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                <title>Public Health - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Public Health RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर ने रचा नया रिकॉर्ड, 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को मिला NQAS प्रमाणन</title>
                                    <description><![CDATA[इलाज, जांच, स्वच्छता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों पर खरे उतरे अस्पताल; छत्तीसगढ़ का पहला जिला बना रायपुर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/6a4f3c907401d/article-58260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-health.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले की 99 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) यानी नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां सबसे अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को यह राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि लगातार मॉनिटरिंग, बेहतर प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों की टीमवर्क का परिणाम है। अभी जिले की दो स्वास्थ्य संस्थाओं के मूल्यांकन का परिणाम भारत सरकार से आना बाकी है, जबकि तीन अन्य संस्थानों का राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन होना शेष है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण गुणवत्ता मूल्यांकन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और मानक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं का कई स्तरों पर विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, इलाज और जांच की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता, अस्पताल की स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, मरीजों की सुविधा और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे अनेक मानकों को परखा जाता है। निर्धारित मानकों पर सफल होने के बाद ही किसी स्वास्थ्य संस्था को NQAS प्रमाणपत्र दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रायपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे थे। अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, चिकित्सकीय सेवाओं में सुधार, नियमित निरीक्षण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरी उतर सकीं। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रमाणन केवल एक उपलब्धि नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार की जिम्मेदारी भी है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार स्वास्थ्य संस्थाओं में नियमित मॉनिटरिंग, समय-समय पर समीक्षा बैठकें और टीमवर्क के कारण यह सफलता हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी गुणवत्ता के इन मानकों को बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने कहा कि NQAS प्रमाणन किसी भी स्वास्थ्य संस्था के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण प्रमाण होता है। उन्होंने बताया कि मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, अस्पतालों की स्वच्छता और सेवा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। यही कारण है कि रायपुर जिले ने प्रदेश में सबसे अधिक NQAS प्रमाणित स्वास्थ्य संस्थाओं वाला पहला जिला बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन संस्थानों का मूल्यांकन अभी बाकी है, उन्हें भी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">NQAS प्रमाणन का सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को मिलता है। इससे अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती है, मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिलता है और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ती है। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था होने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। साथ ही रिकॉर्ड प्रबंधन और दवा वितरण प्रणाली में सुधार आने से सेवाएं अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनती हैं। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता सुधार का सीधा असर मरीजों के भरोसे पर भी पड़ता है। जब अस्पताल राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं, तो लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक विश्वास जताते हैं। इससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है। रायपुर जिले में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थाओं को NQAS प्रमाणन मिलने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश के अन्य जिले भी इसी दिशा में तेजी से काम करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत प्रमाणित संस्थाओं का समय-समय पर दोबारा मूल्यांकन भी किया जाता है। इसलिए प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी अस्पतालों को लगातार गुणवत्ता बनाए रखनी होती है। यदि किसी संस्था में निर्धारित मानकों का पालन नहीं होता है तो उसका प्रमाणन प्रभावित हो सकता है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और सुधार की प्रक्रिया को जारी रखता है। रायपुर की इस उपलब्धि को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। साथ ही यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शेष स्वास्थ्य संस्थाओं को भी NQAS प्रमाणन दिलाया जाए और पूरे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मानसून तैयारियों पर सख्त हुए कलेक्टर, सभी पीएचसी में एंटीवेनम वैक्सीन उपलब्ध रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[बलौदाबाजार में स्वास्थ्य सेवाओं, बाढ़ प्रबंधन, पेयजल व्यवस्था और खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा; अस्पतालों, क्विक रिस्पॉन्स टीम और कंट्रोल रूम को अलर्ट रहने के आदेश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/collector-becomes-strict-on-monsoon-preparations-instructions-to-keep-antivenom/article-58200"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/balodabazar-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मानसून के दौरान संभावित स्वास्थ्य और आपदा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए बलौदाबाजार जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम वैक्सीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार नहीं करना पड़े। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों, जरूरी उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार शुरू किया जा सके। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ राजस्व, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने भी भाग लिया।</p>
<p>कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि मानसून के दौरान मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पूरे स्वास्थ्य अमले को अलर्ट मोड पर रखा जाए और किसी भी क्षेत्र से बीमारी फैलने की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए। विकासखंड स्तर पर गठित क्विक रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि किसी गांव या मोहल्ले में अचानक बुखार, डायरिया, उल्टी या अन्य संक्रामक बीमारी के मामले सामने आते हैं तो टीम तुरंत मौके पर पहुंचे और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए। अधिकारियों के अनुसार समय रहते कार्रवाई होने से बीमारी के फैलाव को रोका जा सकता है।</p>
<p>बैठक में मितानिनों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी मितानिनें अपनी दवा पेटी में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखें और नियमित रूप से घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी लें। यदि किसी परिवार में कोई व्यक्ति बीमार मिले या संक्रामक बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दी जाए। साथ ही लोगों को साफ-सफाई, हाथ धोने, उबला या स्वच्छ पानी पीने और खुले में रखे भोजन से बचने के बारे में जागरूक करने को भी कहा गया। प्रशासन का मानना है कि गांव स्तर पर सक्रिय निगरानी से कई बीमारियों को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p>बरसात के मौसम में पेयजल की शुद्धता भी प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल रही। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए गए कि जिले के सभी पेयजल स्रोतों की जांच समय पर पूरी की जाए और जहां जरूरत हो वहां क्लोरीनीकरण कराया जाए। कलेक्टर ने कहा कि दूषित पानी के कारण डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल लगातार उपलब्ध हो।</p>
<p>बैठक के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रशासन ने नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए राजस्व विभाग, पुलिस और आपदा राहत दलों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। जिले के पांच चिन्हित पुलों पर विशेष निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर आवागमन अस्थायी रूप से रोकने की तैयारी रखने को कहा गया। जिला कंट्रोल रूम को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने और किसी भी आपात सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>कृषि क्षेत्र की तैयारियों की भी बैठक में समीक्षा की गई। खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी समिति में उर्वरक या बीज की कमी नहीं होनी चाहिए। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण वितरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई और पात्र किसानों को समय पर लाभ दिलाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा एग्रीस्टेक पंजीयन की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।</p>
<p>समय-सीमा बैठक में जिले में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। राजस्व प्रकरणों के निराकरण, स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री जनदर्शन, सीएम हेल्पलाइन, सीपी ग्राम्स और सड़क तथा पुल-पुलिया निर्माण से जुड़े मामलों की प्रगति पर चर्चा हुई। कलेक्टर ने सभी विभागों को लंबित मामलों का जल्द समाधान करने और आम नागरिकों की शिकायतों का समय पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>बैठक में अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की भी सलाह दी गई। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि मानसून के दौरान छोटी लापरवाही भी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। इसलिए स्वास्थ्य, पेयजल, राहत एवं बचाव, कृषि और राजस्व विभाग लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहें और किसी भी स्थिति में तत्काल संयुक्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना नहीं बल्कि पहले से ऐसी तैयारी करना है जिससे लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जबलपुर में पेयजल संकट: नलों से निकला काला और बदबूदार पानी, लोगों में दहशत</title>
                                    <description><![CDATA[राजीव गांधी वार्ड में दूषित पेयजल से मचा हड़कंप, दर्जनों लोगों के बीमार होने का दावा; नगर निगम से तत्काल जांच और सुरक्षित जलापूर्ति की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/drinking-water-crisis-in-jabalpur-black-and-smelly-water-comes/article-58178"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jabalpur-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों की घटना के बाद अब जबलपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र के राजीव गांधी वार्ड में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब लोगों के घरों में नलों से काला, बदबूदार और गंदगी से भरा पानी आने लगा। अचानक बदले पानी के रंग और तेज दुर्गंध ने लोगों को दहशत में डाल दिया। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल जांच, पाइपलाइन की मरम्मत और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। बुधवार सुबह रोज की तरह लोगों ने घरेलू उपयोग और पीने के लिए नल खोले, लेकिन पानी की जगह काले रंग का गंदा और बदबूदार पानी निकलने लगा। कई लोगों ने शुरुआत में इसे बारिश का असर समझकर कुछ देर इंतजार किया, लेकिन 10 से 15 मिनट तक लगातार गंदा पानी आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने आसपास की जलापूर्ति लाइन का निरीक्षण किया और आरोप लगाया कि पेयजल पाइपलाइन का एक हिस्सा नाले के भीतर से होकर गुजर रहा है। लोगों का कहना है कि पाइपलाइन में कहीं लीकेज होने के कारण नाले का दूषित पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल रहा है, जिससे घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि वे नियमित रूप से टैक्स और जलकर का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल रही है। नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों और नगर निगम अधिकारियों से स्वयं मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने और समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। क्षेत्र के निवासियों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से वार्ड में बड़ी संख्या में लोग पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार जैसी समस्याओं से परेशान हैं। पहले लोगों को बीमारी का कारण समझ में नहीं आ रहा था, लेकिन अब नलों से दूषित पानी निकलने के बाद आशंका जताई जा रही है कि जलजनित संक्रमण इसके पीछे की एक बड़ी वजह हो सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। राजीव गांधी वार्ड निवासी विजय नायडू ने बताया कि उन्होंने सुबह मोटर चलाकर घर की टंकी में पानी भर लिया था। बाद में जब पीने के लिए पानी निकाला गया तो उसमें कीचड़ और गंदगी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि अब पूरी टंकी का पानी अनुपयोगी हो गया है और उसे खाली कर साफ कराना पड़ेगा। उनका कहना है कि इस तरह की स्थिति में परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। </p>
<p style="text-align:justify;">दूषित पानी की आपूर्ति का असर केवल पीने तक सीमित नहीं रहा। जिन लोगों ने सुबह पानी की टंकियां भर ली थीं, अब उन्हें पूरी टंकी की सफाई कराने की चिंता सता रही है। इसके अलावा घरों में लगे वाटर फिल्टर, आरओ सिस्टम और वाटर कूलर भी प्रभावित होने की आशंका है। कई लोगों ने एहतियात के तौर पर फिलहाल इन उपकरणों का उपयोग बंद कर दिया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि वास्तव में पेयजल पाइपलाइन नाले के भीतर या उसके संपर्क में होकर गुजर रही है तो यह लंबे समय से बनी एक गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही है। उनका कहना है कि पाइपलाइन की नियमित जांच और समय-समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। नागरिकों ने मांग की है कि पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति लाइन की तकनीकी जांच कराई जाए और जहां भी लीकेज या क्षति हो, उसे तत्काल ठीक किया जाए। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र में तुरंत स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। साथ ही पाइपलाइन की जांच, लीकेज की मरम्मत, पानी के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच और जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में जलजनित बीमारियों का बड़ा प्रकोप फैल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:20:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर ओंकारेश्वर में बड़ा कार्यक्रम, जागरूकता पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ने कहा—मध्यप्रदेश और ओडिशा में सबसे अधिक स्क्रीनिंग हुई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3628221bf9d/article-56440"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sickle-cell-disease-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस बीमारी को लेकर गंभीर संदेश सामने आए। मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सिकल सेल को सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता, यह सामाजिक जागरूकता, आनुवांशिक परामर्श और व्यवहार परिवर्तन से जुड़ा बड़ा विषय है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि देश के 17 राज्यों में सिकल सेल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश और ओडिशा में जिस स्तर पर स्क्रीनिंग और परामर्श का काम हुआ है, वह सबसे अधिक और प्रभावी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर जनजातीय क्षेत्रों में देखा जाता है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। कार्यक्रम में यह बात बार-बार सामने आई कि समय रहते जांच और परामर्श से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इस अवसर पर कहा कि सिकल सेल रोग केवल चिकित्सा का विषय नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ी गंभीर समस्या भी है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में अब तक 1 करोड़ 32 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जो इस अभियान की व्यापकता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में जांच से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस बीमारी को जड़ से खत्म करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत राज्य और केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही हैं। उनका कहना था कि गांव-गांव तक जागरूकता फैलाना इस लड़ाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि बीमारी की पहचान जितनी जल्दी होगी, उसका इलाज और नियंत्रण उतना ही प्रभावी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को और तेज किया जाएगा ताकि किसी भी मरीज को इलाज से वंचित न रहना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि सिकल सेल एक आनुवांशिक बीमारी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकती है, इसलिए इसके लिए केवल इलाज नहीं बल्कि सामाजिक समझ और विवाह पूर्व परामर्श भी जरूरी है। विशेषज्ञों ने कहा कि अगर समय पर जांच और काउंसलिंग हो जाए तो आने वाली पीढ़ियों में इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हाल के वर्षों में सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान के कारण जागरूकता में सुधार देखा गया है, लेकिन अब भी कई दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि सिकल सेल उन्मूलन सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी भागीदारी जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में स्क्रीनिंग को और डिजिटल और तेज किया जाएगा ताकि हर व्यक्ति तक जांच की सुविधा पहुंच सके। साथ ही, जनजातीय इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और जागरूकता शिविरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा संभाग में एनीमिया का बढ़ता संकट, 2 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाएं गंभीर रक्ताल्पता की शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली में सामने आए चिंताजनक आंकड़े, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा- स्वास्थ्य विभाग को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/increasing-crisis-of-anemia-in-rewa-division-more-than-2/article-55896"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-anemia-cases.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा संभाग में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के हालिया आंकड़ों के अनुसार संभाग के चार जिलों रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली में 2 हजार से अधिक गर्भवती महिलाएं गंभीर एनीमिया यानी रक्ताल्पता से पीड़ित हैं। इन महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर 7 ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम पाया गया है, जो चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अत्यंत गंभीर स्थिति मानी जाती है। यह न केवल गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास और जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। रीवा जिले में सबसे अधिक 884 गर्भवती महिलाओं में गंभीर रक्ताल्पता की समस्या पाई गई है। इसके बाद सतना जिले में 567, सीधी जिले में 303 और सिंगरौली जिले में 246 महिलाओं को गंभीर एनीमिया से ग्रसित पाया गया है। इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश स्तर पर तैयार की गई रिपोर्ट में भी रीवा संभाग को गंभीर एनीमिया के मामलों के उपचार और प्रबंधन के मामले में सबसे कमजोर क्षेत्रों में शामिल बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सामान्य से अधिक पोषण और आयरन की आवश्यकता होती है। यदि समय पर पर्याप्त पोषण नहीं मिलता या नियमित जांच नहीं होती तो शरीर में खून की कमी तेजी से बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, संतुलित आहार का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच न होना भी इस समस्या को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कई मामलों में महिलाएं गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच नहीं करातीं, जिसके कारण बीमारी का पता देर से चलता है। गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं में अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना, लगातार थकान, सिरदर्द और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि कई बार महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही वजह है कि बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में महिलाओं को अपनी स्थिति की जानकारी तब मिलती है जब वे प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचती हैं। ऐसे समय पर स्थिति काफी जटिल हो जाती है और डॉक्टरों को अतिरिक्त चिकित्सा प्रबंधन करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्भावस्था के दौरान गंभीर रक्ताल्पता मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। इससे समय से पहले प्रसव, कम वजन वाले बच्चे का जन्म, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और मातृ मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। कई बार नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका दीर्घकालिक असर देखा जाता है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम और उपचार को प्राथमिकता देते हैं। रीवा संभाग में सामने आए इन आंकड़ों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की पहचान कर उन्हें आयरन सप्लीमेंट, पोषण संबंधी सलाह और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी गर्भवती महिलाओं की निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच शिविरों के आयोजन पर भी जोर दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुद्दे पर मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एनीमिया की समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत पहले से कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं और अब रीवा संभाग के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है ताकि गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार और पोषण संबंधी सहायता मिल सके। केवल सरकारी योजनाओं से ही इस समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि समाज और परिवार की भागीदारी भी जरूरी है। किशोरावस्था से ही लड़कियों को संतुलित आहार, आयरन युक्त भोजन और स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक करना होगा। यदि शुरुआती उम्र में ही खून की कमी पर नियंत्रण कर लिया जाए तो गर्भावस्था के दौरान गंभीर एनीमिया के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुना में दूषित पानी पीने से 18 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[टूटी पाइपलाइन से घरों में पहुंचा गंदा पानी, उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/18-children-admitted-to-hospital-after-drinking-contaminated-water-in/article-55283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के गुना शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र में गंदा पानी सप्लाई होने के बाद करीब 18 बच्चे बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई स्थानों पर टूटी हुई पाइपलाइनों के कारण पेयजल में गंदगी और दूषित तत्व मिल गए, जिससे यह स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी का रंग भी सामान्य नहीं था, लेकिन शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया। बाद में जब बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो मामला गंभीर हो गया। एक-एक कर कई बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। कुछ बच्चों में पीलिया के शुरुआती लक्षण भी दिखाई दिए, जिसके बाद परिजन घबरा गए और उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल में भर्ती बच्चों की उम्र 5 से 11 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश बच्चों में डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि दूषित पानी पीने से इस तरह के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे जल्दी प्रभावित होते हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार बच्चों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जल जीवन मिशन की टीम सक्रिय हो गई। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई। माना जा रहा है कि टूटी पाइपलाइन के जरिए नालियों और आसपास जमा गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे पानी दूषित हो गया। प्रशासन ने मुख्य वाटर टैंक और संबंधित पाइपलाइन क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही जिन स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं, वहां मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया गया है ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत की जाती तो बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, वहां लोग पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही उपयोग करें। इसके अलावा क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उबालने से पानी में मौजूद अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉक्टरों ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने को कहा है। यदि बच्चों में उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों ने ओआरएस घोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने की भी सलाह दी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। गुना में सामने आया यह मामला एक बार फिर शहरी जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पेयजल की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है और छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:04:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इबोला को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट, क्वारंटाइन किए गए लोगों में नहीं मिले संक्रमण के लक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा- प्रदेश में सभी स्तरों पर तैयारियां पूरी, एहतियातन तीन विदेशी नागरिकों को 21 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-alert-regarding-ebola-no-symptoms-of-infection-found-in/article-55079"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ebola-virus-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ में इबोला वायरस संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक महीने से इबोला वायरस को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को क्वारंटाइन और आइसोलेशन में रखा गया है, उनमें अब तक संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण के कुछ मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए थे। दुर्ग जिले में तीन विदेशी नागरिकों को निगरानी में रखा गया है। इनमें कांगो, इथियोपिया और एक अन्य अफ्रीकी देश का नागरिक शामिल बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार ये लोग हाल ही में ऐसे क्षेत्रों से आए थे जहां संक्रमण को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें 21 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंत्री ने कहा कि अब तक हुई चिकित्सकीय जांच में किसी भी व्यक्ति में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। न तो बुखार, न रक्तस्राव और न ही अन्य कोई गंभीर लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई केवल सुरक्षा और सावधानी के तौर पर की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इन लोगों की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इबोला वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है। इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि किसी भी संभावित मामले को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि राज्य के सभी प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और जिला स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल आम नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत बनाने का काम करेगी। कई बार लोगों की शिकायतें और समस्याएं समय पर संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे समाधान में देरी होती है। नई हेल्पलाइन व्यवस्था के माध्यम से लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उनकी निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंत्री के अनुसार सरकार चाहती है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े। सीएम हेल्पलाइन के जरिए शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार होगा और उनके निपटारे की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का शासन व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं बल्कि उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इबोला जैसे संक्रमणों को लेकर जागरूकता और सतर्कता सबसे बड़ा बचाव है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। फिलहाल छत्तीसगढ़ में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। राज्य सरकार इबोला संक्रमण की आशंका को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। क्वारंटाइन किए गए लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं मिलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:11:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अहमदाबाद में इबोला अलर्ट के बीच 11 अफ्रीकी यात्री आइसोलेशन में रखे गए</title>
                                    <description><![CDATA[अफ्रीकी देशों से आए यात्रियों पर एहतियातन निगरानी, भारत में इबोला का कोई मामला नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a16b3a86a819/article-54319"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ebola-virus-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अहमदाबाद में अफ्रीकी देशों से लौटे 11 यात्रियों को एहतियातन आइसोलेशन में रखा गया है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने शहर में निगरानी और स्क्रीनिंग तेज कर दी है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि देश में इबोला वायरस का कोई भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। युगांडा से आई एक महिला की जांच रिपोर्ट भी नेगेटिव पाई गई है। अफ्रीका में इबोला संक्रमण के मामलों के बाद भारत में सतर्कता बढ़ाई गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अफ्रीकी यात्रियों पर निगरानी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अहमदाबाद में युगांडा, दक्षिण सूडान और कांगो जैसे अफ्रीकी देशों से आए कुल 11 यात्रियों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। यह कदम पूरी तरह एहतियात के तौर पर उठाया गया है, क्योंकि इन देशों में इबोला संक्रमण के मामले सामने आए हैं। अहमदाबाद नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भाविन सोलंकी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में किसी भी यात्री में इबोला के संदिग्ध लक्षण नहीं मिले हैं। इसके बावजूद संक्रमण के जोखिम को देखते हुए सभी की निगरानी की जा रही है और नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है। इसी बीच, युगांडा से भारत आई एक महिला को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर हल्के लक्षण दिखने के बाद आइसोलेशन में रखा गया था। बाद में उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि देश में इबोला वायरस का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में फैलाई जा रही आशंकाएं गलत हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग और थर्मल जांच को और मजबूत किया गया है। विशेष रूप से उन उड़ानों पर निगरानी रखी जा रही है जो अफ्रीकी देशों से आ रही हैं। सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के तहत सभी संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>एयरपोर्ट और स्वास्थ्य व्यवस्था अलर्ट पर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देश के कई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है। अहमदाबाद, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इबोला जैसे संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए यात्रियों के ट्रैवल हिस्ट्री की भी जांच की जा रही है। यदि किसी यात्री में बुखार, शरीर में दर्द या अन्य लक्षण दिखते हैं तो उन्हें तुरंत आइसोलेशन में भेजा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय अस्पतालों को भी अलर्ट मोड पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इबोला संक्रमण की पृष्ठभूमि</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। यह एक गंभीर और जानलेवा बीमारी मानी जाती है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त, शरीर के तरल पदार्थ या अन्य संपर्क से फैलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इबोला संक्रमण में मृत्यु दर 25% से 90% तक हो सकती है, जो स्थिति और चिकित्सा सुविधा पर निर्भर करती है। वर्तमान में अफ्रीका के कांगो और युगांडा जैसे देशों में इसके मामले सामने आ रहे हैं। कांगो में हाल के महीनों में इबोला संक्रमण के कारण कई मौतें दर्ज की गई हैं, जिसके बाद WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के रूप में घोषित किया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में सावधानी और आगे की रणनीति</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा बढ़ने के कारण सतर्कता बेहद जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे संदिग्ध मामलों की तुरंत रिपोर्टिंग करें और आइसोलेशन सुविधा को तैयार रखें। इबोला भारत में अभी तक नहीं फैला है, लेकिन इसकी रोकथाम के लिए शुरुआती पहचान और निगरानी सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं। सरकारी स्तर पर यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि अस्पतालों में आवश्यक उपकरण और ट्रेंड स्टाफ उपलब्ध रहे ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">आने वाले दिनों में स्वास्थ्य मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े प्रोटोकॉल और सख्त कर सकता है। अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी अवधि बढ़ाई जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और जागरूकता ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 15:34:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हंता वायरस को लेकर WHO ने दिया अलर्ट, क्या दुनिया पर फिर मंडरा रहा कोरोना जैसी महामारी का खतरा?</title>
                                    <description><![CDATA[WHO ने हंता वायरस के बढ़ते मामलों पर दुनियाभर को सतर्क रहने को कहा। एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों यह कोविड जैसी महामारी नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/who-gave-alert-regarding-hanta-virus-is-the-threat-of/article-53284"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t170900.890.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हंता वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विश्व स्वास्थ्य संगठन (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO) </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ने सभी देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की चेतावनी के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। हाल के हालात ये हैं कि अंटार्कटिका की ओर जा रहे क्रूज जहाज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एमवी होंडियस में इस वायरस का प्रकोप सामने आया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहां तीन लोगों की मौत हो गई है। कई यात्री संक्रमित पाए गए हैं और कुछ को आइसोलेशन में रखा गया है। बताया जा रहा है कि जहाज पर मौजूद लोग विभिन्न देशों से आए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और इस वजह से संक्रमण के वैश्विक स्तर पर फैलने की चिंता बढ़ गई है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि लंबी ऊष्मायन अवधि और लगातार होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्राएं चिंता को बढ़ा सकती हैं। फिर भी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञ इस वायरस को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी मानने से इनकार कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित स्थानों की हवा में मौजूद कणों के जरिए भी इंसान संक्रमित हो सकता है। अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में इसके कई स्ट्रेन पहले भी देखे जा चुके हैं। कुछ मामलों में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह गंभीर फेफड़ों की बीमारी का कारण बनता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसे हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में सांस लेने में तकलीफ तेजी से बढ़ सकती है और हालत अचानक बिगड़ जाती है। फिलहाल चर्चा में जो स्ट्रेन है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसे एंडीज स्ट्रेन कहा जा रहा है। यह सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में फैल सकता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन इसके लिए अत्यधिक करीबी संपर्क जरूरी होता है। इसलिए एक्सपर्ट्स इसे कोविड-19 के समान खतरा नहीं मानते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्रूज जहाज पर सामने आए मामलों ने लोगों को कोरोना काल की याद दिला दी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ यात्री संक्रमण की पुष्टि से पहले ही विभिन्न देशों में पहुंच गए थे। इसके बाद से यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अभी नियंत्रित है और इसे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीमित प्रकोप</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माना जा रहा है। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विशेषज्ञों का भी मानना है कि हंता वायरस का फैलाव काफी धीमा होता है। यह कोविड की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता और न ही बिना लक्षण वाले रोगियों से बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वायरस की म्यूटेशन स्पीड भी कम है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसलिए इसके अचानक बेहद संक्रामक बन जाने की संभावना कम है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील कर रही हैं। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और विभिन्न देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों ने साफ-सफाई बनाए रखने</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चूहों और संक्रमित जानवरों से दूरी रखने और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बदन दर्द</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थकान और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार निगरानी जरूरी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान किसी भी संक्रमण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MP Weather Update: मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी, 10 जिलों में लू का अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[दिन के साथ रातें भी गर्म, तापमान 43 डिग्री के पार पहुंचाप्रदेश में गर्मी ने अप्रैल में ही रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।मौसम विभाग ने कई जिलों में लू और गर्म रातों को लेकर चेतावनी जारी की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mp-weather-update-severe-heat-in-madhya-pradesh-heat-wave/article-51809"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-weather-(15).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और दिन के साथ-साथ रात का पारा भी तेजी से बढ़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि इस सीजन में पहली बार ‘वॉर्म नाइट’ यानी गर्म रातों और लू की संयुक्त चेतावनी जारी की गई है।प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र सबसे ज्यादा गर्मी की चपेट में हैं। मंगलवार को खजुराहो और नर्मदापुरम सबसे गर्म शहर रहे, जहां अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर सहित कई बड़े शहरों में भी तेज गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है।</p>
<h5><span><strong>कई जिलों में 42 पार पारा</strong></span></h5>
<p>मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सीधी में 42.6 डिग्री, नौगांव में 42.5 डिग्री और रायसेन में 42.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।इसके अलावा रतलाम, सतना, नरसिंहपुर, रीवा और टीकमगढ़ समेत कई जिलों में तापमान 41 डिग्री से ऊपर बना हुआ है।भोपाल और ग्वालियर में तापमान 40 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया, जबकि इंदौर में पारा 39.9 डिग्री तक पहुंच गया।</p>
<h5><span><strong>रात में भी नहीं राहत</strong></span></h5>
<p>दिन की तपिश के साथ रातें भी गर्म होती जा रही हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।भोपाल समेत कई शहरों में रात का तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिसे ‘वॉर्म नाइट’ की स्थिति माना जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म हवाओं और साफ आसमान के कारण रात में तापमान नीचे नहीं गिर पा रहा है, जिससे शरीर को राहत नहीं मिल रही।</p>
<h5><span><strong>इन जिलों में लू का अलर्ट</strong></span></h5>
<p>मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है।ग्वालियर, छतरपुर, आलीराजपुर, दतिया, भिंड, टीकमगढ़, धार, रतलाम और झाबुआ जिलों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है।अधिकारियों के अनुसार, दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं से बचने की सलाह दी गई है।</p>
<h5><span><strong>प्रभाव और सावधानियां</strong></span></h5>
<p>भीषण गर्मी का असर आम जनजीवन के साथ स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।डॉक्टरों का कहना है कि डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान के मामले बढ़ सकते हैं, इसलिए लोगों को पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचने की सलाह दी गई है।</p>
<h3> </h3>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 10:03:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिलाई में पीलिया का खतरा बढ़ा, बीएसपी ने पाइपलाइन बदलने का काम तेज किया</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी, प्रभावित इलाकों में कैंप और सैंपलिंग बढ़ाई गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/risk-of-jaundice-increased-in-bhilai-bsp-expedited-the-work/article-51029"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(14).jpg" alt=""></a><br /><p>भिलाई में पीलिया (जॉन्डिस) के बढ़ते मामलों ने प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। शहर के कई इलाकों में संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और सैंपलिंग तेज कर दी है। वहीं, बीएसपी प्रबंधन ने वर्षों पुरानी पाइपलाइन को बदलने का काम भी शुरू कर दिया है, जिसे संक्रमण का संभावित कारण माना जा रहा है।</p>
<p>भिलाई नगर में लगातार पीलिया के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। प्रभावित क्षेत्रों में पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं और उनकी जांच की जा रही है। इसके साथ ही विभाग की टीम नियमित रूप से स्थिति की मॉनिटरिंग कर रही है ताकि संक्रमण के स्रोत का पता लगाया जा सके।</p>
<p><strong>कैसे फैल रहा संक्रमण</strong><br />प्राथमिक जांच में सामने आया है कि पुराने और जर्जर पाइपलाइन सिस्टम से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कई पाइपलाइनें नालों के भीतर से गुजरती थीं, जिससे दूषित पानी की आपूर्ति की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण बीएसपी प्रबंधन ने पाइपलाइन को बदलने का काम शुरू किया है और उन्हें सड़क के ऊपर से सुरक्षित तरीके से शिफ्ट किया जा रहा है।</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाने की तैयारी की है, ताकि लोगों की जांच की जा सके और शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज शुरू हो सके। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों को साफ पानी के उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है।</p>
<p><strong>लक्षणों को लेकर चेतावनी</strong><br />विभाग ने स्पष्ट किया है कि पीलिया के शुरुआती लक्षणों में भूख कम लगना, पेशाब का पीला होना, उल्टी, सिर दर्द, थकान और आंखों तथा त्वचा का पीला पड़ना शामिल है। संक्रमण आमतौर पर दूषित पानी और खराब भोजन से फैलता है और इसके लक्षण 15 से 50 दिनों के भीतर सामने आ सकते हैं।</p>
<p>फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और बीएसपी की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार कार्य तेजी से जारी है। प्रशासन का दावा है कि हालात पर नियंत्रण पाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/risk-of-jaundice-increased-in-bhilai-bsp-expedited-the-work/article-51029</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:11:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली से पहले खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 27 क्विंटल मावा-पनीर जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में मिलावट की आशंका पर तड़के छापा; नमूने लैब भेजे गए, रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-action-by-food-department-before-holi-27-quintals-of/article-47395"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh---2026-02-28t131301.506.jpg" alt=""></a><br /><p>राजधानी भोपाल में होली से ठीक पहले खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 27 क्विंटल मावा और पनीर की खेप जब्त की है। शुक्रवार तड़के करीब चार बजे खजूरी सड़क स्थित टोल प्लाजा के पास एक वाहन को रोककर यह कार्रवाई की गई। विभाग के अनुसार जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत छह लाख रुपये से अधिक है। मामले में नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p>मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बड़ी मात्रा में मावा और पनीर की खेप ग्वालियर से भोपाल लाई जा रही है। सूचना के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने पुलिस बल के साथ मिलकर रात से ही निगरानी शुरू कर दी थी। संदिग्ध वाहन के टोल प्लाजा पहुंचते ही उसे रोका गया। प्रारंभिक पूछताछ में चालक ने शहर में डिलीवरी के लिए सामग्री लाने की बात स्वीकार की।</p>
<p>अधिकारियों ने मौके पर जांच के दौरान 27 क्विंटल मावा और 45 किलो पनीर बरामद किया। गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर पांच-पांच नमूने लेकर राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं। विभाग ने परीक्षण प्रक्रिया को प्राथमिकता देने के लिए संबंधित प्रयोगशाला को पत्र भी भेजा है, ताकि रिपोर्ट शीघ्र प्राप्त हो सके। सरकारी अपडेट के रूप में विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>पृष्ठभूमि के तौर पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने बताया कि होली के दौरान राजधानी में मावा और पनीर की मांग कई गुना बढ़ जाती है। अनुमान है कि त्योहार के समय शहर में 200 क्विंटल से अधिक मावा और 500 क्विंटल से ज्यादा पनीर की खपत होती है। बढ़ती मांग के साथ मिलावट की आशंका भी बढ़ती है, इसलिए विभाग ने शहर भर में विशेष जांच अभियान तेज किया है। पिछले एक माह में 200 से अधिक नमूने जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। </p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 13:14:56 +0530</pubDate>
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