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                <title>Middle East Crisis - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Middle East Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान का कुवैत–बहरीन में 8 अमेरिकी ठिकानों पर हमला, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[खामेनेई का अमेरिका-इजराइल पर तीखा बयान, हर हमले का जवाब देने की चेतावनी, पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/irans-attack-on-8-american-bases-in-kuwait-bahrain-increases-tension/article-57260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-attack-kuwait-bahrain-us-bases.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े तनाव की चपेट में आता दिख रहा है। रविवार को ईरान की ओर से दावा किया गया कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की तरफ से ईरान के ठिकानों पर की गई “दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई” के जवाब में की गई है। हालांकि अभी तक अमेरिका या कुवैत और बहरीन की सरकारों की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जरूर बढ़ा दिया गया है। इन हमलों के बाद कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सैन्य गतिविधियों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने भी हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद कुछ इलाकों में हलचल और दहशत जैसा माहौल देखने को मिला, हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि मामला तेजी से बढ़ते टकराव की ओर इशारा कर रहा है।</p>
<p>ईरान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह हमला एक जवाबी कार्रवाई थी और इसका मकसद अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का प्रतिकार करना था। ईरानी सेना ने दावा किया कि यह ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसमें रणनीतिक ठिकानों को टारगेट किया गया। ईरान का यह भी कहना है कि अगर आगे भी उसकी सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला हुआ तो वह और सख्त जवाब देगा। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है और कूटनीतिक स्तर पर चिंता जताई जा रही है। इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने हालिया हमलों को लेकर जिस तरह सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं और उन पर गर्व जताया है, वह अपने आप में अपराध स्वीकार करने जैसा है। खामेनेई ने कहा कि ईरान पर हुए हर हमले, हर मौत और हर नुकसान का हिसाब लिया जाएगा और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनका यह बयान काफी आक्रामक माना जा रहा है और इसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। खामेनेई पहले भी अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन इस बार उनका बयान ज्यादा तीखा और सीधा माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि वह पहले हुए एक कथित अमेरिका-इजराइल हमले में घायल हुए थे, जिसके बाद से वे किसी सुरक्षित और गुप्त स्थान पर रह रहे हैं। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईरान के अंदर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक स्थिति पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्र में मौजूद सभी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। कुवैत और बहरीन में भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पश्चिम एशिया में पहले से ही कई तरह के तनाव मौजूद हैं और ऐसे में यह नया घटनाक्रम स्थिति को और जटिल बना सकता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच इस तरह के हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला बढ़ता रहा तो यह एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। पहले से ही इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष और ईरान-अमेरिका तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रखा है। ऐसे में यह नया टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी असर डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:33:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने ईरान युद्ध का विरोध किया, बोले- आम लोग कीमत चुका रहे</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पोस्ट में युद्ध खत्म करने की मांग, कहा- बिना मंजूरी शुरू हुए संघर्ष ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-york-mayor-mamdani-opposed-the-iran-war-and-said/article-54508"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-war-news.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने ईरान युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस पूरे संघर्ष का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि यह युद्ध अब खत्म होना चाहिए, क्योंकि इसकी सबसे ज्यादा कीमत आम लोग चुका रहे हैं। ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में जिस तरह हालात बिगड़े हैं, उसने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्ध के लिए किसी आम नागरिक ने वोट नहीं किया था, लेकिन सबसे ज्यादा असर उन्हीं लोगों पर पड़ा जिनकी इसमें कोई सीधी भूमिका नहीं थी।</p>
<p dir="ltr">ममदानी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि युद्ध के दौरान हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि 13 अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में मारे गए हैं और वे अब कभी अपने परिवारों के पास वापस नहीं लौट पाएंगे। उन्होंने कहा कि युद्ध की असली मार हमेशा आम परिवारों पर पड़ती है, चाहे वह किसी भी देश के हों। उनके मुताबिक संघर्ष सिर्फ सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगता है।</p>
<p dir="ltr">मेयर ने कहा कि अमेरिका में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं। इससे मिडिल क्लास और वर्किंग क्लास परिवारों का बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोग पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव झेल रहे थे, ऐसे में युद्ध ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। ममदानी के मुताबिक विदेश नीति के फैसलों का बोझ आखिरकार आम टैक्स देने वाले लोगों पर ही आता है।</p>
<p dir="ltr">उन्होंने आरोप लगाया कि यह संघर्ष अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस की मंजूरी के बिना शुरू किया गया। ममदानी ने कहा कि विदेश में जाने वाली हर जान और अमेरिका के भीतर आम परिवारों पर पड़ने वाला हर आर्थिक बोझ एक लापरवाह फैसले की कीमत है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई है। कई लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से जोड़कर आलोचना भी कर रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की नई टोल वसूली व्यवस्था का समर्थन किया तो संबंधित देशों, कंपनियों और लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि यह चेतावनी तेल व्यापार और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ती चिंता के कारण दी गई है।</p>
<p dir="ltr">उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन लगातार गलत फैसले ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओमान को दी गई धमकी यह दिखाती है कि ईरान युद्ध धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर जा रहा है। अमेरिकी विपक्ष का कहना है कि हालात संभालने के बजाय और ज्यादा तनाव पैदा किया जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">ईरान की तरफ से भी लगातार तीखे बयान सामने आ रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया कि दोनों देश सैन्य मोर्चे पर नाकाम रहने के बाद अब ईरान को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं। खामेनेई के बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।</p>
<p dir="ltr">दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी कर रहा है और इसके जरिए क्षेत्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p dir="ltr">इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमला किया। ईरान के मुताबिक यह हमला बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। हालांकि अमेरिका की तरफ से इस दावे पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">दुनियाभर में अब इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और नेता लगातार शांति की अपील कर रहे हैं। न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी का बयान भी ऐसे समय आया है जब आम लोग युद्ध के असर को सीधे महसूस कर रहे हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:12:43 +0530</pubDate>
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                <title>होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रम्प की नई धमकी, ओमान और ईरान को चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ओमान और ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर किसी का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-new-threat-on-hormuz-strait-warning-to-oman-and/article-54432"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/donald-trump1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर सख्त बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। ईरान को चेतावनी देने के बाद अब ट्रम्प ने ओमान को भी निशाने पर लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश की जागीर नहीं है और यदि किसी ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण करने की कोशिश की तो अमेरिका कठोर कार्रवाई करेगा। व्हाइट हाउस में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में किसी भी देश द्वारा इस रास्ते को नियंत्रित करने की कोशिश वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रम्प ने कहा, “हम इस क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और यहां हर देश के जहाजों को गुजरने का अधिकार है। ईरान इसे अपने प्रभाव में लेना चाहता है, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। ओमान को भी बाकी देशों की तरह नियमों का पालन करना होगा। यदि कोई आक्रामक रवैया अपनाया गया तो अमेरिका जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।” ट्रम्प के बयान के बाद वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह चेतावनी सिर्फ ईरान के लिए नहीं बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए बड़ा संदेश है। खासकर ऐसे समय में जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले ट्रम्प ने कहा था कि ईरान को लग रहा था कि अमेरिका बातचीत से पीछे हट जाएगा, लेकिन अब तेहरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव को समझ चुका है और अब वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनावों को लेकर उन पर कोई दबाव नहीं है। ट्रम्प ने कहा, “ईरान को लगा था कि चुनावी माहौल में मैं कमजोर पड़ जाऊंगा, लेकिन मुझे चुनाव की कोई परवाह नहीं है। अमेरिका की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता सबसे पहले है।”</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच ईरानी मीडिया में यह दावा किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर एक शुरुआती समझौता ड्राफ्ट तैयार हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बहाल करने और अमेरिकी सैन्य गतिविधियां कम करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि दोनों देशों के बीच किसी भी तरह का आधिकारिक समझौता नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्ट्स को “फर्जी और मनगढ़ंत” बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। दक्षिणी लेबनान में इजराइल द्वारा किए गए ताजा हवाई हमलों में कई लोगों की मौत की खबर सामने आई है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 31 लोगों की जान गई जबकि दर्जनों घायल हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों से इलाके में भय का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। इजराइल ने दावा किया है कि उसने गाजा में हमास के एक बड़े कमांडर मोहम्मद ओदेह को हवाई हमले में मार गिराया है। बताया जा रहा है कि यह हमला कई महीनों की खुफिया निगरानी के बाद किया गया। हालांकि हमास की ओर से अभी इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ईरान ने जुलाई 2025 से हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को रिहा कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद इन नाविकों की रिहाई संभव हो सकी। सभी नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं और जल्द भारत लौटेंगे। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका का सख्त रुख आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल परिवहन का रास्ता इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहां किसी तरह का सैन्य टकराव बढ़ता है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। वहीं ईरान और उसके सहयोगी देशों के साथ बढ़ता तनाव इस क्षेत्र को एक बार फिर बड़े संकट की ओर ले जाता दिखाई दे रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 14:09:12 +0530</pubDate>
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                <title>UAE संग हुई बड़ी डील, अब भारत के रिजर्व में रहेगा 3 करोड़ बैरल तेल</title>
                                    <description><![CDATA[PM मोदी के UAE दौरे में भारत और UAE के बीच बड़ी ऊर्जा डील हुई. अब भारत के रिजर्व में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल स्टोर होगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-deal-made-with-uae-now-3-crore-barrels-of/article-53533"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-uae-oil-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अबू धाबी दौरे के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UAE) <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस डील के तहत अब </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल स्टोर कर सकेगा। जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है और तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी साझा की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया कि दोनों देशों ने ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। बताया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी और </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (</span>ADNOC) <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच रणनीतिक सहयोग समझौता किया गया है। इसके जरिए </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">की भागीदारी भारत के तेल भंडारण ढांचे में और भी बढ़ जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे भारत को किसी भी वैश्विक संकट या सप्लाई रुकने की स्थिति में राहत मिल सकती है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच ये डील और भी महत्वपूर्ण हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इस समुद्री मार्ग से बड़े हिस्से का तेल व्यापार होता है। भारत और </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इस दौरान समुद्र में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही पर भी जोर दिया। बातचीत में कहा गया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई के लिए समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत ने हाल में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">पर हुए हमलों की निंदा भी की और उसके साथ एकजुटता जताई। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों के बीच केवल कच्चे तेल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>LNG <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सप्लाई को लेकर भी अहम सहमति बनी है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और </span>ADNOC <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच लॉन्ग टर्म </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सप्लाई एग्रीमेंट पर भी बातचीत आगे बढ़ी है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में स्ट्रैटेजिक गैस रिजर्व तैयार करने को लेकर भी सहयोग बढ़ाने की बात की गई है। विदेश मंत्रालय ने </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">को भारत की ऊर्जा सुरक्षा का "महत्वपूर्ण साझेदार" बताया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार और तेजी से बढ़ सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऊर्जा क्षेत्र के अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौरे में निवेश और रक्षा सहयोग पर भी कई महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं। </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बैंकिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस सेक्टर में होगा। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिपबिल्डिंग और एडवांस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भी समझौते हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक हालात को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है और </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ हुआ ये डील उसी रणनीति का हिस्सा है। कहा जा रहा है कि आने वाले महीनों में भारत अपने स्ट्रैटेजिक रिजर्व को और मजबूत करने पर भी ध्यान दे सकता है ताकि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट का असर घरेलू बाजार पर कम पड़े।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:34:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI का बड़ा फैसला, सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड देने की तैयारी में है, सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-decision-of-rbi-amid-middle-east-crisis-government-will/article-53283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t164953.547.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बार केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश देने की योजना बना रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महीने होने वाली </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड की बैठक में इस पर अंतिम फैसला हो सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि यह राशि पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। जब दुनिया के कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत के सरकारी खजाने में आने वाला ये पैसा एक बड़ी ताकत साबित हो सकता है। आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे सरकार को खर्च बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दरअसल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">हर साल अपने सरप्लस फंड का एक हिस्सा केंद्र सरकार को ट्रांसफर करता है। यह प्रक्रिया </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>ECF <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत होती है। इसके मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिजर्व बैंक को अपनी बैलेंस शीट का एक हिस्सा जोखिम सुरक्षा फंड के तौर पर अलग रखना होता है। बाकी की राशि सरकार को दी जाती है। पिछले वित्त वर्ष में </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इससे पहले यह आंकड़ा 2.11 लाख करोड़ रुपये था। अब जो संकेत मिल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके अनुसार इस बार आंकड़ा और बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार से मिली कमाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बॉंड बाजार और ब्याज आय ने </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">की कमाई को मजबूत किया है। यही वजह है कि सरकार को इस बार ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी बैंकों का प्रदर्शन भी सरकार के लिए राहत लेकर आया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लगातार चौथे साल अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों का कुल शुद्ध लाभ लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। खराब कर्ज में कमी और लोन ग्रोथ बढ़ने का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। कई सरकारी बैंक अब रिकॉर्ड स्तर पर कमाई कर रहे हैं। इसी वजह से सरकार को </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">से ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बैंकों से भी बड़ा लाभांश मिलने वाला है। बजट में सरकार ने </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">और सरकारी बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मौजूदा हालात के मद्देनजर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात और खराब होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भी भारत के पास खर्च करने के लिए पर्याप्त वित्तीय ताकत बनी रहेगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के लिए यह पैसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे बिना नए टैक्स लगाए इंफ्रास्ट्रक्चर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण योजनाओं और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ाया जा सकता है। मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की स्थिति अभी संतुलित नजर आ रही है। टैक्स कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हो रही है और गैर-कर राजस्व लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में सरकार के पास विकास योजनाओं को जारी रखने का अतिरिक्त स्पेस बनता दिख रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ेगा तनाव, ट्रंप के सख्त रुख से ईरान-अमेरिका टकराव गहरा हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में तनाव फिर बढ़ा। ट्रंप ने कहा ईरान ने पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई, शांति प्रस्ताव पर संदेह से अमेरिका-ईरान टकराव गहरा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tension-will-increase-again-in-the-middle-east-iran-america-conflict/article-52662"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/middle-east-crisis-donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है और साफ संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन फिलहाल नरमी के मूड में नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछले कई दशकों में जो किया है, उसकी “पर्याप्त कीमत</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> अभी तक नहीं चुकाई है। यही बयान अब मिडिल ईस्ट में नई बेचैनी की वजह बन गया है। हालात ऐसे वक्त में बिगड़ते दिख रहे हैं जब तेहरान की तरफ से नया शांति प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि अमेरिका उसे आसानी से मानने वाला नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान की ओर से आए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल यह नहीं लगता कि यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से तनाव चरम पर है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थ के जरिए 14 सूत्री प्रस्ताव भेजा है, जिसमें युद्ध खत्म करने, प्रतिबंध हटाने, नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने की मांग की गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव युद्धविराम बढ़ाने से ज्यादा सीधे टकराव खत्म करने पर केंद्रित है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">उधर ईरान की तरफ से भी रुख नरम नहीं दिख रहा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी (IRGS) ने साफ कहा है कि अब अमेरिका के पास फैसले की गुंजाइश काफी सीमित बची है। तेहरान से जुड़े हलकों में यह संदेश दिया जा रहा है कि दबाव की राजनीति अब ज्यादा देर नहीं चल सकती। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने रविवार को कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि युद्ध से पहले जैसी स्थिति अब लौटने वाली नहीं है। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है और यहां तनातनी का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">इसी बीच खाड़ी क्षेत्र से आ रही खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। रविवार को होर्मुज के पास एक कार्गो शिप पर हमले की खबर सामने आई, जिसने समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। क्षेत्र में पहले ही जहाजों की आवाजाही प्रभावित है और अमेरिका ने फंसे जहाजों को निकालने के लिए नई समुद्री योजना का संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज में फंसे जहाजों को “फ्री</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> कराने में मदद करेगा। हालांकि इस योजना को ईरान ने सीधे चुनौती की तरह देखा है। ऐसे में समुद्र, तेल और सैन्य दबाव तीनों मोर्चों पर तनाव एक साथ बढ़ता दिख रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">कूटनीतिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह टूटी नहीं है, लेकिन जमीन पर हालात भरोसेमंद नहीं लग रहे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी से बातचीत की है। ओमान पहले भी अमेरिका-ईरान संवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इसके बावजूद जिस तरह दोनों तरफ से बयान आ रहे हैं, उससे यही लग रहा है कि बातचीत फिलहाल सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है। मिडिल ईस्ट में जंग की आशंका अभी टली नहीं है, बल्कि हालात बता रहे हैं कि आने वाले कुछ दिन और ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 17:04:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान में US-ईरान बातचीत पर असमंजस, आमने-सामने वार्ता पर मतभेद</title>
                                    <description><![CDATA[US-ईरान बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत, पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में; बैठक पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है, लेकिन तस्वीर अब भी साफ नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/confusion-over-us-iran-talks-in-pakistan-disagreement-over-face-to-face-talks/article-52061"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-iran-talks-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर स्थिति उलझी हुई नजर आ रही है। एक ओर अमेरिका सीधे संवाद की उम्मीद जता रहा है, वहीं ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह आमने-सामने वार्ता के बजाय पाकिस्तान के जरिए अपनी बात रखेगा। इसी बीच दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं, जिससे कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुके हैं, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के भी पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी और क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है।</p>
<p>हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास दिख रहा है। अमेरिका का कहना है कि वह सीधे शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि कोई औपचारिक बैठक तय नहीं है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि बातचीत की प्रक्रिया अभी शुरुआती और अनिश्चित चरण में है।</p>
<h5><span><strong>बातचीत पर मतभेद</strong></span></h5>
<p>अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधी बातचीत कर सकता है। इसके लिए विशेष दूतों को भेजा गया है।</p>
<p>वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अलग रुख अपनाते हुए कहा है कि वह सीधे अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा। ईरान की ओर से कहा गया है कि उसकी बातें पाकिस्तान के अधिकारियों के जरिए साझा की जाएंगी।</p>
<p>इस रुख से यह साफ होता है कि बातचीत अगर होती भी है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप में हो सकती है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।</p>
<h5><span><strong>पहला दौर रहा बेनतीजा</strong></span></h5>
<p>इससे पहले अप्रैल के मध्य में पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी, जो करीब 21 घंटे चली लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।</p>
<p>मुख्य विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और निर्बाध रहे, जबकि ईरान इस पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की मांग करता रहा है। ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह इसे बंद नहीं करेगा।</p>
<h5><span><strong>बढ़ता क्षेत्रीय तनाव</strong></span></h5>
<p>इसी दौरान क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में एक ईरानी झंडे वाले जहाज को रोकने की कार्रवाई की। यह कदम समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंधों के पालन के तहत उठाया गया बताया गया है।</p>
<p>दूसरी ओर, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को लेकर दावा किया है कि वह अब देश में ही बड़ी संख्या में हथियारों का उत्पादन कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष दबाव की रणनीति भी साथ-साथ अपना रहे हैं।</p>
<h5><span><strong>आंतरिक मतभेद भी असरदार</strong></span></h5>
<p>ईरान के भीतर भी बातचीत को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। कुछ नेता बातचीत में लचीलापन दिखाने के पक्ष में हैं, जबकि कट्टर रुख रखने वाला धड़ा किसी भी समझौते के खिलाफ है। वार्ता टीम में बदलाव की चर्चा भी चल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान के भीतर रणनीति को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं है।फिलहाल नजर इस बात पर टिकी है कि पाकिस्तान में दोनों पक्षों के बीच किसी तरह का संवाद स्थापित हो पाता है या नहीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:06:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चीन की अपील, कहा- ऊर्जा संकट से बचने के लिए जहाजों की आवाजाही जारी रखें</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बनाए रखने को लेकर चीन की अपील, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर की चिंता बढ़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/chinas-appeal-regarding-hormuz-strait-said-movement-of-ships/article-51689"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/hormuz-strait-xi-jinping.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सामान्य आवाजाही बनाए रखने की अपील की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के साथ फोन पर बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया। शी ने स्पष्ट किया कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल व्यापक सीजफायर की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील भी की। चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक महत्व</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक, दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आ सकती है और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि की बात करें तो हाल के महीनों में मध्य-पूर्व में कई घटनाओं ने क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाया है। विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। इससे पहले भी कई बार होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय सतर्क है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कूटनीतिक पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">चीन ने बातचीत और राजनीतिक समाधान पर जोर दिया है। शी जिनपिंग ने सभी पक्षों से संवाद के जरिए आगे बढ़ने की अपील की। आधिकारिक बयान के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान सैन्य टकराव से नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से ही संभव है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी पक्षों को शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, चीन लगातार मध्य-पूर्व में संतुलन बनाए रखने और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रभाव और विश्लेषण की दृष्टि से देखा जाए तो चीन का यह रुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका असर सीधे तेल कीमतों, परिवहन लागत और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आगे क्या की बात करें तो फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें मध्य-पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं और प्रमुख देश इस मुद्दे पर बातचीत को आगे बढ़ा सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट में स्थिरता बनाए रखना न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक हितों के लिए जरूरी माना जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:56:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज रोक पर पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने दी बड़ी चेतावनी, ट्रंप बोले- “विचार करेंगे”</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रम्प और आसिम मुनीर की बातचीत में होर्मुज संकट प्रमुख मुद्दा रहा। इससे अमेरिका-ईरान वार्ता पर अनिश्चितता बढ़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistani-army-chief-gave-a-big-warning-on-hormuz-standoff/article-51683"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/donald-trump-asim-munir-iran-us-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर के बीच हालिया फोन बातचीत ने पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों को नई दिशा दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह बातचीत ऐसे समय हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है और अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता पर अनिश्चितता बनी हुई है। पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, मुनीर ने स्पष्ट किया कि यदि होर्मुज पर लगी रोक जारी रहती है, तो ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। जवाब में ट्रम्प ने इस मुद्दे पर “विचार करने</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">”</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">की बात कही। यह संवाद ऐसे वक्त हुआ है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहरा रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुख्य घटनाक्रम के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के पास समुद्री क्षेत्र में नाकेबंदी की है, जिसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का कदम उठाया। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग माना जाता है, जिससे इस क्षेत्र में किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर डाल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को उकसावे वाला कदम बताया है और इसे समुद्री नियमों का उल्लंघन करार दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बातचीत का असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस बातचीत का सीधा असर अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता पर पड़ता दिख रहा है। पाकिस्तान, जो इस वार्ता के लिए संभावित मंच माना जा रहा है, अब खुद इस प्रक्रिया में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">देखें तो हालिया तनाव की जड़ ट्रम्प प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ सख्त रुख और एक ईरानी जहाज ‘टूस्का</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">’</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">को जब्त करने की घटना रही है। ईरान ने इसे “समुद्री डकैती</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">”</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई और सैन्य गतिविधियों में भी इजाफा देखा गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कूटनीतिक पेच</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अल जजीरा सहित कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में संकेत मिले हैं कि संभावित वार्ता एक दिन की नहीं, बल्कि कई दिनों तक चल सकती है। उद्देश्य एक अस्थायी समझौता (MoU) तैयार करना है, जिससे सीजफायर को आगे बढ़ाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, यदि यह अस्थायी समझौता हो जाता है तो करीब 60 दिन का समय मिल सकता है, जिसमें एक व्यापक शांति समझौते की रूपरेखा तैयार की जा सकेगी। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि ईरान इसमें भाग लेता है या नहीं। वर्तमान हालात में ईरान का रुख सख्त बना हुआ है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विश्लेषण के तौर पर देखा जाए तो होर्मुज संकट केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुका है। भारत सहित कई देशों की नजर इस घटनाक्रम पर है, क्योंकि इसका असर तेल कीमतों और व्यापारिक संतुलन पर पड़ सकता है। भारत समाचार अपडेट और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे की लगातार निगरानी की जा रही है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका अपनी नाकेबंदी नीति में कोई नरमी दिखाता है या नहीं और ईरान वार्ता के लिए तैयार होता है या नहीं। फिलहाल, ट्रम्प और मुनीर के बीच हुई बातचीत ने संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन समाधान अभी दूर नजर आता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:23:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज तनाव का असर: मिडिल ईस्ट में भारतीय कंपनियों की बिक्री 40% तक गिरी, लागत कई गुना बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज तनाव के चलते मिडिल ईस्ट में भारतीय FMCG कंपनियों की बिक्री घटी, लागत बढ़ी और विस्तार योजनाएं प्रभावित हुईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/impact-of-hormuz-tension-sales-of-indian-companies-in-the/article-51089"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/hormuz-tension-indian-fmcg-companies-sales-decline.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज क्षेत्र में हालात बिगड़ने से भारतीय कंपनियों के कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। इस संकट का सबसे ज्यादा प्रभाव FMCG सेक्टर पर देखा जा रहा है, जहां बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है और व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बिक्री में तेज गिरावट और मांग में कमी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मिडिल ईस्ट में काम कर रहीं कई भारतीय कंपनियों की बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि उपभोक्ता खर्च में कमी साफ दिखाई दे रही है। कंपनियों के मुताबिक, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे मांग कमजोर हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">शिपिंग लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस संकट का एक बड़ा असर लॉजिस्टिक्स पर पड़ा है। सामान भेजने की लागत में कई गुना इजाफा हुआ है। कंटेनर की कीमतें पहले के मुकाबले चार से पांच गुना तक बढ़ चुकी हैं, जिससे कंपनियों का खर्च बढ़ गया है और मुनाफे पर दबाव पड़ा है। इसके अलावा, जोखिम बढ़ने के कारण कंपनियां अब ज्यादा महंगे बीमा कवर भी ले रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विस्तार योजनाओं पर लगा ब्रेक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कई कंपनियों ने पश्चिम एशिया में अपने विस्तार की योजनाओं को फिलहाल रोक दिया है। अनिश्चित हालात और बाजार की कमजोर स्थिति के चलते निवेश को टालना ही सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। कंपनियां अब अपने खर्च और रणनीतियों की दोबारा समीक्षा कर रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कंपनियों की प्रतिक्रिया और रणनीति में बदलाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कुछ कंपनियों ने इस चुनौतीपूर्ण समय में अपनी रणनीति बदलनी शुरू कर दी है। iD Fresh Food ने जोखिम कम करने के लिए लंबी अवधि का स्टॉक रखने और सप्लाई चेन के वैकल्पिक रास्ते अपनाने पर जोर दिया है। वहीं, रसना ग्रुप ने मौजूदा हालात को कोविड जैसे कठिन दौर से तुलना करते हुए कहा है कि इस क्षेत्र से लोगों का पलायन भी बढ़ रहा है, जिससे बाजार पर असर पड़ा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यूएई और अन्य बाजारों में कारोबार प्रभावित</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">एथनिक वियर ब्रांड बीबा फैशन के अनुसार, यूएई में ईद तक कारोबार सामान्य रहा, लेकिन उसके बाद बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, डाबर ने भी माना है कि इस संकट का असर उसके मिडिल ईस्ट कारोबार पर पड़ा है। कंपनी के इस क्षेत्र में सैकड़ों कर्मचारी कार्यरत हैं और इसकी कुल आय का महत्वपूर्ण हिस्सा यहीं से आता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भारतीय कंपनियों के लिए अहम बाजार</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मिडिल ईस्ट भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बाजार रहा है। यहां की मजबूत क्रय शक्ति और रणनीतिक लोकेशन के कारण कई कंपनियों ने अपने प्लांट भी इसी क्षेत्र में स्थापित किए हैं, जहां से अफ्रीका और यूरोप तक सप्लाई की जाती है। ऐसे में मौजूदा संकट का असर केवल स्थानीय बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कुछ कंपनियां इस बाजार में बनी रहने के पक्ष में हैं और उन्हें उम्मीद है कि हालात समय के साथ सुधरेंगे। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि निकट भविष्य में कारोबार सामान्य होने में समय लग सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 12:12:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प की चीन को चेतावनी: ईरान को सैन्य मदद दी तो लगेगा 50% टैरिफ, बढ़ा वैश्विक तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान पर अमेरिकी सख्ती, होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी और संभावित सैन्य कार्रवाई से मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-warning-to-china-will-impose-50-tariff-if-military/article-50983"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/china-us-tension.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने चीन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह ईरान को सैन्य सहायता प्रदान करता पाया गया, तो अमेरिका उस पर 50% तक टैरिफ लगा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान-अमेरिका के बीच टकराव गहराता जा रहा है।</p>
<p>एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में ईरान को मजबूत होने नहीं देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका “पूरी तरह तैयार” है। इससे पहले अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने “locked and loaded” शब्दों का इस्तेमाल कर सैन्य तैयारियों का इशारा किया था।</p>
<p>स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की है। ट्रम्प के मुताबिक, इस कार्रवाई में ब्रिटेन समेत कुछ अन्य सहयोगी देश भी शामिल होंगे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी और रोकथाम की जाएगी, जिससे ईरान की तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।</p>
<p>वहीं, ईरान ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। ईरानी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी नाकेबंदी विफल होगी और देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। ईरान ने यह भी दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को टोल देना होगा।</p>
<p>इसी बीच क्षेत्रीय तनाव का असर अन्य देशों पर भी दिख रहा है। लेबनान में इजराइली हमलों में मृतकों की संख्या 2,000 से अधिक हो गई है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस बीच लेबनान ने युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक बातचीत की इच्छा जताई है और वॉशिंगटन में अहम बैठक प्रस्तावित है।</p>
<p>आर्थिक मोर्चे पर भी इस संकट का असर साफ दिख रहा है। अमेरिकी नाकेबंदी की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। वहीं एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 09:00:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान का बड़ा दावा: अमेरिका का एक और एयरक्राफ्ट मार गिराया, इस्फहान में C-130 विमान खत्म किया</title>
                                    <description><![CDATA[Iran US War में इस्फहान परमाणु केंद्र के पास हमलों और अमेरिकी विमान गिराने के दावों से तनाव और बढ़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-big-claim-another-american-aircraft-shot-down-c-130-aircraft/article-50234"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/iran-us-war.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"><strong>Iran US War:</strong> मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच हालात और गंभीर होते दिख रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरान की ओर से यह दावा किया गया है कि उसने इस्फहान क्षेत्र में एक अमेरिकी सैन्य विमान को मार गिराया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस्फहान परमाणु केंद्र के पास बड़ा दावा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस्फहान के परमाणु केंद्र के आसपास एक कथित अमेरिकी C-130 सपोर्ट एयरक्राफ्ट को निशाना बनाकर गिराने की बात कही गई है। दावा किया गया है कि यह कार्रवाई दक्षिणी इस्फहान में हुई, जहां सुरक्षा बलों और विशेष इकाइयों की तैनाती थी। साथ ही इसी क्षेत्र में एक MQ-9 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा सामने आया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">लगातार हमलों का दावा और बढ़ता तनाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस क्षेत्र पर लगातार कई बार हमले हुए हैं, जिनमें अमेरिकी और इजरायली बलों की भूमिका बताई जा रही है। ईरान का कहना है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई खतरों को निष्क्रिय किया है। दूसरी ओर, इन दावों पर अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">परमाणु केंद्र को लेकर चिंता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस्फहान परमाणु केंद्र को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी ऐसे क्षेत्रों पर सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। इसी बीच हमलों के दावों ने क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पायलट और ड्रोन से जुड़े दावे</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरानी पक्ष का दावा है कि पहले की झड़पों में कई अमेरिकी लड़ाकू विमान, ड्रोन और हेलीकॉप्टर भी निशाने पर आए हैं। साथ ही कुछ पायलटों के इजेक्ट करने और रेस्क्यू किए जाने की बातें भी सामने आई हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:20:10 +0530</pubDate>
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