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                <title>Indian Air Force - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Indian Air Force RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर होगा अमर सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सेना और वायुसेना के छह जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से जारी, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के 'त्याग चक्र' में होंगे दर्ज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/for-the-first-time-the-names-of-six-martyrs-of/article-57015"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/operation-sindoor-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैन्य कर्मियों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए गए हैं। केंद्र सरकार ने उन जवानों की सूची जारी की है, जिन्होंने मई 2025 में चलाए गए इस सैन्य अभियान के दौरान ड्यूटी निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। इन सभी वीर सैनिकों के नाम अब नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के 'त्याग चक्र' पर हमेशा के लिए अंकित किए जाएंगे। इसे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े शहीदों को पहली औपचारिक राष्ट्रीय श्रद्धांजलि माना जा रहा है। सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार शहीद होने वालों में भारतीय सेना के सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मुरली नाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह तथा भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं। इन छह सैन्यकर्मियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके नाम अब उन हजारों वीर सैनिकों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिनकी स्मृति राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए सुरक्षित रखी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का 'त्याग चक्र' स्वतंत्रता के बाद देश के लिए शहीद हुए सैनिकों को समर्पित है। यहां ग्रेनाइट की गोलाकार दीवारों पर प्रत्येक शहीद सैनिक का नाम, रैंक और यूनिट अंकित की जाती है। ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए इन छह जवानों के नाम भी अब इसी स्मारक का स्थायी हिस्सा बनेंगे। इससे पहले सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन सैन्य कर्मियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत ने इस हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर सटीक सैन्य कार्रवाई की थी। सरकार ने उस समय स्पष्ट किया था कि अभियान का उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था, किसी नागरिक या सैन्य ठिकाने पर हमला करना नहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी सैन्य गतिविधियां शुरू हुईं। सीमा पर भारी गोलाबारी, ड्रोन हमले और हवाई गतिविधियों के बीच दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। लगभग चार दिनों तक चले इस सैन्य संघर्ष के दौरान सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय रहीं। बाद में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी और 10 मई को संघर्ष विराम लागू हुआ। 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। 'सिंदूर' भारतीय परंपरा में विवाहित महिलाओं का प्रतीक माना जाता है। इस अभियान का नाम उन परिवारों की पीड़ा और बलिदान का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपने प्रियजनों को खोया था। रक्षा मंत्रालय ने भी इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की सटीक, संयमित और दृढ़ सैन्य प्रतिक्रिया बताया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह सैनिकों के नाम दर्ज होना केवल सम्मान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक भी है। हर वर्ष हजारों लोग इस स्मारक पर पहुंचकर देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं। अब ऑपरेशन सिंदूर के इन शहीदों का नाम भी उसी गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहेगा। हाल ही में सरकार ने वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न सैन्य अभियानों में शहीद हुए सभी सैनिकों की सूची भी जारी की, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के इन छह वीरों के नाम शामिल हैं। इस कदम को सैन्य इतिहास के दस्तावेजीकरण और शहीदों के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेना और वायुसेना के इन जवानों का बलिदान देश की सुरक्षा के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण की मिसाल के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:36:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>असम के जोरहाट एयरबेस पर AN-32 विमान हादसे का शिकार, जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा, वायुसेना ने गठित की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी; नुकसान और हताहतों की जानकारी का इंतजार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/investigation-ordered-into-the-victim-of-an-32-plane-crash-at/article-55823"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/an-32-crash.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना के एयरबेस पर शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के तुरंत बाद पूरे एयरबेस को सील कर दिया गया और बचाव व राहत कार्य शुरू कर दिए गए। भारतीय वायुसेना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के गठन का आदेश दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसे में कोई जनहानि हुई है या नहीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान AN-32 भारतीय वायुसेना की 43 स्क्वाड्रन का हिस्सा था और वह कार्गो लेकर उड़ान भर रहा था। हादसा उस समय हुआ जब विमान जोरहाट के रोरिया क्षेत्र स्थित वायुसेना स्टेशन पर उतरने की प्रक्रिया में था। लैंडिंग के दौरान अचानक कुछ गड़बड़ी हुई और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के बाद एयरबेस परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत सक्रिय किया गया। भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि AN-32 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की जा रही है। जांच का उद्देश्य हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम सुझाना होगा। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं और स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के समय एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। इसके कुछ ही क्षण बाद दुर्घटनास्थल के आसपास धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने लगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि एयरबेस की दिशा से उठते धुएं को दूर से भी देखा जा सकता था। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां और एंबुलेंस मौके की ओर रवाना हुईं। वायुसेना की अग्निशमन टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और आग को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल एम. रावत ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि AN-32 विमान लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। हालांकि देर शाम तक किसी आधिकारिक बयान में यह नहीं बताया गया कि विमान में मौजूद चालक दल या अन्य कर्मियों की स्थिति क्या है। यही वजह है कि पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्घटना के बाद एयरबेस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पूरे स्टेशन को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जांच पूरी होने तक हादसे से जुड़ी जानकारी नियंत्रित तरीके से ही साझा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब कुछ महीने पहले ही असम में भारतीय वायुसेना का एक सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। मार्च में हुए उस हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई थी। वह विमान भी जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन से नियमित उड़ान पर रवाना हुआ था और बाद में संपर्क टूटने के बाद करबी आंगलोंग जिले के पहाड़ी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। लगातार दूसरी बड़ी घटना ने वायुसेना के विमानों की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी को लेकर चर्चा तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">AN-32 विमान भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सोवियत संघ में विकसित इस विमान को विशेष रूप से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया था। यह विमान ऊंचाई वाले इलाकों, गर्म मौसम और सीमित रनवे वाली जगहों पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। भारतीय वायुसेना लंबे समय से इस विमान का उपयोग सैनिकों की आवाजाही, रसद आपूर्ति और दूरदराज के क्षेत्रों तक सामग्री पहुंचाने के लिए करती रही है। तकनीकी रूप से AN-32 लगभग 7.5 टन तक का कार्गो ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा इसमें करीब 50 यात्रियों या 42 पैराट्रूपर्स को भी ले जाया जा सकता है। यही कारण है कि यह विमान भारतीय सैन्य अभियानों और राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि या किसी अन्य कारण से हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 14:11:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>DRDO का TARA ग्लाइड वेपन सिस्टम टेस्ट हुआ सफल, भारत की रक्षा क्षमता बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[DRDO ने TARA ग्लाइड वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण किया। यह स्वदेशी तकनीक बमों को सटीक हथियार में बदलकर भारत की रक्षा क्षमता बढ़ाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/drdos-tara-glide-weapon-system-test-successful-indias-defense-capability/article-52906"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t121317.006.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ओडिशा तट के पास बीते </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">7<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को जो परीक्षण हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने देश की रक्षा तैयारियों को एक नई दिशा दे दी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी </span>DRDO <span lang="hi" xml:lang="hi">और भारतीय वायुसेना ने मिलकर जिस स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे लेकर अब सैन्य हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इस सिस्टम का नाम है </span>DRDO TARA, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>Tactical Advanced Range Augmentation<span lang="hi" xml:lang="hi">। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और इससे भारत की स्वदेशी हथियार क्षमता में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह परीक्षण ओडिशा के तटवर्ती क्षेत्र में किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां एक अनिर्देशित बम को सटीक निर्देशित हथियार में बदलकर उसकी क्षमता को परखा गया। सेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह पूरा प्रयोग बेहद सावधानी से किया गया और परिणाम उम्मीद से बेहतर रहे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस सिस्टम की खासियत यह है कि यह पुराने और अनिर्देशित बमों को भी आधुनिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सटीक मारक क्षमता वाले हथियार में बदल देता है। </span>DRDO TARA <span lang="hi" xml:lang="hi">को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह विंग आधारित ग्लाइड तकनीक की मदद से </span>150<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>180<span lang="hi" xml:lang="hi"> किलोमीटर तक की दूरी तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। इसमें </span>EO/IR <span lang="hi" xml:lang="hi">गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लक्ष्य की पहचान और उसे सटीक तरीके से हिट करने की क्षमता और मजबूत हो जाती है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक आने वाले समय में भारतीय वायुसेना के ऑपरेशंस को और ज्यादा प्रभावी बना सकती है। खास बात यह भी बताई जा रही है कि इसका सर्कुलर एरर लगभग </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> मीटर के भीतर रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी टारगेट के बेहद करीब जाकर सटीक वार करने की क्षमता रखता है। यह तकनीक न केवल मारक क्षमता बढ़ाती है बल्कि पायलटों की सुरक्षा के लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे दुश्मन के एयर डिफेंस क्षेत्र में कम जोखिम के साथ ऑपरेशन संभव हो सकेगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DRDO TARA <span lang="hi" xml:lang="hi">को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (</span>RCI) <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>DRDO <span lang="hi" xml:lang="hi">की अन्य प्रयोगशालाओं के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इसका उद्देश्य कम लागत में मौजूदा हथियारों की क्षमता को कई गुना बढ़ाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर </span>DRDO, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय वायुसेना और इंडस्ट्री पार्टनर्स को बधाई दी है और इसे भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया है। वहीं </span>DRDO <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख समीर वी. कामत ने भी टीम को इस सफलता के लिए शुभकामनाएं दी हैं। फिलहाल रक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इसे भविष्य के युद्धों में भारत के लिए एक रणनीतिक बढ़त के रूप में देख रहे हैं। शुरुआती स्तर पर इस सिस्टम के और परीक्षण किए जाने की संभावना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 12:25:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुणे एयरपोर्ट पर एयरफोर्स जेट की हार्ड लैंडिंग, 8 घंटे बाधित रहा ऑपरेशन</title>
                                    <description><![CDATA[91 फ्लाइट्स रद्द, सुबह 7:30 बजे के बाद धीरे-धीरे सामान्य हुई सेवाएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/hard-landing-of-air-force-jet-at-pune-airport-disrupted/article-51536"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/pune-airport-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>रात पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भारतीय वायुसेना के एक लड़ाकू विमान की हार्ड लैंडिंग के बाद एयरपोर्ट का संचालन करीब आठ घंटे तक प्रभावित रहा। रात करीब 10:30 बजे हुई इस घटना के चलते रनवे को तत्काल बंद करना पड़ा, जिससे कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।</p>
<p>वायुसेना ने बताया कि विमान सुरक्षित है और उसमें सवार क्रू पूरी तरह सुरक्षित है। घटना के बाद रनवे की जांच और मरम्मत का काम तुरंत शुरू किया गया। एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे से उड़ानें दोबारा शुरू कर दी गईं, लेकिन पूरे दिन शेड्यूल सामान्य होने में समय लग सकता है।</p>
<p>एयरपोर्ट डायरेक्टर के मुताबिक, इस घटना के कारण कुल 91 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं। इनमें सबसे ज्यादा असर इंडिगो की उड़ानों पर पड़ा, जिनकी 65 फ्लाइट्स कैंसिल हुईं। इसके अलावा एयर इंडिया, स्पाइसजेट, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानें भी प्रभावित रहीं। अचानक हुए इस बदलाव के चलते कई यात्री एयरपोर्ट पर ही फंसे रहे, जबकि कुछ को अपनी यात्रा टालनी पड़ी।</p>
<p>प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि विमान के लैंडिंग गियर में तकनीकी समस्या आ गई थी। लैंडिंग के दौरान इसी वजह से विमान सामान्य तरीके से उतर नहीं पाया और रनवे पर जोर से टकराया। हालांकि किस प्रकार का लड़ाकू विमान था, इसकी आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।</p>
<p>हार्ड लैंडिंग ऐसी स्थिति होती है जब विमान सामान्य से ज्यादा जोर के साथ रनवे पर उतरता है। इससे विमान के साथ-साथ रनवे को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसी कारण सुरक्षा के लिहाज से तुरंत संचालन रोकना जरूरी होता है, ताकि आगे की उड़ानों में किसी तरह का जोखिम न रहे।</p>
<p>यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हवाई यात्रा में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और एयरपोर्ट पहले से ही दबाव में हैं। ऐसे में छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े स्तर पर असर डाल सकती है।</p>
<p>फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं और धीरे-धीरे सभी सेवाएं सामान्य हो रही हैं। अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि यात्रियों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 12:43:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब भारत की सेना-एयरफोर्स-सुरक्षा होगी और मजबूत, सरकार ने 2.38 लाख करोड़ रुपये की रक्षा परियोजनाओं को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने अपनी सेना, वायु सेना और तटरक्षक बल की क्षमता बढ़ाने के लिए 2.38 लाख करोड़ रुपये की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/now-indias-army-airforce-security-will-be-strong-and-defense-projects-worth/article-49297"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/defense-projects-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">27 मार्च 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न रक्षा परियोजनाओं के लिए आवश्यकता स्वीकृति प्रदान की। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारतीय सेना, वायु सेना और तटरक्षक बल की सामरिक और परिचालन क्षमता को आधुनिक और अत्याधुनिक बनाना है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भूमि और वायु रक्षा उपकरणों का आधुनिकीकरण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भारतीय सेना के लिए कई अत्याधुनिक प्रणालियों को मंजूरी दी गई। इसमें वायु रक्षा ट्रैक प्रणाली, धनुष तोप प्रणाली, उच्च क्षमता वाली रेडियो रिले और रनवे स्वतंत्र हवाई निगरानी प्रणाली शामिल हैं। वायु रक्षा ट्रैक प्रणाली वास्तविक समय में वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग की क्षमता बढ़ाएगी, जबकि उच्च क्षमता वाली रेडियो रिले त्रुटिरहित और सुरक्षित संचार सुनिश्चित करेगी। धनुष तोप प्रणाली सभी प्रकार की भौगोलिक परिस्थितियों में लंबी दूरी के लक्ष्यों को भेदने की तोपखाने की क्षमता बढ़ाएगी। रनवे स्वतंत्र हवाई निगरानी प्रणाली सैनिकों को वास्तविक समय में हवाई निगरानी की सुविधा देगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भारतीय वायु सेना के लिए नई पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भारतीय वायु सेना के लिए मध्यम परिवहन विमान, S-400 लंबी दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक विमान और Su-30 एयरो इंजन एग्रीगेट्स के नवीनीकरण की मंजूरी दी गई। मध्यम परिवहन विमानों को AN32 और IL76 के विकल्प के रूप में शामिल किया जाएगा, जिससे रणनीतिक और परिचालन हवाई परिवहन की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा। S-400 मिसाइल प्रणाली दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई हमलों का मुकाबला करेगी, जबकि रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक विमान आक्रामक हवाई अभियानों और खुफिया निगरानी कार्यों को अंजाम देने में सक्षम बनाएगा। Su-30 विमानों के एयरो इंजन और एग्रीगेट्स के नवीनीकरण से विमानों की सेवा जीवन अवधि बढ़ेगी और वायु सेना की परिचालन जरूरतें पूरी होंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">तटरक्षक बल के लिए आधुनिक उपकरण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भारतीय तटरक्षक बल के लिए भी हेवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स को मंजूरी दी गई। इन वाहनों का उपयोग बहुउद्देशीय समुद्री परिचालन कार्यों में किया जाएगा, जिसमें तटीय गश्त, खोज एवं बचाव अभियान, जहाजों को सहायता प्रदान करना, रसद और कर्मियों का परिवहन शामिल है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिकॉर्ड स्तर की स्वीकृति और निवेश</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वित्तीय वर्ष 2025-26 में, डीएसी द्वारा कुल 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में 2.28 लाख करोड़ रुपये के 503 प्रस्तावों पर पूंजीगत खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। यह किसी भी वित्तीय वर्ष में अब तक स्वीकृत सबसे बड़ी राशि और अनुबंधों की संख्या है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 19:14:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रचंड हेलिकॉप्टर में राष्ट्रपति की ऐतिहासिक उड़ान, सीमावर्ती क्षेत्र का हवाई निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन से को-पायलट के रूप में उड़ीं राष्ट्रपति; सैनिकों को संदेश—आत्मनिर्भर भारत की शक्ति का प्रतीक ‘प्रचंड’]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/presidents-historic-flight-in-prachanda-helicopter-aerial-inspection-of-border/article-47301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh---2026-02-27t115405.974.jpg" alt=""></a><br /><p>राजस्थान के <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">जैसलमेर</span></span> स्थित वायुसेना स्टेशन से शुक्रवार को <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">द्रौपदी मुर्मू</span></span> ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में को-पायलट के रूप में उड़ान भरकर देश के रक्षा इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। करीब 25 मिनट की उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने सीमावर्ती क्षेत्रों और पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज का हवाई निरीक्षण किया तथा कॉकपिट से देश के नाम संदेश जारी कर सैनिकों के साहस और समर्पण को सलाम किया।</p>
<p>राष्ट्रपति सुबह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं, जहां वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों ने उन्हें हेलिकॉप्टर की तकनीकी विशेषताओं और उड़ान प्रक्रिया की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ के साथ उड़ान भरी। उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर ने रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाकों के ऊपर से गुजरते हुए सुरक्षा तैयारियों का आकलन किया।</p>
<p>जैसलमेर के ऐतिहासिक किले के ऊपर से गुजरते हुए राष्ट्रपति ने रेडियो संदेश में कहा कि स्वदेशी रक्षा तकनीक देश की आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने वीर सैनिकों को धन्यवाद देते हुए राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के प्रति विश्वास व्यक्त किया।</p>
<p>वायुसेना अधिकारियों के अनुसार यह उड़ान आगामी सैन्य अभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ से पहले की औपचारिक निरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा थी। शाम को पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान अपनी मारक क्षमता और सटीक लक्ष्यभेदन कौशल का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में रक्षा प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य नेतृत्व भी उपस्थित रहने वाले हैं।</p>
<p>रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संवैधानिक प्रमुख का इस प्रकार सैन्य प्लेटफॉर्म का प्रत्यक्ष अनुभव लेना प्रतीकात्मक महत्व के साथ व्यावहारिक संदेश भी देता है। इससे सैनिकों का मनोबल बढ़ता है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को लेकर जनविश्वास मजबूत होता है।</p>
<p>राष्ट्रपति इससे पहले भी लड़ाकू विमानों में उड़ान भर चुकी हैं, जिससे सैन्य क्षमताओं के प्रति उनकी सक्रिय रुचि स्पष्ट होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह पहल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संकेत देती है।</p>
<p>सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और समन्वय व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है। आने वाले समय में सैन्य अभ्यासों और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से रक्षा क्षमता को और मजबूत करने पर जोर रहेगा। </p>
<p>---------------------</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:58:34 +0530</pubDate>
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