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                <title>Natural Disaster News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Natural Disaster News RSS Feed</description>
                
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                <title>शुभेंदु अधिकारी बोले बंगाल में UCC लागू करने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में कार्यक्रम के दौरान बोले शुभेंदु अधिकारी, घुसपैठ, लव जिहाद और धर्मांतरण पर सख्त कानून लाने की बात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/shubhendu-adhikari-claims-to-implement-ucc-in-bengal/article-57084"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/suvendu-adhikari.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">कोलकाता में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Suvendu Adhikari</span></span> ने बड़ा राजनीतिक बयान दिया। वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर रवींद्र सदन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार आती है तो राज्य में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और जबरन धर्मांतरण जैसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कानून लाया जाएगा। मंच पर मौजूद लोग उनकी बातों को सुनते रहे, माहौल थोड़ा गंभीर भी रहा। उन्होंने अपने भाषण में अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया। अधिकारी ने कहा कि जो लोग अवैध तरीके से भारत में आए हैं और देश की संस्कृति या सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं, उन्हें राज्य में रहने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती जिलों का भी जिक्र किया और कहा कि वहां होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं ताकि घुसपैठियों की पहचान और प्रक्रिया को तेज किया जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू शरणार्थियों को घुसपैठिया नहीं माना जाएगा और उन्हें नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत नागरिकता दी जाएगी।कार्यक्रम के दौरान उनका भाषण लगातार राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि सेना का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो उनके अनुसार भारतीय सेना के खिलाफ टिप्पणी करते हैं या आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर चुप रहते हैं। इसी क्रम में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर मौन रहना सही नहीं है। उनका कहना था कि राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख जरूरी है।</p>
<p>इसी मंच से उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों का भी जिक्र किया और कहा कि “एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान” के सिद्धांत के प्रति उनकी सरकार प्रतिबद्ध रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चरित्र को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। भाषण के दौरान उन्होंने आपातकाल का विरोध करने वालों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे लोगों को 9 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए ‘लोकतंत्र सेनानी’ समन्वय समिति बनाने की बात भी कही गई। हालांकि कार्यक्रम सिर्फ राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रशासनिक और विकास से जुड़े कुछ फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 600 एकड़ जमीन देने की प्रक्रिया 45 दिनों में पूरी की जाएगी। उनका कहना था कि इससे सीमा से जुड़ा पुराना विवाद भी खत्म होगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है, जो लंबे समय से रुकी हुई थी।</p>
<p>अपने संबोधन में उन्होंने सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना को लागू किया गया है, जिससे गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों और शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को उम्र सीमा में 5 साल की छूट दी जाएगी। IAS और IPS अधिकारियों को केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होने की अनुमति भी दी गई है। भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि नए आपराधिक कानून लागू किए जाएंगे जो पुराने IPC और CrPC की जगह लेंगे। इसके अलावा 2021 की चुनावी हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों को आर्थिक सहायता या सरकारी नौकरी देने की बात भी सामने आई। मदरसा विभाग से जुड़ी वित्तीय सहायता योजनाओं को बंद करने का फैसला भी उन्होंने उल्लेख किया।कार्यक्रम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में भाजपा के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि अब वह महीने में दो दिन वहां लोगों से मिलेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:52:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वेनेजुएला में फिर भूकंप, 920 मौतें; राहत अभियान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[4.9 तीव्रता के नए झटके से कराकास तक हिली धरती, हजारों बेघर और लापता, लोग खुद मलबे में तलाश रहे अपनों को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a3f508c1708e/article-57081"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दक्षिण अमेरिकी देश <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Venezuela</span></span> में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। 25 जून को आए दो बड़े भूकंपों के बाद शनिवार को एक और झटका दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 4.9 रिक्टर मापी गई। यह भूकंप देश के उत्तरी तट के पास आया और इसके झटके राजधानी कराकास से लेकर माराके तक महसूस किए गए। रॉयटर्स के मुताबिक, लोग अचानक आए इस झटके से एक बार फिर दहशत में आ गए और कई इलाकों में पहले से जर्जर इमारतें और कमजोर हो गईं। जमीन लगातार कांप रही है और लोगों में डर का माहौल अभी भी खत्म नहीं हुआ है। पिछले भूकंपों के बाद जो तबाही सामने आई थी, वह अब और गंभीर रूप लेती दिख रही है। शुरुआती रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 तक पहुंच चुकी है, जबकि 3360 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि करीब 51,700 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत टीमें लगातार जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक 243 लोगों को मलबे से जिंदा निकाला गया है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं। कई जगहों पर मलबा हटाने का काम धीमा है और संसाधनों की कमी साफ दिखाई दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजधानी कराकास और उत्तरी तटीय इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। कई इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं, जबकि कुछ इमारतें इतनी कमजोर हो गई हैं कि उनमें रहना खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राहत टीमें हर जगह नहीं पहुंच पा रही हैं, जिसकी वजह से लोग खुद ही अपने परिजनों की तलाश में जुटे हैं। कई परिवार हाथों में हथौड़े, फावड़े और दूसरे औजार लेकर मलबा हटाने में लगे हैं। यह दृश्य बेहद दर्दनाक है, जहां लोग अपने अपनों को खोजने के लिए टूटी हुई इमारतों के बीच दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कहीं उम्मीद दिखती है तो कहीं निराशा का सन्नाटा पसरा है। ला गुआइरा और आसपास के इलाकों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे पूरी स्थिति को और भयावह बना देती हैं। कहीं मलबे के नीचे दबे शव दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं लोग अपने पालतू जानवरों को बचाते हुए नजर आए। एक तस्वीर में एक व्यक्ति मलबे से कुत्ते को बाहर निकालते हुए दिखा, जो इस आपदा के बीच इंसानियत की एक छोटी सी झलक देता है। लेकिन दूसरी तरफ टूटे घरों और बिखरी हुई जिंदगी ने लोगों को पूरी तरह झकझोर दिया है। कई लोग अपने घरों के सामने खड़े होकर सिर्फ मलबे को देखते रह जाते हैं, जैसे अब कुछ बचा ही न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन के अनुसार, राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन भूकंप प्रभावित इलाकों का दायरा इतना बड़ा है कि हर जगह तुरंत पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कुछ जगहों पर संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे समन्वय में दिक्कतें आ रही हैं। लगातार आ रहे झटकों के कारण और भी इमारतें गिरने का खतरा बना हुआ है। लोगों को खुले स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में विस्थापित लोग अस्थायी शिविरों में मुश्किल हालात में रह रहे हैं।राहत शिविरों में भीड़ बढ़ती जा रही है और खाने-पीने की चीजों की कमी महसूस की जा रही है। कई परिवार अपने घरों से सबकुछ खोकर सिर्फ एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में लगे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। कई जगहों पर मेडिकल टीमों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे घायलों का इलाज समय पर नहीं हो पा रहा। मौसम और लगातार आफ्टरशॉक्स ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। लोग रातें खुले आसमान के नीचे बिता रहे हैं, और हर हल्की सी हलचल उन्हें फिर से डराने लगती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:38:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली में महसूस हुए भूंकप के झटके, डर से घर के बाहर निकले लोग, जानिए क्यों आते हैं भूकंप</title>
                                    <description><![CDATA[Delhi-NCR Earthquake Update: हरियाणा के रेवाड़ी में 2.8 तीव्रता का भूकंप, सुबह 7:01 बजे महसूस हुए झटके। जानिए भूकंप का कारण और भारत के भूकंप जोन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/earthquake-tremors-felt-in-delhi-people-came-out-of-their/article-47750"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/delhi-ncr-rewari-earthquake-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सोमवार सुबह हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र हरियाणा के रेवाड़ी में बताया गया है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.8 दर्ज की गई। भूकंप की गहराई जमीन से करीब 5 किलोमीटर बताई जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में लोगों ने हल्के झटके महसूस किए। सुबह के समय अधिकांश लोग घरों में थे, जिससे कुछ लोगों में हल्की घबराहट भी देखी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">Delhi-NCR Earthquake: क्यों महसूस होते हैं झटके?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आता है, जिसे उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। इस वजह से यहां समय-समय पर हल्के भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">भूकंप का मुख्य कारण पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधि होती है। पृथ्वी की सतह कई बड़ी प्लेट्स में बंटी हुई है, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या दबाव बनता है, तो ऊर्जा निकलती है और धरती में कंपन होता है, जिसे भूकंप कहा जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में भूकंप का खतरा इसलिए भी अधिक है क्योंकि भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिसके कारण हिमालय क्षेत्र और उसके आसपास के इलाके ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">भारत में भूकंप के जोन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">भूगर्भ वैज्ञानिकों ने भारत को भूकंप के खतरे के आधार पर चार जोन में बांटा है। इनमें शामिल हैं:</span></p>
<ul>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">जोन-2: कम जोखिम वाला क्षेत्र</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">जोन-3: मध्यम जोखिम वाला क्षेत्र</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">जोन-4: उच्च जोखिम वाला क्षेत्र</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">जोन-5: सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र</span></li>
</ul>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">भारत के करीब 59 प्रतिशत भूभाग को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर भारत और गुजरात का कच्छ इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">रिक्टर स्केल क्या बताता है?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">भूकंप की ताकत को मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग तीव्रता के भूकंप का असर भी अलग होता है:</span></p>
<ul style="list-style-type:square;">
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">4.0–4.9: घरों में रखा सामान हिल सकता है या गिर सकता है</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">5.0–5.9: भारी फर्नीचर भी हिल सकता है</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">6.0–6.9: इमारतों में दरारें आ सकती हैं</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">7.0–7.9: इमारतें गिरने का खतरा</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">8.0 से ऊपर: बड़े पैमाने पर तबाही और सुनामी का खतरा</span></li>
</ul>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">आज रेवाड़ी में आया 2.8 तीव्रता का भूकंप काफी हल्का था, इसलिए किसी नुकसान की खबर नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?</span></strong></p>
<p><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">हाल के महीनों में देश और दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाएं देखने को मिली हैं। ऐसे में वैज्ञानिक लगातार भूगर्भीय गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। दिल्ली-एनसीआर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भूकंप के खतरे को देखते हुए विशेषज्ञ भूकंप-रोधी निर्माण और जागरूकता पर जोर दे रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#000000;">----------------------------------</span></p>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 13:46:14 +0530</pubDate>
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