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                <title>Narendra Modi - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Narendra Modi RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए साझा की पुरानी यादें, भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी, जनकल्याण और भविष्य के सहयोग पर दिया विशेष जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-became-emotional-in-auckland-and-said-i/article-58507"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने न्यूजीलैंड दौरे के अंतिम दिन ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए एक भावुक याद साझा की, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि करीब 25 से 30 वर्ष पहले, जब वे किसी सरकारी पद पर नहीं थे, तब पहली बार न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। उसी यात्रा के दौरान उन्हें एक मफलर, एक कैप और दस्तानों का एक सेट उपहार में मिला था। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन उपहारों में मिला मफलर आज भी उन्होंने संभालकर रखा है और इसी दौरे के दौरान वही मफलर पहनकर कार्यक्रम में पहुंचे हैं। उनके इस व्यक्तिगत अनुभव ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्षों पुराने आत्मीय संबंधों की झलक भी पेश की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि समय बदल सकता है, जिम्मेदारियां बदल सकती हैं, लेकिन लोगों से मिले स्नेह और सम्मान की यादें कभी पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यह मफलर केवल एक वस्तु नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि वर्षों बाद फिर उसी देश में आने और भारतीय समुदाय से मिलने का अवसर मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय मूल के लोगों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद भारतीय समुदाय का दिल हमेशा भारत के साथ धड़कता है। उन्होंने कहा कि भले ही शरीर न्यूजीलैंड में हो, लेकिन मन भारत में ही रहता है। यही कारण है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय देश की हर उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हैं और उसे अपनी सफलता मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि साझा मूल्यों, विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए किसी देश की जनसंख्या या आकार से अधिक महत्वपूर्ण उसकी जनकल्याण की भावना है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने कई ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं, जिनसे भारत लगातार सीखता रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश था जिसने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया और यह लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के भविष्य के सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज का दौर प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग का है। यदि सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया की भाषा में कहा जाए तो यह "कोलेबरेशन" का समय है। भारत और न्यूजीलैंड कई क्षेत्रों में मिलकर नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से खेल, शिक्षा, कृषि, तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।</p>
<p style="text-align:justify;">खेलों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड की रग्बी टीम पूरी दुनिया में अपनी उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है। भारत भी रग्बी के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है और इसके लिए न्यूजीलैंड के अनुभव तथा विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहता है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश इस दिशा में साथ काम करें तो भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब भारत का चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा था, तब न्यूजीलैंड में भी लोगों ने इस उपलब्धि का उत्साहपूर्वक स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत की सफलता नहीं थी, बल्कि विज्ञान और मानवता की साझा उपलब्धि थी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड की कई स्पेस कंपनियां भारत के साथ मिलकर काम कर चुकी हैं और आने वाले वर्षों में यह सहयोग और मजबूत होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाले 18 महत्वपूर्ण फैसलों और 10 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया। इसके अलावा निवेश, शिक्षा, कृषि, रक्षा, नवाचार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में न्यूजीलैंड सरकार की ओर से गाला लंच का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों के उद्योगपतियों और प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान भारत और न्यूजीलैंड के कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री का पारंपरिक माओरी शैली में स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय समुदाय के बीच अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीय भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से दुनिया के हर कोने में भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हमेशा प्रवासी भारतीयों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>न्यूजीलैंड पहुंचे पीएम मोदी, 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक दौरा</title>
                                    <description><![CDATA[द्विपक्षीय वार्ता में मुक्त व्यापार समझौते पर होगी अहम चर्चा, ऑकलैंड में 40 हजार भारतीयों को करेंगे संबोधित; ऑस्ट्रेलिया दौरे में BBL के भारत में पहले मैच का भी किया ऐलान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-reaches-new-zealand-historic-visit-by-indian-prime/article-58414"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय विदेश दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंच गए हैं। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह ऐतिहासिक दौरा माना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड की यात्रा की थी। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यूजीलैंड पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस यात्रा के दौरान उनका मुख्य फोकस भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करना, व्यापारिक संबंधों का विस्तार करना और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति देना है। प्रधानमंत्री की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश आपसी व्यापार और निवेश बढ़ाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की शुरुआत न्यूजीलैंड सरकार के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता से होगी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि यदि यह समझौता आगे बढ़ता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, डेयरी, शिक्षा, पर्यटन और तकनीकी सहयोग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। व्यापारिक संगठनों की भी इस समझौते पर विशेष नजर बनी हुई है क्योंकि इससे भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान एक प्रमुख बिजनेस कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे, जहां भारत और न्यूजीलैंड के उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने, नई परियोजनाओं को बढ़ावा देने और आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। सरकार का मानना है कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी भविष्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी एक खेल कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों को भी दोनों देशों की मित्रता का अहम आधार माना जाता है। क्रिकेट समेत कई खेलों में दोनों देशों के बीच लंबे समय से सहयोग रहा है और इस यात्रा के दौरान खेलों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऑकलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ संवाद रहेगा। यहां करीब 40 हजार भारतीय मूल के लोगों को प्रधानमंत्री संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय समुदाय में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए 'किया ओरा मोदी' नाम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। भारतीय समुदाय का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत करेगी तथा विदेशों में बसे भारतीयों के साथ भारत के संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ी खेल घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित बिग बैश लीग (बीबीएल) का उद्घाटन मुकाबला इस वर्ष भारत में आयोजित किया जाएगा। यह मुकाबला 12 दिसंबर को चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार होगा जब ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टी-20 लीग का कोई मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के बाहर आयोजित किया जाएगा। क्रिकेट जगत इसे दोनों देशों के बीच खेल सहयोग का नया अध्याय मान रहा है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का भी मानना है कि भारत जैसे बड़े क्रिकेट बाजार में बीबीएल का पहला मैच आयोजित होने से लीग को वैश्विक पहचान मिलेगी और दोनों देशों के क्रिकेट संबंध और मजबूत होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत में पहली बार विदेशी क्रिकेट लीग का मुकाबला, चेन्नई में होगा बिग बैश लीग का ओपनिंग मैच</title>
                                    <description><![CDATA[मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया बड़ा ऐलान, ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान खेल सहयोग को नई दिशा; इसके बाद न्यूजीलैंड दौरे पर होंगे रवाना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/for-the-first-time-in-india-a-foreign-cricket-league/article-58346"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेल सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित टी-20 प्रतियोगिता बिग बैश लीग (BBL) का उद्घाटन मुकाबला इस वर्ष 12 दिसंबर को चेन्नई में खेला जाएगा। यह पहली बार होगा जब किसी विदेशी क्रिकेट लीग का आधिकारिक मैच भारतीय धरती पर आयोजित किया जाएगा। इस फैसले को दोनों देशों के बीच खेल संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह घोषणा अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के तीसरे और अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) के दौरे के दौरान की। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ सहित दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी और खेल जगत की हस्तियां मौजूद थीं। एमसीजी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने क्रिकेट को दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया केवल रणनीतिक और आर्थिक साझेदार ही नहीं हैं, बल्कि क्रिकेट दोनों देशों के लोगों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत में बिग बैश लीग का मुकाबला आयोजित होना इस मजबूत मित्रता का नया प्रतीक होगा और इससे खेल संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">चेन्नई को इस ऐतिहासिक मुकाबले की मेजबानी मिलने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। शहर लंबे समय से क्रिकेट का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां के दर्शकों का खेल के प्रति उत्साह पूरी दुनिया में जाना जाता है। आधुनिक स्टेडियम, उत्कृष्ट सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का अनुभव चेन्नई को इस आयोजन के लिए उपयुक्त बनाता है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय प्रशंसकों को पहली बार किसी विदेशी फ्रेंचाइजी लीग का आधिकारिक मुकाबला अपने देश में देखने का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बिग बैश लीग दुनिया की सबसे लोकप्रिय टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है। इसमें ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों की फ्रेंचाइजी टीमें हिस्सा लेती हैं और दुनिया भर के कई स्टार खिलाड़ी इसमें खेलते हैं। भारत में इसके उद्घाटन मैच के आयोजन से दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों के बीच सहयोग और मजबूत होने की संभावना है। साथ ही भविष्य में अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ स्टेडियम का भ्रमण किया। उन्होंने प्रसिद्ध शेन वॉर्न स्टैंड का भी दौरा किया और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास की उपलब्धियों की जानकारी ली। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने युवा क्रिकेट खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनकी जर्सियों पर हस्ताक्षर कर उनका उत्साह बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के प्रतीक माने जाने वाले लोकप्रिय कंगारू कैरेक्टर ‘रूबी द रू’ से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के खेल संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलेगा और खेल पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में क्रिकेट संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे की घरेलू लीगों में भी हिस्सा लेते रहे हैं। भारतीय खिलाड़ी बिग बैश लीग में भले नियमित रूप से नहीं खेलते हों, लेकिन इस लीग की लोकप्रियता भारत में लगातार बढ़ी है। ऐसे में भारत में इसके आधिकारिक मैच का आयोजन क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल खेल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष सहयोग सहित कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच समझौतों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। क्रिकेट को भी उन्होंने दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाला सबसे प्रभावी सांस्कृतिक माध्यम बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री अपने छह दिवसीय विदेश दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड रवाना होंगे। वहां उनकी यात्रा की शुरुआत द्विपक्षीय वार्ताओं से होगी, जिसमें दोनों देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आगे चर्चा की जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री एक व्यापार सम्मेलन, खेल कार्यक्रम और भारतीय समुदाय के विशेष आयोजन में भी हिस्सा लेंगे। ऑकलैंड में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में करीब 40 हजार भारतीय मूल के लोगों के शामिल होने की संभावना है। भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए ‘किया ओरा मोदी’ नाम से विशेष कार्यक्रम तैयार किया है। यह यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि करीब चार दशक बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर पहुंच रहा है। इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:07:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी बोले- भारत और ऑस्ट्रेलिया की मजबूत साझेदारी दोनों देशों के भविष्य के लिए जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मेलबर्न में भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर, आज 40 हजार से अधिक भारतवंशियों से करेंगे मुलाकात।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-modi-said-in-australia-strong-partnership-between-india/article-58242"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/_narendra-modi-australia-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के तहत इन दिनों ऑस्ट्रेलिया में हैं। गुरुवार को उन्होंने मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया का भरोसेमंद साझेदार के रूप में साथ आगे बढ़ना दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। वैश्विक अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट, ऊर्जा संकट और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच भरोसेमंद साझेदारों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग दोनों देशों को नए अवसरों तक पहुंचाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने विश्वास और सहयोग के आधार पर मजबूत साझेदारी की नींव रखी है, जिसे अब और आगे बढ़ाने का समय है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने और वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहा है। इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, खनिज संसाधन और विशेष रूप से यूरेनियम की उपलब्धता दोनों देशों के सहयोग को नई मजबूती दे सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने निवेश के क्षेत्र में भी ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत को भारत आने का न्योता दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। इन क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए निवेश के बड़े अवसर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत लगातार व्यापार और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है, जिसका लाभ वैश्विक निवेशकों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के राज्यों, विश्वविद्यालयों, छोटे शहरों और उद्योगों के बीच प्रत्यक्ष साझेदारी बढ़ाने का भी सुझाव दिया। उनका कहना था कि यदि राज्य-से-राज्य और सेक्टर-से-सेक्टर सहयोग को बढ़ावा दिया जाए तो इसका सीधा फायदा व्यापार, शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के लागू होने के बाद ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। यह दोनों देशों के मजबूत आर्थिक संबंधों का प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से दोनों देशों के कारोबारियों और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। कार्यक्रम के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आत्मीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने एक साथ सेल्फी भी खिंचवाई, जिसकी तस्वीरें चर्चा का विषय बनीं। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित भारतीय समुदाय का कार्यक्रम माना जा रहा है। यहां करीब 40 हजार से अधिक भारतवंशियों के शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे और भारतीय समुदाय से संवाद करेंगे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के बीच इस कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक भी होगी। इस बैठक में व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। इसके अलावा दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के स्वागत के दौरान मेलबर्न में भारतीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। भारतीय समुदाय की ओर से पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कथक नृत्य, तबला वादन और ऑर्केस्ट्रा के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में "वंदे मातरम्" की प्रस्तुति ने विशेष आकर्षण पैदा किया। प्रधानमंत्री ने भी भारतीय समुदाय की गर्मजोशी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में इस यात्रा से व्यापार, निवेश, रक्षा और ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में नए समझौतों और साझेदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री अपने विदेश दौरे के अगले चरण में न्यूजीलैंड रवाना होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:04:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर पहुंचे पीएम मोदी, प्रम्बानन में की पूजा-अर्चना</title>
                                    <description><![CDATA[एक हजार साल पुराने प्रम्बानन मंदिर की जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो रहे साथ, आसमान से मंदिर का वीडियो भी किया साझा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-reached-indonesias-largest-hindu-temple-and-offered-prayers/article-58167"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-indonesia.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के तीसरे और अंतिम दिन वहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन पहुंचकर भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। बुधवार को प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर की जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया, पूजा-अर्चना की और मंदिर के पुजारियों से आशीर्वाद भी लिया। प्रधानमंत्री ने इस यात्रा की कई तस्वीरें और एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें विमान से प्रम्बानन मंदिर का भव्य दृश्य दिखाई दे रहा है। उनकी इस यात्रा को दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री बुधवार शाम इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना होंगे, जहां उनका तीन दिवसीय आधिकारिक दौरा प्रस्तावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। करीब एक हजार वर्ष पुराने इस मंदिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। मंदिर परिसर अपनी भव्य वास्तुकला, पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी और विशाल शिखरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित मुख्य मंदिर स्थित हैं। इनमें भगवान शिव का मंदिर सबसे ऊंचा और सबसे प्रमुख माना जाता है। पूरे परिसर में लगभग 240 छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं, जो प्राचीन जावानी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर पहुंचने के बाद सबसे पहले जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। इस दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी प्रधानमंत्री के साथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर का अवलोकन किया और इसके ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच सांस्कृतिक सहयोग और विरासत संरक्षण को लेकर भी बातचीत हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस यात्रा की तस्वीरें साझा करते हुए इंडोनेशिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने विमान से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें आसमान से दिखाई देता प्रम्बानन मंदिर बेहद आकर्षक नजर आता है। वीडियो में मंदिर का विशाल परिसर और उसकी ऐतिहासिक संरचना साफ दिखाई देती है। इस वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। कई लोगों ने इसे भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों का खूबसूरत प्रतीक बताया। भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध कई सदियों पुराने हैं। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहां हिंदू संस्कृति और परंपराओं का प्रभाव आज भी कई क्षेत्रों में दिखाई देता है। विशेष रूप से बाली और जावा जैसे क्षेत्रों में रामायण और महाभारत से जुड़ी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। प्रम्बानन मंदिर इसी साझा विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। मंदिर की दीवारों पर रामायण की कथा को दर्शाने वाली अद्भुत नक्काशी आज भी पर्यटकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक कूटनीति का भी अहम हिस्सा है। भारत पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में प्रम्बानन मंदिर का दौरा साझा विरासत और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी लगातार बढ़ रहा है। प्रम्बानन मंदिर हर वर्ष लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां नियमित रूप से धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। रामायण बैले नृत्य नाटिका यहां की सबसे प्रसिद्ध प्रस्तुतियों में शामिल है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक पहुंचते हैं। मंदिर परिसर का संरक्षण और जीर्णोद्धार इंडोनेशिया सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है, ताकि इसकी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रह सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इंडोनेशिया में आधिकारिक कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री अब ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना होंगे। वहां 8 से 10 जुलाई तक विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों, भारतीय समुदाय से संवाद और कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी तय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:45:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मोदी बोले- भारत और इंडोनेशिया साथ आएं तो ‘कुछ-कुछ’ नहीं, ‘बहुत कुछ’ होता है, जकार्ता में रिश्तों को मिली नई मजबूती</title>
                                    <description><![CDATA[20 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर, ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा भारत; राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा- मैं मोदी के नेतृत्व और योजनाओं से सीख लेता हूं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/modi-said-if-india-and-indonesia-come-together-not/article-58129"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई दिशा देने वाले दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बात कही। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्म के गीत का जिक्र करते हुए कहा कि इंडोनेशिया में भारत का गाना ‘कुछ-कुछ होता है’ काफी पसंद किया जाता है, लेकिन जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर आगे बढ़ते हैं तो सिर्फ ‘कुछ-कुछ’ नहीं बल्कि ‘बहुत कुछ’ होता है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुराना सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव भी है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके भीतर भारत का डीएनए है। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति की यह बात भारत के लोगों के दिलों को छू गई। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों का असली डीएनए आपसी विश्वास, साझेदारी और पारस्परिक सम्मान से बना है। यही भरोसा दोनों देशों को भविष्य में और मजबूत सहयोग की ओर लेकर जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी की खुले मंच से जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और कार्यशैली से काफी प्रभावित हैं। प्रबोवो ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक करियर और उनकी कई योजनाओं को कॉपी करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार की अनेक योजनाएं बेहद सफल रही हैं और वे चाहते हैं कि इंडोनेशिया भी उनसे सीख लेकर अपने यहां लागू करे। राष्ट्रपति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अच्छी बात यह है कि इन योजनाओं पर कोई कॉपीराइट नहीं है, इसलिए उन्हें अपनाने में कोई परेशानी नहीं होगी। उनके इस बयान पर समारोह में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 20 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और तकनीकी साझेदारी जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी सहमति जताई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में रक्षा सहयोग को लेकर हुआ समझौता माना जा रहा है। भारत ने इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने कार्यक्रम के तहत वह इंडोनेशिया के सबसे बड़े और विश्व प्रसिद्ध हिंदू मंदिर प्रम्बानन भी जाएंगे। एक हजार वर्ष से अधिक पुराने इस मंदिर को दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत पहचान माना जाता है। प्रधानमंत्री का यह दौरा दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने का संदेश भी देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंडोनेशिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने विशेष समारोह में यह सम्मान प्रदान किया। इसे भारत और इंडोनेशिया के मजबूत होते संबंधों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है। जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो ने स्वयं उन्हें गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद भारतीय मूल के बच्चों और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भी की। भारतीय समुदाय ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री का स्वागत किया और दोनों देशों की मित्रता का संदेश दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे। उनके विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने विशेष एस्कॉर्ट प्रदान किया। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सम्मान का प्रतीक माना गया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। चीन पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण चीन सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके अलग-अलग हिस्सों पर अपना अधिकार जताते हैं। चीन ने कई कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां सैन्य ढांचा तैयार किया है, जिससे क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं। समुद्री व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चंडीगढ़ दौरे की तैयारियां तेज, पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए ₹2 करोड़ का टेंट प्रस्तावित</title>
                                    <description><![CDATA[17 जुलाई के संभावित दौरे से पहले प्रशासन ने एक दिन में आठ टेंडर जारी किए, रेलवे और अन्य परियोजनाओं के उद्घाटन की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparations-for-chandigarh-tour-intensified-tent-worth-%E2%82%B9-2-crore/article-58051"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-chandigarh-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 जुलाई को प्रस्तावित चंडीगढ़ दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। कार्यक्रम का आयोजन पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) परिसर में प्रस्तावित है और इसके लिए प्रशासन के विभिन्न इंजीनियरिंग विभागों ने एक ही दिन में आठ अलग-अलग टेंडर जारी किए हैं। इनमें सबसे बड़ा टेंडर करीब 2.02 करोड़ रुपये का है, जो कार्यक्रम स्थल पर टेंट और अस्थायी व्यवस्थाएं तैयार करने के लिए निकाला गया है। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम को लेकर सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से दौरे का अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन संभावित यात्रा को देखते हुए सभी आवश्यक इंतजाम पहले से किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम स्थल पर लगभग छह हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में वाटरप्रूफ जर्मन हैंगर लगाया जाएगा। जुलाई में बारिश की संभावना को देखते हुए इस विशेष टेंट की व्यवस्था की जा रही है ताकि मौसम का असर कार्यक्रम पर न पड़े। पूरे पंडाल को आरामदायक बनाए रखने के लिए 600 टन क्षमता का एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं आधुनिक मानकों के अनुरूप की जा रही हैं। आयोजन स्थल पर वीआईपी मेहमानों और प्रधानमंत्री के लिए अलग एयर कंडीशनड लाउंज, बैठक व्यवस्था और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">टेंडर दस्तावेजों के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर करीब 2200 सोफे, 300 कुर्सियां, लगभग 70 हजार वर्ग फीट कारपेट, 65 हजार वर्ग फीट बैरिकेडिंग, 20 वाटर कूलर और 24 पोर्टेबल टॉयलेट लगाने की तैयारी की गई है। इसके अलावा मंच, फर्नीचर, प्रवेश और निकास मार्ग तथा अन्य अस्थायी ढांचों की भी व्यवस्था होगी। प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम में आने वाले आमंत्रित अतिथियों, अधिकारियों और अन्य लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखा जा रहा है। अधिकांश टेंडर शॉर्ट नोटिस पर जारी किए गए हैं ताकि चयनित एजेंसियां समय रहते काम शुरू कर सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा और बिजली व्यवस्था को लेकर भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम स्थल पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 125 केवीए क्षमता वाले 11 जनरेटर, 250 केवीए क्षमता वाले 28 जनरेटर और एक 500 केवीए डीजी सेट लगाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आठ हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा एलईडी लाइटिंग, फायर सेफ्टी उपकरण, बैरिकेडिंग और लगभग चार हजार रंग-बिरंगे गमलों से पूरे परिसर को सजाया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सभी विभागों के बीच समन्वय बनाकर तैयारियों की नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि कार्यक्रम में किसी तरह की बाधा न आए।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संभावित दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण भी प्रस्तावित है। कार्यक्रम के दौरान पीजीआई और पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े अहम प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय रेलवे की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित कालका, मोहाली, अंब अंदौरा और आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशनों का भी वर्चुअल लोकार्पण किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन स्टेशनों का आधुनिकीकरण यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। स्टेशन परिसरों में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">रेलवे का कहना है कि अमृत भारत स्टेशन योजना केवल भवनों के नवीनीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस योजना के तहत देशभर में 1300 से अधिक रेलवे स्टेशनों का चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। अब तक 172 से अधिक स्टेशनों का निर्माण या पुनर्विकास कार्य पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक स्टेशनों से यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा और स्थानीय व्यापार, पर्यटन तथा आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>रेलवे अधिकारियों ने सोमवार को प्रस्तावित लोकार्पण वाले सभी स्टेशनों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। संबंधित विभागों को अंतिम रूप से सभी कार्य समय पर पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय कला, विरासत और वास्तुकला को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इन स्टेशनों को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का प्रयास किया गया है। प्रशासन और रेलवे दोनों का कहना है कि जैसे ही प्रधानमंत्री कार्यालय से आधिकारिक कार्यक्रम की पुष्टि होगी, तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग मजबूत, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीद पर सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की बैठक में रक्षा, चुनावी तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर बनी सहमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/defense-cooperation-between-india-and-indonesia-strengthened-agreement-on-purchase/article-58049"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-indonesia-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। सबसे बड़ा फैसला ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खरीद को लेकर रहा। फिलीपींस और वियतनाम के बाद अब इंडोनेशिया भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। अधिकारियों के अनुसार इस समझौते के तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और भारत की रक्षा तकनीक पर बढ़ते वैश्विक भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान इंडोनेशिया ने भारत में विकसित 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया। यह वही मिसाइल है, जिसका उपयोग हाल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस फैसले से भारतीय रक्षा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी सफलता मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की लगातार बढ़ती मांग भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक देशों की सूची में और मजबूत स्थिति दिला सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है और अब उसके उत्पाद कई देशों का भरोसा जीत रहे हैं। रक्षा सहयोग के अलावा दोनों देशों के बीच चुनावी तकनीक के क्षेत्र में भी अहम सहमति बनी है। भारत इंडोनेशिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम विकसित करने में तकनीकी सहायता देगा। इसे भारत की चुनाव प्रणाली और तकनीकी क्षमता पर इंडोनेशिया के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस सहयोग का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है। भारत पहले भी कई देशों के साथ डिजिटल प्रशासन और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाता रहा है और अब इसमें चुनावी प्रबंधन भी शामिल हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। सुबह जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं उनका स्वागत किया और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। समारोह के दौरान वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों और बच्चों ने भी उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति भवन में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग सहित कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से दुनिया का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी रक्षा प्रणालियों के निर्यात से भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी, वहीं इंडोनेशिया की रक्षा क्षमताओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जावा द्वीप पर स्थित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर भी जाने वाले हैं। नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है तथा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिलेगी। सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी के विमान को इंडोनेशियाई वायुसेना ने अपने एयरस्पेस में प्रवेश करते ही एस्कॉर्ट किया था। इसे दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता और सम्मान का प्रतीक माना गया। दो दिवसीय यात्रा के दौरान हुए समझौते यह संकेत देते हैं कि भारत और इंडोनेशिया अब केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रक्षा, तकनीक, लोकतांत्रिक संस्थाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान को मिली तीन बड़ी विकास परियोजनाएं, PM मोदी बोले- ऊर्जा संकट से भारत मजबूती से उबरा</title>
                                    <description><![CDATA[बालोतरा में देश की आधुनिक रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित, जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का लोकार्पण और जयपुर मेट्रो फेज-2 की आधारशिला; प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भर भारत पर रखा जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rajasthan-got-three-big-development-projects-pm-modi-said/article-57869"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान को विकास और आधारभूत ढांचे से जुड़ी तीन बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने बालोतरा के पचपदरा में देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी का उद्घाटन किया, जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण किया और जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना की वर्चुअल आधारशिला रखी। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने वैश्विक परिस्थितियों के बीच उत्पन्न हुए बड़े ऊर्जा संकट का सफलतापूर्वक सामना किया और बेहतर प्रबंधन के कारण आम नागरिकों पर उसका बोझ कम पड़ने दिया।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही थी। यदि समय पर प्रभावी रणनीति नहीं बनाई जाती, तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 2 हजार रुपये तक पहुंच सकती थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने समय पर निर्णय लेकर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखा, जिसके कारण देश में गैस सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित रखने में सफलता मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट के दौरान भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक संबंध देश के लिए बड़ी ताकत बनकर उभरे। उन्होंने बताया कि पहले भारत लगभग 25 से 26 देशों से ईंधन आयात करता था, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए यह संख्या बढ़ाकर करीब 40 देशों तक पहुंचाई गई। इससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं हुई और देश की जरूरतों को लगातार पूरा किया जा सका। उन्होंने कहा कि भारत ने कठिन समय में भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर दुनिया के सामने एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अप्रैल से जून के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए तेल विपणन कंपनियों को लगभग 75 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि यह राशि इतनी बड़ी थी कि इससे एक नई रिफाइनरी का निर्माण किया जा सकता था। सरकार ने यह आर्थिक भार स्वयं वहन किया ताकि आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा, पेट्रोकेमिकल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में औद्योगिक निवेश के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राजस्थान को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में और मजबूत बनाएगी। प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सरकार केवल परियोजनाओं की घोषणा नहीं करती, बल्कि उन्हें समय पर पूरा भी करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल शिलान्यास करना नहीं, बल्कि जनता को परियोजनाओं का लाभ पहुंचाना है। पचपदरा रिफाइनरी इसका बड़ा उदाहरण है, जो अनेक चुनौतियों के बावजूद निर्धारित दिशा में आगे बढ़ी और आज राष्ट्र को समर्पित की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने रिफाइनरी में कुछ महीने पहले हुई दुर्घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि उस घटना के बाद परियोजना से जुड़े इंजीनियरों, विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने तेज गति से काम कर सभी चुनौतियों को पार किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नया भारत कठिन परिस्थितियों से घबराता नहीं, बल्कि चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता रखता है। यही आत्मविश्वास विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने राजस्थान और गुजरात के बीच नर्मदा जल परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राजस्थान में वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं, तब दोनों राज्यों ने बिना किसी विवाद के नर्मदा का पानी राजस्थान तक पहुंचाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति क्षेत्रवाद या टकराव की नहीं, बल्कि सहयोग और राष्ट्रहित की राजनीति है। आज राजस्थान के अनेक गांवों तक नर्मदा का पानी पहुंच रहा है, जिससे लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री सुबह जोधपुर पहुंचे, जहां उन्होंने नए एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने आधुनिक सुविधाओं से लैस टर्मिनल का निरीक्षण किया और क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत बनाने वाली 'उड़ान-2.0' योजना की शुरुआत भी की। इसके बाद वे बालोतरा पहुंचे, जहां रिफाइनरी के कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी ली। उन्होंने परियोजना की कार्यप्रणाली, उत्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं की भी समीक्षा की। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रिफाइनरी परिसर में बनाए गए विशाल डोम में हजारों लोगों ने जनसभा में भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:20:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री मोदी अगले सप्ताह करेंगे न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह पहली बार आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड जाएंगे। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर व्यापक चर्चा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/prime-minister-modi-will-make-his-first-official-visit-to/article-57766"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-new-zealand-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह अपनी पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा पर जाएंगे। इस यात्रा की घोषणा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि भारतीय प्रधानमंत्री पहली बार आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड आ रहे हैं। उन्होंने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और मजबूत होते सहयोग का प्रतीक बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा अप्रैल 2026 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के बाद पहला बड़ा उच्चस्तरीय दौरा होगी। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवा क्षेत्र, कृषि, शिक्षा, पर्यटन और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देना है। दोनों देशों की सरकारों का मानना है कि इस समझौते से व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की भी उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से न्यूजीलैंड के उत्पादों और सेवाओं को 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले भारतीय बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे निर्यात बढ़ेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यूजीलैंड सरकार ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर तक का निवेश बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस निवेश को सुगम बनाने के लिए भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के निवेशकों के लिए विशेष "सिंगल डेस्क" या "वन-स्टॉप सुविधा" स्थापित करने पर सहमति दी है। इस व्यवस्था के तहत निवेश से जुड़े अनुमोदनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज़ी से पूरा किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के निवेशकों को आसानी होगी। न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने पहले भी कहा था कि भारत में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें कृषि उत्पादकता, निवेश, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME), महिला उद्यमिता, खेल, पर्यटन, शिक्षा, कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके अलावा दोनों देश छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। इससे दोनों देशों के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों देशों के बीच होने वाला सहयोग कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा। न्यूजीलैंड डेयरी, पशुपालन और आधुनिक कृषि तकनीकों के लिए विश्वभर में जाना जाता है, जबकि भारत कृषि उत्पादन और विशाल उपभोक्ता बाजार के कारण एक महत्वपूर्ण साझेदार है। सेवा क्षेत्र, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, पर्यटन और खेल सहयोग भी इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत और न्यूजीलैंड के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त व्यापार और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी साझा दृष्टिकोण रखते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर आगे की कार्ययोजना तय होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। मुक्त व्यापार समझौते के बाद यह दौरा आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को नई गति देने का अवसर प्रदान करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 12:30:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-जापान संबंधों को नई मजबूती, पीएम मोदी और साने ताकाइची के बीच छह अहम करार</title>
                                    <description><![CDATA[भारत दौरे पर आईं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच उच्चस्तरीय वार्ता में छह महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने निवेश, विनिर्माण, तकनीक और आर्थिक सहयोग को नई गति देने का संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/new-strength-to-india-japan-relations-six-important-agreements-between-pm/article-57746"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-japan-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारत और जापान ने द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर आईं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग, निवेश, औद्योगिक विकास, तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े छह महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई। दोनों देशों ने अगले दस वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच (इंडिया-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम) को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों के लिए भारत में निवेश का वातावरण और अधिक अनुकूल बनाने का भरोसा दिया। उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार 'जापान बिजनेस वीक' की शुरुआत करेगी। इस पहल के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के वरिष्ठ अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे, ताकि निवेश से जुड़ी प्रशासनिक और नीतिगत चुनौतियों का समयबद्ध समाधान किया जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑटोमोबाइल क्षेत्र में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में बिकने वाली सुजुकी की लगभग दो-तिहाई कारें भारत में निर्मित हो रही हैं। भारत में बनी ये कारें 100 से अधिक देशों में निर्यात की जा रही हैं, जो भारतीय विनिर्माण क्षमता और दोनों देशों की औद्योगिक साझेदारी की सफलता को दर्शाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/sanae-takaichi-(2).jpg" alt="Sanae Takaichi (2)" width="1366" height="761"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची को आत्मीय अंदाज में अपनी "छोटी बहन" कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि विश्वास, साझा मूल्यों और दीर्घकालिक मित्रता पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत की उत्पादन क्षमता, जापान की उन्नत तकनीक और दोनों देशों के निवेश का संयोजन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक साबित होगा। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भी भारत को जापान का भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि जापान भारत के कृषि और उर्वरक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि जापानी सहयोग से भारत में लगभग एक हजार खाद (फर्टिलाइजर) कारखाने स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उनका कहना था कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के चौथे वाहन निर्माण संयंत्र का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह अत्याधुनिक संयंत्र भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/india-japan-agreements.jpg" alt="India Japan Agreements" width="1366" height="876"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों नेताओं ने भारत-जापान औद्योगिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर भी सहमति व्यक्त की। चर्चा के दौरान सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला, कौशल विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। भारत और जापान के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों देश बुनियादी ढांचा विकास, हाई-स्पीड रेल, मेट्रो परियोजनाओं, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी मिलकर काम कर रहे हैं। मौजूदा बैठक में इन क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ताकाइची की यह भारत यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा है। बुधवार को नई दिल्ली पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया तथा मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:28:36 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-जापान शिखर सम्मेलन शुरू, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग सहयोग को मिलेगी नई रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी-ताकाइची वार्ता में सेमीकंडक्टर, औद्योगिक निवेश, सप्लाई चेन और मध्य प्रदेश के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर बढ़ सकती है साझेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-japan-summit-begins-investment-and-manufacturing-cooperation-will-get-new/article-57512"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-japan-summit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत ऐसे समय हुई है, जब दोनों देश आर्थिक सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता पर उद्योग जगत, निवेशकों और राज्यों की भी विशेष नजर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, रक्षा उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए फैसले सामने आ सकते हैं। इन संभावित समझौतों का असर केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य प्रदेश जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक राज्यों को भी इसका बड़ा लाभ मिल सकता है। भारत और जापान पिछले कई वर्षों से विशेष रणनीतिक साझेदार रहे हैं। दोनों देशों ने विनिर्माण, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और आधुनिक औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार सहयोग बढ़ाया है। इस बार का शिखर सम्मेलन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और एशिया में नए औद्योगिक केंद्रों के उभरने के बीच भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य बनकर सामने आया है। ऐसे में नई निवेश योजनाओं और औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा की संभावना भी जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जापानी कंपनियों की खास रुचि हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रहती है। यदि शिखर सम्मेलन के दौरान इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनती है तो मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना की संभावना मजबूत हो सकती है। इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय उद्योगों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण आज पूरी दुनिया की प्राथमिकता बने हुए हैं। भारत सरकार भी इस क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। जापान इस क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। यदि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और निवेश बढ़ता है तो मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर और संबंधित उद्योगों को भी नई गति मिल सकती है। इससे राज्य में तकनीकी कौशल आधारित रोजगार का विस्तार होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सप्लाई चेन को मजबूत करना भी इस शिखर सम्मेलन का प्रमुख विषय माना जा रहा है। कोविड महामारी के बाद दुनिया भर की कंपनियां उत्पादन और आपूर्ति के लिए नए विकल्प तलाश रही हैं। भारत इस समय वैश्विक कंपनियों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश की भौगोलिक स्थिति देश के मध्य में होने के कारण लॉजिस्टिक्स और परिवहन के लिहाज से काफी अनुकूल मानी जाती है। एक्सप्रेस-वे, फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे नेटवर्क और आधुनिक औद्योगिक पार्क राज्य को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हरित ऊर्जा और स्वच्छ तकनीक भी भारत-जापान सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बनते जा रहे हैं। जापान की कंपनियां ऊर्जा दक्ष तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी निर्माण और पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक समाधान विकसित करने में अग्रणी हैं। यदि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ता है तो मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिल सकती है। राज्य पहले ही सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विदेशी निवेश केवल नई फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहता बल्कि इससे स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलता है। नई कंपनियों के आने से सहायक उद्योग विकसित होते हैं, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होती है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। साथ ही आधुनिक तकनीक और वैश्विक गुणवत्ता मानकों का लाभ भी घरेलू उद्योगों तक पहुंचता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी का एक बड़ा प्रभाव कौशल विकास पर भी देखने को मिल सकता है। जापानी कंपनियां प्रशिक्षित मानव संसाधन को प्राथमिकता देती हैं। ऐसे में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और स्किल डेवलपमेंट सेंटरों में नए सहयोग कार्यक्रम शुरू होने की संभावना है। इससे मध्य प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। यदि शिखर सम्मेलन के दौरान निवेश, तकनीक और औद्योगिक सहयोग से जुड़े प्रस्तावों को अंतिम रूप मिलता है तो इसका लाभ आने वाले वर्षों में पूरे भारत के साथ-साथ मध्य प्रदेश को भी मिलेगा। राज्य के औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और निवेश अनुकूल वातावरण के कारण जापानी कंपनियों के लिए यहां नई परियोजनाओं की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ विनिर्माण क्षेत्र में भी नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:44:09 +0530</pubDate>
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