<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/energy-crisis/tag-3918" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>energy crisis - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/3918/rss</link>
                <description>energy crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरान ने NATO देशों पर लगाए गंभीर आरोप, होर्मुज में जहाज पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान का दावा—अमेरिका-इजराइल के साथ कुछ NATO देशों ने दिया सैन्य समर्थन, होर्मुज स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाज पर हमला, ब्रिज को नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-nato-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। Iran ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर उसके खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई में कुछ NATO सदस्य देशों ने भी समर्थन दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में NATO की भूमिका की गंभीर जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनती दिख रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की ओर से यह दावा ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीतिक मंच पर पहले से ही कई मुद्दों को लेकर असहमति बनी हुई है। बघई ने अपने बयान में कहा कि NATO प्रमुख मार्क रूट ने खुद इस बात की ओर इशारा किया है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का समर्थन किया था। हालांकि इस दावे पर अभी तक स्वतंत्र रूप से किसी भी देश ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरान ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इन देशों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर और किस उद्देश्य से इस तरह के सैन्य सहयोग में हिस्सा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर किसी भी NATO देश ने इस प्रकार की कार्रवाई में भाग लिया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। तेहरान ने यह भी मांग की है कि इन देशों को न केवल अपने नागरिकों को बल्कि पूरी दुनिया को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर इस तरह की कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच समुद्री सुरक्षा से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। Strait of Hormuz में एक कॉमर्शियल जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि की है। जहाज ओमान के तट के पास था, जब अचानक एक प्रोजेक्टाइल आकर जहाज के दाहिने हिस्से से टकरा गया। इस हमले से जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा है, जहां से जहाज का संचालन किया जाता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी क्रू सदस्य को चोट नहीं आई है। घटना के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, और इस नए विवाद ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। NATO की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक NATO की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं अमेरिका और इजराइल की ओर से भी इन आरोपों पर चुप्पी बनी हुई है। ईरान का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जबकि पश्चिमी देश इसे खारिज कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह से होर्मुज क्षेत्र में हमला हुआ है, उसने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा और व्यापार बाजारों पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/iran-nato-conflict.jpg"                         length="230972"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगी ₹300 सब्सिडी</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच सरकार का फैसला, उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में केवल चार रिफिल पर अतिरिक्त राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ujjwala-scheme.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की करोड़ों महिलाओं से जुड़ी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) में बड़ा बदलाव किया गया है। अब योजना के लाभार्थियों को सालभर में केवल पहले चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह लाभ नौ सिलेंडरों तक उपलब्ध था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया का सबसे सस्ता रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को हुई एक आधिकारिक ब्रीफिंग में पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बने हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। खास तौर पर एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 46 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद यह सिलेंडर 642 रुपये में मिल रहा है। हालांकि अब यह अतिरिक्त राहत केवल चार सिलेंडरों तक सीमित रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत अब 1600 रुपये से भी अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से कम कीमत वसूली जा रही है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 41 हजार करोड़ रुपये था। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मंजूरी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने यह भी बताया कि सिर्फ एलपीजी ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 6 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा बताया जा रहा है। इससे तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन 600 से 700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। हालांकि सरकार ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। फरवरी में एलपीजी का सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस लगभग 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून तक बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। इससे प्रोपेन और ब्यूटेन दोनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई। यही वजह है कि भारत सहित कई देशों में गैस की लागत बढ़ी है। फिर भी सरकार दावा कर रही है कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई पड़ोसी देशों की तुलना में भारतीय उपभोक्ताओं को काफी कम कीमत पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि जहां घरेलू उपभोक्ता लगभग 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गैस प्राप्त कर रहे हैं, वहीं होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 3113.50 रुपये में मिल रहा है। यानी उनकी लागत करीब 164 रुपये प्रति किलोग्राम बैठ रही है। कमर्शियल गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार हर महीने स्वतः तय होती हैं और हाल के महीनों में इनमें लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी रखी गई और देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं होने दी गई। साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई। गैस की खरीद अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी शुरू की गई ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। उपलब्ध गैस आपूर्ति में घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर गैस की चोरी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए भी निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन को 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने उपभोक्ताओं को राहत देने और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370</guid>
                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:29:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/ujjwala-scheme.jpg"                         length="108349"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP में फिर महंगी हुई CNG, भोपाल में 94.75 रुपये प्रति किलो पहुंचा रेट, 10 दिन में दूसरी बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में CNG के दाम फिर बढ़े। भोपाल में अब CNG 94.75 रुपए प्रति किलो बिक रही है। 10 दिन में दूसरी बार बढ़ोतरी हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cng-became-expensive-again-in-mp-rate-reached-rs-9475/article-54250"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-cng-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश में </span>CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। भोपाल में मंगलवार सुबह से </span>CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">एक रुपए प्रति किलो महंगी हो गई। नए रेट के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब राजधानी में </span>CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">94.75 रुपए प्रति किलो बिक रही है। पिछले 10 दिनों में ये दूसरी बार है जब दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 16 मई को लगभग 3 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई थी। लगातार बढ़ती कीमतों ने उन लोगों की चिंता बढ़ा दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो रोजाना </span>CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">वाहन से सफर करते हैं। खासकर टैक्सी और ऑटो चालकों पर इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव हो सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल भोपाल और उसके आसपास के जिलों में थिंक गैस कंपनी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">की सप्लाई कर रही है और उन्हीं ने नए रेट लागू किए हैं। भोपाल के अलावा सीहोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदिशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजगढ़ और शिवपुरी जैसे इलाकों में भी यह बदलाव देखने को मिला है। राजधानी में करीब 25 स्टेशन हैं जहां </span>CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">उपलब्ध है। सुबह कई पंपों पर लोग पुराने रेट के बारे में पूछते नजर आए। कुछ वाहन चालकों का कहना था कि पेट्रोल और डीजल के मुकाबले </span>CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी भी सस्ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जिस तेजी से दाम बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे बचत होती जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये तीसरी बार है जब पिछले दो महीनों में </span>CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगी हुई है और कुल मिलाकर दाम 6 रुपए प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदेश में गेल और अवंतिका गैस एजेंसियां भी अलग-अलग रेंज में सप्लाई कर रही हैं। इंदौर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उज्जैन और ग्वालियर क्षेत्र में भी लोग रेट पर ध्यान दे रहे हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल में पिछले कुछ सालों में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऑटोमोबाइल कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के मुकाबले बेहतर माइलेज और कम खर्च के कारण लोग </span>CNG <span lang="hi" xml:lang="hi">वाहन ज्यादा खरीद रहे हैं। शहर के कई शोरूम में हर दिन 10 से 15 CNG-बेस्ड</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> गाड़ियों की डिलीवरी हो रही है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगी होती गैस ने ग्राहकों की गणित को थोड़ा बिगाड़ दिया है। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल और डीजल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। सोमवार को ही ऑयल कंपनियों ने 11 दिन में चौथी बार कीमतें बढ़ाई थीं। भोपाल में पेट्रोल अब 114 रुपए प्रति लीटर के पार जा चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि डीजल भी लगभग 100 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से इसका असर सीधे घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है। ऐसे में आम आदमी की जेब पर दबाव और बढ़ता नजर आ रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cng-became-expensive-again-in-mp-rate-reached-rs-9475/article-54250</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cng-became-expensive-again-in-mp-rate-reached-rs-9475/article-54250</guid>
                <pubDate>Tue, 26 May 2026 16:20:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/mp-cng-price.jpg"                         length="140124"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ने रूसी तेल पर बढ़ाई छूट, क्या भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने रूसी तेल पर छूट 17 जून तक बढ़ाई। इससे भारत को सस्ते कच्चे तेल की सप्लाई जारी रहने और बाजार स्थिरता का फायदा मिल सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-increased-discount-on-russian-oil-can-india-get-big/article-53753"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/us-on-russian-oil-discounts.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका ने फिर से रूसी तेल पर दी गई अस्थायी छूट की समय सीमा बढ़ा दी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब यह 17 जून तक बढ़ा दी गई है। इस फैसले के बाद समुद्र में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल की खेप को खरीदार देशों तक पहुंचाने की अनुमति दी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भले ही उस पर प्रतिबंध लगे हों। वैश्विक तेल बाजार पहले से ही काफी अस्थिर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह बात भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत का कारण बन रही है। यह और भी महत्वपूर्ण है जब डीजल और पेट्रोल के बढ़ते दाम आम लोगों को प्रभावित कर रहे हैं और आपूर्ति में लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। इसलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिकी वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल उन्हीं रूसी तेल शिपमेंट पर लागू होगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि रूस के ऊर्जा निर्यात पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस कदम से वैश्विक बाजार में कुछ स्थिरता आएगी और उन देशों को मदद मिलेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो ऊर्जा संकट या महंगे आयात का सामना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि ईरान और अन्य क्षेत्रों में तनाव के चलते तेल की आपूर्ति पर दबाव न बढ़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह छूट सीमित समय के लिए दी गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत के दृष्टिकोण से</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस निर्णय का सीधा प्रभाव कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ेगा। रूस से आने वाला सस्ता तेल अब बिना किसी बड़े कानूनी जोखिम के भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच सकेगा। पिछले कुछ महीनों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल खरीदा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कई बार यह आयात कुल जरूरत का लगभग आधा हो गया है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार थोड़े समय के लिए छूट बढ़ाने से तेल कंपनियों को दीर्घकालिक योजना बनाने में मुश्किल होती है। इस पर जहाजों की बुकिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीमा और भुगतान व्यवस्था पर भी असर पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पूरा सिस्टम थोड़ी अस्थिरता में काम करता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी तरफ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार लगातार यह कहती रही है कि उसकी तेल नीति पूरी तरह से बाजार की जरूरतों और कीमतों पर आधारित है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत पहले भी रूस से तेल खरीदता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छूट के समय भी खरीद कर रहा है और आगे भी आवश्यकता के अनुसार खरीद जारी रखेगा। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी खरीद किसी अमेरिकी छूट या किसी एक देश की नीति पर निर्भर नहीं है। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीमा और शिपिंग व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं ताकि सप्लाई चेन पर कोई असर न पड़े और कच्चे तेल की आवाजाही बिना रुकावट के जारी रह सके।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुल मिलाकर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही कई दबावों का सामना कर रहा है। अमेरिका की यह छूट भले सीमित हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसका असर भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश पर सीधे तौर पर देखने को मिल सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर जब घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें पहले से चर्चा में हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-increased-discount-on-russian-oil-can-india-get-big/article-53753</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-increased-discount-on-russian-oil-can-india-get-big/article-53753</guid>
                <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:57:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/us-on-russian-oil-discounts.jpg"                         length="122781"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऊर्जा बचत की पहल, डिप्टी CM ने काफिले से हटाए फॉलो-पायलट वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने ईंधन बचत के लिए अपने काफिले से फॉलो और पायलट वाहन हटाए, पीएम मोदी की अपील का असर दिखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/energy-saving-initiative-deputy-cm-removed-follow-pilot-vehicles-from-the/article-53380"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t182358.287.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा संरक्षण और पेट्रोलियम ईंधनों की बचत की अपील का असर मध्यप्रदेश में नजर आने लगा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने अपने काफिले से फॉलो और पायलट वाहनों को हटाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इस व्यवस्था में शामिल स्टाफ को भी मुक्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह कदम केंद्र से मिले निर्देशों के बाद उठाया गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसे राजनीतिक व प्रशासनिक हलकों में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रीवा में मीडिया से बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत अब सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया है। यह पर्यावरण</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की बात कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब आवश्यक है कि लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें। सरकारी पहल होने पर ही इसका असर आम जनता तक पहुंचेगा। इस वक्त जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ईंधन की बचत और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उपमुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचें। छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें और अगर संभव हो तो एक ही वाहन में अधिक लोग यात्रा करें। अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार भविष्य में ऊर्जा संरक्षण को लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियान चला सकती है। फिलहाल उपमुख्यमंत्री के इस निर्णय को सरकार की उस कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग खुद उदाहरण पेश करने की बात कर रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले समय में अन्य मंत्री और जनप्रतिनिधि भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सरकार का मानना है कि जरूरी सुरक्षा इंतजाम पहले की तरह बनाए रखे जाएंगे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक मंचों पर ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की बात की थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद मध्यप्रदेश में कई स्तरों पर हलचल देखने को मिली। हाल ही में कुछ मंत्री ट्रेन से यात्रा करते हुए भी नजर आए थे। अब उपमुख्यमंत्री द्वारा फॉलो और पायलट वाहन हटाने का निर्णय उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार आने वाले समय में डीजल-पेट्रोल की खपत कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए और कदम उठा सकती है। फिलहाल इस फैसले की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है और इसे आम जनता तक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/energy-saving-initiative-deputy-cm-removed-follow-pilot-vehicles-from-the/article-53380</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/energy-saving-initiative-deputy-cm-removed-follow-pilot-vehicles-from-the/article-53380</guid>
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 09:41:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-14t182358.287.jpg"                         length="111981"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप बिना समझौते जीत की घोषणा कर सकते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव के बीच व्हाइट हाउस युद्ध से बाहर निकलने की रणनीति पर काम कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-tension-trump-can-declare-victory-without-deal/article-52340"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-iran-tensions.jpg" alt=""></a><br /><p>इन दिनों अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बना हुआ है साथ ही व्हाइट हाउस भी  युद्ध से बाहर निकलने की संभावनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन बिना किसी औपचारिक समझौते के भी जीत की घोषणा कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में यह रणनीति ऐसे समय पर तैयार की जा रही है, जब ईरान के साथ बातचीत ठप पड़ी है और युद्ध लंबा खिंचने का खतरा बना हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को यह आकलन करने का जिम्मा दिया गया है कि अगर अमेरिका एकतरफा जीत का ऐलान करता है तो ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या होगी। इस कदम को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं, क्योंकि बिना समझौते युद्ध खत्म करने की घोषणा कूटनीतिक जोखिम भी पैदा कर सकती है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन इस युद्ध को राजनीतिक और आर्थिक रूप से बोझ मान रहा है। खासकर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और घरेलू राजनीति पर पड़ रहे असर को देखते हुए जल्द समाधान की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया एजेंसियां दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही हैं। पहला विकल्प यह है कि अमेरिका एकतरफा जीत की घोषणा कर अपने सैनिकों को मध्य-पूर्व से वापस बुला ले।दूसरा विकल्प यह है कि बातचीत को लंबा खींचकर रणनीतिक बढ़त हासिल की जाए। हालांकि, दोनों ही विकल्पों में जोखिम मौजूद है, खासकर ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।</p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। ईरान ने नए प्रस्ताव तैयार करने के लिए समय मांगा है और कहा है कि अंतिम निर्णय उसके शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।</p>
<p>दूसरी ओर, अमेरिका ने आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए प्रतिबंधों और नाकाबंदी को और सख्त करने का संकेत दिया है। यह रणनीति ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए अपनाई जा रही है।</p>
<h5><strong>राजनीतिक और आर्थिक दबाव</strong></h5>
<p>इस पूरे घटनाक्रम का संबंध अमेरिकी घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। साल के अंत में प्रस्तावित मिडटर्म चुनावों को देखते हुए ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है।ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और वैश्विक बाजार में अस्थिरता का असर अमेरिकी मतदाताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में जल्द समाधान की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम राजनीतिक रूप से अहम साबित हो सकता है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव का असर पहले से ही दिखाई दे रहा है। मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ने से तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। बताया जा रहा है कि  अगर अमेरिका बिना समझौते जीत की घोषणा करता है, तो इससे उसकी वैश्विक छवि पर असर पड़ सकता है। साथ ही, ईरान की प्रतिक्रिया के आधार पर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-tension-trump-can-declare-victory-without-deal/article-52340</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-tension-trump-can-declare-victory-without-deal/article-52340</guid>
                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 13:30:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/us-iran-tensions.jpg"                         length="90739"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>LPG संकट पर केंद्र का बड़ा कदम: 23 मार्च से राज्यों को 20% अतिरिक्त गैस सप्लाई</title>
                                    <description><![CDATA[ढाबों-होटलों और सामुदायिक रसोई को प्राथमिकता, प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो सिलेंडर देने के निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/centers-big-step-on-lpg-crisis-additional-gas-supply-to/article-48750"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-22t135435.028.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में चल रहे LPG संकट के बीच केंद्र सरकार ने राहत देते हुए 23 मार्च से राज्यों को गैस सप्लाई में 20% की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस बढ़ोतरी के बाद कुल आपूर्ति संकट से पहले के स्तर के लगभग 50% तक पहुंच जाएगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र जारी कर इस निर्णय की जानकारी दी है।</p>
<p>मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने निर्देश दिया है कि अतिरिक्त गैस सप्लाई का उपयोग प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में किया जाए। इसमें होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, इंडस्ट्रियल कैंटीन और सामुदायिक रसोई शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फूड सर्विस सेक्टर और आम लोगों के भोजन पर किसी तरह का असर न पड़े।</p>
<p>गैस की कमी के चलते कई शहरों में होटल और ढाबों को पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा था। ऐसे में यह निर्णय इन व्यवसायों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। साथ ही, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और डेयरी सेक्टर को भी इस अतिरिक्त सप्लाई का लाभ मिलेगा।</p>
<p>केंद्र ने प्रवासी मजदूरों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्यों को निर्देश दिया है कि उन्हें 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं। यह कदम अस्थायी और कम आय वाले श्रमिकों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।</p>
<p>मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त गैस की कालाबाजारी या गलत इस्तेमाल रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जाए। राज्यों से कहा गया है कि वे वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाएं और जरूरतमंदों तक ही गैस पहुंचे, यह सुनिश्चित करें।</p>
<p>दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 80-85% आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। यही वजह है कि हाल के दिनों में देश में गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई।</p>
<p>सरकार ने हालांकि यह भी कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और भविष्य में सप्लाई को सामान्य स्तर (100%) तक बहाल करने के प्रयास जारी हैं। यह नई व्यवस्था फिलहाल अगले आदेश तक लागू रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/centers-big-step-on-lpg-crisis-additional-gas-supply-to/article-48750</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/centers-big-step-on-lpg-crisis-additional-gas-supply-to/article-48750</guid>
                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 13:55:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/business---2026-03-22t135435.028.jpg"                         length="185033"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान की अमेरिका को बड़ी धमकी, अमेरिका से जुड़े तेल ठिकानों को राख में बदल देंगे!</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेल ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिकी ऊर्जा सुविधाओं को नष्ट करने की धमकी, होर्मुज नाकाबंदी से वैश्विक तेल संकट गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-big-threat-to-america-will-turn-americas-oil-bases/article-48183"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/iran-us-war-.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब लगातार गहराता जा रहा है। पिछले लगभग पंद्रह दिनों से चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ कहा है कि यदि उसके तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे तो वह अमेरिका से जुड़ी तेल और ऊर्जा सुविधाओं को पूरी तरह तबाह कर देगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि इस संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">युद्ध के बढ़ते दायरे से वैश्विक चिंता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य-पूर्व में शुरू हुआ यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। दो सप्ताह से अधिक समय से जारी हमलों और जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। खासकर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका लगातार जताई जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अगर उनके तेल प्रतिष्ठानों पर किसी भी प्रकार का हमला जारी रहता है तो वे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाएंगे। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई के बाद ये प्रतिष्ठान पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं। इस चेतावनी ने पहले से ही संवेदनशील स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखेगा। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने हाल ही में जारी बयान में कहा कि वे अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज क्षेत्र में नाकाबंदी जारी रहेगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दुनिया के तेल व्यापार पर बड़ा असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकती है। वर्तमान हालात में भी तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है प्रभाव</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट और लंबा खिंचता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में दुनिया के कई देश इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">---------------------------------</span></p>
<p><strong>हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –</strong><br />🔴 <strong>व्हाट्सएप चैनल</strong>: <a class="decorated-link" href="https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V">https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V</a><br />🔴 <strong>फेसबुक</strong>: <a class="decorated-link" href="https://www.facebook.com/dainikjagranmpcgofficial/">Dainik Jagran MP/CG Official</a><br />🟣 <strong>इंस्टाग्राम</strong>: <a class="decorated-link" href="https://www.dainikjagranmpcg.com/admin/post/post/@dainikjagranmp.cg">@dainikjagranmp.cg</a><br />🔴 <strong>यूट्यूब</strong>: <a class="decorated-link" href="https://www.youtube.com/@dainikjagranmpcgdigital">Dainik Jagran MPCG Digital</a></p>
<p>📲 <strong>सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।</strong><br /><strong>👉 आज ही जुड़िए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-big-threat-to-america-will-turn-americas-oil-bases/article-48183</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-big-threat-to-america-will-turn-americas-oil-bases/article-48183</guid>
                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 17:13:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/iran-us-war-.jpg"                         length="107752"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        