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                <title>US Iran Conflict - दैनिक जागरण</title>
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                <description>US Iran Conflict RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान का कुवैत–बहरीन में 8 अमेरिकी ठिकानों पर हमला, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[खामेनेई का अमेरिका-इजराइल पर तीखा बयान, हर हमले का जवाब देने की चेतावनी, पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/irans-attack-on-8-american-bases-in-kuwait-bahrain-increases-tension/article-57260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-attack-kuwait-bahrain-us-bases.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े तनाव की चपेट में आता दिख रहा है। रविवार को ईरान की ओर से दावा किया गया कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की तरफ से ईरान के ठिकानों पर की गई “दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई” के जवाब में की गई है। हालांकि अभी तक अमेरिका या कुवैत और बहरीन की सरकारों की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जरूर बढ़ा दिया गया है। इन हमलों के बाद कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सैन्य गतिविधियों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने भी हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद कुछ इलाकों में हलचल और दहशत जैसा माहौल देखने को मिला, हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि मामला तेजी से बढ़ते टकराव की ओर इशारा कर रहा है।</p>
<p>ईरान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह हमला एक जवाबी कार्रवाई थी और इसका मकसद अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का प्रतिकार करना था। ईरानी सेना ने दावा किया कि यह ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसमें रणनीतिक ठिकानों को टारगेट किया गया। ईरान का यह भी कहना है कि अगर आगे भी उसकी सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला हुआ तो वह और सख्त जवाब देगा। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है और कूटनीतिक स्तर पर चिंता जताई जा रही है। इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने हालिया हमलों को लेकर जिस तरह सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं और उन पर गर्व जताया है, वह अपने आप में अपराध स्वीकार करने जैसा है। खामेनेई ने कहा कि ईरान पर हुए हर हमले, हर मौत और हर नुकसान का हिसाब लिया जाएगा और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनका यह बयान काफी आक्रामक माना जा रहा है और इसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। खामेनेई पहले भी अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन इस बार उनका बयान ज्यादा तीखा और सीधा माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि वह पहले हुए एक कथित अमेरिका-इजराइल हमले में घायल हुए थे, जिसके बाद से वे किसी सुरक्षित और गुप्त स्थान पर रह रहे हैं। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईरान के अंदर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक स्थिति पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्र में मौजूद सभी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। कुवैत और बहरीन में भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पश्चिम एशिया में पहले से ही कई तरह के तनाव मौजूद हैं और ऐसे में यह नया घटनाक्रम स्थिति को और जटिल बना सकता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच इस तरह के हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला बढ़ता रहा तो यह एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। पहले से ही इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष और ईरान-अमेरिका तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रखा है। ऐसे में यह नया टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी असर डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:33:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से शेयर बाजार में गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में लुढ़के, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी महंगाई ने बढ़ाई चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/stock-market-falls-due-to-us-iran-tension-and-crude-oil/article-55589"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market-india-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार गुरुवार, 11 जून 2026 को शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आया, जब वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। सुबह के सत्र में बीएसई सेंसेक्स 358.54 अंक गिरकर 73,624.64 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 117 अंक टूटकर 23,098.30 पर कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल आर्थिक संकेतों की कमजोरी के कारण देखने को मिली।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। बुधवार को ही FIIs ने करीब 2,124 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेच दी थी, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। अमेरिका की तरफ से ईरान से जुड़े ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे कच्चे तेल के बाजार में तेजी देखी गई है और ब्रेंट क्रूड 1.70 प्रतिशत बढ़कर 94.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।</p>
<p>शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HCL Tech, Infosys, Tech Mahindra, TCS, Eternal और Trent जैसे प्रमुख शेयर गिरावट में रहे। वहीं दूसरी ओर कुछ बैंकिंग और एविएशन स्टॉक्स में हल्की खरीदारी देखने को मिली, जिनमें ICICI Bank, Bharti Airtel और InterGlobe Aviation शामिल रहे। वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का कमजोर रुख देखा गया। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सभी में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार पहले ही बुधवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जहां डॉव जोंस 950 अंकों से ज्यादा गिर गया था।</p>
<p>भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का मिश्रित असर निवेशकों के मूड को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी महंगाई दर में बढ़ोतरी ने यह संकेत दिया है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक निवेश प्रवाह प्रभावित हो रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इससे न केवल महंगाई बढ़ने का खतरा है, बल्कि रुपये पर दबाव, कंपनियों के मुनाफे में गिरावट और राजकोषीय घाटे पर भी असर पड़ सकता है।</p>
<p>बुधवार को बाजार ने अंत में कुछ रिकवरी दिखाई थी और सेंसेक्स 64 अंक की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार की शुरुआत ने फिर से निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। निफ्टी भी हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे बाजार की अनिश्चितता साफ दिखाई देती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। खासकर तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:51:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान में तनाव चरम पर, रडार साइट्स पर हमला और मिसाइल जवाबी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य टकराव बढ़ा, खाड़ी देशों में अलर्ट, वैश्विक चिंता गहरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-tension-at-its-peak-attack-on-radar-sites-and/article-55141"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-conflict-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान की कई रडार साइट्स को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की बात कही है अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक और केश्म आइलैंड पर स्थित रडार साइट्स पर सटीक हमले किए। इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में ईरान के चार ड्रोन हमलों को हवा में ही मार गिराया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह कार्रवाई संभावित बड़े हमलों को रोकने के लिए की गई।</p>
<p>इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी और उसके सहयोगी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमला किया है। इसके कुछ घंटों बाद CENTCOM ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में कुल सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से छह को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर ला दिया है। कुवैत और बहरीन में सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और एयरस्पेस मॉनिटरिंग सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है। क्षेत्रीय स्तर पर किसी बड़े युद्ध की आशंका को लेकर चिंता गहराती जा रही है।</p>
<p>इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बयान दिया है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता काफी कमजोर हो गई है। ट्रम्प के अनुसार, ईरान के पास अब उसकी कुल मिसाइल ताकत का केवल 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही बचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट इस दावे से अलग तस्वीर पेश करती है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने अपनी 33 में से 30 मिसाइल साइट्स को फिर से सक्रिय कर लिया है और उसके पास अभी भी लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार मौजूद है। इस रिपोर्ट ने ट्रम्प के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सैन्य विश्लेषकों के बीच बहस को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी सामने आई हैं। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समझौता होता है, तो वे ईरान के सुप्रीम लीडर से मिलने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यूरेनियम एनरिचमेंट से जुड़े मुद्दों पर पहले गंभीर बातचीत जरूरी है। दूसरी ओर ईरान में मानवीय कदम उठाते हुए 2000 से अधिक कैदियों की सजा माफ या कम कर दी गई है। इसमें वे कैदी शामिल नहीं हैं जिन पर जासूसी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप हैं। यह फैसला ईरान के सुप्रीम नेतृत्व की मंजूरी के बाद लिया गया है।</p>
<p>लेबनान में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दक्षिणी इलाकों में इजराइली हवाई हमलों की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें कम से कम चार लोगों की मौत और कई अन्य घायल हुए हैं। सीजफायर बातचीत के बावजूद क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रहने से हालात और बिगड़ रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा असर देखा गया है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात मई महीने में 84 प्रतिशत तक गिर गया है। अब ईरान बड़े टैंकरों की जगह छोटे जहाजों के माध्यम से तेल निर्यात कर रहा है ताकि प्रतिबंधों से बचा जा सके।</p>
<p>इसी बीच यूरोप में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। आयरलैंड ने इजराइल के दो वरिष्ठ मंत्रियों—इतामार बेन-ग्वीर और बेजालेल स्मोट्रिच—के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयरिश सरकार ने कहा कि इन नेताओं के बयान और नीतियां फिलिस्तीनियों के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा देती हैं।  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:13:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान फिर जंग की तैयारी में जुटा, होर्मुज स्ट्रेट को बताया बड़ा हथियार</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में दावा- अमेरिका पर भरोसा नहीं, सैन्य तैयारी और रणनीतिक दबाव बढ़ाने में लगा तेहरान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-again-preparing-for-war-calls-strait-of-hormuz-a/article-54284"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-war-preparation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान संभावित नए युद्ध की तैयारी में जुट गया है और उसने साफ संकेत दिए हैं कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मान रहा है और जरूरत पड़ने पर इसे अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ दबाव के बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी नेतृत्व इस समय तीन स्तरों पर रणनीति तैयार कर रहा है— सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों को साधना। हालांकि ईरान ने बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं, लेकिन सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की गतिविधियों ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में तेहरान अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने के साथ समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की क्षमता भी बढ़ा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों तक इसी मार्ग के जरिए पहुंचता है। यही वजह है कि ईरान इसे अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह का सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और पश्चिमी देश इस समुद्री मार्ग को लेकर लगातार सतर्क रहते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ईरान की सैन्य तैयारी तेज</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ईरानी सेना और IRGC ने हाल के दिनों में समुद्री और मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर बढ़ाया है। ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका की ओर से कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो जवाब पहले से ज्यादा आक्रामक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ दिन पहले IRGC ने बयान जारी कर कहा था कि किसी भी नए अमेरिकी हमले का जवाब ऐसा होगा जिसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने मिसाइल नेटवर्क, ड्रोन क्षमताओं और नौसैनिक रणनीति को भी मजबूत कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और उससे जुड़े हित निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि तेहरान लगातार यह भी कह रहा है कि वह सीधे युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी दबाव का जवाब देने के लिए तैयार है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ड्रोन और हवाई गतिविधियों पर तनाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पिछले 24 घंटों में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं जिन्होंने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने दावा किया कि उसकी सुरक्षा बलों ने अमेरिकी MQ-9B और RQ-4 ड्रोन को निशाना बनाया। इसके अलावा ईरानी हवाई क्षेत्र में कथित रूप से घुसे F-35 लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग किए जाने का दावा किया गया। हालांकि अमेरिका की ओर से इन दावों की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों की सैन्य गतिविधियां पहले के मुकाबले काफी बढ़ी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने भी हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य निगरानी मजबूत की है। अमेरिकी सेंटकॉम के मुताबिक कुछ संदिग्ध नौसैनिक गतिविधियों पर कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका ने बंदर अब्बास के पास कुछ मिसाइल ठिकानों और समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इंटरनेट बहाली और आंतरिक हालात</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच ईरान में 88 दिनों बाद इंटरनेट सेवाओं की आंशिक बहाली भी चर्चा में है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स ने इसे आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे राष्ट्रीय इंटरनेट ब्लैकआउट में से एक बताया है। लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से कारोबार, बैंकिंग, ऑनलाइन सेवाएं और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान एक तरफ बाहरी दबाव से निपटने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर स्थिरता बनाए रखने की भी कोशिश कर रहा है। सरकार आंतरिक विरोध और आर्थिक दबाव को नियंत्रित रखने के लिए लगातार रणनीतिक कदम उठा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इजराइल भी अलर्ट मोड में</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट के हालात को देखते हुए इजराइल ने भी सुरक्षा गतिविधियां तेज कर दी हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में उत्तरी सीमा और लेबनान की स्थिति पर चर्चा हुई। हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइली हमले भी बढ़ाए गए हैं। इजराइल को आशंका है कि क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में ईरान समर्थित संगठन सक्रिय हो सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>वैश्विक बाजार पर असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा बाजार से जुड़े होर्मुज स्ट्रेट में अस्थिरता बढ़ने पर तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत समेत कई देश खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं। ऐसे में यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर ईंधन कीमतों, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-again-preparing-for-war-calls-strait-of-hormuz-a/article-54284</link>
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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 11:51:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ेगा तनाव, ट्रंप के सख्त रुख से ईरान-अमेरिका टकराव गहरा हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में तनाव फिर बढ़ा। ट्रंप ने कहा ईरान ने पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई, शांति प्रस्ताव पर संदेह से अमेरिका-ईरान टकराव गहरा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tension-will-increase-again-in-the-middle-east-iran-america-conflict/article-52662"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/middle-east-crisis-donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है और साफ संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन फिलहाल नरमी के मूड में नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछले कई दशकों में जो किया है, उसकी “पर्याप्त कीमत</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> अभी तक नहीं चुकाई है। यही बयान अब मिडिल ईस्ट में नई बेचैनी की वजह बन गया है। हालात ऐसे वक्त में बिगड़ते दिख रहे हैं जब तेहरान की तरफ से नया शांति प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि अमेरिका उसे आसानी से मानने वाला नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान की ओर से आए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल यह नहीं लगता कि यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पहले से तनाव चरम पर है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थ के जरिए 14 सूत्री प्रस्ताव भेजा है, जिसमें युद्ध खत्म करने, प्रतिबंध हटाने, नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने की मांग की गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव युद्धविराम बढ़ाने से ज्यादा सीधे टकराव खत्म करने पर केंद्रित है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">उधर ईरान की तरफ से भी रुख नरम नहीं दिख रहा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी (IRGS) ने साफ कहा है कि अब अमेरिका के पास फैसले की गुंजाइश काफी सीमित बची है। तेहरान से जुड़े हलकों में यह संदेश दिया जा रहा है कि दबाव की राजनीति अब ज्यादा देर नहीं चल सकती। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने रविवार को कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि युद्ध से पहले जैसी स्थिति अब लौटने वाली नहीं है। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है और यहां तनातनी का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">इसी बीच खाड़ी क्षेत्र से आ रही खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। रविवार को होर्मुज के पास एक कार्गो शिप पर हमले की खबर सामने आई, जिसने समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। क्षेत्र में पहले ही जहाजों की आवाजाही प्रभावित है और अमेरिका ने फंसे जहाजों को निकालने के लिए नई समुद्री योजना का संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज में फंसे जहाजों को “फ्री</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';"> कराने में मदद करेगा। हालांकि इस योजना को ईरान ने सीधे चुनौती की तरह देखा है। ऐसे में समुद्र, तेल और सैन्य दबाव तीनों मोर्चों पर तनाव एक साथ बढ़ता दिख रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">कूटनीतिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह टूटी नहीं है, लेकिन जमीन पर हालात भरोसेमंद नहीं लग रहे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी से बातचीत की है। ओमान पहले भी अमेरिका-ईरान संवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इसके बावजूद जिस तरह दोनों तरफ से बयान आ रहे हैं, उससे यही लग रहा है कि बातचीत फिलहाल सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है। मिडिल ईस्ट में जंग की आशंका अभी टली नहीं है, बल्कि हालात बता रहे हैं कि आने वाले कुछ दिन और ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 17:04:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप बिना समझौते जीत की घोषणा कर सकते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव के बीच व्हाइट हाउस युद्ध से बाहर निकलने की रणनीति पर काम कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-tension-trump-can-declare-victory-without-deal/article-52340"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-iran-tensions.jpg" alt=""></a><br /><p>इन दिनों अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बना हुआ है साथ ही व्हाइट हाउस भी  युद्ध से बाहर निकलने की संभावनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन बिना किसी औपचारिक समझौते के भी जीत की घोषणा कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में यह रणनीति ऐसे समय पर तैयार की जा रही है, जब ईरान के साथ बातचीत ठप पड़ी है और युद्ध लंबा खिंचने का खतरा बना हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को यह आकलन करने का जिम्मा दिया गया है कि अगर अमेरिका एकतरफा जीत का ऐलान करता है तो ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या होगी। इस कदम को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं, क्योंकि बिना समझौते युद्ध खत्म करने की घोषणा कूटनीतिक जोखिम भी पैदा कर सकती है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन इस युद्ध को राजनीतिक और आर्थिक रूप से बोझ मान रहा है। खासकर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और घरेलू राजनीति पर पड़ रहे असर को देखते हुए जल्द समाधान की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया एजेंसियां दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही हैं। पहला विकल्प यह है कि अमेरिका एकतरफा जीत की घोषणा कर अपने सैनिकों को मध्य-पूर्व से वापस बुला ले।दूसरा विकल्प यह है कि बातचीत को लंबा खींचकर रणनीतिक बढ़त हासिल की जाए। हालांकि, दोनों ही विकल्पों में जोखिम मौजूद है, खासकर ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। ईरान ने नए प्रस्ताव तैयार करने के लिए समय मांगा है और कहा है कि अंतिम निर्णय उसके शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका ने आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए प्रतिबंधों और नाकाबंदी को और सख्त करने का संकेत दिया है। यह रणनीति ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए अपनाई जा रही है।</p>
<h5><strong>राजनीतिक और आर्थिक दबाव</strong></h5>
<p>इस पूरे घटनाक्रम का संबंध अमेरिकी घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। साल के अंत में प्रस्तावित मिडटर्म चुनावों को देखते हुए ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है।ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और वैश्विक बाजार में अस्थिरता का असर अमेरिकी मतदाताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में जल्द समाधान की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम राजनीतिक रूप से अहम साबित हो सकता है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव का असर पहले से ही दिखाई दे रहा है। मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ने से तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। बताया जा रहा है कि  अगर अमेरिका बिना समझौते जीत की घोषणा करता है, तो इससे उसकी वैश्विक छवि पर असर पड़ सकता है। साथ ही, ईरान की प्रतिक्रिया के आधार पर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 13:30:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान समझौते के करीब, 21 अप्रैल से पहले युद्धविराम डील की कोशिश तेज</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यस्थ देशों की सक्रिय भूमिका, तेहरान में अहम बैठक; तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/efforts-for-ceasefire-deal-intensified-before-april-21-near-us-iran/article-51273"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/usiran.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">United States</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Iran</span></span> के बीच युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए समझौते की दिशा में तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 अप्रैल को समाप्त हो रहे मौजूदा सीजफायर से पहले दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में तेहरान में गुरुवार को महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकें हो रही हैं, जिन पर वैश्विक नजर बनी हुई है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी है, हालांकि कई मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं। इस प्रक्रिया में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pakistan</span></span>, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Egypt</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Turkey</span></span> जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हाल के दिनों में बैकचैनल कूटनीति और ड्राफ्ट प्रस्तावों का आदान-प्रदान तेज हुआ है।</p>
<p>कूटनीतिक प्रयासों के बीच तेहरान में उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी है, जहां क्षेत्रीय स्थिरता और संभावित समझौते पर चर्चा हो रही है। इससे पहले भी दोनों पक्षों के बीच वार्ता के प्रयास हुए, लेकिन वे निर्णायक परिणाम तक नहीं पहुंच सके थे। अब सीजफायर की समय सीमा नजदीक आने के कारण बातचीत में तेजी देखी जा रही है।</p>
<p>तनाव के पीछे एक प्रमुख कारण ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा है। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Strait of Hormuz</span></span> में समुद्री गतिविधियों पर असर और तेल निर्यात में बाधा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ी है। ईरान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात पर निर्भर है, ऐसे में किसी भी तरह की नाकेबंदी का सीधा असर उसकी आय पर पड़ सकता है।</p>
<p>इसी बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बातचीत में प्रगति के संकेत मिले हैं। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि हालिया घटनाक्रमों के बाद दोनों पक्ष समझौते की दिशा में आगे बढ़े हैं, हालांकि अंतिम सहमति के लिए अभी और दौर की बातचीत आवश्यक मानी जा रही है।</p>
<p>वहीं, वैश्विक बाजारों में इस संभावित समझौते का असर भी दिखने लगा है। एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखी गई है, जिससे निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बना है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समझौता हो जाता है तो न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा, बल्कि तेल-गैस सप्लाई भी स्थिर हो सकती है।</p>
<p>पिछले कुछ समय से क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव, समुद्री मार्गों पर दबाव और ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे में प्रस्तावित समझौता न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>फिलहाल, सभी की नजर 21 अप्रैल की समयसीमा और उससे पहले होने वाली संभावित बैठक पर टिकी है, जहां से आगे की दिशा तय होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 09:07:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाएगा ईरान, इजराइल बोला- युद्ध कब खत्म होगा तय नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-will-impose-toll-on-ships-passing-through-the-strait/article-49682"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/iran-hormuz-strait-toll-plan.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की योजना को आगे बढ़ाया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को ईरान को उसकी स्थानीय मुद्रा रियाल में शुल्क देना होगा। इसके साथ ही अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग में प्रवेश से रोकने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हालांकि, यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले ईरान की संसद, गार्जियन काउंसिल और राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी आवश्यक होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक तेल आपूर्ति पर संभावित असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है। ऐसे में ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तरह की बाधा से तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इजराइल का बयान और युद्ध पर अनिश्चितता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के खत्म होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती। एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि अब तक युद्ध के आधे से अधिक लक्ष्य हासिल किए जा चुके हैं और आने वाले समय में ईरान का मौजूदा शासन कमजोर पड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरान के इस्फहान में अमेरिका की एयरस्ट्राइक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस बीच अमेरिका ने ईरान के शहर Isfahan में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे भूमिगत ठिकानों को निशाना बनाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हमले के बाद डिपो में जोरदार विस्फोट हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार वहां बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री मौजूद थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ट्रंप का वीडियो और अमेरिका का दावा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हमले से जुड़ा एक वीडियो भी साझा किया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई सैन्य ठिकानों को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई थी।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान की ओर से टोल नीति और अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों ने वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोने की कीमत में 3 हजार की तेजी, चांदी ₹6 हजार बढ़कर 2.28 लाख हुई</title>
                                    <description><![CDATA[IBJA के अनुसार 10 ग्राम सोना 1.46 लाख रुपए और 1 किलो चांदी 2.28 लाख रुपए पर पहुंचा; बाजार की दिशा अमेरिका-ईरान तनाव और डॉलर के आंकड़ों पर निर्भर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-price-increased-by-%E2%82%B9-3-thousand-silver-increased-by/article-49566"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-30t133255.196.jpg" alt=""></a><br /><p>30 मार्च 2026 को सोने और चांदी के दाम में तेज वृद्धि दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 3 हजार रुपए बढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया, जबकि 1 किलो चांदी की कीमत 6 हजार रुपए बढ़कर 2.28 लाख रुपए हो गई।</p>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमत में यह वृद्धि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और निवेश धाराओं के कारण हुई है। बीते साल के अंत में सोने का भाव 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था, जो अब 1.46 लाख रुपए हो गया है। इसका मतलब है कि इस साल सोने की कीमत में कुल 13 हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, चांदी की कीमत में इस अवधि के दौरान 2 हजार रुपए की गिरावट देखी गई थी, लेकिन आज इसके दाम बढ़कर 2.28 लाख रुपए पहुंच गए।</p>
<p>बाजार के जानकार मानते हैं कि आगे की दिशा मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करेगी। पहला, मिडिल ईस्ट की स्थिति, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव। अगर तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित संपत्ति की तलाश में सोने और चांदी में निवेश बढ़ा सकते हैं। दूसरा, अमेरिका के आर्थिक आंकड़े। यदि डेटा उम्मीद से बेहतर आते हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बन सकता है।</p>
<p>वित्तीय विशेषज्ञों ने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सोना फिलहाल 'करेक्शन फेज' में है, यानी कीमतों में थोड़ी स्थिरता या सुधार देखे जा सकते हैं। शॉर्ट टर्म में मोमेंटम कमजोर होने के बावजूद, लॉन्ग टर्म में सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि का रुझान बरकरार है। इसीलिए विशेषज्ञ निवेशकों को सुझाव देते हैं कि छोटे निवेश करके सोने में पोर्टफोलियो तैयार किया जा सकता है।</p>
<p>देश के प्रमुख शहरों में सोने-चांदी की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े बाजारों में कीमतें स्थानीय मांग और सप्लाई के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। IBJA ने निवेशकों को यह भी सलाह दी है कि खरीदी से पहले नवीनतम स्थानीय रेट की जांच अवश्य करें।</p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से इस समय कीमती धातुओं का बाजार अस्थिर है। निवेशक अपनी लंबी अवधि की रणनीति के हिसाब से ही खरीदारी करें और जल्दबाज़ी में निवेश से बचें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:34:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान की अमेरिका को बड़ी धमकी, अमेरिका से जुड़े तेल ठिकानों को राख में बदल देंगे!</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेल ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिकी ऊर्जा सुविधाओं को नष्ट करने की धमकी, होर्मुज नाकाबंदी से वैश्विक तेल संकट गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-big-threat-to-america-will-turn-americas-oil-bases/article-48183"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/iran-us-war-.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब लगातार गहराता जा रहा है। पिछले लगभग पंद्रह दिनों से चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ कहा है कि यदि उसके तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे तो वह अमेरिका से जुड़ी तेल और ऊर्जा सुविधाओं को पूरी तरह तबाह कर देगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि इस संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">युद्ध के बढ़ते दायरे से वैश्विक चिंता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य-पूर्व में शुरू हुआ यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। दो सप्ताह से अधिक समय से जारी हमलों और जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। खासकर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका लगातार जताई जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अगर उनके तेल प्रतिष्ठानों पर किसी भी प्रकार का हमला जारी रहता है तो वे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाएंगे। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई के बाद ये प्रतिष्ठान पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं। इस चेतावनी ने पहले से ही संवेदनशील स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखेगा। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने हाल ही में जारी बयान में कहा कि वे अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज क्षेत्र में नाकाबंदी जारी रहेगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुनिया के तेल व्यापार पर बड़ा असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकती है। वर्तमान हालात में भी तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है प्रभाव</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट और लंबा खिंचता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में दुनिया के कई देश इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">---------------------------------</span></p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-big-threat-to-america-will-turn-americas-oil-bases/article-48183</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 17:13:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प बोले– ईरान जंग में अमेरिका आगे, मिशन पूरा होने तक लड़ाई जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पेंटागन का खुलासा: 6 दिन में अमेरिका ने ₹1 लाख करोड़ खर्च किए; ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-said-%E2%80%93-america-will-continue-fighting-in-the-iran/article-47973"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mp---2026-03-12t103910.130.jpg" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव/तेहरान। मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। युद्ध के 13वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span></strong> ने दावा किया कि अमेरिका इस संघर्ष में बढ़त बना चुका है, लेकिन सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक मिशन पूरी तरह पूरा नहीं हो जाता। उन्होंने केंटकी में आयोजित एक रैली के दौरान यह बयान दिया और कहा कि युद्ध के शुरुआती घंटों में ही अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया।</p>
<p>इसी बीच अमेरिकी रक्षा विभाग <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Pentagon</span></span></strong> ने संसद को जानकारी दी है कि युद्ध के पहले छह दिनों में अमेरिका ने लगभग 11.3 अरब डॉलर, यानी करीब एक लाख करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इनमें से करीब 5 अरब डॉलर सिर्फ हथियार और गोला-बारूद पर खर्च हुए हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह खर्च मुख्य रूप से हवाई हमलों, मिसाइल प्रणालियों और सैन्य तैनाती पर हुआ।</p>
<p>दूसरी ओर ईरान ने संघर्ष समाप्त करने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। ईरान के राष्ट्रपति <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Masoud Pezeshkian</span></span></strong> ने कहा कि युद्ध तभी समाप्त हो सकता है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता दे, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की जाए और भविष्य में देश पर किसी भी सैन्य हमले को रोकने के लिए ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए। तेहरान का कहना है कि इन शर्तों को स्वीकार किए बिना स्थायी शांति संभव नहीं होगी।</p>
<p>संघर्ष के बीच फारस की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर हमले की घटना ने क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा दिया है। हमले के बाद टैंकर में आग लग गई, हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इसके पीछे किसका हाथ था। इस घटना के बाद कई देशों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।</p>
<p>मानवीय संकट भी तेजी से गहरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">UNICEF</span></span></strong> के अनुसार हालिया हिंसा में 1100 से अधिक बच्चे घायल या मारे जा चुके हैं। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष लंबा चला तो बच्चों और नागरिकों पर इसका असर और गंभीर हो सकता है। कई इलाकों में स्कूल बंद हो चुके हैं और हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है।</p>
<p>इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">United Nations Security Council</span></span></strong> में भी इस संघर्ष पर चर्चा हुई है। परिषद के अधिकांश सदस्य देशों ने क्षेत्र में तत्काल तनाव कम करने और युद्धविराम की अपील की है। हालांकि लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण फिलहाल हालात सामान्य होने के आसार कम दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीतिक स्तर पर कोई समाधान निकलता है या संघर्ष और व्यापक रूप लेता है।</p>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 10:43:24 +0530</pubDate>
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