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                <title>iran news - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ईरान का कुवैत–बहरीन में 8 अमेरिकी ठिकानों पर हमला, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[खामेनेई का अमेरिका-इजराइल पर तीखा बयान, हर हमले का जवाब देने की चेतावनी, पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/irans-attack-on-8-american-bases-in-kuwait-bahrain-increases-tension/article-57260"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-attack-kuwait-bahrain-us-bases.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े तनाव की चपेट में आता दिख रहा है। रविवार को ईरान की ओर से दावा किया गया कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की तरफ से ईरान के ठिकानों पर की गई “दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई” के जवाब में की गई है। हालांकि अभी तक अमेरिका या कुवैत और बहरीन की सरकारों की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जरूर बढ़ा दिया गया है। इन हमलों के बाद कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सैन्य गतिविधियों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने भी हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद कुछ इलाकों में हलचल और दहशत जैसा माहौल देखने को मिला, हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि मामला तेजी से बढ़ते टकराव की ओर इशारा कर रहा है।</p>
<p>ईरान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह हमला एक जवाबी कार्रवाई थी और इसका मकसद अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का प्रतिकार करना था। ईरानी सेना ने दावा किया कि यह ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसमें रणनीतिक ठिकानों को टारगेट किया गया। ईरान का यह भी कहना है कि अगर आगे भी उसकी सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला हुआ तो वह और सख्त जवाब देगा। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है और कूटनीतिक स्तर पर चिंता जताई जा रही है। इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने हालिया हमलों को लेकर जिस तरह सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं और उन पर गर्व जताया है, वह अपने आप में अपराध स्वीकार करने जैसा है। खामेनेई ने कहा कि ईरान पर हुए हर हमले, हर मौत और हर नुकसान का हिसाब लिया जाएगा और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अदालतों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनका यह बयान काफी आक्रामक माना जा रहा है और इसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। खामेनेई पहले भी अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन इस बार उनका बयान ज्यादा तीखा और सीधा माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि वह पहले हुए एक कथित अमेरिका-इजराइल हमले में घायल हुए थे, जिसके बाद से वे किसी सुरक्षित और गुप्त स्थान पर रह रहे हैं। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईरान के अंदर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक स्थिति पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्र में मौजूद सभी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। कुवैत और बहरीन में भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पश्चिम एशिया में पहले से ही कई तरह के तनाव मौजूद हैं और ऐसे में यह नया घटनाक्रम स्थिति को और जटिल बना सकता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच इस तरह के हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला बढ़ता रहा तो यह एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। पहले से ही इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष और ईरान-अमेरिका तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रखा है। ऐसे में यह नया टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी असर डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:33:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>खामेनेई का अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास, मशहद में दफन की योजना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के सुप्रीम लीडर रहे खामेनेई का अंतिम संस्कार भारी सुरक्षा और भीड़ के बीच मशहद में किए जाने की तैयारी, लगभग 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/khameneis-funeral-planned-in-mashhad-around-june-21/article-54882"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-supreme-leader-funeral.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर देशभर में व्यापक और संवेदनशील तैयारियां चल रही हैं। ईरानी अधिकारियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से मिली जानकारी के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास आयोजित किया जा सकता है। उन्हें शिया इस्लाम के पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की योजना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक बन सकता है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार की शुरुआत ईरान की राजधानी तेहरान से होगी, जहां मुख्य राजकीय समारोह आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम लगभग 24 घंटे तक चलने की संभावना है और इसमें देश के शीर्ष राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व के शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर अंतिम यात्रा के लिए मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां उन्हें दफनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">IRGC ने इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभाल ली है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष योजना बनाई गई है क्योंकि इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि देश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यह आयोजन और भी संवेदनशील हो गया है। पहले यह अंतिम संस्कार मार्च में प्रस्तावित था, लेकिन परिस्थितियों के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। तेहरान, कुम और मशहद में जनता को अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए तीन दिनों का सार्वजनिक कार्यक्रम रखा जाएगा। प्रशासन भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष रूट, बैरिकेडिंग और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि प्रशासनिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि यदि 2 करोड़ लोग अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं, तो यह 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे से भी बड़ा होगा। उस समय करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे और भीड़ इतनी अधिक थी कि भगदड़ जैसी स्थिति में कई लोगों की जान चली गई थी और हजारों घायल हुए थे। इस बार प्रशासन ऐसे किसी हादसे से बचने के लिए पहले से ही कड़े इंतजाम कर रहा है। मशहद में खामेनेई को दफनाने का निर्णय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मशहद शिया इस्लाम का प्रमुख पवित्र शहर है और यहां स्थित इमाम रजा का दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है। यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है और हर साल यहां भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। खामेनेई का यहां दफन होना उन्हें शिया धार्मिक परंपरा के ऐतिहासिक प्रतीकों से जोड़ देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस आयोजन को लेकर गहरी चर्चा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार देश की आंतरिक एकता और शक्ति प्रदर्शन दोनों का माध्यम बन सकता है। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान की स्थिति और उसकी राजनीतिक स्थिरता को दर्शाने का अवसर होगा। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के सैन्य ऑपरेशन के दौरान ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े हमले हुए थे। इन हमलों में खामेनेई के आवास और कार्यालय को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी। बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई, जिसके बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा तनाव बढ़ गया। अब जबकि अंतिम संस्कार की तारीख नजदीक आ रही है, ईरानी प्रशासन और IRGC की प्राथमिकता है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नियंत्रित तरीके से संपन्न हो। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:00:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान फिर जंग की तैयारी में जुटा, होर्मुज स्ट्रेट को बताया बड़ा हथियार</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में दावा- अमेरिका पर भरोसा नहीं, सैन्य तैयारी और रणनीतिक दबाव बढ़ाने में लगा तेहरान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-again-preparing-for-war-calls-strait-of-hormuz-a/article-54284"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-war-preparation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान संभावित नए युद्ध की तैयारी में जुट गया है और उसने साफ संकेत दिए हैं कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मान रहा है और जरूरत पड़ने पर इसे अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ दबाव के बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी नेतृत्व इस समय तीन स्तरों पर रणनीति तैयार कर रहा है— सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों को साधना। हालांकि ईरान ने बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं, लेकिन सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की गतिविधियों ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में तेहरान अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने के साथ समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की क्षमता भी बढ़ा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों तक इसी मार्ग के जरिए पहुंचता है। यही वजह है कि ईरान इसे अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह का सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और पश्चिमी देश इस समुद्री मार्ग को लेकर लगातार सतर्क रहते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ईरान की सैन्य तैयारी तेज</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ईरानी सेना और IRGC ने हाल के दिनों में समुद्री और मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर बढ़ाया है। ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका की ओर से कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो जवाब पहले से ज्यादा आक्रामक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ दिन पहले IRGC ने बयान जारी कर कहा था कि किसी भी नए अमेरिकी हमले का जवाब ऐसा होगा जिसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने मिसाइल नेटवर्क, ड्रोन क्षमताओं और नौसैनिक रणनीति को भी मजबूत कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और उससे जुड़े हित निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि तेहरान लगातार यह भी कह रहा है कि वह सीधे युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी दबाव का जवाब देने के लिए तैयार है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ड्रोन और हवाई गतिविधियों पर तनाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पिछले 24 घंटों में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं जिन्होंने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने दावा किया कि उसकी सुरक्षा बलों ने अमेरिकी MQ-9B और RQ-4 ड्रोन को निशाना बनाया। इसके अलावा ईरानी हवाई क्षेत्र में कथित रूप से घुसे F-35 लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग किए जाने का दावा किया गया। हालांकि अमेरिका की ओर से इन दावों की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों की सैन्य गतिविधियां पहले के मुकाबले काफी बढ़ी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने भी हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य निगरानी मजबूत की है। अमेरिकी सेंटकॉम के मुताबिक कुछ संदिग्ध नौसैनिक गतिविधियों पर कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका ने बंदर अब्बास के पास कुछ मिसाइल ठिकानों और समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इंटरनेट बहाली और आंतरिक हालात</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच ईरान में 88 दिनों बाद इंटरनेट सेवाओं की आंशिक बहाली भी चर्चा में है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स ने इसे आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे राष्ट्रीय इंटरनेट ब्लैकआउट में से एक बताया है। लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से कारोबार, बैंकिंग, ऑनलाइन सेवाएं और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान एक तरफ बाहरी दबाव से निपटने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर स्थिरता बनाए रखने की भी कोशिश कर रहा है। सरकार आंतरिक विरोध और आर्थिक दबाव को नियंत्रित रखने के लिए लगातार रणनीतिक कदम उठा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>इजराइल भी अलर्ट मोड में</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट के हालात को देखते हुए इजराइल ने भी सुरक्षा गतिविधियां तेज कर दी हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में उत्तरी सीमा और लेबनान की स्थिति पर चर्चा हुई। हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइली हमले भी बढ़ाए गए हैं। इजराइल को आशंका है कि क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में ईरान समर्थित संगठन सक्रिय हो सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>वैश्विक बाजार पर असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा बाजार से जुड़े होर्मुज स्ट्रेट में अस्थिरता बढ़ने पर तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत समेत कई देश खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं। ऐसे में यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर ईंधन कीमतों, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 11:51:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप बिना समझौते जीत की घोषणा कर सकते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव के बीच व्हाइट हाउस युद्ध से बाहर निकलने की रणनीति पर काम कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-tension-trump-can-declare-victory-without-deal/article-52340"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-iran-tensions.jpg" alt=""></a><br /><p>इन दिनों अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बना हुआ है साथ ही व्हाइट हाउस भी  युद्ध से बाहर निकलने की संभावनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन बिना किसी औपचारिक समझौते के भी जीत की घोषणा कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में यह रणनीति ऐसे समय पर तैयार की जा रही है, जब ईरान के साथ बातचीत ठप पड़ी है और युद्ध लंबा खिंचने का खतरा बना हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को यह आकलन करने का जिम्मा दिया गया है कि अगर अमेरिका एकतरफा जीत का ऐलान करता है तो ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या होगी। इस कदम को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं, क्योंकि बिना समझौते युद्ध खत्म करने की घोषणा कूटनीतिक जोखिम भी पैदा कर सकती है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन इस युद्ध को राजनीतिक और आर्थिक रूप से बोझ मान रहा है। खासकर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और घरेलू राजनीति पर पड़ रहे असर को देखते हुए जल्द समाधान की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया एजेंसियां दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही हैं। पहला विकल्प यह है कि अमेरिका एकतरफा जीत की घोषणा कर अपने सैनिकों को मध्य-पूर्व से वापस बुला ले।दूसरा विकल्प यह है कि बातचीत को लंबा खींचकर रणनीतिक बढ़त हासिल की जाए। हालांकि, दोनों ही विकल्पों में जोखिम मौजूद है, खासकर ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। ईरान ने नए प्रस्ताव तैयार करने के लिए समय मांगा है और कहा है कि अंतिम निर्णय उसके शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका ने आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए प्रतिबंधों और नाकाबंदी को और सख्त करने का संकेत दिया है। यह रणनीति ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए अपनाई जा रही है।</p>
<h5><strong>राजनीतिक और आर्थिक दबाव</strong></h5>
<p>इस पूरे घटनाक्रम का संबंध अमेरिकी घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। साल के अंत में प्रस्तावित मिडटर्म चुनावों को देखते हुए ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है।ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और वैश्विक बाजार में अस्थिरता का असर अमेरिकी मतदाताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में जल्द समाधान की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम राजनीतिक रूप से अहम साबित हो सकता है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव का असर पहले से ही दिखाई दे रहा है। मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ने से तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। बताया जा रहा है कि  अगर अमेरिका बिना समझौते जीत की घोषणा करता है, तो इससे उसकी वैश्विक छवि पर असर पड़ सकता है। साथ ही, ईरान की प्रतिक्रिया के आधार पर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 13:30:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान में US-ईरान बातचीत पर असमंजस, आमने-सामने वार्ता पर मतभेद</title>
                                    <description><![CDATA[US-ईरान बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत, पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में; बैठक पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है, लेकिन तस्वीर अब भी साफ नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/confusion-over-us-iran-talks-in-pakistan-disagreement-over-face-to-face-talks/article-52061"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-iran-talks-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर स्थिति उलझी हुई नजर आ रही है। एक ओर अमेरिका सीधे संवाद की उम्मीद जता रहा है, वहीं ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह आमने-सामने वार्ता के बजाय पाकिस्तान के जरिए अपनी बात रखेगा। इसी बीच दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं, जिससे कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुके हैं, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के भी पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी और क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है।</p>
<p>हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास दिख रहा है। अमेरिका का कहना है कि वह सीधे शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि कोई औपचारिक बैठक तय नहीं है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि बातचीत की प्रक्रिया अभी शुरुआती और अनिश्चित चरण में है।</p>
<h5><span><strong>बातचीत पर मतभेद</strong></span></h5>
<p>अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधी बातचीत कर सकता है। इसके लिए विशेष दूतों को भेजा गया है।</p>
<p>वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अलग रुख अपनाते हुए कहा है कि वह सीधे अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा। ईरान की ओर से कहा गया है कि उसकी बातें पाकिस्तान के अधिकारियों के जरिए साझा की जाएंगी।</p>
<p>इस रुख से यह साफ होता है कि बातचीत अगर होती भी है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप में हो सकती है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।</p>
<h5><span><strong>पहला दौर रहा बेनतीजा</strong></span></h5>
<p>इससे पहले अप्रैल के मध्य में पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी, जो करीब 21 घंटे चली लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।</p>
<p>मुख्य विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और निर्बाध रहे, जबकि ईरान इस पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की मांग करता रहा है। ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह इसे बंद नहीं करेगा।</p>
<h5><span><strong>बढ़ता क्षेत्रीय तनाव</strong></span></h5>
<p>इसी दौरान क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में एक ईरानी झंडे वाले जहाज को रोकने की कार्रवाई की। यह कदम समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंधों के पालन के तहत उठाया गया बताया गया है।</p>
<p>दूसरी ओर, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को लेकर दावा किया है कि वह अब देश में ही बड़ी संख्या में हथियारों का उत्पादन कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष दबाव की रणनीति भी साथ-साथ अपना रहे हैं।</p>
<h5><span><strong>आंतरिक मतभेद भी असरदार</strong></span></h5>
<p>ईरान के भीतर भी बातचीत को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। कुछ नेता बातचीत में लचीलापन दिखाने के पक्ष में हैं, जबकि कट्टर रुख रखने वाला धड़ा किसी भी समझौते के खिलाफ है। वार्ता टीम में बदलाव की चर्चा भी चल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान के भीतर रणनीति को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं है।फिलहाल नजर इस बात पर टिकी है कि पाकिस्तान में दोनों पक्षों के बीच किसी तरह का संवाद स्थापित हो पाता है या नहीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:06:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाएगा ईरान, इजराइल बोला- युद्ध कब खत्म होगा तय नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-will-impose-toll-on-ships-passing-through-the-strait/article-49682"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/iran-hormuz-strait-toll-plan.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की योजना को आगे बढ़ाया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को ईरान को उसकी स्थानीय मुद्रा रियाल में शुल्क देना होगा। इसके साथ ही अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग में प्रवेश से रोकने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हालांकि, यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले ईरान की संसद, गार्जियन काउंसिल और राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी आवश्यक होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक तेल आपूर्ति पर संभावित असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है। ऐसे में ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तरह की बाधा से तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इजराइल का बयान और युद्ध पर अनिश्चितता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के खत्म होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती। एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि अब तक युद्ध के आधे से अधिक लक्ष्य हासिल किए जा चुके हैं और आने वाले समय में ईरान का मौजूदा शासन कमजोर पड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ईरान के इस्फहान में अमेरिका की एयरस्ट्राइक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस बीच अमेरिका ने ईरान के शहर Isfahan में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे भूमिगत ठिकानों को निशाना बनाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हमले के बाद डिपो में जोरदार विस्फोट हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार वहां बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री मौजूद थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ट्रंप का वीडियो और अमेरिका का दावा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हमले से जुड़ा एक वीडियो भी साझा किया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई सैन्य ठिकानों को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई थी।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान की ओर से टोल नीति और अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों ने वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-will-impose-toll-on-ships-passing-through-the-strait/article-49682</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान की अमेरिका को बड़ी धमकी, अमेरिका से जुड़े तेल ठिकानों को राख में बदल देंगे!</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेल ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिकी ऊर्जा सुविधाओं को नष्ट करने की धमकी, होर्मुज नाकाबंदी से वैश्विक तेल संकट गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-big-threat-to-america-will-turn-americas-oil-bases/article-48183"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/iran-us-war-.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब लगातार गहराता जा रहा है। पिछले लगभग पंद्रह दिनों से चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ कहा है कि यदि उसके तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे तो वह अमेरिका से जुड़ी तेल और ऊर्जा सुविधाओं को पूरी तरह तबाह कर देगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि इस संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">युद्ध के बढ़ते दायरे से वैश्विक चिंता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य-पूर्व में शुरू हुआ यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। दो सप्ताह से अधिक समय से जारी हमलों और जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। खासकर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका लगातार जताई जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अगर उनके तेल प्रतिष्ठानों पर किसी भी प्रकार का हमला जारी रहता है तो वे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाएंगे। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई के बाद ये प्रतिष्ठान पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं। इस चेतावनी ने पहले से ही संवेदनशील स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखेगा। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने हाल ही में जारी बयान में कहा कि वे अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज क्षेत्र में नाकाबंदी जारी रहेगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुनिया के तेल व्यापार पर बड़ा असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकती है। वर्तमान हालात में भी तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है प्रभाव</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट और लंबा खिंचता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में दुनिया के कई देश इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">---------------------------------</span></p>
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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 17:13:04 +0530</pubDate>
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