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                <title>India News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त संसदीय समिति का दावा- अधिकांश लोगों ने किया समर्थन, राज्यों से सुझाव लेकर तैयार हो रहा रोडमैप; संवैधानिक संशोधन और राजनीतिक सहमति होगी सबसे बड़ी चुनौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparation-to-implement-one-nation-one-election-by-2029-intensifies/article-58506"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/one-nation-one-election-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश में लंबे समय से चर्चा का विषय बने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की दिशा में केंद्र सरकार और संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) तेजी से आगे बढ़ रही है। समिति का लक्ष्य वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव तक इस व्यवस्था को लागू करने की संभावनाओं को मजबूत करना है। समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा है कि अब तक हुई बैठकों और विचार-विमर्श में शामिल लगभग 99 प्रतिशत लोगों, संगठनों और विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">जेपीसी ने हाल ही में गोवा का दौरा कर मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्यों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से इस विषय पर चर्चा की। समिति के सदस्य और सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का प्रभाव छोटे राज्यों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यदि गोवा जैसे छोटे राज्य में चुनावी प्रक्रिया का प्रशासनिक और आर्थिक असर इतना अधिक है, तो बड़े राज्यों और पूरे देश पर इसका प्रभाव और भी व्यापक होता है। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी और सरकारें विकास कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति का अगला दौरा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित है। यहां मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद समिति 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर संसद में पेश करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की रणनीति तय करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मूल उद्देश्य लोकसभा, राज्य विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव अलग-अलग समय पर कराने के बजाय एक निर्धारित चुनावी चक्र के तहत एक साथ कराना है। समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावों पर होने वाला भारी सरकारी खर्च कम होगा, बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे और प्रशासनिक मशीनरी का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इस व्यवस्था को लागू करना आसान नहीं माना जा रहा है। इसके लिए संविधान के कई महत्वपूर्ण अनुच्छेदों में संशोधन करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार अनुच्छेद 83, 172 और 356 सहित कई संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव आवश्यक होगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ देश के कम से कम आधे राज्यों की मंजूरी भी जरूरी होगी। यही कारण है कि सरकार राजनीतिक सहमति बनाने पर विशेष जोर दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ा सवाल उन राज्यों को लेकर है जिनकी विधानसभा का कार्यकाल वर्ष 2029 के बाद तक रहेगा। ऐसे राज्यों के कार्यकाल को समय से पहले समाप्त कर साझा चुनावी चक्र में शामिल करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। वहीं जिन राज्यों का कार्यकाल 2029 से पहले समाप्त होगा, वहां सीमित अवधि के लिए चुनाव कराने या अन्य संवैधानिक विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। यदि किसी राज्य की सरकार बीच कार्यकाल में गिर जाती है, तो प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मध्यावधि चुनाव केवल शेष कार्यकाल के लिए कराए जाने की संभावना है, ताकि निर्धारित चुनावी चक्र प्रभावित न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार इस व्यवस्था को लागू करने के लिए 'टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल' पर भी विचार कर रही है। इस मॉडल के तहत पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के बजाय इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में वर्ष 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ लगभग 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके बाद वर्ष 2034 तक शेष राज्यों को भी इसी चुनावी चक्र में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इस मॉडल से विधानसभाओं के कार्यकाल में अत्यधिक कटौती या विस्तार की आवश्यकता कम होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विषय पर संवैधानिक विशेषज्ञ भी अपनी राय दे रहे हैं। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि संविधान में इस दिशा में बदलाव की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है, लेकिन व्यापक राजनीतिक सहमति के बिना इसे लागू करना कठिन होगा। अतीत में भी विशेष परिस्थितियों में लोकसभा और विधानसभा के कार्यकाल में परिवर्तन किए जा चुके हैं। इसलिए कानूनी दृष्टि से यह पूरी तरह असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए संसद और राज्यों के बीच सहमति आवश्यक होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने करीब 191 दिनों तक विभिन्न विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं और अन्य हितधारकों से चर्चा की। विस्तृत अध्ययन के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी थी। अब उसी रिपोर्ट और जेपीसी की सिफारिशों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में स्वतंत्रता के बाद शुरुआती चार आम चुनावों तक लोकसभा और अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे। वर्ष 1952, 1957, 1962 और 1967 में यह व्यवस्था बनी रही। लेकिन 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें समय से पहले गिरने लगीं। 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं भंग हुईं, जबकि 1970 में लोकसभा भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग कर दी गई। इसके बाद चुनावों का साझा चक्र टूट गया और अलग-अलग समय पर चुनाव होने लगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुणे और सोलापुर में आज स्पेशल पासपोर्ट ड्राइव, सामान्य और तत्काल आवेदकों को मिलेगा मौका</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय की पहल के तहत आयोजित स्पेशल पासपोर्ट ड्राइव में पुणे पासपोर्ट सेवा केंद्र पर सामान्य और तत्काल, जबकि सोलापुर केंद्र पर सामान्य श्रेणी के आवेदकों के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/special-passport-drive-today-in-pune-and-solapur-general-and/article-58474"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/passport-seva-kendra.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">विदेश मंत्रालय की पहल के तहत नागरिकों को पासपोर्ट सेवाएं अधिक तेज और सुगम बनाने के उद्देश्य से शनिवार, 11 जुलाई को पुणे और सोलापुर में विशेष पासपोर्ट अभियान आयोजित किया जा रहा है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) पुणे की ओर से आयोजित इस विशेष ड्राइव के माध्यम से उन लोगों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्हें जल्द पासपोर्ट की आवश्यकता है या जिन्हें सामान्य नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस विशेष अभियान के तहत पुणे स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) में सामान्य और तत्काल (तत्काल) दोनों श्रेणियों के आवेदकों के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, जबकि सोलापुर पासपोर्ट सेवा केंद्र पर केवल सामान्य श्रेणी के आवेदकों को सुविधा मिलेगी। अभियान सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। अधिकारियों ने सभी आवेदकों से निर्धारित समय से कम से कम 15 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचने की अपील की है, ताकि दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी की जा सकें। इस पहल का उद्देश्य लंबित आवेदनों का दबाव कम करना और नागरिकों को समय पर पासपोर्ट उपलब्ध कराना है।</p>
<p>क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के अनुसार सामान्य श्रेणी के पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले लोगों को पासपोर्ट नियमों के तहत निर्धारित सभी जरूरी दस्तावेज पूरे और सही रूप में प्रस्तुत करने होंगे। अधिकारियों ने कहा है कि आवेदन करने से पहले पात्रता और दस्तावेजों से संबंधित सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। यदि आवेदन के साथ दस्तावेज अधूरे या गलत पाए जाते हैं तो आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा और आवेदक को दोबारा प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। वहीं तत्काल श्रेणी में आवेदन करने वालों के लिए नियम और अधिक सख्त हैं। इस योजना के तहत अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होती है और पात्रता संबंधी मानदंड भी अलग हैं। पासपोर्ट विभाग का कहना है कि कई बार लोग बिना पूरी जानकारी के तत्काल योजना के तहत आवेदन कर देते हैं, जिसके कारण उनका आवेदन स्वीकार नहीं हो पाता। इसलिए आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन से पहले तत्काल योजना से जुड़े दिशा-निर्देश, आवश्यक दस्तावेज और पात्रता की शर्तों की पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। इससे नियुक्ति वाले दिन किसी प्रकार की परेशानी से बचा जा सकेगा। पासपोर्ट अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक आवेदन की जांच पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर पासपोर्ट प्राधिकरण अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज भी मांग सकता है। ऐसे में आवेदकों को सभी मूल दस्तावेज और उनकी आवश्यक प्रतियां साथ लेकर आने की सलाह दी गई है।</p>
<p>विशेष पासपोर्ट अभियान के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक आवेदकों को पहले पासपोर्ट सेवा पोर्टल या एमपासपोर्ट सेवा मोबाइल ऐप के माध्यम से सामान्य या तत्काल श्रेणी में आवेदन करना होगा। इसके बाद निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करने के पश्चात 'शेड्यूल अपॉइंटमेंट' विकल्प के जरिए अपनी पसंद के अनुसार पुणे या सोलापुर पासपोर्ट सेवा केंद्र का चयन कर 11 जुलाई की विशेष ड्राइव के लिए समय स्लॉट बुक करना होगा। अधिकारी केवल उन्हीं आवेदकों को प्रवेश देंगे, जिनके पास ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की पुष्टि होगी। इस विशेष अभियान के दौरान नए पासपोर्ट के साथ-साथ पासपोर्ट के पुनः जारी (री-इश्यू) से जुड़े आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय का मानना है कि इस तरह के विशेष अभियान से पासपोर्ट सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और नागरिकों को पहले की तुलना में जल्दी नियुक्ति मिल सकेगी। विदेश मंत्रालय लगातार पासपोर्ट सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन और विशेष पासपोर्ट अभियान जैसी पहलें इसी प्रयास का हिस्सा हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी दलाल या अनधिकृत व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें और केवल आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से ही आवेदन करें। सही दस्तावेज, समय पर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और निर्धारित नियमों का पालन करने पर आवेदन प्रक्रिया आसानी से पूरी की जा सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:34:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल में 12 जुलाई को होगा कालिदास राष्ट्रीय महर्षि ज्योतिष विज्ञान सम्मेलन का समापन</title>
                                    <description><![CDATA[दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से आए 300 से अधिक विद्वान, ज्योतिषाचार्य और शोधकर्ता वैदिक ज्योतिष, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत पर मंथन कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/kalidas-national-maharishi-astrology-science-conference-will-conclude-on-12th/article-58472"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kalidas-conference.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल में आयोजित दो दिवसीय कालिदास राष्ट्रीय महर्षि ज्योतिष विज्ञान सम्मेलन अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। 12 जुलाई को सम्मेलन का समापन होगा, जिसमें देशभर से आए विद्वान, ज्योतिषाचार्य, शोधकर्ता और सांस्कृतिक विशेषज्ञ अंतिम सत्रों में भाग लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक ज्योतिष और प्राचीन वैज्ञानिक विचारों पर गंभीर अकादमिक चर्चा को बढ़ावा देना है। इस आयोजन में 300 से अधिक विद्वानों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी दर्ज की गई है। दो दिनों तक चले विभिन्न तकनीकी और शैक्षणिक सत्रों में भारतीय ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न पहलुओं, शोध कार्यों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का मकसद केवल पारंपरिक ज्ञान को याद करना नहीं, बल्कि उसे आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप समझना और शोध के माध्यम से आगे बढ़ाना भी है। यही कारण है कि इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन के दौरान वैदिक ज्योतिष, पंचांग विज्ञान, भारतीय दर्शन, खगोल विज्ञान, संस्कृति और शिक्षा जैसे विषयों पर कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में शोधकर्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया। कई वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक सोच और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणालियां केवल धार्मिक या सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि समाज, शिक्षा और जीवन शैली के अनेक पहलुओं से भी जुड़ी रही हैं। सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए शोध, उच्च शिक्षा और अकादमिक संस्थानों की भूमिका को और मजबूत करने की जरूरत है। प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि प्राचीन ग्रंथों और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक की मदद से संरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे लाभ उठा सकें। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों को एक साझा मंच मिला, जहां उन्होंने अपने शोध अनुभव साझा किए और भारतीय ज्योतिष विज्ञान से जुड़े नए दृष्टिकोणों पर चर्चा की। आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे, जिनमें भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। इन प्रस्तुतियों ने सम्मेलन के शैक्षणिक वातावरण को सांस्कृतिक रंग भी प्रदान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन के समापन दिवस पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। अंतिम दिन समापन सत्र, विशिष्ट विद्वानों के मुख्य व्याख्यान और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण तथा संवर्धन पर विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत शोधपत्रों और प्रमुख निष्कर्षों का भी सार प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से देशभर के शोधकर्ताओं, शिक्षकों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर नए शोध को प्रोत्साहन मिलता है। सम्मेलन में शामिल विद्वानों ने शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि प्राचीन ज्ञान को समकालीन संदर्भों में नई पहचान मिल सके। भोपाल में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। दो दिनों तक चले इस आयोजन ने न केवल देशभर के विशेषज्ञों को एक मंच पर जोड़ा, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक ज्योतिष और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर नए विचारों और शोध को भी गति दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्र का नया निर्देश: सरकारी कार्यक्रमों में पहले वंदे मातरम्, फिर होगा जन-गण-मन</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक शब्द, सही उच्चारण और निर्धारित क्रम का पालन अनिवार्य बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/centres-new-instructions-first-vande-mataram-and-then-jana-gana-mana-in/article-58450"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vande-mataram.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन-गण-मन के गायन और वादन को लेकर एक बार फिर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों शामिल किए जाते हैं, वहां पहले वंदे मातरम् और उसके बाद जन-गण-मन प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यह व्यवस्था पहले से निर्धारित नियमों के अनुरूप है और सभी संबंधित विभागों को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। 9 जुलाई को जारी इस पत्र की जानकारी अब सामने आई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन राज्यों का अपना राज्य गीत है, वहां भी निर्धारित क्रम में पहले राष्ट्रगीत और फिर राष्ट्रगान का पालन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, उद्देश्य पूरे देश में एक समान प्रोटोकॉल लागू करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।</p>
<p>निर्देश में राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान हमेशा उनके आधिकारिक और मूल शब्दों के साथ ही गाए या बजाए जाएं। उच्चारण, प्रस्तुति और समय से जुड़े तय मानकों का भी पालन किया जाना जरूरी होगा। इसके लिए दोनों की आधिकारिक प्रतियां मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई हैं ताकि किसी तरह की त्रुटि या भ्रम की स्थिति न बने। मंत्रालय ने संबंधित विभागों और संस्थानों से कहा है कि कार्यक्रम आयोजित करते समय इन्हीं अधिकृत संस्करणों का उपयोग किया जाए। बताया जा रहा है कि यह दूसरा अवसर है जब केंद्र सरकार ने इस विषय पर राज्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले 28 जनवरी को भी इसी संबंध में आदेश जारी किया गया था। उस समय स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से करने, वंदे मातरम् के दौरान सभी लोगों के खड़े रहने और पूरे छह अंतरे गाने की बात कही गई थी। छह अंतरों को गाने की कुल अवधि लगभग तीन मिनट दस सेकंड बताई गई थी, जबकि पहले सामान्य तौर पर केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाते थे। हालांकि, सिनेमाघरों को इन नियमों से अलग रखा गया था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम् बजाना या दर्शकों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। इसी तरह यदि किसी समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाता है, तो उस दौरान दर्शकों के लिए खड़ा होना आवश्यक नहीं माना जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और देश के इतिहास में विशेष स्थान रहा है। इसे साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था और बाद में 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में इसे शामिल किया गया। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सार्वजनिक मंच से वंदे मातरम् का गायन किया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख नारा भी बना। संस्कृत भाषा के इस वाक्यांश का अर्थ है, "हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूं।" आजादी के बाद इसे राष्ट्रगीत का दर्जा मिला और तब से यह राष्ट्रीय समारोहों और विशेष अवसरों पर सम्मानपूर्वक गाया जाता है। हाल के वर्षों में भी वंदे मातरम् राष्ट्रीय आयोजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है। इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की थीम भी वंदे मातरम् रखी गई थी। संस्कृति मंत्रालय ने इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष झांकी प्रस्तुत की थी, जिसे मंत्रालयों और विभागों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार भी मिला। वहीं, संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस भी देखने को मिली थी। विभिन्न दलों ने इसके इतिहास, महत्व और प्रस्तुति को लेकर अपने-अपने पक्ष रखे थे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी चर्चा हुई थी, जिसमें ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े संदर्भ भी सामने आए थे। हालांकि, केंद्र सरकार के ताजा निर्देश प्रशासनिक स्तर पर तय प्रोटोकॉल के पालन पर केंद्रित हैं। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीतों के सम्मान से जुड़े नियमों का एक समान अनुपालन देशभर में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दतिया उपचुनाव में BJP का बड़ा सरप्राइज, आशुतोष तिवारी को मिला टिकट; नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा ने उम्मीदवार घोषित किया, चुनावी तैयारियों में जुटे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को नहीं मिला मौका; कांग्रेस और अन्य दल भी तेज कर रहे प्रचार अभियान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjps-big-surprise-ashutosh-tiwari-got-ticket-in-datia-by-election/article-58439"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का फैसला किया है। इस घोषणा के साथ ही दतिया की राजनीति में कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। खास बात यह रही कि पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा था। उन्होंने चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं, कई जनसभाएं कर चुके थे और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, लेकिन अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। भाजपा ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब दतिया उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ चुकी हैं। उम्मीदवार घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया और पार्टी ने चुनाव प्रचार को नई गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन अब आशुतोष तिवारी को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति बना रहा है। आशुतोष तिवारी भाजपा संगठन के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने वर्षों तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। संगठन और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें इस महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना है। हालांकि, इस फैसले ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को जरूर चौंकाया है। चुनाव की घोषणा के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने कई सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया और लोगों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में समर्थक भी पहुंचे थे, जिससे यह माना जा रहा था कि पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जता सकती है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt="BJP Candidate" width="1366" height="1556"></img></p>
<p>चुनावी अभियान के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने अपने संबोधनों में जनता से भावनात्मक अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनसे पूर्व में कोई गलती हुई हो तो लोग उन्हें क्षमा करें। उन्होंने अपने व्यवहार में बदलाव लाने की बात भी कही थी और भरोसा दिलाया था कि भविष्य में जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उनकी यह अपील राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बनी रही। इसके अलावा एक अन्य जनसभा में उन्होंने कांग्रेस के आरोपों का भी जवाब दिया था। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि भाजपा सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है और बेबुनियाद आरोपों का कोई आधार नहीं है। इन बयानों के जरिए वे चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे थे। भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। कांग्रेस भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। दूसरी ओर अन्य राजनीतिक दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। दतिया सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की कानूनी लड़ाई भी चर्चा में रही। उनकी ओर से दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद कांग्रेस के सामने भी उम्मीदवार चयन को लेकर नई परिस्थितियां बनीं। राजेंद्र भारती ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि पार्टी चाहे तो उनके परिवार के बजाय किसी अन्य नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है और वे पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। दतिया उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया भी जारी है। अब तक कई उम्मीदवार नामांकन पत्र खरीद चुके हैं और कुछ ने अपने नामांकन दाखिल भी कर दिए हैं। चुनाव आयोग की तय समय-सीमा के अनुसार आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दल प्रचार अभियान को और तेज करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:53:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>30 साल से हर दिन चीलों को दाना खिला रहे 'ईगल मैन' अजीजका, एक सीटी पर उमड़ पड़ते हैं सैकड़ों शिकारी पक्षी</title>
                                    <description><![CDATA[केरल के कोझिकोड बीच पर हर दोपहर देखने को मिलता है अनोखा नजारा, इंसान और वन्यजीवों के भरोसे की मिसाल बने अजीजका, आवारा जानवरों की भी करते हैं सेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/eagle-man-azizka-has-been-feeding-the-eagles-every-day/article-58438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/eagle-man.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दुनिया में इंसान और जानवरों के बीच प्रेम और विश्वास की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन केरल के कोझिकोड (कालीकट) से सामने आई एक कहानी इन सबसे अलग और बेहद प्रेरणादायक है। यहां रहने वाले अजीज, जिन्हें लोग प्यार से 'ईगल मैन' अजीजका के नाम से जानते हैं, पिछले 30 से भी अधिक वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के हर दिन सैकड़ों शिकारी चीलों और आवारा जानवरों को भोजन करा रहे हैं। उनकी यह अनूठी सेवा न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी हैरान कर देती है। अजीजका का जीवन किसी नियमित दिनचर्या की तरह चलता है। चाहे मौसम कैसा भी हो, तेज बारिश हो, भीषण गर्मी हो या फिर त्योहार का दिन, वे अपनी सेवा में कभी विराम नहीं देते। हर दिन दोपहर ठीक 2 बजे वे अपनी पुरानी साइकिल पर चिकन के टुकड़ों से भरा एक बोरा लेकर अपने घर से निकलते हैं। उनका गंतव्य हमेशा एक ही होता है—कोझिकोड बीच, जहां सैकड़ों पक्षी और कई आवारा जानवर उनका इंतजार कर रहे होते हैं। बीच पर पहुंचने के बाद जो दृश्य दिखाई देता है, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं होता। अजीजका जैसे ही अपनी खास अंदाज वाली सीटी बजाते हैं, कुछ ही क्षणों में आसमान में उड़ रही सैकड़ों चीलें उनकी ओर तेजी से आने लगती हैं। देखते ही देखते पूरा आसमान चीलों से भर जाता है और वे अजीजका के चारों ओर मंडराने लगती हैं। यह नजारा इतना अद्भुत होता है कि वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए मंत्रमुग्ध रह जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि चीलों को स्वभाव से बेहद आक्रामक और शिकारी पक्षी माना जाता है। आमतौर पर ये पक्षी अपने शिकार पर तेज गति से हमला करते हैं और इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन अजीजका के साथ इनका व्यवहार बिल्कुल अलग है। वर्षों से बना विश्वास इतना गहरा हो चुका है कि सैकड़ों चीलें उनके बेहद करीब आकर आराम से भोजन करती हैं, लेकिन उन्हें कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रिश्ता एक-दो दिन या कुछ महीनों में नहीं बना। अजीजका ने लगातार तीन दशक तक बिना किसी लालच के इन पक्षियों की सेवा की है। उनकी नियमितता और समर्पण ने चीलों के मन में भरोसा पैदा किया, जिसका परिणाम आज दुनिया के सामने एक अनोखे उदाहरण के रूप में दिखाई देता है। अजीजका सिर्फ चीलों तक ही सीमित नहीं हैं। वे बीच के आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को भी भोजन कराते हैं। उनके लिए यह केवल सेवा नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य बन चुका है। उनका मानना है कि इंसानों की तरह जानवरों को भी भूख लगती है और यदि हम सक्षम हैं तो हमें उनकी मदद जरूर करनी चाहिए। कोझिकोड बीच पर आने वाले पर्यटक अक्सर इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते हैं। सोशल मीडिया पर अजीजका के वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं। लोग उन्हें "ईगल मैन" के नाम से पहचानते हैं और उनकी तुलना प्रकृति के सच्चे मित्र से करते हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि अजीजका को चीलों की "स्पेशल सिक्योरिटी" मिली हुई है, क्योंकि उनके आसपास सैकड़ों चीलें सुरक्षा घेरे की तरह मंडराती रहती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/eagle-man-azizka-has-been-feeding-the-eagles-every-day/article-58438</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:51:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखी सजा</title>
                                    <description><![CDATA[सात मामलों में दोषसिद्धि कायम, तीन महीने की सजा के साथ करोड़ों रुपये मुआवजा देने का आदेश; अदालत ने समझौते की शर्तें पूरी नहीं करने पर जताई नाराजगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/shock-to-actor-rajpal-yadav-in-check-bounce-case-delhi/article-58423"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/rajpal-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सात अलग-अलग चेक बाउंस मामलों में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए अभिनेता को कुल तीन महीने की ही जेल काटनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता को करोड़ों रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत द्वारा दिए गए निर्णय और मुआवजे की गणना में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। अदालत ने माना कि पहले किए गए भुगतानों को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की राशि तय की गई है। कोर्ट ने राजपाल यादव को प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त एक अन्य राशि और राज्य को 25 हजार रुपये देने का आदेश भी दिया गया। वहीं उनकी पत्नी राधा यादव को भी प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 5.51 लाख रुपये का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सुनवाई के दौरान अभिनेता को कई अवसर दिए गए थे ताकि वह विवाद का आपसी सहमति से समाधान कर सकें। राजपाल यादव की ओर से बार-बार अदालत को भरोसा दिलाया गया कि वह बकाया राशि का भुगतान कर देंगे और समझौते का पालन करेंगे। लेकिन अदालत के अनुसार उन्हें पर्याप्त समय और अवसर मिलने के बावजूद वे अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान अभिनेता ने पहले समझौते की इच्छा जताई, लेकिन बाद में अतिरिक्त भुगतान करने से इनकार कर दिया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने यह तक कहा कि यदि भुगतान संभव नहीं है तो वह जेल जाने के लिए तैयार हैं। इसी कारण अदालत ने माना कि अब इस मामले में राहत देने का कोई आधार नहीं बचता। यह पूरा मामला वर्ष 2010 में लिए गए एक बड़े ऋण से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार राजपाल यादव ने फिल्म निर्माण और निर्देशन के उद्देश्य से एक निजी कंपनी से लगभग पांच करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। यह राशि उनकी फिल्म "अता पता लापता" के निर्माण में लगाई गई थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी, जिससे अभिनेता आर्थिक संकट में आ गए और समय पर ऋण नहीं चुका पाए। समय के साथ ब्याज, जुर्माना और भुगतान में देरी के कारण यह बकाया राशि बढ़कर लगभग नौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस बीच कर्ज चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बैंक से बाउंस हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ता कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया और अभिनेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। मामले की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने कई बार अदालत से अतिरिक्त समय मांगा। उन्होंने कुछ किस्तों में भुगतान भी किया। अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि अभिनेता पहले ही लगभग 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं और इस राशि को अंतिम मुआवजे में समायोजित किया जाएगा। बावजूद इसके बड़ी रकम अभी भी बकाया है, जिसके कारण अदालत ने सजा और मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि पूर्व में दी गई राहत केवल इस भरोसे पर आधारित थी कि अभिनेता निर्धारित समय के भीतर समझौते की शर्तों का पालन करेंगे। लेकिन बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद भुगतान पूरा नहीं किया गया। अदालत ने तकनीकी या टाइपिंग संबंधी त्रुटियों के कारण भुगतान में देरी के तर्क को भी स्वीकार नहीं किया और कहा कि ये दलीलें विश्वसनीय नहीं हैं। इस मामले में पहले भी राजपाल यादव को अदालत के निर्देश पर आत्मसमर्पण करना पड़ा था और उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया था। बाद में उन्होंने अदालत में 25 लाख रुपये का चेक प्रस्तुत कर शेष राशि का भुगतान करने का आश्वासन देते हुए राहत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि पहले आत्मसमर्पण आवश्यक है और उसके बाद ही किसी राहत पर विचार किया जा सकता है। अभिनेता ने सुनवाई के दौरान अपनी आर्थिक कठिनाइयों का भी जिक्र किया था। उन्होंने अदालत से कहा कि उनके पास भुगतान के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है और वह आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। हालांकि अदालत ने कहा कि केवल आर्थिक कठिनाई के आधार पर कानूनी दायित्वों से बचा नहीं जा सकता।राजपाल यादव के समर्थन में फिल्म उद्योग के कुछ कलाकार भी सामने आए। अभिनेता सोनू सूद ने सार्वजनिक रूप से कहा कि राजपाल यादव बेहद प्रतिभाशाली कलाकार हैं और कठिन समय में फिल्म उद्योग को उनके साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी फिल्म में काम देकर अग्रिम राशि दी जाएगी, जिसे भविष्य के काम के बदले समायोजित किया जाएगा। सोनू सूद ने इसे दान नहीं बल्कि सम्मान और गरिमा बनाए रखने का प्रयास बताया। अभिनेता गुरमीत चौधरी ने भी राजपाल यादव के समर्थन में आवाज उठाई और फिल्म जगत से सहयोग की अपील की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>करूर हादसे पर भावुक हुए सीएम विजय, पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल, भीड़ प्रबंधन में लापरवाही का लगाया आरोप; हादसे में जान गंवाने वालों की याद में स्मारक बनाने का किया ऐलान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/cm-vijay-became-emotional-over-karur-accident-and-raised-questions/article-58416"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cm-vijay.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय ने करूर भगदड़ हादसे के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से इस घटना पर विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी। करूर पहुंचकर आयोजित सभा में मुख्यमंत्री विजय ने हादसे को अपनी राजनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा और सबसे गहरा घाव बताया। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी ने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहरा आघात पहुंचाया है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भीड़ प्रबंधन को लेकर पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में कई तरह की चुनौतियां और कठिन परिस्थितियां सामने आती हैं, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिन्हें जीवन भर भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि करूर की घटना उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम में हुई दुर्घटना नहीं, बल्कि ऐसा दर्द है जिसे वे हमेशा अपने साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने कहा कि इस हादसे में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनमें कई बच्चे भी शामिल थे, जिनकी याद उन्हें लगातार विचलित करती है। अपने संबोधन में विजय ने कहा कि उनकी राज्यव्यापी 'पीपल्स मीट' यात्रा का उद्देश्य प्रदेश के लोगों से सीधे संवाद करना, उनकी समस्याओं को समझना और जनसंपर्क मजबूत करना था। इसी क्रम में करूर में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में प्रशासन और पुलिस के साथ लगातार समन्वय बनाया गया था ताकि कार्यक्रम सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि करूर कार्यक्रम से पहले पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें किसी भी प्रकार की विशेष चेतावनी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस को यह महसूस हो रहा था कि कार्यक्रम स्थल पर अत्यधिक भीड़ एकत्रित होने वाली है या सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, तो कार्यक्रम को स्थगित करने या आवश्यक बदलाव करने का सुझाव दिया जा सकता था। उनके अनुसार पुलिस के पास ऐसा करने का अधिकार भी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। विजय ने कहा कि उन्होंने पुलिस प्रशासन पर पूरा भरोसा किया था और कार्यक्रम के दौरान भी अधिकारियों का धन्यवाद किया था। उन्हें विश्वास था कि सभी व्यवस्थाएं उचित ढंग से की गई हैं। लेकिन हादसे के बाद जब पूरे घटनाक्रम की जानकारी सामने आई तो उन्हें गहरा दुख हुआ। उन्होंने कहा कि यदि भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम होते तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद क्या पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों और अन्य लोगों को याद करते हुए भावुक शब्दों में कहा कि कई बच्चे उनसे मिलने और कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, लेकिन दुर्भाग्यवश वे इस दुनिया से चले गए। उन्होंने कहा कि यह क्षति उनके लिए बेहद व्यक्तिगत है और इसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने सभी दिवंगत लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके साथ खड़ी है। इस दौरान विजय ने यह भी कहा कि हादसे के बाद उन्हें कई तरह की आलोचनाओं और आरोपों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में भी उनके ऊपर विभिन्न प्रकार के सवाल उठाए गए, जबकि उनकी प्राथमिकता केवल प्रभावित परिवारों की सहायता और स्थिति को संभालना थी। उन्होंने कहा कि किसी भी त्रासदी को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए और ऐसे संवेदनशील मामलों में सभी पक्षों को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में एक स्मारक बनाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि तमिलगा वेत्री कड़गम की ओर से करूर में स्मारक का निर्माण कराया जाएगा ताकि भविष्य की पीढ़ियां इस घटना को याद रख सकें और ऐसी त्रासदियों से सबक लिया जा सके। उन्होंने कहा कि स्मारक केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं होगा बल्कि यह जनसुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व का संदेश भी देगा। सभा के दौरान विजय ने प्रशासनिक जवाबदेही, बेहतर भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन और आयोजकों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा, अभद्र व्यवहार पर याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट की गरिमा का उल्लंघन किया, सुरक्षा कर्मियों ने बाहर निकाला; अदालत ने अवमानना की कार्रवाई से परहेज करते हुए याचिका खारिज की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-during-hearing-in-supreme-court-petition-on-indecent-behavior/article-58413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/supreme-court-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने कुछ समय के लिए कोर्ट रूम का माहौल पूरी तरह बदल दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने अदालत में अभद्र व्यवहार किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने न केवल आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया बल्कि अदालत की कार्यवाही के बीच फाइल भी उछाल दी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और संबंधित वकील को कोर्ट रूम से बाहर ले जाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के समक्ष आया जिसमें जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे सुनवाई कर रहे थे। याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर की गई थी और याचिकाकर्ता स्वयं अधिवक्ता के रूप में अपना पक्ष रख रहे थे। शुरुआत से ही उनका रवैया आक्रामक बताया गया। अदालत की कार्यवाही के दौरान उन्होंने लगातार ऊंची आवाज में अपनी बात रखी और न्यायालय की प्रक्रिया पर असंतोष जताया। सुनवाई के दौरान स्थिति तब गंभीर हो गई जब उन्होंने अदालत में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और गुस्से में केस से जुड़े दस्तावेज हवा में उछाल दिए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कुछ क्षणों के लिए कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए। न्यायिक कार्यवाही के दौरान इस तरह के व्यवहार को देखते हुए सुरक्षा कर्मी तुरंत सक्रिय हुए और संबंधित वकील को अदालत कक्ष से बाहर ले गए, जिससे आगे की कार्यवाही शांतिपूर्वक जारी रह सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वकील ने सुनवाई के दौरान न्यायालय से एक विशेष आदेश जारी करने की मांग की थी। उन्होंने कथित रूप से कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। इस पर पीठ ने उनसे सवाल किया कि क्या वे अदालत को आदेश दे रहे हैं। इसके बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। वकील ने अपनी बात दोहराने के बाद दस्तावेज फेंक दिए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। घटना के दौरान कोर्ट रूम में मौजूद कई अधिवक्ता और अन्य लोग कुछ समय के लिए असहज हो गए। अचानक हुए इस घटनाक्रम के कारण कार्यवाही कुछ देर के लिए प्रभावित हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रहने से स्थिति जल्द सामान्य हो गई। अदालत ने शांति बनाए रखते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद जस्टिस के. वी. विश्वनाथन ने कहा कि संबंधित व्यक्ति स्पष्ट रूप से मानसिक और भावनात्मक दबाव में दिखाई दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अदालत को उनके प्रति सहानुभूति है और इस पूरे घटनाक्रम को हताशा के रूप में देखा जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से दंडित करना नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष और संतुलित बनाए रखना है। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने इस मामले में वकील के खिलाफ तत्काल अवमानना की कार्रवाई करने का निर्णय नहीं लिया। हालांकि, पीठ ने याचिका के गुण-दोष पर विचार करने के बाद स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया। इसी कारण विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खाद कालाबाजारी पर सरकार का बड़ा एक्शन, कृषि मंत्री ने दी सख्त चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[अंबिकापुर दौरे में कृषि मंत्री रामविचार नेताम की दोटूक चेतावनी, खाद वितरण व्यवस्था की होगी कड़ी निगरानी, किसानों को समय पर उपलब्ध होगी पर्याप्त खाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/governments-big-action-on-black-marketing-of-fertilizers-agriculture-minister/article-58387"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-agriculture-minister.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने खाद की कालाबाजारी और किसानों के हितों से जुड़े मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अंबिकापुर दौरे के दौरान स्पष्ट कहा कि खाद की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका ऐसे लोगों को संरक्षण देने में सामने आती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसानों के हितों से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि खेती का मौसम शुरू होते ही किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति या समूह खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर मुनाफाखोरी करने की कोशिश करता है तो यह सीधे तौर पर किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत को गंभीरता से ले रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि जांच में किसी की भूमिका खाद माफियाओं को संरक्षण देने या अनियमित वितरण में सहयोग करने की सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अंबिकापुर और सरगुजा क्षेत्र में लंबे समय से खाद वितरण को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई किसान संगठनों ने खाद की कालाबाजारी, अनियमित वितरण और कृत्रिम संकट पैदा किए जाने के आरोप लगाए हैं। इसी पृष्ठभूमि में कृषि मंत्री का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को परेशानी में डालने वाले तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसी भी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में खाद की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। विशेष रूप से डीएपी खाद का पर्याप्त भंडारण किया गया है ताकि मांग के अनुसार किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक लगभग 50 प्रतिशत खाद का उठाव किसानों द्वारा किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वितरण प्रक्रिया लगातार जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मानसून की शुरुआत में बारिश में कुछ देरी होने के कारण किसानों में चिंता का माहौल था, लेकिन अब अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी वर्षा होने से खेती की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे समय में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खाद और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता में कोई बाधा न आए। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग की ओर से जिला स्तर पर खाद वितरण की नियमित समीक्षा भी की जा रही है। विभिन्न जिलों में उपलब्ध स्टॉक, मांग और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कहीं भी कृत्रिम संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। सरकार का प्रयास है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो और किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। खेती के मौसम में खाद की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है और सरकार इसे लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कृषि मंत्री ने किसानों से भी अपील की कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और यदि कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही हो, कालाबाजारी की जा रही हो या कृत्रिम कमी पैदा की जा रही हो तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 13:13:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>स्कूल में नशे में धुत मिले हेडमास्टर, जमीन पर लेटकर की गाली-गलौज; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[सूरजपुर के प्राथमिक विद्यालय का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, अभिभावकों में नाराजगी; शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/headmaster-found-drunk-in-school-lying-on-the-ground-and/article-58381"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surajpur-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो ने पूरे जिले में चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कथित रूप से शराब के नशे में जमीन पर पड़े दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, वीडियो में वह अभद्र भाषा और गाली-गलौज करते भी नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो रामानुजनगर विकासखंड के शाल्ही गांव स्थित खोरखोरीपारा प्राथमिक विद्यालय का है। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले शिक्षक की पहचान प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक हरिनंदन सिंह के रूप में की जा रही है। वीडियो में वह कथित तौर पर नशे की हालत में स्कूल परिसर के भीतर जमीन पर लेटे हुए दिखाई देते हैं। आसपास मौजूद लोग जब उनका वीडियो बनाने लगते हैं तो वह गाली-गलौज करते हुए उन्हें धमकाते भी सुनाई देते हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके वायरल होने के बाद पूरे इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई है और स्कूलों में बच्चों की नियमित पढ़ाई शुरू हो चुकी है। ऐसे में विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर लगे आरोपों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक समाज में सम्मानित स्थान रखते हैं और बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होती है। यदि कोई शिक्षक सार्वजनिक रूप से इस तरह के व्यवहार का प्रदर्शन करता है, तो उसका नकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों और पूरे समाज पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद गांव में नाराजगी का माहौल है। कई अभिभावकों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय बच्चों के सीखने और संस्कार ग्रहण करने का स्थान होता है। ऐसे माहौल में यदि शिक्षक अनुशासनहीनता का परिचय देंगे तो शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। बताया जा रहा है कि वीडियो में कथित रूप से हेडमास्टर शराब के नशे में असंतुलित अवस्था में दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें संभालने का प्रयास भी किया, लेकिन वह गुस्से में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते रहे। वीडियो बनाने वालों को भी उन्होंने कथित तौर पर धमकी दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया। मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक स्तर पर रिपोर्ट तलब की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े तथ्यों की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी विद्यालयों में अनुशासन और आचरण के मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:14:16 +0530</pubDate>
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                <title>BSNL ने लॉन्च किया सैटेलाइट फोन, बिना मोबाइल नेटवर्क भी होगी बातचीत; खरीदने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[₹1.34 लाख कीमत वाले सैटेलाइट फोन में SOS इमरजेंसी सपोर्ट, दूरदराज और नेटवर्क विहीन इलाकों में भी मिलेगा भरोसेमंद संचार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/bsnl-launches-satellite-phone-conversation-will-be-possible-even-without/article-58365"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bsnl-satellite-phone.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने देश में एक नई संचार तकनीक की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। यह फोन उन परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करते। इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक मोबाइल टावरों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि सीधे सैटेलाइट नेटवर्क के माध्यम से कॉलिंग और संचार की सुविधा उपलब्ध कराता है। कंपनी ने इसकी कीमत टैक्स सहित 1,34,166 रुपये निर्धारित की है। हालांकि, इसे खरीदना और इस्तेमाल करना आम स्मार्टफोन की तरह आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। भारत में अब तक मोबाइल संचार मुख्य रूप से सेलुलर नेटवर्क पर आधारित रहा है। किसी भी सामान्य स्मार्टफोन को काम करने के लिए मोबाइल टावर और सिम कार्ड की जरूरत होती है। लेकिन सैटेलाइट फोन की तकनीक पूरी तरह अलग है। यह सीधे पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे संचार उपग्रहों से जुड़ता है, जिससे ऐसे स्थानों पर भी संपर्क संभव हो जाता है जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह अनुपलब्ध रहता है। BSNL के इस नए सैटेलाइट फोन को खास तौर पर उन लोगों और संस्थाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिन्हें दूरदराज, पहाड़ी, जंगल, समुद्री क्षेत्र या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी भरोसेमंद संचार व्यवस्था की आवश्यकता होती है। ऐसे क्षेत्रों में अक्सर मोबाइल टावर नहीं होते या किसी आपदा के दौरान नेटवर्क पूरी तरह ठप हो जाता है। ऐसे समय में सैटेलाइट फोन जीवनरक्षक उपकरण साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार, इस फोन में इमरजेंसी परिस्थितियों के लिए SOS सपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यदि कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या अन्य संकट में फंस जाता है, तो वह इस सुविधा के माध्यम से तुरंत सहायता के लिए संपर्क कर सकता है। यही वजह है कि इस प्रकार के फोन का उपयोग सेना, सुरक्षा एजेंसियां, आपदा प्रबंधन विभाग, समुद्री परिवहन, पर्वतारोहण दल और राहत कार्यों में लगे संगठनों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। BSNL ने इस डिवाइस को वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क सेवा प्रदाता 'इनमारसैट' के सहयोग से विकसित किया है। इनमारसैट दुनिया के कई देशों में सैटेलाइट आधारित संचार सेवाएं उपलब्ध कराता है और उसकी तकनीक समुद्री, विमानन और आपातकालीन संचार क्षेत्रों में लंबे समय से इस्तेमाल की जा रही है। इसी वैश्विक नेटवर्क की मदद से यह फोन भारत के दुर्गम इलाकों में भी संचार सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इस फोन को आम उपभोक्ताओं के लिए लॉन्च नहीं किया गया है। भारत में सैटेलाइट फोन के उपयोग को लेकर कड़े कानूनी नियम लागू हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और संचार व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए किसी भी व्यक्ति या संस्था को इस फोन की खरीद से पहले दूरसंचार विभाग (DoT) से अधिकृत अनुमति प्राप्त करनी होगी। बिना सरकारी स्वीकृति के सैटेलाइट फोन खरीदना, रखना या उसका उपयोग करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा और इसके लिए कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। सैटेलाइट फोन की आवश्यकता विशेष परिस्थितियों में सबसे अधिक महसूस होती है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, चक्रवात या भूस्खलन के दौरान अक्सर मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह बंद हो जाते हैं। ऐसे समय में राहत और बचाव कार्यों के लिए लगातार संपर्क बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। सैटेलाइट फोन इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रदान करता है क्योंकि यह मोबाइल टावरों पर निर्भर नहीं रहता।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविध देश में ऐसे कई इलाके हैं जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क सीमित है। हिमालयी क्षेत्र, घने जंगल, समुद्री सीमाएं और कई दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र संचार सुविधाओं के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, इंजीनियर, सुरक्षा बल और शोधकर्ता इस तकनीक का लाभ उठा सकते हैं। हाल के वर्षों में दुनिया भर में सैटेलाइट आधारित संचार तकनीक तेजी से विकसित हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी सैटेलाइट कनेक्टिविटी को मोबाइल सेवाओं से जोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं। भारत में BSNL का यह कदम भविष्य की संचार व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में सैटेलाइट कम्युनिकेशन तकनीक का दायरा और बढ़ सकता है तथा इसका उपयोग केवल विशेष संस्थानों तक सीमित न रहकर आम सेवाओं में भी दिखाई दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वर्तमान समय में इसकी कीमत और कानूनी प्रक्रिया इसे सीमित उपयोग वाला उपकरण बनाती है। लगभग 1.34 लाख रुपये की कीमत होने के कारण यह सामान्य उपभोक्ताओं के लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं माना जा रहा है। इसके अलावा सरकार से अनुमति लेने की अनिवार्यता भी स्पष्ट करती है कि यह फोन विशेष जरूरतों वाले उपयोगकर्ताओं के लिए ही तैयार किया गया है। BSNL का मानना है कि इस तकनीक के जरिए देश के उन हिस्सों तक भी भरोसेमंद संचार सुविधा पहुंचाई जा सकेगी, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क स्थापित करना कठिन है। यह कदम न केवल आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में डिजिटल कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला भी साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:57:03 +0530</pubDate>
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