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                <title>Benjamin Netanyahu - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Benjamin Netanyahu RSS Feed</description>
                
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                <title>हिज्बुल्लाह हमलों पर बढ़ा तनाव, ट्रंप ने नेतन्याहू से जताई नाराजगी</title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान में सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका ने संयम बरतने की दी सलाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tension-increases-over-hezbollah-attacks-trump-expresses-displeasure-with-netanyahu/article-54733"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/trump-netanyahu-call.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजराइल की ओर से किए गए ताजा हमलों के बाद क्षेत्रीय हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई फोन पर बातचीत सुर्खियों में आ गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप ने इजराइल की हालिया सैन्य कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान उन्होंने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और हालात को और अधिक न बिगाड़ने पर जोर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाल के दिनों में इजराइल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के बाद सीमा क्षेत्रों में तनाव और बढ़ गया है। क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अमेरिका सहित कई देशों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत काफी स्पष्ट और गंभीर रही। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजराइली प्रधानमंत्री को मौजूदा हालात में संयम बरतने की सलाह दी। उनका मानना था कि लगातार सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है तथा शांति प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि इस बातचीत के संबंध में आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी ही सार्वजनिक की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स में इसे दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण संवाद बताया गया है। अमेरिका और इजराइल लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन कई बार सुरक्षा रणनीति और क्षेत्रीय नीतियों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आते रहे हैं। मौजूदा घटनाक्रम को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। अमेरिका की प्राथमिकता जहां क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है, वहीं इजराइल अपनी सुरक्षा चुनौतियों को प्रमुख आधार बताकर सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराता रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इजराइली सरकार का कहना है कि उसकी कार्रवाई पूरी तरह सुरक्षा जरूरतों के तहत की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार हिज्बुल्लाह की ओर से होने वाले संभावित खतरों और हमलों को देखते हुए जवाबी कदम उठाना आवश्यक है। इजराइल का तर्क है कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च जिम्मेदारी है और किसी भी खतरे का जवाब देना जरूरी है। दूसरी ओर लेबनान और क्षेत्र के कई पक्षों ने इन हमलों पर चिंता जताई है और तनाव कम करने की अपील की है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में कई कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ईरान और अमेरिका के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव बढ़ता है तो इससे कई महत्वपूर्ण वार्ताओं और शांति प्रयासों पर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार मध्य पूर्व पहले से ही कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में किसी भी नए संघर्ष या सैन्य कार्रवाई का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया भर की सरकारें इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। हाल के वर्षों में इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच कई बार तनावपूर्ण हालात बने हैं। सीमा क्षेत्रों में समय-समय पर झड़पें और हमले होते रहे हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रयास भी किए जाते रहे हैं। मौजूदा स्थिति में भी कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने की संभावनाओं पर चर्चा जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>नेतन्याहू ने गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[कॉन्फ्रेंस में बोले- धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे, गाजा में हालात और बिगड़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/netanyahu-orders-occupation-of-70-parts-of-gaza/article-54497"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/netanyahu-gaza-order.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 फीसदी हिस्से पर सैन्य नियंत्रण बढ़ाने का आदेश देकर एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति और युद्ध को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने खुले तौर पर कहा कि इजराइल लगातार गाजा में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और अब नियंत्रण वाले इलाके को और बढ़ाया जाएगा। उनके बयान के दौरान मौजूद भीड़ ने जब “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग की तो नेतन्याहू ने जवाब दिया कि “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं, पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं।”</p>
<p dir="ltr">नेतन्याहू के इस बयान को गाजा युद्ध के अगले चरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इजराइल पहले ही गाजा के बड़े हिस्से में सैन्य कार्रवाई चला रहा है। इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सेना हर दिशा से हमास पर दबाव बना रही है और बाकी बचे इलाकों में भी अभियान जारी रहेगा। इस बयान के बाद गाजा में रहने वाले लाखों फिलिस्तीनियों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि पहले से ही वहां हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">जानकारी के मुताबिक अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच सीजफायर समझौता हुआ था। उस समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय सीमा यानी ‘येलो लाइन’ के पीछे हटना था। समझौते के बाद गाजा का करीब 53 फीसदी इलाका इजराइल के नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास लगातार आरोप लगाता रहा है कि इजराइल धीरे-धीरे अपनी सैन्य मौजूदगी और अंदर तक बढ़ा रहा है। अब कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि गाजा के करीब 60 से 64 फीसदी हिस्से पर इजराइल का नियंत्रण हो चुका है।</p>
<p dir="ltr">नेतन्याहू के हालिया बयान के बाद यह साफ माना जा रहा है कि इजराइल अब और बड़े इलाके पर कब्जा करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस कदम को सीजफायर की शर्तों के खिलाफ भी माना जा रहा है। हमास समर्थक गुटों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कहा है कि अगर इजराइल ने आगे बढ़ना जारी रखा तो क्षेत्र में हालात और विस्फोटक हो सकते हैं।</p>
<p dir="ltr">दूसरी तरफ गाजा में रहने वाले आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन की वजह से गाजा के कई इलाके पहले ही पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। बड़ी संख्या में लोग अस्थायी टेंटों में रह रहे हैं। खाने, दवा और साफ पानी की कमी बनी हुई है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक अगर इजराइल 70 फीसदी इलाके पर कब्जा कर लेता है तो करीब 22 लाख लोगों को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहना पड़ सकता है।</p>
<p dir="ltr">यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि गाजा में हालात पहले ही बेहद खराब हैं। उनके मुताबिक हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर रहने की जगह और कम हुई तो हजारों परिवारों के सामने गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में बीमारियां और भूख की समस्या और बढ़ सकती है।</p>
<p dir="ltr">सीजफायर के बावजूद गाजा में हिंसा पूरी तरह नहीं रुकी है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना लगातार कई इलाकों में कार्रवाई कर रही है। उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में टैंकों की आवाजाही बढ़ने और ड्रोन हमलों की भी खबरें सामने आई हैं।</p>
<p dir="ltr">संयुक्त राष्ट्र ने भी हाल ही में गाजा की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। यूएन अधिकारियों ने कहा कि युद्धविराम के बावजूद लगातार सैन्य गगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो आने वाले दिनों में गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है।</p>
<p dir="ltr">इजरातिविधियां जारी हैं, जिससे आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि अइल की तरफ से अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि 70 फीसदी नियंत्रण की योजना को किस तरह लागू किया जाएगा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान घरेलू राजनीति और सुरक्षा रणनीति दोनों से जुड़ा हो सकता है। नेतन्याहू पर पहले से ही हमास के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने का दबाव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:13:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत-पाकिस्तान तक पहुँचा ईरान-इजराइल संघर्ष का असर, सुरक्षा अलर्ट और वैश्विक चिंता गहराई</title>
                                    <description><![CDATA[Narendra Modi ने क्षेत्रीय नेताओं से बात की; Karachi में हिंसा, Jammu and Kashmir में कड़ी पाबंदियां, भारतीयों की सुरक्षा पर फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/impact-of-iran-israel-war-till-india-pakistan-23-deaths-in-pakistan/article-47466"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/desh---2026-03-02t100424.990.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य-पूर्व में जारी सैन्य टकराव का प्रभाव अब दक्षिण एशिया तक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि भारत के जम्मू-कश्मीर में एहतियातन कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू की गई हैं। भारत सरकार ने क्षेत्रीय हालात की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है।</p>
<p>नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संभावित क्षेत्रीय प्रभावों की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Narendra Modi</span></span> ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mohamed bin Zayed Al Nahyan</span></span> और इजराइल के प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Benjamin Netanyahu</span></span> से टेलीफोन पर बातचीत कर हालात पर चिंता व्यक्त की और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।</p>
<p>पाकिस्तान के <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Karachi</span></span> में विदेशी दूतावास परिसर के बाहर हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है। वहीं भारत में जम्मू-कश्मीर के कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। श्रीनगर सहित प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और संचार नियंत्रण जैसे कदम उठाए गए हैं।</p>
<p>सरकारी सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें हजारों छात्र और पेशेवर शामिल हैं। एयरस्पेस बंद होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है और कई यात्री विभिन्न हवाई अड्डों पर फंसे हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों को यात्रा स्थिति की नियमित जानकारी लेने की सलाह दी है।</p>
<p>ऊर्जा बाजारों पर भी तनाव का प्रभाव दिखाई दे रहा है। वैश्विक तेल आपूर्ति के महत्वपूर्ण मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ने से कीमतों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो ईंधन कीमतों और व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>कूटनीतिक स्तर पर भारत ने संयम और संवाद का समर्थन किया है। विदेश नीति विश्लेषकों का कहना है कि भारत की प्राथमिकता क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और शांति प्रयासों पर स्थिति निर्भर करेगी।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 10:05:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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