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                <title>स्मार्ट सिटी सर्विलांस कैमरे - दैनिक जागरण</title>
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                <description>स्मार्ट सिटी सर्विलांस कैमरे RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ग्वालियर स्मार्ट सिटी का ₹8.21 करोड़ का सीसीटीवी प्रोजेक्ट फेल? 410 कैमरे चालू, पर चालान 'शून्य'</title>
                                    <description><![CDATA[ग्वालियर स्मार्ट सिटी का ₹8.21 करोड़ का सीसीटीवी प्रोजेक्ट अधर में। 410 कैमरे चालू हैं, लेकिन सड़कों पर संकेतकों (Signage) की कमी के कारण ट्रैफिक चालान नहीं कट पा रहे हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/gwalior-smart-citys-%E2%82%B9821-crore-cctv-project-fails-410-cameras/article-47437"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/gwalior’s-₹8.21-crore-smart-city-cctv-project-stalls-410-cameras-active,-but-zero-challans-issued-(1).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक तालमेल की कमी का एक बड़ा उदाहरण ग्वालियर में देखने को मिल रहा है। शहर को हाई-टेक बनाने के लिए ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीसीटीवी प्रोजेक्ट के तहत ₹8.21 करोड़ खर्च किए गए, लेकिन 4 महीने बीत जाने के बाद भी यह सिस्टम यातायात उल्लंघन करने वालों पर लगाम कसने में नाकाम रहा है।</p>
<p dir="ltr">अक्टूबर में शहर के प्रमुख चौराहों पर 410 हाई-टेक कैमरे लगाए गए थे, लेकिन आज तक एक भी ई-चालान जारी नहीं हो सका है। इसका कारण कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सड़क पर साधारण पेंट और बोर्ड (साइनगेज) का न होना है।</p>
<h2 dir="ltr">हाई-टेक कैमरे, पर सड़कों पर 'निशान' गायब</h2>
<p dir="ltr">स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत ग्वालियर के 107 स्थानों पर बुलेट और PTZ (पैन टिल्ट ज़ूम) कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करना और गलत दिशा (Wrong-side) में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई करना था।</p>
<p dir="ltr">इंटरनेट कनेक्टिविटी और डेटा फीडिंग का काम पूरा हो चुका है, लेकिन कानूनी पेंच यह है कि जब तक सड़क पर 'वन-वे' या 'नो-एंट्री' के स्पष्ट बोर्ड और मार्किंग नहीं होगी, तब तक पुलिस किसी वाहन का चालान नहीं काट सकती। बिना संकेतक के की गई कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।</p>
<h3 dir="ltr">तीन विभागों की लापरवाही का नतीजा</h3>
<p dir="ltr">इस प्रोजेक्ट की कछुआ चाल के पीछे तीन विभागों के बीच समन्वय की भारी कमी दिखी है:</p>
<ul>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन: इन्होंने कैमरे तो लगा दिए, लेकिन वन-वे रूट पर साइन बोर्ड और रोड मार्किंग की प्लानिंग पहले से नहीं की।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">नगर निगम: शहर की सड़कों पर पेंटिंग, पार्किंग लाइन और साइन बोर्ड लगाने की जिम्मेदारी नगर निगम की थी। 4 महीने तक काम रुका रहा और अब ₹1.80 करोड़ का टेंडर फाइनल हुआ है।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">ट्रैफिक पुलिस: पुलिस ने 58 संवेदनशील स्थानों की पहचान तो की, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण ग्वालियर ट्रैफिक चालान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई।</p>
</li>
</ul>
<p dir="ltr"> </p>
<hr />
<p> </p>
<h2 dir="ltr">अपराध नियंत्रण में मिली सफलता, ट्रैफिक में विफलता</h2>
<p dir="ltr">भले ही स्मार्ट सिटी सर्विलांस कैमरे ट्रैफिक सुधारने में पीछे रहे हों, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है। हाल ही में कंपू क्षेत्र में एक हवाला एजेंट से हुई लूट के मामले में इन्हीं कैमरों की फुटेज से अपराधियों के सुराग मिले हैं।</p>
<p dir="ltr">ई-गवर्नेंस मैनेजर नागेंद्र सक्सेना के अनुसार, "कैमरे पूरी तरह काम कर रहे हैं और पुलिस को जांच में मदद मिल रही है। जैसे ही नगर निगम साइन बोर्ड का काम पूरा कर लेगा, गलत दिशा में चलने वालों के खिलाफ ऑटोमैटिक चालान शुरू हो जाएंगे।"</p>
<h2 dir="ltr">ग्वालियर के नागरिकों के लिए आगे क्या?</h2>
<p dir="ltr">नगर निगम ने अब ₹1.80 करोड़ का टेंडर फाइनल कर दिया है। जल्द ही सड़कों पर निम्नलिखित बदलाव दिखेंगे:</p>
<ul>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">ऑटोमैटिक चालान: साइन बोर्ड लगते ही कैमरे गलत दिशा में चलने वाले वाहनों को ट्रैक कर सीधे मोबाइल पर चालान भेजेंगे।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">पार्किंग अनुशासन: सड़कों पर पार्किंग लाइनें खींची जाएंगी, जिससे जाम की समस्या कम होगी।</p>
</li>
<li dir="ltr">
<p dir="ltr">सख्त निगरानी: 58 मुख्य ब्लैक स्पॉट्स पर 24 घंटे कड़ी नजर रखी जाएगी।</p>
</li>
</ul>
<h2 dir="ltr">निष्कर्ष</h2>
<p dir="ltr">ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीसीटीवी प्रोजेक्ट वर्तमान में एक ऐसी "स्मार्ट आंख" की तरह है जिसके पास देखने की शक्ति तो है, लेकिन बोलने (कार्रवाई करने) का अधिकार नहीं। यह प्रोजेक्ट सिखाता है कि सिर्फ तकनीक से शहर स्मार्ट नहीं बनते, उसके लिए जमीनी बुनियादी ढांचा भी उतना ही मजबूत होना चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 16:39:43 +0530</pubDate>
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