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                <title>Khamenei - दैनिक जागरण</title>
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                <title>खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच होर्मुज में फिर हमले, तीन टैंकर बने निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कमर्शियल जहाजों के तय समुद्री मार्ग छोड़ने पर जताई चिंता, अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/three-tankers-targeted-again-in-hormuz-amid-khameneis-last-visit/article-58127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/iran.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमलों की खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि कतर के तेल टैंकर अल-रकायत को निशाना बनाया गया, जबकि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार ओमान तट के पास दो अन्य वाणिज्यिक जहाज भी हमलों की चपेट में आए। घटनाओं के बाद समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान ने कहा है कि कुछ व्यावसायिक जहाज उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा की गारंटी देना संभव नहीं होगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि होर्मुज की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और हालात पहले की तरह स्थिर नहीं माने जा सकते।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हमलों की खबर ऐसे समय सामने आई है जब ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा जारी है। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक शहर कोम पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम श्रद्धांजलि दी। शहर की सड़कों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी और लाखों समर्थकों की मौजूदगी के बीच धार्मिक रस्में पूरी की गईं। अंतिम यात्रा के दौरान कई लोगों के हाथों में लाल झंडे दिखाई दिए। शिया परंपरा में लाल झंडा अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध और बदले की मांग का प्रतीक माना जाता है। पार्थिव शरीर पर ईरान का राष्ट्रीय ध्वज ओढ़ाया गया था, जबकि ताबूत पर उनकी काली पगड़ी भी रखी गई, जो उच्च धार्मिक विद्वानों की पहचान मानी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई और पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के अनुसार इससे पहले तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में भी लाखों लोग शामिल हुए। भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर शव वाहन की रफ्तार धीमी करनी पड़ी और कुछ जगहों पर यात्रा थोड़ी देर के लिए रुक भी गई। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोम ले जाया गया। बताया गया है कि आगे की रस्मों के बाद उन्हें उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, राजनीतिक प्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद रहे। कई लोगों ने नारे लगाए और खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर समुद्री मोर्चे पर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन करना जरूरी है। यदि जहाज तय रास्तों से अलग होकर आवाजाही करेंगे तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल होगा। हालांकि हमलों को लेकर स्वतंत्र स्तर पर विस्तृत पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है और संबंधित एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के भीतर भी इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। देश के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अंतिम यात्रा के दौरान कहा कि देश खामेनेई के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराता है। वहीं सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को उनके किए का जवाब देना होगा और उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। दूसरी ओर क्षेत्रीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अंतिम यात्रा में जुटी भीड़ पूरे ईरान की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती। वहीं इराक के प्रमुख शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की। अंतिम यात्रा के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में बढ़ी गतिविधियां पश्चिम एशिया की पहले से संवेदनशील स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि दुनिया की कई सरकारें और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बयान बना विवाद, ईरान में शोक तो अमेरिका में सियासी हमला</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में भारी भीड़ के बीच अंतिम विदाई की प्रक्रिया जारी, वहीं डोनाल्ड ट्रंप के भाषण की टिप्पणी ने दोनों देशों के बीच तनाव और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-statement-becomes-controversy-amid-khameneis-funeral-mourning-in-iran/article-57842"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ketan-agrawal-murder-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">ईरान में शनिवार को पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग राजधानी तेहरान की सड़कों पर जुटे। सुबह से ही शहर के कई हिस्सों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रमुख मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। काले कपड़ों में पहुंचे हजारों लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और बैनर लेकर ग्रैंड मोसाला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। पूरे शहर में शोक का माहौल रहा। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। अपने संबोधन में ट्रंप ने ईरान को लेकर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका ने अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी, क्योंकि "हम अच्छे लोग हैं।" उनके इस बयान के बाद नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव फिर सुर्खियों में आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। शहर के कई इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई और हवाई क्षेत्र पर भी सख्त नियंत्रण किया गया। ग्रैंड मोसाला परिसर के आसपास सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। शिया परंपरा के अनुसार कई लोग शोक व्यक्त करते हुए अपनी छाती पीटते नजर आए, जबकि महिलाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में नागरिक अपने नेता को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरे इलाके में खामेनेई के बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए थे, जिससे माहौल पूरी तरह शोकमय दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने माउंट रशमोर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ईरान पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाया है और यदि भविष्य में कोई समझौता होता है तो उसे अमेरिकी शर्तों पर ही होना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया क्योंकि अमेरिका "अच्छे लोगों" का देश है। ट्रंप के इस बयान पर सभा में मौजूद समर्थकों ने तालियां बजाईं और हंसी के साथ प्रतिक्रिया दी। हालांकि इस टिप्पणी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों की भावनाएं स्पष्ट रूप से दिखाई दीं। राजधानी ही नहीं बल्कि दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग तेहरान पहुंचे। कई नागरिकों ने इसे देश के लिए भावुक क्षण बताया। जनाजे में शामिल होने आए लोगों का कहना था कि वे अपने नेता को अंतिम सम्मान देने और राष्ट्रीय एकजुटता दिखाने के लिए यहां पहुंचे हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में देश को एकजुट रहने की जरूरत है। शोक समारोह के दौरान धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया गया कि ग्रैंड मोसाला परिसर में तैयार किया गया मंच उसी शैली में बनाया गया, जहां खामेनेई अपने सार्वजनिक संबोधन किया करते थे। समारोह में शामिल कई लोगों ने इसे उनके सार्वजनिक जीवन की यादों से जोड़कर देखा। दूर-दराज के शहरों से आए नागरिकों ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनना चाहते थे। कई परिवार सुबह से ही समारोह स्थल के बाहर मौजूद रहे और श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी रहीं। पश्चिम एशिया पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयान दोनों देशों के संबंधों पर असर डाल सकते हैं। यदि आने वाले दिनों में कूटनीतिक संवाद आगे बढ़ता है तो दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख पर भी दुनिया की नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:53:16 +0530</pubDate>
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                <title>अली खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू, 14 महीने की पोती का छोटा ताबूत भी साथ रखा गया</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में लाखों लोगों ने दी श्रद्धांजलि, छह दिन तक चलेंगे अंतिम संस्कार कार्यक्रम; ईरान और इराक के कई शहरों से होकर गुजरेगी अंतिम यात्रा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ali-khameneis-funeral-procession-begins-small-coffin-of-14-month-old-granddaughter/article-57834"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला शनिवार से तेहरान में आधिकारिक रूप से शुरू हो गया। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में सुबह से ही हजारों लोग पहुंचने लगे। पूरे परिसर में शोक का माहौल दिखाई दिया और बड़ी संख्या में लोग अपने हाथों में ईरानी झंडे, धार्मिक प्रतीक और खामेनेई की तस्वीरें लेकर मौजूद रहे। समारोह के दौरान खामेनेई का ताबूत ईरान के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ मुख्य हॉल में लाया गया, जिसके ऊपर उनकी पहचान मानी जाने वाली काली पगड़ी भी रखी गई थी। इसी दौरान एक भावुक दृश्य तब सामने आया जब उनके परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों के ताबूत भी साथ रखे गए। इनमें 14 महीने की उनकी पोती जाहरा मोहम्मदी गोलपायेगानी का छोटा ताबूत भी शामिल था। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और कई लोग रोते हुए नजर आए। बताया जा रहा है कि फरवरी के अंत में हुए हमलों में खामेनेई के साथ परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी मारे गए थे। अंतिम संस्कार के पहले दिन श्रद्धांजलि देने वालों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरानी प्रशासन के अनुसार खामेनेई के पार्थिव शरीर को शुक्रवार को तेहरान लाया गया था। इसके बाद छह दिनों तक सार्वजनिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है ताकि देशभर से लोग अंतिम दर्शन कर सकें। राजधानी में तीन दिनों तक पार्थिव शरीर आम लोगों के लिए रखा जाएगा। प्रशासन का अनुमान है कि केवल तेहरान में ही अगले तीन दिनों के दौरान डेढ़ से दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि सेना और सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार निगरानी कर रही हैं। समारोह स्थल तक पहुंचने वाले सभी रास्तों पर कई स्तर की सुरक्षा जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी अस्थायी बदलाव किए गए हैं। लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं चलाई गई हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि समारोह में देश के कई वरिष्ठ राजनीतिक और धार्मिक नेता भी मौजूद रहे। सरकारी अधिकारियों के अलावा न्यायपालिका, संसद और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान कई धार्मिक अनुष्ठान किए गए और विशेष प्रार्थनाएं भी आयोजित हुईं। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग अपने परिवार के साथ अंतिम दर्शन के लिए घंटों तक कतार में खड़े रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवक भी लगातार लोगों की मदद करते दिखाई दिए। चिकित्सा सहायता केंद्र, पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी प्रशासन की ओर से की गई। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक अंतिम यात्रा केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को राजधानी की सड़कों पर विशाल अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद मंगलवार को पार्थिव शरीर को ईरान के धार्मिक महत्व वाले शहर क़ोम ले जाया जाएगा, जहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अगले दिन अंतिम यात्रा पड़ोसी देश इराक के कुछ पवित्र शहरों तक पहुंचेगी। वहां भी श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी और स्थानीय धार्मिक नेताओं की मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में गुरुवार को खामेनेई के पैतृक शहर मशहद में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इस पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था लगातार कड़ी रहेगी और हर चरण की निगरानी की जाएगी। लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए यात्रा मार्ग पर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मध्य पूर्व के मौजूदा हालात और हाल के घटनाक्रम के बीच इस अंतिम संस्कार पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंच चुके हैं और विभिन्न स्तरों पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और ड्रोन के जरिए भी निगरानी की जा रही है। अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:52:58 +0530</pubDate>
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                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने PM मोदी को न्योता, 4 जुलाई से शुरू होंगे कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में राजकीय जनाजे की तैयारियां तेज, करीब 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद; भारत की भागीदारी पर सस्पेंस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-invited-to-attend-khameneis-funeral-programs-will-start/article-56850"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/khamenei-funeral.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का आधिकारिक न्योता भेजा गया है। यह समारोह 4 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि अभी तक भारत सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खामेनेई का अंतिम संस्कार कार्यक्रम कई चरणों में आयोजित किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को पहले तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफनाया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इस पूरे कार्यक्रम में तेहरान, कुम और मशहद में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक बना सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले यह कार्यक्रम 4 मार्च को आयोजित होना था, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते इसे टाल दिया गया था। अब हालात सामान्य होने के बाद इसे दोबारा शुरू किया जा रहा है। ईरान प्रशासन इस आयोजन को बेहद व्यापक स्तर पर करने की तैयारी में जुटा है, जिसमें सुरक्षा से लेकर भीड़ प्रबंधन तक के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।भारत की ओर से इस कार्यक्रम में कौन शामिल होगा, इस पर अभी संशय बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण जरूर भेजा गया है, लेकिन उनके शामिल होने को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले भी जब ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी का निधन हुआ था, तब भारत ने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा था। उस समय तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान में यह परंपरा रही है कि महत्वपूर्ण राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के अंतिम संस्कार में विदेशी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है। खामेनेई का अंतिम संस्कार भी इसी परंपरा के तहत आयोजित किया जा रहा है, लेकिन इस बार आयोजन का आकार और सुरक्षा चुनौती कहीं अधिक बड़ी बताई जा रही है। युद्ध के हालात और हालिया तनावों के कारण प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है। खामेनेई के दफन स्थल को लेकर भी धार्मिक और रणनीतिक दृष्टि से विशेष तैयारी की गई है। उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा, जो शिया इस्लाम का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। मशहद न केवल ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, बल्कि शिया समुदाय के लिए वैश्विक आस्था का केंद्र भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार को तीन दिन तक सार्वजनिक रूप से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) को सौंपी गई है, जो सुरक्षा और प्रबंधन दोनों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर आयोजन को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर तब जब लाखों लोगों के जुटने की संभावना हो। ईरान के इतिहास में इससे पहले 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के अंतिम संस्कार में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। वह जनाजा आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है, जिसमें भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति भी बन गई थी और कई लोगों की जान चली गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त रखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित भागीदारी को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, लेकिन आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 18:06:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान में सत्ता संकट गहराया: खामेनेई के देश छोड़ने की अटकलें, रूस जाने की तैयारी का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार आठ दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच खुफिया रिपोर्ट का दावा, हालात बिगड़े तो बेटे और करीबी लोगों के साथ तेहरान छोड़ सकते हैं ईरानी सुप्रीम लीडर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/695cbf66e7acf/article-42189"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/videsh-(15).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। एक खुफिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि यदि हालात काबू में नहीं आए, तो खामेनेई देश छोड़कर रूस जा सकते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब ईरान लगातार आठ दिनों से गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार को मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई अपने बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई सहित लगभग 20 लोगों के छोटे समूह के साथ ईरान से बाहर जाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। बताया गया है कि यह योजना आपात स्थिति के लिए तैयार की गई है और इसके तहत विदेशों में संपत्ति और वित्तीय संसाधनों को पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को राजधानी तेहरान से हुई थी, जहां व्यापारियों ने गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज उठाई। धीरे-धीरे यह आंदोलन देश के 78 से अधिक शहरों में फैल गया। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें कम से कम 35 लोगों की मौत और 1200 से अधिक की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनों की मुख्य वजह आर्थिक संकट मानी जा रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ 1.45 मिलियन प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गई। महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर पर है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 70 प्रतिशत से अधिक और दवाओं में करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसके साथ ही 2026 के बजट में प्रस्तावित 62 प्रतिशत कर वृद्धि ने जनाक्रोश को और हवा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। ईरान की सरकारी एजेंसियों का दावा है कि हिंसा में सैकड़ों सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, भारत सरकार ने भी स्थिति को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान की गैर जरूरी यात्रा से बचने और वहां रह रहे भारतीयों से दूतावास में पंजीकरण कराने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">खामेनेई पिछले 35 वर्षों से ईरान की सर्वोच्च सत्ता में हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से देश की राजनीति और नीति निर्धारण में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। मौजूदा घटनाक्रम को विशेषज्ञ ईरान के लिए अब तक का सबसे गंभीर आंतरिक संकट मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह आंदोलन सत्ता में बदलाव की दिशा में बढ़ता है या सरकार हालात पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर पाती है।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 13:54:53 +0530</pubDate>
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