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                <title>Global Security - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ईरान का कुवैत–बहरीन में 8 अमेरिकी ठिकानों पर हमला, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[खामेनेई का अमेरिका-इजराइल पर तीखा बयान, हर हमले का जवाब देने की चेतावनी, पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/irans-attack-on-8-american-bases-in-kuwait-bahrain-increases-tension/article-57260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-attack-kuwait-bahrain-us-bases.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े तनाव की चपेट में आता दिख रहा है। रविवार को ईरान की ओर से दावा किया गया कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की तरफ से ईरान के ठिकानों पर की गई “दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई” के जवाब में की गई है। हालांकि अभी तक अमेरिका या कुवैत और बहरीन की सरकारों की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जरूर बढ़ा दिया गया है। इन हमलों के बाद कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सैन्य गतिविधियों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने भी हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद कुछ इलाकों में हलचल और दहशत जैसा माहौल देखने को मिला, हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि मामला तेजी से बढ़ते टकराव की ओर इशारा कर रहा है।</p>
<p>ईरान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह हमला एक जवाबी कार्रवाई थी और इसका मकसद अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का प्रतिकार करना था। ईरानी सेना ने दावा किया कि यह ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसमें रणनीतिक ठिकानों को टारगेट किया गया। ईरान का यह भी कहना है कि अगर आगे भी उसकी सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला हुआ तो वह और सख्त जवाब देगा। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है और कूटनीतिक स्तर पर चिंता जताई जा रही है। इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने हालिया हमलों को लेकर जिस तरह सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं और उन पर गर्व जताया है, वह अपने आप में अपराध स्वीकार करने जैसा है। खामेनेई ने कहा कि ईरान पर हुए हर हमले, हर मौत और हर नुकसान का हिसाब लिया जाएगा और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनका यह बयान काफी आक्रामक माना जा रहा है और इसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। खामेनेई पहले भी अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन इस बार उनका बयान ज्यादा तीखा और सीधा माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि वह पहले हुए एक कथित अमेरिका-इजराइल हमले में घायल हुए थे, जिसके बाद से वे किसी सुरक्षित और गुप्त स्थान पर रह रहे हैं। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईरान के अंदर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक स्थिति पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्र में मौजूद सभी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। कुवैत और बहरीन में भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पश्चिम एशिया में पहले से ही कई तरह के तनाव मौजूद हैं और ऐसे में यह नया घटनाक्रम स्थिति को और जटिल बना सकता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच इस तरह के हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला बढ़ता रहा तो यह एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। पहले से ही इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष और ईरान-अमेरिका तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रखा है। ऐसे में यह नया टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी असर डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:33:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश, पायलट सुरक्षित; ईरान-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री सुरक्षा मिशन के दौरान हुआ हादसा, अमेरिकी सेना ने शुरू की जांच; मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच घटना ने खींचा दुनिया का ध्यान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-apache-helicopter-crashes-near-the-strait-of-hormuz-pilot/article-55453"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-helicopter-crash.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका का एक अपाचे हेलिकॉप्टर होर्मुज स्ट्रेट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना सोमवार की बताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हेलिकॉप्टर क्रैश होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें किसी तरह की गंभीर चोट नहीं आई है। हालांकि दुर्घटना के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर समुद्री सुरक्षा अभियान में शामिल था और नियमित ऑपरेशन के दौरान हादसे का शिकार हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ा चुका है। अपाचे हेलिकॉप्टरों के अलावा MQ-9 रीपर ड्रोन, F/A-18 और F-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी लगातार निगरानी और सुरक्षा मिशन में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि अपाचे हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल खासतौर पर छोटी हथियारबंद नौकाओं और ड्रोन खतरों को रोकने के लिए किया जाता है। ऐसे में इस हेलिकॉप्टर का दुर्घटनाग्रस्त होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण गिरा या फिर किसी बाहरी हमले का शिकार हुआ। हालांकि अभी तक किसी हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य इकाइयों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच ईरान और इजराइल के बीच फिर से बढ़े तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। करीब दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद हालात कुछ सामान्य होते दिखाई दे रहे थे, लेकिन पिछले 24 घंटों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इजराइल की ओर करीब 30 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके जवाब में इजराइली सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तनाव बढ़ने के बाद भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है। भारतीय दूतावास ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं और सुरक्षा स्थिति को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर यमन के हूती विद्रोहियों ने भी हालात को और जटिल बना दिया है। हूती समूह ने रेड सी में इजराइल से जुड़े जहाजों की नाकाबंदी का ऐलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इजराइल से जुड़े किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। इस घोषणा के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने रूट्स की समीक्षा कर रही हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। तेल बाजार पर भी इस तनाव का सीधा असर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों के दाम ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।  यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेदों की खबरें भी चर्चा में हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने नेतन्याहू से ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई से बचने को कहा है। हालांकि दोनों देशों की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ट्रम्प ने इतना जरूर कहा कि भविष्य में ईरान के साथ जो भी समझौता होगा, उसमें सभी पक्षों को सहयोग करना होगा। अमेरिकी हेलिकॉप्टर हादसे और ईरान-इजराइल तनाव ने पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत के परमाणु हथियार बढ़े, SIPRI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[SIPRI रिपोर्ट 2026 में दावा, भारत ने पहली बार 12 हथियार तैनात किए, वैश्विक परमाणु रेस तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/indias-nuclear-weapons-increased-big-revelation-in-sipri-report/article-55368"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-nuclear-weapons.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">2026 की शुरुआत में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को लेकर सामने आई ताज़ा रिपोर्ट ने एक बार फिर परमाणु शक्ति संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">SIPRI</span></span> की नई इयरबुक में दावा किया गया है कि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारत</span></span> ने पहली बार अपने परमाणु हथियारों में से 12 को ऑपरेशनल यानी मोर्चे पर तैनात किया है। यह वही हथियार हैं जिन्हें अब तक सिर्फ स्टॉक या भंडारण में रखा जाता था। रिपोर्ट के मुताबिक भारत का कुल परमाणु भंडार भी बढ़कर 180 से 190 तक पहुंच गया है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि देश अब अपनी रणनीतिक क्षमता को एक नए स्तर पर ले जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बदलाव अचानक नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से चल रही रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की तुलना में 2026 में पहली बार वास्तविक तैनाती देखी गई है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को बदल सकती है। दूसरी ओर <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पाकिस्तान</span></span> के पास लगभग 170 परमाणु हथियार बताए गए हैं, हालांकि उनमें से कितने तैनात हैं, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। वैश्विक स्तर पर कुल 9 देशों के पास 12,187 परमाणु हथियार मौजूद हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अभी भी हाई अलर्ट स्थिति में रखी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया एक नए परमाणु प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां बड़े देश अपने हथियारों को न सिर्फ बढ़ा रहे हैं बल्कि उन्हें आधुनिक भी बना रहे हैं। अमेरिका, रूस और चीन जैसी शक्तियां लगातार अपने डिलीवरी सिस्टम और मिसाइल टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर रही हैं। चीन का भंडार भी अब 600 से 620 हथियारों तक पहुंच चुका है, जिससे एशिया में शक्ति संतुलन और अधिक जटिल होता जा रहा है। इसी बीच भारत भी अपनी रणनीति को दो मोर्चों—पाकिस्तान और चीन—को ध्यान में रखकर आगे बढ़ा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का रक्षा खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है और रिपोर्ट के अनुसार यह 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। इसके साथ ही भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक भी बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खर्च केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक, मिसाइल सिस्टम और परमाणु क्षमता के विस्तार की रणनीति भी शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत अब मल्टीपल इंडिपेंडेन्टली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">MIRV technology</span></span> जैसी तकनीकों पर तेजी से काम कर रहा है। इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है। साथ ही समुद्री क्षेत्र में भारत की ताकत भी बढ़ रही है, जहां परमाणु पनडुब्बियां जैसे <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">INS Arihant</span></span> और INS अरिघात देश की सेकेंड स्ट्राइक क्षमता का मजबूत आधार बन रही हैं। SIPRI का अनुमान है कि अब भारत सीमित संख्या में समुद्री प्लेटफॉर्म पर भी हथियार तैनात करने लगा है, जिससे किसी भी संभावित हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मई 2025 के दौरान भारत-पाकिस्तान तनाव का भी जिक्र किया गया है, जिसे बाद में दोनों देशों ने नियंत्रित कर लिया था। इसी अवधि में साइबर और डिजिटल ऑपरेशन्स का भी उपयोग हुआ, जिसे एक नए प्रकार का सैन्य प्रयोग माना जा रहा है। इसी संदर्भ में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Operation Sindoor</span></span> का उल्लेख भी किया गया है, जिसने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को सामने रखा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:13:42 +0530</pubDate>
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                <title>माली में भीषण हिंसा: रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की कार बम धमाके में मौत, समन्वित आतंकी हमलों से देश में आपात हालात</title>
                                    <description><![CDATA[बमाको और आसपास के इलाकों में JNIM और FLA के समन्वित हमलों से 16 लोग घायल, सुरक्षा संकट गहराया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/69ef1d742e427/article-52210"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mali-crisis,-sadiao-camara-death.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिमी अफ्रीकी देश माली एक बार फिर बड़े सुरक्षा संकट की चपेट में है।  रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की शनिवार को हुए एक कार बम विस्फोट में मौत हो गई। इस हमले में उनकी पत्नी और दो पोते-पोतियों के भी मारे जाने का दावा किया गया है। घटना के बाद देश की राजधानी बमाको समेत कई इलाकों में तनाव फैल गया और प्रशासन ने कड़े सुरक्षा कदम उठाए हैं।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, यह हमला राजधानी बमाको से करीब किता क्षेत्र में हुआ, जहां जुंटा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी रहती है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास का इलाका दहल उठा। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह हमला एक समन्वित अभियान का हिस्सा था, जिसमें अल-कायदा से जुड़े संगठन जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन (JNIM) और तुआरेग अलगाववादी समूह फ्रंट ऑफ लिबरेशन ऑफ आजावाद (FLA) के शामिल होने का आरोप है।</p>
<p>हमलों की श्रृंखला केवल किता तक सीमित नहीं रही। बमाको, काटी, सेवरे, किडाल और गाओ जैसे शहरों में भी गोलीबारी और धमाकों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं में कम से कम 16 लोग घायल हुए हैं, जिनमें आम नागरिक और सुरक्षा बलों के जवान शामिल बताए जा रहे हैं।</p>
<p>हमलों के बाद राजधानी बमाको में प्रशासन ने रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक तीन दिन का कर्फ्यू लागू कर दिया है। संवेदनशील इलाकों, एयरपोर्ट और सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। कई सड़कों को बंद कर दिया गया है और नागरिकों से घरों में रहने की अपील की गई है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और माली के नागरिकों के प्रति एकजुटता व्यक्त की है। बताया जा रहा है,यह हमला देश में लंबे समय से जारी विद्रोह और जिहादी गतिविधियों के बीच बढ़ती अस्थिरता का संकेत है।</p>
<p>FLA की ओर से जारी बयान में JNIM के साथ मिलकर कार्रवाई की पुष्टि करने का दावा किया गया है, हालांकि माली सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सरकार का कहना है कि सेना ने कई हमलावरों को मार गिराया है और स्थिति को नियंत्रण में लेने के प्रयास जारी हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:43:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सऊदी दौरे पर NSA अजीत डोभाल,  विदेश मंत्री से करेंगे ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अहम बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[NSA अजीत डोभाल के रियाद दौरे में भारत-सऊदी संबंध, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर अहम बातचीत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nsa-ajit-doval-will-hold-important-talks-with-the-foreign/article-51643"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ajit-doval-saudi-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 19 अप्रैल को सऊदी अरब की राजधानी रियाद का आधिकारिक दौरा किया, जहां उन्होंने सऊदी नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे तेजी से बदल रहे हैं, जिससे भारत और सऊदी अरब के बीच समन्वय और भी अहम हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रियाद स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक, डोभाल ने सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अज़ीज़ बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मूसाएद बिन मोहम्मद अल-ऐबान से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक साझेदारी पर फोकस</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इन बैठकों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय स्थिरता पर विचार साझा किए। अधिकारियों के अनुसार, भारत और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में इसे और व्यापक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी संदर्भ में इस दौरे को अहम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इससे पहले अजीत डोभाल ने 17 अप्रैल को यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव से मुलाकात की थी। यह बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में हुई, जिसमें सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संदर्भ में चर्चा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों पर विचार हुआ। भारत ने एक बार फिर शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और पूर्वी यूरोप की स्थिति पर निरंतर संपर्क पर सहमति बनी। भारत ने स्पष्ट किया कि वह संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान चाहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि में देखें तो रूस-यूक्रेन युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ा है। ऐसे में भारत की यह सक्रिय कूटनीति संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस दौरे का प्रभाव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले समय में भारत और सऊदी अरब के बीच उच्चस्तरीय संवाद और तेज होने की संभावना है। साथ ही, वैश्विक संकटों के बीच भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय भूमिका पर भी नजर बनी रहेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:54:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान-इजराइल युद्ध का 12वां दिन: 140 अमेरिकी सैनिक घायल, 7 की मौत; ईरान में 8000 घर तबाह</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष तेज, मिसाइल हमलों और बमबारी से हजारों नागरिक प्रभावित; वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने के संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/12th-day-of-iran-israel-war-140-american-soldiers-injured-7/article-47897"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mp---2026-03-11t102200.515.jpg" alt=""></a><br /><p>मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया। संघर्ष में अब तक 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जबकि 7 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। दूसरी ओर ईरान का दावा है कि देश में हुए हमलों से लगभग 8000 घरों को नुकसान पहुंचा है और 1300 से अधिक लोगों की जान गई है। लगातार हो रहे मिसाइल हमलों और सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।</p>
<hr />
<h5><strong>ईरान का दावा—सिविलियन इलाकों को बनाया निशाना</strong></h5>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि हालिया हमलों में करीब 9600 नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में आवासीय इलाके, बाजार, अस्पताल, दवा केंद्र और स्कूल भी प्रभावित हुए हैं। ईरान का आरोप है कि हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं।</p>
<p>ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई में इजराइल के कई प्रमुख शहरों पर मिसाइल हमले किए। ईरानी सैन्य बलों के मुताबिक हाइफा, यरुशलम और तेल अवीव जैसे शहरों को निशाना बनाया गया।</p>
<hr />
<h5><strong>इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई</strong></h5>
<p>इजराइली रक्षा बलों ने मंगलवार रात ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में तेहरान और तबरीज के सैन्य कमांड सेंटर, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च से जुड़े ठिकाने और सुरक्षा इकाइयों को निशाना बनाया गया।</p>
<p>इसके अलावा लेबनान की राजधानी बेरुत में ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी बमबारी की गई। अमेरिकी सैन्य बलों ने फारस की खाड़ी में एक ईरानी जहाज पर हमला करने की भी पुष्टि की है।</p>
<hr />
<h5><strong>वैश्विक असर: ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव</strong></h5>
<p>जंग का असर अब दुनिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है। तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने से एशिया के कई देशों में ऊर्जा संकट की स्थिति बन रही है।</p>
<p>थाईलैंड सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों में लिफ्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है और कर्मचारियों को सीढ़ियों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पाकिस्तान में सरकारी खर्च घटाने के लिए मंत्रियों की विदेश यात्राओं और कई खर्चों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।</p>
<hr />
<h5><strong>युद्ध पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता</strong></h5>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत कर संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील की है। कई देशों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p>---------------------------</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 10:41:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगानिस्तान–पाकिस्तान सीमा पर टकराव तेज, दोनों देशों के दावों में बड़ा अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[सीमा पार हमले और जवाबी एयरस्ट्राइक के बाद तनाव चरम पर; क्षेत्रीय स्थिरता पर असर की आशंका, ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/conflict-intensifies-on-afghanistan-pakistan-border-big-difference-in-claims-of/article-47296"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh---2026-02-27t113242.759.jpg" alt=""></a><br /><p>अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा क्षेत्र में सैन्य टकराव के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। अफगान पक्ष ने दावा किया कि उसके हमले में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में 133 तालिबान लड़ाकों के मारे जाने की बात कही है। घटनाक्रम गुरुवार देर रात शुरू हुआ और शुक्रवार तक कई सीमावर्ती इलाकों में तनाव बना रहा। </p>
<p>पाकिस्तानी सरकार के अनुसार, अफगान क्षेत्र से हमले के बाद उसने ‘गजब लिल हक’ नामक सैन्य अभियान चलाया। पाकिस्तान वायुसेना ने काबुल और नंगरहार समेत कई स्थानों पर एयरस्ट्राइक की। वहीं अफगान प्रशासन का कहना है कि पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों और चौकियों को निशाना बनाया गया। दोनों देशों ने अलग-अलग सैन्य सफलता के दावे किए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p>यह टकराव 22 फरवरी को अफगान क्षेत्र में हुई पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद बढ़ा। पाकिस्तान ने उन हमलों को आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई बताया था, जबकि अफगान पक्ष ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया। सीमा विवाद और आतंकवाद के आरोपों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। रक्षा मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">ख्वाजा आसिफ</span></span> ने हालात को “खुला युद्ध” जैसी स्थिति बताया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p>सीमावर्ती प्रांतों में संघर्ष के बीच नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कई इलाकों में विस्थापन और आपात सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी सीमा के भीतर हाल के आतंकी हमलों के पीछे अफगान भूमि का इस्तेमाल हुआ, जबकि अफगान प्रशासन इन आरोपों से इनकार करता रहा है।</p>
<p>इस बीच, ईरान ने दोनों देशों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता और व्यापारिक मार्गों पर पड़ सकता है। यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा नीति से जुड़े पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में भी देखा जा रहा है।</p>
<p>आगे की स्थिति पर नजर रखते हुए दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों और राजनयिक संपर्कों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हैं। फिलहाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उच्च स्तरीय वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। </p>
<p>-----------------------------</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:37:07 +0530</pubDate>
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