<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/middle-east/tag-3355" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Middle East - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/3355/rss</link>
                <description>Middle East RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी हमले, होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिका ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक तेज की, ट्रम्प ने आगे भी कड़ी कार्रवाई के दिए संकेत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attacks-again-on-iran-tension-increased-after-attack-on/article-58239"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/us-iran-conflict-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में बना तनाव अब एक बार फिर खुले सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच लागू सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई शहरों में एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कोनारक, चाबहार और बंदर अब्बास समेत कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कई स्थानों पर धुएं के बड़े गुबार उठने की बात कही गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहरी हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेना ने इससे पहले मंगलवार को भी ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। अधिकारियों के अनुसार ताजा अभियान उसी कार्रवाई का विस्तार माना जा रहा है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका इस्तेमाल क्षेत्र में हमलों के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर ईरान की ओर से अभी तक सभी हमलों के नुकसान का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और राहत एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले ही ईरान पर जोरदार हमला कर चुका है और जरूरत पड़ने पर आगे भी बड़े सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि ईरान लंबे समय से मध्य पूर्व में दबाव बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अब अमेरिका इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उनके इस बयान के कुछ समय बाद ही ईरान में नई एयरस्ट्राइक की खबरें सामने आने लगीं, जिससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने अपनी चेतावनी पर तुरंत अमल किया।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए जहाजों पर हमलों के बाद और तेज हुई। ईरान ने मंगलवार को तीन जहाजों को निशाना बनाने की पुष्टि करते हुए दावा किया कि संबंधित जहाज उसके निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे थे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की गई, जबकि अमेरिका ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता पर हमला बताया। अमेरिका का कहना है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक जवाबी अभियान के तहत ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। बंदर अब्बास स्थित शाहिद हक्कानी पोर्ट पर भी एयरस्ट्राइक की गई, जिसके बाद वहां से धुएं का बड़ा गुबार उठता देखा गया। यह बंदरगाह ईरान के प्रमुख समुद्री केंद्रों में गिना जाता है और इसकी सामरिक अहमियत भी काफी अधिक मानी जाती है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि दोनों देशों के बीच यही स्थिति बनी रही तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर डाल सकता है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और शिपिंग लागत बढ़ने की आशंका पहले से ही जताई जा रही है। कई देशों ने अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए तत्काल तनाव कम होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति प्रभावित होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attacks-again-on-iran-tension-increased-after-attack-on/article-58239</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attacks-again-on-iran-tension-increased-after-attack-on/article-58239</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:04:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/us-iran-conflict-%283%29.jpg"                         length="133957"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच होर्मुज में फिर हमले, तीन टैंकर बने निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कमर्शियल जहाजों के तय समुद्री मार्ग छोड़ने पर जताई चिंता, अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/three-tankers-targeted-again-in-hormuz-amid-khameneis-last-visit/article-58127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/iran.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमलों की खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि कतर के तेल टैंकर अल-रकायत को निशाना बनाया गया, जबकि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार ओमान तट के पास दो अन्य वाणिज्यिक जहाज भी हमलों की चपेट में आए। घटनाओं के बाद समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान ने कहा है कि कुछ व्यावसायिक जहाज उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा की गारंटी देना संभव नहीं होगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि होर्मुज की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और हालात पहले की तरह स्थिर नहीं माने जा सकते।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हमलों की खबर ऐसे समय सामने आई है जब ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा जारी है। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक शहर कोम पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम श्रद्धांजलि दी। शहर की सड़कों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी और लाखों समर्थकों की मौजूदगी के बीच धार्मिक रस्में पूरी की गईं। अंतिम यात्रा के दौरान कई लोगों के हाथों में लाल झंडे दिखाई दिए। शिया परंपरा में लाल झंडा अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध और बदले की मांग का प्रतीक माना जाता है। पार्थिव शरीर पर ईरान का राष्ट्रीय ध्वज ओढ़ाया गया था, जबकि ताबूत पर उनकी काली पगड़ी भी रखी गई, जो उच्च धार्मिक विद्वानों की पहचान मानी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई और पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के अनुसार इससे पहले तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में भी लाखों लोग शामिल हुए। भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर शव वाहन की रफ्तार धीमी करनी पड़ी और कुछ जगहों पर यात्रा थोड़ी देर के लिए रुक भी गई। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोम ले जाया गया। बताया गया है कि आगे की रस्मों के बाद उन्हें उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, राजनीतिक प्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद रहे। कई लोगों ने नारे लगाए और खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर समुद्री मोर्चे पर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन करना जरूरी है। यदि जहाज तय रास्तों से अलग होकर आवाजाही करेंगे तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल होगा। हालांकि हमलों को लेकर स्वतंत्र स्तर पर विस्तृत पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है और संबंधित एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के भीतर भी इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। देश के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अंतिम यात्रा के दौरान कहा कि देश खामेनेई के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराता है। वहीं सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को उनके किए का जवाब देना होगा और उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। दूसरी ओर क्षेत्रीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अंतिम यात्रा में जुटी भीड़ पूरे ईरान की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती। वहीं इराक के प्रमुख शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की। अंतिम यात्रा के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में बढ़ी गतिविधियां पश्चिम एशिया की पहले से संवेदनशील स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि दुनिया की कई सरकारें और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/three-tankers-targeted-again-in-hormuz-amid-khameneis-last-visit/article-58127</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/three-tankers-targeted-again-in-hormuz-amid-khameneis-last-visit/article-58127</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/iran.jpg"                         length="264408"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लीबिया में मध्यस्थता की कोशिशों में पाकिस्तान की एंट्री, विरोधी गुटों के बीच संवाद बढ़ाने की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्टों और सूत्रों के दावों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज, अमेरिका और सऊदी अरब के समर्थन की भी चर्चा; लीबिया संकट के समाधान पर टिकी नजरें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistans-entry-in-mediation-efforts-in-libya-initiative-to-increase/article-58118"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/libya.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर अफ्रीकी देश लीबिया में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता और गृहसंघर्ष के बीच एक बार फिर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। पाकिस्तान विरोधी गुटों के बीच संवाद स्थापित कराने और समझौते की दिशा में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इन दावों ने क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की कोशिश दोनों प्रमुख पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और राजनीतिक समाधान का रास्ता तलाशने पर केंद्रित है। यदि यह पहल सफल होती है तो पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो सकती है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि लीबिया जैसा जटिल संकट केवल एक देश की पहल से हल नहीं होगा, बल्कि इसके लिए कई क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। अमेरिका और सऊदी अरब इस पूरी प्रक्रिया से अवगत हैं और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं। हालांकि, इन दावों पर संबंधित देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इन सूचनाओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के महीनों में पाकिस्तान ने खुद को क्षेत्रीय कूटनीति में अधिक सक्रिय दिखाने का प्रयास किया है। कुछ रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की प्रक्रिया में पाकिस्तान ने संपर्क सूत्र की भूमिका निभाई थी। इसी पृष्ठभूमि में अब लीबिया को लेकर उसकी सक्रियता को देखा जा रहा है। हालांकि, इस विषय पर भी अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लीबिया पिछले कई वर्षों से राजनीतिक विभाजन, सशस्त्र संघर्ष और सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। देश में अलग-अलग क्षेत्रों पर विभिन्न गुटों का प्रभाव रहा है, जिससे स्थायी राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की पहल पर कई दौर की वार्ताएं भी हो चुकी हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लीबिया में किसी भी शांति समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी प्रमुख पक्ष एक साझा राजनीतिक ढांचे पर सहमत हों। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया, सत्ता के बंटवारे, सुरक्षा व्यवस्था और तेल संसाधनों से होने वाली आय के निष्पक्ष वितरण जैसे मुद्दों पर भी व्यापक सहमति बनाना जरूरी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> लीबिया केवल आंतरिक संघर्ष का मामला नहीं है, बल्कि इसमें कई बाहरी देशों के रणनीतिक हित भी जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि वहां किसी भी नई पहल को सफल बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी। पाकिस्तान और लीबिया के बीच रक्षा क्षेत्र में भी संपर्क बढ़ा है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा और सैन्य सहयोग को लेकर बातचीत होने की जानकारी पहले भी सामने आ चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संबंध इस नई कूटनीतिक पहल में सहायक हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सभी संबंधित पक्ष बातचीत की प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हैं तो लीबिया में स्थिरता की दिशा में सकारात्मक प्रगति संभव है। हालांकि, अतीत में कई बार वार्ता शुरू होने के बावजूद राजनीतिक मतभेद और क्षेत्रीय हितों के कारण समझौते आगे नहीं बढ़ पाए। इसलिए इस बार भी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी पक्ष कितनी गंभीरता से समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं। लीबिया में स्थायी शांति केवल राजनीतिक समझौते से नहीं आएगी। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, सरकारी संस्थाओं को प्रभावी बनाना, आर्थिक पुनर्निर्माण और आम नागरिकों का भरोसा जीतना भी उतना ही आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistans-entry-in-mediation-efforts-in-libya-initiative-to-increase/article-58118</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistans-entry-in-mediation-efforts-in-libya-initiative-to-increase/article-58118</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:39:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/libya.jpg"                         length="136090"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>LNG सप्लाई फिर हुई सामान्य, सरकार ने हटाए सभी आपातकालीन प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट बहाल होने के बाद केंद्र का बड़ा फैसला, उद्योगों को मिलेगी राहत और गैस आपूर्ति होगी सुचारु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lng-supply-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि एलएनजी का सबसे अधिक उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस एवं तेल के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति स्थिर है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से भारत के लिए एलएनजी कार्गो फिर से नियमित रूप से पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के चलते फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने वाले एलएनजी कार्गो को रोक दिया था या उन्हें अन्य देशों की ओर मोड़ दिया था। इस संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ लागू किया था। इसका उद्देश्य सीमित उपलब्ध गैस का प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखना था।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी सप्लाई से जुड़े प्रतिबंध हटाना सरकार का तीसरा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद दो अन्य आपातकालीन फैसले भी वापस ले चुकी है। पहले फैसले के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया था कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन अधिक करें ताकि घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें। अब इस निर्देश को समाप्त कर दिया गया है। दूसरे फैसले में बल्क उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अब ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और किसी प्रकार की अतिरिक्त पाबंदी की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। देश में कई उद्योग प्राकृतिक गैस पर आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग करते हैं। गैस की कमी के दौरान कई कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और उत्पादन घटाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब नियमित आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और कई उद्योगों का संचालन पहले की तरह सुचारु रूप से हो सकेगा। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, स्टील, सिरेमिक, कांच, टेक्सटाइल और अन्य गैस आधारित उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। इनमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया के देशों से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। विशेष रूप से कतर से आने वाली एलएनजी का अधिकांश परिवहन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक कदम उठाए थे। विभिन्न देशों से ईंधन आयात के विकल्प तलाशे गए, घरेलू भंडार का उपयोग किया गया और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया गया। एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है। उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lng-supply-india.jpg"                         length="217062"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटे 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, कई बड़े देशों ने नहीं भेजे शीर्ष नेता</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम विदाई की रस्में शुरू, ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने दी श्रद्धांजलि, भारत सहित कई देशों ने मंत्री स्तर के प्रतिनिधिमंडल भेजे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4892cddd218/article-57814"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/khamenei-funeral-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला तेहरान में शुरू हो गया है। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे। श्रद्धांजलि समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए नागरिकों के साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की भी मौजूदगी रही। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, चीफ जस्टिस गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई, संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ और सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री समारोह में शामिल हुए और खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे, लेकिन रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे प्रभावशाली देशों ने अपने सर्वोच्च नेताओं को नहीं भेजा। इन देशों की ओर से मंत्री स्तर या अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से समारोह में मौजूद नहीं रहे। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी चर्चा देखने को मिली। हालांकि ईरान की ओर से कई देशों के शीर्ष नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा कारणों को देखते हुए अधिकांश देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर श्रद्धांजलि दी। वहीं पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और जॉर्जिया के शीर्ष नेता स्वयं समारोह में शामिल हुए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अलग-अलग देशों की मौजूदगी और प्रतिनिधित्व का स्तर मौजूदा कूटनीतिक समीकरणों को भी दर्शाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि समारोह के दौरान तेहरान में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए। राजधानी की प्रमुख सड़कों, सरकारी भवनों और संवेदनशील इलाकों में सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के जवान तैनात रहे। कई प्रमुख मार्गों पर सैन्य वाहनों की लगातार गश्त देखने को मिली। अधिकारियों के अनुसार समारोह में बड़ी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में प्रवेश करने वाले लोगों की अलग-अलग सुरक्षा जांच की गई और पूरे परिसर की निगरानी आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई। आम लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने राजधानी में मेट्रो और सरकारी बस सेवाओं को नि:शुल्क रखा। दूसरे शहरों से आने वाले लोगों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जबकि कई स्कूलों, मस्जिदों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई। कुछ होटलों ने भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए किराए में विशेष छूट दी। प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न होने देना था। सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें दिखाई दीं और बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लेकर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग लाल झंडे लिए भी नजर आए। समारोह के दौरान कुछ समूहों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए और क्षेत्रीय घटनाओं को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान हालात पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और किसी अप्रिय घटना की सूचना सामने नहीं आई। कई महिलाओं को भावुक होकर रोते हुए भी देखा गया, जबकि लोगों ने शांतिपूर्वक अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">खामेनेई का ताबूत इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला पहुंचने के बाद अंतिम श्रद्धांजलि की औपचारिक रस्में शुरू हुईं। अधिकारियों के अनुसार परिवार के सदस्यों ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे समारोह का सीधा प्रसारण देश के कई समाचार माध्यमों पर किया गया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा। समारोह में मौजूद नेताओं ने खामेनेई के लंबे सार्वजनिक जीवन और ईरान की राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। हालांकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार का औपचारिक राजनीतिक संबोधन नहीं हुआ, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें देश के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक बताया। इस बीच दुनिया की नजर भी तेहरान पर बनी रही, क्योंकि खामेनेई के निधन के बाद ईरान की राजनीति, क्षेत्रीय रणनीति और भविष्य के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और उसकी विदेश नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और प्रशासन लगातार सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार पूरे किए जाएंगे। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी ईरान में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, क्योंकि इसका असर पश्चिम एशिया के व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4892cddd218/article-57814</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4892cddd218/article-57814</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/khamenei-funeral-%281%29.jpg"                         length="178587"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए तेहरान में हजारों लोग पहुंचे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला परिसर में श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि युद्धविराम के बीच अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी की गईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-delegation-bids-final-farewell-to-ayatollah-ali-khamenei-in/article-57767"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ayatollah-ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की राजधानी तेहरान शुक्रवार को उस समय भावुक माहौल का गवाह बनी, जब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर लाया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग परिसर के बाहर एकत्र होने लगे थे। देशभर से आए नागरिकों, धार्मिक नेताओं, राजनीतिक हस्तियों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला पहुंचकर दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न कराई जा रही है। हाल के क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने तेहरान के कई हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में प्रवेश करने वाले सभी लोगों की सघन जांच की गई और पूरे कार्यक्रम की निगरानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम दर्शन के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए और कुछ क्षणों का मौन रखकर सम्मान प्रकट किया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के अधिकारियों से भी मुलाकात की और शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, समुद्री संपर्क, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी रही है। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले आयोजित किया जाना था, लेकिन हालिया सैन्य संघर्ष के चलते कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। सुरक्षा कारणों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था। अब जब संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू हुआ है, तब प्रशासन ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि क्षेत्र में अभी भी तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अंतिम संस्कार से एक दिन पहले देशवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और संकल्प प्रदर्शित करने का भी समय है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश की जनता की एकजुटता दुनिया तक स्पष्ट रूप से पहुंचनी चाहिए। उनके अनुसार, बड़ी जनभागीदारी ईरान की सामूहिक शक्ति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह से ही हजारों लोग ग्रैंड मोसल्ला परिसर पहुंचने लगे थे। लोगों के हाथों में ईरानी झंडे और धार्मिक प्रतीक दिखाई दिए। कई लोग अपने परिवारों के साथ अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में धार्मिक छात्र और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे। परिसर के भीतर धार्मिक अनुष्ठान किए गए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम विदाई की तैयारियां पूरी की गईं। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रम को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी कैमरों और विशेष सुरक्षा इकाइयों की मदद से पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी गई। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष प्रोटोकॉल लागू किए। कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया ताकि भीड़ और सुरक्षा दोनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच हालिया संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और ईरान के बीच व्यापार, ऊर्जा, चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण विषय सहयोग के प्रमुख आधार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात के बावजूद दोनों देश आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को महत्व देता है और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का समर्थक बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-delegation-bids-final-farewell-to-ayatollah-ali-khamenei-in/article-57767</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-delegation-bids-final-farewell-to-ayatollah-ali-khamenei-in/article-57767</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 12:30:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/ayatollah-ali-khamenei.jpg"                         length="182489"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मुजतबा, सुरक्षा एजेंसियों ने जताया इजराइली हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से बेटे मुजतबा खामेनेई को अंतिम संस्कार से दूर रहने की सलाह दी गई है, जबकि कई देशों के प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-mujtaba-will-not-attend-khameneis-funeral-security-agencies-expressed/article-57704"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि इजराइल की ओर से संभावित हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम लीडर के एक प्रतिनिधि के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के दौरान किसी भी तरह का हमला या सुरक्षा उल्लंघन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को फिलहाल सीमित रखने की सलाह दी गई है। पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि मुजतबा खामेनेई हमलों में घायल हो गए थे। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी और उसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर भी नजर नहीं आए। अब अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। ईरानी प्रशासन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी रणनीति पर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। बताया जा रहा है कि मशहद में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है और समारोह स्थल के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की ओर से भी अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी कर सकता है, हालांकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में लगातार तनाव भी बना रहा। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। धार्मिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा जोखिम पहले से अधिक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान का नया नेतृत्व इस संवेदनशील दौर में किस तरह आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय हालात पर इसका क्या असर पड़ता है। दूसरी ओर, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा को ही इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-mujtaba-will-not-attend-khameneis-funeral-security-agencies-expressed/article-57704</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-mujtaba-will-not-attend-khameneis-funeral-security-agencies-expressed/article-57704</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:03:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/ali-khamenei.jpg"                         length="108077"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कतर में अमेरिका-ईरान वार्ता तेज, जमी संपत्ति और MoU क्रियान्वयन पर अहम चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[दोहा में अप्रत्यक्ष वार्ता के दौरान जमी संपत्ति, हॉटलाइन व्यवस्था, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a463522a604b/article-57668"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/america-iran-talks.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर अहम अप्रत्यक्ष वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच पहले हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन, ईरान की जमी हुई संपत्तियों के उपयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में लगातार तनाव बना हुआ है और दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। बातचीत में प्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए संवाद आगे बढ़ाया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है और कई प्रस्तावों पर आगे भी विचार किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि इस दौर की बातचीत समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक विशेष संचार व्यवस्था यानी हॉटलाइन स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव है कि गुरुवार तक ऐसी प्रणाली तैयार की जाए जिसके जरिए यदि किसी भी पक्ष की ओर से MoU का उल्लंघन होता है तो उसकी जानकारी तुरंत साझा की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था भविष्य में विवादों को बढ़ने से रोकने और संवाद को जारी रखने में मददगार साबित हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक का सबसे अहम विषय ईरान की विदेशों में जमी हुई संपत्ति रहा। कतर में रखी गई ईरान की अरबों डॉलर की राशि के उपयोग को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तार से बातचीत हुई। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इस राशि का इस्तेमाल सीधे नकद भुगतान के बजाय आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। इन वस्तुओं को बाद में ईरान भेजा जाएगा ताकि प्रतिबंधों के बीच भी जरूरी जरूरतें पूरी की जा सकें। बताया गया कि शुरुआती छह अरब डॉलर की राशि में से एक हिस्से के उपयोग के तौर-तरीकों पर भी कतर के अधिकारियों और वहां के केंद्रीय बैंक के साथ चर्चा हुई। ईरान का कहना है कि वह इस धनराशि का इस्तेमाल मानवीय जरूरतों और जरूरी सामान की खरीद तक सीमित रखना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वार्ता के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई। सभी संदेश और प्रस्ताव मध्यस्थ देशों के माध्यम से साझा किए गए। कतर लंबे समय से दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस बार पाकिस्तान की भी मध्यस्थता में भागीदारी रही, जिससे वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद मिली। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष बातचीत भले ही नहीं हुई हो, लेकिन अप्रत्यक्ष संवाद भी दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोहा में हुई बैठकों के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय बैठक में लेबनान की स्थिति, इजरायल की सैन्य गतिविधियों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात पर विस्तार से विचार किया गया। ईरान ने आरोप लगाया कि लेबनान में इजरायल की सैन्य मौजूदगी समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन रही है। इसके साथ ही ईरान ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान की संप्रभुता है और इस क्षेत्र से जुड़े किसी भी निर्णय में उनकी भूमिका सर्वोपरि रहनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में ओमान की ओर से दिए गए नए प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर भविष्य की रणनीति पर बातचीत जारी रहेगी। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल अब अपने-अपने देशों में इस प्रस्ताव का अध्ययन करेंगे और आवश्यक परामर्श के बाद अगली बैठक में अपना रुख स्पष्ट करेंगे। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान ने वार्ता के दौरान यह भी मांग रखी कि MoU के पांच प्रमुख प्रावधानों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि समझौते के सभी बिंदुओं पर समान गति से काम होना जरूरी है ताकि किसी भी पक्ष को असंतोष का मौका न मिले। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वह भी चरणबद्ध तरीके से समझौते को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि दोहा में हुई यह वार्ता भविष्य की कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए अहम साबित हो सकती है। हालांकि अभी कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं, लेकिन बातचीत जारी रहने की सहमति अपने आप में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि जमी हुई संपत्तियों के उपयोग, हॉटलाइन व्यवस्था और समझौते के अन्य प्रावधानों पर ठोस प्रगति होती है तो इससे दोनों देशों के संबंधों में कुछ हद तक नरमी आ सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a463522a604b/article-57668</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a463522a604b/article-57668</guid>
                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/america-iran-talks.jpg"                         length="120193"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने NATO देशों पर लगाए गंभीर आरोप, होर्मुज में जहाज पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान का दावा—अमेरिका-इजराइल के साथ कुछ NATO देशों ने दिया सैन्य समर्थन, होर्मुज स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाज पर हमला, ब्रिज को नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-nato-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। Iran ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर उसके खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई में कुछ NATO सदस्य देशों ने भी समर्थन दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में NATO की भूमिका की गंभीर जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनती दिख रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की ओर से यह दावा ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीतिक मंच पर पहले से ही कई मुद्दों को लेकर असहमति बनी हुई है। बघई ने अपने बयान में कहा कि NATO प्रमुख मार्क रूट ने खुद इस बात की ओर इशारा किया है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का समर्थन किया था। हालांकि इस दावे पर अभी तक स्वतंत्र रूप से किसी भी देश ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरान ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इन देशों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर और किस उद्देश्य से इस तरह के सैन्य सहयोग में हिस्सा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर किसी भी NATO देश ने इस प्रकार की कार्रवाई में भाग लिया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। तेहरान ने यह भी मांग की है कि इन देशों को न केवल अपने नागरिकों को बल्कि पूरी दुनिया को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर इस तरह की कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच समुद्री सुरक्षा से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। Strait of Hormuz में एक कॉमर्शियल जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि की है। जहाज ओमान के तट के पास था, जब अचानक एक प्रोजेक्टाइल आकर जहाज के दाहिने हिस्से से टकरा गया। इस हमले से जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा है, जहां से जहाज का संचालन किया जाता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी क्रू सदस्य को चोट नहीं आई है। घटना के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, और इस नए विवाद ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। NATO की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक NATO की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं अमेरिका और इजराइल की ओर से भी इन आरोपों पर चुप्पी बनी हुई है। ईरान का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जबकि पश्चिमी देश इसे खारिज कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह से होर्मुज क्षेत्र में हमला हुआ है, उसने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा और व्यापार बाजारों पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/iran-nato-conflict.jpg"                         length="230972"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजफायर के बावजूद लेबनान पर इजराइल का फिर हमला, 5 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों से बढ़ा तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे प्रतिनिधि]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/despite-ceasefire-israel-attacks-lebanon-again-5-people-killed/article-56485"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/israel-lebanon-conflict-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम की घोषणा के महज एक दिन बाद ही मध्य पूर्व में हालात फिर तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं। शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच सीजफायर पर सहमति बनने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि लंबे समय से जारी हिंसा पर कुछ हद तक विराम लगेगा और सीमा क्षेत्रों में सामान्य स्थिति लौटने लगेगी। लेकिन शनिवार सुबह दक्षिणी लेबनान में हुए ताजा हवाई हमलों ने इन उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। रिपोर्टों के अनुसार इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों को निशाना बनाते हुए हवाई कार्रवाई की, जिसमें कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। कई अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है, हालांकि घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक नबातिएह क्षेत्र में सुबह से ही कई जगह धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इजराइली लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों की चपेट में रिहायशी इलाके भी आए, जिससे कई मकानों और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए जबकि कई इमारतों में दरारें आ गईं। हमलों के बाद प्रभावित इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि हवाई हमलों के साथ-साथ कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में तोपों से भी गोलाबारी की गई। इससे पहले से डरे हुए लोगों में और अधिक भय का माहौल बन गया। राहत और बचाव दलों को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। मलबे में दबे लोगों की तलाश का काम शुरू किया गया और घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाया गया। स्थानीय अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शुक्रवार को हुए संघर्ष विराम को क्षेत्र में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस समझौते का स्वागत किया था। कई देशों ने उम्मीद जताई थी कि इससे सीमा क्षेत्रों में हिंसा कम होगी और आम लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संघर्ष विराम वास्तव में प्रभावी तरीके से लागू हो पा रहा है या फिर क्षेत्र में अविश्वास और तनाव अभी भी बरकरार है।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में जारी इस तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बने संवाद को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि वहां दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच आगे की शर्तों और संभावित समझौतों को लेकर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पूरे क्षेत्र में स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। मेरिका की ओर से इस वार्ता को काफी अहम माना जा रहा है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर भी इस प्रक्रिया में किसी भूमिका में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उनकी भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मध्य पूर्व से जुड़े मामलों में उनके पिछले अनुभव को देखते हुए इस संभावना पर चर्चा हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी स्विट्जरलैंड पहुंच सकते हैं। माना जा रहा है कि बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे, परमाणु कार्यक्रम और भविष्य के कूटनीतिक संबंधों जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। वर्तमान हालात काफी जटिल हैं। एक तरफ शांति और बातचीत के प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर हिंसा और सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी भी समझौते को स्थायी रूप से लागू करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लेबनान में हुए ताजा हमले इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और किसी भी समय स्थिति फिर गंभीर रूप ले सकती है।  संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संगठन लगातार संयम बरतने और संघर्ष विराम का सम्मान करने की अपील कर रहे हैं। वहीं लेबनान में प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी है और स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/despite-ceasefire-israel-attacks-lebanon-again-5-people-killed/article-56485</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/despite-ceasefire-israel-attacks-lebanon-again-5-people-killed/article-56485</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:40:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/israel-lebanon-conflict-%281%29.jpg"                         length="143065"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान युद्ध खत्म होने का ट्रंप का दावा, जल्द हो सकता है समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौता अंतिम चरण में है, सप्ताहांत तक यूरोप में हस्ताक्षर होने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-of-ending-iran-war-may-reach-agreement-soon/article-55737"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में कई दिनों से जारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष अब प्रभावी रूप से समाप्त हो चुका है और दोनों पक्षों के बीच एक व्यापक समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस समझौते पर यूरोप में सप्ताहांत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ वैश्विक बाजारों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उनके अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभावित समझौता समारोह में अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान सहित कई देशों के नेताओं से चर्चा की है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने परमाणु हथियार हासिल करने की किसी भी कोशिश को स्थायी रूप से छोड़ने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त यही थी कि ईरान भविष्य में किसी भी रूप में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में इस विषय पर विस्तृत और स्पष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं। बाद में एक टेली-रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त कर दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि यह संघर्ष उसी उद्देश्य के लिए था जिसके तहत अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता था कि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। ट्रंप ने कहा कि अब ईरान इस शर्त को स्वीकार कर चुका है और इसी कारण शांति की दिशा में तेजी से प्रगति हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब कुछ घंटे पहले तक उनका रुख काफी आक्रामक दिखाई दे रहा था। दिन में उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी। यहां तक कि उन्होंने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप और अन्य ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बात भी कही थी। लेकिन बाद में उन्होंने प्रस्तावित हमलों को रोकने की घोषणा कर दी और कहा कि बातचीत में सकारात्मक प्रगति होने के कारण सैन्य कार्रवाई फिलहाल टाल दी गई है। ट्रंप के इस अचानक बदले रुख के पीछे कूटनीतिक प्रयासों की बड़ी भूमिका हो सकती है। पिछले कुछ सप्ताहों से अमेरिका और ईरान के बीच विभिन्न माध्यमों से बातचीत जारी थी। कई बार यह संकेत मिले कि दोनों देश किसी समझौते के करीब पहुंच गए हैं, लेकिन अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी। ट्रंप का ताजा बयान इस दिशा में सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि समझौता होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य तरीके से संचालित किया जाएगा। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। हाल के तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई थी। ट्रंप के अनुसार, यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वित्तीय बाजारों में भी इस खबर का असर देखने को मिला। निवेशकों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम माना। लंबे समय से चल रही अनिश्चितता के कारण ऊर्जा कीमतों और शेयर बाजारों पर दबाव बना हुआ था। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समझौते के दस्तावेज सामने आने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। ईरान की ओर से अभी तक समझौते को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि विभिन्न कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि बातचीत के कई दौर सफल रहे हैं और दोनों पक्ष कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति के करीब पहुंच चुके हैं। ऐसे में ट्रंप के बयान को वार्ता प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यदि यह समझौता सफल होता है तो यह केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा। लंबे समय से क्षेत्र में मौजूद तनाव, प्रतिबंधों और सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच किसी बड़े समझौते की संभावना को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि अंतिम दस्तावेज सार्वजनिक होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उनका मानना है कि कई बार वार्ताएं अंतिम चरण तक पहुंचने के बाद भी बाधित हो जाती हैं। इसके बावजूद ट्रंप का आत्मविश्वास और उनके द्वारा दिए गए संकेत यह दर्शाते हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अब पूरी दुनिया की निगाहें संभावित समझौते पर टिकी हैं। यदि सप्ताहांत तक यूरोप में इस पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक घटनाओं में से एक साबित हो सकता है। साथ ही यह भी तय करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-of-ending-iran-war-may-reach-agreement-soon/article-55737</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-of-ending-iran-war-may-reach-agreement-soon/article-55737</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/donald-trump-%281%29.jpg"                         length="111656"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, कुवैत ने बंद किया हवाई क्षेत्र; मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई का दावा, कुवैत और बहरीन अलर्ट पर; इजराइल ने भी उत्तरी सीमा पर हमले की चेतावनी जारी की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/at-the-height-of-us-iran-tension-kuwait-closed-its-airspace/article-55672"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-conflict-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। गुरुवार को कुवैत ने "ईरानी आक्रामकता" का हवाला देते हुए अस्थायी रूप से अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जबकि इजराइल ने लेबनान की दिशा से उत्तरी इलाकों पर संभावित हमलों की चेतावनी जारी की। घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की आशंका को और गहरा कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुवैत सरकार के अनुसार, देश की वायु सुरक्षा प्रणालियों ने कई संदिग्ध हवाई लक्ष्यों को इंटरसेप्ट किया। सुरक्षा कारणों से नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने कुछ घंटों के लिए हवाई क्षेत्र बंद रखने का फैसला किया। बाद में स्थिति नियंत्रण में आने के बाद हवाई क्षेत्र को फिर से खोल दिया गया। हालांकि इस दौरान क्षेत्रीय उड़ानों और अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रैफिक पर असर पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। रिपोर्टों के अनुसार, कुवैत के अली सलेम और अहमद अल-जाबेर एयर बेस के अलावा बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर भी हमले किए गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बहरीन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई हवाई हमलों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच इजराइल की होम फ्रंट कमांड ने उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि लेबनान की दिशा से रॉकेट या अन्य हमले किए जाने की आशंका है। सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तनाव की यह स्थिति तब पैदा हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य और निगरानी ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, इन हमलों में ईरान की सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार नेटवर्क और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि ये कार्रवाई उन खतरों को समाप्त करने के लिए की गई जो अमेरिकी सैनिकों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए जोखिम पैदा कर रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान ने इसके जवाब में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी जहाजों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। इसके साथ ही ईरान की शीर्ष सैन्य कमान ने जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर सैन्य तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रख सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर कार्रवाई रोकने की अपील की थी। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका आगे भी सैन्य कदम उठा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्रंप ने ईरान से परमाणु और सुरक्षा समझौते पर सहमति बनाने की अपील करते हुए कहा कि अमेरिका एक ऐसा समझौता चाहता है जो प्रभावी और स्थायी हो। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीजी ने कहा कि यदि संघर्ष बढ़ा तो इसका दायरा केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल देखा जा रहा है। निवेशक स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और वैश्विक कूटनीति सभी प्रभावित हो सकते हैं।  मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/at-the-height-of-us-iran-tension-kuwait-closed-its-airspace/article-55672</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/at-the-height-of-us-iran-tension-kuwait-closed-its-airspace/article-55672</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:53:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/us-iran-conflict-%282%29.jpg"                         length="180780"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        