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                <title>Raipur - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Raipur RSS Feed</description>
                
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                <title>भिलाई में नर्सिंग छात्रा की निर्मम हत्या, एकतरफा प्यार में युवक ने PG में घुसकर उतारा मौत के घाट</title>
                                    <description><![CDATA[नंबर ब्लॉक करने से नाराज आरोपी ने ऑनलाइन चाकू मंगवाया, पहले गला दबाया फिर किए कई वार; रायपुर से गिरफ्तार, पुलिस कर रही जांच।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/brutal-murder-of-a-nursing-student-in-bhilai-a-young/article-58489"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhilai-new.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भिलाई में एकतरफा प्यार की सनक ने एक 19 वर्षीय नर्सिंग छात्रा की जान ले ली। दुर्ग जिले के वैशाली नगर थाना क्षेत्र के रामनगर स्थित एक पीजी में रहने वाली खुशी साहू की शुक्रवार को बेरहमी से हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पिंटू साहू लंबे समय से छात्रा को परेशान कर रहा था। युवती द्वारा उसका नंबर ब्लॉक किए जाने के बाद उसने हत्या की साजिश रची और रायपुर से भिलाई पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले छात्रा का गला दबाया और जब वह बेहोश हो गई तो चाकू से उस पर कई वार किए। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने आरोपी को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है और घटनास्थल पर ले जाकर सीन रिक्रिएट भी कराया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और हत्या की पूरी साजिश का खुलासा पूछताछ के बाद किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू पहले से ऑनलाइन मंगवाया था, जिससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार बेमेतरा निवासी खुशी साहू भिलाई में किराये के पीजी में रहकर निजी कॉलेज से फार्मेसी की पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के साथ वह एक कैफे में पार्ट टाइम काम भी करती थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि बलौदाबाजार निवासी 24 वर्षीय पिंटू साहू काफी समय से खुशी के संपर्क में आने की कोशिश कर रहा था और उससे शादी करना चाहता था। युवती ने उसकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया और परेशान किए जाने से तंग आकर उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार कॉल करता रहा। घटना वाले दिन भी उसने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने खुशी की सहेली को फोन किया और उसके बारे में जानकारी ली। सहेली ने बताया कि खुशी कमरे में है और उसके पास मोबाइल नहीं है। इसी जानकारी के बाद आरोपी सीधे पीजी पहुंच गया। उस समय खुशी की रूममेट बाथरूम में थी और खुशी कमरे में अकेली मौजूद थी। पुलिस के अनुसार कमरे में दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान आरोपी ने पहले खुशी का गला दबा दिया। जब वह विरोध नहीं कर सकी तो उसने अपने साथ लाए चाकू से पीठ, पेट और हाथ सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों पर करीब दस बार वार किए। हमले के दौरान आरोपी के हाथ में भी चोट आई। वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार हो गया और रायपुर की ओर निकल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर बाद जब खुशी की सहेली बाथरूम से बाहर आई तो उसने कमरे का भयावह दृश्य देखा। खुशी खून से लथपथ फर्श पर पड़ी थी। उसने तुरंत मकान मालिक और आसपास मौजूद लोगों को सूचना दी। इसके बाद डायल-112 और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। छात्रा को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खुशी ने कुछ दिन पहले अपने भाई को बताया था कि एक युवक लगातार अलग-अलग नंबरों से फोन कर परेशान कर रहा है। परिवार के अनुसार आरोपी ने छात्रा के भाई को भी धमकी दी थी। इतना ही नहीं, जिस कैफे में खुशी काम करती थी वहां के संचालक को भी उसने धमकाया था और खुशी को नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बना रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी का व्यवहार लगातार आक्रामक होता जा रहा था और वह युवती पर शादी के लिए दबाव बना रहा था। जांच में यह भी पता चला कि वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू आरोपी ने ऑनलाइन खरीदा था। इससे पुलिस हत्या की पूर्व नियोजित साजिश के पहलू की भी जांच कर रही है। आरोपी को रायपुर से गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे घटनास्थल पर ले जाकर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और जल्द ही पूरे मामले का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ हत्या सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और उसे न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर एकतरफा प्रेम, पीछा करने और महिलाओं को लगातार परेशान किए जाने जैसे मामलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर, 3 एकड़ की अवैध प्लाटिंग भी ध्वस्त</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ने जलभराव रोकने और अवैध निर्माण पर सख्ती दिखाते हुए पंडरी, सुखराम नगर और ब्रम्हदेईपारा में अतिक्रमण हटाया, अवैध प्लाटिंग पर भी बड़ी कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/bulldozer-runs-on-illegal-encroachments-in-raipur-illegal-plotting-of/article-58486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">रायपुर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या और लगातार बढ़ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ नगर निगम ने बड़ा अभियान चलाया। निगम की टीम ने शुक्रवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए नालों पर किए गए अतिक्रमण हटाए, अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया और बिना अनुमति किए गए निर्माणों पर बुलडोजर चलाया। इस अभियान के तहत पंडरी कपड़ा बाजार के दुर्गा नगर क्षेत्र में नाले पर बने अवैध पाटे को तोड़ा गया, जबकि सुखराम नगर में करीब तीन एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को भी ध्वस्त कर दिया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि बारिश के मौसम में नालों पर कब्जों के कारण जल निकासी बाधित होती है, जिससे आसपास की बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनती है। इसी को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में बिना अनुमति किए गए कब्जों, अवैध प्लाटिंग और जल निकासी में बाधा बनने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर विभिन्न जोनों की टीमों ने जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन का कहना है कि शहर को जलभराव मुक्त बनाने और नियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।</p>
<p>कार्रवाई की शुरुआत पंडरी स्थित प्रकाश होलसेल मार्केट के सामने से की गई, जहां नाले पर करीब 100 वर्गफीट का अवैध पाटा बनाकर कब्जा किया गया था। नगर निगम के अनुसार संबंधित दुकान संचालक ने नाले के ऊपर निर्माण कर लिया था, जिससे नाले की नियमित सफाई प्रभावित हो रही थी। बारिश के दौरान यही अतिक्रमण दुर्गा नगर और आसपास की बस्तियों में जलभराव की बड़ी वजह बन रहा था। शिकायतों और निरीक्षण के बाद निगम की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की सहायता से अवैध निर्माण को हटा दिया। अधिकारियों ने बताया कि मानसून में नालों की सफाई और पानी की निर्बाध निकासी प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी कारण ऐसे सभी निर्माणों को हटाया जा रहा है, जो जल निकासी में बाधा बन रहे हैं। इसके साथ ही नगर निगम की जोन-1 नगर निवेश विभाग की टीम ने संत कबीर दास वार्ड क्रमांक-3 के सुखराम नगर में दो अलग-अलग स्थानों पर लगभग तीन एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग के खिलाफ भी कार्रवाई की। मौके पर पहुंची टीम ने प्लाटिंग के लिए बनाई गई मुरम सड़क को काट दिया, प्रवेश मार्ग बंद कर दिया और तैयार की गई नींव को भी ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध कॉलोनियों के विकास को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है, ताकि भविष्य में लोगों को किसी प्रकार की कानूनी या मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े। नगर निगम ने संबंधित भूमि के वास्तविक स्वामित्व की जानकारी प्राप्त करने के लिए रायपुर तहसीलदार को पत्र भी भेजा है। भूमि मालिक की जानकारी मिलने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>इसी अभियान के दौरान वीर शिवाजी वार्ड क्रमांक-16 के ब्रम्हदेईपारा क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। यहां नाले के किनारे बनाई गई एक अवैध झोपड़ी को हटाया गया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हो रही थी। निगम अधिकारियों के अनुसार मानसून में शहर के संवेदनशील इलाकों में जलभराव रोकने के लिए ऐसे सभी अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है। नगर निगम का कहना है कि बिना अनुमति किए गए निर्माण न केवल शहर की व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि बारिश के दौरान नागरिकों के लिए गंभीर समस्याएं भी पैदा करते हैं। इसलिए भविष्य में भी अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और जल निकासी में बाधा बनने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण या प्लाटिंग न करें और नगर नियोजन से जुड़े नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा कि शहर के सुनियोजित विकास, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षित आवासीय वातावरण के लिए अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। नगर निगम लगातार ऐसे क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है, जहां अवैध प्लाटिंग या नालों पर कब्जे की शिकायतें मिल रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:49:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा फेरबदल, डीएसपी समेत 15 अधिकारियों की नई तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[गृह विभाग ने जारी किए तबादला और पदस्थापना आदेश, पदोन्नति के बाद अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-reshuffle-in-chhattisgarh-police-new-posting-of-15-officers/article-58408"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-police.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य पुलिस प्रशासन में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दो उप पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) और 13 सहायक सेनानियों (असिस्टेंट कमांडेंट) की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभागीय पदोन्नति एवं छानबीन समिति की अनुशंसा के आधार पर अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और सभी पदस्थापनाएं अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, संतुलित तथा सुचारू बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। समय-समय पर पुलिस विभाग में अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना की प्रक्रिया प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार की जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ विभिन्न इकाइयों में अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में राज्य पुलिस सेवा के पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें विशेष शाखा से जुड़े अधिकारियों के साथ सहायक सेनानी पद पर पदोन्नत अधिकारियों की पदस्थापना भी शामिल है। सरकार का मानना है कि नई नियुक्तियों से विभिन्न इकाइयों में कार्यों के बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश के अनुसार उप पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा) सविता सिंह परिहार को पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर से स्थानांतरित कर विशेष शाखा भिलाई में पदस्थ किया गया है। वहीं अर्नोल्ड संतरी बड़ा, जो वर्तमान में जशपुर से संबद्ध रहते हुए पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में कार्यरत थे, उन्हें विशेष शाखा बिलासपुर में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा विभाग ने 13 सहायक सेनानियों की भी नई पदस्थापना की है। इन अधिकारियों को राज्य के विभिन्न जिलों और बटालियनों में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किया गया है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को अपने नए पदस्थापन स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आती है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष शाखा पुलिस विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जो सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के संकलन, विश्लेषण और संवेदनशील मामलों की निगरानी का कार्य करती है। ऐसे में इस शाखा में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई पदस्थापनाओं से विशेष शाखा की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस विभाग में समय-समय पर किए जाने वाले स्थानांतरण और पदस्थापन न केवल प्रशासनिक संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि अधिकारियों को नई परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इससे विभाग में जवाबदेही बढ़ती है और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य संस्कृति विकसित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत पुलिस बल के प्रशिक्षण, संसाधनों के आधुनिकीकरण, तकनीकी सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की नई पदस्थापना को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारी अपने अनुभव का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, खुफिया तंत्र को मजबूत करने तथा जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में इन नियुक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। गृह विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी पदस्थापनाएं प्रशासनिक आधार पर की गई हैं और आवश्यकता के अनुसार भविष्य में इनमें बदलाव भी किया जा सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्र ही अपने नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तीन कथित घोटालों के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल ने किया सरेंडर, EOW की पूछताछ शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष पर शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच; जब्त डायरी में कथित वित्तीय लेन-देन की एंट्री मिलने के बाद कार्रवाई तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ramgopal-aggarwal-accused-of-three-alleged-scams-surrenders-eow-inquiry/article-58276"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ramgopal-agrawal.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने करीब तीन साल बाद रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के कार्यालय पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इसके बाद EOW ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का कहना है कि उनसे कथित वित्तीय लेन-देन, जब्त दस्तावेजों और विभिन्न मामलों में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है। यह मामला उन तीन प्रमुख आर्थिक मामलों से जुड़ा है, जिनकी जांच पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां कर रही हैं। EOW के अनुसार, कोल लेवी मामले की जांच के दौरान कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से जब्त की गई एक डायरी में कथित तौर पर कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की एंट्रियां मिली थीं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन एंट्रियों के आधार पर यह संदेह पैदा हुआ कि कथित रकम रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से कांग्रेस भवन तक पहुंची। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धन का स्रोत क्या था, राशि किसने उपलब्ध कराई, किसने उसे प्राप्त किया और उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया। इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि कथित शराब घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर और उससे जुड़े लोगों ने करोड़ों रुपये रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए थे। वहीं, कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले में भी कारोबारी रोशन चंद्राकर के माध्यम से बड़ी रकम कांग्रेस भवन तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है। रामगोपाल अग्रवाल या कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है। EOW ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से भी लगातार दो दिनों तक पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे पिछले तीन वर्षों के दौरान रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों, उनके संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों और कथित नेटवर्क से जुड़े कई सवाल किए। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान प्राप्त जानकारियों का अन्य दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा का कहना है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका, उनसे जुड़े लोगों के संपर्क, बैंकिंग लेन-देन, धन के स्रोत, उसकी प्राप्ति और उपयोग सहित कई पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी ने बताया कि पूछताछ के दौरान जब्त डायरी, दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और विवेचना में जुटाए गए अन्य साक्ष्यों का उपयोग किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। रामगोपाल अग्रवाल का नाम जिन मामलों में सामने आया है, उनमें कथित 3,000 करोड़ रुपये का शराब घोटाला, लगभग 450 करोड़ रुपये का कोल लेवी मामला और करीब 127 करोड़ रुपये का कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला शामिल है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और कमीशन के नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि इन मामलों में सभी आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। जांच एजेंसियां उनकी गतिविधियों और लोकेशन से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही थीं। अब उनके सरेंडर के बाद जांच को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW के अनुसार वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी शेष है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन कारोबार से जुड़ा मामला है। जांच एजेंसियों के अनुसार कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की कथित अवैध वसूली की गई। एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत में विचाराधीन है।कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। EOW के अनुसार वर्ष 2015 से 2023 के बीच नियमों का उल्लंघन कर कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर ने रचा नया रिकॉर्ड, 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को मिला NQAS प्रमाणन</title>
                                    <description><![CDATA[इलाज, जांच, स्वच्छता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों पर खरे उतरे अस्पताल; छत्तीसगढ़ का पहला जिला बना रायपुर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a4f3c907401d/article-58260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-health.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले की 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) यानी नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां सबसे अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को यह राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि लगातार मॉनिटरिंग, बेहतर प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों की टीमवर्क का परिणाम है। अभी जिले की दो स्वास्थ्य संस्थाओं के मूल्यांकन का परिणाम भारत सरकार से आना बाकी है, जबकि तीन अन्य संस्थानों का राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन होना शेष है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण गुणवत्ता मूल्यांकन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और मानक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं का कई स्तरों पर विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, इलाज और जांच की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता, अस्पताल की स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, मरीजों की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे अनेक मानकों को परखा जाता है। निर्धारित मानकों पर सफल होने के बाद ही किसी स्वास्थ्य संस्था को NQAS प्रमाणपत्र दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रायपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे थे। अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, चिकित्सकीय सेवाओं में सुधार, नियमित निरीक्षण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरी उतर सकीं। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रमाणन केवल एक उपलब्धि नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार की जिम्मेदारी भी है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार स्वास्थ्य संस्थाओं में नियमित मॉनिटरिंग, समय-समय पर समीक्षा बैठकें और टीमवर्क के कारण यह सफलता हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी गुणवत्ता के इन मानकों को बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने कहा कि NQAS प्रमाणन किसी भी स्वास्थ्य संस्था के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण प्रमाण होता है। उन्होंने बताया कि मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, अस्पतालों की स्वच्छता और सेवा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। यही कारण है कि रायपुर जिले ने प्रदेश में सबसे अधिक NQAS प्रमाणित स्वास्थ्य संस्थाओं वाला पहला जिला बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन संस्थानों का मूल्यांकन अभी बाकी है, उन्हें भी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">NQAS प्रमाणन का सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को मिलता है। इससे अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती है, मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिलता है और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ती है। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था होने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। साथ ही रिकॉर्ड प्रबंधन और दवा वितरण प्रणाली में सुधार आने से सेवाएं अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनती हैं। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता सुधार का सीधा असर मरीजों के भरोसे पर भी पड़ता है। जब अस्पताल राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं, तो लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक विश्वास जताते हैं। इससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है। रायपुर जिले में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाओं को NQAS प्रमाणन मिलने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश के अन्य जिले भी इसी दिशा में तेजी से काम करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत प्रमाणित संस्थाओं का समय-समय पर दोबारा मूल्यांकन भी किया जाता है। इसलिए प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी अस्पतालों को लगातार गुणवत्ता बनाए रखनी होती है। यदि किसी संस्था में निर्धारित मानकों का पालन नहीं होता है तो उसका प्रमाणन प्रभावित हो सकता है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और सुधार की प्रक्रिया को जारी रखता है। रायपुर की इस उपलब्धि को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। साथ ही यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शेष स्वास्थ्य संस्थाओं को भी NQAS प्रमाणन दिलाया जाए और पूरे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मानसून सत्र से पहले साय सरकार की बड़ी बैठक आज, कई अहम फैसलों के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[शाम 4 बजे मंत्रालय में होगी मंत्रिपरिषद की बैठक, खरीफ सीजन, मानसून की स्थिति और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी होगा मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-government-meeting-today-before-monsoon-session-indications-of-many/article-58202"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-cabinet-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार आज एक अहम कैबिनेट बैठक करने जा रही है। मंत्रालय स्थित महानदी भवन में शाम 4 बजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को आगामी विधानसभा मानसून सत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में सरकार सदन में पेश किए जाने वाले विधेयकों, चालू वित्तीय वर्ष के अनुपूरक बजट और कई नीतिगत प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दे सकती है। इसके साथ ही प्रदेश में नई ट्रांसफर नीति पर भी फैसला होने की संभावना जताई जा रही है, जिसका लंबे समय से सरकारी कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले यह मंत्रिपरिषद की अंतिम महत्वपूर्ण बैठक होगी। ऐसे में सरकार सत्र के दौरान पेश होने वाले सभी प्रमुख प्रस्तावों और विधायी कार्यों पर अंतिम चर्चा करेगी। माना जा रहा है कि कई संशोधन विधेयकों को भी कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए अनुपूरक बजट प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा होगी। विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार अतिरिक्त बजट आवंटन को मंजूरी दे सकती है। अनुपूरक बजट के जरिए विकास कार्यों, अधूरी परियोजनाओं और नई योजनाओं के लिए राशि उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके बाद इसे मानसून सत्र में सदन के सामने रखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कैबिनेट बैठक में प्रदेश में मानसून की मौजूदा स्थिति भी प्रमुख एजेंडा रहेगी। इस वर्ष अब तक राज्य में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है। सरकार इस स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय कर सकती है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। कृषि विभाग बैठक में खाद, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर विस्तृत प्रस्तुति देगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों तक समय पर आवश्यक कृषि सामग्री पहुंचे और बुआई का काम प्रभावित न हो। यदि कम बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो वैकल्पिक फसल योजना, सिंचाई प्रबंधन और राहत उपायों पर भी निर्णय लिया जा सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और विभिन्न जिलों की वर्षा रिपोर्ट के आधार पर सरकार प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति तैयार कर सकती है। सिंचाई संसाधनों के बेहतर उपयोग, जल संरक्षण और सूखे की आशंका वाले इलाकों के लिए भी आवश्यक कदमों पर विचार होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी कर्मचारियों की नजर इस बैठक पर इसलिए भी टिकी हुई है क्योंकि नई स्थानांतरण नीति को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। पिछली नीति की अवधि समाप्त होने के बाद कर्मचारी और विभाग दोनों नई व्यवस्था का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि कैबिनेट इस संबंध में अंतिम फैसला ले सकती है। यदि नीति को मंजूरी मिलती है तो जल्द ही प्रदेशभर में तबादला प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नई ट्रांसफर नीति लागू होने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत, लोक निर्माण और अन्य विभागों में लंबे समय से लंबित तबादलों का रास्ता साफ हो जाएगा। कई विभागों ने पहले ही स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार कर लिए हैं और सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में धान उपार्जन नीति से जुड़े कुछ प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य, खरीद व्यवस्था और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर विभागीय रिपोर्ट की समीक्षा कर सकती है। इसके अलावा कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार किया जा सकता है। मंत्रिपरिषद के सामने किसानों, श्रमिकों, उद्योगों और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई अन्य प्रस्ताव भी रखे जा सकते हैं। इनमें विभिन्न विभागों की नई योजनाएं, प्रशासनिक सुधार और नीतिगत बदलाव शामिल हो सकते हैं। कुछ विभागों ने अपने प्रस्ताव पहले ही सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय आज की बैठक में लिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। विधानसभा मानसून सत्र में विपक्ष सरकार को महंगाई, किसानों की समस्याओं, बारिश की कमी, कानून व्यवस्था और विभिन्न विकास कार्यों को लेकर घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सरकार चाहती है कि सत्र शुरू होने से पहले सभी विभाग पूरी तैयारी के साथ सदन में जाएं और आवश्यक प्रस्तावों को समय रहते मंजूरी मिल जाए। कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की प्राथमिकताओं की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। विशेष रूप से किसानों, कर्मचारियों और विकास योजनाओं से जुड़े फैसलों पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। यदि नई ट्रांसफर नीति, अनुपूरक बजट और प्रमुख विधेयकों को मंजूरी मिलती है तो इसका असर आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कामकाज पर साफ दिखाई देगा। सरकार की कोशिश होगी कि मानसून सत्र के दौरान विकास, कृषि, वित्त और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लेकर प्रदेश के सामने अपनी कार्ययोजना स्पष्ट रूप से रखी जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रायपुर फैक्ट्री में भीषण धमाका, 3 मजदूरों की मौत: 200 मीटर दूर तक बिखरे शवों के अंग</title>
                                    <description><![CDATA[उरला की 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में हादसे के बाद मचा हड़कंप, कई मजदूर घायल; पुलिस ने शुरू की जांच, सुरक्षा मानकों की होगी पड़ताल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/will-retire-at-the-age-of-62-not-65-high/article-58177"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-factory-blast.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में मंगलवार शाम हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री परिसर में काम कर रहे तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके शरीर के अंग करीब 200 मीटर दूर तक बिखर गए। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग भी तेज धमाके की आवाज सुनकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।</p>
<p style="text-align:justify;">हादसा उरला थाना क्षेत्र के बेंड्री स्थित 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में हुआ। विस्फोट के समय फैक्ट्री में कई मजदूर काम कर रहे थे। अचानक हुए जोरदार धमाके से पूरा परिसर हिल गया। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि फैक्ट्री का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और वहां मौजूद मजदूरों में भगदड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विस्फोट किसी बम जैसी आवाज के साथ हुआ, जिसके बाद चारों ओर धूल, धुआं और मलबा फैल गया। हादसे में 25 वर्षीय कमल सिंह, लाल सिंह और 19 वर्षीय अरुण पांडे की मौत हो गई। कमल सिंह को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं लाल सिंह और अरुण पांडे की मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतकों में कमल सिंह और लाल सिंह मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के निवासी थे, जबकि अरुण पांडे छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का रहने वाला था। विस्फोट में कई अन्य मजदूर भी घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने घायलों के बेहतर उपचार के लिए विशेष चिकित्सकीय टीम तैनात की है।</p>
<p style="text-align:justify;">हादसे के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमों ने पूरे परिसर को घेर लिया और राहत अभियान शुरू किया। मलबे के बीच फंसे लोगों की तलाश की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं कोई अन्य मजदूर अंदर तो नहीं रह गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर फैक्ट्री परिसर में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है। प्रारंभिक स्तर पर यह जांच की जा रही है कि फैक्ट्री में औद्योगिक सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। यह भी देखा जा रहा है कि विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ और क्या मशीनों या उत्पादन प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी इसके पीछे कारण बनी।पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां फैक्ट्री प्रबंधन, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही हैं। साथ ही घटनास्थल से तकनीकी साक्ष्य भी एकत्र किए जा रहे हैं। यदि जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट प्रभावी ढंग से किए जाएं तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। हादसे के बाद आसपास के उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों के बीच भी भय और चिंता का माहौल है।किसी भी फैक्ट्री में विस्फोट जैसी घटना कई कारणों से हो सकती है। इनमें गैस रिसाव, रासायनिक प्रतिक्रिया, दबाव वाले उपकरणों में खराबी, मशीनों का ओवरलोड होना या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना शामिल हो सकता है। वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच और फोरेंसिक परीक्षण के बाद ही चल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ की किसी औद्योगिक इकाई में इस प्रकार का हादसा हुआ हो। पिछले कुछ वर्षों में भी राज्य की विभिन्न फैक्ट्रियों में विस्फोट और औद्योगिक दुर्घटनाओं की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें अनेक मजदूरों की जान गई। हर घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे, लेकिन समय के साथ अधिकांश मामलों में सुधार की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। मृतकों के परिजनों का कहना है कि उनके परिवार का सहारा छिन गया है। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजा देने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जाता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा। साथ ही यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अन्य फैक्ट्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:20:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>13 जुलाई से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र, 1033 सवालों के साथ सरकार को घेरेगा विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय सत्र में कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट और मानसून की तैयारियों जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will-start-from-july-13/article-58083"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार अब तक विधायकों की ओर से 1033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रश्न विपक्षी कांग्रेस की ओर से हैं। कांग्रेस ने इस बार कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़कों की स्थिति और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और अपनी योजनाओं तथा उपलब्धियों को सदन के सामने रखने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान सदन में कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की स्थिति देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधानसभा का यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब प्रदेश में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय मुद्दे चर्चा में हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में प्रशासन समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में सफल नहीं रहा, इसलिए इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठने वाले हैं। खरीफ सीजन के बीच खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियां और कृषि विभाग की योजनाओं को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि कई क्षेत्रों से किसानों को समय पर उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं सरकार का दावा है कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सदन में इन दावों और आरोपों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। कृषि से जुड़े सवालों की संख्या भी इस बार अधिक बताई जा रही है, जिससे यह मुद्दा सत्र के दौरान प्रमुख बना रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के नकटी गांव का भूमि विवाद भी इस बार विधानसभा में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनने की संभावना है। अतिक्रमण हटाने, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार हो रही है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए कई सवाल उठाने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से पूरे मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी की गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी सदन में काफी देर तक बहस हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, पेयजल संकट और खराब सड़कें भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल हैं। कई जिलों से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेयजल की समस्या की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके अलावा बारिश के दौरान सड़कों की खराब स्थिति, जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले जिन तैयारियों का दावा किया गया था, उनकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी है। हालिया बारिश के दौरान राहत और बचाव कार्यों की स्थिति भी चर्चा का विषय बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों पर भी प्रश्न लगाए गए हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन, बजट खर्च और विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार प्रश्नों की संख्या को देखते हुए इस बार प्रश्नकाल काफी व्यस्त रहने की संभावना है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य कार्यवाही के दौरान भी कई महत्वपूर्ण विषय सदन में उठ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जा सके। मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर भी विभागवार समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में विकास कार्य लगातार जारी हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा। सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी सदन में प्रमुखता से रखने की रणनीति बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिजली गोदाम हादसे का 66.57 करोड़ का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने वितरण कंपनी की मांग खारिज की, कहा- प्रशासनिक लापरवाही और जोखिम प्रबंधन की कमी का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जा सकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/the-burden-of-rs-6657-crore-due-to-electricity-warehouse/article-58074"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cserc.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने आगजनी से हुए 66.57 करोड़ रुपये के नुकसान को बिजली टैरिफ में शामिल कर उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति मांगी थी। आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी वितरण कंपनी को प्रशासनिक लापरवाही, जोखिम प्रबंधन की कमी या संपत्तियों का पर्याप्त बीमा नहीं होने के कारण नुकसान हुआ है, तो उसका वित्तीय भार सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। आयोग के इस फैसले को राज्य के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला वित्तीय वर्ष 2026-27 के बिजली टैरिफ निर्धारण से जुड़ा है। इस दौरान CSPDCL ने आयोग के समक्ष कुल 658.32 करोड़ रुपये को असाधारण व्यय के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया था। इस राशि में अप्रैल 2024 में रायपुर के गुढ़ियारी स्थित क्षेत्रीय बिजली गोदाम में शॉर्ट सर्किट से लगी आग के कारण ट्रांसफार्मर, केबल और अन्य विद्युत उपकरणों को हुए नुकसान का दावा भी शामिल था। इसके अलावा भिलाई, रायगढ़ और कोरबा में हुई आगजनी की घटनाओं से हुए नुकसान को भी इसी दावे में जोड़ा गया था। कंपनी चाहती थी कि इन घटनाओं से हुए कुल 66.57 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई बिजली दरों में बढ़ोतरी के माध्यम से उपभोक्ताओं से की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान आयोग ने कंपनी से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। विशेष रूप से यह जानकारी मांगी गई कि जिन उपकरणों और सामग्रियों को आग से नुकसान पहुंचा, उनका बीमा कराया गया था या नहीं। आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि कंपनी पर्याप्त और संतोषजनक बीमा संबंधी प्रमाण उपलब्ध नहीं करा सकी। इसके बाद आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वितरण कंपनी की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनका समय पर बीमा कराना उसकी अपनी जिम्मेदारी है। यदि इस स्तर पर आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई है तो उसका आर्थिक परिणाम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">आयोग ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि बिजली उपभोक्ताओं से केवल उन्हीं खर्चों की वसूली की जा सकती है जो बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक और उचित हों। लेकिन प्रबंधन संबंधी कमियों, लापरवाही या जोखिम नियंत्रण में विफलता से उत्पन्न नुकसान को टैरिफ में जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में बिजली वितरण कंपनियों को अपनी परिसंपत्तियों की सुरक्षा, रखरखाव और जोखिम प्रबंधन को लेकर अधिक जिम्मेदार बनाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से रेलवे से जुड़े 591.75 करोड़ रुपये के एक अन्य दावे को भी टैरिफ में शामिल करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि आयोग ने इस मांग को भी फिलहाल स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि यह मामला अभी आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया में लंबित है और अंतिम देयता तय नहीं हुई है। जब तक संबंधित विवाद का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इस राशि को बिजली दरों में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसलिए इस दावे पर भी तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि नियामक आयोग का यह फैसला उपभोक्ता हितों की रक्षा के सिद्धांत को मजबूत करता है। बिजली वितरण कंपनियों को अपने संचालन के दौरान होने वाले जोखिमों का उचित प्रबंधन करना होता है। यदि किसी कारणवश संपत्तियों को नुकसान होता है तो उसके लिए बीमा और अन्य सुरक्षा उपाय पहले से सुनिश्चित किए जाने चाहिए। ऐसे मामलों में यदि पर्याप्त तैयारी नहीं की जाती, तो उसका खर्च सीधे उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्य में हर वर्ष बिजली टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान वितरण कंपनियां विभिन्न खर्चों को मान्यता देने का अनुरोध करती हैं। आयोग इन सभी दावों की तकनीकी, वित्तीय और कानूनी आधार पर समीक्षा करता है। इसके बाद ही यह तय किया जाता है कि कौन-सा व्यय बिजली दरों में शामिल किया जा सकता है और कौन-सा नहीं। इस बार भी आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और नियमों का परीक्षण करने के बाद ही यह निर्णय सुनाया।</p>
<p>आयोग के फैसले के बाद फिलहाल बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त 66.57 करोड़ रुपये का बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही रेलवे से जुड़े लंबित दावे को भी बिजली टैरिफ में शामिल नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से भविष्य में बिजली वितरण कंपनियां अपनी परिसंपत्तियों के बीमा, सुरक्षा व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन पर अधिक ध्यान देंगी। वहीं उपभोक्ताओं को भी यह भरोसा मिलेगा कि प्रशासनिक या प्रबंधन संबंधी कमियों का आर्थिक भार बिना उचित आधार के उन पर नहीं डाला जाएगा। फिलहाल इस फैसले को छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर कलेक्टर निवास में देर रात लगी आग, शॉर्ट-सर्किट की आशंका; एक घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू</title>
                                    <description><![CDATA[फायर ब्रिगेड की टीम ने समय रहते आग बुझाई, कोई जनहानि नहीं; पार्किंग शेड, फर्नीचर और विद्युत उपकरणों को नुकसान, प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/fire-broke-out-late-night-in-raipur-collectors-residence-suspicion/article-57951"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-collector-residence.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह के सरकारी निवास परिसर में रविवार देर रात अचानक आग लगने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पार्किंग शेड, फर्नीचर, विद्युत उपकरण और अन्य सामान को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार आग शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगभग दो से ढाई बजे के बीच लगी। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक परिसर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई देने पर वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड और पुलिस कंट्रोल रूम को भी जानकारी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, लेकिन दमकल कर्मियों ने समय रहते मोर्चा संभाल लिया। करीब एक घंटे तक लगातार पानी की बौछारें और अन्य अग्निशमन उपकरणों का उपयोग कर आग को नियंत्रित किया गया। इसके बाद यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं दोबारा आग भड़कने की संभावना न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट-सर्किट माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विद्युत प्रणाली में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह का पता विस्तृत तकनीकी जांच और फॉरेंसिक निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा। जांच पूरी होने तक किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आग की चपेट में आने से कलेक्टर निवास परिसर का पार्किंग शेड सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इसके अलावा वहां रखे कुछ फर्नीचर, विद्युत उपकरण, वायरिंग और अन्य सामग्री भी जल गई। नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए संबंधित विभागों की टीम को निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि सभी क्षतिग्रस्त वस्तुओं का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति कुछ समय के लिए बंद कर दी गई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि बिजली चालू रहती तो आग और अधिक फैल सकती थी या किसी अन्य दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती थी। बिजली विभाग की टीम ने बाद में पूरे परिसर की वायरिंग और विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आग बुझाने के कार्य का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। अधिकारियों ने फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पाने से बड़ा हादसा टल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार आग लगने के बाद सबसे पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि परिसर में मौजूद सभी लोग सुरक्षित हों। इसके बाद आग को आसपास के हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए व्यवस्थित तरीके से अभियान चलाया गया। दमकल कर्मियों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आग बुझाने का कार्य पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने भी बताया कि देर रात अचानक दमकल वाहनों के सायरन सुनाई दिए, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। कुछ ही देर में पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों में नियमित रूप से विद्युत वायरिंग, फायर सेफ्टी सिस्टम और अग्निशमन उपकरणों की जांच बेहद आवश्यक होती है। समय-समय पर फायर ऑडिट कराने से इस प्रकार की घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए कर्मचारियों को भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रायपुर कलेक्टर निवास में लगी आग भले ही समय रहते नियंत्रित कर ली गई, लेकिन इस घटना ने सरकारी परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर, नियमित फायर ऑडिट और विद्युत उपकरणों के रखरखाव पर विशेष ध्यान देकर इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:40:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में 8 से 14 जुलाई तक देवकीनंदन ठाकुर की श्रीमद्भागवत कथा, ‘नो तिलक-नो एंट्री’ नियम रहेगा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[बूढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में सात दिवसीय धार्मिक आयोजन, प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से कथा; कलश यात्रा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, महारास सहित कई विशेष कार्यक्रम होंगे, आस्था चैनल और यूट्यूब पर होगा सीधा प्रसारण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/devkinandan-thakurs-shrimad-bhagwat-katha-no-tilak-no-entry-rule-will/article-57949"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/devkinandan-thakur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राजधानी रायपुर एक बार फिर भक्ति, आध्यात्म और सनातन संस्कृति के रंग में रंगने जा रही है। शहर के बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम में 8 जुलाई से 14 जुलाई तक प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह सात दिवसीय धार्मिक आयोजन अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के तत्वावधान में आयोजित होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजकों के अनुसार कथा का शुभारंभ प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे होगा। सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की विभिन्न लीलाओं, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित प्रवचन होंगे। कथा के साथ भजन, संकीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार आयोजन की सबसे विशेष बात ‘नो तिलक, नो एंट्री’ अभियान है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि कथा स्थल पर प्रवेश से पहले सभी अपने माथे पर तिलक अवश्य लगाकर आएं। उनका कहना है कि यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के सम्मान और उसकी पहचान का प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य लोगों में अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता और गौरव की भावना विकसित करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति का मानना है कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। तिलक लगाने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है और इसे आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता तथा धार्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। इसी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए कथा स्थल पर इस नियम को लागू किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत 8 जुलाई को भव्य कलश यात्रा और भागवत महात्म्य के साथ होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद प्रतिदिन श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">9 जुलाई को भीष्म पितामह, माता कुंती के आगमन तथा पूतना वध की कथा सुनाई जाएगी। 10 जुलाई को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव और छप्पन भोग का विशेष आयोजन रहेगा। श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत की महिमा से जुड़े प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">11 जुलाई को वामन अवतार, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान आकर्षक झांकियां, भजन और विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">12 जुलाई को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, माखन चोरी, गोवर्धन पूजन और छप्पन भोग का आयोजन होगा। इसके बाद 13 जुलाई को महारास, सुदामा मिलन, रुक्मिणी विवाह और चिंतक विदाई जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इन आयोजनों में भक्ति संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सात दिवसीय कथा का समापन 14 जुलाई को सुदामा चरित्र, कंस वध और हवन-पूजन के साथ होगा। अंतिम दिन श्रद्धालु सामूहिक रूप से पूर्णाहुति में शामिल होंगे और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आयोजन का समापन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति ने बताया कि कथा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कथा स्थल पर बैठने, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम आयोजन को व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जो श्रद्धालु किसी कारणवश रायपुर नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए कथा का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा। आयोजन का लाइव टेलीकास्ट आस्था चैनल और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित होगा, जिससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी कथा का लाभ ले सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन से पहले अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में मुलाकात कर उन्हें कथा में शामिल होने का निमंत्रण दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए निमंत्रण स्वीकार किया और धार्मिक आयोजनों के सामाजिक महत्व की सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति का कहना है कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। देवकीनंदन ठाकुर अपने सहज, सरल और प्रेरणादायी प्रवचनों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उनके कथा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरूकता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:23:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पद्म विभूषण तीजन बाई नहीं रहीं, पंडवानी की अमर आवाज हमेशा गूंजती रहेगी</title>
                                    <description><![CDATA[70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस, महाभारत की लोकगाथाओं को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोक कलाकार के निधन से कला जगत में शोक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/padma-vibhushan-tijan-bai-is-no-more-pandwanis-immortal-voice/article-57904"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/teejan-bai-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली देश की महान लोक कलाकार, पद्म विभूषण तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। 70 वर्षीय तीजन बाई ने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रात करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और उनका इलाज जारी था। उनके निधन की खबर सामने आते ही कला, संस्कृति और साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देशभर के कलाकारों, राजनीतिक नेताओं और उनके प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। गांव और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी प्रिय लोक कलाकार को नम आंखों से विदाई दी। यहीं पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नाना से मिली महाभारत सुनाने की प्रेरणा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव लोककला और महाभारत की कथाओं की ओर था। उनके नाना उन्हें महाभारत की कहानियां सुनाया करते थे। इन्हीं कथाओं ने उनके मन में पंडवानी गायन के प्रति गहरी रुचि पैदा की। उन्होंने बचपन में ही इन कथाओं को याद करना शुरू कर दिया और बाद में अपनी विशिष्ट शैली में मंच पर प्रस्तुत करने लगीं।</p>
<p style="text-align:justify;">महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच पर पंडवानी का गायन किया। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई ने पंडवानी जैसी पारंपरिक लोककला को केवल गांवों और मेलों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने भारत सहित दुनिया के कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां देकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे केवल गाती नहीं थीं, बल्कि महाभारत के पात्रों को अपने अभिनय, भाव-भंगिमा और आवाज के उतार-चढ़ाव से जीवंत कर देती थीं। दर्शक स्वयं को महाभारत के घटनाक्रम का हिस्सा महसूस करने लगते थे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>संघर्षों से भरा रहा जीवन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज भले ही तीजन बाई को विश्वस्तरीय कलाकार के रूप में जाना जाता हो, लेकिन उनकी यात्रा आसान नहीं रही। सामाजिक परंपराओं और रूढ़ियों के कारण शुरुआती दौर में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उस समय महिलाओं का पंडवानी की 'कापालिक शैली' में मंच पर प्रस्तुति देना सामान्य नहीं माना जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने तमाम विरोधों और सामाजिक चुनौतियों का डटकर सामना किया। अपनी प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि कला की कोई सीमा नहीं होती। उनके संघर्ष ने आने वाली पीढ़ियों की महिला कलाकारों के लिए भी नए रास्ते खोले।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें समय-समय पर कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि सम्मान और अनेक सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा भी सम्मानित किया गया। उनके सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं थे, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का गौरव भी बने।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की लोककला को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। उनका निधन कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपने जीवन को लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किया। पंडवानी के माध्यम से उन्होंने राज्य का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ाया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का जीवन इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, मेहनत और प्रतिभा के बल पर कोई भी कलाकार वैश्विक पहचान हासिल कर सकता है। उन्होंने न केवल लोककला को जीवित रखा, बल्कि उसे आधुनिक मंचों तक भी पहुंचाया। आज देश-विदेश के अनेक युवा कलाकार उनकी शैली से प्रेरणा लेकर पंडवानी और लोककला के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी आवाज, अभिनय और महाभारत के पात्रों को जीवंत करने की कला हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगी। उनका योगदान भारतीय लोक संस्कृति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि भारतीय लोक परंपरा के एक युग का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन के कई दशक लोककला को समर्पित किए और पंडवानी को विश्व मंच पर स्थापित किया। उनके जाने से जो रिक्तता बनी है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा। हालांकि उनकी प्रस्तुतियां, उनके गीत और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी। भारतीय लोक संगीत और पंडवानी की दुनिया में उनका नाम सदैव सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/padma-vibhushan-tijan-bai-is-no-more-pandwanis-immortal-voice/article-57904</link>
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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:22 +0530</pubDate>
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