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                <title>MiddleEastNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ईरान को 28 लाख करोड़ रुपए के फंड का प्रस्ताव, परमाणु समझौते पर नए दावे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम समझौते की चर्चा तेज, ट्रम्प ने परमाणु कार्यक्रम पर सहमति का दावा किया, तेहरान ने किया खंडन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/fund-proposal-of-rs-28-lakh-crore-to-iran-new/article-54559"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-reconstruction-fund.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक पहल की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के बीच प्रस्तावित 60 दिन के युद्धविराम समझौते में ईरान को 300 अरब डॉलर यानी करीब 28.5 लाख करोड़ रुपए के पुनर्निर्माण फंड का प्रस्ताव दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस आर्थिक पैकेज के तहत अमेरिकी कंपनियों को भी ईरान में निवेश की अनुमति मिल सकती है। हालांकि समझौते को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आई जानकारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के अनुसार यह प्रस्ताव उस व्यापक समझौते का हिस्सा माना जा रहा है, जिस पर पिछले कुछ समय से विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है। एक ईरानी अधिकारी ने इसे रीकंस्ट्रक्शन प्रोग्राम बताते हुए कहा कि यदि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं तो ईरान को आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए बड़ी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। वर्षों से प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और सैन्य टकरावों का सामना कर रहे ईरान के लिए यह फंड बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं। ट्रम्प के अनुसार संभावित समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और उसके संवर्धित यूरेनियम को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समझौता सफल होता है तो अमेरिका कुछ आर्थिक और समुद्री प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि ट्रम्प के इन दावों को ईरान ने तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने स्पष्ट कहा कि परमाणु मुद्दे पर इस समय किसी तरह की बातचीत नहीं चल रही है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जो बातें सामने आ रही हैं, वे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। इसके अलावा ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी सूत्रों के हवाले से बताया कि समझौते के किसी मसौदे में परमाणु सामग्री को नष्ट करने जैसी कोई शर्त शामिल नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह विरोधाभास दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक बयानों और बंद कमरे में चल रही वार्ताओं के बीच अंतर होना असामान्य नहीं है। अक्सर ऐसे संवेदनशील समझौतों में अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग संदेश देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रम्प ने कहा कि संभावित समझौते के बाद इस क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जा सकती है और जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त टोल नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान की किसी टोल व्यवस्था का समर्थन किया तो संबंधित देशों, कंपनियों और व्यक्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका के प्रति अविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि तेहरान केवल बयानों पर नहीं बल्कि वास्तविक कार्रवाई पर भरोसा करता है। उनके अनुसार जब तक अमेरिका अपने व्यवहार में ठोस बदलाव नहीं दिखाता, तब तक ईरान भी किसी प्रकार की रियायत देने के पक्ष में नहीं है। यह बयान दोनों देशों के बीच मौजूद गहरे अविश्वास को दर्शाता है, जो वर्षों से विभिन्न विवादों के कारण बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में 24 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई। ईरान का कहना है कि समुद्री यातायात को नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा रहा है। हालांकि पश्चिमी देशों की ओर से लगातार इस क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।</p>
<p>क्षेत्रीय हालात को और जटिल बनाते हुए इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में नई चेतावनी जारी की है। इजराइली सेना का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ संभावित अभियान की तैयारी कर रही है और नागरिकों को सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान में सत्ता संकट गहराया: खामेनेई के देश छोड़ने की अटकलें, रूस जाने की तैयारी का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार आठ दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच खुफिया रिपोर्ट का दावा, हालात बिगड़े तो बेटे और करीबी लोगों के साथ तेहरान छोड़ सकते हैं ईरानी सुप्रीम लीडर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/695cbf66e7acf/article-42189"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/videsh-(15).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। एक खुफिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि यदि हालात काबू में नहीं आए, तो खामेनेई देश छोड़कर रूस जा सकते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब ईरान लगातार आठ दिनों से गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार को मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई अपने बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई सहित लगभग 20 लोगों के छोटे समूह के साथ ईरान से बाहर जाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। बताया गया है कि यह योजना आपात स्थिति के लिए तैयार की गई है और इसके तहत विदेशों में संपत्ति और वित्तीय संसाधनों को पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को राजधानी तेहरान से हुई थी, जहां व्यापारियों ने गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज उठाई। धीरे-धीरे यह आंदोलन देश के 78 से अधिक शहरों में फैल गया। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें कम से कम 35 लोगों की मौत और 1200 से अधिक की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनों की मुख्य वजह आर्थिक संकट मानी जा रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ 1.45 मिलियन प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गई। महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर पर है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 70 प्रतिशत से अधिक और दवाओं में करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसके साथ ही 2026 के बजट में प्रस्तावित 62 प्रतिशत कर वृद्धि ने जनाक्रोश को और हवा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। ईरान की सरकारी एजेंसियों का दावा है कि हिंसा में सैकड़ों सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, भारत सरकार ने भी स्थिति को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान की गैर जरूरी यात्रा से बचने और वहां रह रहे भारतीयों से दूतावास में पंजीकरण कराने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">खामेनेई पिछले 35 वर्षों से ईरान की सर्वोच्च सत्ता में हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से देश की राजनीति और नीति निर्धारण में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। मौजूदा घटनाक्रम को विशेषज्ञ ईरान के लिए अब तक का सबसे गंभीर आंतरिक संकट मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह आंदोलन सत्ता में बदलाव की दिशा में बढ़ता है या सरकार हालात पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर पाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">-----------------------------------</p>
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<p> </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 13:54:53 +0530</pubDate>
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