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                <title>Chhattisgarh Politics - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Chhattisgarh Politics RSS Feed</description>
                
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                <title>13 जुलाई से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र, 1033 सवालों के साथ सरकार को घेरेगा विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय सत्र में कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट और मानसून की तैयारियों जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will-start-from-july-13/article-58083"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार अब तक विधायकों की ओर से 1033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रश्न विपक्षी कांग्रेस की ओर से हैं। कांग्रेस ने इस बार कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़कों की स्थिति और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और अपनी योजनाओं तथा उपलब्धियों को सदन के सामने रखने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान सदन में कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की स्थिति देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधानसभा का यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब प्रदेश में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय मुद्दे चर्चा में हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में प्रशासन समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में सफल नहीं रहा, इसलिए इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठने वाले हैं। खरीफ सीजन के बीच खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियां और कृषि विभाग की योजनाओं को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि कई क्षेत्रों से किसानों को समय पर उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं सरकार का दावा है कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सदन में इन दावों और आरोपों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। कृषि से जुड़े सवालों की संख्या भी इस बार अधिक बताई जा रही है, जिससे यह मुद्दा सत्र के दौरान प्रमुख बना रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के नकटी गांव का भूमि विवाद भी इस बार विधानसभा में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनने की संभावना है। अतिक्रमण हटाने, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार हो रही है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए कई सवाल उठाने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से पूरे मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी की गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी सदन में काफी देर तक बहस हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, पेयजल संकट और खराब सड़कें भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल हैं। कई जिलों से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेयजल की समस्या की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके अलावा बारिश के दौरान सड़कों की खराब स्थिति, जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले जिन तैयारियों का दावा किया गया था, उनकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी है। हालिया बारिश के दौरान राहत और बचाव कार्यों की स्थिति भी चर्चा का विषय बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों पर भी प्रश्न लगाए गए हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन, बजट खर्च और विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार प्रश्नों की संख्या को देखते हुए इस बार प्रश्नकाल काफी व्यस्त रहने की संभावना है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य कार्यवाही के दौरान भी कई महत्वपूर्ण विषय सदन में उठ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जा सके। मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर भी विभागवार समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में विकास कार्य लगातार जारी हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा। सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी सदन में प्रमुखता से रखने की रणनीति बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जनता के हक के लिए जेल भी जाना पड़े तो पीछे मत हटना: संजय सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर कार्यकर्ता सम्मेलन में आप सांसद का केंद्र और राज्य सरकार पर हमला, कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत करने और जनता के मुद्दों पर संघर्ष का आह्वान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/even-if-you-have-to-go-to-jail-for-public/article-55290"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sanjay-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राजधानी रायपुर में आयोजित आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में रविवार को पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कार्यकर्ताओं को संघर्ष और संगठन का संदेश दिया। शहीद स्मारक भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राजनीति का असली उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को उठाना और उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना होना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि जनता के हितों की लड़ाई लड़ते हुए जेल भी जाना पड़े तो उससे घबराना नहीं चाहिए। उनके इस बयान पर सम्मेलन में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जोरदार समर्थन जताया और पूरे सभागार में नारेबाजी का माहौल बन गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन में संजय सिंह ने केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार दोनों पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। उनका आरोप था कि आम लोग महंगाई, बेरोजगारी और स्वास्थ्य सेवाओं की समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि सरकारें अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच रहा है। इसके बजाय संसाधनों का उपयोग कुछ चुनिंदा लोगों के हित में किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संजय सिंह ने अपने संबोधन के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वर्षों से प्रदेश की राजनीति इन दोनों दलों के बीच घूमती रही है, लेकिन जनता की मूल समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। किसानों की स्थिति को लेकर उन्होंने चिंता जताई और कहा कि कृषि आधारित राज्य होने के बावजूद किसान आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं और बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवक नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जिससे गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। उनका कहना था कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास का आधार होती है और यदि स्कूलों की संख्या घटेगी तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति इससे अलग दिखाई देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने भाषण में उन्होंने दिल्ली सरकार के कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया और स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं। उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों की चर्चा देशभर में होती है और यही मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों तक पार्टी की नीतियों और योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन में संगठन विस्तार को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। संजय सिंह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि आने वाले समय में पार्टी को गांव-गांव और बूथ स्तर तक मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसका संगठन होता है और मजबूत संगठन के बिना जनता तक पहुंचना संभव नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से लगातार जनसंपर्क करने, लोगों की समस्याएं सुनने और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक विकल्पों से निराश होती जा रही है और एक नए विकल्प की तलाश कर रही है। उनके अनुसार आम आदमी पार्टी इस भूमिका को निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में पार्टी संगठन और जनाधार दोनों को मजबूत करने पर ध्यान देगी। उनका मानना है कि यदि कार्यकर्ता ईमानदारी से लोगों के बीच काम करेंगे तो पार्टी को प्रदेश में बेहतर राजनीतिक अवसर मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद संजय सिंह माना-तूता क्षेत्र स्थित उस धरना स्थल पर भी पहुंचे, जहां लंबे समय से डीएड अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वहां उन्होंने अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। अभ्यर्थियों ने उन्हें अपनी मांगों और लंबे समय से चल रहे आंदोलन की जानकारी दी। संजय सिंह ने कहा कि कठिन मौसम और परिस्थितियों के बावजूद आंदोलन कर रहे युवाओं की बात सरकार को गंभीरता से सुननी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आंदोलनरत अभ्यर्थियों को सुझाव दिया कि वे अपनी ओर से एक प्रतिनिधिमंडल तैयार करें और सरकार के साथ बातचीत का प्रयास करें। साथ ही उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि आवश्यकता पड़ने पर वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास करेंगे। उनके इस आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों में कुछ उम्मीद दिखाई दी। कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। प्रदेश प्रभारी मुकेश अहलावत, सह-प्रभारी सौरभ झा, समर कुमार, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल, अभिषेक मिश्रा, देवलाल नरेटी, प्रदेश महासचिव वदूद आलम और प्रमुख प्रवक्ता सूरज उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:32:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिल्हा के सुशासन तिहार में भिड़े नेता, मंच पर शुरू हुआ विवाद बना राजनीतिक मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[कृषक संगोष्ठी के दौरान बैनर में नाम और फोटो को लेकर शुरू हुई बहस ने तूल पकड़ा, कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला और विधायक धरमलाल कौशिक के समर्थक भी आमने-सामने आए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/leaders-clash-in-bilhas-good-governance-tihar-controversy-started-on/article-54555"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bilha-sushasan-tihar.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर जिले के बिल्हा क्षेत्र में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया जब मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला और बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों की समस्याओं को सुनना और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की समीक्षा करना था, लेकिन कुछ ही देर में माहौल पूरी तरह बदल गया। देखते ही देखते दोनों नेताओं के बीच शुरू हुई नोकझोंक ने राजनीतिक रंग ले लिया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान किसानों के मुद्दों से हटकर विवाद पर केंद्रित हो गया।</p>
<p>जानकारी के अनुसार यह कार्यक्रम बिल्हा क्षेत्र के गोड़ी गांव में पंचायत स्तर पर आयोजित किया गया था। बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण यहां पहुंचे थे। शिविर में सड़क, बिजली, पानी, खाद और सिंचाई जैसी समस्याओं पर चर्चा हो रही थी। किसान भी खुलकर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान मंच पर लगाए गए बैनर में नाम और फोटो को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आया, जो कुछ ही समय में बहस में बदल गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पहले इसे सामान्य राजनीतिक असहमति माना, लेकिन बाद में स्थिति लगातार गर्म होती चली गई।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों नेताओं के समर्थक भी अपनी-अपनी बात को लेकर सक्रिय हो गए। माहौल ऐसा बन गया कि कुछ समय के लिए कार्यक्रम की व्यवस्था प्रभावित होती दिखाई दी। हालांकि वहां मौजूद अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। कार्यक्रम में शामिल कई किसानों का कहना था कि वे अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन राजनीतिक विवाद ने पूरे आयोजन का केंद्र बदल दिया। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन नेताओं के बीच विवाद के कारण वह मुद्दा पीछे छूट गया।</p>
<p>घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मंच के पास काफी हलचल दिखाई दे रही है और दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच बहस का माहौल नजर आता है। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का परिणाम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस तरह की स्थिति से बचा जाना चाहिए।</p>
<p>पंचायत और ग्रामीण स्तर के कार्यक्रम अक्सर स्थानीय राजनीति का केंद्र बन जाते हैं। ऐसे आयोजनों में विभिन्न दलों के नेताओं की मौजूदगी के कारण कई बार श्रेय लेने या राजनीतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर विवाद की स्थिति बन जाती है। बिल्हा की घटना को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि अब तक किसी पक्ष की ओर से इस मामले को लेकर कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है, लेकिन वायरल वीडियो ने मामले को व्यापक चर्चा में ला दिया है।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम के बीच किसानों के मुद्दे भी चर्चा में बने हुए हैं। कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने सड़क निर्माण, नाली व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, खाद की उपलब्धता और पेयजल जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था। ग्रामीणों का कहना है कि इन मुद्दों का समाधान उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ऐसे में वे चाहते हैं कि जनप्रतिनिधि राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर स्थानीय समस्याओं के समाधान पर ध्यान दें। यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस घटना पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भिलाई शराब दुकान विवाद: युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प</title>
                                    <description><![CDATA[भिलाई शराब दुकान खोलने के विरोध में युवा कांग्रेस का हंगामा, बाजार में सुरक्षा को लेकर उठे सवाल भीड़भाड़ वाले बाजार में शराब दुकान खुलने से भिलाई में माहौल गरमाया हुआ है। प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई ने इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक रूप दे दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/bhilai-liquor-shop-dispute-youth-congress-protest-clash-with-police/article-52102"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(36).jpg" alt=""></a><br /><p>भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) टाउनशिप के सेक्टर-6 ए मार्केट में नई शराब दुकान खोले जाने को लेकर विवाद तेज हो गया है। शुक्रवार शाम युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दुकान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और तालाबंदी की कोशिश की, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। यह मामला अब एक स्थानीय विरोध से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का मुद्दा बनता दिख रहा है।</p>
<p>प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना स्थानीय लोगों की सहमति के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में शराब दुकान खोलने का निर्णय लिया है। शाम करीब 7 बजे बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता दुकान के बाहर जमा हुए और नारेबाजी शुरू की। पुलिस ने उन्हें दुकान तक पहुंचने से रोका, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पर ही ताला जड़ दिया और पुतला दहन का प्रयास किया।</p>
<h5><strong>बाजार में विरोध तेज</strong></h5>
<p>स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सेक्टर-6 ए मार्केट एक पारिवारिक और व्यावसायिक क्षेत्र है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और परिवार आते हैं। ऐसे में यहां शराब दुकान खुलना सुरक्षा और सामाजिक माहौल के लिए खतरा बन सकता है।बाजार में कपड़े, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों की दुकानें हैं। ऐसे इलाके में शराब बिक्री शुरू होने से असामाजिक गतिविधियों के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कई व्यापारियों ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन भी किया।</p>
<p>युवा कांग्रेस नेता के. प्रशांत कुमार ने BSP प्रबंधन और भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आबादी वाले क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से शराब दुकानें खोली जा रही हैं।</p>
<p>स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन अतिरिक्त बल तैनात किया और प्रदर्शन को नियंत्रित किया। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।</p>
<p>इससे पहले खुर्सीपार स्टेडियम के पास शराब दुकान खोलने को लेकर भी विवाद हुआ था। अब सेक्टर-6 ए का मामला सामने आने से यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। </p>
<p>युवा कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर शराब दुकान को यहां से हटाया नहीं गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन ने बड़े जनआंदोलन की भी बात कही है। वहीं प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह जनभावनाओं और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 16:12:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला आरक्षण बिल को लेकर रायपुर BJP की जनआक्रोश रैली, CM साय समेत कई बड़े नेता हुए शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में BJP की जनआक्रोश रैली के चलते ट्रैफिक प्रभावित रहा। महिला आरक्षण बिल के विरोध में प्रदर्शन, कई मार्गों पर डायवर्जन लागू।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/many-big-leaders-including-cm-sai-participated-in-raipur-bjps/article-51685"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/raipur-bjp-mahila-aarakshan-bill-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास नहीं होने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जनआक्रोश रैली निकाली। इस रैली की शुरुआत बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से हुई और सुभाष स्टेडियम तक मार्च किया गया, जहां सभा आयोजित की गई। रैली में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, डिप्टी सीएम अरुण साव समेत कई वरिष्ठ नेता और महिला मोर्चा की कार्यकर्ता शामिल रहीं। दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की थी। रैली के दौरान ‘नारी शक्ति जाग गई</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">’</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जैसे नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने विरोध दर्ज कराया। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रैली में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता और पार्टी समर्थक शामिल हुए। हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र में कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की। आयोजन के मद्देनजर पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर डायवर्जन लागू किया, जिससे शहर के व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रैली के चलते जीई रोड, शास्त्री चौक और आसपास के क्षेत्रों में यातायात धीमा रहा। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, आपात सेवाओं को छोड़कर अन्य वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया गया। अधिकारियों ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">महिला आरक्षण बिल को संसद में पारित नहीं किए जाने के बाद BJP ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से 27 अप्रैल तक चरणबद्ध कार्यक्रम तय किए गए हैं। इसमें महिला पदयात्रा, सम्मेलन और पुतला दहन जैसे आयोजन शामिल हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आधिकारिक बयान</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, रैली को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों से एडवाइजरी जारी की थी। पार्टी नेताओं ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया और विपक्ष पर निशाना साधा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:23:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज गूंजेंगे राशन, आंगनबाड़ी और अमानक चावल के मुद्दे</title>
                                    <description><![CDATA[प्रश्नकाल में KYC के कारण रुकी खाद्यान्न आपूर्ति, सहकारी समितियों के खर्च और स्कूल ड्रॉपआउट बच्चियों पर सरकार से जवाब मांगेगा विपक्ष]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/issues-of-ration-anganwadi-and-non-standard-rice-will-echo-in/article-48230"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mp---2026-03-16t115010.037.jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ विधानसभा के सत्र में सोमवार को कई जनहित से जुड़े मुद्दे उठने की संभावना है। प्रश्नकाल के दौरान राशन वितरण, अमानक चावल, आंगनबाड़ी केंद्रों की सुविधाओं और केवाईसी प्रक्रिया के कारण खाद्यान्न आबंटन में आ रही दिक्कतों जैसे विषयों पर चर्चा होगी। विभिन्न दलों के विधायक अलग-अलग विभागों से जुड़े सवाल उठाकर सरकार से जवाब मांगेंगे।</p>
<p>विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सेवा सहकारी समितियों और प्राथमिक कृषि साख समितियों के खर्च से जुड़े मुद्दे भी उठेंगे। विधायक रामकुमार यादव इन समितियों के प्रासंगिक व्यय पर लगी रोक को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगेंगे। माना जा रहा है कि यह मुद्दा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि से जुड़े संस्थानों की वित्तीय स्थिति पर चर्चा को जन्म दे सकता है।</p>
<p>सदन में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी प्रमुख मुद्दा रहेगी। विधायक लखेश्वर बघेल प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल उठाएंगे। इनमें भवन की स्थिति, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, बच्चों के पोषण और अन्य संसाधनों की उपलब्धता से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है। यह मुद्दा महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली से सीधे तौर पर जुड़ा है।</p>
<p>धान खरीदी व्यवस्था से संबंधित विषय भी सदन में चर्चा का हिस्सा बनेंगे। विधायक ब्यास कश्यप अमानक चावल की आपूर्ति और गुणवत्ता से जुड़े मामले को उठाएंगे, जबकि विधायक पुरंदर मिश्रा धान खरीदी के दौरान इस्तेमाल होने वाले बारदाना (बोरी) की खरीद और उसकी उपलब्धता को लेकर सवाल करेंगे। यह मामला किसानों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>इसके अलावा स्कूल छोड़ चुकी बच्चियों का मुद्दा भी सदन में उठेगा। विधायक शेषराज हरवंश राज्य में स्कूल ड्रॉपआउट बच्चियों की संख्या, उनके पुनर्वास और उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं पर जानकारी मांगेंगी। शिक्षा विभाग से इस विषय पर विस्तृत जवाब की अपेक्षा की जा रही है।</p>
<p>सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े एक अहम मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है। विधायक दिलीप लहरिया राशन दुकानों में केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण खाद्यान्न आबंटन में हो रही रुकावट का मामला उठाएंगे। कई क्षेत्रों में लाभार्थियों को राशन मिलने में हो रही परेशानी को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जाएगी।</p>
<p>विधानसभा की कार्यवाही के दौरान राज्यपाल द्वारा लौटाए गए एक विधेयक की भी औपचारिक सूचना दी जाएगी। इसके साथ ही कार्यसूची के अनुसार मंत्री खुशवंत साहेब, केदार कश्यप और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से जुड़े विभागों के बजट अनुदान पर होने वाली चर्चा की जानकारी भी सदन में दी जाएगी।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनहित से जुड़े इन मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। वहीं सरकार की ओर से संबंधित विभागों के मंत्री सदन में विस्तृत जवाब देने की तैयारी में हैं।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 11:52:08 +0530</pubDate>
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