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                <title>Global Energy Crisis - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Global Energy Crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरान–अमेरिका तनाव चरम पर, समझौते पर अनिश्चितता कायम</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है, वहीं ट्रंप ने हमले रोकने और बातचीत आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/uncertainty-remains-over-agreement-as-iran-us-tensions-peak/article-55691"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-tensions-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से साफ कहा गया है कि अभी तक अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई और बातचीत दोनों को लेकर लगातार बदलते संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ उन्होंने नए हमलों को रोकने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर पहले दिए गए कड़े बयानों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार (11 जून 2026) को राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ बातचीत अब “उच्चतम नेतृत्व स्तर” तक पहुंच चुकी है और इसे आगे बढ़ाने के संकेत मिले हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी वजह से उन्होंने  नए सैन्य हमलों को रोकने का निर्णय लिया है। ट्रंप के अनुसार यह कदम बातचीत को अवसर देने के लिए उठाया गया है। हालांकि इससे कुछ ही घंटे पहले उन्होंने ईरान पर “बहुत बड़े हमले” करने की चेतावनी दी थी, जिससे स्थिति और अधिक अस्थिर हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले दिए गए एक बयान में ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका आने वाले समय में ईरान के खर्ग आइलैंड और अन्य तेल संसाधनों पर नियंत्रण की रणनीति अपना सकता है। इस तरह के बयानों ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विरोधाभासी संकेत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अनिश्चितता को बढ़ाते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। ओमान के पास एक और जहाज MV Jalveer पर हमले की जानकारी सामने आई है। यह घटना पिछले कुछ दिनों में हुई तीसरी ऐसी बड़ी घटना बताई जा रही है। इससे पहले टैंकर Settebello पर भी हमला हुआ था। लगातार हो रहे इन हमलों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">MV Jalveer को लेकर बताया गया है कि यह गिनी-बिसाऊ ध्वज वाला एक एस्फाल्ट टैंकर है, जो सामान्य व्यापारिक मार्ग पर था जब उस पर हमला हुआ। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। इन घटनाओं की वजह से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान एक दुखद घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि की गई है। यह घटना कथित रूप से एक टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले से जुड़ी बताई जा रही है। भारत सरकार ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत ने अमेरिकी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को तलब कर इस घटना पर स्पष्ट जवाब मांगा है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। समुद्री मार्गों पर नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ हैं। इस पूरे मामले पर विस्तृत जांच की मांग की गई है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की स्थिति पर नजर डालें तो वहां की सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। ईरानी नेतृत्व के अनुसार, बातचीत जारी है लेकिन यह अभी शुरुआती या मध्य स्तर पर है। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते में उसके राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इस बयान ने उन सभी अटकलों को विराम दिया है जिनमें जल्द किसी बड़े समझौते की संभावना जताई जा रही थी। मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील है। एक ओर कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां और समुद्री हमले स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। तेल और गैस आपूर्ति मार्गों पर खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं पहले से ही दबाव में हैं और ऐसे में यह संकट और गहरा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 11:14:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत पहुंचने से पहले ईरानी तेल टैंकर ने बदला रास्ता, 6 लाख बैरल लेकर चीन की ओर मुड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ऑयल टैंकर भारत आते-आते चीन मुड़ गया, जानिए पेमेंट विवाद और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच इस बड़े फैसले की वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/before-reaching-india-iranian-oil-tanker-changed-its-route-and/article-50099"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/crude-oil-tanker-iran.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार से जुड़ी एक अहम घटना सामने आई है, जिसने ऊर्जा कारोबार को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। भारत की ओर बढ़ रहा एक ईरानी कच्चे तेल से भरा टैंकर अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन की तरफ मुड़ गया। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक हालात पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वाडिनार पोर्ट के करीब पहुंचकर बदला रास्ता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मिली जानकारी के अनुसार, यह टैंकर गुजरात के वाडिनार पोर्ट के काफी करीब पहुंच चुका था और उम्मीद जताई जा रही थी कि यह जल्द ही भारत पहुंच जाएगा। हालांकि, अंतिम समय में जहाज ने अपनी दिशा बदल दी और अब इसका नया गंतव्य चीन के शैनडोंग प्रांत का डोंगयिंग बताया जा रहा है। शिप ट्रैकिंग डेटा से इस बदलाव की पुष्टि हुई है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पेमेंट विवाद बना बड़ी वजह</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ट्रेड से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इस अचानक बदलाव के पीछे भुगतान से जुड़ी समस्याएं प्रमुख कारण हो सकती हैं। जानकारी के मुताबिक, तेल विक्रेता अब पहले की तरह उधार में तेल देने को तैयार नहीं हैं और तत्काल भुगतान की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यदि खरीदार और विक्रेता के बीच वित्तीय सहमति नहीं बनती, तो डील अधर में लटक जाती है, जैसा कि इस मामले में संभव नजर आ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">टैंकर में मौजूद था भारी मात्रा में तेल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, इस टैंकर में करीब 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ था। यह खेप भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, खासकर इसलिए क्योंकि भारत पिछले कई वर्षों से ईरान से तेल आयात नहीं कर रहा है। ऐसे में इस संभावित डील को लेकर बाजार में पहले से ही उत्सुकता बनी हुई थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिकी प्रतिबंधों का असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी प्रतिबंध भी एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका ने हाल ही में ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी थी, ताकि पहले से भरे टैंकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकें और वैश्विक आपूर्ति संतुलित बनी रहे। लेकिन इसके बावजूद, प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम अब भी व्यापारिक निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">डार्क फ्लीट और बदलती रणनीति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">तेल व्यापार में शामिल कुछ टैंकर अक्सर अपनी लोकेशन बदलकर असली गंतव्य छिपाने की कोशिश करते हैं, जिन्हें डार्क फ्लीट कहा जाता है। हालांकि, इस मामले में जहाज की शुरुआती दिशा साफ तौर पर भारत की ओर थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि अंतिम समय में परिस्थितियां बदली हैं। अगर शुरुआत से ही गंतव्य चीन होता, तो जहाज का मार्ग अलग होता।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">क्या भारत आ सकता है यह तेल?</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान से जुड़ी समस्याएं सुलझ जाती हैं, तो यह तेल अभी भी भारत की ओर मोड़ा जा सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत में कौन-सी रिफाइनरी इस तेल को खरीदने वाली थी, लेकिन बाजार की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:28:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युद्ध के बीच भारत पेट्रोल-डीजल संकट से निपट रहा, अफवाहों से बचें, मन की बात में पीएम मोदी बोले, जानें और क्या कहा </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 132वें एपिसोड में दुनिया में जारी युद्ध और उसके भारत पर प्रभाव पर चर्चा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-is-dealing-with-petrol-diesel-crisis-amidst-war-avoid-rumors/article-49436"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/pm-modi-speech-mann-ki-baat.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 132वें एपिसोड में विश्व स्तर पर जारी संघर्ष और उसकी भारत पर पड़ने वाली संभावित प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते विश्व में पेट्रोल और डीजल की किल्लत उत्पन्न हो रही है। इसके बावजूद भारत इस चुनौती का सामना कर रहा है। पीएम ने देशवासियों से अपील की कि वे किसी भी अफवाह में न आएं और सरकार की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। उन्होंने बताया कि कुछ लोग जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, जो देश के हित में नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जंग के कारण ऊर्जा संकट</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस क्षेत्र में युद्ध जारी है, वह हमारे ऊर्जा संसाधनों का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस वजह से वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति में कमी देखी जा रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के मजबूत वैश्विक संबंध, पिछले दशक में बने संसाधन और सामर्थ्य देश को इस चुनौती से पार पाने में मदद करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने पहले भी अनेक संकटों का सामना कर 140 करोड़ देशवासियों की मेहनत और एकजुटता से सफलता हासिल की है, और इस बार भी यही संभव है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अफवाहों पर न आएं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रधानमंत्री ने नागरिकों से साफ तौर पर कहा कि अफवाहों के बहकावे में न आएं। सरकार लगातार सही जानकारी प्रदान कर रही है, और इसी जानकारी पर भरोसा कर सभी नागरिक अपने कदम उठाएं। उन्होंने देशवासियों पर भरोसा जताते हुए कहा कि सभी मिलकर इस मुश्किल स्थिति से सफलतापूर्वक बाहर निकलेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक हलचल का मार्च महीना</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पीएम मोदी ने मार्च महीने में विश्व स्तर पर हुई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के लंबे संकट के बाद उम्मीद थी कि दुनिया नई प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगी, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष के चलते वैश्विक स्थिरता बाधित हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">खाड़ी देशों में भारतीयों की सहायता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों की स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वहां रहने वाले लाखों भारतीयों और उनके परिवारों को खाड़ी देशों की सरकारों और स्थानीय संस्थाओं की तरफ से पर्याप्त मदद मिल रही है। पीएम ने इन देशों की सराहना की और कहा कि यह सहयोग भारत और वहां के भारतीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जम्मू-कश्मीर की रणजी टीम और युवा खिलाड़ियों की सफलता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के हुबली में हुए रणजी ट्रॉफी फाइनल का जिक्र किया। जम्मू-कश्मीर की टीम ने सात दशकों के इंतजार के बाद पहला रणजी खिताब अपने नाम किया। उन्होंने खासकर आकिब नबी के प्रदर्शन की तारीफ की, जिन्होंने पूरे सीजन में 60 विकेट लिए। देशभर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह महीना उत्साह और खुशी से भरा रहा। पीएम ने टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की ऐतिहासिक जीत को भी याद किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">गर्मियों, जल संरक्षण और मछुआरों का योगदान</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रधानमंत्री ने गर्मियों के मौसम में जल संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने 'जल संचय अभियान' का जिक्र किया, जिसके तहत देशभर में लगभग 50 लाख आर्टिफिशियल वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए गए हैं। पीएम ने मछुआरों के योगदान को भी सराहा, जिन्होंने समुद्र की लहरों से जूझते हुए आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत की है। उन्होंने कहा कि समाज के छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। इसी संदर्भ में वाराणसी में एक घंटे में 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधों का रोपण कर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का उदाहरण साझा किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 13:23:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी के बयान पर भड़के मोहन यादव, कहा- कांग्रेस कर रही साजिश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी के पीएम मोदी पर दिए बयान की कड़ी आलोचना की। वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच उन्होंने कांग्रेस पर गैर-जिम्मेदाराना राजनीति करने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/69b54accab708/article-48186"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया गंभीर वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे समय में देश को एकजुट रहने की आवश्यकता है। सीएम यादव के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से निपटने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि विपक्ष की ओर से की जा रही बयानबाजी देशहित में नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वैश्विक संकट के बीच भारत की स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि ईरान और अमेरिका से जुड़े तनावपूर्ण हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा और व्यापार को लेकर अस्थिरता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस तरह की परिस्थितियों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे समय में केंद्र सरकार की प्राथमिकता देश की ऊर्जा जरूरतों और आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीएम ने कहा कि चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद सरकार ने रसोई गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रबंधन किया है। उनके अनुसार संकट की स्थिति में दूर-दराज क्षेत्रों से आपूर्ति सुनिश्चित करना और व्यवस्था को संतुलित रखना आसान काम नहीं होता</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन सरकार ने यह जिम्मेदारी गंभीरता से निभाई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राहुल गांधी की टिप्पणी पर नाराजगी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी के उस बयान की आलोचना की जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण करने का आरोप लगाया था। सीएम यादव ने कहा कि इस प्रकार की भाषा और आरोप राजनीतिक शालीनता के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने इसे निम्न स्तर की बयानबाजी बताते हुए कहा कि ऐसे वक्त में देश के नेताओं को संयमित और जिम्मेदार रवैया अपनाना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को मिलकर देशहित में काम करना चाहिए। यदि विपक्ष इस जिम्मेदारी को नहीं समझता तो जनता उसके व्यवहार का आकलन अवश्य करेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांग्रेस पर साजिश का आरोप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीएम यादव ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के कुछ नेता जानबूझकर भ्रम और अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता सब समझती है और यही कारण है कि कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से दूर है। उनके अनुसार देशहित से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने से जनता में गलत संदेश जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी कहा कि संकट के समय सरकार और प्रशासन मिलकर हालात संभालने का प्रयास करते हैं और ऐसे समय में विपक्ष को सहयोग करना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर लगाए थे आरोप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दरअसल</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है और अब वह भारत के बजाय अमेरिका के हितों के अनुसार काम कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया गया है और अमेरिका यह तय कर रहा है कि भारत को किस देश से तेल खरीदना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऊर्जा क्षेत्र में आने वाले समय में स्थिति और कठिन हो सकती है।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वह संसद में इस मुद्दे को उठाना चाहते थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह देश के हित में नहीं था।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">--------------------------------</span></p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 18:17:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज में अमेरिका-ईरान टकराव तेज, दुबई धमाके से मची दहशत</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, दुबई में धमाके से दहशत और वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ता संकट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-confrontation-in-hormuz-intensifies-dubai-blast-creates-panic/article-47947"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/iran-us-war.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब और तीव्र होता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में जारी सैन्य कार्रवाई को </span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">12</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> दिन से अधिक हो चुके हैं और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। समुद्री मार्गों</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाए जाने से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है। इस संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रह गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी कार्रवाई</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी नौसेना के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी बलों ने उन नौकाओं को निशाना बनाया जिन्हें समुद्र में माइन्स बिछाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ऐसी दस से अधिक नावों को नष्ट कर दिया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी मार्गों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए ईरान को चेतावनी दी कि समुद्री मार्गों में बिछाई गई माइन्स तुरंत हटाई जाएं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अन्यथा इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी एक वीडियो जारी किया है जिसमें कथित तौर पर ईरानी नौकाओं और पनडुब्बियों पर हमले के दृश्य दिखाए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान का दावा और बढ़ता समुद्री संकट</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र में बड़ी संख्या में समुद्री माइन्स बिछाई हैं। ईरानी सैन्य अधिकारियों के अनुसार इनमें सेंसर आधारित उन्नत माइन्स भी शामिल हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो किसी भी जहाज की गतिविधि को पहचानकर सक्रिय हो सकती हैं। ईरान का कहना है कि दुश्मन देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने नहीं दिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। यहां बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कई ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मार्ग बाधित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुबई में जोरदार धमाके से दहशत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में एक बड़े धमाके की खबर सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार विस्फोट इतना तेज था कि दूर तक उसकी आवाज सुनाई दी और लोगों में डर का माहौल बन गया। अभी तक विस्फोट के कारणों को लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव के कारण इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रिपोर्टों के अनुसार ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिशों के बीच यह घटना हुई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इजरायल और ईरान के बीच भी तेज हुई सैन्य कार्रवाई</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस संघर्ष के समानांतर इजरायल और ईरान के बीच भी सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं। ईरान की ओर से इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों के हमले का दावा किया गया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा है कि एक ड्रोन हमले में तेल अवीव के दक्षिण में स्थित एक संचार और खुफिया केंद्र को नुकसान पहुंचाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्ला से जुड़े एक वित्तीय संगठन के ठिकाने पर हवाई हमला किया। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई में संगठन के एक प्रमुख कमांडर को मार गिराया गया है। इसके जवाब में हिजबुल्ला ने उत्तरी इजरायल के कुछ सैन्य ठिकानों की ओर रॉकेट दागे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रिपोर्टों के अनुसार इजरायल और अमेरिकी बल ईरान के कुछ रणनीतिक ठिकानों को भी निशाना बना रहे हैं। इनमें तेल भंडारण केंद्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस मुख्यालय और इस्फहान के एक एयरबेस का उल्लेख किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस एयरबेस पर मौजूद पुराने एफ-</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">14</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> टॉमकैट लड़ाकू विमानों को भी नुकसान पहुंचा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सैटेलाइट तस्वीरों में इस्फहान के परमाणु प्रतिष्ठान के आसपास नई सुरंगें बनाए जाने के संकेत भी मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये निर्माण कार्य हालिया हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत की भूमिका पर अमेरिका का बयान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ताओं और रिफाइनिंग केंद्रों में से एक है। अमेरिका का मानना है कि ऊर्जा बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और अमेरिका को मिलकर काम करना होगा। उनके अनुसार रूस से तेल की निरंतर खरीद भी वैश्विक बाजार में संतुलन बनाए रखने की एक वजह मानी जा रही है।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">-------------------------------------</span></p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 17:47:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान जंग का असर एशिया पर: थाईलैंड में लिफ्ट बंद, पाकिस्तान में मंत्रियों की विदेश यात्राओं पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[तेल और गैस सप्लाई बाधित होने से कई एशियाई देशों में ऊर्जा संकट गहराया, सरकारों ने ईंधन बचाने के लिए सख्त कदम उठाए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/impact-of-iran-war-on-asia-lift-closed-in-thailand/article-47902"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mp---2026-03-11t105822.823.jpg" alt=""></a><br /><p>ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष का असर अब एशिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण कम से कम नौ एशियाई देशों में ऊर्जा संकट की स्थिति बन गई है। हालात से निपटने के लिए कई सरकारों ने ईंधन बचाने और खर्च कम करने के उद्देश्य से सख्त कदम लागू किए हैं।</p>
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<h5><strong>थाईलैंड में ऊर्जा बचत के लिए सख्त नियम</strong></h5>
<p>थाईलैंड सरकार ने सरकारी दफ्तरों में बिजली बचाने के लिए लिफ्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है और कर्मचारियों को सीढ़ियों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कर्मचारियों को सूट-टाई जैसे औपचारिक कपड़े पहनने से भी मना किया गया है, ताकि एयर कंडीशनर का उपयोग कम किया जा सके।</p>
<p>सरकार ने एयर कंडीशनर का तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने का निर्देश दिया है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों को जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी गई है। अधिकारियों के अनुसार देश के पास फिलहाल लगभग 95 दिनों का ऊर्जा भंडार उपलब्ध है।</p>
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<h5><strong>पाकिस्तान में खर्च कम करने की योजना</strong></h5>
<p>पाकिस्तान सरकार ने भी बढ़ती तेल कीमतों के बीच सरकारी खर्च में कटौती की घोषणा की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंत्रियों और सलाहकारों की विदेश यात्राओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। इसके अलावा मंत्रियों ने दो महीने तक वेतन नहीं लेने का फैसला किया है और सांसदों की सैलरी में 25 प्रतिशत कटौती की जाएगी।</p>
<p>सरकार ने सरकारी वाहनों के ईंधन उपयोग में 50 प्रतिशत कमी करने और कई दफ्तरों को सीमित दिनों तक खोलने का फैसला किया है। स्कूलों को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया है ताकि ऊर्जा खपत कम हो सके।</p>
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<h5><strong>बांग्लादेश और वियतनाम में भी ऊर्जा बचत उपाय</strong></h5>
<p>बांग्लादेश ने बिजली और ईंधन की खपत कम करने के लिए देश की सभी यूनिवर्सिटीज बंद करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही ईंधन की जमाखोरी रोकने के लिए पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर सीमाएं तय की गई हैं।</p>
<p>वहीं वियतनाम सरकार ने कंपनियों से कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की अपील की है, जिससे ईंधन की खपत कम हो सके और ऊर्जा बचत में मदद मिले।</p>
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<h5><strong>कई देशों ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए कदम बढ़ाए</strong></h5>
<p>चीन ने संभावित संकट को देखते हुए कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर अपने रणनीतिक भंडार मजबूत करने शुरू कर दिए हैं। साउथ कोरिया घरेलू ईंधन कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्राइस कैप लगाने की तैयारी कर रहा है, जबकि जापान ने जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय तेल भंडार से कच्चा तेल जारी करने की योजना बनाई है।विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली वैश्विक तेल सप्लाई बाधित होने के कारण यह संकट और गहरा सकता है।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 11:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान-इजराइल युद्ध का 12वां दिन: 140 अमेरिकी सैनिक घायल, 7 की मौत; ईरान में 8000 घर तबाह</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष तेज, मिसाइल हमलों और बमबारी से हजारों नागरिक प्रभावित; वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने के संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/12th-day-of-iran-israel-war-140-american-soldiers-injured-7/article-47897"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mp---2026-03-11t102200.515.jpg" alt=""></a><br /><p>मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया। संघर्ष में अब तक 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जबकि 7 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। दूसरी ओर ईरान का दावा है कि देश में हुए हमलों से लगभग 8000 घरों को नुकसान पहुंचा है और 1300 से अधिक लोगों की जान गई है। लगातार हो रहे मिसाइल हमलों और सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।</p>
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<h5><strong>ईरान का दावा—सिविलियन इलाकों को बनाया निशाना</strong></h5>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि हालिया हमलों में करीब 9600 नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में आवासीय इलाके, बाजार, अस्पताल, दवा केंद्र और स्कूल भी प्रभावित हुए हैं। ईरान का आरोप है कि हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं।</p>
<p>ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई में इजराइल के कई प्रमुख शहरों पर मिसाइल हमले किए। ईरानी सैन्य बलों के मुताबिक हाइफा, यरुशलम और तेल अवीव जैसे शहरों को निशाना बनाया गया।</p>
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<h5><strong>इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई</strong></h5>
<p>इजराइली रक्षा बलों ने मंगलवार रात ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में तेहरान और तबरीज के सैन्य कमांड सेंटर, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च से जुड़े ठिकाने और सुरक्षा इकाइयों को निशाना बनाया गया।</p>
<p>इसके अलावा लेबनान की राजधानी बेरुत में ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी बमबारी की गई। अमेरिकी सैन्य बलों ने फारस की खाड़ी में एक ईरानी जहाज पर हमला करने की भी पुष्टि की है।</p>
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<h5><strong>वैश्विक असर: ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव</strong></h5>
<p>जंग का असर अब दुनिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है। तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने से एशिया के कई देशों में ऊर्जा संकट की स्थिति बन रही है।</p>
<p>थाईलैंड सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों में लिफ्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है और कर्मचारियों को सीढ़ियों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पाकिस्तान में सरकारी खर्च घटाने के लिए मंत्रियों की विदेश यात्राओं और कई खर्चों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।</p>
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<h5><strong>युद्ध पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता</strong></h5>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत कर संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील की है। कई देशों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।</p>
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                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/12th-day-of-iran-israel-war-140-american-soldiers-injured-7/article-47897</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 10:41:22 +0530</pubDate>
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