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                <title>Madhya Pradesh Police - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Madhya Pradesh Police RSS Feed</description>
                
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                <title>1.69 लाख का इनामी अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार, चरवाहा बनकर 15 दिन रेकी के बाद ‘ऑपरेशन नीलमणि’ में मिली सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/interstate-smuggler-with-a-reward-of-rs-169-lakh-arrested/article-58274"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sunil-rawat-meena.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बने 1.69 लाख रुपये के इनामी अंतरराज्यीय तस्कर सुनील रावत मीणा को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नीलमणि’ के तहत यह बड़ी सफलता हासिल की। करीब आठ महीने तक लगातार निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई के बाद आरोपी को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान लाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 27 वर्षीय सुनील रावत मीणा राजस्थान के नारकोटिक्स मामलों के टॉप-25 अपराधियों में शामिल था। उस पर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखने, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों सहित 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से फरार रहने के कारण वह दोनों राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में सामने आया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए सुनील जंगलों में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था। वह किसी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुकता था, जिससे पुलिस के लिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता था। उसकी पत्नी तय स्थान पर खाना छोड़ जाती थी और उसके सहयोगी वह भोजन जंगल में छिपे सुनील तक पहुंचाते थे। इसी नेटवर्क के कारण वह कई महीनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने बेहद गोपनीय रणनीति तैयार की। टीम के एक कॉन्स्टेबल को चरवाहे के वेश में करीब 15 दिनों तक गांव और आसपास के इलाके में तैनात किया गया। वह स्थानीय लोगों के बीच रहकर सुनील की गतिविधियों, उसके संपर्कों और आने-जाने के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाता रहा। इस दौरान पुलिस मुख्यालय से तकनीकी निगरानी भी लगातार जारी रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि सुनील गांव की एक युवती के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार वह एक छोटे बच्चे के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने उसके इस संचार तंत्र पर भी नजर रखी और कई महत्वपूर्ण इनपुट जुटाए। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर टीम ने गिरफ्तारी की योजना को अंतिम रूप दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">7 जुलाई की रात पुलिस को सूचना मिली कि सुनील अपने घर पहुंचा हुआ है और वहां दावत चल रही है। इसी दौरान इलाके में तेज बारिश शुरू हो गई। पुलिस ने आकलन किया कि मौसम खराब होने के कारण आरोपी उस रात वापस जंगल नहीं जा सकेगा। इसी मौके का फायदा उठाते हुए आधी रात को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने नीमच जिले के गमेरपुरा गांव स्थित उसके घर की चारों ओर से घेराबंदी कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस टीम ने दरवाजा खटखटाया तो सबसे पहले आरोपी की पत्नी बाहर आई। उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि घर में कोई नहीं है। हालांकि टीम पहले से मिली जानकारी के आधार पर पूरी तरह आश्वस्त थी कि आरोपी अंदर मौजूद है। इसके बाद घर की बारीकी से तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान एक कमरे में ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा सुनील अर्द्धनग्न अवस्था में मिला। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गिरफ्तारी के समय आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को ‘दिनेश’ बताया, लेकिन पूछताछ और दस्तावेजों के मिलान के बाद उसकी असली पहचान सामने आ गई। पुलिस को आशंका थी कि उसके साथी मौके पर पहुंच सकते हैं, इसलिए बिना समय गंवाए टीम आरोपी को लेकर तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुनील पर कई गंभीर आरोप हैं। उस पर राजस्थान के पाली जिले के सांडेराव और देसूरी क्षेत्रों के अलावा प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी में पुलिस टीमों पर फायरिंग करने के मामले दर्ज हैं। इन हमलों में पुलिसकर्मी रणवीर और चंद्रपाल घायल हुए थे। इसके अलावा उसने मध्य प्रदेश के जीरन थाना क्षेत्र में भी पुलिस पर हमला किया था। लगातार पुलिस पर हमले और मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय भूमिका के कारण उसे बेहद खतरनाक अपराधी माना जाता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">‘ऑपरेशन नीलमणि’ राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस का संयुक्त अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय बड़े ड्रग नेटवर्क को तोड़ना और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को गिरफ्तार करना था। आठ महीने तक चली इस कार्रवाई में तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्तर पर की गई रेकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि सुनील की गिरफ्तारी से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। अब उससे पूछताछ कर उसके सहयोगियों, सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और अन्य राज्यों में फैले संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी चोट पहुंचेगी और आने वाले दिनों में कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सात दिन से लापता नाबालिग ग्वालियर में बरामद, वन स्टॉप सेंटर भेजी गई</title>
                                    <description><![CDATA[महाराजपुरा से 14 वर्षीय छात्रा हुई थी लापता, CCTV और रूट मैपिंग से पुलिस ने ट्रेस किया, पहले भी चित्रकूट से हो चुकी है बरामदगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/minor-missing-for-seven-days-recovered-in-gwalior-sent-to/article-57286"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-missing-girl-case.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">ग्वालियर में सात दिन से लापता 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है। मामला महाराजपुरा थाना क्षेत्र के शताब्दीपुरम इलाके का है, जहां से 21 जून को छात्रा अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। मामला नाबालिग बच्ची से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू किया। लगातार सात दिन तक चली तलाश के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और रूट मैपिंग की मदद से छात्रा को बरामद कर लिया। हालांकि बरामदगी के बाद छात्रा ने अपने घर लौटने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उसे फिलहाल वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस के मुताबिक छात्रा मूल रूप से भिंड जिले की रहने वाली है, लेकिन पढ़ाई के सिलसिले में अपने परिवार के साथ ग्वालियर के महाराजपुरा क्षेत्र में रह रही थी। 21 जून को वह अचानक घर से बिना किसी को बताए निकल गई। जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटी तो परिवार के लोगों ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। कई घंटों तक खोजबीन के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने महाराजपुरा थाने पहुंचकर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएसपी महाराजपुरा नागेंद्र सिंह सिकरवार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक यशवंत गोयल ने एक विशेष टीम गठित की। टीम ने सबसे पहले छात्रा के घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि छात्रा किस दिशा में गई थी और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं था। इसके अलावा पुलिस ने आसपास के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों के कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी। रूट मैपिंग के जरिए छात्रा की संभावित लोकेशन का अनुमान लगाया गया और उसी आधार पर पुलिस की अलग-अलग टीमें सक्रिय कर दी गईं।जांच के दौरान पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया। कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई और संभावित स्थानों पर लगातार निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच और लगातार फील्ड वर्क का ही परिणाम था कि रविवार शाम छात्रा का पता चल गया। पुलिस टीम ने उसे शहर के पास से सुरक्षित बरामद कर लिया और थाने लेकर पहुंची। यहां उसकी प्रारंभिक पूछताछ की गई, लेकिन उसने घर वापस जाने से साफ इनकार कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्रा के इनकार के बाद पुलिस ने बाल संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन करते हुए उसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया। अधिकारियों के मुताबिक वहां विशेषज्ञ उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि आखिर वह बार-बार घर क्यों छोड़ रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी नाबालिग के मामले में केवल बरामदगी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति, पारिवारिक माहौल और सामाजिक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी होता है। इसी वजह से काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जांच के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब यह छात्रा घर से लापता हुई हो। इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को भी वह बिना बताए घर से चली गई थी। उस समय भी महाराजपुरा थाना पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद उसे उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से सुरक्षित बरामद किया था। तब काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। लेकिन करीब दो महीने बाद फिर उसी तरह घर से चले जाने की घटना ने पुलिस और परिवार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बार-बार घर छोड़ने के पीछे की वजह जानना बेहद जरूरी है। इसलिए इस मामले में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परिवार के सदस्यों से भी विस्तृत बातचीत की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि कहीं किसी तरह का घरेलू तनाव, मानसिक दबाव या अन्य कारण तो नहीं है, जिसकी वजह से बच्ची बार-बार घर छोड़ने का फैसला कर रही है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किशोरों और बच्चों की मानसिक स्थिति पर समय रहते ध्यान देना कितना जरूरी है।</p>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:26:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्यप्रदेश पुलिस में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती फिर शुरू, हर साल 60 पदों पर मिलेगी नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नियमों में संशोधन, अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी बन सकेंगे पुलिस अधिकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/direct-recruitment-of-players-starts-again-in-madhya-pradesh-police/article-56283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-police-recruitment-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए पुलिस विभाग में खेल कोटे से सीधी भर्ती प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर दिया है। लंबे समय से खेल जगत से जुड़े खिलाड़ियों की मांग थी कि उन्हें उनकी उपलब्धियों के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर मिलें। अब राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में संशोधन किया है। संशोधित नियमों की अधिसूचना 15 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी है। नई व्यवस्था के तहत हर वर्ष पुलिस विभाग में खेल कोटे से 60 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इनमें 10 पद उप निरीक्षक (एसआई) और 50 पद आरक्षक (कांस्टेबल) के लिए निर्धारित किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे खिलाड़ियों को रोजगार मिलेगा और प्रदेश में खेल संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव पात्रता को लेकर किया गया है। पहले केवल पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र होंगे। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि उन खिलाड़ियों को भी अवसर मिल सके जिन्होंने देश और प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है, भले ही वे पदक जीतने में सफल न हुए हों। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है और ऐसे खिलाड़ियों को सम्मानजनक अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">संशोधित नियमों के अनुसार पुलिस मुख्यालय प्रत्येक वर्ष भर्ती के लिए अलग से विज्ञापन जारी करेगा। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह खेल उपलब्धियों के आधार पर संचालित होगी। खिलाड़ियों को शैक्षणिक योग्यता, शारीरिक मापदंड, लिखित परीक्षा तथा शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में विशेष छूट प्रदान की जाएगी। इससे खिलाड़ियों को लंबी और जटिल चयन प्रक्रिया से राहत मिलेगी। हालांकि अंतिम चयन के लिए खेल उपलब्धियों का सत्यापन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सरकार ने उप निरीक्षक और आरक्षक पदों के लिए पात्रता भी अलग-अलग निर्धारित की है। उप निरीक्षक पद के लिए वही खिलाड़ी आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया हो। वहीं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ी आरक्षक पद के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। इस व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप अवसर देने का प्रयास किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">खेल विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से प्रदेश के हजारों खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। अक्सर देखा जाता है कि कई खिलाड़ी वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करते हैं, लेकिन खेल जीवन समाप्त होने के बाद रोजगार की चुनौती सामने आ जाती है। ऐसे में पुलिस विभाग में सीधी भर्ती उनके लिए सुरक्षित भविष्य का रास्ता खोल सकती है। साथ ही पुलिस बल को भी अनुशासित, फिट और प्रशिक्षित युवा मिलेंगे, जो विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले भी कई मंचों से खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की बात कह चुके हैं। सरकार का कहना है कि खिलाड़ियों को केवल पुरस्कार और सम्मान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए स्थायी रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसी सोच के तहत खेल कोटे की भर्ती को दोबारा सक्रिय किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">खेल संगठनों और खिलाड़ियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। कई पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि इससे युवा पीढ़ी खेलों की ओर अधिक आकर्षित होगी। ग्रामीण और छोटे शहरों के खिलाड़ी, जो सीमित संसाधनों में मेहनत कर रहे हैं, उन्हें भी उम्मीद की नई किरण दिखाई देगी। प्रदेश में हॉकी, एथलेटिक्स, कुश्ती, कबड्डी, तीरंदाजी और अन्य खेलों में प्रतिभाएं लगातार उभर रही हैं। रोजगार की गारंटी मिलने से इन खिलाड़ियों का मनोबल और मजबूत होगा। खेल और रोजगार को जोड़ने वाली ऐसी नीतियां किसी भी राज्य के खेल विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। मध्यप्रदेश सरकार का यह निर्णय न केवल खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को राज्य सम्मान और अवसर दोनों देने के लिए तैयार है। आने वाले समय में इस भर्ती प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी पुलिस विभाग का हिस्सा बन सकते हैं और मैदान के साथ-साथ कानून व्यवस्था के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:01:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मध्य प्रदेश पुलिस के सैलरी पैकेज एग्रीमेंट समाप्त, सुविधाएं प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[एचडीएफसी, एक्सिस और केनरा बैंक के साथ पुराना करार खत्म, पुलिसकर्मियों को दी गई सूचना, नवीनीकरण पर काम जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/salary-package-agreement-of-madhya-pradesh-police-ended-facilities-affected/article-55961"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-police-salary-package.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश पुलिस के हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बैंकिंग सुविधाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) भोपाल ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों को पत्र जारी कर बताया है कि एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और केनरा बैंक के साथ हुए सैलरी पैकेज एग्रीमेंट अब समाप्त हो चुके हैं। इसके बाद पुलिस अधीक्षकों, पुलिस यूनिट इंचार्ज और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को इस स्थिति की जानकारी दें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। विभागीय स्तर पर जारी इस सूचना का सीधा असर उन पुलिसकर्मियों पर पड़ेगा जिनके वेतन खाते इन बैंकों में संचालित हैं और जो अब तक सैलरी पैकेज के तहत मिलने वाली अतिरिक्त सुविधाओं का लाभ लेते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> पुलिस मुख्यालय और विभिन्न बैंकों के बीच समय-समय पर विशेष सैलरी पैकेज समझौते किए जाते रहे हैं। इन समझौतों का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सामान्य बैंकिंग सेवाओं से अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। ऐसे पैकेज के तहत दुर्घटना बीमा, सामान्य मृत्यु पर बीमा कवर, व्यक्तिगत दुर्घटना सहायता, विशेष ऋण सुविधाएं, कुछ बैंकिंग शुल्कों में छूट और अन्य कई लाभ दिए जाते रहे हैं। पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मचारी अक्सर जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं, इसलिए इस प्रकार की योजनाओं को उनके सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन अब इन तीनों बैंकों के साथ हुए अनुबंध समाप्त होने के बाद यह स्थिति बदल गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक एक्सिस बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को सैलरी पैकेज एग्रीमेंट किया गया था। यह अनुबंध 22 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गया। इसी तरह एचडीएफसी बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को हुआ समझौता 22 अप्रैल 2024 तक प्रभावी रहा और उसके बाद इसकी अवधि समाप्त हो गई। वहीं केनरा बैंक के साथ 19 फरवरी 2024 को हुआ अनुबंध 18 फरवरी 2025 को खत्म हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कुछ अनुबंध समाप्त हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में सभी इकाइयों को औपचारिक रूप से सतर्क करने और कर्मचारियों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की है।</p>
<p style="text-align:justify;">कई पुलिसकर्मी अब भी यह मानकर चल रहे थे कि उनके खाते पुराने सैलरी पैकेज लाभों के दायरे में हैं। ऐसे में किसी आकस्मिक स्थिति में बीमा या अन्य सुविधाओं को लेकर विवाद और भ्रम की संभावना बनी रह सकती थी। इसी वजह से पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी संबंधित कर्मचारियों को अनुबंध समाप्त होने की जानकारी दी जाए। अधिकारियों का मानना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था, क्योंकि कई मामलों में कर्मचारी अपने बैंक खाते से जुड़ी विशेष सुविधाओं को लेकर पूरी तरह अवगत नहीं होते।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अनुबंध समाप्त होने के बावजूद पुलिस मुख्यालय ने इन बैंकों के साथ संबंध पूरी तरह खत्म नहीं किए हैं। कल्याण शाखा की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि एग्रीमेंट का नवीनीकरण कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित बैंकों के साथ बातचीत जारी है और पुलिसकर्मियों को पहले की तरह या उससे बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी नए समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन विभागीय स्तर पर इस दिशा में काम जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के लिए सैलरी पैकेज केवल बैंकिंग सुविधा नहीं बल्कि सुरक्षा से जुड़ा विषय भी माना जाता है। विशेषकर दुर्घटना बीमा और मृत्यु बीमा जैसी सुविधाएं कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करती हैं। यही कारण है कि जैसे ही अनुबंध समाप्त होने की जानकारी सामने आई, विभाग के भीतर इस विषय पर चर्चा शुरू हो गई। कई कर्मचारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि वर्तमान में उनके खातों की स्थिति क्या है और कौन-कौन सी सुविधाएं अब प्रभावी नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी कर्मचारी को अपने वेतन खाते से जुड़ी शर्तों और सुविधाओं की नियमित जानकारी लेते रहना चाहिए। कई बार बैंक और संस्थान के बीच हुए समझौते समय सीमा पूरी होने पर स्वतः समाप्त हो जाते हैं, लेकिन कर्मचारियों तक इसकी जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाती। ऐसे में भविष्य में किसी लाभ के दावे को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी यह सूचना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पुलिस विभाग की सभी इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने स्तर पर कर्मचारियों को जागरूक करें और उन्हें यह स्पष्ट रूप से बताएं कि एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और केनरा बैंक के साथ हुए पुराने सैलरी पैकेज अनुबंध अब प्रभावी नहीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:42:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्वालियर में हैवानियत की हदें पार: 15 साल की छात्रा से गैंगरेप के बाद हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[प्यार के झांसे में फंसाकर भिंड से ग्वालियर लाया था प्रेमी, 50 हजार रुपये में सौदा करने का विरोध करने पर घोंटा गला; तीनों आरोपी गिरफ्तार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/gang-rape-and-murder-of-a-15-year-old-girl/article-54730"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-gangrape-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक 15 साल की नौवीं कक्षा की छात्रा के साथ उसके ही प्रेमी और उसके दो दोस्तों ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। दरिंदगी यहीं नहीं रुकी, जब नाबालिग ने अपनी अस्मत का सौदा होते देखा और विरोध किया, तो आरोपियों ने बेरहमी से उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद कानून की गिरफ्त से बचने और सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने मृतका के शव पर पेट्रोल छिड़ककर उसे पहाड़ी पर ही जला दिया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी समेत तीनों दरिंदों को गिरफ्तार कर लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पूरी खौफनाक वारदात भिंड और ग्वालियर जिले के बीच अंजाम दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भिंड जिले के मौ की रहने वाली 15 वर्षीय छात्रा का पिछले एक साल से रामू गुर्जर नाम के युवक से संपर्क था। दोनों की मुलाकात झांकरी स्कूल के पास हुई थी और छात्रा रामू पर अंधविश्वास करती थी। इसी प्यार के भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी रामू गुर्जर 28 मई को नाबालिग को बहला-फुसलाकर उसके घर से भगा ले गया। वह उसे बाइक पर बैठाकर करीब 61 किलोमीटर दूर ग्वालियर लेकर आया। ग्वालियर पहुंचने के बाद रामू ने अपने दो दोस्तों, अरुण कुशवाहा और गौरव कुशवाहा से संपर्क किया, जो जनकगंज थाना क्षेत्र में गुप्तेश्वर पहाड़ी के नीचे रहते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">योजना के मुताबिक, तीनों आरोपी छात्रा को लेकर सुनसान और करीब 500 फीट ऊंची गुप्तेश्वर पहाड़ी पर चले गए। पहाड़ी पर पहुंचकर सबसे पहले तीनों आरोपियों ने जमकर शराब पी। इसके बाद मुख्य आरोपी रामू ने छात्रा के साथ जबरन दुष्कर्म किया। इसी दौरान रामू की हैवानियत इस कदर बढ़ गई कि वह अपनी ही प्रेमिका को अपने दोस्त अरुण कुशवाहा को महज 50 हजार रुपये में बेचने का सौदा करने लगा। एक मासूम लड़की जिसे उम्मीद थी कि वह अपने प्यार के साथ सुरक्षित है, उसने जब खुद का सौदा होते सुना तो वह दंग रह गई। नाबालिग ने इस घिनौने सौदे का पूरी ताकत से विरोध किया और चीखने-चिल्लाने लगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध से बौखलाए आरोपियों ने पहले तो छात्रा के साथ मारपीट की, और फिर रामू के एक और साथी ने उसके साथ दरिंदगी की। पीड़िता लगातार रो रही थी और मदद की गुहार लगा रही थी, लेकिन सुनसान पहाड़ी पर उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। बदनामी और पकड़े जाने के डर से रात करीब 11:30 बजे आरोपियों ने छात्रा के ही दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद तीनों आरोपी रात के अंधेरे में वहां से भाग निकले। अगले दिन सुबह, पुलिस को गुमराह करने और अपराध का कोई सबूत न छोड़ने की नीयत से तीनों आरोपी दोबारा पहाड़ी पर पहुंचे और शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा तब हुआ जब मृतका के परिजनों ने भिंड के मौ थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जब मामले की तफ्तीश शुरू की और कॉल डिटेल्स खंगाली, तो रामू गुर्जर का नाम सामने आया। पुलिस ने संदेह के आधार पर रामू को हिरासत में लिया और जब उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया। उसने रोते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया और पूरी खौफनाक दास्तान पुलिस के सामने उगल दी। रामू के कबूलनामे के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसके दोनों साथियों अरुण और गौरव कुशवाहा को भी दबोच लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में डायल-112 में बैठे-बैठे पुलिसकर्मियों ने मंगवाई शराब, वीडियो हुआ वायरल, 2 सस्पेंड</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा में डायल-112 वाहन से शराब मंगाने का वीडियो वायरल होने के बाद SP ने आरक्षक और ड्राइवर को सस्पेंड कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/policemen-ordered-liquor-while-sitting-on-dial-112-in-rewa-video/article-54240"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rewa-dial-112-liquor-viral-video.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश के रीवा जिले में पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला एक मामला सामने आया है। गंगेव क्षेत्र में डायल-112 के एक वाहन से शराब मंगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया है। वीडियो में एक युवक शराब की दुकान से बीयर और शराब लेकर सीधे पुलिस वाहन के पास आता दिख रहा है। आरोप ये है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी जगह पर बैठे रहकर शराब मंगवा रहे थे। जब ये वीडियो सामने आया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इलाके में चर्चा का बाजार गर्म हो गया और लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि इस घटना के दौरान डायल-112 वाहन का सायरन भी बज रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक तेजी से दुकान से शराब लेकर आया और पुलिसकर्मियों को यह सौंप दिया। कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। अब लोग इस पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं और सवाल कर रहे हैं कि आपातकालीन सेवा के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन का ऐसा उपयोग कैसे किया जा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस मामले की जानकारी के बाद गुरुकरण सिंह ने तुरंत जांच के आदेश दिए। एसडीओपी स्तर पर जांच की गई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पहली नजर में दोनों कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद मंगलवार सुबह आरक्षक समर पटेल और वाहन चालक अनूप विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभागीय जांच अभी चल रही है और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संदीप मिश्रा ने बताया कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि डायल-112 जैसी सेवा जनता की सुरक्षा और आपात स्थिति के लिए होती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक मामले में गहन जांच हो रही है और अगर किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका भी सामने आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कई यूजर्स ने लिखा कि जनता की सुरक्षा के लिए बनाई गई व्यवस्था का इस तरह दुरुपयोग चिंता का विषय है। वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोगों ने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायरल वीडियो की जांच भी चल रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 15:47:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रीवा के नए एसपी बने गुरुकरण सिंह, बोले-  कानून-व्यवस्था पर रहेगा पूरा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के नए एसपी गुरुकरण सिंह ने पदभार संभाल लिया है। पूर्व एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने पुलिस बल की कमी और ट्रैफिक को बड़ी चुनौती बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/gurukaran-singh-became-the-new-sp-of-rewa-said/article-52782"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(72).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रीवा जिले को नया पुलिस अधीक्षक मिल गया है। 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी गुरुकरण सिंह ने बुधवार को रीवा के नए एसपी के रूप में पदभार संभाल लिया। रीवा एसपी का चार्ज लेने के बाद उन्होंने पूर्व पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह चौहान से मुलाकात की और जिले की कानून-व्यवस्था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लंबित मामलों और मौजूदा पुलिसिंग व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की। पदभार ग्रहण करते ही गुरुकरण सिंह ने साफ किया कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराध पर नियंत्रण और पुलिसिंग को और मजबूत करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने बताया कि रीवा उनके लिए नया नहीं है। वह करीब 11 साल पहले यहां प्रशिक्षु आईपीएस के तौर पर काम कर चुके हैं और थाना स्तर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे में जिले की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति से वह पहले से परिचित हैं। पुलिस मुख्यालय में दिनभर हलचल रही और अधिकारियों के बीच नए कप्तान को लेकर चर्चा भी होती रही।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गुरुकरण सिंह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और प्रशासनिक सख्ती के साथ फील्ड अनुभव रखने वाले अधिकारी माने जाते हैं। आमद के बाद उन्होंने साफ संकेत दिए कि अपराध नियंत्रण में किसी तरह की ढिलाई नहीं होगी। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने शुरुआती बातचीत में ही कानून-व्यवस्था की समीक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थानों की कार्यप्रणाली और संवेदनशील इलाकों की स्थिति को प्राथमिक तौर पर समझने की कोशिश की। उधर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रीवा से विदा ले रहे शैलेंद्र सिंह चौहान ने भी जिले की जमीनी चुनौतियों को खुलकर रखा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि रीवा संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद यहां पुलिस बल की कमी लगातार बड़ी समस्या बनी हुई है। उनका कहना था कि बढ़ती आबादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विस्तृत क्षेत्र और लगातार बढ़ते प्रशासनिक दबाव के बीच मौजूदा बल कई बार कम पड़ जाता है। ऐसे में नई भर्ती में आने वाले जवानों की तैनाती रीवा में की जाए तो हालात काफी बेहतर हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि यह मुद्दा लंबे समय से पुलिस विभाग के भीतर भी चर्चा का विषय रहा है।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शैलेंद्र सिंह चौहान ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को भी रीवा की स्थायी चुनौतियों में गिना। उनका कहना था कि सिर्फ पुलिस बल बढ़ाने से ही बात नहीं बनेगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहर में ट्रैफिक सुधार के लिए रोड इंजीनियरिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर प्लानिंग और बुनियादी ढांचे पर गंभीर काम करना होगा। उन्होंने माना कि शहर का विस्तार तेजी से हुआ है लेकिन ट्रैफिक प्रबंधन उसी रफ्तार से मजबूत नहीं हो पाया। देर शाम एसपी कार्यालय में विदाई से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपने कार्यकाल को टीम आधारित बताया। उन्होंने कहा कि कई अहम मामलों में पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई की और अपराध नियंत्रण में सकारात्मक नतीजे मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह काम अकेले संभव नहीं था। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की सराहना की और कहा कि टीम वर्क ही किसी भी जिले की पुलिस व्यवस्था की असली ताकत होती है। गौरतलब है कि शैलेंद्र सिंह चौहान का डीआईजी पद पर प्रमोशन हो चुका है और उनकी नई पदस्थापना भोपाल में हुई है। उनकी जगह अब गुरुकरण सिंह ने रीवा एसपी की जिम्मेदारी संभाल ली है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:50:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में ट्रैफिक सुधार अभियान तेज, जयस्तम्भ चैराहे पर खुद उतरे एसपी, नियम तोड़ने वालों पर लिया एक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए एसपी शैलेन्द्र सिंह चौहान जयस्तम्भ चौराहे पर उतरे। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई, शहर में अभियान तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/traffic-improvement-campaign-intensified-in-rewa-sp-himself-descended-on/article-52285"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-sp-traffic-action-jaistambh-chowk.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रीवा शहर में बिगड़ती यातायात व्यवस्था पर लगाम कसने के लिए पुलिस प्रशासन ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चैहान सुबह अचानक शहर के सबसे व्यस्त जयस्तम्भ चैराहे पर पहुंचे और मौके पर ट्रैफिक व्यवस्था की कमान संभाल ली। एसपी ने चैराहे पर खड़े होकर न केवल यातायात की स्थिति का जायजा लिया, बल्कि खुद ट्रैफिक को नियंत्रित कर पुलिसकर्मियों को मौके पर निर्देश भी दिए। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">एसपी चैहान ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में जयस्तम्भ चैराहे पर जाम नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि चैराहे की निगरानी केवल चालान तक सीमित न रहे, बल्कि यातायात को सुचारू बनाए रखना प्राथमिक जिम्मेदारी है। ट्रैफिक स्टाफ को वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित रखने, दबाव बढ़ने पर तुरंत डायवर्जन लागू करने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ मौके पर कार्रवाई करने को कहा गया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, शहर में बढ़ते जाम, गलत दिशा में वाहन संचालन और यातायात नियमों की अनदेखी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। एसपी की मौजूदगी के दौरान बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, नो-एंट्री उल्लंघन और रॉन्ग साइड चलने वाले वाहन चालकों पर निगरानी बढ़ाई गई। कई लोगों को मौके पर रोका गया, समझाइश दी गई और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई भी की गई।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">एसपी की अचानक मौजूदगी से कुछ देर के लिए चैराहे पर अफरा-तफरी की स्थिति बनी, लेकिन पुलिस की सक्रियता बढ़ते ही यातायात सामान्य होने लगा। पुलिस ने इस दौरान दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों की सघन जांच भी की। बिना हेलमेट वाहन चला रहे लोगों को रोका गया, सीट बेल्ट नहीं लगाने वालों को चेतावनी दी गई, जबकि कई मामलों में चालान भी बनाए गए। नो-एंट्री में घुसने वाले वाहनों पर विशेष निगरानी रखी गई। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">एसपी शैलेन्द्र सिंह चैहान ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि बेहतर रीवा ट्रैफिक व्यवस्था केवल पुलिस की सख्ती से संभव नहीं है, इसके लिए आम लोगों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने वाहन चालकों से हेलमेट, सीट बेल्ट और निर्धारित लेन का पालन करने की अपील की।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले दिनों में शहर के अन्य प्रमुख चैराहों और बाजार क्षेत्रों में भी इसी तरह का विशेष ट्रैफिक अभियान चलाया जाएगा। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई एक दिन की औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि लगातार निगरानी और प्रवर्तन के जरिए शहर में यातायात अनुशासन लागू कराया जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:35:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ग्वालियर टोल प्लाजा फायरिंग केस में दो छात्र गिरफ्तार, पुराने विवाद में की वारदात</title>
                                    <description><![CDATA[सीसीटीवी और बाइक नंबर प्लेट से 48 घंटे में खुलासा; गुमराह करने को हाईवे निर्माण का जिक्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/two-students-arrested-in-gwalior-toll-plaza-firing-case-incident/article-47206"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh---2026-02-26t112138.507.jpg" alt=""></a><br /><p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">ग्वालियर</span></span> में ग्वालियर-भिंड मार्ग स्थित <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">बरैठा टोल प्लाजा</span></span> पर हुई फायरिंग की घटना का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। मामले में दो छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने पूछताछ में एक साल पुराने विवाद का बदला लेने के लिए गोलीबारी करने की बात स्वीकार की है।</p>
<p>पुलिस के अनुसार आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय अश्वनी भदौरिया और 19 वर्षीय निखिल चौहान के रूप में हुई है। दोनों ग्वालियर में रहकर स्नातक की पढ़ाई कर रहे थे। घटना सोमवार शाम उस समय हुई, जब बाइक सवार दो युवक टोल प्लाजा पहुंचे और बूथ के पास पहुंचकर कई राउंड फायर किए। गोलीबारी में किसी व्यक्ति को चोट नहीं लगी, लेकिन कंप्यूटर सिस्टम और बूथ क्षतिग्रस्त हो गए।</p>
<p>जांच में सामने आया कि अश्वनी का लगभग एक वर्ष पहले टोल कर्मचारियों से विवाद हुआ था। उसी रंजिश के चलते उसने वारदात की योजना बनाई। पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने टोल कर्मचारी को एक हस्तलिखित चिट्ठी दी, जिसमें हाईवे निर्माण की मांग का जिक्र था। अधिकारियों का कहना है कि यह भटकाने की सोची-समझी कोशिश थी, ताकि घटना को किसी आंदोलन से जोड़ा जा सके।</p>
<p>घटना के बाद पुलिस ने क्षेत्र के 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। भागते समय आरोपियों के चेहरे ढंके होने के बावजूद बाइक की नंबर प्लेट से उनकी पहचान हो गई। दोनों को मुरार क्षेत्र के एक होटल से गिरफ्तार किया गया। तलाशी में वारदात में इस्तेमाल पिस्टल, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुई।</p>
<p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मध्य प्रदेश पुलिस</span></span> के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह घटना व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम है, न कि किसी संगठित आपराधिक गिरोह से जुड़ी साजिश।</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 11:52:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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