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                <title>S Jaishankar - दैनिक जागरण</title>
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                <description>S Jaishankar RSS Feed</description>
                
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                <title>ओमान के पास अमेरिकी स्ट्राइक में 3 भारतीयों की मौत, भारत ने जताया विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर कहा—व्यावसायिक जहाजों पर घातक कार्रवाई उचित नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/3-indians-killed-in-us-strike-near-oman-india-protests/article-55789"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jaishankar-rubio-call.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ओमान के तट के पास हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य हमलों में तीन भारतीय समुद्री कर्मियों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। यह घटना उस समय सामने आई जब कई वाणिज्यिक जहाजों को लक्षित किया गया था, जिनमें भारतीय चालक दल मौजूद था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हमला उस क्षेत्र में हुआ जहां समुद्री सुरक्षा पहले से ही संवेदनशील मानी जाती है और लगातार निगरानी रखी जाती है। अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के दौरान एक वाणिज्यिक टैंकर पर हमला किया गया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। घटना के बाद से ही भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर गंभीर रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क साधते हुए इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बताया जा रहा है कि भारत ने अमेरिका से इस तरह की कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब भी मांगा है, क्योंकि इसमें नागरिक और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा जुड़ा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की और भारत की चिंता को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक शिपिंग पर इस तरह की घातक कार्रवाई किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराई जा सकती। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर भी इस बातचीत का जिक्र करते हुए भारत की “strong protest” को दोहराया। उनका कहना था कि भारतीय नागरिकों की मौत बेहद गंभीर मामला है और इसकी पूरी जांच जरूरी है। इस घटना के बाद भारत ने दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के उच्च अधिकारी को भी तलब किया और औपचारिक रूप से विरोध पत्र सौंपा। भारत की ओर से यह भी कहा गया कि समुद्री मार्गों पर इस तरह की हिंसक कार्रवाई से न केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। घटना को लेकर मिली जानकारी के मुताबिक, यह हमला उस व्यापक समुद्री अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है जिसमें अमेरिका ने कुछ जहाजों को निशाना बनाया है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ये जहाज प्रतिबंधित क्षेत्र या ईरान से जुड़े तेल परिवहन में शामिल थे। हालांकि, भारत ने इस पूरे तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में नागरिक चालक दल की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार से इस मामले में और सख्त रुख अपनाने की मांग की है। वहीं समुद्री क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने भी चिंता जताई है कि इस तरह की घटनाएं भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री श्रम आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है। ओमान क्षेत्र में पहले भी इस तरह की घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय तनाव देखने को मिला है, लेकिन इस बार मामला और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। यदि स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो यह कूटनीतिक स्तर पर और जटिल हो सकती है। भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विदेश मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि भारत इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठा सकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:37:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत-नेपाल के बीच UPI-NPS भुगतान लिंक लागू, डिजिटल और विकास सहयोग को मिली नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में भारत और नेपाल के बीच अहम समझौतों पर सहमति, सीमा पार भुगतान, भूकंप पुनर्निर्माण और भाषा प्रौद्योगिकी सहयोग को मिला बढ़ावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2656db7bf6a/article-55251"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-nepal-upi-link.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित सीमा पार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आखिरकार अंतिम रूप दे दिया गया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को जोड़ने पर सहमति जताई, जिससे अब भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और नेपाल की नेशनल पेमेंट्स सिस्टम (NPS) के बीच सीधे लेनदेन का रास्ता साफ हो गया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद दोनों देशों के नागरिकों के लिए सीमा पार धन भेजना और प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह कदम आर्थिक संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ आम लोगों की सुविधा को भी सीधे प्रभावित करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समझौता नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद सामने आया। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-नेपाल संबंधों को विशेष और ऐतिहासिक बताते हुए भविष्य में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंध बेहद गहरे हैं और नई भुगतान व्यवस्था इन्हीं संबंधों को और मजबूत करेगी। बताया गया कि यह पहल जून 2023 में नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (NCHL) और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) के बीच हुए समझौते पर आधारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीमा पार भुगतान सुविधा को लेकर पिछले कुछ समय से तकनीकी और प्रक्रियागत स्तर पर काम चल रहा था। मार्च 2024 में भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों के लिए क्यूआर आधारित भुगतान सेवा शुरू कर दी गई थी, लेकिन नेपाल के नागरिकों को भारत में उसी तरह की सुविधा नहीं मिल पा रही थी। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक लेनदेन शुल्क, प्रोसेसिंग लागत और कुछ तकनीकी पहलुओं को लेकर चर्चा जारी थी। अब दोनों देशों के बीच सहमति बनने के बाद इन अड़चनों को दूर कर लिया गया है। इससे नेपाल के नागरिक भारत यात्रा के दौरान डिजिटल भुगतान कर सकेंगे और व्यक्तिगत स्तर पर सीमा पार धन हस्तांतरण भी अधिक सहज होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू नेपाल के भूकंप पुनर्निर्माण कार्यक्रम से जुड़ा रहा। भारत ने औपचारिक रूप से नेपाल को 72 स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनियां और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनियां सौंप दीं, जिन्हें 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद पुनर्निर्माण सहायता कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया था। गौरतलब है कि भूकंप के बाद भारत ने नेपाल की सहायता के लिए एक अरब डॉलर की अनुदान और ऋण सहायता की घोषणा की थी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और सांस्कृतिक धरोहरों को पुनर्जीवित करना था। अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से स्थानीय समुदायों को सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान दोनों देशों ने डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। काठमांडू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के एआई एवं डिजिटल इंडिया भाषा प्रभाग ‘भाषिणी’ के बीच एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस साझेदारी का उद्देश्य नेपाल में डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को मजबूत करना और एक ऐसी भाषा अनुवाद प्रणाली विकसित करना है जो आवाज आधारित सेवाओं को बढ़ावा दे सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बहुभाषी संचार को आसान बनाने और तकनीक की पहुंच आम लोगों तक बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार, ऊर्जा, संपर्क, जल संसाधन, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। नेपाल दूतावास की ओर से जारी जानकारी के अनुसार बैठक सकारात्मक और परिणामोन्मुख रही तथा दोनों देशों ने विकास सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत को अपने देश का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईंधन और उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली का आभार व्यक्त किया। नेपाल अभी भी पेट्रोलियम उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर भारत पर निर्भर है।</p>
<p style="text-align:justify;">जयशंकर ने भी नेपाल के विकास में भारत के निरंतर सहयोग का भरोसा दिलाया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप, सूचना प्रौद्योगिकी तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। दोनों देशों ने आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता समझौते को लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के पूरा होने का भी स्वागत किया। माना जा रहा है कि इससे सीमा पार अपराधों की जांच और अभियोजन में सहयोग बढ़ेगा। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद विदेश मंत्री स्तर की यह पहली महत्वपूर्ण यात्रा थी। इस दौरे ने भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को एक बार फिर मजबूती दी है और दोनों देशों के बीच पारंपरिक साझेदारी को नए दौर में आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिडिल-ईस्ट संकट के बीच एस जयशंकर की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से चर्चा,  जानें क्या हुई बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच बातचीत, BRICS और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/s-jaishankars-discussion-with-iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-amid/article-48099"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/s-jaishankar-iran-abbas-araghchi-india-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ ब्रिक्स से जुड़े अहम मुद्दों पर भी चर्चा की गई। यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनकी अराघची के साथ एक और विस्तृत बातचीत हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें दोनों देशों के रिश्तों के अलावा बहुपक्षीय मंच ब्रिक्स से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देश मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात में सहयोग और संवाद को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक संवाद</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह बातचीत उस समय हुई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के साथ तनाव तेजी से बढ़ा है। फरवरी </span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">2026</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> के अंत में शुरू हुए इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान ने इन हमलों के जवाब में जवाबी कार्रवाई की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसके बाद समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग पर खतरे की आशंका बढ़ गई है। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और दुनिया भर में होने वाले कच्चे तेल के कारोबार का लगभग </span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">20</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए इस मार्ग की स्थिरता बेहद अहम है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसलिए क्षेत्रीय हालात पर भारत की नजर लगातार बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पहले भी कई बार हो चुकी है दोनों नेताओं की बातचीत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डॉ. एस. जयशंकर और अब्बास अराघची के बीच हाल के सप्ताहों में यह चौथी प्रमुख बातचीत है। इससे पहले </span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">28</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> फरवरी</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, 5</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मार्च और </span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">10</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच फोन पर चर्चा हो चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इन वार्ताओं में मुख्य रूप से क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समुद्री सुरक्षा और भारतीय जहाजों तथा तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया। भारत ने विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह का खतरा भारतीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित न करे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर ईरान ने बातचीत के दौरान अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को आक्रामक कदम बताते हुए इसकी आलोचना की। ईरानी नेतृत्व ने यह भी कहा कि उनके देश को आत्मरक्षा का अधिकार है और इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संतुलित रुख अपनाने की अपेक्षा की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">BRICS </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंच पर भी हुई चर्चा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत में ब्रिक्स मंच से जुड़े विषय भी प्रमुख रूप से शामिल रहे। ईरान हाल के वर्षों में ब्रिक्स के साथ अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और इस मंच के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की उम्मीद जताता रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बातचीत के दौरान यह भी चर्चा हुई कि बहुपक्षीय मंचों के जरिए वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग कैसे बढ़ाया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और समुद्री परिवहन मार्गों में बाधाएं आने की आशंका भी जताई जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसे हालात में भारत संतुलित कूटनीति अपनाते हुए सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। भारत के ईरान के साथ पारंपरिक संबंध रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं इजरायल के साथ भी भारत की रणनीतिक साझेदारी मजबूत है। इसलिए नई दिल्ली क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखे हुए है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत–ईरान सहयोग के अहम क्षेत्र</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत और ईरान के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं बल्कि कई रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी दोनों देशों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। चाबहार पोर्ट परियोजना</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऊर्जा व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों के प्रमुख आधार माने जाते हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील समय में भारत और ईरान के बीच उच्च स्तरीय संपर्क बने रहना क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिए बेहद जरूरी है।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">--------------------------</span></p>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 16:04:16 +0530</pubDate>
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