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                <title>Economy News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Economy News RSS Feed</description>
                
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                <title>डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती, 58 पैसे की तेज बढ़त</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल में गिरावट और शेयर बाजार की मजबूती से रुपये ने शुरुआती कारोबार में 94.60 का स्तर छुआ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-strengthened-by-58-paise-against-dollar/article-55956"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-rupee-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">15 जून 2026, सोमवार की सुबह विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूत शुरुआत की और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 58 पैसे की तेजी दर्ज की। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.70 पर खुला और थोड़ी ही देर में बढ़त दिखाते हुए 94.60 के स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूती पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले उल्लेखनीय मानी जा रही है और इसे वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक माहौल का परिणाम बताया जा रहा है। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये की इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट मानी जा रही है, जो अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद देखने को मिली। लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के खत्म होने की खबर ने वैश्विक बाजारों में स्थिरता लाई है, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर भी बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत शुरुआत की, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा। विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी बढ़ने और फंड फ्लो में सुधार होने से डॉलर की मांग में थोड़ी कमी आई, जिससे भारतीय मुद्रा को सहारा मिला। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में खरीदारी के चलते बाजार में भरोसा बढ़ा और इसका असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। फॉरेक्स डीलरों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी भी रुपये की मजबूती का एक प्रमुख कारण है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है और सुरक्षित निवेश की मांग घट गई है। ऐसे में निवेशक जोखिम वाले बाजारों की ओर लौट रहे हैं, जिससे एशियाई मुद्राओं को मजबूती मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी से आयात बिल कम होता है और चालू खाते के घाटे पर दबाव घटता है। इससे रुपये पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उसकी स्थिरता बढ़ती है। यही कारण है कि तेल बाजार में गिरावट के साथ रुपये में तेजी देखी जा रही है। आने वाले दिनों में रुपये की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो रुपये में और मजबूती देखी जा सकती है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतक भी रुपये की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुद्रा बाजार में कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की भावना सकारात्मक बनी हुई है। वैश्विक शांति संकेतों के कारण जोखिम का माहौल कम हुआ है और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ा है। इससे रुपये को मजबूती मिल रही है और अल्पकालिक रूप से यह रुझान जारी रह सकता है। यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि मुद्रा बाजार में अस्थिरता हमेशा बनी रहती है। किसी भी अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय घटना या आर्थिक डेटा के कारण रुपये में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। 15 जून 2026 का दिन भारतीय रुपये के लिए सकारात्मक शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक बाजारों में सुधार, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और घरेलू शेयर बाजारों की मजबूती ने मिलकर रुपये को समर्थन दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:41:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इस हफ्ते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[चांदी ₹14,326 सस्ती होकर ₹2.43 लाख प्रति किलो, सोना ₹6,438 गिरकर ₹1.48 लाख पर, ऑल-टाइम हाई से अब तक भारी नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2cee04ad65f/article-55790"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-silver-crash.jpg" alt=""></a><br /><p>सोने और चांदी की कीमतों में इस हफ्ते बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार में निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹6,438 की गिरावट आई है और अब यह घटकर लगभग ₹1.48 लाख पर आ गया है। पिछले हफ्ते यही कीमत करीब ₹1.54 लाख के स्तर पर थी। वहीं चांदी के दाम में भी तेज गिरावट देखने को मिली है और यह ₹14,326 कम होकर ₹2.43 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई है। इस गिरावट ने उन निवेशकों को खास तौर पर प्रभावित किया है जिन्होंने हाल के महीनों में ऊंचे दामों पर खरीदारी की थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय की गिरावट अचानक नहीं है, बल्कि पिछले कई हफ्तों से बन रहे दबाव का परिणाम है। खासकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और निवेशकों के रुख में बदलाव ने इस ट्रेंड को और तेज कर दिया है। इस साल सोने और चांदी दोनों की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 31 दिसंबर 2025 को सोना करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, जो जनवरी के अंत तक बढ़कर ₹1.76 लाख के ऑल-टाइम हाई तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट का दौर शुरू हो गया और अब तक सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब ₹28,000 तक सस्ता हो चुका है। चांदी के बाजार में भी इसी तरह का पैटर्न देखने को मिला है। दिसंबर 2025 में चांदी लगभग ₹2.30 लाख प्रति किलो के स्तर पर थी, जो जनवरी में तेजी से बढ़कर ₹3.86 लाख प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन उसके बाद से लगातार प्रॉफिट बुकिंग और बाजार में बिकवाली के चलते चांदी के दामों में भारी गिरावट आई है और अब तक यह करीब ₹1.43 लाख तक नीचे आ चुकी है।</p>
<p>इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण निवेशकों का ‘कैश की ओर रुख’ बताया जा रहा है। मिडिल ईस्ट और अन्य क्षेत्रों में चल रहे तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित नकदी (liquidity) बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में कई बड़े निवेशक अपने सोने-चांदी के होल्डिंग्स को बेचकर कैश में बदल रहे हैं ताकि अनिश्चित समय में वित्तीय स्थिरता बनी रहे।इसके अलावा जनवरी में सोना और चांदी दोनों ही अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए थे, जिसके बाद बड़े निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी। इस प्रॉफिट बुकिंग के चलते बाजार में सप्लाई अचानक बढ़ गई और कीमतों पर दबाव बनने लगा। जब सप्लाई बढ़ती है और डिमांड तुलनात्मक रूप से स्थिर या कमजोर रहती है, तो कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक माना जाता है। दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक संकेतकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी कीमती धातुओं पर दबाव डाला है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने-चांदी जैसी कमोडिटी में निवेश कम हो जाता है। भारत में भी इस गिरावट का असर बाजारों में साफ देखा जा रहा है। ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में गिरावट से शॉर्ट टर्म में खरीदारी बढ़ सकती है, लेकिन निवेशक अभी भी असमंजस की स्थिति में हैं। कई लोग आगे और गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं, इसलिए बड़ी खरीद से बच रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:38:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल-डीजल फिर हो सकता है महंगा, तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे ने बढ़ाई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ती अंडर-रिकवरी के बीच पेट्रोल-डीजल में 5 रुपए प्रति लीटर तक और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a23e695a8fb5/article-55103"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-price-hike.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद अब यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में 5 रुपए प्रति लीटर तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। आर्थिक विश्लेषण करने वाली एजेंसियों के आकलन के अनुसार सरकारी तेल विपणन कंपनियां लगातार बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में कीमतों में और वृद्धि की संभावना से आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारों के मुताबिक मई महीने के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को राहत नहीं मिली है। रिपोर्टों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कंपनियां अभी भी लागत से कम कीमत वसूल रही हैं, जिससे उन्हें रोजाना सैकड़ों करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि कीमतों में एक और बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों ने तेल बाजार को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। देश की अधिकांश पेट्रोलियम जरूरतें आयात पर निर्भर हैं, इसलिए वैश्विक कीमतों में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">आर्थिक एजेंसियों के विश्लेषण के अनुसार हाल में हुई मूल्य वृद्धि के बावजूद तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर कई रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि इस स्थिति को संतुलित करना है तो कंपनियों को खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं तो कुल बढ़ोतरी 10 रुपए प्रति लीटर तक भी पहुंच सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईंधन की कीमतों में संभावित वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका व्यापक प्रभाव पूरे आर्थिक तंत्र पर पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। सड़क परिवहन भारत की आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ माना जाता है। देश में अधिकांश माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है और परिवहन लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने का असर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक पर दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से दूध, फल, सब्जियां, दालें, मसाले, चाय, कॉफी, अंडे, मांस और मछली जैसे उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इन वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब ईंधन महंगा होता है तो उसका अतिरिक्त खर्च अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंच जाता है। यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव को महंगाई से सीधे जोड़कर देखा जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उद्योग जगत पर भी इसका असर पड़ सकता है। विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों को पहले ही कच्चे माल की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है। यदि परिवहन खर्च भी बढ़ता है तो उत्पादन लागत और अधिक बढ़ सकती है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा और कई मामलों में उत्पादों की कीमतें भी बढ़ानी पड़ सकती हैं। आर्थिक विशेषज्ञ इसे दोहरा झटका बता रहे हैं, क्योंकि उद्योगों को उत्पादन और वितरण दोनों स्तरों पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। उधर, सरकार और तेल कंपनियों के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बनी हुई है। एक तरफ कंपनियों के वित्तीय नुकसान को कम करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर बढ़ती महंगाई और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि ईंधन मूल्य निर्धारण को लेकर आने वाले दिनों में चर्चा और तेज होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वर्तमान वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमतें अनुमान से काफी ऊपर बनी हुई हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियों में जल्द सुधार नहीं होता है तो घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल आम लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और तेल कंपनियां आगे क्या फैसला लेती हैं और संभावित मूल्य वृद्धि को किस तरह संतुलित किया जाता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी केवल ईंधन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई दर, परिवहन व्यवस्था और आम नागरिकों के मासिक बजट से भी जुड़ा हुआ विषय है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 15:38:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल फिर हुआ महंगा, 10 दिन में तीसरी बढ़ोतरी से बढ़ी टेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई। दिल्ली में पेट्रोल 99.51 और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-and-diesel-became-expensive-again-third-increase-in-10/article-54017"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-and-diesel-prices-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Petrol and Diesel Prices Today:</strong> देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। शनिवार को जारी नई दरों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल की कीमत </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर बढ़ी है। पिछले </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के अंदर यह तीसरी बार है जब ईंधन के दामों में इजाफा हुआ है। लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब आम लोगों पर पड़ने लगा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन लोगों पर जो रोजाना वाहन का इस्तेमाल करते हैं और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इससे चिंताएं बढ़ गई हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">99.51<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि डीजल </span>92.49<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की बढ़ोतरी हुई थी और इसके बाद </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को भी दाम बढ़ाए गए थे। अब ताजा बढ़ोतरी के साथ देखते हैं तो पिछले </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमत में लगभग </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये का इजाफा हो चुका है। कई शहरों में इसका असर ऑटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैक्सी और मालभाड़े पर भी धीरे-धीरे देखने को मिल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी। इसके बाद कई राज्यों के मुख्यमंत्री</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्री और बड़े नेता अपने काफिलों को छोटा करने लगे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सरकार ने ईंधन बचत का संदेश बताया। खुद प्रधानमंत्री मोदी के काफिले में भी गाड़ियों की संख्या कम की गई थी। इस दौरान कई जगहों से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों और ईंधन खत्म होने की खबरें भी आई थीं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर दबाव बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजार पर भी असर पड़ रहा है। इस बीच खबर आई थी कि भारत ने मई महीने में सस्ता कच्चा तेल खरीदने की मात्रा बढ़ाई है। जानकारों का मानना है कि अगर आगे भी कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदने का सिलसिला जारी रहता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार की स्थिति को देखते हुए तुरंत राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 11:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या विदेश जाने वालों पर लगेगा नया टैक्स? पीएम मोदी ने खुद बताई पूरी सच्चाई</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश यात्रा पर टैक्स लगाए जाने की खबरों को पीएम मोदी ने गलत बताया। सरकार ने साफ किया कि कोई नया टैक्स लगाने की तैयारी नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/will-there-be-a-new-tax-on-those-going-abroad/article-53522"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/pm-modi-foreign-travel-tax.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेश यात्रा पर संभावित अतिरिक्त टैक्स लगाने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी। सोशल मीडिया और कुछ खबरों में दावा किया गया था कि सरकार विदेश यात्रा करने वालों पर नया टैक्स या सेस लगाने पर विचार कर रही है। जैसे ही यह चर्चा तेज हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम मोदी ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार की तरफ से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और विदेश यात्रा पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहा जा रहा है कि हाल के दिनों में ईरान-अमेरिका तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सरकार चिंतित है। इसी बीच पीएम मोदी ने लोगों से ईंधन की बचत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैर-जरूरी खर्चों को कम करने और आवश्यकता पड़ने पर ही विदेश यात्रा करने की अपील की थी। इसके बाद कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि सरकार अस्थायी रूप से विदेश यात्राओं पर नया टैक्स लगाने की सोच सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि एक साल के लिए लागू हो सकता है और इस पर उच्च स्तरीय चर्चा चल रही है। लेकिन पीएम ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार लोगों की जिंदगी आसान बनाने और व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि उन पर अतिरिक्त बोझ डालने की।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">करीब 12 सालों में यह पहली बार है जब पीएम मोदी ने किसी मीडिया रिपोर्ट पर सीधे प्रतिक्रिया दी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उनका यह बयान काफी चर्चा में रहा। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब विदेश यात्रा पर टैक्स की खबरें सोशल मीडिया पर फैलीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी। कई लोग जानना चाह रहे थे कि क्या विदेश यात्रा पर अतिरिक्त पैसे देने होंगे। ऐसे में प्रधानमंत्री कार्यालय ने तुरंत स्थिति को साफ किया। बाद में संबंधित मीडिया संस्थान ने भी अपनी रिपोर्ट वापस लेते हुए खेद जताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे साफ हो गया कि फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से विदेश यात्रा पर कोई नया टैक्स लगाने की योजना नहीं है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब विश्व के कई हिस्सों में आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सरकार लगातार ईंधन की बचत और खर्चों में संतुलन की बात कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लोगों से की गई अपील का मतलब किसी तरह की पाबंदी या नया टैक्स लगाना नहीं था। इसलिए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश यात्रा करने वालों को फिलहाल किसी अतिरिक्त शुल्क को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:04:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कल साइन, 5 साल में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[5000 भारतीय प्रोफेशनल्स को हर साल वीजा, 20 बिलियन डॉलर निवेश का वादा; संवेदनशील सेक्टरों को समझौते से बाहर रखा गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/india-new-zealand-free-trade-agreement-signed-tomorrow-aim-to-double/article-52182"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/india-new-zealand-fta.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत और न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आज  हस्ताक्षर किए जाएंगे। राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में होने वाले इस कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले शामिल होंगे। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है।</p>
<p>इस करार के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत के मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवा और नवाचार क्षेत्रों में करीब 20 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा। सरकार का मानना है कि इससे देश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।</p>
<p>समझौते का एक अहम पहलू सेवा क्षेत्र से जुड़ा है। इसके तहत न्यूजीलैंड हर साल 5,000 भारतीय पेशेवरों को अस्थायी कार्य वीजा प्रदान करेगा। इसमें आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ आयुष विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक भी शामिल होंगे। यह वीजा अधिकतम तीन वर्षों के लिए मान्य होगा।</p>
<p>सरकार ने इस समझौते में घरेलू उद्योग और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है। डेयरी उत्पाद, चीनी, दालें, अनाज, मसाले और खाद्य तेल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है। इन उत्पादों पर मौजूदा शुल्क व्यवस्था जारी रहेगी, जिससे स्थानीय उत्पादन पर असर न पड़े।</p>
<p>दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात उत्पादों पर शुल्क में कमी या समाप्ति का प्रावधान किया गया है। ऊन, कोयला, लकड़ी और मांस जैसे उत्पादों को ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जबकि कीवीफ्रूट, सेब, वाइन और शहद जैसे उत्पादों के लिए सीमित कोटा के तहत शुल्क में राहत दी जाएगी।</p>
<p>फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को भी इस समझौते से लाभ मिलने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड की नियामक संस्था भारत की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) रिपोर्ट को मान्यता देगी, जिससे भारतीय कंपनियों को वहां अपने उत्पादों की मंजूरी जल्दी मिल सकेगी और लागत में कमी आएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 10:31:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फोर्ब्स 2026: भारत में एक साल में 24 नए अरबपति जुड़े, कुल संख्या 229 हुई</title>
                                    <description><![CDATA[आर्सेलरमित्तल के शेयरों में उछाल से लक्ष्मी मित्तल की संपत्ति तेजी से बढ़ी; रोजाना औसतन 274 करोड़ रुपए की कमाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/forbes-2026-india-adds-24-new-billionaires-in-one-year/article-48215"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/tehran-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>वैश्विक बिजनेस पत्रिका फोर्ब्स की वर्ल्ड्स बिलियनेयर्स 2026 सूची के अनुसार भारत में अरबपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले एक साल में देश में 24 नए अरबपति जुड़े हैं, जिससे कुल संख्या बढ़कर 229 हो गई है। इस सूची में सबसे अधिक चर्चा उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल की संपत्ति में आई तेज बढ़ोतरी को लेकर है, जिसने उन्हें देश के सबसे अमीर लोगों की सूची में चौथे स्थान पर पहुंचा दिया है।</p>
<p>फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्टील कंपनी आर्सेलरमित्तल के शेयरों में पिछले साल 80 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसके चलते लक्ष्मी मित्तल की कुल संपत्ति बढ़कर लगभग 31 अरब डॉलर (करीब 2.87 लाख करोड़ रुपए) हो गई है। पिछले एक वर्ष में उनकी दौलत में 20 अरब डॉलर यानी लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। इस हिसाब से उन्होंने बीते एक साल में औसतन प्रतिदिन लगभग 274 करोड़ रुपए की कमाई की है।</p>
<p>फोर्ब्स की सूची में इस बार कई नए नाम भी शामिल हुए हैं। एडटेक प्लेटफॉर्म फिजिक्सवाला के संस्थापक अलख पांडे और प्रतीक बूंब पहली बार अरबपतियों की सूची में जगह बनाने में सफल रहे। कंपनी के आईपीओ के बाद उनकी संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे वे इस विशेष क्लब में शामिल हो गए।</p>
<p>सूची के अनुसार ओपी जिंदल समूह की चेयरपर्सन सावित्री जिंदल भारत की सबसे अमीर महिला बनी हुई हैं और वे देश के अरबपतियों की सूची में तीसरे स्थान पर हैं। इस वर्ष की सूची में कुल 20 भारतीय महिला अरबपति भी शामिल हैं, जो देश में महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को दर्शाता है।</p>
<p>बैंकिंग सेक्टर से जुड़े उद्योगपति उदय कोटक ने भी इस साल टॉप-10 अरबपतियों की सूची में जगह बनाई है। कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक को हाल ही में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। उनकी एंट्री के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े उद्योगपति कुशल पाल सिंह की रैंकिंग खिसककर 12वें स्थान पर पहुंच गई है।</p>
<p>फिनटेक सेक्टर से जुड़ी एक और बड़ी खबर यह रही कि पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा तीन साल बाद फिर से अरबपतियों की सूची में लौट आए हैं। पिछले वर्ष कंपनी के शेयरों में करीब 60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, हालांकि अभी भी यह अपने आईपीओ मूल्य से नीचे कारोबार कर रहे हैं।</p>
<p>फोर्ब्स की यह सूची वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की संपत्ति, शेयरहोल्डिंग, स्टॉक मार्केट डेटा और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर तैयार की जाती है। भारत में फोर्ब्स इंडिया ने पहली बार 2009 में रिच लिस्ट प्रकाशित की थी। तब से हर साल यह सूची देश के सबसे अमीर व्यक्तियों और उनकी संपत्ति में होने वाले बदलावों का आकलन प्रस्तुत करती है।</p>
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                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/forbes-2026-india-adds-24-new-billionaires-in-one-year/article-48215</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 09:42:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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