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                <title>Education News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Education News RSS Feed</description>
                
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                <title>असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में NOC विवाद, हाईकोर्ट ने 120 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति पर उठे सवाल, उच्च शिक्षा सचिव और सीजीपीएससी को पूरे मामले की जांच कर तय समय में निर्णय लेने के निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/noc-controversy-in-assistant-professor-recruitment-high-court-asked-for/article-58488"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-high-court-(10).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता के मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच कर 120 दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाए। मामला राजनीति शास्त्र विषय में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति से जुड़ा है, जहां आरोप लगाया गया है कि हरियाणा सरकार में पहले से कार्यरत एक उम्मीदवार को आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना ही नियुक्ति दे दी गई। इस मामले को लेकर रायगढ़ निवासी अली हसन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब उच्च शिक्षा सचिव और सीजीपीएससी को पूरे रिकॉर्ड की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी। माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य की सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता अली हसन ने अपनी याचिका में बताया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2019 में राजनीति शास्त्र विषय के सहायक प्राध्यापक के 59 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2021 में अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई, जिसमें अली हसन को अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहला स्थान मिला। चयन सूची का अध्ययन करने के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि मुख्य चयन सूची में शामिल रंजन तिवारी पहले से हरियाणा सरकार के उच्चतर शिक्षा निदेशालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इसके बाद अली हसन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत हरियाणा सरकार से संबंधित जानकारी मांगी। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार रंजन तिवारी 13 फरवरी 2020 से हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित शासकीय महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवा दे रहे थे। याचिका में दावा किया गया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में नियुक्ति के लिए अपने वर्तमान नियोक्ता से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया था और न ही उसे प्रस्तुत किया गया। इसके बावजूद 29 अप्रैल 2022 को उनकी नियुक्ति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटापारा, जिला बलौदाबाजार में कर दी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नियुक्ति सेवा नियमों और भर्ती प्रक्रिया की शर्तों के विपरीत है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थानों में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए नई नियुक्ति स्वीकार करने से पहले संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी कर्मचारी की सेवा स्थिति स्पष्ट रहे और नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। याचिका में यह भी कहा गया कि भर्ती नियमों के अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी गलत जानकारी देता है या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी संभव है। मामले को मजबूत करने के लिए याचिकाकर्ता ने भाटापारा शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी। कॉलेज प्रशासन ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि रंजन तिवारी ने 23 मई 2022 को कार्यभार ग्रहण किया था, लेकिन उनके कार्यालय रिकॉर्ड में नियोक्ता का अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। इस तथ्य को अदालत ने भी गंभीरता से लिया। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ में हुई। अदालत ने तत्काल नियुक्ति रद्द करने का आदेश नहीं दिया, बल्कि उच्च शिक्षा सचिव और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और उपलब्ध दस्तावेजों, सेवा नियमों तथा संबंधित तथ्यों के आधार पर 120 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सरकारी नियुक्तियों में नियमों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी चूक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि जांच में याचिकाकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो नियुक्ति पर प्रभाव पड़ सकता है और प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी निर्णय लिया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NEET-UG 2027 में बड़ा बदलाव, छह दिन तक होगी परीक्षा; पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड होगा एग्जाम</title>
                                    <description><![CDATA[पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार, देशभर में 1000 से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, JEE की तर्ज पर कई दिनों में होगा आयोजन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-change-in-neet-ug-2027-the-exam-will-be-for/article-58290"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/neet-ug-2027.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही परीक्षा एक ही दिन के बजाय कम से कम छह दिनों तक अलग-अलग शिफ्टों में कराई जाएगी। परीक्षा के लिए देशभर में एक हजार से अधिक परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे, ताकि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को सुविधाजनक तरीके से परीक्षा दिलाई जा सके। यह बदलाव पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली NEET-UG परीक्षा में लगभग 25 लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं। अब तक यह परीक्षा पूरे देश में एक ही दिन पेन-पेपर मोड में आयोजित की जाती रही है। लेकिन बढ़ती परीक्षार्थियों की संख्या, सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को देखते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की योजना बनाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था के तहत परीक्षा इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main की तरह कई दिनों तक आयोजित होगी। अभ्यर्थियों को अलग-अलग तिथियों और शिफ्टों में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी, जिससे प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके अलावा डिजिटल परीक्षा प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया भी अधिक तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">परीक्षा के लिए देशभर में 1000 से अधिक आधुनिक परीक्षा केंद्र तैयार किए जाएंगे। इन केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी सहायता उपलब्ध रहेगी। परीक्षा केंद्रों का चयन इस तरह किया जाएगा कि अभ्यर्थियों को अपने घर से बहुत दूर यात्रा न करनी पड़े। सरकार और NTA का प्रयास है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के उम्मीदवारों को भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की समान सुविधा मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">NEET परीक्षा में यह बदलाव वर्ष 2024 में सामने आए पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों के बाद तेज हुए सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है। उस समय परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठे थे। कई राज्यों से पेपर लीक, फर्जीवाड़े और परीक्षा संचालन में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने का फैसला लिया था। शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर विचार कर रहे थे, लेकिन विवाद के बाद इस प्रक्रिया को गति मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष भी NEET-UG परीक्षा चर्चा में रही। वर्ष 2026 में परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इसमें करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा के कुछ दिनों बाद गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने लगीं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में अनियमितताओं की सूचना मिली, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी गई। जांच के आधार पर 12 मई को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की गई। इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने री-एग्जाम की नई तारीख जारी की। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से कई समस्याओं का समाधान संभव है। प्रश्नपत्र डिजिटल माध्यम से सीधे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचेगा, जिससे प्रिंटिंग, परिवहन और वितरण के दौरान सुरक्षा जोखिम कम होंगे। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तरों का मूल्यांकन भी तेजी से किया जा सकेगा। हालांकि इसके साथ तकनीकी चुनौतियां भी होंगी, जिनसे निपटने के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना आवश्यक होगा। नई परीक्षा प्रणाली लागू करने के लिए केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी कर रही है। परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, बिजली की निर्बाध व्यवस्था, बैकअप नेटवर्क, साइबर सुरक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा परीक्षा के दौरान किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी ताकि किसी अभ्यर्थी को नुकसान न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:16:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में 2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र, 1 अप्रैल से शुरू होंगी कक्षाएं</title>
                                    <description><![CDATA[CBSE की तर्ज पर लागू होगी नई व्यवस्था, मई-जून में रहेंगी गर्मी की छुट्टियां; समय पर किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल वितरण का लक्ष्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/academic-session-of-schools-will-change-in-chhattisgarh-from-2027/article-58275"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-schools-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा व्यवस्था में वर्ष 2027 से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र के कैलेंडर में परिवर्तन करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी और राज्य बोर्ड से जुड़े स्कूल 16 जून के बजाय हर साल 1 अप्रैल से खुलेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के लिए अधिक समय देना, समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। नई व्यवस्था के अनुसार 1 अप्रैल से स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया, किताबों, यूनिफॉर्म और साइकिल का वितरण किया जाएगा। इसके बाद 1 मई से 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां रहेंगी और अवकाश समाप्त होने के बाद नियमित रूप से शैक्षणिक गतिविधियां आगे बढ़ेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार प्रदेश में अब शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले वर्ष 31 मार्च तक चलेगा। यह व्यवस्था देश के प्रमुख शिक्षा बोर्डों, विशेष रूप से सीबीएसई के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप होगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे राज्य बोर्ड और राष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों के बीच लंबे समय से चला आ रहा शैक्षणिक अंतर काफी हद तक खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में स्कूल हर साल 16 जून से खुलते हैं। स्कूल खुलने के बाद शुरुआती कई सप्ताह तक नए विद्यार्थियों का प्रवेश, पाठ्यपुस्तकों का वितरण, यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना, साइकिल और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया चलती रहती है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ता है। कई स्कूलों में नियमित कक्षाएं जून के अंत या जुलाई से शुरू हो पाती हैं। ऐसे में पाठ्यक्रम पूरा करने में देरी होती है और शिक्षकों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन सभी प्रक्रियाओं को अप्रैल महीने में पूरा करने की योजना बनाई गई है, ताकि छुट्टियों के बाद पढ़ाई बिना किसी रुकावट के शुरू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें, स्कूल ड्रेस और अन्य आवश्यक सामग्री मिल जाएगी। इससे पढ़ाई की शुरुआत पहले दिन से ही प्रभावी ढंग से हो सकेगी। सरकार का मानना है कि समय पर संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और शैक्षणिक सत्र अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार अब तक सीबीएसई और छत्तीसगढ़ बोर्ड के शैक्षणिक कैलेंडर में लगभग ढाई महीने का अंतर रहता था। जहां सीबीएसई स्कूलों में अप्रैल से पढ़ाई शुरू हो जाती थी, वहीं राज्य बोर्ड के स्कूल जून के मध्य में खुलते थे। इस वजह से दोनों बोर्डों के छात्रों के बीच तैयारी का समय अलग-अलग होता था। विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा की तैयारी में इसका असर देखा जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह अंतर लगभग समाप्त हो जाएगा और छात्रों को समान शैक्षणिक अवसर मिल सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में पुस्तकों के वितरण का लक्ष्य जून तक रखा जाता है, लेकिन कई बार यह प्रक्रिया जुलाई तक भी पहुंच जाती है। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। नई व्यवस्था में कोशिश होगी कि 1 अप्रैल से ही सभी विद्यार्थियों को किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी जाए, ताकि शिक्षण कार्य समय पर शुरू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विशेषज्ञ भी इस बदलाव को सकारात्मक कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अप्रैल में शैक्षणिक सत्र शुरू होता है तो विद्यार्थियों को पूरे वर्ष पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे शिक्षकों को भी पाठ्यक्रम पूरा कराने में सुविधा होगी और परीक्षा से पहले दोहराव तथा अतिरिक्त अभ्यास के लिए समय मिल सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पढ़ाई शुरू होने से बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी सुधार देखने को मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कुछ अभिभावकों का मानना है कि नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए सरकार को सभी तैयारियां पहले से पूरी करनी होंगी। यदि अप्रैल में स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है तो किताबों की छपाई, यूनिफॉर्म की आपूर्ति और अन्य व्यवस्थाएं समय से पूरी करनी होंगी। साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और आधारभूत सुविधाओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। उनका कहना है कि केवल कैलेंडर बदलने से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को समयबद्ध बनाकर ही इस बदलाव का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। नई व्यवस्था में मई और जून के दौरान गर्मी की छुट्टियां पहले की तरह रहेंगी। 1 मई से 15 जून तक विद्यार्थियों को अवकाश मिलेगा। इस दौरान अप्रैल महीने में प्रवेश और शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत हो चुकी होगी। छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर सीधे नियमित पढ़ाई शुरू की जाएगी। इससे शिक्षण कार्य में अनावश्यक देरी नहीं होगी और पूरे शैक्षणिक सत्र का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह बदलाव केवल कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरे शिक्षा तंत्र में समयबद्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:15:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोचिंग संस्थानों को निगम का 48 घंटे का अल्टीमेटम, शपथ पत्र नहीं दिया तो 10 जुलाई से होगी सीलिंग</title>
                                    <description><![CDATA[फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर नगर निगम सख्त, 69 कोचिंग संस्थानों को 30 दिन में सभी सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश; लापरवाही पर कार्रवाई तय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a4dd98f78cd2/article-58148"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/coaching-institutes.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छात्रों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने शहर के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 70 से अधिक कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि तय समय सीमा के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया तो 10 जुलाई से संस्थानों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सीधे कार्रवाई होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने शहर के 69 कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अगले 48 घंटे के भीतर, यानी 9 जुलाई की शाम तक 200 रुपए के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करें। इस शपथ पत्र में यह लिखित आश्वासन देना होगा कि संबंधित संस्थान अगले 30 दिनों के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर देंगे। इसके साथ ही कोचिंग संचालकों को 15 दिन के भीतर यह भी बताना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक क्या-क्या काम किए गए हैं और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी पाई गई तो बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक के दौरान कई कोचिंग संचालकों ने यह तर्क दिया कि जिस भवन में वे संस्थान चला रहे हैं, वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है और भवन मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे फायर सेफ्टी के इंतजाम करें। इस पर नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भवन स्वामी पर नहीं छोड़ी जा सकती। निगम के अधिकारियों ने कहा कि चाहे भवन किराए का हो या स्वयं का, कोचिंग संस्थान संचालकों को ही फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने और उसका खर्च वहन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में कोचिंग संस्थानों के लिए लगभग 20 बिंदुओं वाली सुरक्षा गाइडलाइन का पालन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। इनमें सबसे प्रमुख निर्देश यह है कि किसी भी भवन में ऑटोमैटिक लॉक वाले दरवाजे नहीं लगाए जाएंगे। सभी भवनों में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होना अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्र और कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल सकें। इन निकास मार्गों के आसपास किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ, विद्युत उपकरण या अन्य अवरोधक सामग्री नहीं रखी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने बेसमेंट के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। गाइडलाइन के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा। यदि किसी भवन का बेसमेंट 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल का है तो वहां स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा भवनों में लगाए गए फायर पंपों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी वे जनरेटर की बायपास लाइन के माध्यम से लगातार काम करते रहें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जनरेटर को किसी भी स्थिति में निकास मार्ग या रिफ्यूज एरिया में नहीं रखा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने नियमित फायर ऑडिट और विद्युत ऑडिट को भी अनिवार्य किया है। प्रत्येक वर्ष भवन का फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट निगम को सौंपनी होगी। इसके साथ ही हर चार महीने में विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करना भी जरूरी होगा। संस्थान के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण देना होगा, जबकि सुरक्षा गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन की जानकारी होना आवश्यक होगा। निगम का मानना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही उपयोग भी सभी संबंधित लोगों को आना चाहिए।</p>
<p>नगर निगम का कहना है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में आग लगने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में समय रहते आवश्यक सुधार कराना जरूरी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी संस्था को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। आने वाले दिनों में निरीक्षण अभियान और तेज किया जाएगा तथा जिन संस्थानों में नियमों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:16:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में NSUI संगठनात्मक चुनाव का ऐलान, कैंपस से चुना जाएगा नया नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी और निजी कॉलेजों में पहले चरण में कैंपस अध्यक्ष का चुनाव होगा, इसके बाद जिला और प्रदेश स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधि नई संगठनात्मक टीम का चयन करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/nsui-organizational-elections-announced-in-chhattisgarh-new-leadership-will-be/article-58076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-nsui-election.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई (NSUI) ने लंबे समय बाद संगठनात्मक चुनाव कराने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस फैसले के साथ राज्यभर के सरकारी, निजी और अन्य मान्यता प्राप्त कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति एक बार फिर सक्रिय होती नजर आएगी। संगठन ने चुनाव प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा करने का फैसला लिया है। पहले चरण में सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में कैंपस अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में जिला और प्रदेश स्तर के संगठनात्मक चुनाव होंगे। एनएसयूआई का कहना है कि नई व्यवस्था के जरिए संगठन में नेतृत्व नीचे से ऊपर की ओर तैयार किया जाएगा, जिससे सक्रिय छात्र नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। चुनाव की घोषणा के बाद विभिन्न कॉलेजों में छात्र संगठनों के बीच हलचल तेज हो गई है और संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार पहले चरण में छात्र-छात्राएं केवल अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय के कैंपस अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। मतदान के आधार पर जिस उम्मीदवार को जीत मिलेगी, उसी के नेतृत्व में संबंधित संस्थान की 11 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। इस कार्यकारिणी में विभिन्न पदों पर नियुक्तियां संगठन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएंगी। एनएसयूआई का मानना है कि इससे कॉलेज स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियां मजबूत होंगी और छात्रों को सीधे नेतृत्व का अनुभव मिलेगा। कैंपस अध्यक्ष और उनकी टीम कॉलेज की समस्याओं को संगठन के सामने रखने के साथ-साथ छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे चरण की प्रक्रिया पहले चरण से पूरी तरह जुड़ी होगी। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव में वही उम्मीदवार हिस्सा ले सकेंगे जो अपने-अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय में कैंपस अध्यक्ष चुने जाएंगे। इतना ही नहीं, जिला और प्रदेश संगठन के चुनाव में मतदान का अधिकार भी केवल निर्वाचित कैंपस अध्यक्षों को ही मिलेगा। यानी संगठन की पूरी नेतृत्व प्रक्रिया कैंपस स्तर से शुरू होकर जिला और प्रदेश स्तर तक पहुंचेगी। एनएसयूआई का कहना है कि इससे संगठन में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी और नेतृत्व का चयन सीधे जमीनी स्तर से होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चुनाव लड़ने के लिए संगठन ने कुछ स्पष्ट नियम भी तय किए हैं। उम्मीदवार की आयु 16 वर्ष से कम और 27 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान का छात्र होना अनिवार्य होगा। संगठन ने यह भी साफ किया है कि यूथ कांग्रेस की तरह कैंपस के बाहर सदस्यता अभियान नहीं चलाया जाएगा। केवल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के माध्यम से ही सदस्यता दी जाएगी। सदस्यता शुल्क तीन वर्षों के लिए 45 रुपये निर्धारित किया गया है। संगठन का मानना है कि इस व्यवस्था से केवल वास्तविक छात्र ही चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे और छात्र राजनीति को शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित रखा जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनएसयूआई ने यह भी बताया है कि चुनाव परिणाम आने के बाद प्रक्रिया वहीं समाप्त नहीं होगी। निर्वाचित प्रतिनिधियों की पहले स्क्रूटनी की जाएगी, जिसमें उनके दस्तावेज, सदस्यता और पात्रता की जांच होगी। इसके बाद उम्मीदवारों का इंटरव्यू भी लिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य संगठन में सक्रिय, योग्य और जिम्मेदार कार्यकर्ताओं को आगे लाना है। स्क्रूटनी और इंटरव्यू के आधार पर ही जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों का अंतिम चयन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि इससे नेतृत्व चयन में पारदर्शिता बनी रहेगी और संगठनात्मक गुणवत्ता भी मजबूत होगी।एनएसयूआई का कहना है कि नई चुनाव प्रणाली का उद्देश्य केवल पदाधिकारियों का चयन करना नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व को तैयार करना भी है। कैंपस स्तर पर चुने गए प्रतिनिधियों को संगठनात्मक प्रशिक्षण, वैचारिक मार्गदर्शन और नेतृत्व विकास के अवसर दिए जाएंगे। इससे वे आगे चलकर जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार हो सकेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में स्कूलों की एक समान टाइमिंग की मांग, शिक्षा सचिव को भेजा गया पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी मॉर्निंग शिफ्ट लागू करने की मांग उठाई, कहा- अलग-अलग समय से पढ़ाई और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/letter-sent-to-education-secretary-demanding-uniform-timing-of-schools/article-58069"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-schools.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के संचालन समय को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी करने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्कूल अलग-अलग समय पर संचालित हो रहे हैं, जिससे न केवल शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी लगातार दिक्कतें सामने आ रही हैं। संगठन ने विशेष रूप से शनिवार के दिन हायर सेकेंडरी स्कूलों को भी मॉर्निंग शिफ्ट में संचालित करने का सुझाव दिया है ताकि पूरे शिक्षा तंत्र में समान व्यवस्था लागू हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन के अनुसार राज्य में युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) और संकुल व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकांश प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को हायर सेकेंडरी स्कूलों से जोड़ा गया है। इसके कारण एक ही परिसर या संकुल के अंतर्गत कई स्तर के विद्यालय संचालित हो रहे हैं। लेकिन अलग-अलग समय पर स्कूल खुलने और बंद होने से समन्वय में परेशानी आ रही है। शिक्षकों, प्राचार्यों और कर्मचारियों को एक साथ बैठकर योजनाएं बनाने, समीक्षा बैठकें करने और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल कक्षाओं में पढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी दर्ज करना, परीक्षा संबंधी कार्य, छात्रवृत्ति प्रक्रिया, वित्तीय दस्तावेज तैयार करना, कार्यालयीन रिकॉर्ड का संधारण और अन्य प्रशासनिक कार्य भी करने पड़ते हैं। इसके अलावा समय-समय पर संकुल स्तर और विभागीय बैठकों में भी शामिल होना आवश्यक होता है। अलग-अलग स्कूलों की अलग-अलग टाइमिंग होने के कारण इन सभी कार्यों को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन का मानना है कि यदि शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूलों को भी सुबह की पाली में संचालित किया जाए और सभी सरकारी स्कूलों का समय समान कर दिया जाए तो शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। इससे बैठकें आयोजित करना, लंबित रिपोर्ट तैयार करना, अगले सप्ताह की शैक्षणिक योजना बनाना और विभागीय निर्देशों का पालन करना अधिक व्यवस्थित तरीके से संभव होगा। संगठन का कहना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का भी मानना है कि एक समान समय व्यवस्था से विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। संकुल व्यवस्था के तहत कई कार्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित किए जाते हैं, जिनमें अलग-अलग विद्यालयों के शिक्षक और विद्यार्थी शामिल होते हैं। यदि सभी स्कूलों की टाइमिंग एक जैसी होगी तो ऐसे कार्यक्रमों का संचालन आसान होगा और अनावश्यक समय की बर्बादी भी नहीं होगी। साथ ही विभागीय निरीक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रम और समीक्षा बैठकें भी अधिक प्रभावी ढंग से आयोजित की जा सकेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फेडरेशन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि कई बार अलग-अलग समय के कारण प्राचार्यों और शिक्षकों को अतिरिक्त समय तक स्कूल में रुकना पड़ता है। इससे कार्य का दबाव बढ़ता है और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। संगठन का कहना है कि यदि पूरे राज्य में एक समान समय व्यवस्था लागू की जाती है तो कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और विद्यालय प्रबंधन को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटा के नियम सख्त, सुप्रीम कोर्ट की शर्तें होंगी अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी और पीजी काउंसलिंग 2026-27 में वैधानिक अभिभावक का प्रमाण जरूरी, फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strict-rules-of-nri-quota-in-medical-colleges-supreme-courts/article-58055"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/nri-quota.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई (नॉन-रेजिडेंट इंडियन) कोटा के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए इस वर्ष नियम पहले की तुलना में काफी सख्त कर दिए गए हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने सभी राज्यों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 की नीट-यूजी और नीट-पीजी काउंसलिंग में केवल वही अभ्यर्थी एनआरआई कोटे का लाभ ले सकेंगे, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरी तरह पूरा करेंगे। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य एनआरआई कोटे के दुरुपयोग पर रोक लगाना और केवल वास्तविक पात्र उम्मीदवारों को ही इसका लाभ सुनिश्चित करना है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों से फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों के जरिए मेडिकल सीट हासिल करने की शिकायतें सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए दिशा-निर्देशों के तहत अब केवल किसी एनआरआई रिश्तेदार का नाम बताकर प्रवेश लेना संभव नहीं होगा। अभ्यर्थी को यह भी साबित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति उसका वैधानिक अभिभावक है। इसके लिए गार्जियन एंड वाड्र्स एक्ट, 1890 के तहत जारी अभिभावक होने का वैध प्रमाण और शपथ-पत्र जमा करना अनिवार्य रहेगा। यह नियम केवल एनआरआई श्रेणी के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) और वे अभ्यर्थी भी इसके दायरे में आएंगे जिन्होंने भारतीय नागरिकता से एनआरआई श्रेणी में बदलाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच पहले की तुलना में अधिक सख्ती से की जाएगी और किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर एनआरआई कोटे का लाभ नहीं दिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने राज्यों से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए और केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को पात्र माना जाए जिनके माता-पिता वास्तव में एनआरआई हों, विदेश में निवास करते हों या फिर कोई निकट संबंधी कानूनी रूप से वैधानिक अभिभावक घोषित किया गया हो। अदालत ने पहले भी अपने फैसलों में स्पष्ट किया था कि एनआरआई कोटे का उद्देश्य विदेश में रहने वाले भारतीय परिवारों के बच्चों को अवसर देना है, न कि इसे सामान्य प्रवेश प्रक्रिया से बचने के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाए। इसी आधार पर अब दस्तावेजों की जांच और पात्रता का सत्यापन अधिक विस्तृत तरीके से किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में इन नए नियमों को लागू करने को लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्य में अभी भी वर्ष 2018 के नियमों के आधार पर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाती है। ऐसे में यदि केंद्र के नए दिशा-निर्देशों को लागू करना है तो पहले राज्य सरकार को संबंधित नियमों में संशोधन कर राजपत्र (गजट) में अधिसूचना जारी करनी होगी। उसके बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी हो सकेगी। जब तक राज्य सरकार औपचारिक संशोधन नहीं करती, तब तक पुराने नियमों के आधार पर प्रक्रिया चलने की संभावना बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अधिकांश राज्यों को अपने नियमों में बदलाव करना ही पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्रों और गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान कई प्रवेश रद्द भी किए गए थे। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने इस बार दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने के बाद केवल वास्तविक पात्र उम्मीदवार ही एनआरआई कोटे का लाभ उठा सकेंगे और फर्जीवाड़े की संभावनाएं काफी हद तक कम होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे के तहत लगभग 15 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। राज्य के छह निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल मिलाकर करीब 100 से 110 सीटें इस श्रेणी के लिए निर्धारित हैं। इन सीटों की वार्षिक फीस लगभग 30 लाख रुपये तक पहुंचती है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस कोटे के माध्यम से प्रवेश लेने का प्रयास करते हैं। अब नए नियम लागू होने पर उन छात्रों और अभिभावकों पर सीधा असर पड़ेगा जो एनआरआई कोटे के तहत आवेदन करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strict-rules-of-nri-quota-in-medical-colleges-supreme-courts/article-58055</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, नई याचिका की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट दिलाने की कवायद तेज, स्कूल शिक्षा विभाग ने कानूनी राय लेने के बाद नई याचिका दायर करने की तैयारी शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-will-go-to-supreme-court-to-get-relief-from/article-57917"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-tet,.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teacher Eligibility Test-TET) की अनिवार्यता से राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में नई कानूनी रणनीति तैयार कर ली है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत में नई याचिका दायर की जा सकती है। यह मामला वर्ष 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों से जुड़ा है। सरकार का कहना है कि इन शिक्षकों का चयन तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से हुआ था। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों को दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>विधि विभाग से ली गई कानूनी सलाह</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग ने इस मामले में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी विस्तृत कानूनी राय ली है। कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि नए तथ्यों और तर्कों के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में राहत की मांग की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि विभाग नई याचिका में उन सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को शामिल करेगा, जिनके आधार पर इन शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट मिल सके। सरकार की प्रस्तावित याचिका का सबसे महत्वपूर्ण आधार यह होगा कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों ने पहले ही एक कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन शिक्षकों की नियुक्ति व्यापमं द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर हुई थी। सरकार का कहना है कि जब उम्मीदवार पहले ही योग्यता सिद्ध कर चुके हैं और वर्षों से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तब उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए कहना व्यावहारिक नहीं है। विभाग का मानना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और कार्यक्षमता को भी कानूनी प्रक्रिया में महत्व मिलना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><span><strong>70 हजार शिक्षकों पर टिकी हैं उम्मीदें</strong></span></h2>
<p style="text-align:justify;">इस मामले का असर प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों पर पड़ने वाला है। यदि सुप्रीम कोर्ट सरकार की दलीलों को स्वीकार कर लेता है तो इन शिक्षकों को TET परीक्षा से स्थायी राहत मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं यदि राहत नहीं मिलती है तो संबंधित शिक्षकों को भविष्य में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रदेशभर के शिक्षक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>कई वर्षों से चल रहा है विवाद</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर विवाद नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से TET को अनिवार्य बनाया गया था। हालांकि, इससे पहले भर्ती हो चुके हजारों शिक्षकों के मामले में लगातार यह सवाल उठता रहा कि क्या पहले से चयनित और लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर भी यह नियम समान रूप से लागू होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर पहले भी न्यायालयों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी और अब राज्य सरकार फिर से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने की तैयारी कर रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षकों का पक्ष भी मजबूत माना जा रहा</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">शिक्षक संगठनों का कहना है कि संबंधित शिक्षकों ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति प्राप्त की थी। इसके बाद वर्षों तक उन्होंने सरकारी स्कूलों में सेवाएं दी हैं और लाखों विद्यार्थियों को शिक्षित किया है। शिक्षकों का तर्क है कि सेवा के इतने लंबे अनुभव के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता उनके साथ अन्याय होगा। उनका यह भी कहना है कि भर्ती के समय लागू नियमों के आधार पर ही उनकी नियुक्ति हुई थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों को TET से जुड़ा विवाद झेलना पड़ता है तो इसका असर स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में पहले से ही कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा पर कानूनी अनिश्चितता बनी रहती है तो शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसी कारण सरकार भी इस विवाद का स्थायी समाधान चाहती है ताकि शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों में स्थिरता बनी रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>एक सप्ताह में दायर हो सकती है नई याचिका</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई याचिका लगभग तैयार है। कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में इसे दायर कर दिया जाएगा। याचिका में व्यापमं की चयन प्रक्रिया, शिक्षकों की सेवा अवधि, अनुभव, भर्ती नियमों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:41:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत, सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता का नवीनीकरण किया, अब 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता साफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-to-medical-students-of-chhattisgarh-150-mbbs-seats/article-57526"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकरण कर दिया है। इस फैसले के साथ ही आगामी सत्र में 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह निर्णय प्रदेश के उन हजारों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो हर वर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए बेहतर संस्थानों में प्रवेश का सपना देखते हैं। एनएमसी के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी आदेश के बाद सिम्स प्रशासन ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया है। मान्यता के नवीनीकरण का अर्थ है कि संस्थान ने मेडिकल शिक्षा, शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पताल की सुविधाओं, क्लिनिकल प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं और अन्य आवश्यक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नियमित रूप से 150 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक मंजूरी नहीं बल्कि संस्थान की गुणवत्ता, मेहनत और निरंतर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि है। उन्होंने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और अस्पताल में व्यापक क्लिनिकल प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। मेडिकल सीटों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के विद्यार्थियों को बाहर के राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश का प्रयास करते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण कई योग्य छात्रों को अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में सिम्स की 150 सीटों का नवीनीकरण मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर स्थित सिम्स लंबे समय से छत्तीसगढ़ के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल है। यहां न केवल एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जाती है, बल्कि बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार भी होता है। मेडिकल छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अस्पताल में मरीजों के उपचार की वास्तविक प्रक्रिया को भी करीब से सीखते हैं। यही व्यावहारिक प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें बेहतर चिकित्सक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग समय-समय पर सभी मेडिकल कॉलेजों का मूल्यांकन करता है। इस दौरान फैकल्टी की संख्या, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, उपकरण, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, हॉस्टल, अनुसंधान सुविधाएं और शैक्षणिक व्यवस्था सहित कई बिंदुओं की समीक्षा की जाती है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों की मान्यता का नवीनीकरण किया जाता है। सिम्स का इस प्रक्रिया में सफल होना संस्थान की निरंतर प्रगति का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में डॉक्टरों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए मेडिकल शिक्षा का विस्तार बेहद जरूरी है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें बढ़ना या उनकी मान्यता का नवीनीकरण होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी सकारात्मक माना जाता है। प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च निजी संस्थानों की तुलना में काफी कम होता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों को भी डॉक्टर बनने का अवसर मिलता है। सीटों की निरंतर उपलब्धता से प्रतिस्पर्धा के बीच योग्य छात्रों के लिए बेहतर संभावनाएं तैयार होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स प्रशासन के अनुसार आने वाले समय में संस्थान में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा। नई तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने, अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ऐसे निर्णय प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूत बनाते हैं। अधिक संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर तैयार होने से भविष्य में सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की संभावना भी मजबूत होगी। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल नए विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक में बिहार कनेक्शन, तीन आरोपी गिरफ्तार, डेढ़ करोड़ में था सौदे का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका पर टीईटी-2026 स्थगित, बिहार और हरियाणा के आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी जांच शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bihar-connection-three-accused-arrested-in-maharashtra-tet-paper-leak/article-57212"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/maharashtra-tet-paper-leak.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में रविवार को आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2026 परीक्षा शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई। प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका सामने आने के बाद राज्य परीक्षा परिषद ने परीक्षा को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बिहार के दो और हरियाणा के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों आरोपी कथित तौर पर दिल्ली से प्रश्नपत्र का सेट लेकर ठाणे पहुंचे थे और इसे करीब डेढ़ करोड़ रुपये में बेचने की तैयारी थी। पुलिस का दावा है कि यह एक अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का मामला है, जिसकी जांच अब विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं की घटनाएं सामने आने के बाद प्रशासन पहले से सतर्क था। इसके बावजूद टीईटी परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना ने पूरे शिक्षा तंत्र को हिला दिया। पुलिस और परीक्षा परिषद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के आकाश कुमार और राजीव साह तथा हरियाणा के धीरज कुमार के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। पुलिस को शक है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन एक बड़े गिरोह के जरिए किया जा रहा था, जिसका कथित सरगना भी बिहार का रहने वाला बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में आधिकारिक रूप से किसी अन्य आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। 27 जून की सुबह भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोगों के पास शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रश्नपत्र मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने तत्काल छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कुछ संदिग्ध लोगों के पास से चार प्रश्नपत्र, मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नकदी बरामद की गई। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। अधिकारियों ने बरामद प्रश्नपत्रों का मिलान किया तो शुरुआती जांच में वे असली पाए गए। इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रश्नपत्र की पुष्टि होते ही महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने 28 जून को होने वाली टीईटी परीक्षा को स्थगित करने का फैसला लिया। परिषद के अनुसार यह परीक्षा राज्यभर के 1,028 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जानी थी। हजारों अभ्यर्थी परीक्षा की तैयारी कर चुके थे और कई उम्मीदवार परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की योजना बना चुके थे। परीक्षा स्थगित होने से अभ्यर्थियों को निराशा का सामना करना पड़ा, हालांकि परिषद का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन के निर्देश दिए। एसआईटी का नेतृत्व ठाणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त पंजाबराव उगले करेंगे। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भूसे और पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते से भी चर्चा कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक करने वाले पूरे नेटवर्क का पता लगाया जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र परीक्षा परिषद से बाहर कैसे पहुंचा। इसके लिए प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग, पैकेजिंग, परिवहन और वितरण से जुड़े सभी चरणों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे और प्रश्नपत्र किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। बरामद मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच शुरुआती चरण में है और कई राज्यों में टीमों को भेजा गया है। विभिन्न डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और कॉल डिटेल की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यदि जांच में अन्य राज्यों या व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। मामले में वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है क्योंकि शुरुआती जानकारी के अनुसार प्रश्नपत्र का कथित सौदा करीब डेढ़ करोड़ रुपये में होना था। टीईटी परीक्षा स्थगित होने के बाद अब राज्य परीक्षा परिषद नई परीक्षा तिथि घोषित करेगी। परिषद ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारी से बचें। शिक्षा विभाग का कहना है कि नई तिथि तय होने के बाद सभी अभ्यर्थियों को समय रहते जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा होने तक कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस सभी साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>30 जून से शुरू होगी बीटेक काउंसिलिंग, 34 इंजीनियरिंग कॉलेजों की 11,514 सीटों पर मिलेगा प्रवेश</title>
                                    <description><![CDATA[डीटीई ने जारी किया विस्तृत शेड्यूल, प्रवेश तीन चरणों में होंगे; इस बार अधिकतम आयु सीमा हटाई गई, मूल निवासी प्रमाण पत्र रहेगा अनिवार्य]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/btech-counseling-will-start-from-june-30-admission-will-be/article-57208"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-btech-counselling.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने का सपना देख रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग प्रक्रिया 30 जून से शुरू होने जा रही है। तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) ने इसके लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस वर्ष राज्य के 34 इंजीनियरिंग कॉलेजों की कुल 11,514 सीटों पर प्रवेश तीन चरणों में किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को प्रत्येक चरण में अलग-अलग ऑनलाइन पंजीयन करना होगा। इस बार प्रवेश प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव अधिकतम आयु सीमा को समाप्त करना है, जिससे पहले की तुलना में अधिक अभ्यर्थियों को आवेदन करने का अवसर मिलेगा। डीटीई के अनुसार पहले चरण की ऑनलाइन काउंसिलिंग के लिए पंजीयन 30 जून से शुरू होकर 6 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। पहले चरण की मेरिट सूची 7 जुलाई को जारी की जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी को मेरिट सूची में कोई त्रुटि दिखाई देती है तो वह 8 जुलाई तक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेगा। सभी आपत्तियों का निराकरण करने के बाद 10 जुलाई को सीट आवंटन और परिणाम घोषित किए जाएंगे। जिन विद्यार्थियों को सीट आवंटित होगी, उन्हें 11 जुलाई से 15 जुलाई के बीच संबंधित कॉलेज में जाकर प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। जो विद्यार्थी पहले चरण में सीट प्राप्त नहीं कर पाएंगे या बेहतर विकल्प की तलाश में होंगे, उन्हें दूसरे चरण में भाग लेने का अवसर मिलेगा। दूसरे चरण के लिए ऑनलाइन पंजीयन 17 जुलाई से 21 जुलाई तक होंगे। इसके बाद 22 जुलाई को मेरिट सूची जारी की जाएगी और 23 जुलाई तक दावा-आपत्ति दर्ज करने का समय मिलेगा। संशोधित सूची के आधार पर 25 जुलाई को सीट आवंटन और परिणाम जारी होंगे। चयनित अभ्यर्थियों को 26 जुलाई से 30 जुलाई के बीच संबंधित कॉलेज में प्रवेश लेना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यदि दो चरणों की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद भी सीटें रिक्त रहती हैं तो संस्था स्तर की काउंसिलिंग आयोजित की जाएगी। इसके लिए 1 अगस्त से 6 अगस्त तक पंजीयन किए जाएंगे। संस्था स्तर की मेरिट सूची 9 अगस्त को प्रकाशित होगी। इसके बाद अभ्यर्थियों को 10 अगस्त को सुबह 10 बजे संबंधित संस्था में उपस्थित होकर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होना होगा। प्रवेश की यह प्रक्रिया 13 अगस्त को दोपहर 1 बजे तक चलेगी। यदि इसके बाद भी कुछ सीटें खाली रहती हैं तो 13 अगस्त दोपहर 1:30 बजे से 14 अगस्त शाम 5:30 बजे तक मेरिट के आधार पर अंतिम प्रवेश का अवसर दिया जाएगा। तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक चरण में किसी भी पाठ्यक्रम के लिए केवल एक ऑनलाइन आवेदन ही मान्य होगा। यदि कोई अभ्यर्थी पहले चरण में प्रवेश ले चुका है और बाद में दूसरे चरण की काउंसिलिंग में भाग लेकर नई सीट प्राप्त करता है, तो पहले चरण में लिया गया प्रवेश स्वतः निरस्त माना जाएगा। इससे विद्यार्थियों को बेहतर कॉलेज या शाखा चुनने का अवसर मिलेगा, लेकिन उन्हें आवेदन प्रक्रिया और सीट चयन के दौरान पूरी सावधानी बरतनी होगी। संस्था स्तर की काउंसिलिंग में भी कुछ विशेष नियम लागू किए गए हैं। अभ्यर्थी केवल एक संस्था का चयन कर सकेंगे, हालांकि उसी संस्था में उपलब्ध सभी ब्रांचों का विकल्प भरने की सुविधा मिलेगी। केवल संस्था स्तर की काउंसिलिंग के लिए आवेदन करने से पहले लिया गया प्रवेश स्वतः समाप्त नहीं होगा। पुराना प्रवेश तभी निरस्त माना जाएगा जब अभ्यर्थी नई संस्था में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर लेगा। इससे विद्यार्थियों को अंतिम चरण तक बेहतर विकल्प तलाशने की सुविधा मिलेगी। इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव अधिकतम आयु सीमा को हटाना है। पहले बीटेक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित थी, लेकिन अब यह शर्त समाप्त कर दी गई है। इससे वे अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकेंगे जो किसी कारणवश पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए थे। आयु सीमा हटाने से उच्च शिक्षा के अवसर अधिक लोगों तक पहुंचेंगे और इच्छुक अभ्यर्थियों को नया मौका मिलेगा। हालांकि राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए मूल निवासी प्रमाण पत्र अनिवार्य रहेगा। डीटीई ने स्पष्ट किया है कि बिना मूल निवासी प्रमाण पत्र के किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसलिए आवेदन करने वाले सभी विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें ताकि काउंसिलिंग के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:18 +0530</pubDate>
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                <title>महाराष्ट्र TET परीक्षा पेपर लीक, एग्जाम से 24 घंटे पहले परीक्षा रद्द; कई लोग हिरासत में</title>
                                    <description><![CDATA[ठाणे के भिवंडी से प्रश्नपत्र बरामद होने के बाद सरकार ने तत्काल परीक्षा स्थगित की, 4.28 लाख अभ्यर्थियों पर असर; नई तारीख का ऐलान बाद में होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/maharashtra-tet-exam-paper-leaked-exam-canceled-24-hours-before/article-57141"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/maharashtra-tet.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) शुरू होने से महज 24 घंटे पहले प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने परीक्षा स्थगित कर दी है। यह परीक्षा रविवार को आयोजित होनी थी, लेकिन पेपर लीक की सूचना मिलते ही महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (एमएसईसी) ने तत्काल परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। नई परीक्षा तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी। इस फैसले से राज्यभर के करीब 4.28 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जो लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिलने पर ठाणे जिले के भिवंडी क्षेत्र में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान संदिग्ध प्रश्नपत्र बरामद किए गए। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने जब्त किए गए दस्तावेजों का सत्यापन किया। प्रारंभिक जांच में प्रश्नपत्र असली पाए जाने के बाद प्रशासन ने परीक्षा स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्यभर में इस परीक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में कुल 1,729 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगभग 18,000 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। प्रत्येक परीक्षा केंद्र की निगरानी राज्य और जिला स्तर के कंट्रोल रूम से की जानी थी। अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और फेस रिकग्निशन सिस्टम की व्यवस्था भी की गई थी। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे और मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे वैध पहचान पत्र अनिवार्य किए गए थे। इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले किस स्तर पर लीक हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में सरकारी शिक्षक बनने के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य मानी जाती है। इसके अलावा जो शिक्षक पहले से सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं, उनके लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों और शिक्षकों की योजनाओं पर असर पड़ा है। कई उम्मीदवार परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की तैयारी पूरी कर चुके थे, जबकि कुछ दूर-दराज के जिलों से यात्रा की व्यवस्था भी कर चुके थे। इस घटना ने एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आए हैं। राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET), उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा और हाल ही में आयोजित नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा से जुड़े विवादों ने पहले ही परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। अब महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक का मामला भी इसी सूची में जुड़ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश भी इस परीक्षा को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई को अपने एक फैसले में स्पष्ट किया था कि स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। कोर्ट ने टीईटी पास करने की अंतिम समय सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी थी। हालांकि अदालत ने यह भी साफ कर दिया था कि इसके बाद किसी प्रकार का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। न्यायालय ने कहा था कि बिना आवश्यक योग्यता वाले शिक्षकों का सेवा में बने रहना आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाएं न केवल लाखों अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ती हैं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं। उनका कहना है कि केवल तकनीकी सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर वितरण तक हर स्तर पर जवाबदेही तय करना भी आवश्यक है। दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई से ही भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 16:08:19 +0530</pubDate>
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