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                <title>Simhastha 2028 - दैनिक जागरण</title>
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                <title>'क्षिप्रा' नहीं, 'शिप्रा' कहिए: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया नदी का वास्तविक नाम</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में सिंहस्थ और नर्मदा परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी अभिलेखों और प्रस्तुतियों में नदी का मूल एवं प्रामाणिक नाम 'शिप्रा' ही लिखा जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/call-it-shipra-not-kshipra-chief-minister-mohan-yadav-told/article-57742"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cm-mohan-yadav-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में गुरुवार को आयोजित सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और नर्मदा नदी परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिप्रा नदी के नाम को लेकर अधिकारियों का ध्यान एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर आकर्षित किया। बैठक में प्रस्तुत किए गए प्रेजेंटेशन में नदी का नाम "क्षिप्रा" लिखा गया था। इसे देखते ही मुख्यमंत्री ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि नदी का वास्तविक, ऐतिहासिक और प्रामाणिक नाम "शिप्रा" है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में सभी सरकारी दस्तावेजों, प्रस्तुतियों और आधिकारिक अभिलेखों में "शिप्रा" नाम का ही उपयोग सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखने वाली नदियों के नामों को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर भी ऐतिहासिक तथ्यों और प्रामाणिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म, इंटरनेट स्रोतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणालियों में नदी का नाम "क्षिप्रा" भी दर्ज है। अधिकारियों का कहना था कि इसी आधार पर प्रस्तुतीकरण में यह नाम शामिल किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक उपयोगी है, लेकिन केवल एआई या इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि ऐतिहासिक और धार्मिक विषयों में मूल ग्रंथों और प्रामाणिक साहित्य का अध्ययन भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषय पर निर्णय लेते समय तकनीकी स्रोतों के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और प्रमाणित साहित्य का भी सहारा लिया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध संस्कृत काव्य <strong>'मेघदूतम्'</strong> तथा वैदिक ग्रंथों का अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन प्राचीन ग्रंथों में नदी का उल्लेख "शिप्रा" नाम से मिलता है, जो इसके मूल स्वरूप को प्रमाणित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है और उसकी प्रमाणिकता प्राचीन साहित्य में सुरक्षित है। इसलिए प्रशासनिक निर्णय लेते समय उन स्रोतों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सुझाव के बाद उपलब्ध स्रोतों की दोबारा समीक्षा की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित माध्यमों से दोबारा जानकारी की पुष्टि की। पुनः जांच के दौरान एआई ने भी यह स्वीकार किया कि नदी का मूल नाम "शिप्रा" ही माना जाता है और पहले प्रस्तुत जानकारी पूरी तरह सटीक नहीं थी। इस घटनाक्रम के बाद अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण में आवश्यक संशोधन करने की सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियों से बचने के लिए तथ्यों का बहुस्तरीय सत्यापन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि तकनीकी साधन सहायक हो सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय प्रमाणिक स्रोतों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने "शिप्रा" और "क्षिप्र" शब्दों के अर्थ भी समझाए। उन्होंने कहा कि संस्कृत में "क्षिप्र" का अर्थ होता है तेज गति से चलने वाला, जबकि "शिप्रा" का अर्थ शांत, सौम्य और संतुलित प्रवाह वाली नदी माना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिप्रा नदी अपने शांत स्वभाव और धार्मिक महत्व के कारण जानी जाती है। सामान्य परिस्थितियों में इसका प्रवाह संतुलित रहता है और यही इसकी विशेष पहचान भी है। उन्होंने कहा कि किसी नदी के नाम का संबंध केवल भाषा से नहीं बल्कि उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्वरूप से भी होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिप्रा नदी के नाम को लेकर यह पहली बार चर्चा नहीं हुई है। वर्ष 2016 के सिंहस्थ महापर्व से पहले भी "शिप्रा" और "क्षिप्रा" नामों को लेकर बहस सामने आई थी। उस समय भी विभिन्न प्रशासनिक दस्तावेजों और सार्वजनिक उपयोग में दोनों नाम देखने को मिले थे। धार्मिक विद्वानों और इतिहासकारों के बीच भी इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आए थे। हालांकि अनेक प्राचीन ग्रंथों और साहित्यिक संदर्भों में "शिप्रा" नाम का उल्लेख प्रमुख रूप से मिलता है। मुख्यमंत्री के ताजा निर्देश के बाद एक बार फिर यह विषय चर्चा में आ गया है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकारी स्तर पर एकरूपता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और नर्मदा परियोजना की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना के अनुसार सभी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आयोजन के लिए आधारभूत संरचना, यातायात, पेयजल, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी-अपनी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:53:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में जुटा उज्जैन, CM डॉ. यादव ने किया निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रामघाट मार्ग चौड़ीकरण और बाढ़ बचाव प्रशिक्षण का निरीक्षण किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/ujjain-busy-in-preparations-for-simhastha-2028-cm-dr-yadav/article-53470"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ujjain-news-simhastha-2028-mohan-yadav-ramghat-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हरसिद्धि पाल से रामघाट तक चल रहे मार्ग चौड़ीकरण के काम का निरीक्षण किया और मौके पर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। सुबह से ही रामघाट और इसके आस-पास प्रशासनिक गतिविधियां देखने को मिलीं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सिंहस्थ से जुड़े सभी प्रोजेक्ट तय समय में पूरे किए जाएं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निरीक्षण के दौरान डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उज्जैन के लंबे समय के विकास से भी जुड़ा है। उनके अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घाटों और सड़कों के चौड़ीकरण से शहर को आने वाले वर्षों में लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उज्जैन के लोग जिन तरह से इन विकास कार्यों में सहयोग कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह एक नई मिसाल है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दौरान कई क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के कारण कुछ अस्थायी दिक्कतें आई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थानीय लोग इसे बड़े आयोजन की तैयारी मानकर समर्थन दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि जनप्रतिनिधियों और विभिन्न धर्मों के लोग भी इन कार्यों में सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। रामघाट क्षेत्र में निरीक्षण के समय प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को कार्यों की प्रगति के बारे में भी जानकारी दी। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क और घाटों का विस्तार जरूरी है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रामघाट निरीक्षण के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री ने होमगार्ड विभाग द्वारा आयोजित बाढ़ बचाव प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी अवलोकन किया। यहां जवानों को डीप डाइविंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंडर वॉटर रेस्क्यू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्फेस वॉटर रेस्क्यू और लाइफ जैकेट के इस्तेमाल के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रशिक्षण स्थल पर कुछ जवान नाव संचालन का अभ्यास करते दिखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ पानी में बचाव का अभ्यास कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करीब 250 होमगार्ड जवानों को 15 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि आपातकालीन स्थिति में राहत कार्य तेजी से किया जा सके। मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण ले रहे जवानों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित बल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस मौके पर उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संजय अग्रवाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संभागायुक्त आशीष सिंह और एडीजीपी राकेश गुप्ता समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:12:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सनातन परंपरा राष्ट्र की आत्मा है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[हरिद्वार में संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोले—हिंदुत्व हमारी सांस्कृतिक चेतना का आधार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/sanatan-tradition-is-the-soul-of-the-nation-chief-minister/article-45431"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/mp-(29).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति भारत की आत्मा है और आदि शंकराचार्य जैसे महान आचार्यों ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि वैचारिक स्तर पर भारत को अपनी सनातन परंपरा पर गर्व है और यही सांस्कृतिक चेतना राष्ट्र को एक सूत्र में बांधती है।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को हरिद्वार में <strong>समन्वय सेवा ट्रस्ट</strong> द्वारा आयोजित <strong>गुरुदेव समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना समारोह</strong> के अंतर्गत आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की भूमि आदि शंकराचार्य से गहराई से जुड़ी रही है और उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को दिशा दे रही हैं।</p>
<hr />
<h5><strong>भारत माता मंदिर को बताया ऊर्जा का केंद्र</strong></h5>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर समाज में राष्ट्रीय चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहा है। संत समाज और सरकार मिलकर सनातन संस्कृति की शाश्वत धारा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p>इस अवसर पर <strong>जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज</strong> ने मुख्यमंत्री को सिंहस्थ-2028 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>
<hr />
<h5><strong> सिंहस्थ-2028 के लिए संतों को आमंत्रण</strong></h5>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि शंकराचार्य परंपरा के संवाहक और भारत माता मंदिर के संस्थापक <strong>पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज</strong> को नमन करते हुए कहा कि उज्जैन सिंहस्थ-2028 को भव्य और दिव्य रूप देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने सभी संत-महात्माओं को सिंहस्थ में पधारने का आमंत्रण दिया।</p>
<hr />
<h5><strong>राष्ट्रीय विकास पर वक्ताओं के विचार</strong></h5>
<ul>
<li>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा</strong> ने कहा कि संतों के आशीर्वाद से देश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। भारत आर्थिक और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।</p>
</li>
<li>
<p><strong>बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान</strong> ने कहा कि सत्संग और संतों का मार्गदर्शन मानव जीवन को नई दृष्टि देता है। भारत की पहचान उसकी सनातन संस्कृति से है।</p>
</li>
<li>
<p><strong>उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी</strong> ने संतों को सनातन चेतना का जीवंत स्वरूप बताते हुए कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी का योगदान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।</p>
</li>
</ul>
<p>कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के सामूहिक गान के साथ हुआ।</p>
<hr />
<h5>योगगुरु रामदेव के साथ किया योगाभ्यास</h5>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरिद्वार स्थित <strong>पतंजलि योगपीठ</strong> में योगगुरु <strong>स्वामी रामदेव</strong> के साथ योगाभ्यास किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग आज वैश्विक जन-आंदोलन बन चुका है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने योगपीठ के वातावरण को मानसिक शांति और आत्मबल देने वाला बताया। उन्होंने भारत माता मंदिर में दर्शन, पूजन और यज्ञ में भाग लेकर सभी के कल्याण की कामना की।</p>
<p>-------</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 18:29:09 +0530</pubDate>
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