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                <title>RahulGandhi - दैनिक जागरण</title>
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                <title>पवन खेड़ा का RSS पर हमला, बोले- आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर पहुंचे कांग्रेस नेता ने राम मंदिर ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल, जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आज होगा समापन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/pawan-kheda-attacks-rss-says-no-contribution-in-freedom-struggle/article-57301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pawan-khera.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा रविवार देर रात रायपुर पहुंचे। सोमवार को वे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में शामिल होंगे। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), राम मंदिर ट्रस्ट और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर कई मुद्दों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई योगदान नहीं रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम के नाम पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल को समझने का भी एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में पार्टी कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों को नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। यही वजह है कि इस प्रशिक्षण शिविर में संगठन, संवाद, मीडिया प्रबंधन और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान पवन खेड़ा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोई भूमिका नहीं थी। उनका आरोप था कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में संघ का कोई योगदान दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि जो संगठन देश की आजादी की लड़ाई का हिस्सा नहीं रहे, वे आज इतिहास की नई व्याख्या करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि इतिहास को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार।</p>
<p class="isSelectedEnd">महात्मा गांधी को लेकर RSS के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि ऐसे बयानों पर अधिक समय खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देश इस समय महंगाई, बेरोजगारी और किसानों समेत कई अहम मुद्दों का सामना कर रहा है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को इन विषयों पर चर्चा करनी चाहिए, न कि ऐसे विवादित बयानों के जरिए लोगों का ध्यान भटकाना चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर भी पवन खेड़ा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं और इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट का गठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच और निगरानी में हुआ है तथा इसकी गतिविधियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की भी नजर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं और उनके नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता। खेड़ा ने कहा कि अयोध्या से लेकर उज्जैन तक सामने आए कुछ मामलों ने लोगों के मन में सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना था कि अगर कहीं भी अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।रायपुर में चल रहे कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को लेकर भी उन्होंने विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि पिछले दस दिनों से पार्टी के जिला अध्यक्षों को संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, चुनावी तैयारी, जनसंपर्क अभियान और मीडिया के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। उनका कहना था कि बदलते राजनीतिक माहौल में केवल पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं। कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग की भी जानकारी होना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि संवाद स्थापित करना और जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को समझना भी है। जिला अध्यक्षों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विभिन्न राज्यों में संगठन के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। इससे पार्टी नेतृत्व को भी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और सुझावों को समझने का अवसर मिला। गौरतलब है कि इस प्रशिक्षण शिविर में इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी शामिल हुए थे। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने, आम जनता के बीच सक्रिय रहने और विचारधारा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था। राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से कहा था कि संगठन की मजबूती ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उनके संबोधन के बाद सोमवार को होने वाला समापन समारोह भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। रायपुर में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि जिला स्तर के पदाधिकारियों को नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि वे जनता के बीच अधिक प्रभावी तरीके से पार्टी का संदेश पहुंचा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:53:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी का 56वां जन्मदिन, कांग्रेस मुख्यालय में मनाया जश्न</title>
                                    <description><![CDATA[प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ केक काटा, देशभर में कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किए, नेताओं ने दी शुभकामनाएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rahul-gandhis-56th-birthday-celebrated-at-congress-headquarters/article-56417"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi-birthday.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को अपना 56वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, बहन प्रियंका गांधी वाड्रा, वरिष्ठ नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में केक काटा। सुबह से ही कांग्रेस मुख्यालय में उत्साह का माहौल दिखाई दिया और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अपने नेता को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने पहुंचे। राहुल गांधी के जन्मदिन को लेकर केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर राहुल गांधी के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए, जिनमें उन्हें संविधान हाथ में लिए हुए दिखाया गया था। कई कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का जन्मदिन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनता के मुद्दों और सामाजिक सरोकारों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को याद करने का अवसर भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ इंदिरा भवन पहुंचे। यहां मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनका स्वागत किया। इसके बाद राहुल गांधी ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर केक काटा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनके स्वस्थ एवं लंबे जीवन की कामना की। कुछ बच्चों ने भी राहुल गांधी को उनकी तस्वीरें और शुभकामना संदेश भेंट किए। कांग्रेस मुख्यालय में मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने भी उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। राहुल गांधी के जन्मदिन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के मुद्दों को लगातार सामने लाते रहे हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी का सार्वजनिक जीवन सामाजिक न्याय, समावेशिता और समानता जैसे मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। खड़गे ने कहा कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना और सत्ता से सवाल पूछना राहुल गांधी की राजनीति की पहचान बन चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी को जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। इसके अलावा कांग्रेस नेता शशि थरूर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने भी उन्हें बधाई संदेश भेजे। सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी के समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में शुभकामनाएं साझा कीं। देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने तरीके से जन्मदिन मनाया। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी की तस्वीर का दुग्धाभिषेक किया। वहीं मध्य प्रदेश के भोपाल में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के पोस्टर को केक खिलाकर जन्मदिन की खुशियां मनाईं। कई शहरों में रक्तदान शिविर, पौधारोपण अभियान और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर यूथ कांग्रेस ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक जॉब फेयर का आयोजन भी किया। पार्टी के अनुसार इस रोजगार मेले में हजारों युवाओं ने पंजीकरण कराया। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना था। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी लगातार युवाओं और रोजगार के मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाते रहे हैं, इसलिए उनके जन्मदिन को इस तरह के कार्यक्रमों से जोड़ना सार्थक पहल है। राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को नई दिल्ली में हुआ था। वे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली और देहरादून में हुई। सुरक्षा कारणों और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उनकी पढ़ाई कई चरणों में अलग-अलग संस्थानों में पूरी हुई। बाद में उन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की और कुछ समय तक निजी क्षेत्र में भी काम किया। राजनीति में उनकी औपचारिक एंट्री वर्ष 2004 में हुई, जब उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले दो दशकों में राहुल गांधी कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में सक्रिय भूमिका निभाई है। हाल के वर्षों में वे महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक न्याय और संविधान जैसे मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। 56वें जन्मदिन के मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के उत्साह और देशभर से मिली शुभकामनाओं ने यह साफ कर दिया कि राहुल गांधी पार्टी की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:40:06 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी तेज, आज विधायक दल की बैठक में होगा नया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार सबसे मजबूत दावेदार, नई सरकार और कैबिनेट गठन पर सभी की नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparations-for-change-of-leadership-in-karnataka-intensified-new-decision/article-54573"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-congress.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद राज्य में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं अपने चरम पर पहुंच गई हैं। शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी बैठक में नए नेता का चुनाव किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नाम की है। माना जा रहा है कि विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो जाएगा। बैठक से पहले डीके शिवकुमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात भी की, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बेंगलुरु में शाम चार बजे आयोजित होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है। पार्टी हाईकमान ने इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बताया जा रहा है कि बैठक में सबसे पहले विधायक दल के नेता के नाम पर चर्चा होगी और उसके बाद सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं। हालांकि कांग्रेस के भीतर अंतिम निर्णय को लेकर अभी भी औपचारिक घोषणा बाकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं। इस्तीफा देने के अगले ही दिन वे दिल्ली पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इन बैठकों को नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सत्ता संतुलन बनाए रखने और विभिन्न गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश में जुटा हुआ है। इसी वजह से दिल्ली और बेंगलुरु के बीच लगातार राजनीतिक संवाद जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सूत्रों का दावा है कि यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो 1 जून को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। केवल मुख्यमंत्री का चेहरा ही नहीं बदलेगा बल्कि मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। चर्चा है कि मौजूदा कैबिनेट के कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है और नए चेहरों को मौका मिलेगा। पार्टी के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की स्थिति में भी सिद्धारमैया का प्रभाव सरकार में बना रह सकता है। नई कैबिनेट के गठन में उनके समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पार्टी नेतृत्व इस बात का ध्यान रख रहा है कि सत्ता परिवर्तन के दौरान किसी भी वर्ग या गुट में असंतोष की स्थिति पैदा न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधायक दल की बैठक से पहले पार्टी नेताओं के बयानों ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने कहा कि यह एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ ही कैबिनेट भंग हो चुकी है और अब नई सरकार के गठन का फैसला पार्टी हाईकमान के मार्गदर्शन में होगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अंतिम निर्णय संगठन स्तर पर पूरी सहमति के बाद लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच डीके शिवकुमार को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि लंबे समय से पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है और अब उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में शिवकुमार ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है और संगठन के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक ज्योतिषीय दावा भी चर्चा में है। डीके शिवकुमार के ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी ने दावा किया है कि शिवकुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। उन्होंने कुछ संभावित शपथ ग्रहण तिथियों का भी उल्लेख किया है। हालांकि राजनीतिक फैसले ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से नहीं बल्कि संगठन और विधायकों की राय से तय होते हैं, फिर भी यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:56:54 +0530</pubDate>
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                <title>लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पास, पीएम बोले बिना; 2004 के बाद पहली बार</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के हंगामे के बीच पीएम मोदी का संबोधन टला, कांग्रेस बोली- राहुल गांधी को बोलने दें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/698482c45341d/article-45414"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/lifestyel--(74).jpg" alt=""></a><br /><p>बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास कर दिया गया, लेकिन यह पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में जवाब नहीं दिया। यह घटना 2004 के बाद पहली बार देखने को मिली, जब तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को विपक्ष ने बोलने नहीं दिया था।</p>
<p>आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी और तख्तियां लेकर हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही को तीन बार स्थगित किया। लोकसभा दोपहर 3 बजे पुनः शुरू हुई, लेकिन हंगामे के चलते इसे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।</p>
<p>विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, ने स्पष्ट किया कि जब तक राहुल गांधी को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी, पीएम मोदी को सदन में बोलने नहीं दिया जाएगा। निलंबित कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकार का सवाल है। इसी वजह से प्रधानमंत्री का जवाब टल गया, हालांकि वे शाम को राज्यसभा में भाषण देने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>बुधवार को भी लोकसभा में विपक्ष ने पीएम की कुर्सी घेरकर उनकी स्पीच रोक दी थी। महिला सांसदों ने बैनर और नारे लेकर सत्ताधारी नेताओं की कुर्सियां घेरी। इस हंगामे की वजह से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चार दिन की चर्चा प्रभावित हुई और पीएम का भाषण संभव नहीं हो पाया।</p>
<p>यह घटना संसद के लोकतांत्रिक परंपरा और कार्य प्रणाली पर प्रश्न उठाती है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर चर्चा और उनके बोलने की अनुमति को लेकर हंगामा जारी रहा। राज्यसभा में भी विपक्ष ने इस मुद्दे पर वॉकआउट किया। केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते नजर आए।</p>
<p> लोकसभा स्पीकर ने साफ किया कि सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है और सभी सांसदों को नियमों का पालन करना होगा। शुक्रवार को बजट सत्र की कार्यवाही फिर से शुरू होगी और पीएम मोदी या अन्य केंद्रीय मंत्री धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब दे सकते हैं।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। विपक्षी हंगामा लोकतांत्रिक बहस को प्रभावित कर रहा है, वहीं सरकार को भी संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पास होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन प्रधानमंत्री का जवाब न मिलना और विपक्षी हंगामे ने इसे ऐतिहासिक और असामान्य बना दिया। बजट सत्र की आगे की कार्यवाही और पीएम का भाषण इस घटना के बाद सभी की निगाहों में रहेगा।</p>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 18:28:36 +0530</pubDate>
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