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                <title>Business News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Business News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>करियर राशिफल 11 जुलाई 2026: भद्र और बुधादित्य राजयोग से इन राशियों के करियर में आएगा उछाल, जानें अपना भाग्य</title>
                                    <description><![CDATA[शनिवार को ग्रहों की विशेष चाल से नौकरीपेशा और व्यापारियों को मिलेंगे तरक्की के नए अवसर, वृषभ और सिंह राशि के लिए बंपर लाभ के संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/career-horoscope-11-july-2026-bhadra-and-budhaditya-rajyoga-will/article-58446"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/career-horoscope-11-july-2026.jpg" alt=""></a><br /><p> ग्रहों और नक्षत्रों की चाल हर मनुष्य के पेशेवर जीवन को गहराई से प्रभावित करती है। <span class="citation-265 citation-end-265">11 जुलाई 2026, दिन शनिवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है।<sup class="superscript"></sup></span> करियर और आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। आज मिथुन राशि में सूर्य और बुध की युति से 'बुधादित्य राजयोग' और 'भद्र राजयोग' का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही, वृषभ राशि में चंद्रमा और मंगल की युति (लक्ष्मी योग) का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। न्याय के देवता शनिदेव की कृपा से आज कई राशियों के जातकों को नौकरी में प्रमोशन, नए व्यावसायिक अवसर और अटका हुआ धन प्राप्त होने के प्रबल योग हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि करियर और बिजनेस के लिहाज से सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है। </p>
<h5><strong>1. मेष राशि (Aries)</strong></h5>
<p>मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन कार्यक्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित करने का है। <span class="citation-264 citation-end-264">आपके भीतर गजब का आत्मविश्वास और ऊर्जा देखी जाएगी, जिससे आप कार्यस्थल पर बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़कर संभालेंगे।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-263 citation-end-263">नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे आने वाले समय में पदोन्नति के रास्ते खुलेंगे।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-262 citation-end-262">हालांकि, कार्यस्थल पर आपकी प्रगति से कुछ सहकर्मी ईर्ष्या कर सकते हैं, इसलिए अपनी गुप्त योजनाएं किसी से साझा न करें।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-261 citation-end-261">व्यापारियों के लिए नया काम शुरू करने के लिए दिन अच्छा है।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 85%, <strong>शुभ समय:</strong> दोपहर 2:00 से 3:30 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>2. वृषभ राशि (Taurus)</strong></h5>
<p><span class="citation-260 citation-end-260">वृषभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन करियर में कोई बड़ी सफलता लेकर आ सकता है।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-259 citation-end-259">चंद्रमा और मंगल की युति आपकी राशि में होने से आर्थिक प्रयासों में भारी सफलता मिलेगी।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-258 citation-end-258">ऑफिस में आपकी कड़ी मेहनत और लगन मैनेजमेंट की नजर में आएगी, जिससे आपकी सराहना होगी।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-257 citation-end-257">व्यापार करने वाले लोगों को आज नई साझेदारी या बड़े ऑर्डर्स मिलने की संभावना है।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-256 citation-end-256">पुराने अटके हुए काम अचानक पूरे होने से मन प्रसन्न रहेगा।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 90%, <strong>शुभ समय:</strong> सुबह 9:00 से 10:30 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>3. मिथुन राशि (Gemini)</strong></h5>
<p><span class="citation-255 citation-end-255">मिथुन राशि के जातकों को आज बुधादित्य और भद्र राजयोग का सीधा लाभ मिलने वाला है।<sup class="superscript"></sup></span> आपकी कुशल बुद्धि और तार्किक क्षमता के बल पर आप कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी डील क्रैक कर सकते हैं। <span class="citation-254 citation-end-254">सामाजिक और पेशेवर सरोकार बढ़ेगा।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-253 citation-end-253">बिजनेस में आमदनी के नए स्रोत खुलेंगे।<sup class="superscript"></sup></span> नौकरीपेशा जातकों को सलाह दी जाती है कि जल्दबाजी में कोई भी दस्तावेज साइन न करें और काम में सटीकता बनाए रखें। </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 88%, <strong>शुभ समय:</strong> दोपहर 12:15 से 1:45 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>4. कर्क राशि (Cancer)</strong></h5>
<p>कर्क राशि के जातकों के लिए आज का दिन नौकरी और व्यापार में टीमवर्क से लाभ कमाने का है। सूर्य और बुध की अनुकूल स्थिति के कारण दफ्तर में सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिलेगा। यदि आप काफी समय से नौकरी बदलने का प्रयास कर रहे थे, तो आज कोई अच्छा प्रस्ताव आपके दरवाजे पर दस्तक दे सकता है। पैतृक संपत्ति या पुराने निवेश से भी व्यापार में लिक्विडिटी बढ़ेगी।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 82%, <strong>शुभ समय:</strong> शाम 4:00 से 5:30 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>5. सिंह राशि (Leo)</strong></h5>
<p>सिंह राशि के जातकों का आत्मविश्वास आज सातवें आसमान पर रहेगा। शनिदेव और सूर्य की कृपा से आप जिस भी काम में हाथ डालेंगे, उसमें सफलता मिलने के पूरे आसार हैं। नौकरीपेशा लोगों को बॉस से विशेष तारीफ या इंसेंटिव मिल सकता है। सरकारी क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों को आज कोई बड़ा टेंडर या प्रोजेक्ट हाथ लग सकता है। <span class="citation-252 citation-end-252">कोई पुराना रुका हुआ भुगतान (Payment) मिलने से वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 95%, <strong>शुभ समय:</strong> सुबह 7:30 से 9:00 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>6. कन्या राशि (Virgo)</strong></h5>
<p>कन्या राशि के लोगों के लिए आज का दिन मिले-जुले परिणाम लेकर आएगा। कार्यक्षेत्र में काम का बोझ थोड़ा अधिक रह सकता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, टेक्सटाइल, एक्सपोर्ट या कंसल्टेंसी के बिजनेस से जुड़े लोगों को कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। <span class="citation-251 citation-end-251">नौकरीपेशा लोग जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने से बचें और अपने काम की गुणवत्ता पर ध्यान दें।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 78%, <strong>शुभ समय:</strong> दोपहर 3:30 से 5:00 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>7. तुला राशि (Libra)</strong></h5>
<p><span class="citation-250 citation-end-250">तुला राशि के जातकों के करियर में लंबे समय से चली आ रही रुकावटें आज दूर होंगी।<sup class="superscript"></sup></span> यदि आपका कोई प्रोजेक्ट या डील सरकारी अनुमतियों के कारण फंसी हुई थी, तो आज वह आगे बढ़ सकती है। प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट से जुड़े लोगों को भारी मुनाफा होने के योग हैं। नौकरी में आपको अपनी मनपसंद जगह पर ट्रांसफर या मनचाहा काम मिल सकता है। </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 87%, <strong>शुभ समय:</strong> सुबह 11:00 से दोपहर 12:30 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>8. वृश्चिक राशि (Scorpio)</strong></h5>
<p>वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी। यदि आप अपने बिजनेस का विस्तार करने के लिए लोन या फंडिंग की तलाश में थे, तो आज आपको सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। नौकरी में आपके काम को नोटिस किया जाएगा। आईटी और बैंकिंग सेक्टर से जुड़े जातकों के लिए आज का दिन विशेष रूप से प्रगतिशील रहने वाला है।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 84%, <strong>शुभ समय:</strong> दोपहर 1:00 से 2:30 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>9. धनु राशि (Sagittarius)</strong></h5>
<p>धनु राशि के जातकों को आज करियर में आगे बढ़ने के बेहतरीन और नए मौके मिलेंगे। बिजनेस के सिलसिले में की गई छोटी दूरी की यात्राएं भविष्य में बड़े वित्तीय लाभ का कारण बनेंगी। दफ्तर में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। मैनेजमेंट और प्रशासनिक पदों पर कार्यरत लोगों के लिए आज का दिन मील का पत्थर साबित हो सकता है।</p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 89%, <strong>शुभ समय:</strong> सुबह 8:30 से 10:00 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>10. मकर राशि (Capricorn)</strong></h5>
<p>मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन मेहनत का फल देने वाला रहेगा। नौकरी में आपके द्वारा किए गए पुराने प्रयासों को आज मैनेजमेंट द्वारा सराहा जाएगा, जिससे आपकी साख मजबूत होगी। <span class="citation-249 citation-end-249">व्यापार में कोई नई शुरुआत करने का मन बना सकते हैं, जो भविष्य के लिए फायदेमंद रहेगी।<sup class="superscript"></sup></span> कानूनी या टैक्स से जुड़े मामलों में सावधानी बरतें। </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 83%, <strong>शुभ समय:</strong> शाम 5:00 से 6:30 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>11. कुंभ राशि (Aquarius)</strong></h5>
<p><span class="citation-248 citation-end-248">कुंभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन नए नेटवर्क और पहचान बनाने का है।<sup class="superscript"></sup></span> कॉरपोरेट जगत में आज आपकी नए प्रभावशाली लोगों से मुलाकात होगी, जिसका फायदा आपको आने वाले समय में अपने करियर और बिजनेस में मिलेगा। नौकरी और बिजनेस दोनों ही मोर्चों पर आय बढ़ने के स्पष्ट संकेत हैं। अपनी सूझबूझ से आप मुश्किल काम भी आसानी से निपटा लेंगे। </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 92%, <strong>शुभ समय:</strong> दोपहर 12:00 से 1:30 बजे।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>12. मीन राशि (Pisces)</strong></h5>
<p><span class="citation-247 citation-end-247">मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन करियर में मानसिक शांति और स्थिरता लेकर आएगा।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-246 citation-end-246">नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है।<sup class="superscript"></sup></span> रचनात्मक क्षेत्र, कला, मीडिया और शिक्षा से जुड़े लोगों को आज अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतरीन मंच मिलेगा। अटका हुआ धन वापस मिलने से व्यापारिक योजनाएं गति पकड़ेंगी। </p>
<ul>
<li>
<p><strong>करियर ग्रोथ:</strong> 91%, <strong>शुभ समय:</strong> सुबह 10:00 से 11:30 बजे।</p>
</li>
</ul>
<blockquote>
<p><strong>करियर वृद्धि के लिए शनिवार का विशेष उपाय:</strong> आज शाम के समय कार्यस्थल या घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। इसके साथ ही शनि चालीसा का पाठ करें। कार्यक्षेत्र में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होंगी और प्रगति के मार्ग खुलेंगे।</p>
</blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/career-horoscope-11-july-2026-bhadra-and-budhaditya-rajyoga-will/article-58446</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:04:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में कारोबार को नई उड़ान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रिपरिषद ने विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा विधेयक के प्रारूप को दी स्वीकृति, निवेशकों को मिलेगी आसान प्रक्रिया, उद्योगों और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/new-udaan-for-business-in-chhattisgarh-ease-of-doing-business/article-58383"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-ease-of-doing-business-bill-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में निवेश, उद्योग और कारोबार को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां कारोबार को आसान बनाने के लिए इस तरह का व्यापक और आधुनिक विधेयक लागू होगा। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाना है, जिससे निवेशकों को बेहतर कारोबारी माहौल मिल सके। सरकार का मानना है कि किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में उद्योग और निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया आसान होगी, तो घरेलू और बाहरी निवेशक राज्य में निवेश करने के लिए अधिक उत्साहित होंगे। इसी सोच के साथ तैयार किए गए इस विधेयक में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे उद्योग लगाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होगी और सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय भी कम होगा। विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य अनावश्यक नियमों और जटिल प्रक्रियाओं को कम करना है। कई बार उद्योग स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेने में लंबा समय लग जाता है। इससे निवेशक परेशान होते हैं और कई परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं। नए कानून के लागू होने के बाद ऐसी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा ताकि कारोबार शुरू करने में अनावश्यक बाधाएं न आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस विधेयक में डीम्ड परमिशन की व्यवस्था भी शामिल की है। इसका अर्थ यह है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो कुछ मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने की समस्या कम होगी और उद्योगों को समय पर मंजूरी मिलने का रास्ता आसान होगा। विधेयक में स्व-प्रमाणीकरण (Self Certification) और तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third Party Verification) जैसे आधुनिक प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य उद्योगों पर अनावश्यक निरीक्षण और कागजी औपचारिकताओं का बोझ कम करना है। इससे उद्योगों को नियमों का पालन करते हुए भी अधिक सुविधा मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।इसके अलावा, जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली (Risk-Based Inspection) को भी लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत हर उद्योग का बार-बार निरीक्षण करने के बजाय केवल जोखिम के आधार पर जांच की जाएगी। इससे ईमानदारी से काम करने वाले उद्योगों को अनावश्यक निरीक्षण से राहत मिलेगी, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर प्रभावी निगरानी बनी रहेगी। सरकार ने विधेयक में दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने का भी प्रावधान किया है। कई मामलों में एक ही कार्य के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी जटिलताओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/new-udaan-for-business-in-chhattisgarh-ease-of-doing-business/article-58383</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतवंशी कारोबारी पर इंडोनेशिया में 425 करोड़ की कथित रक्षा धोखाधड़ी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में दावा- खुद को CIA एजेंट बताकर राष्ट्रपति प्रबोवो का भरोसा जीता, रक्षा सौदों के नाम पर फर्जी कर्ज मंजूर कराने का आरोप।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-origin-businessman-accused-of-alleged-defense-fraud-of-rs-425/article-58053"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-srivastava.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका में पहले से धोखाधड़ी के मामलों का सामना कर रहे भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्टों के अनुसार गौरव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और उनके करीबी अधिकारियों का विश्वास हासिल किया। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने रक्षा सौदों के नाम पर लगभग 425 करोड़ रुपये के फर्जी कर्ज को मंजूरी दिलवाई। यह मामला सामने आने के बाद इंडोनेशिया में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जिन रक्षा सौदों पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम समझौते तक नहीं पहुंचे और इसलिए सरकार को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान नहीं हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक यह कथित घटनाक्रम वर्ष 2020 से 2022 के बीच का है। दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशियाई सेना को आधुनिक सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। इसमें 36 एफ-15 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक सैन्य कमांड सिस्टम उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। केवल लड़ाकू विमानों की संभावित डील का मूल्य लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये बताया गया। शुरुआती स्तर पर इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय व्यवस्थाओं और कर्ज से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए, लेकिन बाद में जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं की जानकारी सामने आई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर रक्षा क्षेत्र से जुड़े सौदों को आगे बढ़ाने की कोशिश की। जांच में जिन चार कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उनके माध्यम से पांच अलग-अलग रक्षा समझौतों की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बाद में इन कंपनियों के खिलाफ टैक्स संबंधी अनियमितताओं के मामले सामने आए और उन्हें बंद कर दिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां बेहद सीमित थीं, जबकि इनके जरिए बड़े वित्तीय लेन-देन किए जा रहे थे। यही वजह है कि इन सौदों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्टों के अनुसार गौरव श्रीवास्तव ने केवल व्यावसायिक संपर्कों के आधार पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास कायम करके भी प्रभाव बनाया। दावा किया गया है कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो उन्हें ‘मिस्टर जी’ कहकर संबोधित करते थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गौरव को राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां भी थीं, जो सामान्य तौर पर केवल उनके करीबी लोगों को ही मालूम थीं। इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर उसने अपने प्रभाव को और मजबूत बनाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि गौरव ने अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कई बड़े दावे किए थे। उसने कथित तौर पर कहा कि वर्ष 2002 के बाली बम धमाकों के आरोपियों को पकड़वाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसके अलावा उसने यह भी दावा किया कि उसने राष्ट्रपति प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में मदद की थी। इन दावों के जरिए उसने खुद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया नेटवर्क से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति साबित करने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इन्हें भी मामले का हिस्सा मानकर जांच कर रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कथित फर्जीवाड़े से जुड़े पैसों का इस्तेमाल अमेरिका के लॉस एंजिलिस में एक महंगा आलीशान बंगला खरीदने में भी किया गया। इस संपत्ति की कीमत लगभग 208 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि धन का स्रोत क्या था और क्या इस खरीद में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी रकम का इस्तेमाल हुआ। वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जिन रक्षा परियोजनाओं पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम अनुबंध तक नहीं पहुंचीं। मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत के अनुसार किसी भी प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली थी, इसलिए सरकार को प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। फिर भी पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए संबंधित तथ्यों की जांच जारी है। दूसरी ओर अमेरिका में भी गौरव श्रीवास्तव के खिलाफ वर्ष 2024 से धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय मामलों में कानूनी कार्रवाई चल रही है</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेंसेक्स 200 अंक चढ़ा, IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी 24,500 के करीब पहुंचा, घरेलू बाजार में सकारात्मक रुख; एशियाई बाजारों में दबाव के बीच भारतीय सूचकांकों ने दिखाई मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-200-points-and-market-strengthens-due-to-buying/article-58052"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sensex-today-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 78,500 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 50 अंक मजबूत होकर 24,500 के आसपास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी और कुछ प्रमुख कंपनियों में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी से बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बीच निवेशक अब आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार खुलने के साथ ही कई बड़ी आईटी और बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। शुरुआती सत्र में निवेशकों ने इन क्षेत्रों में ज्यादा रुचि दिखाई, जिससे दोनों प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में निवेशकों की नजर खास तौर पर आईटी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रदर्शन पर बनी हुई है। यदि कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में तेजी का यह रुख आगे भी जारी रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि वैश्विक बाजारों का माहौल पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा। एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। जापान का निक्केई सूचकांक भी कमजोरी के साथ खुला, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार को वैश्विक दबाव से काफी हद तक बचाए हुए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाजारों से सकारात्मक संकेत मिले थे। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों में खरीदारी के चलते नैस्डैक में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती का असर भारतीय निवेशकों के मनोबल पर भी देखने को मिला। जब वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की धारणा मजबूत रहती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव उभरते बाजारों, खासकर भारत जैसे देशों पर भी दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की सक्रिय खरीदारी भी बाजार को मजबूती देने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले कारोबारी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 3,792 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भी सीमित स्तर पर सकारात्मक निवेश दर्ज किया गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। इससे विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव का असर पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार के कारोबारी सत्र में भी शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 521 अंक चढ़कर 78,285 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 160 अंक की बढ़त के साथ 24,430 पर पहुंच गया था। लगातार दूसरे दिन बाजार में बनी मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कायम है। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा स्तरों पर सोच-समझकर निवेश करें और केवल मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में ही निवेश को प्राथमिकता दें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्थिक मोर्चे पर भी आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों, केंद्रीय बैंक की नीति से जुड़े संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाओं पर बनी रहेगी। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही परिणाम भी बाजार में सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। यदि आईटी और बैंकिंग कंपनियों के नतीजे मजबूत आते हैं तो इन क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों से प्रतिबंध हटाए, रक्षा और निर्यात क्षेत्र को मिल सकती है नई मजबूती</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिबंध हटने के बाद वैश्विक कारोबार, रक्षा आपूर्ति, हाई-टेक निर्यात और भारत-अमेरिका औद्योगिक सहयोग को मिलने की उम्मीद नई गति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/america-lifts-sanctions-from-four-indian-companies-defense-and-export/article-57513"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/us-sanctions-removed.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए हैं। इस फैसले को भारतीय उद्योग, रक्षा उत्पादन और निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल संबंधित कंपनियों के लिए वैश्विक कारोबार के नए अवसर खुलेंगे, बल्कि भारत की उभरती हुई विनिर्माण क्षमता और रक्षा क्षेत्र को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी। ऐसे समय में जब भारत वैश्विक सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, यह निर्णय दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को और गति दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका द्वारा प्रतिबंध हटाने के बाद संबंधित भारतीय कंपनियां अब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों में पहले की तुलना में अधिक सहजता से भाग ले सकेंगी। विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग, निवेश, उपकरणों की खरीद, वित्तीय लेनदेन और निर्यात से जुड़े कई काम आसान होने की संभावना है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी और वे वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति को और विस्तार दे सकेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा क्षेत्र के दृष्टिकोण से भी इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा निर्यात को भी लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। आधुनिक रक्षा उपकरण, एयरोस्पेस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म, विशेष मशीनरी और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में भारतीय कंपनियां लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। प्रतिबंध हटने के बाद इन कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं। रक्षा उद्योग में किसी भी कंपनी के लिए तकनीकी सहयोग और आपूर्ति नेटवर्क तक आसान पहुंच बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब प्रतिबंध हटते हैं तो विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त परियोजनाओं, अनुसंधान, उत्पादन और निर्यात के अवसर बढ़ जाते हैं। इससे नई तकनीकों का आदान-प्रदान भी आसान होता है और भारतीय उद्योगों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन करने में मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार भी पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे कार्यक्रमों के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई गई है। रक्षा उत्पादन में नई कंपनियों के प्रवेश, तकनीकी निवेश और निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए कई नीतिगत सुधार भी किए गए हैं। ऐसे में अमेरिका का यह फैसला भारतीय उद्योगों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने वाला माना जा रहा है। निर्यात क्षेत्र पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। भारत आज इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विशेष रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और रक्षा उपकरणों के निर्यात में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। यदि भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बेहतर पहुंच मिलती है तो देश के कुल निर्यात में भी वृद्धि की संभावना मजबूत होगी। इससे विदेशी मुद्रा आय बढ़ने के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फैसला वैश्विक निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत है। किसी देश की कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है और वे दीर्घकालिक निवेश के प्रति अधिक उत्साहित होते हैं। इसका लाभ संबंधित कंपनियों के साथ-साथ पूरे औद्योगिक क्षेत्र को मिल सकता है। नई साझेदारियां बनने से तकनीकी नवाचार और उत्पादन क्षमता दोनों में वृद्धि होने की संभावना रहती है। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है। सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में प्रतिबंध हटाने का यह निर्णय व्यापक रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को भी नई गति दे सकता है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर विकसित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने की दिशा में काम कर रही हैं और भारत एक विश्वसनीय उत्पादन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। बेहतर नीतिगत वातावरण, मजबूत बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन और बढ़ती घरेलू मांग भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना रही है। ऐसे में अमेरिकी निर्णय से भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सकती है। यदि प्रतिबंध हटने के बाद व्यापारिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और निर्यात गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ती हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा। रक्षा विनिर्माण, उच्च तकनीक उत्पादन और वैश्विक निर्यात नेटवर्क में भारत की भागीदारी बढ़ने से औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:44:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रम्प ने तेल कंपनियों को दी चेतावनी, पेट्रोल के दाम तुरंत घटाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ग्राहकों से अब भी जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। उन्होंने तेल कंपनियों को जल्द कीमतें कम करने की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-warns-oil-companies-demands-immediate-reduction-in-petrol-prices/article-57415"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों से तुरंत कीमतें कम करने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आ चुकी है, लेकिन इसका फायदा आम ग्राहकों तक नहीं पहुंच रहा। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब कच्चा तेल करीब 68 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया है, तब भी उपभोक्ताओं से पहले जैसी ऊंची कीमत वसूली जा रही है। उनके मुताबिक यह स्थिति न केवल अनुचित है बल्कि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी डाल रही है। डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने संदेश में कहा कि पेट्रोल की कीमतों में तुरंत कमी की जानी चाहिए ताकि लोग राहत महसूस कर सकें। उन्होंने तेल कंपनियों से अपील की कि पेट्रोल का दाम करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाया जाए। ट्रम्प का कहना है कि जब उत्पादन लागत और कच्चे तेल की कीमत घट रही है तो खुदरा कीमतों में भी उसी अनुपात में कमी दिखनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो इसका मतलब है कि कंपनियां ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूल रही हैं। उन्होंने इस तरह की स्थिति को गलत बताते हुए कंपनियों को जल्द कदम उठाने की सलाह दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्रम्प ने अपने बयान में यह भी कहा कि ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा कीमत वसूलना गैरकानूनी है और अगर तेल कंपनियों ने जल्द दाम कम नहीं किए तो उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार इस दिशा में कौन से नए कदम उठा सकती है, लेकिन उन्होंने पहले भी अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की जांच के निर्देश दिए थे। माना जा रहा है कि यदि कीमतों में जल्द राहत नहीं मिलती है तो प्रशासन की ओर से जांच और निगरानी और सख्त की जा सकती है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। खासतौर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। उस समय कई देशों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें भी बढ़ गई थीं। हालांकि अब हालात पहले की तुलना में कुछ सामान्य हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हुआ है। इसके बावजूद कई इलाकों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। यही मुद्दा ट्रम्प ने अपने बयान में उठाया है। पेट्रोल की खुदरा कीमत केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती। इसमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, टैक्स, वितरण व्यवस्था और स्थानीय बाजार की स्थिति भी शामिल होती है। कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद खुदरा स्तर पर कीमतों में बदलाव आने में कुछ समय लग जाता है। इसके बावजूद यदि लंबे समय तक राहत नहीं मिलती है तो उपभोक्ताओं और सरकार दोनों की ओर से सवाल उठना स्वाभाविक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका में ईंधन की कीमतें राजनीतिक मुद्दा भी बन जाती हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जेब, महंगाई और परिवहन लागत पर पड़ता है। यही वजह है कि सरकारें अक्सर ईंधन की कीमतों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखती हैं। ट्रम्प का ताजा बयान भी ऐसे समय आया है जब महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है कि वे कीमतों की समीक्षा करें और उपभोक्ताओं को राहत देने पर विचार करें। तेल कंपनियों की ओर से ट्रम्प के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं है कि आने वाले दिनों में खुदरा पेट्रोल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:18:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंदौर बना ईवी और ग्रीन एनर्जी का नया हब, निवेशकों ने दिखाई रुचि</title>
                                    <description><![CDATA[ईवी कॉन्क्लेव में देशभर के निवेशक, स्टार्टअप और उद्योग विशेषज्ञ जुटे, स्वच्छ परिवहन, ग्रीन एनर्जी और भविष्य की तकनीकों पर हुआ मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3f6eff911c9/article-57105"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-ev-conclave.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर ने एक बार फिर खुद को देश के उभरते हुए नवाचार केंद्र के रूप में साबित किया है। शुक्रवार को शहर में आयोजित इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ विकास और भविष्य की तकनीकों को लेकर एक साझा रोडमैप तैयार करना भी था। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव ने यह संकेत दिया कि अब भारत के टियर-2 शहर भी हरित विकास और नई तकनीकों के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। कार्यक्रम में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे। आयोजन का संचालन ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा किया गया, जबकि इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शहर की स्वच्छता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की पहचान को देखते हुए यह आयोजन इंदौर के लिए काफी अहम माना गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजन स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कॉन्क्लेव के दौरान इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैटरी टेक्नोलॉजी, ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भविष्य की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार केवल निजी परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन, माल ढुलाई और औद्योगिक उपयोग में भी तेजी से बढ़ेगा। यदि चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी निर्माण और ऊर्जा भंडारण तकनीकों में तेजी से निवेश किया जाता है तो भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है। इसके लिए सरकारी नीतियों, निजी निवेश और तकनीकी नवाचार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा। कॉन्क्लेव में शामिल कई निवेशकों ने स्टार्टअप्स के साथ संभावित साझेदारी और निवेश को लेकर भी चर्चा की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा स्टार्टअप पिच सेशन रहा। देशभर से प्राप्त करीब 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल नौ स्टार्टअप्स को अंतिम प्रस्तुति का अवसर मिला। इन स्टार्टअप्स ने निवेशकों के सामने अपने उत्पाद, तकनीक और बिजनेस मॉडल पेश किए। कई स्टार्टअप्स ने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, स्मार्ट बैटरी सिस्टम, ऊर्जा प्रबंधन और एआई आधारित मोबिलिटी समाधान जैसे क्षेत्रों में अपने नवाचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुति के बाद निवेशकों और स्टार्टअप संस्थापकों के बीच विस्तृत नेटवर्किंग और व्यावसायिक चर्चाएं भी हुईं। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले उद्योग प्रतिनिधियों का मानना था कि भारत में ग्रीन एनर्जी सेक्टर आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग, कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयास और सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं इस बदलाव को और गति देंगी। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अब निवेशकों का रुझान केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंदौर जैसे शहर भी नई तकनीकों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ह्युन्स ऑफ ईवी के सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से आगे बढ़ रही है और इस क्षेत्र में नवाचार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उनके अनुसार ऐसे मंच उद्योग, निवेशकों और युवा उद्यमियों को एक साथ लाकर नए अवसर पैदा करते हैं। वहीं सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं और उन्हें निवेश प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। कार्यक्रम में डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी और ईवी आधारित तकनीक अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। मध्य भारत तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह उद्योग, सरकार और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ता रहा तो भारत स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। कॉन्क्लेव के समापन पर यह स्पष्ट नजर आया कि इंदौर केवल स्वच्छ शहर ही नहीं, बल्कि भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार का भी मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। निवेशकों, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच बने नए संपर्क आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स और निवेश का आधार बन सकते हैं। इससे स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और स्वच्छ ऊर्जा आधारित उद्योगों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 13:11:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कच्चे तेल की कीमतें फिर 72 डॉलर पर, एपल प्रोडक्ट महंगे; टेक और बाजार में बड़े बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध से पहले वाले स्तर पर लौटा ब्रेंट क्रूड, भारत में आईपैड और मैकबुक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, माइक्रोन ने मार्केट कैप में मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-prices-again-at-72-apple-products-expensive-tech/article-57087"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/crude-oil-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ईरान से जुड़े तनाव के बीच जो उछाल कच्चे तेल में आया था, वह अब लगभग खत्म हो चुका है। गुरुवार को वैश्विक बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। यह वही कीमत है जो युद्ध जैसे हालात बनने से पहले दर्ज की गई थी। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सप्लाई को लेकर डर कम होने और बाजार में स्थिरता लौटने से कीमतों पर दबाव बना है। इसका असर आने वाले दिनों में कई देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऐसे समय आई है जब दुनिया भर के निवेशक पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कुछ सप्ताह पहले तक यह आशंका जताई जा रही थी कि यदि तनाव और बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी डर से कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। लेकिन हालात फिलहाल नियंत्रण में रहने और सप्लाई चेन सामान्य रहने से बाजार का भरोसा वापस लौटा है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड फिर से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने पर आयात बिल घट सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है। हालांकि खुदरा ईंधन की कीमतों में किसी बदलाव का फैसला तेल कंपनियां और सरकार बाजार की स्थिति को देखते हुए करती हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की यह गिरावट घरेलू बाजार तक कब पहुंचती है। इधर टेक्नोलॉजी सेक्टर से भी बड़ी खबर सामने आई है। एपल ने अमेरिका में अपने कई लोकप्रिय प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने आईपैड और मैकबुक के कुछ मॉडल 300 डॉलर तक महंगे कर दिए हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है। भारत में इन डिवाइसों की कीमतों में लगभग एक लाख रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद प्रीमियम कैटेगरी के कई मॉडल पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं। कीमतों में यह बदलाव उत्पादन लागत, आयात शुल्क, वैश्विक सप्लाई चेन और मुद्रा विनिमय दर जैसे कई कारणों से जुड़ा हो सकता है। भारत में एपल के प्रोडक्ट पहले से ही प्रीमियम श्रेणी में आते हैं। ऐसे में नई कीमतें उन ग्राहकों पर सीधा असर डालेंगी जो नया आईपैड या मैकबुक खरीदने की योजना बना रहे हैं। कई रिटेल स्टोर्स पर नई कीमतों के अनुसार बिक्री शुरू हो चुकी है और ग्राहक भी इस बढ़ोतरी को लेकर चर्चा कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर शेयर बाजार और टेक इंडस्ट्री में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन ने बाजार पूंजीकरण के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़ने के बाद उसने दुनिया की दो बड़ी टेक कंपनियों मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा माइक्रोन को मिल रहा है। निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ने से कंपनी के शेयरों में तेजी आई और उसका मूल्यांकन भी मजबूत हुआ। एआई तकनीक के तेजी से विस्तार ने सेमीकंडक्टर कंपनियों की स्थिति बदल दी है। पहले जहां निवेशकों का अधिक ध्यान सोशल मीडिया और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों पर था, वहीं अब चिप बनाने वाली कंपनियां भी बाजार की अगली बड़ी ताकत बनती दिखाई दे रही हैं। माइक्रोन की इस उपलब्धि को उसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि एआई आधारित तकनीकों की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो सेमीकंडक्टर उद्योग में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक ही दिन में सामने आई इन तीन खबरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की अलग-अलग तस्वीर पेश की है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऊर्जा बाजार को राहत देती दिख रही है, वहीं एपल के महंगे प्रोडक्ट उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकते हैं। दूसरी तरफ माइक्रोन का तेजी से बढ़ता बाजार मूल्य यह संकेत देता है कि दुनिया की टेक इंडस्ट्री अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:57:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉमर्शियल LPG सप्लाई पर लगी पाबंदियां हटीं, अब 100% गैस उपलब्ध कराएगी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[एलपीजी आपूर्ति में सुधार के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, उद्योगों के लिए बल्क सप्लाई भी आंशिक रूप से बहाल, घरेलू उपलब्धता बनाए रखने पर रहेगा जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/restrictions-on-commercial-lpg-supply-lifted-now-government-will-provide/article-56982"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/commercial-lpg.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने एलपीजी आपूर्ति को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों पर लगी सभी सेक्टर आधारित पाबंदियां हटा दी हैं। इसके साथ ही राज्यों को पहले की तरह 100 फीसदी कॉमर्शियल गैस सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। गैस संकट के दौरान होटलों, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही थी, लेकिन अब हालात में सुधार के बाद यह व्यवस्था सामान्य की जा रही है। सरकार के इस फैसले से व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि देश में एलपीजी की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर हुई है। घरेलू उत्पादन बढ़ने और विदेशों से आयातित एलपीजी कार्गो के आने की संभावना को देखते हुए कॉमर्शियल सप्लाई पर लगी सभी सीमाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोक दी गई बल्क एलपीजी सप्लाई को भी आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। अब बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को संकट से पहले की खपत के स्तर का 50 प्रतिशत तक बल्क एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार का मानना है कि इस फैसले से होटल, रेस्तरां, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को राहत मिलेगी। पिछले कुछ महीनों से गैस की सीमित उपलब्धता के कारण कई उद्योगों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ रहा था। अब सप्लाई सामान्य होने से उत्पादन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, सप्लाई चेन में सुधार के बाद सी-3 और सी-4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स के डायवर्जन को भी कम किया जाएगा। इससे पेट्रोकेमिकल और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को उनका पुराना आवंटन फिर से मिलने लगेगा। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से रोजाना कम से कम 40 हजार टन घरेलू एलपीजी उत्पादन बनाए रखने का लक्ष्य तय किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दरअसल, पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दिया था। क्षेत्र में संघर्ष और समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के कारण एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई बाधाओं का असर देश की आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ा। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने शुरुआत में घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी और व्यावसायिक क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति में कटौती की थी। गैस संकट के दौरान कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। कारोबारियों का कहना था कि बढ़ती कीमतों और सीमित उपलब्धता के कारण होटल और रेस्तरां उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। कई छोटे व्यवसायों को परिचालन लागत बढ़ने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अब सरकार के ताजा फैसले से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि कीमतों में स्थायी कमी अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी आयातकों में शामिल है और देश की कुल जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। ऐसे में वैश्विक हालात सामान्य होने पर ही घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल विदेशी आपूर्ति बेहतर होने के संकेत मिले हैं, जिससे सरकार ने प्रतिबंधों में ढील देने का निर्णय लिया है। 'प्री-क्राइसिस लेवल' का मतलब उस समय की खपत से है जब गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। संकट के दौरान राज्यों और उद्योगों को सीमित मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही थी, ताकि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। अब धीरे-धीरे उसी स्तर की ओर वापसी की जा रही है। सरकार का कहना है कि अगर आपूर्ति की स्थिति लगातार बेहतर बनी रहती है तो आने वाले समय में उद्योगों को और अधिक राहत दी जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:34:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कच्चा तेल 72 डॉलर प्रति बैरल पर लौटा, पेट्रोल-डीजल में राहत के लिए करना होगा इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान तनाव कम होने के बाद वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता हुआ, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आने में अभी करीब ढाई महीने का समय लग सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-returns-to-72-per-barrel-will-have-to/article-56980"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/crude-oil-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर उस स्तर पर पहुंच गई हैं, जहां वे ईरान से जुड़े तनाव शुरू होने से पहले थीं। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। यह लगभग वही स्तर है, जो युद्ध जैसे हालात बनने से पहले दर्ज किया गया था। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होने से उम्मीद जरूर बढ़ी है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी राहत मिल सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं को इसका फायदा तुरंत मिलने वाला नहीं है। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होना माना जा रहा है। हाल के दिनों में हुई बातचीत के बाद ईरानी तेल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई है। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। जहाजों की संख्या बढ़ने से बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई और इसका असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभी भी जहाजों की आवाजाही पहले जैसी सामान्य नहीं हुई है। युद्ध से पहले जहां प्रतिदिन 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या उससे कुछ कम बनी हुई है। इसके बावजूद बाजार को यह भरोसा मिला है कि आने वाले समय में तेल की आपूर्ति सामान्य बनी रह सकती है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने का असर सीधे पेट्रोल पंपों पर नहीं दिखता। इसकी सबसे बड़ी वजह तेल की खरीद और सप्लाई की लंबी प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल जिन पेट्रोल और डीजल उत्पादों की बिक्री हो रही है, वे उस कच्चे तेल से तैयार किए गए हैं, जिसे उस समय खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें काफी अधिक थीं। ऐसे में वर्तमान में सस्ता हुआ कच्चा तेल अभी उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी देश से खरीदा गया कच्चा तेल पहले वहां के बंदरगाहों तक पहुंचता है और फिर जहाजों में लोड किया जाता है। इसके बाद समुद्री रास्ते से भारत आने में लगभग दो महीने तक का समय लग सकता है। भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद तेल को रिफाइनरियों में भेजा जाता है, जहां उससे पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसके बाद यह ईंधन देशभर के डिपो और पेट्रोल पंपों तक पहुंचता है। पूरी प्रक्रिया में करीब 75 से 80 दिन लग जाते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने के बावजूद उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की संभावना नहीं है। अगर मौजूदा स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर बनी रहती हैं तो अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत से कुछ असर दिखाई देना शुरू हो सकता है। वहीं पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वास्तविक राहत दशहरे के आसपास मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण कारण तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी है। कंपनियां पिछले कुछ समय से पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर नुकसान झेल रही हैं। इसके अलावा सरकार ने पहले उत्पाद शुल्क में भी कटौती की थी, जिससे राजस्व पर असर पड़ा। ऐसे में यदि कच्चे तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं तो शुरुआती अवधि में कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर सकती हैं। इसके बाद ही खुदरा कीमतों में कटौती का फैसला लिया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां पहले की तुलना में काफी स्थिर दिखाई दे रही हैं। यदि पश्चिम एशिया में दोबारा कोई बड़ा तनाव नहीं बढ़ता और तेल आपूर्ति सामान्य रहती है तो निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी आने की संभावना कम है। इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों को राहत मिल सकती है और महंगाई पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:34:18 +0530</pubDate>
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                <title>सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी तीन दिन में ₹22 हजार टूटी</title>
                                    <description><![CDATA[सोना ₹2,156 सस्ता होकर ₹1.40 लाख पर पहुंचा, वैश्विक हालात और मुनाफावसूली से कीमती धातुओं पर बढ़ा दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-fall-in-gold-and-silver-silver-fell-by-%E2%82%B9/article-56910"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-price-today-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। गुरुवार, 25 जून 2026 को कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 2,156 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है, जिसके बाद इसका भाव घटकर करीब 1.40 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं चांदी की कीमत में एक ही दिन में 6,550 रुपए प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है और इसका भाव 2.15 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गया है। खास बात यह है कि चांदी पिछले तीन कारोबारी दिनों में ही करीब 22 हजार रुपए प्रति किलो सस्ती हो चुकी है, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सोना और चांदी दोनों में हाल के दिनों में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जून महीने की शुरुआत में सोना जहां करीब 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, वहीं अब इसमें लगभग 16 हजार रुपए की गिरावट आ चुकी है। इसी तरह चांदी का भाव भी महीने की शुरुआत में 2.63 लाख रुपए प्रति किलो था, जो अब घटकर 2.15 लाख रुपए के आसपास पहुंच गया है। यानी सिर्फ एक महीने में चांदी लगभग 48 हजार रुपए प्रति किलो सस्ती हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस साल की शुरुआत से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कीमतों में उतार-चढ़ाव और भी ज्यादा दिखाई देता है। वर्ष 2026 की शुरुआत में सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद जनवरी के अंत तक इसमें जोरदार तेजी आई और कीमतें 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं। हालांकि इसके बाद बाजार का रुख बदला और लगातार गिरावट का दौर शुरू हो गया। वर्तमान कीमतों को देखें तो सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 36 हजार रुपए तक नीचे आ चुका है। चांदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही है। पिछले वर्ष के अंत में चांदी का भाव लगभग 2.30 लाख रुपए प्रति किलो था। जनवरी के अंत तक इसमें जबरदस्त उछाल आया और कीमत 3.86 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर माना जाता है। लेकिन उसके बाद बाजार में आई कमजोरी ने चांदी की चमक फीकी कर दी। करीब पांच महीनों के भीतर ही चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 1.70 लाख रुपए प्रति किलो तक टूट चुकी है। इतनी बड़ी गिरावट ने निवेशकों को भी हैरान किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक समझ और तनाव में आई कमी को माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में युद्ध और संघर्ष की आशंकाओं के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे थे। सोना और चांदी को परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए इनके दाम लगातार बढ़ रहे थे। लेकिन जैसे ही भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ, निवेशकों ने इन धातुओं से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया। दूसरा महत्वपूर्ण कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को माना जा रहा है। हाल के संकेतों से यह संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। कुछ विशेषज्ञ तो यह भी मान रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की मांग पर पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाने वाली एक अहम वजह बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने पर सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दिखाई देते हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है। इसके अलावा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने भी कीमतों में तेज गिरावट को बढ़ावा दिया है। बड़े फंड हाउस और संस्थागत निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर अपने निवेश का लाभ बुक किया, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ी। गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF में भी हाल के दिनों में बिकवाली का दबाव देखा गया है। निवेशकों का सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षण कम होने से इन फंड्स से पैसा निकलना शुरू हुआ है। इसका असर घरेलू बाजारों में भी दिखाई दे रहा है और कीमतों में गिरावट का एक कारण इसे भी माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौजूदा गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। शादी-विवाह के सीजन और त्योहारों से पहले कीमतों में आई नरमी ग्राहकों को राहत दे सकती है। लेकिन निवेश से पहले बाजार की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी होगा। सोना खरीदते समय ग्राहकों को हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। साथ ही खरीदारी से पहले विभिन्न स्रोतों से कीमतों की जांच करना भी जरूरी है। सही जानकारी और सावधानी के साथ किया गया निवेश भविष्य में बेहतर लाभ दे सकता है।  घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक नीतियों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में सोना और चांदी की दिशा तय करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:41:11 +0530</pubDate>
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                <title>जेट फ्यूल महंगा होने से हवाई यात्रा पर असर, किराए बढ़ने के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[मैकिंजी की रिपोर्ट में दावा, वैश्विक सप्लाई दबाव और बढ़ती ईंधन लागत के चलते आने वाले महीनों में एयर टिकट 25% तक महंगे हो सकते हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a3ccd1c3b033/article-56883"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/air-travel-cost.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आने वाले समय में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी जेब कुछ ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। वैश्विक कंसल्टिंग फर्म मैकिंजी की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण एयर टिकटों के दाम में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, रिफाइनरियों की सीमित उत्पादन क्षमता और ईंधन भंडारों को फिर से भरने की कोशिशों ने जेट फ्यूल बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर एयरलाइंस कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है और यदि हालात लंबे समय तक बने रहते हैं तो इसका बोझ यात्रियों तक पहुंच सकता है। एविएशन इंडस्ट्री में ईंधन सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। आमतौर पर किसी भी हवाई टिकट की कुल कीमत में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा केवल फ्यूल कॉस्ट का होता है। ऐसे में जेट फ्यूल के दाम बढ़ने का असर एयरलाइंस के परिचालन खर्च पर तुरंत दिखाई देता है। एयरलाइंस कंपनियां लगातार बढ़ती लागत को लंबे समय तक खुद वहन नहीं कर सकतीं, इसलिए अंततः किराए में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों को लेकर होने वाला हर बदलाव एयर ट्रैवल सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मैकिंजी की रिपोर्ट में ‘क्रैक स्प्रेड’ को भी प्रमुख कारण बताया गया है। क्रैक स्प्रेड वह अंतर होता है जो कच्चे तेल और उससे तैयार होने वाले रिफाइंड उत्पादों की कीमतों के बीच होता है। सामान्य परिस्थितियों में जेट फ्यूल का क्रैक स्प्रेड 20 डॉलर प्रति बैरल या उससे कम रहता है। हालांकि रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2026 के दौरान यह औसतन 50 डॉलर प्रति बैरल से अधिक तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है तो एयरलाइंस कंपनियों के लिए ईंधन खरीदना काफी महंगा हो जाएगा और परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। खाड़ी क्षेत्र और प्रमुख एशियाई देशों से जेट फ्यूल की आपूर्ति में कमी भी बाजार को प्रभावित कर रही है। वैश्विक जेट फ्यूल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों से आता है। हाल के महीनों में कई देशों ने अपने रणनीतिक ईंधन भंडार को सुरक्षित रखने के लिए निर्यात पर सीमित नियंत्रण लगाए हैं। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध आपूर्ति घट गई है। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की नीतियों का असर भी वैश्विक ईंधन व्यापार पर पड़ता है, क्योंकि ये देश ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौजूदा स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि कई बड़ी रिफाइनरियां पहले से ही अपनी अधिकतम क्षमता के करीब काम कर रही हैं। ऐसे में मांग बढ़ने पर उत्पादन को तुरंत बढ़ा पाना आसान नहीं है। सप्लाई और मांग के बीच पैदा हो रहा यह असंतुलन कीमतों को ऊपर बनाए रख सकता है। फिलहाल कई देशों और कंपनियों द्वारा पुराने ईंधन भंडार का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि बाजार में तत्काल कमी न दिखाई दे, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं मानी जा रही। हालांकि बाजार में कुछ राहत के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम हाल के दिनों में नीचे आए हैं, जिससे ऊर्जा क्षेत्र को कुछ राहत मिली है। जानकारों का मानना है कि यदि तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है और बड़े भू-राजनीतिक संकट नहीं उभरते हैं तो जेट फ्यूल की कीमतों पर दबाव कुछ कम हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बावजूद विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि केवल कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। जेट फ्यूल की कीमतें केवल क्रूड ऑयल पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि रिफाइनिंग क्षमता, लॉजिस्टिक्स, भंडारण और वैश्विक मांग जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं। इसलिए निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है। एयरलाइंस कंपनियां भी बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और लागत प्रबंधन के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रही हैं। भारत जैसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजार के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि एयर टिकट महंगे होते हैं तो इसका असर पर्यटन, व्यापारिक यात्राओं और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। खासतौर पर त्योहारी सीजन और छुट्टियों के दौरान यात्रा की योजना बनाने वाले लोगों को अधिक खर्च का सामना करना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 12:16:57 +0530</pubDate>
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