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                <title>Indian Democracy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Indian Democracy RSS Feed</description>
                
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                <title>30 दिन जेल में रहने पर PM-CM को छोड़ना पड़ सकता पद</title>
                                    <description><![CDATA[130वें संविधान संशोधन बिल पर JPC की रिपोर्ट अंतिम चरण में, प्रावधान हटाने के पक्ष में नहीं समिति; मानसून सत्र में फिर पेश हो सकता है विधेयक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-cm-may-have-to-leave-post-if-he-stays-in/article-57579"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/constitutional-amendment-bill.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा एक अहम मुद्दा इन दिनों चर्चा में है। 130वें संविधान संशोधन बिल को लेकर संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है। प्रस्तावित प्रावधान के तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी केंद्रीय एवं राज्य मंत्री को किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रखा जाता है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर विचार-विमर्श जारी है और इसे आगामी मानसून सत्र में दोबारा पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। समिति इस बात पर सहमति के करीब है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने के लिए कुछ स्पष्ट नियम होने चाहिए। हालांकि इस विषय पर विभिन्न विचार सामने आ रहे हैं और सभी पक्षों की राय को रिपोर्ट में शामिल किया जा रहा है। समिति की रिपोर्ट 17 जुलाई के आसपास अंतिम रूप ले सकती है, जिसके बाद इसे संसद में प्रस्तुत किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे मामले का उद्देश्य संवैधानिक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना बताया जा रहा है। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर आरोपों में लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उससे प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता और जनता के विश्वास पर असर पड़ सकता है। ऐसे में नियमों को स्पष्ट करना आवश्यक हो जाता है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे। गौरतलब है कि पिछले मानसून सत्र में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा इस विषय से जुड़े तीन विधेयक संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किए गए थे। उस समय इन विधेयकों को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए JPC को भेजने का निर्णय लिया गया था। समिति ने इसके बाद विभिन्न विशेषज्ञों, कानूनी जानकारों और संबंधित पक्षों से चर्चा की और अब रिपोर्ट अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सूत्र बताते हैं कि समिति इस बात के पक्ष में है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए उनके लिए कुछ अतिरिक्त नैतिक और कानूनी मानदंड तय किए जा सकते हैं। हालांकि यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि किसी भी प्रस्ताव से न्यायिक प्रक्रिया या व्यक्तिगत अधिकारों पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा जारी है। विभिन्न दलों के नेताओं ने अलग-अलग दृष्टिकोण रखे हैं। कुछ का मानना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को उच्च नैतिक मानदंडों पर खरा उतरना चाहिए, जबकि कुछ का कहना है कि केवल गिरफ्तारी के आधार पर किसी को पद से हटाना न्यायसंगत नहीं होगा जब तक अदालत में दोष सिद्ध न हो जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह प्रस्ताव भारतीय लोकतंत्र और संविधान के संतुलन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। यदि यह नियम लागू होता है तो भविष्य में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक स्पष्ट ढांचा तैयार हो सकता है। हालांकि यह भी जरूरी होगा कि इसका दुरुपयोग न हो और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। इस बिल का उद्देश्य किसी व्यक्ति या दल विशेष को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और नैतिकता को मजबूत करना है। इसी कारण सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सभी की नजरें 17 जुलाई को आने वाली जेपीसी रिपोर्ट और आगामी मानसून सत्र पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित संशोधन किस रूप में संसद में आगे बढ़ाया जाएगा और इस पर अंतिम निर्णय क्या होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:36:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>NCERT की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ इमरजेंसी अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[NEP 2020 के तहत पाठ्यक्रम में बदलाव, लोकतंत्र की चुनौतियों, मीडिया की भूमिका और नागरिक भागीदारी पर भी दिया गया विशेष जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/emergency-chapter-included-for-the-first-time-in-ncerts-class/article-56870"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ncert.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 के आपातकाल यानी इमरजेंसी से जुड़ा अलग सेक्शन शामिल किया है। नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इस दौर को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। शिक्षा क्षेत्र में इस बदलाव को नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत किए जा रहे व्यापक पाठ्यक्रम सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही में देश में इमरजेंसी लागू होने के 50 वर्ष पूरे होने के बीच यह बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है। NCERT के अधिकारियों के अनुसार, कक्षा 9 के विद्यार्थियों को अब भारतीय लोकतंत्र के विकास, उसकी चुनौतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को अधिक व्यापक तरीके से समझाया जाएगा। नई किताब में इमरजेंसी को केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं के महत्व को समझने के संदर्भ में भी प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर लोगों के बीच असंतोष बढ़ रहा था। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुस्तक के अनुसार जून 1975 में देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई थी। इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर प्रभाव पड़ा, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और विभिन्न राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। किताब में यह भी उल्लेख किया गया है कि उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर व्यापक बहस हुई। छात्रों को इस दौर के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों से परिचित कराने के लिए घटनाओं को सरल भाषा में समझाया गया है। नई पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को भी विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को संगठित कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जन आंदोलन का नेतृत्व किया। बिहार और गुजरात में हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए पुस्तक यह समझाने का प्रयास करती है कि लोकतंत्र में जनभागीदारी और शांतिपूर्ण विरोध की क्या भूमिका होती है। छात्रों को यह भी बताया गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की राय और सहभागिता महत्वपूर्ण स्थान रखती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुस्तक में 1977 के आम चुनावों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। इसमें बताया गया है कि इमरजेंसी समाप्त होने के बाद चुनाव कराए गए और मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग करते हुए सरकार के पक्ष और विपक्ष में फैसला सुनाया। पुस्तक इस प्रक्रिया को लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता का उदाहरण बताती है। साथ ही यह भी समझाया गया है कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का अधिकार अंततः जनता के हाथ में होता है। इमरजेंसी के अलावा नई किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद आधुनिक चुनौतियों को भी शामिल किया गया है। इनमें फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, सामाजिक असमानता, क्षेत्रवाद, गरीबी, लैंगिक भेदभाव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्याओं पर चर्चा की गई है। NCERT का मानना है कि छात्रों को केवल ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वर्तमान समय की चुनौतियों और नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में भी जागरूक करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से पुस्तक में कई नए विषय जोड़े गए हैं। पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का विशेष सेक्शन भी पुस्तक का हिस्सा बनाया गया है। इस खंड का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से मजबूत होता है। इसमें मतदान, सामाजिक जिम्मेदारी, सार्वजनिक संवाद और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अध्याय छात्रों में लोकतांत्रिक चेतना विकसित करने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई पुस्तक में मीडिया की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसमें मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए उसकी जिम्मेदारियों और महत्व को समझाया गया है। पुस्तक के अनुसार मीडिया न केवल सूचना पहुंचाने का माध्यम है, बल्कि यह जनता की आवाज को सामने लाने और शासन व्यवस्था को जवाबदेह बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है। छात्रों को यह भी बताया गया है कि सूचना के स्रोतों का सही मूल्यांकन करना और फेक न्यूज की पहचान करना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। भारतीय लोकतंत्र के विशाल स्वरूप को समझाने के लिए पुस्तक में चुनावी आंकड़ों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ी जानकारी भी दी गई है। इसमें 2024 के आम चुनावों के दौरान देश में 96 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं का उल्लेख किया गया है। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों और चुनावी प्रक्रिया की व्यापकता को भी समझाया गया है। स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पंचायतों और स्थानीय निकायों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। गुजरात और त्रिपुरा की पंचायतों के उदाहरणों के जरिए यह बताया गया है कि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र कैसे काम करता है और उसमें महिलाओं की भागीदारी किस तरह बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 12:16:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल में दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन शुरू, सीएम का लोकतंत्र पर बड़ा बयान, जानें क्या कहा</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 63 युवा विधायकों ने हिस्सा लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/two-day-youth-mla-conference-begins-in-bhopal-cms-big-statement/article-49567"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/youth-legislators-conference-bhopal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भोपाल में दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन की शुरुआत हो चुकी है, जहां देश के तीन प्रमुख राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से आए 63 युवा विधायक हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत बनाना तथा युवाओं की भूमिका को नीति निर्माण और शासन व्यवस्था में अधिक प्रभावी बनाना है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सम्मेलन की शुरुआत और प्रमुख विषय</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर में आयोजित इस सम्मेलन के पहले दिन लोकतंत्र को मजबूत करने और नागरिक भागीदारी को बढ़ाने में युवा विधायकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न सत्रों के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों, शासन प्रणाली और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सीएम मोहन यादव का महत्वपूर्ण संबोधन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने भारतीय लोकतंत्र को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा पश्चिमी देशों से प्रेरित है, जबकि वास्तविकता यह है कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें हमारी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक परंपराओं में गहराई से जुड़ी हुई हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और नागरिक जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ व्यापक विचार है। उनके अनुसार, जब हम लोकतंत्र को भारत और मध्य प्रदेश के संदर्भ में देखते हैं तो यह केवल राजनीतिक ढांचे तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह समाज की भागीदारी और जागरूकता का प्रतीक बन जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">युवा विधायकों की भूमिका पर चर्चा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सम्मेलन के पहले दिन विशेष रूप से इस बात पर मंथन हुआ कि युवा विधायक लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी कैसे बना सकते हैं। चर्चा में यह भी सामने आया कि आने वाले समय में नीतिगत निर्णयों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि शासन व्यवस्था अधिक उत्तरदायी और जनहितकारी बन सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">तीन राज्यों के युवा प्रतिनिधियों की भागीदारी</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस सम्मेलन में 45 वर्ष से कम आयु के विधायकों को आमंत्रित किया गया है। इनमें मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान और छत्तीसगढ़ के युवा जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। सभी प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा कर रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दे रहे हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/two-day-youth-mla-conference-begins-in-bhopal-cms-big-statement/article-49567</link>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:34:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान: बंगाल में दो चरणों में मतदान, नतीजे 4 मई को</title>
                                    <description><![CDATA[असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग, तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान; कुल 17.4 करोड़ मतदाता 824 सीटों पर करेंगे फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/assembly-elections-announced-in-five-states-voting-results-in-two/article-48217"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/chunab.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के अनुसार इन पांचों क्षेत्रों में कुल 824 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा और लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान की प्रक्रिया अप्रैल में पूरी होगी, जबकि मतगणना 4 मई को कराई जाएगी।</p>
<p>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। राज्य में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा। असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के साथ ही सभी राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है।</p>
<p>चुनाव आयोग के मुताबिक इन चुनावों में सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इस बार सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था होगी, जिससे मतदान प्रक्रिया पर नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा आयोग ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक हिंसा या चुनावी गड़बड़ी को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p>इन पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून 2026 में समाप्त होने वाला है। ऐसे में चुनाव आयोग ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत समय रहते चुनाव कार्यक्रम घोषित किया है। पिछली बार 2021 में पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराया गया था, जबकि अन्य राज्यों में एक या तीन चरणों में मतदान हुआ था।</p>
<p>चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार तमिलनाडु में सबसे अधिक करीब 74 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं। पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख, केरल में आठ लाख, असम में करीब दो लाख और पुडुचेरी में लगभग 77 हजार नाम हटाए गए हैं। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए की गई।</p>
<p>राजनीतिक दृष्टि से भी ये चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश करेंगी, जहां भाजपा उनके लिए मुख्य चुनौती मानी जा रही है। वहीं तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच मुकाबला केंद्र में रहने की संभावना है। केरल में वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के बीच पारंपरिक टक्कर देखने को मिल सकती है, जबकि असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर मैदान में है।</p>
<p>चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही पांचों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आने वाले हफ्तों में विभिन्न दल अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेंगे और चुनाव प्रचार पूरी रफ्तार पकड़ने की संभावना है।</p>
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 10:25:28 +0530</pubDate>
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