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                <title>Chaitra Navratri 2026 - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Chaitra Navratri 2026 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चैत्र नवरात्र : मां कालरात्रि पूजा से दूर होंगे भय, जानें सही विधि और मंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[नवरात्र के सातवें दिन देवी के उग्र स्वरूप की आराधना से नकारात्मक ऊर्जा का नाश, भक्तों में विशेष श्रद्धा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/chaitra-navratri-maa-kalratri-puja-will-remove-fear-know-the/article-48972"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/dharm---2026-03-25t095148.033.jpg" alt=""></a><br /><p>चैत्र नवरात्र का सातवां दिन मां कालरात्रि की पूजा को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी के उग्र स्वरूप की आराधना करने से सभी प्रकार के भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती हैं। देशभर के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखी जा रही है और विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है।</p>
<p>नवरात्र के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें सातवां स्वरूप मां कालरात्रि का है। इन्हें अंधकार का नाश करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि इनकी उपासना से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन में साहस व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।</p>
<p>मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और उग्र बताया गया है। वे श्याम वर्ण की हैं और गधे पर सवार रहती हैं। उनके बिखरे बाल, गले में विद्युत जैसी चमकती माला और तीन नेत्र उन्हें विशेष बनाते हैं। देवी के चार हाथ हैं, जिनमें एक ओर अभय और वरद मुद्रा है, वहीं दूसरी ओर शस्त्र धारण किए हुए हैं।</p>
<p>पूजा विधि के अनुसार, भक्त सुबह स्नान कर स्वच्छ और गहरे रंग के वस्त्र धारण करते हैं। पूजा स्थल को शुद्ध कर माता की प्रतिमा या चित्र को स्थापित किया जाता है। इसके बाद गुड़हल के फूल, रोली और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। भोग में गुड़ या उससे बने मालपुए चढ़ाना शुभ माना जाता है। सरसों के तेल या घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप और अंत में आरती की जाती है।</p>
<p>मंत्रों में “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” और “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः” का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा स्तुति और प्रार्थना मंत्रों का उच्चारण भी पूजा को पूर्णता प्रदान करता है।</p>
<p>धार्मिक दृष्टि से यह दिन साधना और आत्मबल को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान समय में कई लोग घर पर ही पूजा कर रहे हैं, वहीं डिजिटल माध्यमों से भी पूजा-अर्चना का प्रसार बढ़ा है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की गई पूजा मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। हालांकि, ये सभी उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।</p>
<p>-----------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 09:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chaitra Navratri 2026: व्रत में बनाएं क्रिस्पी समा चावल के अप्पे, आसान और हेल्दी रेसिपी</title>
                                    <description><![CDATA[हल्का, पौष्टिक और स्वादिष्ट स्नैक जो रखे दिनभर एनर्जी से भरपूर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/make-crispy-sama-rice-appe-easy-and-healthy-recipe-during/article-48690"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/lifestyle-(52).jpg" alt=""></a><br /><p>चैत्र नवरात्रि 2026 के दौरान व्रत रखने वाले लोग ऐसे भोजन की तलाश में रहते हैं जो हल्का होने के साथ-साथ शरीर को पर्याप्त ऊर्जा भी दे। ऐसे में समा चावल के अप्पे एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रहे हैं। यह डिश न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पोषण से भी भरपूर है और आसानी से घर पर तैयार की जा सकती है।</p>
<h5><span><strong>क्या है खास?</strong></span></h5>
<p>सामा चावल (वरई/मोरधन) व्रत के दौरान सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले अनाजों में से एक है। यह जल्दी पचता है और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखता है। दही, मूंगफली और हल्के मसालों के साथ मिलकर यह एक संतुलित और हेल्दी स्नैक बन जाता है। अप्पे पैन में बनने के कारण इसमें तेल का उपयोग भी कम होता है।</p>
<h5><span><strong>सामग्री</strong></span></h5>
<p>1 कप समा चावल</p>
<p>½ कप दही</p>
<p>1 उबला हुआ आलू (मैश किया हुआ)</p>
<p>1–2 हरी मिर्च (बारीक कटी)</p>
<p>1 चम्मच कद्दूकस अदरक</p>
<p>2 बड़े चम्मच मूंगफली पाउडर</p>
<p>सेंधा नमक स्वादानुसार</p>
<p>½ छोटा चम्मच जीरा</p>
<p>हरा धनिया</p>
<p>घी या तेल</p>
<h5><span><strong>बनाने की विधि</strong></span></h5>
<p>सबसे पहले समा चावल को अच्छी तरह धोकर 2–3 घंटे के लिए भिगो दें। इसके बाद इसे पीसकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में दही मिलाएं और फिर आलू, हरी मिर्च, अदरक, मूंगफली पाउडर, सेंधा नमक, जीरा और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।</p>
<p>अब अप्पे पैन को गर्म करें और हर खांचे में थोड़ा घी या तेल डालें। तैयार बैटर डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। जब एक तरफ से सुनहरा हो जाए, तो पलटकर दूसरी तरफ भी कुरकुरा होने तक सेक लें।</p>
<p>अप्पे को ज्यादा क्रिस्पी बनाने के लिए इसमें थोड़ा सिंघाड़े का आटा मिला सकते हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए थोड़ा नींबू रस डालें और हेल्दी बनाने के लिए कम तेल का इस्तेमाल करें।</p>
<p>--------------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 15:00:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चैत्र नवरात्रि 2026 कल से शुरू: पालकी पर मां दुर्गा का आगमन, जानें घटस्थापना मुहूर्त और धार्मिक संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[19 मार्च से नव संवत्सर 2083 का आरंभ; पालकी पर आगमन को लेकर मिले मिश्रित संकेत, हाथी पर प्रस्थान को माना गया अत्यंत शुभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/chaitra-navratri-2026-starts-from-tomorrow-arrival-of-maa-durga/article-48362"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/navratri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देशभर में चैत्र नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 19 मार्च, गुरुवार से होगा। इसी दिन से हिंदू नववर्ष नव संवत्सर 2083 की शुरुआत भी मानी जा रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष नवरात्रि विशेष संयोगों के बीच प्रारंभ हो रही है, जिसमें ब्रह्म योग और मालव्य राजयोग जैसे शुभ योग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी पर होगा, जबकि प्रस्थान हाथी पर होगा, जिसे भविष्य के संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06:53 बजे से शुरू होकर 20 मार्च को सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी। चूंकि यह तिथि अगले दिन के सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार 19 मार्च को ही नवरात्रि और घटस्थापना करना उचित माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यताओं में मां दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व होता है। सप्ताह के दिन के आधार पर वाहन का निर्धारण होता है। इस वर्ष गुरुवार से नवरात्रि शुरू होने के कारण मां का आगमन पालकी पर माना गया है। शास्त्रों में इसे सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता और इसे प्राकृतिक आपदाओं, महामारी या आर्थिक अस्थिरता के संकेत से जोड़ा जाता है। हालांकि विदाई हाथी पर होने को अत्यंत शुभ माना गया है, जो अच्छी वर्षा, कृषि उन्नति और समृद्धि का संकेत देता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>घटस्थापना के शुभ मुहूर्त</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पंडितों के अनुसार 19 मार्च को घटस्थापना के लिए कई शुभ समय निर्धारित किए गए हैं:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>प्रातः शुभ बेला: 06:50 से 07:20 बजे</p>
</li>
<li>
<p>अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ): 12:20 से 01:20 बजे</p>
</li>
<li>
<p>लाभ-अमृत काल: 12:50 से 03:50 बजे</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इन मुहूर्तों में विधि-विधान से कलश स्थापना करने को विशेष फलदायी माना गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कन्या पूजन का महत्व</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। अलग-अलग आयु की कन्याओं के पूजन से सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है। एक वर्ष की कन्या का पूजन वर्जित माना गया है, जबकि 10 वर्ष से अधिक आयु की कन्याओं का पूजन भी शास्त्रों में नहीं बताया गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक ग्रंथों के अनुसार नवरात्रि के नौ दिन सृष्टि के सृजन से जुड़े माने जाते हैं। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक—की पूजा की जाती है। अखंड ज्योत और कलश स्थापना के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन के कष्टों से मुक्ति की कामना की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">----------------------</p>
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                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 09:18:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana: 19 मार्च से आरंभ, जानें शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[घटस्थापना के लिए सुबह और अभिजीत मुहूर्त विशेष, पूरे दिन रहेगा पंचक काल लेकिन पूजा-अर्चना शुभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/chaitra-navratri-2026-ghatasthapana-starts-from-19th-march-know-the/article-48252"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/dubai-airport-drone-attack-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>चैत्र नवरात्रि 2026 का पर्व 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस दिन घटस्थापना कर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा प्रारंभ होगी। घटस्थापना के दौरान कलश में देवी शक्ति का आवाहन किया जाता है, जो घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति लाने का प्रतीक है।</p>
<p>घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6:52 से 7:56 बजे तक और दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक है। पूजा के लिए प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से पहले शुरू होगी और अगले दिन सुबह 4:53 बजे समाप्त होगी। यह तिथि विक्रम संवत 2083 की शुरुआत के साथ नए साल के शुभ आरंभ का प्रतीक भी मानी जाती है।</p>
<p>वैदिक ज्योतिष और शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि की घटस्थापना से घर में देवी की शक्ति का आगमन होता है। मिट्टी के पात्र में जौ बोकर, जल से भरे कलश, आम के पत्ते, नारियल और लाल कपड़े का प्रयोग कर पूजा की जाती है। भक्त प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं और ध्यान व साधना के साथ मां दुर्गा का आवाहन करते हैं।</p>
<p>चैत्र नवरात्रि हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक मनाई जाती है। यह नौ दिनों तक शक्ति, भक्ति और साधना का प्रतीक है। घटस्थापना के दिन पूरे दिन पंचक काल रहेगा। हालांकि पंचक काल को शास्त्रों में अशुभ माना जाता है, देवी की पूजा और घटस्थापना इसके प्रभाव से मुक्त मानी जाती है।</p>
<p>धार्मिक विद्वानों का कहना है कि घटस्थापना का सही मुहूर्त और विधि के अनुसार अनुष्ठान करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। नवरात्रि का यह आरंभिक संस्कार पूरे नौ दिन की पूजा का आधार बनता है।</p>
<p>भक्त इस दिन सुबह के शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं। यदि सुबह का मुहूर्त छूट जाए तो अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा और कलश स्थापना संभव है। इस अनुष्ठान के दौरान जप, उपवास और साधना को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।</p>
<p>---------------------------------</p>
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<p> </p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 15:01:10 +0530</pubDate>
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