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                <title>Breaking International News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Breaking International News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरान–अमेरिका तनाव चरम पर, समझौते पर अनिश्चितता कायम</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है, वहीं ट्रंप ने हमले रोकने और बातचीत आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/uncertainty-remains-over-agreement-as-iran-us-tensions-peak/article-55691"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-tensions-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से साफ कहा गया है कि अभी तक अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई और बातचीत दोनों को लेकर लगातार बदलते संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ उन्होंने नए हमलों को रोकने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर पहले दिए गए कड़े बयानों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार (11 जून 2026) को राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ बातचीत अब “उच्चतम नेतृत्व स्तर” तक पहुंच चुकी है और इसे आगे बढ़ाने के संकेत मिले हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी वजह से उन्होंने  नए सैन्य हमलों को रोकने का निर्णय लिया है। ट्रंप के अनुसार यह कदम बातचीत को अवसर देने के लिए उठाया गया है। हालांकि इससे कुछ ही घंटे पहले उन्होंने ईरान पर “बहुत बड़े हमले” करने की चेतावनी दी थी, जिससे स्थिति और अधिक अस्थिर हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले दिए गए एक बयान में ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका आने वाले समय में ईरान के खर्ग आइलैंड और अन्य तेल संसाधनों पर नियंत्रण की रणनीति अपना सकता है। इस तरह के बयानों ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विरोधाभासी संकेत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अनिश्चितता को बढ़ाते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। ओमान के पास एक और जहाज MV Jalveer पर हमले की जानकारी सामने आई है। यह घटना पिछले कुछ दिनों में हुई तीसरी ऐसी बड़ी घटना बताई जा रही है। इससे पहले टैंकर Settebello पर भी हमला हुआ था। लगातार हो रहे इन हमलों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">MV Jalveer को लेकर बताया गया है कि यह गिनी-बिसाऊ ध्वज वाला एक एस्फाल्ट टैंकर है, जो सामान्य व्यापारिक मार्ग पर था जब उस पर हमला हुआ। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। इन घटनाओं की वजह से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान एक दुखद घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि की गई है। यह घटना कथित रूप से एक टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले से जुड़ी बताई जा रही है। भारत सरकार ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत ने अमेरिकी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को तलब कर इस घटना पर स्पष्ट जवाब मांगा है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। समुद्री मार्गों पर नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ हैं। इस पूरे मामले पर विस्तृत जांच की मांग की गई है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की स्थिति पर नजर डालें तो वहां की सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। ईरानी नेतृत्व के अनुसार, बातचीत जारी है लेकिन यह अभी शुरुआती या मध्य स्तर पर है। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते में उसके राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इस बयान ने उन सभी अटकलों को विराम दिया है जिनमें जल्द किसी बड़े समझौते की संभावना जताई जा रही थी। मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील है। एक ओर कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां और समुद्री हमले स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। तेल और गैस आपूर्ति मार्गों पर खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं पहले से ही दबाव में हैं और ऐसे में यह संकट और गहरा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 11:14:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजरायल की हिट लिस्ट से ईरान के विदेश मंत्री अराघची और गालिबाफ बाहर, रिपोर्ट में खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाग़ेर ग़ालिबाफ़ को हिट लिस्ट से हटा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/foreign-minister-araghchi-and-ghalibaf-out-of-israels-hit-list/article-49149"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/israel-iran-war-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Israel Iran War:</strong> मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल सामने आई है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाग़ेर ग़ालिबाफ़ को अपनी टारगेट लिस्ट से अस्थायी तौर पर हटा दिया है। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में संभावित बातचीत की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका के जरिए कूटनीतिक पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रिपोर्ट के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह फैसला सीधे तौर पर किसी एक देश के दबाव का परिणाम नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि व्यापक कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है। बताया गया है कि अमेरिका के जरिए यह संदेश इजरायल तक पहुंचाया गया कि यदि इन प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया गया तो बातचीत की संभावनाएं खत्म हो सकती हैं। इसी वजह से फिलहाल इन दोनों नेताओं को निशाने से दूर रखने का निर्णय लिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीमित अवधि के लिए राहत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार यह राहत स्थायी नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि केवल कुछ दिनों के लिए दी गई है। बताया जा रहा है कि चार से पांच दिनों की इस अवधि में अमेरिका ईरान के साथ बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। अराघची को परमाणु वार्ताओं का अनुभवी चेहरा माना जाता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि ग़ालिबाफ़ को भी संभावित संवाद के लिए महत्वपूर्ण कड़ी समझा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जंग के बीच नेतृत्व पर हमले</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी सामने आया है कि मौजूदा संघर्ष के दौरान इजरायल ने ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया है। नेतृत्व स्तर पर हुए इन हमलों ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी यह संकेत दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर ऐसे कदम आगे भी उठाए जा सकते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि फिलहाल कूटनीति को मौका देने की कोशिश की जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यस्थ देशों की भूमिका</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तुर्की</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिस्र और पाकिस्तान जैसे देश इस समय अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बहाल करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इन देशों का मानना है कि यदि बातचीत की प्रक्रिया शुरू होती है तो क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम किया जा सकता है। यही कारण है कि प्रमुख नेताओं को अस्थायी राहत देने को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 18:48:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, फ्यूल टैंक में लगी आग; मिडिल ईस्ट में युद्ध और भड़का</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजराइल तनाव के बीच कुवैत भी निशाने पर; इराकी समूह का दावा—24 घंटे में अमेरिका के 23 ठिकानों पर हमले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/drone-attack-on-kuwait-airport-fire-in-fuel-tank-war/article-48984"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/international-(44).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार रात कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे एयरपोर्ट परिसर में स्थित एक फ्यूल टैंक में आग लग गई। कुवैत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि तत्काल आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किए गए और आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं।</p>
<p>हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इस हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। नेशनल गार्ड के अनुसार, पांच ड्रोन मार गिराए गए हैं।</p>
<p>इस बीच, इराक के उग्रवादी संगठन “इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक” ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है।</p>
<p>मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लेबनान से हिजबुल्लाह द्वारा इजराइल पर रॉकेट हमले किए गए, जबकि गाजा में भी हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति “एस्केलेशन ट्रैप” की ओर बढ़ रही है, जिसमें छोटे हमले बड़े युद्ध में बदल सकते हैं।</p>
<p>ईरान में अब तक 1,500 से अधिक लोगों की मौत और 18 हजार से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। मृतकों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है, वहीं वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के कारण तेल और गैस सप्लाई बाधित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो इसके आर्थिक और रणनीतिक परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p>फिलहाल, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और हालात लगातार बदल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब संभावित कूटनीतिक समाधान पर टिकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:20:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगानिस्तान–पाकिस्तान सीमा पर टकराव तेज, दोनों देशों के दावों में बड़ा अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[सीमा पार हमले और जवाबी एयरस्ट्राइक के बाद तनाव चरम पर; क्षेत्रीय स्थिरता पर असर की आशंका, ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/conflict-intensifies-on-afghanistan-pakistan-border-big-difference-in-claims-of/article-47296"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh---2026-02-27t113242.759.jpg" alt=""></a><br /><p>अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा क्षेत्र में सैन्य टकराव के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। अफगान पक्ष ने दावा किया कि उसके हमले में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में 133 तालिबान लड़ाकों के मारे जाने की बात कही है। घटनाक्रम गुरुवार देर रात शुरू हुआ और शुक्रवार तक कई सीमावर्ती इलाकों में तनाव बना रहा। </p>
<p>पाकिस्तानी सरकार के अनुसार, अफगान क्षेत्र से हमले के बाद उसने ‘गजब लिल हक’ नामक सैन्य अभियान चलाया। पाकिस्तान वायुसेना ने काबुल और नंगरहार समेत कई स्थानों पर एयरस्ट्राइक की। वहीं अफगान प्रशासन का कहना है कि पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों और चौकियों को निशाना बनाया गया। दोनों देशों ने अलग-अलग सैन्य सफलता के दावे किए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p>यह टकराव 22 फरवरी को अफगान क्षेत्र में हुई पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद बढ़ा। पाकिस्तान ने उन हमलों को आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई बताया था, जबकि अफगान पक्ष ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया। सीमा विवाद और आतंकवाद के आरोपों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। रक्षा मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">ख्वाजा आसिफ</span></span> ने हालात को “खुला युद्ध” जैसी स्थिति बताया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p>सीमावर्ती प्रांतों में संघर्ष के बीच नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कई इलाकों में विस्थापन और आपात सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी सीमा के भीतर हाल के आतंकी हमलों के पीछे अफगान भूमि का इस्तेमाल हुआ, जबकि अफगान प्रशासन इन आरोपों से इनकार करता रहा है।</p>
<p>इस बीच, ईरान ने दोनों देशों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता और व्यापारिक मार्गों पर पड़ सकता है। यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा नीति से जुड़े पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में भी देखा जा रहा है।</p>
<p>आगे की स्थिति पर नजर रखते हुए दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों और राजनयिक संपर्कों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हैं। फिलहाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उच्च स्तरीय वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। </p>
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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:37:07 +0530</pubDate>
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