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                <title>Tennis News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Tennis News RSS Feed</description>
                
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                <title>19 साल बाद विंबलडन फाइनल में एक ही देश की दो खिलाड़ी आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[चेक गणराज्य की कारोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा ने सेमीफाइनल जीतकर रचा इतिहास। चोटों से जूझकर लौटी मुचोवा पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी से सिर्फ एक कदम दूर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/after-19-years-two-players-from-the-same-country-face/article-58395"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/wimbledon-2026-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप 2026 का महिला एकल वर्ग इस बार इतिहास रचने जा रहा है। प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार चेक गणराज्य की दो खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। कारोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर खिताबी मुकाबले में जगह बना ली है। दोनों खिलाड़ियों के बीच यह बहुप्रतीक्षित फाइनल 11 जुलाई को लंदन के प्रतिष्ठित सेंटर कोर्ट पर खेला जाएगा। इस मुकाबले ने न केवल चेक गणराज्य के टेनिस प्रेमियों में उत्साह बढ़ाया है, बल्कि पूरे टेनिस जगत का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विंबलडन के इतिहास में 19 साल बाद ऐसा मौका आया है, जब किसी एक ही देश की दो महिला खिलाड़ी फाइनल में आमने-सामने होंगी। इससे पहले वर्ष 2009 में अमेरिका की दिग्गज विलियम्स बहनों, सेरेना विलियम्स और वीनस विलियम्स, के बीच खिताबी मुकाबला खेला गया था। अब चेक गणराज्य की दो प्रतिभाशाली खिलाड़ी इस ऐतिहासिक सूची में अपना नाम दर्ज कराने जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले सेमीफाइनल में अनुभवी खिलाड़ी कारोलिना मुचोवा ने अमेरिका की सातवीं वरीयता प्राप्त स्टार कोको गॉफ को रोमांचक मुकाबले में 6-2, 1-6, 7-6 (12-10) से हराया। यह मुकाबला लगभग पूरे समय रोमांच से भरपूर रहा और दोनों खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। पहले सेट में मुचोवा ने आक्रामक शुरुआत करते हुए गॉफ की कमजोर सर्विस का फायदा उठाया और आसानी से बढ़त बना ली। हालांकि दूसरे सेट में कोको गॉफ ने दमदार वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्णायक तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। टाई-ब्रेकर में स्कोर 8-8 की बराबरी पर पहुंच चुका था। इसी दौरान सर्विस में देरी होने के कारण मुचोवा को टाइम वॉयलेशन की चेतावनी मिली। अगले अंक पर उनका फोरहैंड शॉट बाहर चला गया और कोको गॉफ को मैच पॉइंट मिल गया। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला गॉफ के पक्ष में जा सकता है, लेकिन दबाव के क्षण में गॉफ नेट पर ड्रॉप शॉट लगाने से चूक गईं। मुचोवा ने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया और लगातार दो महत्वपूर्ण अंक जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जीत के बाद मुचोवा काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि विंबलडन फाइनल में पहुंचना उनके करियर का सबसे खास पल है। उनके अनुसार मुकाबला बेहद कठिन था और पूरे मैच के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि कोर्ट पर सोचने का समय नहीं था और आखिरी अंक तक मुकाबला तनाव से भरा रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">कारोलिना मुचोवा की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उनका करियर लंबे समय तक चोटों से प्रभावित रहा है। पिछले कुछ वर्षों में वह कलाई, पीठ, पेट, जांघ, टखने और पैर की गंभीर चोटों से जूझती रही हैं। वर्ष 2022 में डॉक्टरों ने उन्हें पेशेवर टेनिस छोड़ने तक की सलाह दे दी थी। इसके बाद उनकी दाईं कलाई की दो बार सर्जरी हुई और उन्हें लगभग दस महीने तक कोर्ट से दूर रहना पड़ा। कठिन संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद उन्होंने शानदार वापसी की है और अब वह अपने पहले ग्रैंड स्लैम खिताब से सिर्फ एक जीत दूर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की युवा खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा ने यूक्रेन की मार्ता कोस्त्युक को सीधे सेटों में 6-4, 6-4 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई। नोस्कोवा ने पूरे मुकाबले में संयमित और आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया। उन्होंने अपनी सर्विस पर शानदार नियंत्रण बनाए रखा और महत्वपूर्ण मौकों पर विपक्षी खिलाड़ी की गलतियों का पूरा लाभ उठाया। महज कम उम्र में नोस्कोवा का यह प्रदर्शन उन्हें भविष्य की बड़ी स्टार खिलाड़ियों की सूची में शामिल करता है। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन खेल दिखाया है और अब वह अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 15:08:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>विंबलडन में आर्थर फेरी का बड़ा उलटफेर: वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी ने सेमीफाइनल में बनाई ऐतिहासिक जगह</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन के 23 वर्षीय आर्थर फेरी ने नौवीं वरीयता प्राप्त फ्लावियो कोबोली को सीधे सेटों में हराया, अब सेमीफाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगी टक्कर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/arthur-ferrys-big-upset-in-wimbledon-wild-card-player-made/article-58300"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/arthur-fery.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">विंबलडन 2026 में ब्रिटेन के युवा टेनिस खिलाड़ी आर्थर फेरी ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी उम्मीद टूर्नामेंट शुरू होने से पहले शायद ही किसी ने की होगी। दुनिया के 114वें नंबर के खिलाड़ी और वाइल्ड कार्ड एंट्री पाने वाले 23 वर्षीय आर्थर फेरी ने पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल में इटली के नौवीं वरीयता प्राप्त फ्लावियो कोबोली को सीधे सेटों में हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में जगह बना ली। सेंटर कोर्ट पर खेला गया यह मुकाबला फेरी के आत्मविश्वास, आक्रामक खेल और शानदार रणनीति का बेहतरीन उदाहरण रहा। फेरी ने मुकाबला 6-4, 7-6 (7-4), 6-0 से अपने नाम किया। तीनों सेटों में उन्होंने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने दर्शकों को भी प्रभावित किया। खास बात यह रही कि तीसरे सेट में उन्होंने कोबोली को कोई भी गेम जीतने का मौका नहीं दिया और 6-0 से मुकाबला खत्म कर दिया। यह जीत उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस जीत के साथ आर्थर फेरी विंबलडन के इतिहास में पुरुष एकल सेमीफाइनल तक पहुंचने वाले केवल दूसरे वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले वर्ष 2001 में क्रोएशिया के गोरान इवानिसेविच ने यह उपलब्धि हासिल की थी। इवानिसेविच ने उसी साल विंबलडन का खिताब भी अपने नाम किया था। अब फेरी के सामने भी इतिहास दोहराने का मौका होगा। मैच की शुरुआत से ही फेरी ने आक्रामक अंदाज अपनाया। पहले सेट में उन्होंने अपनी सर्विस गेम पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा और सही समय पर ब्रेक हासिल कर 6-4 से बढ़त बना ली। दूसरे सेट में कोबोली ने वापसी की कोशिश की और मुकाबला टाई-ब्रेक तक पहुंचा, लेकिन निर्णायक क्षणों में फेरी ने शानदार संयम दिखाया और टाई-ब्रेक 7-4 से जीतकर मैच पर मजबूत पकड़ बना ली। तीसरे सेट में फेरी पूरी तरह हावी रहे। उन्होंने लगातार दबाव बनाकर कोबोली को कोई मौका नहीं दिया। इटली के खिलाड़ी कई बार गलतियां करते नजर आए, जबकि फेरी हर अंक के लिए पूरी ऊर्जा के साथ खेलते रहे। अंततः उन्होंने 6-0 से सेट जीतकर मुकाबला समाप्त किया और जीत के साथ सेंटर कोर्ट पर दर्शकों की जोरदार तालियां बटोरीं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फेरी के करियर का पहला ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल भी था और उन्होंने अपने पहले ही क्वार्टर फाइनल मुकाबले को जीतकर सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया। इस प्रदर्शन ने उन्हें ब्रिटिश टेनिस के नए सितारे के रूप में स्थापित कर दिया है। दिलचस्प बात यह भी है कि वर्ष 2026 में यह दूसरी बार है जब आर्थर फेरी ने फ्लावियो कोबोली को किसी ग्रैंड स्लैम में हराया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलियन ओपन के पहले दौर में भी उन्होंने कोबोली को 7-6, 6-4, 6-1 से हराया था। हालांकि फ्रेंच ओपन में दोनों खिलाड़ियों की भिड़ंत नहीं हुई थी। उस टूर्नामेंट में कोबोली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया था, जहां उन्हें अलेक्जेंडर ज्वेरेव के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।</p>
<p style="text-align:justify;">अब विंबलडन के सेमीफाइनल में आर्थर फेरी का सामना दूसरी वरीयता प्राप्त और मौजूदा फ्रेंच ओपन चैंपियन अलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगा। ज्वेरेव इस समय शानदार फॉर्म में हैं और खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। ऐसे में फेरी के लिए यह मुकाबला आसान नहीं होगा, लेकिन जिस आत्मविश्वास के साथ उन्होंने अब तक खेल दिखाया है, उससे यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। आर्थर फेरी की इस उपलब्धि ने ब्रिटिश टेनिस प्रेमियों को भी उत्साहित कर दिया है। ओपन एरा में वह विंबलडन पुरुष एकल के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पांचवें ब्रिटिश खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले एंडी मरे, टिम हेनमैन, रोजर टेलर और कैमरून नॉरी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। एंडी मरे सात बार, टिम हेनमैन चार बार, रोजर टेलर दो बार और कैमरून नॉरी एक बार सेमीफाइनल तक पहुंचे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन में लंबे समय से ऐसे युवा खिलाड़ी की तलाश थी जो भविष्य में बड़े टूर्नामेंटों में देश का प्रतिनिधित्व कर सके। आर्थर फेरी ने अपने खेल से यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में वह विश्व टेनिस के बड़े खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। मैच के बाद फेरी अपनी भावनाएं छिपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि वह विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं। उनके अनुसार हर मुकाबले के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने केवल एक-एक मैच पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि क्वार्टर फाइनल से पहले वह काफी घबराए हुए थे, लेकिन कोर्ट पर उतरने के बाद उन्होंने खुद को शांत रखा और अपनी रणनीति पर अमल किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>21 साल की एलेक्जेंड्रा ईला ने विंबलडन में रचा इतिहास, डिफेंडिंग चैंपियन इगा स्वियातेक को हराकर पहुंचीं प्री-क्वार्टर फाइनल</title>
                                    <description><![CDATA[तीन साल पहले स्वियातेक से मिला था ‘100% देने’ का संदेश, अब उसी खिलाड़ी को हराकर फिलीपींस की पहली ग्रैंड स्लैम प्री-क्वार्टर फाइनलिस्ट बनीं एलेक्जेंड्रा ईला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/21-year-old-alexandra-ila-created-history-in-wimbledon-by/article-57929"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/alexandra-eala.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">विंबलडन 2026 में शनिवार को महिला एकल वर्ग में ऐसा बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जिसने टेनिस जगत को चौंका दिया। फिलीपींस की 21 वर्षीय युवा खिलाड़ी एलेक्जेंड्रा ईला ने सेंटर कोर्ट पर मौजूदा चैंपियन और दुनिया की तीसरी वरीयता प्राप्त इगा स्वियातेक को सीधे सेटों में 7-6 (9), 6-2 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ईला किसी भी ग्रैंड स्लैम के महिला एकल प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली फिलीपींस की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैच खत्म होते ही एलेक्जेंड्रा ईला भावुक हो गईं। जीत का अंतिम अंक हासिल करते ही उनके हाथ से रैकेट छूट गया और वह कोर्ट पर घुटनों के बल बैठ गईं। उनकी आंखों में खुशी के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे। यह जीत उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुकाबले की सबसे खास बात यह रही कि तीन वर्ष पहले यही इगा स्वियातेक एलेक्जेंड्रा ईला को प्रेरित कर रही थीं। फ्रेंच ओपन जीतने के बाद स्वियातेक राफेल नडाल अकादमी पहुंची थीं, जहां ईला अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थीं। ग्रेजुएशन समारोह में स्वियातेक ने ईला को डिप्लोमा सौंपा था और अपने संबोधन में कहा था, "जो भी करना, उसमें अपना 100 प्रतिशत देना।"</p>
<p style="text-align:justify;">तीन साल बाद वही छात्रा अपने आदर्श को विंबलडन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर हराकर नई कहानी लिख चुकी है। यह पल खेल जगत के सबसे प्रेरणादायक क्षणों में से एक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैच जीतने के बाद एलेक्जेंड्रा ईला ने कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे फिलीपींस की है। उन्होंने कहा कि बचपन से उनके देश के लोगों ने उनका समर्थन किया और वही उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। ईला ने अपनी जीत अपने परिवार और उन सभी छोटी लड़कियों को समर्पित की, जो बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं। उन्होंने कहा कि बचपन में वह स्कूल के बाद रफल्ड मोजे और चमकने वाले जूते पहनकर अभ्यास के लिए जाती थीं। आज का दिन उसी संघर्ष का परिणाम है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस में टेनिस के लिए पर्याप्त ग्रास कोर्ट उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में एलेक्जेंड्रा ईला ने बास्केटबॉल कोर्ट पर अभ्यास किया। उन्होंने बताया कि कोर्ट के पीछे लगे बास्केटबॉल हूप्स की वजह से वह ज्यादा पीछे नहीं जा सकती थीं, क्योंकि टकराने का डर रहता था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत की और आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता हासिल कर ली। उनकी यह यात्रा युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दो घंटे 15 मिनट तक चले मुकाबले में ईला ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास भरा खेल दिखाया। पहला सेट बेहद रोमांचक रहा और टाईब्रेक तक पहुंचा। इस दौरान उन्होंने दो सेट प्वाइंट बचाए और 7-6 (9) से बढ़त बना ली। दूसरे सेट में ईला ने आक्रामक रणनीति अपनाई और स्वियातेक को वापसी का कोई अवसर नहीं दिया। दमदार सर्विस, सटीक ग्राउंड स्ट्रोक और बेहतरीन कोर्ट कवरेज की बदौलत उन्होंने दूसरा सेट 6-2 से जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहला मौका नहीं है जब एलेक्जेंड्रा ईला ने इगा स्वियातेक को हराया हो। इससे पहले भी वह पिछले वर्ष मियामी ओपन में स्वियातेक को मात दे चुकी हैं। लगातार दूसरी जीत ने साबित कर दिया कि ईला अब केवल उभरती हुई खिलाड़ी नहीं, बल्कि बड़ी प्रतियोगिताओं में शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देने वाली मजबूत दावेदार बन चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हार के बाद इगा स्वियातेक ने ईला के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मौकों पर एलेक्जेंड्रा ने उनसे बेहतर खेल दिखाया और जीत की पूरी हकदार रहीं। पिछले वर्ष विंबलडन का खिताब जीतने वाली स्वियातेक इस बार अपने खिताब का बचाव नहीं कर सकीं। इसके साथ ही 2016 में सेरेना विलियम्स के बाद लगातार दो बार महिला एकल विंबलडन जीतने वाली खिलाड़ी का इंतजार भी जारी रहेगा। इस ऐतिहासिक जीत के बाद एलेक्जेंड्रा ईला अब प्री-क्वार्टर फाइनल में 13वीं वरीयता प्राप्त जैस्मिन पाओलिनी का सामना करेंगी। शानदार फॉर्म में चल रही ईला से अब फिलीपींस के खेल प्रेमियों को नई उम्मीदें हैं। यदि वह इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखती हैं, तो विंबलडन में और भी बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:43:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>खेल जगत के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची जारी, स्मृति मंधाना से लेकर लेब्रन जेम्स तक शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[टाइम मैगजीन की पहली स्पोर्ट्स पावर लिस्ट में दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को जगह, खेल के साथ समाज, संस्कृति और कारोबार पर भी दिख रहा असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/list-of-100-influential-people-of-sports-world-released-from/article-55646"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/time-100-sports.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुनिया भर में खेल केवल जीत और हार तक सीमित नहीं रह गया है। आज खिलाड़ी मैदान के बाहर भी समाज, संस्कृति, शिक्षा, कारोबार और लोगों की सोच को प्रभावित कर रहे हैं। इसी बदलती तस्वीर को सामने लाने के लिए टाइम मैगजीन ने पहली बार खेल जगत की 100 सबसे प्रभावशाली हस्तियों की सूची जारी की है। इस सूची में ऐसे खिलाड़ियों, कोचों और खेल से जुड़े व्यक्तित्वों को शामिल किया गया है जिन्होंने अपने प्रदर्शन के साथ-साथ समाज पर भी गहरी छाप छोड़ी है। सूची में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना, बास्केटबॉल के महान खिलाड़ी लेब्रन जेम्स, फुटबॉल सुपरस्टार लियोनेल मेसी, स्पेनिश टेनिस खिलाड़ी कार्लोस अल्कारेज और नॉर्वे के स्ट्राइकर अर्लिंग हालेंड जैसे बड़े नाम शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस सूची का सबसे खास पहलू यह है कि इसमें केवल खेल उपलब्धियों को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि यह भी देखा गया कि खिलाड़ी अपने प्रभाव का उपयोग समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए किस तरह कर रहे हैं। टाइम मैगजीन के अनुसार आज कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो खेल की सीमाओं से आगे बढ़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी स्मृति मंधाना का नाम इस सूची में शामिल होना देश के लिए गौरव की बात माना जा रहा है। बाएं हाथ की सलामी बल्लेबाज स्मृति लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं और महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने घरेलू वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रचा। इसके अलावा तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनने का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है। स्मृति के खाते में 17 अंतरराष्ट्रीय शतक हैं और वह एक वर्ष में एक हजार से अधिक वनडे रन बनाने वाली पहली महिला खिलाड़ी भी बन चुकी हैं। उनकी कप्तानी और नेतृत्व क्षमता का असर भी देखने को मिला जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने महिला प्रीमियर लीग में खिताब अपने नाम किया। महिला क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने में उनका योगदान लगातार चर्चा में रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सूची के कवर पेज पर जगह पाने वाले लेब्रन जेम्स का प्रभाव खेल जगत से कहीं आगे तक फैला हुआ है। 41 वर्ष की उम्र में भी वह दुनिया के सबसे चर्चित बास्केटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने एनबीए में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं और चार बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। लेकिन उनकी पहचान केवल एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है। लेब्रन शिक्षा और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके द्वारा शुरू किया गया ‘आई प्रॉमिस स्कूल’ उन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहा है जो स्कूल छोड़ चुके थे। सामाजिक अभियानों, निवेश और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए भी वह लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें खेल और समाज दोनों क्षेत्रों में प्रभावशाली व्यक्तित्व माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फुटबॉल की दुनिया में लियोनेल मेसी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। अर्जेंटीना को विश्व कप जिताने वाले मेसी ने 2023 में इंटर मियामी क्लब से जुड़कर अमेरिकी फुटबॉल को नई ऊर्जा दी। शुरुआत में यह माना जा रहा था कि वह अपने करियर के अंतिम दौर में अमेरिका पहुंचे हैं, लेकिन उन्होंने मैदान पर शानदार प्रदर्शन कर सभी धारणाओं को बदल दिया। लगातार गोल करने और अपनी मौजूदगी से उन्होंने मेजर लीग सॉकर की लोकप्रियता को नई ऊंचाई तक पहुंचाया।अमेरिका में फुटबॉल को लेकर जो उत्साह आज दिखाई दे रहा है, उसमें मेसी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टेनिस की नई पीढ़ी के सबसे चमकदार सितारों में शामिल कार्लोस अल्कारेज भी इस सूची का हिस्सा हैं। स्पेन के इस युवा खिलाड़ी ने कम उम्र में ही कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। अल्कारेज को उनकी तेज गति, शानदार मूवमेंट और आक्रामक खेल शैली के लिए जाना जाता है। उन्होंने कई बड़े टूर्नामेंट जीतकर खुद को भविष्य का सुपरस्टार साबित किया है। टेनिस विशेषज्ञ उन्हें राफेल नडाल और रोजर फेडरर की खूबियों का अनोखा मिश्रण मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं नॉर्वे के स्टार फुटबॉलर अर्लिंग हालेंड का नाम भी प्रभावशाली खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया गया है। अपनी गोल करने की क्षमता के कारण वह दुनिया के सबसे खतरनाक स्ट्राइकरों में गिने जाते हैं। हालेंड ने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए कई रिकॉर्ड बनाए हैं और प्रीमियर लीग में गोल्डन बूट पुरस्कार भी जीता है। खेल के अलावा मनोरंजन जगत में भी उनकी सक्रियता बढ़ रही है और जल्द ही वह एक एनिमेटेड फिल्म में अपनी आवाज देते नजर आएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 16:59:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>11 साल का इंतजार खत्म, एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जीता पहला ग्रैंड स्लैम खिताब</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रेंच ओपन 2026 के रोमांचक फाइनल में फ्लेवियो कोबोली को पांच सेटों में हराया, 89 साल बाद जर्मनी को मिला नया पुरुष चैंपियन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/11-year-wait-ends-alexander-zverev-wins-first-grand-slam/article-55334"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/alexander-zverev.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पेरिस के क्ले कोर्ट पर रविवार को इतिहास बन गया। जर्मनी के स्टार टेनिस खिलाड़ी एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने आखिरकार वह उपलब्धि हासिल कर ली जिसका इंतजार उन्हें पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से था। फ्रेंच ओपन 2026 के पुरुष एकल फाइनल में ज्वेरेव ने इटली के युवा खिलाड़ी फ्लेवियो कोबोली को हराकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया। मैच पांच सेटों तक चला और करीब पूरे मुकाबले के दौरान दर्शकों को उतार-चढ़ाव से भरपूर टेनिस देखने को मिली। जीत के बाद ज्वेरेव भावुक नजर आए और ट्रॉफी हाथ में लेते ही उनकी वर्षों की मेहनत और संघर्ष का अंत सुखद तरीके से हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी वरीयता प्राप्त ज्वेरेव ने फाइनल मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। पहले सेट में उन्होंने कोबोली को संभलने का मौका ही नहीं दिया और केवल 6-1 से सेट अपने नाम कर लिया। शुरुआती प्रदर्शन को देखकर ऐसा लग रहा था कि मुकाबला एकतरफा हो सकता है, लेकिन इटली के 24 वर्षीय खिलाड़ी ने शानदार वापसी की। दूसरे सेट में कोबोली ने अपनी रणनीति बदली और लंबी रैलियों के जरिए ज्वेरेव पर दबाव बनाया। इसका फायदा उन्हें मिला और उन्होंने दूसरा सेट 6-4 से जीतकर मैच में बराबरी कर ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। हालांकि महत्वपूर्ण मौकों पर ज्वेरेव ने अनुभव का फायदा उठाया और 6-4 से सेट जीतकर फिर बढ़त हासिल कर ली। लेकिन कोबोली हार मानने वालों में नहीं थे। चौथे सेट में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया। सेट टाई-ब्रेकर तक पहुंचा, जहां कोबोली ने दबाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7-6 (5) से जीत दर्ज की और मुकाबले को निर्णायक पांचवें सेट तक पहुंचा दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जब मैच पांचवें और अंतिम सेट में पहुंचा तो स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की धड़कनें तेज हो गईं। कई लोगों को लग रहा था कि मुकाबला किसी भी दिशा में जा सकता है। लेकिन निर्णायक सेट में ज्वेरेव पूरी तरह अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और कोबोली को कोई मौका नहीं दिया। जर्मन खिलाड़ी ने 6-1 से अंतिम सेट जीतकर मुकाबला और खिताब दोनों अपने नाम कर लिया। जीत के बाद उन्होंने कोर्ट पर ही अपनी भावनाएं जाहिर कीं और दर्शकों का अभिवादन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह जीत ज्वेरेव के लिए सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम खिताब नहीं बल्कि वर्षों के संघर्ष का परिणाम भी है। 29 वर्षीय खिलाड़ी पिछले 11 साल से ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई यादगार मुकाबले खेले, लेकिन सबसे बड़े मंच पर सफलता उनसे दूर ही रही। इससे पहले वे तीन बार ग्रैंड स्लैम फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन हर बार खिताब जीतने से चूक गए। इसके अलावा सात बार उन्हें सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। यही वजह है कि फ्रेंच ओपन 2026 की यह जीत उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस खिताबी जीत के साथ ज्वेरेव ने जर्मन टेनिस इतिहास में भी अपना नाम दर्ज करा लिया है। वे फ्रेंच ओपन जीतने वाले 89 साल बाद पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बने हैं। इससे पहले 1937 में जर्मनी के हेनर हेन्केल ने यह उपलब्धि हासिल की थी। वहीं किसी भी ग्रैंड स्लैम पुरुष एकल खिताब को जीतने वाले आखिरी जर्मन खिलाड़ी बोरिस बेकर थे, जिन्होंने 1996 में ऑस्ट्रेलियन ओपन अपने नाम किया था। ऐसे में ज्वेरेव की यह सफलता जर्मन टेनिस के लिए भी बेहद खास मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ज्वेरेव इससे पहले टोक्यो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं और एटीपी टूर पर भी कई बड़ी उपलब्धियां अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने कई मास्टर्स 1000 खिताब जीते और एटीपी फाइनल्स में भी सफलता हासिल की, लेकिन ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी की कमी हमेशा उनके करियर पर चर्चा का विषय बनी रहती थी। अब वह कमी भी पूरी हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर फ्लेवियो कोबोली भले ही खिताब जीतने से चूक गए हों, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। 24 वर्षीय इटालियन खिलाड़ी पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचे थे। उन्होंने रास्ते में कई मजबूत खिलाड़ियों को हराकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। फाइनल में भी उन्होंने ज्वेरेव को कड़ी चुनौती दी और साबित किया कि आने वाले वर्षों में वे टेनिस की दुनिया के बड़े सितारों में शामिल हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:03:35 +0530</pubDate>
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