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                <title>Strait of Hormuz - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Strait of Hormuz RSS Feed</description>
                
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                <title>LNG सप्लाई फिर हुई सामान्य, सरकार ने हटाए सभी आपातकालीन प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट बहाल होने के बाद केंद्र का बड़ा फैसला, उद्योगों को मिलेगी राहत और गैस आपूर्ति होगी सुचारु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lng-supply-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि एलएनजी का सबसे अधिक उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस एवं तेल के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति स्थिर है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से भारत के लिए एलएनजी कार्गो फिर से नियमित रूप से पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के चलते फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने वाले एलएनजी कार्गो को रोक दिया था या उन्हें अन्य देशों की ओर मोड़ दिया था। इस संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ लागू किया था। इसका उद्देश्य सीमित उपलब्ध गैस का प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखना था।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी सप्लाई से जुड़े प्रतिबंध हटाना सरकार का तीसरा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद दो अन्य आपातकालीन फैसले भी वापस ले चुकी है। पहले फैसले के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया था कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन अधिक करें ताकि घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें। अब इस निर्देश को समाप्त कर दिया गया है। दूसरे फैसले में बल्क उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अब ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और किसी प्रकार की अतिरिक्त पाबंदी की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। देश में कई उद्योग प्राकृतिक गैस पर आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग करते हैं। गैस की कमी के दौरान कई कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और उत्पादन घटाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब नियमित आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और कई उद्योगों का संचालन पहले की तरह सुचारु रूप से हो सकेगा। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, स्टील, सिरेमिक, कांच, टेक्सटाइल और अन्य गैस आधारित उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। इनमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया के देशों से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। विशेष रूप से कतर से आने वाली एलएनजी का अधिकांश परिवहन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक कदम उठाए थे। विभिन्न देशों से ईंधन आयात के विकल्प तलाशे गए, घरेलू भंडार का उपयोग किया गया और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया गया। एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है। उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने NATO देशों पर लगाए गंभीर आरोप, होर्मुज में जहाज पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान का दावा—अमेरिका-इजराइल के साथ कुछ NATO देशों ने दिया सैन्य समर्थन, होर्मुज स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाज पर हमला, ब्रिज को नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-nato-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। Iran ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर उसके खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई में कुछ NATO सदस्य देशों ने भी समर्थन दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में NATO की भूमिका की गंभीर जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनती दिख रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की ओर से यह दावा ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीतिक मंच पर पहले से ही कई मुद्दों को लेकर असहमति बनी हुई है। बघई ने अपने बयान में कहा कि NATO प्रमुख मार्क रूट ने खुद इस बात की ओर इशारा किया है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का समर्थन किया था। हालांकि इस दावे पर अभी तक स्वतंत्र रूप से किसी भी देश ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरान ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इन देशों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर और किस उद्देश्य से इस तरह के सैन्य सहयोग में हिस्सा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर किसी भी NATO देश ने इस प्रकार की कार्रवाई में भाग लिया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। तेहरान ने यह भी मांग की है कि इन देशों को न केवल अपने नागरिकों को बल्कि पूरी दुनिया को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर इस तरह की कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच समुद्री सुरक्षा से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। Strait of Hormuz में एक कॉमर्शियल जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि की है। जहाज ओमान के तट के पास था, जब अचानक एक प्रोजेक्टाइल आकर जहाज के दाहिने हिस्से से टकरा गया। इस हमले से जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा है, जहां से जहाज का संचालन किया जाता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी क्रू सदस्य को चोट नहीं आई है। घटना के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, और इस नए विवाद ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। NATO की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक NATO की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं अमेरिका और इजराइल की ओर से भी इन आरोपों पर चुप्पी बनी हुई है। ईरान का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जबकि पश्चिमी देश इसे खारिज कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह से होर्मुज क्षेत्र में हमला हुआ है, उसने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा और व्यापार बाजारों पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>G7 सम्मेलन में पीएम मोदी बोले, भारतीय नाविकों की मौत चिंता का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री व्यापार सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा उठा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-modi-said-in-g7-conference-that-death-of-indian/article-56154"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pm-modi-g7-speech.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फ्रांस के इवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के सामने समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की स्थिरता और हाल की घटनाओं में भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। इस बैठक में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई प्रमुख देशों के नेता मौजूद थे। पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों का असर सिर्फ क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र किया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। पीएम ने कहा कि इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और वाणिज्यिक सामान दुनिया भर में भेजा जाता है और किसी भी तरह की बाधा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा, “इस संघर्ष में हमारे कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है।” उन्होंने आगे कहा कि समुद्री व्यापार को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि हजारों नाविक रोजाना समुद्र के रास्ते देशों को जोड़ते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि वे बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। पीएम मोदी का यह बयान हाल ही में सामने आई उन घटनाओं से जुड़ा माना जा रहा है, जिनमें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी देश या घटना का सीधा नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत उन्हीं घटनाओं की ओर माना जा रहा है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कई जहाजों पर कार्रवाई की गई थी। हाल के दिनों में अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में कुछ विदेशी झंडे वाले तेल टैंकरों पर कार्रवाई की थी। इन जहाजों पर भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद थे। इनमें से एक घटना में तीन भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि अन्य घटनाओं में कई नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और समुद्री सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि इस तरह की घटनाएं तुरंत रोकी जानी चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि समुद्री मार्गों पर काम करने वाले नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपने समुद्री समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को अत्यंत महत्व देता है। जब यह घटना हुई, तब भारत ने तुरंत अमेरिकी पक्ष के सामने अपनी गंभीर चिंता दर्ज कराई और कड़ा विरोध जताया। भारत ने अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को तलब कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है। पीएम मोदी का यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक शांति और व्यापार स्थिरता पर भी जोर देता है। भारत लंबे समय से समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात करता रहा है। G7 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह मुद्दा उठना इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर अपने नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार के मुद्दों को अधिक मजबूती से रख रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता, युद्ध समाप्ति का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[तीन महीने से चल रहे तनाव के बाद मध्यस्थता से बनी सहमति, 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/historic-peace-agreement-between-america-and-iran-claims-end-of/article-55949"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-peace-deal-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">14 जून 2026 की देर रात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अचानक बड़ा मोड़ देखने को मिला जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और सैन्य टकराव को लेकर एक व्यापक शांति समझौते की घोषणा सामने आई। इस घोषणा ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी क्योंकि पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में हालात लगातार अस्थिर बने हुए थे और कई देशों की नजर इस संघर्ष पर टिकी हुई थी। दोनों देशों ने सभी सैन्य गतिविधियों को “तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त” करने पर सहमति जताई है। यह समझौता केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है क्योंकि इसमें लेबनान सहित कई मोर्चों पर चल रही कार्रवाइयों को रोकने की बात शामिल है। मध्यस्थता की भूमिका पाकिस्तान ने निभाई, जिसने लगातार दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश की और अंतिम चरण की बातचीत को सफल बनाने में अहम योगदान दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह समझौता “REACHED” हो चुका है और 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जाएगा। इस घोषणा के बाद वैश्विक कूटनीतिक हलकों में इसे एक संभावित ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि कई विशेषज्ञ अभी भी इसके क्रियान्वयन को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच अमेरिका की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान के साथ शांति समझौता अब पूरी तरह से अंतिम रूप ले चुका है और इसे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, अब फिर से पूरी तरह खोल दिया गया है और अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में तुरंत हलचल देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के संकेत सामने आए। पिछले कई महीनों से इस क्षेत्र में जारी तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही थी, जिससे कई देशों में आर्थिक दबाव भी बढ़ा था। अब इस समझौते के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बाजारों में स्थिरता लौट सकती है, हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है क्योंकि जमीनी स्तर पर भरोसा बहाल करना आसान नहीं होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस समझौते तक पहुंचने के लिए कई दौर की गुप्त और लंबी बातचीत हुई, जिसमें विभिन्न देशों की कूटनीतिक टीमों ने पर्दे के पीछे रहकर भूमिका निभाई। पाकिस्तान की मध्यस्थता को इस प्रक्रिया में सबसे अहम माना जा रहा है क्योंकि उसने दोनों पक्षों के बीच संवाद की खाई को लगातार कम करने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों की निगरानी, और भविष्य में किसी भी टकराव को रोकने के लिए एक साझा ढांचे पर भी चर्चा हुई है। हालांकि अभी तक सभी बिंदुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह समझौता केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें दीर्घकालिक स्थिरता और सहयोग की दिशा में भी कुछ प्रावधान शामिल हैं। अगर यह समझौता जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होता है तो पश्चिम एशिया में पिछले कई वर्षों से जारी अस्थिरता में बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे शुरुआती चरण का समझौता मानते हुए चेतावनी दे रहे हैं कि असली परीक्षा इसके पालन और भरोसे की बहाली में होगी। दुनिया की नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले उस आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हुई है, जहां इस समझौते को औपचारिक रूप दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:17:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओमान के पास तेल टैंकर पर हमला, भारतीय क्रू के साथ जहाज में लगी आग</title>
                                    <description><![CDATA[सेटेबेलो टैंकर के इंजन रूम में मिसाइल हमले से आग, 24 भारतीयों में से 3 लापता, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/oil-tanker-attacked-near-oman-ship-with-indian-crew-caught/article-55587"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/settebello-tanker-attack.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ओमान के तट के पास अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के बीच एक तेल टैंकर पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है। यह घटना उस वक्त हुई जब Palau-flagged तेल टैंकर “सेटेबेलो” सामान्य समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। जहाज पर कुल 28 क्रू मेंबर मौजूद थे, जिनमें 24 भारतीय नागरिक शामिल थे। अचानक हुए इस हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी मशीनरी में आग लग गई। यह घटना ओमान के सोहर पोर्ट से लगभग 20 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी 15 सेकंड के एक वीडियो में यह दृश्य सामने आया है जिसमें साफ दिखाई देता है कि जहाज को निशाना बनाए जाने के तुरंत बाद उसमें आग लग जाती है। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर बहस और तेज हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज को सटीक हथियारों से निशाना बनाया गया क्योंकि उसने कथित तौर पर दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। बयान के मुताबिक यह कार्रवाई एक चल रहे समुद्री अवरोध अभियान का हिस्सा थी, जिसमें कुछ जहाजों को रोका गया और कुछ को वापस भेजा गया। हालांकि इस कार्रवाई के तरीके और इसके परिणामों को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। हमले के तुरंत बाद जहाज के इंजन रूम में लगी आग तेजी से फैल गई। जहाज के भीतर अफरातफरी का माहौल बन गया और क्रू मेंबर्स को बचाने के प्रयास शुरू किए गए। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, जहाज पर मौजूद 28 लोगों में से 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 3 भारतीय अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाकी क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद भारत सरकार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि भारत इस हमले की कड़ी निंदा करता है और यह स्वीकार्य नहीं है कि किसी भी नागरिक जहाज या व्यापारिक पोत को इस तरह निशाना बनाया जाए। भारत ने अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब कर इस मामले में औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। सरकार ने यह भी कहा कि इस पूरे क्षेत्र में बढ़ता तनाव बेहद चिंताजनक है और सभी पक्षों को तुरंत संयम बरतना चाहिए। भारत ने दोहराया कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की कार्रवाई जो इसे बाधित करे, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह भी कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल मानवीय संकट पैदा करती हैं बल्कि भारत की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डालती हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी इस घटना की निंदा की है। संगठन ने कहा कि कोई भी कार्रवाई जो नाविकों की जान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षा को खतरे में डालती है, पूरी तरह अस्वीकार्य है। IMO महासचिव ने कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटना खाड़ी क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और गंभीर बना सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी, लेकिन इसके परिणामस्वरूप नागरिकों की जान जोखिम में पड़ना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:04:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा- ईरान समझौते के करीब, खुल सकता है होर्मुज मार्ग</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान और कई देशों के बीच समझौता लगभग तय है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द खुलने की उम्मीद जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-hormuz-passage-may-open-closer-to/article-54126"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/donald-trump-iran-middle-east-strait-of-hormuz.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिडिल ईस्ट में पिछले कई महीनों से चल रहे तनाव के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर सबका ध्यान खींच लिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान और क्षेत्र के कुछ देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तय है। ट्रंप का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर से खोलने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जल्द ही इस पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि हाल में उन्होंने मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत की है। उनके अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सऊदी अरब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयुक्त अरब अमीरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुर्की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिस्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जॉर्डन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान और बहरीन के नेताओं के साथ इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और सभी पक्ष तनाव कम करने के लिए राजी हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने समझौते की सभी शर्तें बताने से परहेज किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतना बताया कि बातचीत का अंतिम दौर चल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि दोनों नेताओं के बीच डील के अंतिम पहलुओं पर चर्चा हुई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बहुत जल्द इस समझौते को दुनिया के सामने लाया जाएगा। यह बताया जा रहा है कि बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और संघर्ष विराम जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। लेकिन इजरायल और ईरान की तरफ से ट्रंप के दावों पर अभी तक आधिकारिक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दुनिया हमेशा चिंतित रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हमलों के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई देशों ने सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। अगर यह समझौता होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इसका असर देखा जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर तेल की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों में राहत मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले अमेरिका की तरफ से ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई जा रही थी। ऐसे में अचानक बातचीत और समझौते की खबरों ने राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम या संवर्धित यूरेनियम का सीधा जिक्र नहीं किया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान ने शनिवार को कहा कि वह अमेरिका के साथ तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने के लिए एक </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">पर काम कर रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया की नजर इस संभावित समझौते पर है। अगर बातचीत सफल रहती है तो मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे तनाव में कुछ राहत मिल सकती है। आने वाले दिनों में इस पर आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:05:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट में गुजरात का मालवाहक जहाज डूबा, 14 क्रू सुरक्षित बचाए गए</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट के पास गुजरात का मालवाहक जहाज डूब गया। ओमान कोस्टगार्ड ने 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचाया। हादसे की जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/gujarat-cargo-ship-sinks-in-hormuz-strait-14-crew-rescued/article-53344"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t145622.540.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज स्ट्रेट में ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते एक बार फिर समुद्री हलचल बढ़ गई है। बुधवार तड़के</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओमान के तट के पास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात का एक मालवाहक जहाज हादसे का शिकार हो गया और कुछ समय बाद डूब गया। </span>‘MSV <span lang="hi" xml:lang="hi">हाजी अली</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम का ये जहाज 13 मई की सुबह बेरबेरा पोर्ट से शारजाह की तरफ जा रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी समुद्री क्षेत्र में अचानक एक बड़ा हादसा हुआ। इस घटना के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ गई हैं। गुजरात का जहाज डूबने की खबर आते ही समुद्री सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहाज के मालिक और द्वारका के निवासी सुलतान अहमद अंसार ने बताया कि हादसा सुबह करीब 3:30 बजे हुआ। उन्होंने कहा कि जब जहाज ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस समय अचानक किसी विस्फोट जैसी तेज आवाज सुनाई दी। कुछ क्रू मेंबर्स ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे कोई ड्रोन या मिसाइल जैसी चीज जहाज से टकराई। इसके बाद जहाज में आग लग गई और हालात तेजी से बिगड़ गए। आग फैलने पर क्रू मेंबर्स के पास ज्यादा समय नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सभी ने झटपट लाइफ बोट की मदद से जहाज छोड़ दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ओमान कोस्टगार्ड ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और जहाज पर मौजूद सभी 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई मौत तो नहीं हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कई लोग हादसे के बाद सदमे में हैं। समुद्री क्षेत्र में मौजूद अन्य जहाजों को भी अलर्ट कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हादसे की असली वजह अभी साफ नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह जांच की जा रही है कि क्या ये तकनीकी खराबी थी या फिर किसी बाहरी हमले का नतीजा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इससे पहले भी इसी इलाके में गुजरात से जुड़े एक अन्य मालवाहक जहाज पर हमले की खबर आई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच चल रहे तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट पहले से ही संवेदनशील माना जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब लगातार आ रही घटनाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में किसी भी छोटे हादसे का असर वैश्विक तेल और व्यापार आपूर्ति पर पड़ सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई देशों ने अपने समुद्री मार्गों को लेकर अलर्ट जारी किया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार ने भी ये कहा है कि व्यापारिक जहाजों पर किसी भी हमले को स्वीकार नहीं किया जाएगा और ओमान प्रशासन के बचाव प्रयासों की सराहना की गई है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे मामले की जांच चल रही है और ये अभी साफ नहीं है कि हादसा किसी बाहरी हमले का नतीजा था या तकनीकी कारणों से जहाज में आग लगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:39:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी हमला, ईरान के 2 तेल टैंकर रोके, रातभर चली गोलीबारी</title>
                                    <description><![CDATA[स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका ने ईरान के दो टैंकरों पर कार्रवाई की। गोलीबारी और मिसाइल हमलों के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attack-in-strait-of-hormuz-stopped-2-oil-tankers/article-53011"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t174941.204.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के दो तेल टैंकरों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्क्रिय करने का दावा किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाके में पूरी रात तनाव बना रहा और दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष की आशंका फिर तेज हो गई है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया है कि उसके ऊपर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। हालांकि इन दावों को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के ये टैंकर अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने पहले कुछ सैन्य जहाजों पर संभावित हमले को रोका और उसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज के आसपास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ देर बाद दो तेल टैंकरों पर ऑपरेशन किया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक टैंकरों को पूरी तरह डुबोया नहीं गया लेकिन उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इलाके में मौजूद कई जहाजों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और समुद्री रास्तों की निगरानी बढ़ा दी गई है। हालात ऐसे हैं कि वैश्विक बाजार भी एक बार फिर दबाव में दिखाई दे रहे हैं क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बेहद अहम रास्ता माना जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दरअसल 28 फरवरी के बाद से यह जलमार्ग लगातार विवाद के केंद्र में बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद ईरान ने इस क्षेत्र में आवाजाही को सीमित कर दिया था। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और कई देशों की चिंता बढ़ गई। अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता भी बेनतीजा खत्म हुई थी। उसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती गईं। अब ताजा हमले के बाद स्थिति और संवेदनशील मानी जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अगर अमेरिकी हितों को चुनौती दी गई तो जवाब दिया जाएगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई को उकसाने वाला कदम बताया है और इसे संघर्षविराम का उल्लंघन करार दिया है। इस बीच शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान दोनों देशों के संपर्क में है और तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:54:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज खोलने पर बढ़ी उम्मीद, ईरान-अमेरिका में 30 दिन के समझौते की चर्चा तेज</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच 30 दिन के अस्थायी समझौते पर बातचीत तेज हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को लेकर उम्मीद बढ़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/hopes-increased-on-opening-of-hormuz-discussion-on-30-day/article-52922"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t145257.493.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अब हालात कुछ नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है और सबसे ज्यादा चर्चा </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को दोबारा खोलने को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि शुरुआती स्तर पर ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें करीब 30 दिनों तक सैन्य गतिविधियां रोकने और समुद्री व्यापार को सामान्य करने की कोशिश होगी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बनी चिंता के बाद यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में गिना जाता है और यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। ऐसे में अगर यह रास्ता पूरी तरह खुलता है तो तेल कारोबार और शिपिंग सेक्टर को राहत मिल सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह समझौता अभी ड्राफ्ट स्तर पर है और कई शर्तों पर सहमति बनना बाकी है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान पहले अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट भरोसा दे। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका की मांग है कि ईरान उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का भंडार खत्म करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ परमाणु केंद्रों को बंद करे और लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन रोक दे। दूसरी तरफ तेहरान ने इसका वैकल्पिक प्रस्ताव दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका देश कुछ यूरेनियम को कम संवर्धित स्तर पर लाने और बाकी हिस्से को किसी तीसरे देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संभवतः रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">को सौंपने पर विचार कर सकता है। हालांकि ईरान अपने सभी परमाणु केंद्र बंद करने के पक्ष में फिलहाल नजर नहीं आ रहा। यही वजह है कि बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद कई मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा नजर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">पर टिकी हुई है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित अंतरिम समझौते में ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी पाबंदियों में ढील देने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सामान्य करने और संघर्ष विराम लागू करने जैसे बिंदु शामिल हैं। हालात पिछले कुछ हफ्तों में अचानक बिगड़ गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी और तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई। अब अगर 30 दिनों के लिए सैन्य कार्रवाई रुकती है तो इसे दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की शुरुआत माना जा सकता है। हालांकि जानकार यह भी कह रहे हैं कि यह कोई स्थायी समाधान नहीं होगा। बड़े मुद्दों पर अभी लंबी बातचीत बाकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें आर्थिक प्रतिबंधों में राहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियों की वापसी और परमाणु कार्यक्रम का भविष्य शामिल है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:08:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ट्रंप की चेतावनी, बोले- सीजफायर टूटा तो दिखेगा बड़ा धमाका</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-अमेरिका तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर पर बड़ा बयान दिया। होर्मुज के पास सैन्य झड़पों के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/amidst-iran-america-tension-trump-warns-if-ceasefire-is-broken-big/article-52921"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t144038.308.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच घोषित सीजफायर अभी भी लागू है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास सैन्य गतिविधियां और झड़पें लगातार बढ़ी हैं। वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने काफी आक्रामक अंदाज में कहा कि अगर यह सीजफायर टूटा तो दुनिया को उसका असर तुरंत दिखाई देगा। उन्होंने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">आपको यह जानने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि सीजफायर खत्म हुआ या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस ईरान की तरफ उठती हुई रोशनी देख लेंगे।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अमेरिका अब ईरान को लेकर पहले से ज्यादा सख्त रुख में दिखाई दे रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CENTCOM <span lang="hi" xml:lang="hi">के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस ट्रक्सटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूएसएस राफेल पेराल्टा और यूएसएस मेसन ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी उन पर मिसाइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रोन और छोटी नावों के जरिए हमला किया गया। हालांकि अमेरिकी सेना ने दावा किया कि सभी हमलों को बीच रास्ते में ही नाकाम कर दिया गया और किसी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार जवाबी कार्रवाई में ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर इन हमलों में हो रहा था। देर रात तक अमेरिकी रक्षा विभाग की तरफ से लगातार अपडेट जारी किए जाते रहे। इलाके में तनाव काफी ज्यादा बताया जा रहा है और समुद्री रास्तों पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई पोस्ट किए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी ताकत</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">से जवाब दिया और ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। ट्रंप ने लिखा कि कई छोटी नावें तबाह हुईं और मिसाइलों व ड्रोन को अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही खत्म कर दिया। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ समझौते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">डील हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं भी हो सकती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये किसी भी दिन तय हो सकता है</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रंप ने कहा। हालांकि उनके बयान में सख्ती ज्यादा दिखाई दी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेल संकट के बीच बड़ी डील, होर्मुज मार्ग खोलने पर राजी हुए अमेरिका-ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सहमति बनने की खबर, फंसे जहाजों को जल्द मिल सकती है निकलने की अनुमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-iran-agree-to-open-hormuz-passage-in-big-deal-amid/article-52854"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t154500.443.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच अब राहत की खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम सहमति बनी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी में धीरे-धीरे ढील दी जाएगी और बदले में ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलने पर राजी हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आने वाले कुछ घंटों में वहां फंसे कई व्यापारिक जहाजों को निकलने की अनुमति मिल सकती है। पिछले कुछ दिनों से इस समुद्री मार्ग पर हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए थे और दुनिया भर की नजरें इसी इलाके पर टिकी थीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरबी मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच बैकचैनल बातचीत लगातार चल रही थी। बताया जा रहा है कि गुरुवार देर रात तक कई दौर की बातचीत के बाद स्थिति नरम पड़नी शुरू हुई। अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इसके बाद दुनिया के कई देशों की तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने लगी थी। हालात ऐसे हो गए थे कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदल दिए थे जबकि कुछ जहाज इसी मार्ग में फंस गए थे। समुद्री व्यापार से जुड़े विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे थे कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो एशिया और यूरोप के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा। शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ने इलाके में अपनी निगरानी बढ़ा दी थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान ने भी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी थीं। इसी बीच अमेरिकी लड़ाकू विमान द्वारा ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाने की खबर ने तनाव को और बढ़ा दिया था। बताया गया कि हमले में टैंकर के रडर हिस्से को नुकसान पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जहाज की दिशा नियंत्रित करने में दिक्कत आई। हालांकि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी काफी तेज हो गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौता नहीं होने की स्थिति में ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की बात कही गई थी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब जो संकेत सामने आ रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनसे माना जा रहा है कि फिलहाल टकराव टालने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा वक्त लग सकता है क्योंकि सुरक्षा जांच और जहाजों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं। तेल कारोबारियों और शिपिंग कंपनियों को उम्मीद है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि अभी तक अमेरिका और ईरान की ओर से इस समझौते को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में दुनिया फिलहाल अगले कुछ घंटों का इंतजार कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने ईरान को भेजा नया प्रस्ताव, ट्रंप बोले- समझौता नहीं हुआ तो फिर होगी बमबारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने का नया प्रस्ताव भेजा है। ट्रंप की चेतावनी के बीच परमाणु कार्यक्रम पर समझौता अब भी अटका हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-sent-a-new-proposal-to-iran-trump-said/article-52857"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t161820.521.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच करीब दो महीने से जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने तेहरान को युद्ध खत्म करने के लिए नया प्रस्ताव भेजा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी समीक्षा फिलहाल ईरान कर रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा खोलने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को कम करने जैसे बिंदु शामिल हैं। हालांकि मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। तेहरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह जल्दबाजी में किसी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा। इसी बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर फिर चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू हो सकती है। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में बेचैनी फिर बढ़ गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गुरुवार सुबह से ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय के लिए स्थिर हुईं और निवेशकों में उम्मीद जगी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य खुलता है तो तेल सप्लाई सामान्य हो सकती है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ हफ्तों में पर्सियन गल्फ से गुजरने वाले कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। बुधवार देर रात अमेरिकी सेना और एक ईरानी तेल टैंकर के बीच ओमान की खाड़ी में तनाव की खबर भी सामने आई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद कार्रवाई की गई। हालांकि ईरान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। हालात इतने तनावपूर्ण रहे कि कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अस्थायी रूप से अपने रूट बदल दिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे युद्ध की सबसे बड़ी उलझन अब भी ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। वॉशिंगटन चाहता है कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन सीमित करे और परमाणु हथियारों की दिशा में कोई कदम न बढ़ाए। दूसरी तरफ ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच असली पेच यहीं फंसा है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि किसी भी समझौते में परमाणु गतिविधियों पर सख्त निगरानी शामिल हो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान अपने कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। हालांकि अब यह भी कहा जा रहा है कि दोनों देश फिलहाल इस मुद्दे को अलग रखकर बाकी बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश कर सकते हैं ताकि युद्ध जैसी स्थिति खत्म हो सके। बाद में परमाणु वार्ता के लिए अलग दौर की बातचीत कराई जा सकती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस संघर्ष की शुरुआत फरवरी के आखिर में हुई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले शुरू किए। उसी दौरान ईरान के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा नुकसान पहुंचा और इसके बाद तेहरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हालात तेजी से बिगड़े और होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर पड़ने लगा। अप्रैल में संघर्षविराम की कोशिश हुई थी लेकिन बीच-बीच में दोनों पक्षों की तरफ से आरोप लगते रहे कि सीजफायर का उल्लंघन हुआ। पाकिस्तान की मध्यस्थता में भी बातचीत कराने की कोशिश हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर वह सफल नहीं हो पाई। अब ट्रंप प्रशासन दावा कर रहा है कि समझौता करीब है और एक छोटे मेमोरैंडम पर सहमति बन सकती है। लेकिन तेहरान अभी पूरी तरह भरोसा करने की स्थिति में नहीं दिख रहा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:17 +0530</pubDate>
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