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                <title>Defence News India - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Defence News India RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका ने भारत को दिया बड़ा रक्षा तोहफा, बढ़ेगी सैन्य ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने भारत को Apache हेलीकॉप्टर और M777 तोपों के लिए 428 मिलियन डॉलर का रक्षा सपोर्ट पैकेज मंजूर किया, जिससे सेना की क्षमता बढ़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-gave-a-big-defense-gift-to-india-military-strength/article-53779"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-us-defence-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका ने भारत के साथ अपनी रक्षा भागीदारी को मजबूती देते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत के लिए 428 मिलियन डॉलर से अधिक का सपोर्ट और मेंटेनेंस पैकेज मंजूर किया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">अटैक हेलीकॉप्टर और </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777</span>A<span lang="hi" xml:lang="hi">2 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों से संबंधित महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। ये सभी सेवाएं </span>Foreign Military Sales (FMS) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम के तहत प्रदान की जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदार देशों को सैन्य उपकरण और सपोर्ट देने के लिए उपयोग करता है। बताया जा रहा है कि इस पैकेज में </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम के लिए लगभग 198.2 मिलियन डॉलर और </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777 तोपों के लिए करीब 230 मिलियन डॉलर का दीर्घकालिक मेंटेनेंस सपोर्ट शामिल है। यह डील उस समय सामने आई है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को लेकर पहले से ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलीकॉप्टरों के लिए जो सपोर्ट पैकेज मंजूर हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसमें सिर्फ मशीनरी या पार्ट्स नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट की पूरी व्यवस्था शामिल है। इसमें इंजीनियरिंग सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पब्लिकेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रेनिंग और फील्ड सपोर्ट जैसी सेवाएं दी जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भारतीय सेना के </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">बेड़े की ऑपरेशनल क्षमता लंबे समय तक मजबूत बनी रहे। इस प्रोग्राम में अमेरिका की दो बड़ी कंपनियाँ </span>Boeing <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Lockheed Martin <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमुख ठेकेदार के रूप में काम कर रही हैं। इस सपोर्ट से </span>Apache <span lang="hi" xml:lang="hi">हेलीकॉप्टरों की सर्विसिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेंटेनेंस और मिशन रेडीनेस में काफी सुधार की उम्मीद है। ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील ऑपरेशनों में इनकी भूमिका लगातार बढ़ती रही है। इसलिए इस नए पैकेज से इनकी उपलब्धता और तकनीकी निर्भरता दोनों में संतुलन आने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, M<span lang="hi" xml:lang="hi">777</span>A<span lang="hi" xml:lang="hi">2 </span>Ultra-Light Howitzers <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए लगभग 230 मिलियन डॉलर का लॉन्ग-टर्म सपोर्ट पैकेज भी मंजूर हुआ है। इसमें स्पेयर पार्ट्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपेयर सर्विस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फील्ड सर्विस प्रतिनिधि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी सहायता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और डिपो स्तर का सपोर्ट जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इस डील में ब्रिटेन की </span>BAE Systems <span lang="hi" xml:lang="hi">को मुख्य ठेकेदार बनाया गया है। </span>M<span lang="hi" xml:lang="hi">777 तोपें भारतीय सेना के लिए खासकर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में बेहद उपयोगी मानी जाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ भारी तोपों की तैनाती मुश्किल होती है। लद्दाख से लेकर उत्तर-पूर्वी सीमाओं तक इनकी तैनाती ने सेना की मारक क्षमता को सटीक और तेज बना दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह सौदा भारत की मौजूदा और भविष्य की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये उम्मीद जताई गई है कि इस सहयोग से भारत की रक्षा प्रणालियों में तकनीकी मजबूती आएगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और अधिक स्थिर होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>महिला सैन्य अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: स्थायी कमीशन और पेंशन का अधिकार बहाल</title>
                                    <description><![CDATA[कोर्ट ने कहा—महिलाओं को परमानेंट कमीशन से वंचित करना भेदभाव, केंद्र को पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-courts-big-relief-to-women-military-officers-restoration-of/article-48924"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/national-(57).jpg" alt=""></a><br /><p>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेना में महिला अधिकारियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अफसरों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) से वंचित करना व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का परिणाम था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया की खामियों का नतीजा था।</p>
<p>जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने निर्देश दिया कि जिन महिला अधिकारियों को मनमाने या गलत आकलन के कारण स्थायी कमीशन नहीं मिला, उन्हें अब पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी माना कि इन अधिकारियों की न्यूनतम 20 वर्ष की सेवा पूरी मानी जाएगी, भले ही वे पहले ही सेवा से बाहर हो चुकी हों।</p>
<p>फैसले में केंद्र सरकार को भविष्य के लिए स्पष्ट और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि मूल्यांकन के सभी मानदंड पहले से बताए जाने चाहिए, ताकि किसी भी तरह का पूर्वाग्रह या भेदभाव न हो।</p>
<p>यह मामला महिला अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा था, जिनमें 2019 की सरकारी नीति और सशस्त्र बल अधिकरण (AFT) के फैसलों को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और पूर्वाग्रह के चलते उन्हें स्थायी कमीशन से वंचित किया गया।</p>
<p>कोर्ट ने अपने आदेश में तीन प्रमुख राहतें दीं। पहली, जिन अधिकारियों को पहले ही स्थायी कमीशन मिल चुका है, उनका दर्जा बरकरार रहेगा। दूसरी, जो महिला अफसर इस दौरान सेवा से बाहर हो गईं, उन्हें 20 साल की सेवा पूर्ण मानते हुए पेंशन और अन्य लाभ दिए जाएंगे, हालांकि एरियर नहीं मिलेगा। तीसरी, वर्तमान में सेवा में कार्यरत महिला अधिकारियों को निर्धारित मानदंड पूरा करने पर स्थायी कमीशन का अवसर मिलेगा।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि कई मामलों में वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) इस धारणा के साथ तैयार की गई थी कि महिलाओं को आगे स्थायी भूमिका नहीं दी जाएगी। इससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई और वे पुरुष अधिकारियों की तुलना में पीछे रह गईं।</p>
<p>यह मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2003 में पहली बार इस मुद्दे को अदालत में उठाया गया था और 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला अधिकारियों के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने 2019 में नई नीति बनाई, लेकिन उसमें कुछ सीमाएं जोड़ दी गईं, जिन पर विवाद जारी रहा।</p>
<p>कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले को महिला सशक्तिकरण और समान अवसर की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे सेना में लैंगिक समानता को मजबूती मिलेगी और भविष्य में चयन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष हो सकेगी।</p>
<p>फिलहाल, यह फैसला न केवल पूर्व महिला अधिकारियों को राहत देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।</p>
<p>------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:23:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रचंड हेलिकॉप्टर में राष्ट्रपति की ऐतिहासिक उड़ान, सीमावर्ती क्षेत्र का हवाई निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन से को-पायलट के रूप में उड़ीं राष्ट्रपति; सैनिकों को संदेश—आत्मनिर्भर भारत की शक्ति का प्रतीक ‘प्रचंड’]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/presidents-historic-flight-in-prachanda-helicopter-aerial-inspection-of-border/article-47301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh---2026-02-27t115405.974.jpg" alt=""></a><br /><p>राजस्थान के <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">जैसलमेर</span></span> स्थित वायुसेना स्टेशन से शुक्रवार को <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">द्रौपदी मुर्मू</span></span> ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में को-पायलट के रूप में उड़ान भरकर देश के रक्षा इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। करीब 25 मिनट की उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने सीमावर्ती क्षेत्रों और पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज का हवाई निरीक्षण किया तथा कॉकपिट से देश के नाम संदेश जारी कर सैनिकों के साहस और समर्पण को सलाम किया।</p>
<p>राष्ट्रपति सुबह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं, जहां वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों ने उन्हें हेलिकॉप्टर की तकनीकी विशेषताओं और उड़ान प्रक्रिया की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ के साथ उड़ान भरी। उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर ने रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाकों के ऊपर से गुजरते हुए सुरक्षा तैयारियों का आकलन किया।</p>
<p>जैसलमेर के ऐतिहासिक किले के ऊपर से गुजरते हुए राष्ट्रपति ने रेडियो संदेश में कहा कि स्वदेशी रक्षा तकनीक देश की आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने वीर सैनिकों को धन्यवाद देते हुए राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के प्रति विश्वास व्यक्त किया।</p>
<p>वायुसेना अधिकारियों के अनुसार यह उड़ान आगामी सैन्य अभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ से पहले की औपचारिक निरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा थी। शाम को पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान अपनी मारक क्षमता और सटीक लक्ष्यभेदन कौशल का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में रक्षा प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य नेतृत्व भी उपस्थित रहने वाले हैं।</p>
<p>रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संवैधानिक प्रमुख का इस प्रकार सैन्य प्लेटफॉर्म का प्रत्यक्ष अनुभव लेना प्रतीकात्मक महत्व के साथ व्यावहारिक संदेश भी देता है। इससे सैनिकों का मनोबल बढ़ता है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को लेकर जनविश्वास मजबूत होता है।</p>
<p>राष्ट्रपति इससे पहले भी लड़ाकू विमानों में उड़ान भर चुकी हैं, जिससे सैन्य क्षमताओं के प्रति उनकी सक्रिय रुचि स्पष्ट होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह पहल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संकेत देती है।</p>
<p>सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और समन्वय व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है। आने वाले समय में सैन्य अभ्यासों और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से रक्षा क्षमता को और मजबूत करने पर जोर रहेगा। </p>
<p>---------------------</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:58:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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