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                <title>crude oil price - दैनिक जागरण</title>
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                <description>crude oil price RSS Feed</description>
                
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                <title>पेट्रोल कीमतों में उछाल और वैश्विक ऊर्जा संकट 2026</title>
                                    <description><![CDATA[2026 में तेल की बढ़ती कीमतें, सप्लाई संकट और महंगाई ने दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है, भारत समेत कई देश प्रभावित हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/petrol-price-surge-and-global-energy-crisis-2026/article-54375"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-price-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>पेट्रोल और डीज़ल आज केवल ईंधन नहीं रहे, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं, और 2026 में इनकी बढ़ती कीमतों ने एक गंभीर ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जिसका असर दुनिया के हर देश पर अलग-अलग स्तर पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में रुकावटें और ऊर्जा उत्पादन को लेकर देशों की बदलती नीतियाँ इस संकट के प्रमुख कारण हैं। विशेष रूप से मध्य-पूर्व जैसे तेल-समृद्ध क्षेत्रों में अस्थिरता ने वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और इसका सीधा असर विकासशील देशों पर पड़ा है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करते हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन गई है क्योंकि तेल महंगा होने से न केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं बल्कि इसका असर महंगाई पर भी पड़ता है, जिससे रोजमर्रा की चीजें जैसे खाद्य पदार्थ, परिवहन और उत्पादन लागत भी महंगी हो जाती हैं। जब ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता है तो हर वस्तु की कीमत अपने आप बढ़ जाती है, जिसे आर्थिक भाषा में “कॉस्ट पुश इंफ्लेशन” कहा जाता है, और यही आज आम जनता की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। पेट्रोल संकट केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक समस्या भी बन चुका है क्योंकि इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन स्तर पर पड़ता है, मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और उनकी बचत पर दबाव बढ़ता है। सरकारों के सामने भी यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि अगर वे कीमतें बढ़ने दें तो जनता असंतुष्ट होती है, और अगर कीमतों को नियंत्रित करें तो सरकारी राजस्व और तेल कंपनियों पर भारी दबाव पड़ता है, इसलिए कई बार टैक्स और सब्सिडी के माध्यम से संतुलन बनाने की कोशिश की जाती है लेकिन यह समाधान दीर्घकालिक नहीं माना जाता। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी पेट्रोल कीमतों को प्रभावित करती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय तेल खरीद डॉलर में होती है, जिससे मुद्रा विनिमय दर का सीधा असर पड़ता है। इस पूरे संकट ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अभी भी बहुत ज्यादा फॉसिल फ्यूल पर निर्भर हैं और क्या अब समय आ गया है कि हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ें। इसी कारण 2026 में रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन यह बदलाव आसान नहीं है क्योंकि इसके लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और तकनीकी विकास की आवश्यकता है। हालांकि यह भी सच है कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था पेट्रोल और डीज़ल पर आधारित नहीं रह सकती, क्योंकि संसाधन सीमित हैं और पर्यावरणीय प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ और गंभीर होती जा रही हैं। पेट्रोल संकट का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित करता है क्योंकि तेल उत्पादक देश और तेल उपभोक्ता देशों के बीच शक्ति संतुलन बदलता रहता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव और सहयोग दोनों देखने को मिलते हैं। इसके अलावा आम जनता में बढ़ती महंगाई के कारण असंतोष भी बढ़ता है, जिसका असर कई देशों की राजनीतिक स्थिरता पर पड़ सकता है। इस प्रकार पेट्रोल और ऊर्जा संकट केवल एक आर्थिक समस्या नहीं बल्कि एक बहुआयामी वैश्विक चुनौती बन चुका है, जो अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, राजनीति और समाज सभी को प्रभावित करता है, और इसका स्थायी समाधान तभी संभव है जब दुनिया पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करके हरित ऊर्जा और तकनीकी नवाचारों को अपनाए, क्योंकि यही भविष्य की सुरक्षित और स्थिर ऊर्जा व्यवस्था का आधार बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 07:05:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आज पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं, जानें आपके शहर के लेटेस्ट रेट</title>
                                    <description><![CDATA[17 मई 2026 को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे। जानें आपके शहर में आज क्या हैं नए रेट और बाजार की पूरी स्थिति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/there-is-no-change-in-the-prices-of-petrol-and/article-53594"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-diesel-price-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Petrol Diesel Price Today:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">17 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर कुछ राहत की खबरें आई हैं। जानकारी के अनुसार आज बड़े शहरों में ईंधन के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में उथल-पुथल के बावजूद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू तेल कंपनियों ने रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है। इससे आम लोगों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक को थोड़ी राहत मिली है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह-सुबह लोग अपने-अपने शहरों में पेट्रोल-डीजल के नए रेट चेक करते नजर आए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने वही पुरानी कीमतें जारी कीं। नई दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोलकाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी दरें वैसी ही रहीं। खबरें हैं कि वर्तमान समय में सरकार और कंपनियां महंगाई के चलते किसी भी बढ़ोतरी से बच रही हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल बाजार पूरी तरह से शांत नहीं है। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आए दिन के बदलाव चिंता का सबब बने हुए हैं। ईरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इजराइल और अमेरिका से जुड़े भू-राजनीतिक हालातों ने सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ा दी है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका समय-समय पर सामने आती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैश्विक तेल बाजार का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इस वजह से आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना भी बनी हुई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे अपडेट होती हैं और यह प्रक्रिया ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा निर्धारित की जाती है। इसमें अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर-रुपया विनिमय दर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और टैक्स स्ट्रक्चर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन के दामों में फर्क होता है। ट्रांसपोर्ट खर्च और स्थानीय टैक्स भी इस अंतर का एक बड़ा कारण हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रेट सामने आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल लगभग 94 रुपये के आसपास और मुंबई में 104 रुपये के ऊपर बना हुआ है। डीजल के दाम भी लगभग स्थिर हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ निजी कंपनियों के फ्यूल स्टेशनों पर हल्की बढ़ोतरी की खबरें आई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कुछ शहरों में उपभोक्ताओं को थोड़ा फर्क महसूस हो सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालात नियंत्रण में हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और रुपये में कमजोरी आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो घरेलू ईंधन दरों पर असर पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की बात यह है कि आज कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और बाजार स्थिर बना हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:50:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपया ऑल टाइम लो: डॉलर 95.20 पर, महंगाई बढ़ने का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[डॉलर की मजबूती और वैश्विक तनाव के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, इम्पोर्ट महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-all-time-low-dollar-at-9520-danger-of-inflation/article-52400"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rupee-all-time-low.jpg" alt=""></a><br /><p>गुरुवार को भारतीय मुद्रा बाजार में बड़ा झटका देखने को मिला, जब रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95.20 के स्तर पर पहुंच गया। यह अब तक का इसका सबसे निचला स्तर है।रुपये में यह गिरावट वैश्विक आर्थिक दबाव, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की वजह से आई है। बताया जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपया और कमजोर होकर 98 के स्तर तक भी पहुंच सकता है।</p>
<p>नई दिल्ली में वित्तीय बाजार से जुड़े पिछले कुछ महीनों से रुपये पर दबाव बना हुआ था, लेकिन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इसमें तेज गिरावट आई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों 90 की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर से नीचे गया था और उसके बाद से लगातार गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है। मौजूदा गिरावट को वैश्विक ऊर्जा संकट और व्यापारिक अनिश्चितता से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>गिरावट के कारण</strong></h5>
<p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।इससे भारत का आयात बिल बढ़ा और रुपये पर दबाव आया।विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ता है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती भी रुपये की गिरावट का बड़ा कारण मानी जा रही है।</p>
<h5><strong>आम लोगों पर असर</strong></h5>
<p>रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है।आयातित वस्तुएं और सेवाएं महंगी होने की आशंका है।आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही विदेश यात्रा, पढ़ाई और डॉलर में भुगतान करने वाली सेवाएं भी महंगी हो जाएंगी।</p>
<p>महंगाई के मोर्चे पर भी चिंता बढ़ गई है। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है, तो खुदरा महंगाई दर में उछाल आ सकता है, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:34:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, पाकिस्तान हुआ बेहाल, अब लगा रहा है राहत की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/69ae92282d660/article-47762"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/pakistan-oil-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की सप्लाई और शिपिंग रूट पर खतरा बढ़ गया है</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से चढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहां पहले से ही आर्थिक चुनौतियां मौजूद हैं। तेल की कीमतों में उछाल के कारण पाकिस्तान का आयात बिल बढ़ने की आशंका है और सरकार को नई आर्थिक रणनीति बनाने की जरूरत महसूस हो रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। सोमवार को वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत </span>118.22<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं </span>WTI <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्रूड की कीमत भी शुक्रवार के </span>90.90<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> डॉलर के बंद स्तर से लगभग </span>30<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> प्रतिशत बढ़कर </span>118.21<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तेल की कीमतों में यह तेजी वैश्विक बाजार में बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खासकर तब जब ऊर्जा आपूर्ति और प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान की आशंका बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाकिस्तान के तेल आयात बिल पर बढ़ेगा दबाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव इसी तरह बना रहता है तो पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल करीब </span>600<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेल की बढ़ती कीमतें देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकती हैं। पाकिस्तान पहले ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहा है</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसे में ऊर्जा आयात पर बढ़ने वाला खर्च सरकार के लिए नई चुनौती बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong>IMF <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से राहत की उम्मीद</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तेल की कीमतों में आई तेजी के बीच पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (</span>IMF) <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से राहत की उम्मीद जताई है। सरकार पेट्रोलियम लेवी में राहत देने के विकल्प पर विचार कर रही है और इस संबंध में </span>IMF <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">से बातचीत भी की जा रही है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार आर्थिक दबाव को कम करने के लिए हर संभव उपायों पर काम कर रही है। साथ ही उन्होंने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने के लिए ईंधन की खपत कम करने की अपील भी की है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल कीमतों में तेजी के बीच पाकिस्तान सरकार ने </span>7<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में </span>55<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। इस फैसले का असर आम जनता और उद्योगों दोनों पर पड़ने की संभावना है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसका असर महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">----------------------------------</span></p>
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<p class="MsoNormal">LNG <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सप्लाई और शिपिंग रूट को लेकर चिंता</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि सोमवार को तीन पेट्रोलियम शिपमेंट पाकिस्तान पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि </span>LNG <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सप्लाई में संभावित रुकावट चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के अलावा वैकल्पिक समुद्री मार्गों को लेकर ओमान</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ बातचीत जारी है ताकि ईंधन आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बढ़ते संकट के बीच सरकार की तैयारी</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तेल की कीमतों में तेजी से पाकिस्तान सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। सरकार इमरजेंसी योजनाओं पर काम कर रही है ताकि बढ़ते आयात बिल और ऊर्जा संकट के असर को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 16:57:13 +0530</pubDate>
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