय-समय पर समीक्षा बैठकें और टीमवर्क के कारण यह सफलता हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी गुणवत्ता के इन मानकों को बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने कहा कि NQAS प्रमाणन किसी भी स्वास्थ्य संस्था के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण प्रमाण होता है। उन्होंने बताया कि मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, अस्पतालों की स्वच्छता और सेवा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। यही कारण है कि रायपुर जिले ने प्रदेश में सबसे अधिक NQAS प्रमाणित स्वास्थ्य संस्थाओं वाला पहला जिला बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन संस्थानों का मूल्यांकन अभी बाकी है, उन्हें भी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">NQAS प्रमाणन का सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को मिलता है। इससे अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती है, मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिलता है और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ती है। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था होने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। साथ ही रिकॉर्ड प्रबंधन और दवा वितरण प्रणाली में सुधार आने से सेवाएं अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनती हैं। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता सुधार का सीधा असर मरीजों के भरोसे पर भी पड़ता है। जब अस्पताल राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं, तो लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक विश्वास जताते हैं। इससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है। रायपुर जिले में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाओं को NQAS प्रमाणन मिलने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश के अन्य जिले भी इसी दिशा में तेजी से काम करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत प्रमाणित संस्थाओं का समय-समय पर दोबारा मूल्यांकन भी किया जाता है। इसलिए प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी अस्पतालों को लगातार गुणवत्ता बनाए रखनी होती है। यदि किसी संस्था में निर्धारित मानकों का पालन नहीं होता है तो उसका प्रमाणन प्रभावित हो सकता है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और सुधार की प्रक्रिया को जारी रखता है। रायपुर की इस उपलब्धि को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। साथ ही यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शेष स्वास्थ्य संस्थाओं को भी NQAS प्रमाणन दिलाया जाए और पूरे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक फेरबदल: 8 IAS और 19 राज्य सेवा अधिकारियों का तबादला, कई जिलों को मिले नए CEO</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने देर रात जारी किए आदेश, रिमिजियस एक्का को SUDA का अतिरिक्त प्रभार, कई विभागों और जिला पंचायतों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/administrative-reshuffle-in-chhattisgarh-8-ias-and-19-state-service/article-58183"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-ias-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 8 अधिकारियों और राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारियों का तबादला कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से देर रात जारी आदेश में कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कई जिलों और विभागों में नए अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। माना जा रहा है कि सरकार ने आगामी प्रशासनिक आवश्यकताओं और विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए यह फेरबदल किया है। जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रिमिजियस एक्का को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी क्रम में गजेंद्र सिंह ठाकुर को राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग का उप सचिव नियुक्त किया गया है। यह विभाग प्रदेश में भूमि प्रबंधन, प्राकृतिक आपदाओं से राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए अहम माना जाता है। सरकार ने उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी है। आईएएस अधिकारियों के तबादलों में जिला पंचायतों में भी कई नए मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) की नियुक्ति की गई है। प्रतीक जैन को जिला पंचायत कोरबा का नया मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। वहीं सुरूचि सिंह को नगर पालिका निगम भिलाई का आयुक्त नियुक्त किया गया है। भिलाई जैसे बड़े नगरीय निकाय में उन्हें शहरी विकास, सफाई व्यवस्था, आधारभूत सुविधाओं और विभिन्न विकास योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी निभानी होगी। सरकार ने जिला पंचायत धमतरी की जिम्मेदारी जयंत नाहटा को सौंपी है। एम. भार्गव को जिला पंचायत दंतेवाड़ा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। तन्मय खन्ना को जिला पंचायत बस्तर और दुर्गा प्रसाद अधिकारी को जिला पंचायत राजनांदगांव का नया CEO नियुक्त किया गया है। इन जिलों में ग्रामीण विकास, पंचायत योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के स्तर पर भी व्यापक फेरबदल किया गया है। कुल 19 अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाना और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। इंद्रजीत बर्मन को स्वास्थ्य सेवाएं विभाग में नई जिम्मेदारी दी गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चुनौतियों और योजनाओं के बेहतर संचालन को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजीव कुमार पांडेय को उच्च शिक्षा संचालनालय में पदस्थ किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग में उन्हें विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी निभानी होगी। इसी तरह भारती चंद्राकर को मार्कफेड में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य में कृषि और सहकारी गतिविधियों से जुड़े इस महत्वपूर्ण संस्थान में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिनेश कुमार नाग को छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन में पदस्थ किया गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में इस निगम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वहीं नयनतारा सिंह तोमर को चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में नई जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार ने जिला पंचायतों में भी कई बदलाव किए हैं। गोकुल राम राबटे को जिला पंचायत मुंगेली का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। आशुतोष चतुर्वेदी को जिला पंचायत बलरामपुर-रामानुजगंज और अभिषेक कुमार गुप्ता को जिला पंचायत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का CEO नियुक्त किया गया है। इन अधिकारियों से ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की अपेक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासनिक फेरबदल के तहत प्रभाकर पांडेय को खेल एवं युवा कल्याण विभाग में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं से जुड़ी योजनाओं के बेहतर संचालन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। वहीं शशांक पांडेय को छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में पदस्थ किया गया है। राज्य में सड़क निर्माण और आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स में उन्हें जिम्मेदारी निभानी होगी। सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को जल्द ही अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आगामी महीनों में विभिन्न विभागों की योजनाओं और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से यह बदलाव किए गए हैं। प्रशासनिक हलकों में इस तबादला सूची को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर होने वाले ऐसे फेरबदल से प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा आती है और अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलता है। इससे शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुधार होने की उम्मीद रहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:55:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर फैक्ट्री में भीषण धमाका, 3 मजदूरों की मौत: 200 मीटर दूर तक बिखरे शवों के अंग</title>
                                    <description><![CDATA[उरला की 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में हादसे के बाद मचा हड़कंप, कई मजदूर घायल; पुलिस ने शुरू की जांच, सुरक्षा मानकों की होगी पड़ताल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/will-retire-at-the-age-of-62-not-65-high/article-58177"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-factory-blast.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में मंगलवार शाम हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री परिसर में काम कर रहे तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके शरीर के अंग करीब 200 मीटर दूर तक बिखर गए। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग भी तेज धमाके की आवाज सुनकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।</p>
<p style="text-align:justify;">हादसा उरला थाना क्षेत्र के बेंड्री स्थित 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में हुआ। विस्फोट के समय फैक्ट्री में कई मजदूर काम कर रहे थे। अचानक हुए जोरदार धमाके से पूरा परिसर हिल गया। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि फैक्ट्री का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और वहां मौजूद मजदूरों में भगदड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विस्फोट किसी बम जैसी आवाज के साथ हुआ, जिसके बाद चारों ओर धूल, धुआं और मलबा फैल गया। हादसे में 25 वर्षीय कमल सिंह, लाल सिंह और 19 वर्षीय अरुण पांडे की मौत हो गई। कमल सिंह को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं लाल सिंह और अरुण पांडे की मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतकों में कमल सिंह और लाल सिंह मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के निवासी थे, जबकि अरुण पांडे छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का रहने वाला था। विस्फोट में कई अन्य मजदूर भी घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने घायलों के बेहतर उपचार के लिए विशेष चिकित्सकीय टीम तैनात की है।</p>
<p style="text-align:justify;">हादसे के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमों ने पूरे परिसर को घेर लिया और राहत अभियान शुरू किया। मलबे के बीच फंसे लोगों की तलाश की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं कोई अन्य मजदूर अंदर तो नहीं रह गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर फैक्ट्री परिसर में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है। प्रारंभिक स्तर पर यह जांच की जा रही है कि फैक्ट्री में औद्योगिक सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। यह भी देखा जा रहा है कि विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ और क्या मशीनों या उत्पादन प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी इसके पीछे कारण बनी।पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां फैक्ट्री प्रबंधन, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही हैं। साथ ही घटनास्थल से तकनीकी साक्ष्य भी एकत्र किए जा रहे हैं। यदि जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट प्रभावी ढंग से किए जाएं तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। हादसे के बाद आसपास के उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों के बीच भी भय और चिंता का माहौल है।किसी भी फैक्ट्री में विस्फोट जैसी घटना कई कारणों से हो सकती है। इनमें गैस रिसाव, रासायनिक प्रतिक्रिया, दबाव वाले उपकरणों में खराबी, मशीनों का ओवरलोड होना या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना शामिल हो सकता है। वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच और फोरेंसिक परीक्षण के बाद ही चल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ की किसी औद्योगिक इकाई में इस प्रकार का हादसा हुआ हो। पिछले कुछ वर्षों में भी राज्य की विभिन्न फैक्ट्रियों में विस्फोट और औद्योगिक दुर्घटनाओं की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें अनेक मजदूरों की जान गई। हर घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे, लेकिन समय के साथ अधिकांश मामलों में सुधार की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। मृतकों के परिजनों का कहना है कि उनके परिवार का सहारा छिन गया है। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजा देने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जाता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा। साथ ही यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अन्य फैक्ट्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:20:03 +0530</pubDate>
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                <title>रायपुर कलेक्टर निवास में देर रात लगी आग, शॉर्ट-सर्किट की आशंका; एक घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू</title>
                                    <description><![CDATA[फायर ब्रिगेड की टीम ने समय रहते आग बुझाई, कोई जनहानि नहीं; पार्किंग शेड, फर्नीचर और विद्युत उपकरणों को नुकसान, प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/fire-broke-out-late-night-in-raipur-collectors-residence-suspicion/article-57951"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-collector-residence.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह के सरकारी निवास परिसर में रविवार देर रात अचानक आग लगने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पार्किंग शेड, फर्नीचर, विद्युत उपकरण और अन्य सामान को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार आग शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगभग दो से ढाई बजे के बीच लगी। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक परिसर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई देने पर वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड और पुलिस कंट्रोल रूम को भी जानकारी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, लेकिन दमकल कर्मियों ने समय रहते मोर्चा संभाल लिया। करीब एक घंटे तक लगातार पानी की बौछारें और अन्य अग्निशमन उपकरणों का उपयोग कर आग को नियंत्रित किया गया। इसके बाद यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं दोबारा आग भड़कने की संभावना न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट-सर्किट माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विद्युत प्रणाली में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह का पता विस्तृत तकनीकी जांच और फॉरेंसिक निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा। जांच पूरी होने तक किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आग की चपेट में आने से कलेक्टर निवास परिसर का पार्किंग शेड सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इसके अलावा वहां रखे कुछ फर्नीचर, विद्युत उपकरण, वायरिंग और अन्य सामग्री भी जल गई। नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए संबंधित विभागों की टीम को निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि सभी क्षतिग्रस्त वस्तुओं का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति कुछ समय के लिए बंद कर दी गई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि बिजली चालू रहती तो आग और अधिक फैल सकती थी या किसी अन्य दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती थी। बिजली विभाग की टीम ने बाद में पूरे परिसर की वायरिंग और विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आग बुझाने के कार्य का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। अधिकारियों ने फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पाने से बड़ा हादसा टल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार आग लगने के बाद सबसे पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि परिसर में मौजूद सभी लोग सुरक्षित हों। इसके बाद आग को आसपास के हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए व्यवस्थित तरीके से अभियान चलाया गया। दमकल कर्मियों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आग बुझाने का कार्य पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने भी बताया कि देर रात अचानक दमकल वाहनों के सायरन सुनाई दिए, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। कुछ ही देर में पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों में नियमित रूप से विद्युत वायरिंग, फायर सेफ्टी सिस्टम और अग्निशमन उपकरणों की जांच बेहद आवश्यक होती है। समय-समय पर फायर ऑडिट कराने से इस प्रकार की घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए कर्मचारियों को भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रायपुर कलेक्टर निवास में लगी आग भले ही समय रहते नियंत्रित कर ली गई, लेकिन इस घटना ने सरकारी परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर, नियमित फायर ऑडिट और विद्युत उपकरणों के रखरखाव पर विशेष ध्यान देकर इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:40:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नशे के खिलाफ वीडियो बनाने वाला युवक 4 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार, पुलिस की कार्रवाई से मचा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[इंस्टाग्राम पर नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाला भिलाई का युवक हरिशंकर यादव उर्फ जुगनू एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार, मां ने कार्रवाई पर उठाए सवाल तो पुलिस ने जब्ती और पुराने मामलों का किया दावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/youth-making-video-against-drugs-arrested-with-4-kg-ganja/article-57541"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/durg-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी है। इंस्टाग्राम पर नशे के खिलाफ लगातार वीडियो बनाकर पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग करने वाला एक युवक अब स्वयं गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी के कब्जे से 4 किलो 198 ग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब दो लाख रुपए बताई गई है। वहीं दूसरी ओर आरोपी के परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले को झूठा बताया है। गिरफ्तार युवक की पहचान भिलाई निवासी 24 वर्षीय हरिशंकर यादव उर्फ जुगनू के रूप में हुई है। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर 'जुगनू ब्लॉगर' नाम से सक्रिय था। उसके वीडियो मुख्य रूप से नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और पुलिस-प्रशासन से कार्रवाई की मांग करने पर आधारित होते थे। इसी कारण उसकी गिरफ्तारी ने कई लोगों को हैरान कर दिया है।</p>
<p>पुलिस के अनुसार 29 जून को सूचना मिली थी कि हरिशंकर यादव खुर्सीपार थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर रोड स्थित बिहारी मोहल्ला के पास गांजा बेचने की तैयारी में मौजूद है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी पुलिस को देखकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके पास से 4 किलो 198 ग्राम गांजा, 300 रुपए नकद और एक एक्टिवा स्कूटर जब्त किया। पुलिस के अनुसार जब्त किए गए गांजे और अन्य सामान की कुल कीमत करीब दो लाख रुपए है। आरोपी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की धारा 20(ख) और 27ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। खुर्सीपार थाना पुलिस का कहना है कि हरिशंकर यादव के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी लंबे समय से अवैध गतिविधियों में संलिप्त था और गांजा बेचकर आर्थिक लाभ कमाने का प्रयास कर रहा था।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि गिरफ्तारी से करीब एक महीने पहले हरिशंकर यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इस वीडियो में वह खुर्सीपार क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर जाकर नशे से जुड़े सामान, इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन, सिरिंज और नशीली दवाओं की खाली शीशियां दिखाता नजर आया था। वीडियो में उसने पुलिस और प्रशासन से नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई करने की अपील भी की थी। अपने कई वीडियो में वह स्कूलों के आसपास, पार्कों, खेल मैदानों और सुनसान स्थानों पर फैले नशे से जुड़े कचरे को साफ करते हुए भी दिखाई देता था। एक वीडियो में उसने स्थानीय थाना प्रभारी से सीधे कहा था कि क्षेत्र में नशे के कारोबार पर ध्यान देकर कार्रवाई की जाए। यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।</p>
<p>इस पूरे मामले में आरोपी की मां गोमती यादव ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे को पुलिस सोमवार को अपने साथ लेकर गई थी। उन्होंने दावा किया कि बेटे के पास से कोई गांजा बरामद नहीं हुआ और उसे गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि यदि वास्तव में बरामदगी हुई है तो उसका स्पष्ट प्रमाण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। गोमती यादव का कहना है कि उनका बेटा लगातार नशे के खिलाफ आवाज उठाता रहा है और इसी कारण उसे परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर पड़े इंजेक्शन तथा नशीले पदार्थों से जुड़े सामान के वीडियो बनाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। परिवार का आरोप है कि इसी वजह से उस पर झूठा मामला दर्ज किया गया है।</p>
<p>हालांकि पुलिस ने परिवार के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को नियमानुसार गिरफ्तार किया गया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के आदेश के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है। एनडीपीएस एक्ट के मामलों में जब्ती, साक्ष्य और जांच प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। ऐसे मामलों में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर अंतिम निर्णय देती है। इसलिए पूरे मामले की सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 16:41:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिलासपुर में चाकू की नोक पर स्कूटी और नकदी की लूट, नाबालिग समेत तीन आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[रात में घर लौट रहे युवक पर पीछे से हमला कर गिराया, चाकू अड़ाकर छीनी स्कूटी और कैश; पुलिस ने कुछ ही घंटों में आरोपियों को दबोचा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/three-accused-including-a-minor-arrested-for-looting-scooter-and/article-56395"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-loot-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बिलासपुर के चकरभाठा थाना क्षेत्र में एक युवक से चाकू की नोक पर स्कूटी और नकदी लूटने का मामला सामने आया है। रात के समय घर लौट रहे युवक पर तीन बदमाशों ने पीछे से हमला कर दिया और उसे सड़क पर गिरा दिया। इसके बाद आरोपियों ने चाकू अड़ाकर उससे नकदी छीन ली और उसकी स्कूटी लेकर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाबालिग समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके कब्जे से लूटी गई संपत्ति भी बरामद कर ली है।  ग्राम सेंवार निवासी सुनील यादव सिरगिट्टी स्थित एक कोल्डड्रिंक्स कंपनी में हाउसकीपिंग कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे वह अपनी स्कूटी से काम खत्म कर घर लौट रहा था। बताया जा रहा है कि जब वह चकरभाठा थाना क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी पीछे से बाइक पर सवार तीन युवक उसके पास पहुंचे। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, एक आरोपी ने उसे थप्पड़ मार दिया। अचानक हुए हमले से उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर गिर पड़ा। सड़क पर गिरने के बाद तीनों बदमाश उसके पास पहुंच गए और उसे घेर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपियों ने उसकी जेब की तलाशी ली और उसमें रखी नकदी निकाल ली। इस दौरान एक बदमाश ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर उसका चेहरा भी देखा। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपियों में एक युवक की आंखें बड़ी थीं और उसका रंग सांवला था, जबकि दूसरा दाढ़ी वाला और कद में छोटा था। तीसरा आरोपी गोरा और पतला-दुबला बताया गया है। इनमें से एक ने उसकी गर्दन पर चाकू अड़ा दिया था, जिससे वह पूरी तरह डर गया और विरोध नहीं कर सका। इसी बीच दूसरे आरोपी ने उसकी जेब से पैसे निकाल लिए। लूटपाट के बाद तीनों बदमाश उसकी स्कूटी लेकर वहां से निकल गए। हालांकि कुछ दूरी तय करने के बाद वे फिर वापस लौटे और युवक को धमकाने लगे। बताया जा रहा है कि उन्होंने दोबारा चाकू निकालकर डराने की कोशिश की ताकि वह किसी तरह का पीछा न कर सके। इसी दौरान नगपुरा की ओर से एक कार आ रही थी, जिसकी तेज रोशनी देखकर आरोपी घबरा गए। हालात बदलते देख वे स्कूटी और नकदी लेकर तेजी से सिरगिट्टी की दिशा में भाग निकले। घटना के बाद पीड़ित ने तत्काल डायल 112 को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आसपास के इलाकों में आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार सीएसपी निमितेश सिंह के मार्गदर्शन में चकरभाठा थाना और एसीसीयू की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने घटना स्थल के आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ की, संदिग्धों की जानकारी जुटाई और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। लगातार की गई छानबीन के बाद पुलिस को आरोपियों के सिरगिट्टी के नयापारा क्षेत्र में रहने की जानकारी मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने देर रात और बुधवार सुबह विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी। इसके बाद तीनों आरोपियों को पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रकाश यादव उर्फ रवि यादव (20), रोहन दास (21) और एक नाबालिग के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया चाकू, लूट की रकम में से 395 रुपए और पीड़ित की प्लेजर मोपेड बरामद कर ली है। आरोपियों के खिलाफ लूट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। वहीं नाबालिग आरोपी के मामले में किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई जा रही है ताकि इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:12:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रामीणों की शिकायत पर एक्शन, डिप्टी CM के निर्देश के बाद दो EE को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर दौरे में पेयजल संकट की शिकायत सामने आने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सख्त, दंतेवाड़ा और कोंडागांव के अधिकारियों से सात दिन में मांगा जवाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/action-on-villagers-complaint-notice-to-two-ees-after-instructions/article-55734"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/arun-sao.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजनाओं के संचालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उनके सामने ही पेयजल संकट की समस्या रखी थी। लोगों का कहना था कि गांवों में करोड़ों रुपए खर्च कर नल-जल योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है। शिकायत मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई थी और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब इसी मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दंतेवाड़ा और कोंडागांव जिले के कार्यपालन अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। मामला उस समय सामने आया जब उप मुख्यमंत्री अरुण साव जल अर्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बस्तर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे थे। कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव और दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी परेशानी बताई। लोगों का कहना था कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई, टंकियां बनाई गईं और घर-घर नल कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन पानी की आपूर्ति नियमित नहीं हो रही है। कई परिवारों को आज भी पुराने स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का निर्माण कराना नहीं है, बल्कि लोगों तक उसका लाभ पहुंचाना भी है। यदि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा की गई और प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम की ओर से दोनों जिलों के कार्यपालन अभियंताओं को नोटिस जारी किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नोटिस में कहा गया है कि कोंडागांव जिले के बेड़मा गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत तैयार की गई नल-जल योजना का संचालन और संधारण संतोषजनक नहीं पाया गया है। इसके कारण ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही। विभाग ने माना है कि यह स्थिति शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाती है। साथ ही योजना के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करती है। विभाग का कहना है कि यदि योजना पूरी तरह तैयार है तो फिर ग्रामीणों को पानी क्यों नहीं मिल रहा, इसका जवाब संबंधित अधिकारियों को देना होगा। दूसरी ओर दंतेवाड़ा जिले के टेकनार गांव में भी स्थिति कुछ ऐसी ही पाई गई। जल अर्पण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि गांव के एक मोहल्ले में कई घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। गर्मी के मौसम में लोगों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग के अनुसार तकनीकी मानकों के अनुरूप जलापूर्ति नहीं होना इस बात का संकेत है कि योजना के संचालन और निगरानी में कहीं न कहीं कमी रही है। यही वजह है कि दंतेवाड़ा के कार्यपालन अभियंता से भी जवाब तलब किया गया है। अधिकारियों को जारी नोटिस में सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने साफ किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित अधिकारियों में भी हलचल देखी जा रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकार अब जल जीवन मिशन और अन्य पेयजल योजनाओं के संचालन को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने का अभियान चलाया गया है। बस्तर जैसे दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में भी इस योजना के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की गई है। हालांकि कई स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी संचालन और रखरखाव की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पाइपलाइन बिछा देने या टंकी बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक पानी नियमित रूप से घरों तक नहीं पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>हेल्पलाइन नंबर पर खुद कॉल सुनने बैठे सीएम साय, शिकायत मिलते ही दिए कार्रवाई के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शुरुआत, लोगों की समस्याएं सुनकर अधिकारियों को त्वरित समाधान के आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a293492ab844/article-55524"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली की शुरुआत की गई। इस दौरान एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद हेल्पलाइन सेंटर पहुंचे और औपचारिक निरीक्षण के बीच अचानक हेडफोन लगाकर कॉल रिसीव करने लगे। हेल्पलाइन नंबर पर आई एक शिकायत को उन्होंने सीधे सुना और संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री का यह कदम पूरे कार्यक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर में स्थापित हेल्पलाइन सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने शिकायतों के पंजीयन, निगरानी और उनके निराकरण की प्रक्रिया को करीब से देखा। अधिकारियों से जानकारी लेने के दौरान मुख्यमंत्री ने यह समझने की कोशिश की कि शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके समाधान तक की पूरी प्रक्रिया किस तरह काम करती है। इसी बीच उन्होंने खुद एक ऑपरेटर की सीट पर बैठकर कॉल लेने की इच्छा जताई और हेडफोन पहनकर सीधे नागरिकों से संवाद किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री द्वारा रिसीव की गई पहली कॉल रायपुर निवासी पूना राम ठाकरे की थी। कॉलर ने आय प्रमाण पत्र से जुड़ी अपनी समस्या मुख्यमंत्री के सामने रखी। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान पहले उनका नाम और निवास स्थान पूछा, फिर पूरी शिकायत को ध्यान से सुना। शिकायत सुनने के बाद उन्होंने कॉलर को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या दर्ज कर ली गई है और संबंधित विभाग को जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम बनकर न रह जाए, बल्कि लोगों को वास्तविक समाधान भी मिलना चाहिए। उन्होंने शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता, जवाबदेही और समय सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई नागरिक अपनी समस्या लेकर हेल्पलाइन तक पहुंचता है तो उसे यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जाएगी और उस पर कार्रवाई भी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली राज्य के विभिन्न विभागों को एक साझा मंच पर जोड़ने वाली व्यवस्था है। इस प्रणाली में 1200 से अधिक शिकायत श्रेणियां शामिल की गई हैं। वहीं लगभग 8000 अधिकारियों को चार अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर जोड़ा गया है ताकि शिकायतों का निपटारा प्रभावी ढंग से किया जा सके। व्यवस्था को इस तरह तैयार किया गया है कि ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक किसी भी शिकायत की लगातार निगरानी की जा सके। यदि किसी स्तर पर समाधान नहीं होता तो मामला स्वतः अगले स्तर पर पहुंच जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन सेंटर में काम कर रहे कर्मचारियों और युवाओं से भी बातचीत की। उन्होंने उनके अनुभव और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि हेल्पलाइन संचालन में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे एक ओर जहां तकनीकी और प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आया है, वहीं दूसरी ओर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के जरिए सरकार नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना चाहती है। कई बार लोगों की शिकायतें विभागों तक पहुंचने के बाद भी लंबे समय तक लंबित रहती थीं, लेकिन हेल्पलाइन के माध्यम से अब हर शिकायत का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उसकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। इससे शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनता की समस्याओं का समाधान है। सरकार चाहती है कि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। नई हेल्पलाइन व्यवस्था इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि शिकायतों के निपटारे में संवेदनशीलता दिखाई जाए और नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>
<p>मुख्यमंत्री द्वारा खुद फोन उठाकर शिकायत सुनने की घटना को लेकर दिनभर चर्चा होती रही। कई लोगों ने इसे जनता और सरकार के बीच सीधे संवाद की सकारात्मक पहल बताया। अब देखना होगा कि नई हेल्पलाइन व्यवस्था आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है और शिकायतों के त्वरित समाधान में कितनी प्रभावी साबित होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:29:59 +0530</pubDate>
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                <title>अफेयर के शक ने ली जान, केस लड़ रहे वकील की आरोपी ने कर दी हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर के कोटा क्षेत्र में सनसनीखेज वारदात, आरोपी ने आंखों में मिर्च झोंककर किया हमला, पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/the-person-whose-case-he-was-fighting-killed-the-lawyer/article-55090"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली हत्या की वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। कोटा थाना क्षेत्र में एक 27 वर्षीय वकील की कथित तौर पर प्रेम संबंधों के शक में हत्या कर दी गई। आरोप है कि जिस व्यक्ति का कानूनी केस मृतक वकील देख रहा था, उसी ने घात लगाकर उस पर हमला किया और पत्थर से सिर कुचलकर उसकी जान ले ली। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है, जबकि पुलिस आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।</p>
<p>मृतक की पहचान निखिल गोस्वामी के रूप में हुई है, जो बिलासपुर के कोनी क्षेत्र का निवासी था। निखिल पेशे से वकील था, साथ ही वह जिम का संचालन भी करता था। इसके अलावा वह एक निजी बार में बाउंसर के रूप में भी काम करता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि निखिल एक आपराधिक प्रवृत्ति के युवक भोला मानिकपुरी का कानूनी मामला देख रहा था। इसी दौरान उसकी पहचान भोला की पत्नी से हुई। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और इसे लेकर भोला को लंबे समय से शक था।</p>
<p>पुलिस सूत्रों के अनुसार, भले ही पिछले कुछ समय से निखिल और महिला के बीच बातचीत बंद हो चुकी थी, लेकिन आरोपी भोला को विश्वास था कि दोनों के बीच संबंध अब भी बने हुए हैं। इसी शक ने धीरे-धीरे दुश्मनी का रूप ले लिया। प्रारंभिक जांच के मुताबिक आरोपी ने पहले से ही निखिल की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी और मौका मिलते ही हमला करने की योजना बनाई।</p>
<p>गुरुवार रात निखिल अपने एक दोस्त के साथ किसी काम से बाहर निकला था। बताया जा रहा है कि आरोपी पहले से रास्ते में घात लगाकर बैठा हुआ था। जैसे ही निखिल वहां पहुंचा, आरोपी ने उसकी आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया। अचानक हुए हमले से निखिल कुछ समझ नहीं पाया और खुद को संभालने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान उसका दोस्त घबराकर मौके से भाग गया। इसके बाद आरोपी ने जमीन पर पड़े बड़े पत्थर से निखिल पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।</p>
<p>प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक हमले का मुख्य निशाना निखिल का सिर था। पत्थर से किए गए लगातार वार के कारण वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने घटना की सूचना मिलने पर उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे बिलासपुर रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में ही उसकी हालत और बिगड़ गई। बाद में मंगला चौक स्थित एक निजी अस्पताल में जांच के दौरान चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।</p>
<p>घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक जांच में हत्या के पीछे व्यक्तिगत रंजिश और अवैध संबंधों के शक को मुख्य वजह माना जा रहा है।</p>
<p>एडिशनल एसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह ने बताया कि आरोपी अपनी पत्नी के चरित्र को लेकर संदेह करता था। उसे आशंका थी कि उसकी पत्नी और निखिल गोस्वामी के बीच संबंध हैं। इसी शक के चलते उसने हत्या जैसी गंभीर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।</p>
<p>घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखा जा रहा है। निखिल को जानने वाले लोगों का कहना है कि वह अपने पेशे और अन्य कार्यों में व्यस्त रहता था तथा इलाके में उसकी अच्छी पहचान थी। अचानक हुई इस घटना ने उसके परिवार और परिचितों को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजन आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है। मृतक के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच होगी ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके। मुख्य आरोपी फरार बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:13:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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